Sunday, July 5, 2026 12:57 pm

अंबिकापुर में राष्ट्रीय राजमार्ग पर हादसा, तेज रफ्तार स्कार्पियो पटली, एक्सीडेंट में 3 की मौत

अंबिकापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सूरजपुर से लगे चंद्रपुर ओवरब्रिज के पास शुक्रवार तड़के तेज रफ्तार स्कार्पियो पटल गई। जानकारी के मुताबिक, तेज रफ्तार में गाड़ी का पहिया निकलने से हादसा हुआ। वाहन में 2 महिलाओं और बच्चे सहित सात लोग सवार थे। इनमें दोनों महिलाओं सहित तीन लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। पिता और उसके दस वर्षीय पुत्र को घायल अवस्था में अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सभी अंबिकापुर से मनेन्द्रगढ़ शादी समारोह में शामिल होकर वापस लौट रहे थे। जानकारी के अनुसार, अंबिकापुर निवासी दिनेश चौधरी, 40 साल, निवासी दर्रीपारा अंबिकापुर के स्कॉर्पियो वाहन क्रमांक सीजी 15 ईई 3561 से मनेन्द्रगढ़ शादी के रिसेप्शन पार्टी में गए हुए थे।     वापस आते समय तड़के करीब साढ़े तीन बजे चंद्रपुर ओवर ब्रिज में स्कार्पियो का पीछे का चक्का निकल गया। इससे वाहन अनियंत्रित होकर पलट गया। वाहन को दिनेश चौधरी चला रहा था।     वाहन पलटने से आनंद चौधरी पिता संजय चौधरी, 28 वर्ष, झारसुगुड़ा, ओडिशा, रीता चौधरी पति दिनेश चौधरी, उम्र 46 वर्ष, दर्रीपारा अंबिकापुर और पुष्पा माझी पति संतोष मांझी, 40 वर्ष, एनटीपीसी कोरबा की मौत हो गई।     दुर्घटना में अजय नाथ चौधरी पिता विद्या नाथ, 38 वर्ष एवं अनिकेत चौधरी पिता अजय नाथ चौधरी, 10 वर्ष झारसुगुड़ा ओडिशा को चोट आई है। पिता पुत्र को जिला अस्पताल सूरजपुर से अंबिकापुर रेफर कर दिया गया है। इस बीच, प्रतापपुर से भी एक सड़क दुर्घटना की सूचना है। गुरुवार शाम बनारस मार्ग पर स्थित भेड़िया गांव के स्कूल के पास हुई दुर्घटना में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रतापपुर में कार्यरत एंबुलेंस चालक की मौत हो गई। जानकारी अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रतापपुर में एंबुलेंस चालक के पद पर कार्यरत चंद्रभास्कर पटेल 45 पिता सियाराम पटेल निवासी रेवटी भुरारीडांड़ गुरुवार सुबह लाइसेंस संबंधित कार्य कराने बाइक द्वारा आरटीओ कार्यालय अंबिकापुर गए थे। शाम को लगभग छह बजे के करीब बनारस मार्ग पर स्थित ग्राम भेड़िया के स्कूल के पास पंचायत सचिव अनिल गुप्ता ने उन्हें दुर्घटनाग्रस्त हालत में सड़क पर पड़ा देखा। उन्हें उपचार के लिए अपनी कार द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रतापपुर लेकर पहुंचे जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। इधर मामले को लेकर रेवटी चौकी प्रभारी कृष्णा सिंह ने बताया कि आसपास के लोगों से की गई पूछताछ से पता चला है कि चंद्रभास्कर पटेल की दुर्घटना किसी वाहन की टक्कर से नहीं बल्कि जब वे वापस अपने घर भुरारीडांड़ लौट रहे थे तब भेड़िया स्कूल के पास अचानक अनियंत्रित होकर बाइक से गिरकर दुर्घटनाग्रस्त हो गए थे जिसके कारण उनकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि चंद्रभास्कर स्वास्थ्य केंद्र प्रतापपुर की एंबुलेंस के इकलौते चालक थे। वे अपने पीछे दो पुत्री व पत्नी को रोता बिलखता छोड़ गए हैं। इस घटना से क्षेत्र में शोक का माहौल निर्मित हो गया है। recent visitors 64

आईएमडीबी की रैंकिंग में तृप्ति डिमरी पहले स्थान पर, दीपिका पादुकोण और आलिया भट्ट को पछाड़ा

मुंबई,  फिल्मों, टीवी और मशहूर हस्तियों के बारे में जानकारी का दुनिया के सबसे प्रसिद्ध और विश्वसनीय स्रोत आईएमडीबी ने 2024 के सबसे प्रसिद्ध भारतीय अभिनेताओं की सूची घोषित कर दी है। टॉप 10 सेलिब्रिटीज की इस लिस्ट में फिल्म 'एनिमल' से सुर्खियों मंु आईं तृप्ति डिमरी पहले स्थान पर हैं। तृप्ति ने दीपिका पादुकोण और आलिया भट्ट को भी पछाड़ दिया है। आईएमडीबी रैंकिंग के लिए दुनिया भर से 25 मिलियन से अधिक दर्शकों को शामिल किया गया था। इसमें तृप्ति डिमरी 2024 में भारत की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में नंबर वन बन गई हैं। इस साल उन्होंने तीन फिल्मों बैड न्यूज, विक्की विद्या का वो वाला वीडियो और भूल भुलैया-3 में अभिनय किया और दुनिया भर में प्रशंसकों ने उनकी सराहना की। दीपिका पादुकोण दूसरे और आलिया भट्ट नौवें स्थान पर हैं। 2024 में आईएमडीबी के शीर्ष 10 में भारतीय अभिनेता और अभिनेत्रियां 1. तृप्ति डिमरी 2. दीपिका पादुकोण 3. ईशान खट्टर 4. शाहरुख खान 5. शोभिता धूलिपाला 6. शारवारी वाघ 7. ऐश्वर्या राय बच्चन 8. सामंथा 9. आलिया भट्ट 10. प्रभास आईएमडीबी इंडिया की प्रमुख यामिनी पटोदिया ने कहा कि 2024 के सबसे लोकप्रिय भारतीय अभिनेताओं की आईएमडीबी सूची भारतीय मनोरंजन जगत की विविधता को दर्शाती है, जिसमें स्थापित दिग्गज और उभरती प्रतिभाएं दोनों शामिल हैं। हमारी वार्षिक सूची वैश्विक दर्शकों की बदलती रुचियों को दर्शाती है और दिखाती है कि कैसे शाहरुख खान और ऐश्वर्या राय बच्चन जैसे दिग्गज आज भी तृप्ति डिमरी और शारवरी जैसे नए कलाकारों के साथ दर्शकों को आकर्षित कर रहे हैं। इस साल की सूची यह भी दिखाती है कि भारतीय फिल्मों और उनके कलाकारों की अंतरराष्ट्रीय पहचान कैसे बढ़ रही है। तृप्ति डिमरी ने अपने प्रशंसकों को धन्यवाद देते हुए कहा कि आईएमडीबी की 2024 की सबसे लोकप्रिय भारतीय अभिनेताओं की सूची में नंबर 1 स्थान पर आना मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है। यह मेरे प्रशंसकों के अविश्वसनीय समर्थन और उन सभी की कड़ी मेहनत की स्वीकृति है, जिनके साथ मैंने काम किया है। मैंने इस साल कई रोमांचक प्रोजेक्ट्स पर काम किया है और 2024 भूल भुलैया-3 के साथ खत्म हो रहा है और यह मेरे लिए एक यादगार साल रहा है। मैं इन प्रेरक परियोजनाओं का हिस्सा बनने और भविष्य में नई सामग्री पर काम करने के लिए उत्सुक हूं।   recent visitors 46

राज्यपाल श्री डेका से अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रीय महासभा के पदाधिकारियों ने भेंट की

रायपुर, राज्यपाल रमेन डेका से आज राजभवन में अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रीय महासभा छत्तीसगढ़ के पदाधिकारियों ने सौजन्य भेंट की। छत्तीसगढ मनुवा कुर्मी समाज के प्रदेश अध्यक्ष ने 128 वर्ष पुराने संगठन की गतिविधियों से राज्यपाल को अवगत कराया और आगामी माह महासमुंद में होने वाले महासभा के सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि श्री डेका को आमंत्रित किया।           इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष चंद्रभूषण वर्मा सहित  मनोज वर्मा, द्रोण चंद्रकर, सरिता वर्मा, निरंजना चंद्राकर उपस्थित थे। recent visitors 56

छत्तीसगढ़ की जड़ी-बूटिया और आयुर्वेद सरकारी मान्यता देने की प्रक्रिया, जल्द ही चिकित्सा क्षेत्र में आएगा बदलाव

रायपुर मेघनाद से युद्ध में जब लक्ष्मण मूर्छित हो गए थे, तो सुषेण वैद्य ने ही जड़ी-बूटी से उनकी जान बचाई थी। उन सुषेण वैद्य की धरती के वैद्यों की जड़ी-बूटियों और योग्यता को सरकारी मान्यता देने की प्रक्रिया जल्द ही चिकित्सा क्षेत्र में बदलाव की सारथी बनने जा रही हैं। गांव के लोगों को तो पहले ही अपने वैद्यों पर विश्वास है। उम्मीद की जा रही है कि प्रमाणन की प्रक्रिया के बाद गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज के लिए शहरियों का भी भरोसा बढ़ जाएगा। 400 से अधिक वैद्यों के सहयोग से लगभग साढ़े तीन हजार औषधीय पौधों का दस्तावेजीकरण किया जा चुका है। इनमें कई तो आयुर्वेद की पाठ्य पुस्तकों में भी दर्ज नहीं है। वनों से आच्छादित 21 जिलों में सर्वेक्षण की प्रक्रिया में आयुर्वेदिक महाविद्यालय रायपुर के विशेषज्ञों की टोली भी शामिल रही। वन विभाग के साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधि भी इस प्रक्रिया का हिस्सा बन रहे हैं। अब तक 100 वैद्यों को मिला प्रमाण-पत्र वनांचलों की जड़ी-बूटी से विभिन्न बीमारियों का इलाज कर रहे पारंपरिक वैद्यों (चिकित्सकों) की इलाज पद्धति को प्रमाणित कर उन्हें प्रमाण पत्र दिया जा रहा है। अब तक 100 वैद्यों को प्रमाण पत्र दिया जा चुका है। वे बिना रोकटोक के इलाज करने के लिए अधिकृत होंगे। राज्य लघु वनोपज संघ ने यूरोपीय आयोग परियोजना के आजीविका आधारित गतिविधियां हर्बल स्वास्थ्य देखभाल घटक के तहत सर्वे कराया है। 21 जिलों में हुए सर्वेक्षण में 418 पारंपरिक वैद्यों की ओर से उपयोग किए जा रहे औषधीय पौधों (जड़ी-बूटियों) का दस्तावेजीकरण किया गया। 86 आयुर्वेदिक दवाइयों की सिफारिश हुई इन जड़ी-बूटियों के औषधीय गुणों का प्रारंभिक वैज्ञानिक मूल्यांकन रायपुर के सरकारी आयुर्वेद कॉलेज की टीम में आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. रक्षपाल गुप्ता, डॉ. पी.के. जोशी, डॉ. आर.एन. त्रिपाठी, और डॉ. पी.के. बघेल ने किया। औषधीय गुणों का वैज्ञानिक मूल्यांकन होने के बाद केंद्र सरकार के आयुष विभाग की मदद से आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी दवाओं का विनियमन के तहत वैद्यों को भारतीय गुणवत्ता परिषद से प्रमाण पत्र दिया जा रहा है। अब तक इलाज के लिए 86 आयुर्वेदिक दवाइयों की सिफारिश की जा चुकी है। वैद्यराज हेमचंद मांझी से मिल चुके हैं पीएम मोदी बस्तर के नारायणपुर के वैद्यराज हेमचंद मांझी 60 साल से जड़ी-बूटियों से इलाज कर रहे हैं। उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। वे ग्रामीणों को पारंपरिक और सस्ती स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध करा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आठ अप्रैल 2024 को बस्तर दौरे पर थे, उस दौरान उन्होंने पद्मश्री वैधराज हेमचंद माझी का हौसला बढ़ाया था। राज्य जैव विविधता बोर्ड की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नीतू हरमुख ने कहा कि छत्तीसगढ़ हर्बल राज्य है। यहां संरक्षित जनजाति समुदाय में पारंपरिक औषधियों से इलाज करते हैं और कई असाध्य बीमारियों को वह ठीक करते हैं। मलेरिया के लिए कालमेघ, पीलिया के लिए भुई आंवला (आंवला प्रजाति का पौधा) जैसे औषधीय पौधों का इस्तेमाल करके रोगियों को राहत दे रहे हैं। recent visitors 108

नि-क्षय शिविर का मुख्यमंत्री डॉ. यादव वर्चुअली करेंगे अभियान का शुभारंभ

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि टीबी, जिसे कभी लाइलाज माना जाता था, अब सघन और समर्पित प्रयासों से समाप्ति के करीब है। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम को और प्रभावी बनाने के लिए 7 दिसंबर 2024 से 25 मार्च 2025 तक "100 दिवसीय निक्षय शिविर" आयोजन किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य टीबी उन्मूलन के प्रयासों को और अधिक गति देना और जन-जागरूकता को बढ़ावा देना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अभियान का वर्चुअल शुभारंभ करेंगे। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने स्वास्थ्य कर्मियों और आमजन से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जैसे हमने कोविड महामारी में एकजुट होकर हर व्यक्ति तक जाँच और उपचार सुनिश्चित किया, वैसे ही इन 100 दिनों में हमें टीबी की व्यापक स्तर पर स्क्रीनिंग, जाँच, उपचार और जन-जागरूकता को सुनिश्चित करना है। उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों से आह्वान किया कि पूर्ण समर्पण से अभियान को सफल बनाने के लिए अपना योगदान दें। उन्होंने आमजन से स्वास्थ्य कर्मियों को सहयोग प्रदान करने की अपील की है, जिससे समाज का सशक्त और स्वस्थ भविष्य सुनिश्चित किया जा सके। 100 दिवसीय नि-क्षय शिविर अंतर्गत गतिविधियाँ प्रदेश में क्षय रोग (टी.बी.) के उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 100 दिवसीय नि-क्षय शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह अभियान प्रदेश के 23 उच्च-प्राथमिकता वाले जिलों नरसिंहपुर, दतिया, सिंगरोली, डिन्डौरी, खण्डवा, कटनी, अनुपपूर, अलिराजपुर जबलपुर, नीमच, रतलाम, मंदसौर, छतरपुर, उज्जैन, सीधी, श्योपुर, बैतूल, छिन्दवाडा, विदिशा, दमोह, मंडला, सीहोर और सिवनी में 7 दिसंबर से प्रारंभ होगा। इस शिविर का उद्देश्य उच्च जोखिम वाले मरीजों की स्क्रीनिंग, जांच, और उचित उपचार प्रदान करना है। इस अभियान के अंतर्गत समस्त आयुष्मान आरोग्य मंदिर (उपस्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, शहरी/ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र, और मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक) के माध्यम से उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों और टी.बी. के मरीजों की स्क्रीनिंग एवं जांच की जाएगी। 100 दिवसीय नि-क्षय शिविर के तहत विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों और जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इसमें प्रमुख रूप से मधुमेह पीड़ित, कुपोषित, धूम्रपान करने वाले, शराब सेवन करने वाले, पूर्व टीबी मरीज, संपर्क व्यक्ति और एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों की जानकारी जुटाई जाएगी। शिविरों का आयोजन प्रमुख सार्वजनिक स्थानों जैसे रेलवे और बस स्टेशनों, सामूहिक स्थानों, छात्रावास, आयुष्मान आरोग्य मंदिर (AAM), और स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों पर किया जाएगा। नि-क्षय शिविरों का आयोजन कारखानों, उद्योगों, ईंट भट्टों, निर्माण स्थलों, पत्थर क्रशरों और अन्य ऐसे कार्यस्थलों पर भी किया जाएगा, जिससे श्रमिक वर्ग और अन्य संवेदनशील वर्गों तक इस अभियान का लाभ पहुँच सके। शिविरों का आयोजन पंचायत संस्थाओं, शहरी स्थानीय निकायों, स्वसहायता समूहों, जन आरोग्य समिति, महिला आरोग्य समिति, और ग्राम स्वास्थ्य पोषण एवं स्वच्छता समिति के साथ मिलकर जागरूकता कार्यक्रम चलाया जायेगा। नए निक्षय मित्रों और टीबी चैंपियंस/विजेताओं की पहचान की जाएगी, जिससे उनकी सहभागिता से अभियान को और गति दी जा सके। त्यौहारों और मेलों के दौरान धार्मिक गुरुओं के माध्यम से जागरूकता संदेश प्रसारित किए जाएंगे। स्कूलों और कॉलेजों में कला और सांस्कृतिक गतिविधियाँ, रैलियाँ आयोजित की जाएंगी। स्वास्थ्य विभाग के अलावा अन्य सरकारी विभागों में "नि-क्षय सप्ताह" के आयोजन के अन्तर्गत जागरूकता सत्र, निक्षय शिविर, टीबी शपथ एवं प्रतियोगिताएँ भी आयोजित की जाएंगी।   recent visitors 50

द डायरी ऑफ मणिपुर से हिंदी फिल्मों में डेब्यू करेंगे अमित राव

मुंबई, मणिपुर हिंसा के ज्वलंत मुद्दे पर बनने जा रही फिल्म 'द डायरी ऑफ मणिपुर से अमित राव हिंदी फिल्मों में डेब्यू कर रहे हैं। 'द डायरी ऑफ वेस्ट बंगाल' के मेकर सनोज मिश्रा अब मणिपुर हिंसा के ज्वलंत मुद्दे पर फिल्म 'द डायरी ऑफ मणिपुर' बनाने जा रहे हैं। इस फिल्म के जरिए अमित राय हिंदी सिनेमा में डेब्यू करने जा रहे हैं। फिल्म के लेखक निर्माता और निर्देशक सनोज मिश्र ने फिल्म 'द डायरी ऑफ मणिपुर' से जुड़ी जानकारी शेयर की। उन्होंने बताया कि इस फिल्म के जरिए मणिपुर हिंसा की सच्चाई दिखाने जा रहा हूं। सनोज मिश्र ने कहा, मैं अपनी फिल्मों के माध्यम से समाज के ऐसे ज्वलंत मुद्दों दिखता रहूंगा। डायरेक्टर होने के नाते मेरा यह कर्तव्य भी हैं कि अपनी फिल्मों के माध्यम से समाज की सच्ची तस्वीर पेश करूं। मैं किसी की धमकियों से नहीं डरता हूं। फिल्म 'द डायरी ऑफ मणिपुर' के जरिए अमित राव इंडस्ट्री में डेब्यू कर रहे हैं। रंग मंच की दुनिया में उनका बहुत बड़ा नाम है। अमित राव ने कहा, मुझे काफी समय से फिल्मों के ऑफर मिल रहे हैं, लेकिन मैने कभी फिल्मों में एक्टिंग को गंभीरता से नहीं लिया। जब इस फिल्म के लिए डायरेक्टर सनोज मिश्र ने मुझसे संपर्क किया और फिल्म की कहानी सुनाई तो इस फिल्म में काम करने से खुद को नहीं रोक पाया। मुझे लगता है कि बॉलीवुड में मेरी शुरुआत का यह अच्छा समय है। सनोज मिश्रा फिल्म्स के बैनर तले बनने जा रही फिल्म द डायरी ऑफ मणिपुर के लेखक, निर्माता और निर्देशक सनोज मिश्र हैं। फिल्म के सह -निर्माता यामीन खान, जावेद देवरियावाले ,धीरेंद्र ठाकुर, और संजय कुमार हैं। अमित राव के अलावा इस फिल्म में देश की प्रसिद्ध योग शिक्षिका मानसी गुलाटी और भजन सम्राट अनूप जलोटा भी एक खास किरदार निभा रहे हैं। फिल्म के बाकी कलाकारों का चयन जारी है। recent visitors 59

मध्य प्रदेश में लाड़ली बहनों के लिए खुशियों की घंटी फिर बजने वाली, 1 करोड़ 29 लाख बहनों के खाते में योजना की अगली किस्त की राशि जल्द आने वाली

भोपाल  मध्य प्रदेश में लाड़ली बहनों के लिए खुशियों की घंटी फिर बजने वाली है. प्रदेश की 1 करोड़ 29 लाख बहनों के खाते में लाड़ली बहना योजना की अगली किस्त की राशि आने वाली है. ये इस बरस की आखिरी किस्त है. ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि साल के आखिरी किस्त तय तारीख से पहले भी आ सकती है. माना जा रहा है कि इस बार तय तारीख 10 दिसम्बर के पहले लाड़ली बहनों को इस योजना की 19वी किस्त के रुप में 1250 रुपए की धनराशि भेजी जा सकती हैं. वहीं संभावना ऐसी भी है कि जनवरी 2025 से मोहन सरकार लाड़ली बहनों की किस्त में इजाफा भी कर सकती है. तारीख से पहले आ सकती है लाड़ली बहना की किस्त ! लाड़ली बहना योजना की दिसंबर महीने की किस्त क्या 10 दिसम्बर से पहले भी आ सकती है. ये इस बरस की आखिरी किस्त है. 1250 की ये किस्त समय से पहले भी लाड़ली बहनों के खाते में डाली जा सकती है. ये लाड़ली बहना योजना की 19वी किस्त होगी. त्योहार के समय में जिस तरह से नियत समय से पहले ये राशि लाड़ली बहनों के खाते में डाली गई, क्या इस बार भी ऐसा होगा. हालांकि इस बारे में सरकार की ओर से कोई पुष्टि नहीं की गई है. क्या अगले महीने से बढ़ जाएगी लाड़ली बहना की राशि चर्चा ये भी है कि जनवरी 2025 से लाड़ली बहना योजना की राशि में इजाफा हो सकता है. असल में बुधनी और विजयपुर विधानसभा चुनाव के दौरान सीएम डॉ मोहन यादव ने इस बात के संकेत दिए थे कि वे लाड़ली बहना योजना की राशि में वादे के मुताबिक किस्त की राशि बढ़ाई भी जा सकती है. सीएम डॉ मोहन यादव ने कहा था कि जो वादा किया गया है. लाड़ली बहनों से पूरा किया जाएगा. उसी के बाद से ये अटकलें तेज हो गई कि क्या नए वर्ष की शुरुआत से सरकार लाड़ली बहनों की राशि बढ़ा सकती है. बीजेपी के मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल कहते हैं, "इसमें दो राय नहीं कि लाड़ली बहन-बेटियों के लिए समर्पित है. हमारी सरकार और उनके आर्थिक आत्मनिर्भरता से लेकर उन्हें हर तरह का संबल देने के प्रयास सरकार की ओर से किए जा रहे हैं. सरकार ने लाड़ली बहनों से जो वादा किया है. वो भी पूरे होंगे. बीजेपी की सरकार ने पूर्व में भी अपने वचन पूरे किए हैं और इस बार भी सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध है." कब शुरु हुई थी योजना, लाड़ली बहनों का कितना बजट एमपी में लाड़ली बहना अकेली ऐसी योजना है. जिसके लिए सरकार ने बजट में हमेशा विशेष प्रावधान किए हैं. 2023 में शुरु की गई योजना में पहले साल 12 हजार करोड़ का प्रावधान किया गया था. 23 से साठ वर्ष की महिलाओं के लिए हर महीने हजार रुपए की धनराशि का प्रावधान शुरुआत में किया गया, जो बढ़कर 1250 रुपए का प्रावधान कर दिया गया. पांच वर्षों लक्ष्य में इसे 60 हजार करोड़ इसका बजट माना गया था. जब किस्त की धनराशि 1250 कर दी गई, तो बजट में भी प्रावधान किया गया. अब तैयारी ये है कि 2025 के बजट में महिला बाल विकास विभाग के साथ महिलाओं पर केन्द्रित योजनाओं के लिए धनराशि बढ़ाई जाए.   recent visitors 63