रांची में नर्सरी के चार वर्षीय बच्चे से यौन उत्पीड़न, कैब ड्राइवर गिरफ्तार

रांची. झारखंड की राजधानी रांची में एक प्राइवेट स्कूल में नर्सरी के चार वर्षीय बच्चे के यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया है। पुलिस ने आरोपी कैब ड्राइवर को पॉक्सो एक्ट के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। हालांकि, बच्चे की मां का आरोप है कि उन्हें एफआईआर दर्ज कराने में दो दिनों तक परेशान होना पड़ा। स्कूल के मैनेजमेंट ने भी उनकी शिकायत पर किसी तरह का नोटिस नहीं लिया है। घटना रांची के बीआईटी मेसरा ओपी क्षेत्र का है। बताया जाता है कि इस थाना क्षेत्र में स्पेक्ट्रम ग्लोबल स्कूल में नर्सरी में पढ़ाई करने वाले बच्चे ने घर के लोगों को स्कूल के कैब ड्राइवर की गंदी हरकत के बारे में जानकारी दी। उसकी मां ने स्कूल के प्रिंसिपल से इसकी शिकायत की, लेकिन उन्होंने कोई एक्शन नहीं लिया। इसके बाद वह बीआईटी मेसरा ओपी में शिकायत दर्ज कराने पहुंची। बच्चे की मां का कहना है कि यहां भी उन्हें दो दिनों तक दौड़ लगानी पड़ी। ओपी में कई बार उनके बच्चे से बयान लिया गया। पुलिस ने एफआईआर दर्ज की, लेकिन स्कूल मैनेजमेंट की लापरवाही और अपराध को संरक्षण देने के आरोप पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने स्कूल मैनेजमेंट को बचाने की कोशिश की है। झारखंड राज्य बाल संरक्षण आयोग के सदस्य उज्ज्वल प्रकाश तिवारी ने कहा कि यह घटना आयोग के संज्ञान में आई है। इस मामले में आयोग की ओर से आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इसके पहले, रांची में इसी महीने एक स्कूल की नाबालिग छात्राओं से सरेआम छेड़खानी का वीडियो वायरल होने के बाद सीएम हेमंत सोरेन ने पुलिस को तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया था। इसके बाद पुलिस ने आरोपी फिरोज को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इस मामले में लापरवाही के आरोप में वरीय पुलिस अफसरों के आदेश पर अब तक छह पुलिसकर्मी सस्पेंड किए जा चुके हैं।   recent visitors 57

रियल एस्टेट सेक्टर में पीई निवेश 32 प्रतिशत बढ़कर 4.2 अरब डॉलर रहा

मुंबई. भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में प्राइवेट इक्विटी (पीई) निवेश 2024 में सालाना आधार पर 32 प्रतिशत बढ़कर 4.2 अरब डॉलर हो गया है। इसकी वजह वेयरहाउसिंग सेक्टर में मांग मजबूत होना है। यह जानकारी गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई। प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी फर्म नाइट फ्रैंक इंडिया द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया कि 2024 में पीई निवेश हासिल करने में वेयरहाउसिंग सेक्टर सबसे आगे रहा, जिसकी कुल निवेश में 45 प्रतिशत हिस्सेदारी रही। इसके बाद कुल निवेश में रेजिडेंशियल सेक्टर की हिस्सेदारी 28 प्रतिशत और ऑफिस सेक्टर की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत रही। रिपोर्ट में बताया गया कि 2024 में रेजिडेंशियल सेक्टर में निजी इक्विटी निवेश दोगुने से अधिक बढ़ा है। इस दौरान पीई निवेश में 104 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जो इस वर्ष 1.2 अरब डॉलर हो गया, जो इस क्षेत्र में निवेशकों के विश्वास को दर्शाता है। रिपोर्ट में आगे कहा गया कि निवेशकों के फोकस और सेक्टर की प्राथमिकताओं में महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। पीई निवेश में वेयरहाउसिंग सेक्टर ने ऑफिस सेक्टर को पीछे छोड़ दिया, जिसकी 2017 से पीई निवेश में उच्चतम हिस्सेदारी थी, जो भारतीय रियल एस्टेट बाजार में वेयरहाउसिंग के बढ़ते महत्व को रेखांकित करता है। मुंबई की कुल पीई निवेश में हिस्सेदारी 50 प्रतिशत रही है। इसकी वजह वेयरहाउसिंग में निवेश बढ़ना है। 2024 में देश की आर्थिक राजधानी में 2 अरब डॉलर का पीई निवेश आया है। रिपोर्ट में आगे कहा गया कि 2024 में मुंबई में आये कुल पीई निवेश में से 74 प्रतिशत वेयरहाउसिंग सेक्टर में आया है। इसकी वैल्यू 1.5 अरब डॉलर रही है। वहीं, शहर में रेजिडेंशियल सेक्टर में 406 मिलियन डॉलर का पीई निवेश हुआ है। 2024 में बेंगलुरु को कुल 833 मिलियन डॉलर का पीई निवेश प्राप्त हुआ। इनमें से लगभग 52 प्रतिशत या 430 मिलियन डॉलर निवेश ऑफिस सेक्टर में आया है।, जबकि शेष 48 प्रतिशत या 403 मिलियन डॉलर का निवेश रेजिडेंशियल सेक्टर में आया है। नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल ने कहा, “भारत में पिछले एक दशक में निवेश में बढ़त हुई है। इसकी वजह आर्थिक स्थिरता और लगातार हो रही ग्रोथ है। ई-कॉमर्स और थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स में वृद्धि से वेयरहाउसिंग सेक्टर में तेजी है। वहीं, बढ़ती हुई कंज्यूमर मांग का फायदा रेजिडेंशियल सेक्टर को मिल रहा है।” recent visitors 69

नया साल शुरू होते ही आम उपभोक्ताओं की जेब पर और भार बढ़ने वाला, चाय से साबुन तक सब होगा महंगा

नई दिल्ली नया साल शुरू होते ही आम उपभोक्ताओं की जेब पर और भार बढ़ने वाला है। देश की प्रमुख एफएमसीजी कंपनियां, जैसे हिंदुस्तान यूनिलीवर, डाबर, गोदरेज कंज्यूमर, पारले प्रोडक्ट्स, नेस्ले, और अडानी विल्मर, अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ाने की तैयारी में हैं। उत्पादन लागत और कस्टम ड्यूटी में बढ़ोतरी का असर अब चाय पत्ती, साबुन, तेल और क्रीम जैसे रोजमर्रा के उत्पादों पर साफ दिखाई देगा। सितंबर 2024 में खाद्य तेल आयात पर ड्यूटी में 22% की वृद्धि के साथ ही पिछले एक साल में इसकी लागत में 40% तक का इजाफा हुआ है। इसी तरह, चीनी, गेहूं के आटे और कॉफी के उत्पादन पर भी महंगाई का असर देखा गया है। पारले और डाबर जैसे ब्रांड्स ने बढ़ाई कीमतें पारले प्रोडक्ट्स के वाइस प्रेसिडेंट मयंक शाह ने पुष्टि की है कि कंपनी अपने उत्पादों की नई कीमतों के साथ पैकेजिंग तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि यह बढ़ोतरी उपभोक्ताओं की मांग को ज्यादा प्रभावित नहीं करेगी। वहीं, डाबर ने हेल्थकेयर और ओरल केयर उत्पादों की कीमतें बढ़ाई हैं, जबकि नेस्ले ने अपने कॉफी प्रोडक्ट्स में बढ़ोतरी की है। ग्रामीण और शहरी बाजारों पर असर रिटेल डेटा के अनुसार, ग्रामीण इलाकों में बढ़ती मांग ने अक्टूबर 2024 में एफएमसीजी सेक्टर को 4.3% की वार्षिक वृद्धि दी थी, लेकिन नवंबर में बिक्री में गिरावट दर्ज की गई। कंपनियों को उम्मीद है कि शहरी उपभोक्ता इन बढ़ी कीमतों को वहन कर पाएंगे। recent visitors 53

स्टार्टअप फर्म CFS ने कहा कि 400 मेगावाट बिजली ‘नकली सूर्य’ से मिलेगी, अमेरिका में 2030 तक ग्रिड से जोड़ने का प्लान, समझें

वॉशिंगटन  दुनिया के कई देश आज के समय 'नकली सूर्य' बनाने में लगे हैं। अगर सब ठीक योजना के अनुसार हुआ तो वर्जीनिया 2030 के शुरुआती दशक तक दुनिया का पहला ग्रिड-स्केल न्यूक्लियर फ्यूजन पावर प्लांट स्थापित करेगा। यह संयंत्र भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा को उपयोग में लाकर बिजली उत्पादन करेगा। मंगलवार को स्टार्टअप कॉमनवेल्थ फ्यूजन सिस्टम्स (CFS) ने इसकी घोषणा की। CFS सबसे बड़ी और सबसे चर्चित न्यूक्लियर फ्यूजन कंपनियों में से एक है। यह एक फैसिलिटी बनाने में अरबों डॉलर का निवेश करेगी। चालू होने पर प्लांट ग्रिड के साथ जोड़ने में सक्षम होगा और 400 मेगावाट का उत्पादन करेगा। कंपनी के सीईओ बॉब मुमगार्ड के मुताबिक यह लगभग 150,000 घरों को बिजली देने के लिए पर्याप्त है। उन्होंने कहा, 'यह पहली बार होगा जब दुनिया में ग्रिड पैमाने पर फ्यूजन पावर उपलब्ध कराई जाएगी।' वर्जीनिया के गवर्नर ग्लेन यंगकिन ने घोषणा का स्वागत करते हुए इसे वर्जीनिया और पूरी दुनिया के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया। कैसे बनती है ऊर्जा यह संयंत्र परमाणु संलयन के व्यावसायीकरण की खोज में एक नए चरण का प्रतिनिधित्व करेगा। न्यूक्लियर फ्यूजन के जरिए ही हमारे सूर्य की तरह दूसरे तारों को ताकत मिलती है। लेकिन इस दिशा में अभी भी रास्ता आसान नहीं है। दुनिया को एक स्वच्छ और प्रचुर ऊर्जा स्रोत की सख्त जरूरत है जो जीवाश्म ईंधन की जगह ले सके। न्यूक्लियर फ्यूजन की टेक्नोलॉजी ऐसा ही वादा करती है। इसमें परमाणु कणों से फ्यूजन के जरिए ऊर्जा पैदा की जाती है। इसमें हाइड्रोजन का इस्तेमाल किया जाता है। इस प्रक्रिया के लिए टोकामैक नाम की डोनट के आकार वाली मशीन का इस्तेमाल होता है। क्या होता है फायदा संलयन ऊर्जा लगभग असीमित है, यह पर्यावरण को गर्म नहीं करती और वर्तमान में इस्तेमाल होने वाली विखंडन तकनीक की तरह रेडियोएक्टिव कचरा भी नहीं छोड़ता है। हालांकि, शोध परियोजनाओं से वाणिज्यिक इस्तेमाल तक इसे लाना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुआ है। CFS ने कहा है कि संलयन में रातों-रात कुछ नहीं होता। 2018 में MIT से अलग होकर स्थापित इस स्टार्टअप ने अब तक 2 अरब डॉलर से ज्यादा जुटाए हैं। उनका दावा है कि वे तेजी से प्रगति कर रहे हैं। recent visitors 59

कानपुर सेंट्रल स्टेशन से लेकर ट्रेनों के प्लेटफॉर्म तक हर जगह महाकुंभ की झलक दिखेगी

 कानपुर  महाकुंभ-2025 को दिव्य-भव्य बनाने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकारें मिलकर काम कर रही हैं। कानपुर सेंट्रल स्टेशन से लेकर ट्रेनों के प्लेटफॉर्म तक हर जगह महाकुंभ की झलक दिखेगी। जैकेट पहने कर्मचारी क्यूआर कोड स्कैन कराकर महाकुंभ-2025 का एप डाउनलोड कराएंगे। हर प्लेटफॉर्म पर ये कर्मचारी तैनात रहेंगे। महाकुंभ की महत्ता बताती व्यवस्थाओं सुविधाओं के स्लोगन भगवा होंगे। शिवा अवस्थी, कानपुर। केंद्र व प्रदेश सरकार महाकुंभ-2025 को दिव्य-भव्य केवल स्लोगन तक ही नहीं, हकीकत में दिखाएगी। सेंट्रल स्टेशन, ट्रेनों से प्लेटफार्मों पर जैकेट पहने कर्मियों के माध्यम से दिव्य-भव्य महाकुंभ की झलक नजर आएगी। जैकेट पहने कर्मी क्यूआर कोड स्कैन करा महाकुंभ-2025 का एप डाउनलोड कराएंगे। इनकी जैकेट से ही क्यूआर कोड स्कैन करते ही एप डाउनलोड की सुविधा आपके मोबाइल फोन पर मिलेगी। हर प्लेटफार्म में ये कर्मचारी तैनात रहेंगे। महाकुंभ की महत्ता बताती व्यवस्थाओं, सुविधाओं के स्लोगन भगवा होंगे। कानपुर से बुंदेलखंड, आसपास जिलों तक प्लेटफार्म, प्रतीक्षालय, वीआइपी लाउंज, टिकट वेंडिंग मशीनें, कियास्क सजेंगे। ट्रेनों की आवाजाही में उद्घोषणा भी महाकुंभ के रंग में रंगी होगी। महाकुंभ की शुरुआत जनवरी से होनी है, लेकिन कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर अभी से सब कुछ महाकुंभ मय दिखने लगा है। आटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन (एटीवीएम) महाकुंभ-2025 का स्वागत करने लगे हैं। अब प्लेटफार्मों, उद्घोषणा, प्रतीक्षालय, वीआइपी लाउंज में इंतजाम शुरू हो गए हैं। कैंट छोर पर प्लेटफार्म संख्या एक और सिटी साइड में प्लेटफार्म संख्या 10 के प्रवेश द्वारों पर भी महाकुंभ आस्था की हिलोरे लेगा। हर आने-जाने वाले श्रद्धालु, विदेशी पर्यटकों की अगवानी होगी। रिंग रेल सेवा वाली ट्रेनों के साथ ही विशेष गाड़ियों में महाकुंभ-2025 से संबंधित चित्रकारी संगम तट का अहसास कराएगी। प्लेटफार्मों पर पहुंचते ही मोबाइल रिजर्व टिकट सिस्टम से तत्काल टिकट मिलेंगे। इसमें मल्टी एमयूटीएस भी महाकुंभ के रंग में दिखाई पड़ेंगे। बुकिंग आफिस से लेकर प्लेटफार्मों तक मिलने वाली ये सुविधा हर कदम आकर्षण का केंद्र रहेगी। अंगुली से छूते ही स्क्रीन बताएगी सब जानकारियां महाकुंभ के दौरान सेंट्रल स्टेशन समेत सभी स्टेशनों पर भगवा कियास्क लगाए जाएंगे। इनमें टच स्क्रीन होगी। इस स्क्रीन पर अंगुली से छूते ही ब्योरा आ जाएगा। इसमें ट्रेनों, प्लेटफार्म संख्या, आने व जाने के समय से लेकर रेलवे की महाकुंभ से संबंधित और जानकारियां मिल सकेंगी। यहां भी महाकुंभ की झलक     प्लेटफार्म संख्या एक पर यात्री सुविधा केंद्र में आठ-आठ घंटे की ड्यूटी पर 24 घंटा कर्मी बैठेंगे। यहां महाकुंभ से जुड़े स्लोगन व बैनर होंगे।     स्पेशल ट्रेनों के माध्यम से प्रयागराज के संगम तट की झलक मिलेगी।     सभी छोटे-बड़े रेलवे स्टेशनों पर श्रद्धालुओं के स्वागत में महाकुंभ के बैनर लगेंगे।     हरे, लाल, पीले व नीले रंगों से महाकुंभ के क्षेत्रवार यात्री व आश्रय स्थल पता चलेंगे। कानपुर सेंट्रल स्टेशन के निदेशक, आशुतोष सिंह ने बताया     महाकुंभ-2025 के लिए मुख्यालय से मिले निर्देश के आधार पर व्यवस्थाएं दुरुस्त की जा रही हैं। प्लेटफार्मों से लेकर हर जगह महाकुंभ की झलक दिखेगी व श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं के इंतजाम किए जा रहे हैं। सहायक वाणिज्य प्रबंधक कानपुर सेंट्रल, संतोष कुमार त्रिपाठी ने बताया     सेंट्रल स्टेशन पर ट्रेनों की आवाजाही पर प्लेटफार्म से लेकर कैंट व सिटी साइड के सर्कुलेटिंग एरिया तक महाकुंभ के मद्देनजर इंतजाम किए जा रहे हैं। यात्रियों की सहूलियत के लिए महाकुंभ-2025 के रंग में सब कुछ रंगा दिखेगा, जिससे उन्हें कोई सुविधा पाने के लिए भटकना न पड़े।   recent visitors 130

राष्ट्रीय बाल रंग में अपनी सांस्कृतिक विशिष्टता का सहेजे विभिन्न प्रांतों के बच्चे यहां पहुंचते

भोपाल विद्यालयीन छात्र-छात्राओं में सृजनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के मकसद से 3 दिवसीय राष्ट्रीय बाल रंग की शुरूआत 20 दिसम्बर से भोपाल के श्यामला हिल्स स्थित इंदिरा मानव संग्रहालय में हो रही है। स्कूल शिक्षा विभाग का राष्ट्रीय बाल रंग स्कूली बच्चों की सृजनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित कर अभिव्यक्ति के विविध अवसर प्रदान करता है। यह महोत्सव भारत की शाश्वत संस्कृति का संदेश वाहक है। अनेकता में एकता, भारतीय संस्कृति की विशेषता है। अपनी सांस्कृतिक विशिष्टता का सहेजे विभिन्न प्रांतों के बच्चे यहां पहुंचते हैं। 20 दिसम्बर को बाल रंग में राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएं प्रात: 10 बजे से शुरू होंगी। बालरंग समारोह का शुभारंभ स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह करेंगे। राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में सांस्कृतिक, साहित्यिक, निबंध लेखन, चित्रकला और केलीग्राफी प्रतियोगिताएं मुख्य रूप से आयोजित होंगी। राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में 9 संभागों के करीब एक हजार बच्चे विभिन्न प्रतियोगिताओं में सहभागिता करेंगे। राष्ट्रीय बाल रंग 21 और 22 दिसम्बर को देश के 17 राज्यों सहित 5 केन्द्र शासित प्रदेश के 15 हजार बच्चे विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेंगे। राष्ट्रीय बाल रंग में लोक नृत्य प्रतियोगिता होगी। इनमें हिमाचल प्रदेश, बिहार, पंजाब, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, मध्यप्रदेश, सिक्किम, गोवा, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर, गुजरात, कर्नाटक, हरियाणा, तेलंगाना, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, दादरा एवं नगर हवेली, झारखंड, दिल्ली, छत्तीसगढ़ एवं पुडुचेरी शामिल हैं। स्कॉउट केम्प इंदिरा मानव संग्रहालय में बच्चों में साहसिक एवं अनुशासन की भावना को मजबूत करने के लिये स्काउट केम्प भी लगाया जायेगा। इनमें बच्चे जंगल केम्प, रिवर क्रॉसिंग, मंकी ब्रिज, कमांडो ब्रिज, वॉच टॉवर, रॉक क्लाईम्बिंग और वॉल रेपलिंग जैसी गतिविधियों में अपना प्रदर्शन करेंगे। विजन-2047 पर केन्द्रित सजीव प्रदशर्नी बाल रंग के दौरान 20 से 22 दिसम्बर तक विजन-2047 थीम के अंतर्गत बच्चों द्वारा निर्मित सामग्री का प्रदर्शन किया जायेगा। प्रदर्शनी में देश की विविधता वाली संस्कृति देखने का अवसर भी मिलेगा। इनमें जीवन कौशल, एक भारत श्रेष्ठ भारत, खेलो इंडिया, अन्न खाद्यान्न, व्यावसायिक शिक्षा से रोजगार, अंतरिक्ष विज्ञान, जलवायु परिवर्तन विषय को प्रमुख रूप से शामिल किया गया है। फूड जोन बाल रंग में विभिन्न राज्यों के व्यंजनों के स्टॉल भी लगाये जायेंगे। इसके साथ ही परिसर में हस्तशिल्प पर केन्द्रित प्रदर्शनी भी लगाई जायेगी। प्रतियोगिताएं बाल रंग में तात्कालिक भाषण, लोक गीत, शास्त्रीय नृत्य, सुगम संगीत, सामुहिक लोक नृत्य, दिव्यांगजनों की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं, वेद पाठ, नृत्य नाटिका, योग जैसी अनेक प्रतियोगिताएं होंगी। बाल रंग में 20, 21 और 22 दिसम्बर को प्रात: 9 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजन होंगे।   recent visitors 57

200 वंदे भारत स्लीपर रेक के निर्माण का काम भी प्रौद्योगिकी भागीदारों को सौंपा गया : रेल मंत्री वैष्णव

नई दिल्ली वर्तमान में देश में लंबी और मध्यम दूरी की यात्रा के लिए 10 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों का निर्माण कार्य चल रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि पहला प्रोटोटाइप स्लीपर वंदे भारत निर्मित हो चुका है और इसका फील्ड ट्रायल किया जाएगा। 136 वंदे भारत ट्रेन सेवाएं चालू रेल मंत्री ने लोकसभा में एक वक्तव्य में कहा कि इसके अलावा 200 वंदे भारत स्लीपर रेक के निर्माण का काम भी प्रौद्योगिकी भागीदारों को सौंपा गया है। ट्रेन के रोलआउट की समय-सीमा परीक्षणों के सफल समापन पर निर्भर है। 2 दिसंबर तक, देशभर में छोटी और मध्यम दूरी की यात्रा के लिए भारतीय रेलवे के ब्रॉड गेज विद्युतीकृत नेटवर्क पर 136 वंदे भारत ट्रेन सेवाएं चालू हैं। एलएचबी कोच का उत्पादन लगातार बढ़ा रेल मंत्री ने एक अन्य प्रश्न के उत्तर में कहा कि भारतीय रेलवे की उत्पादन इकाइयां अप्रैल 2018 से केवल एलएचबी कोच का उत्पादन कर रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में एलएचबी कोच का उत्पादन लगातार बढ़ा है। 2014-24 के दौरान निर्मित एलएचबी कोच की संख्या 2004-14 के दौरान निर्मित (2,337) संख्या से 16 गुना (36,933) अधिक है। भारतीय रेलवे (आईआर) ने एलएचबी कोचों की भरमार कर दी है जो तकनीकी रूप से बेहतर हैं और इनमें एंटी क्लाइम्बिंग व्यवस्था, विफलता संकेत प्रणाली के साथ एयर सस्पेंशन और कम संक्षारक शेल जैसी विशेषताएं हैं। दिव्यांगजनों और कम गतिशीलता वाले यात्रियों के लिए सुगमता सुनिश्चित उन्होंने कहा कि “सुगम्य भारत मिशन” (सुलभ भारत अभियान) के हिस्से के रूप में, भारतीय रेलवे दिव्यांगजनों और कम गतिशीलता वाले यात्रियों के लिए सुगमता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण प्रगति कर रहा है। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के दिशा-निर्देशों के तहत, रैंप, सुलभ पार्किंग, ब्रेल और स्पर्शनीय संकेत, कम ऊंचाई वाले काउंटर और लिफ्ट व एस्केलेटर जैसी व्यापक सुविधाएं प्रदान की गई हैं। नवंबर 2024 तक, भारतीय रेलवे ने 399 स्टेशनों पर 1,512 एस्केलेटर और 609 स्टेशनों पर 1,607 लिफ्टें स्थापित की थीं, जो पिछले दशक की तुलना में क्रमशः 9 और 14 गुना की उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है। इसके अलावा, अधिकांश मेल व एक्सप्रेस ट्रेनों में चौड़े प्रवेश द्वार, सुलभ शौचालय और व्हीलचेयर पार्किंग वाले समर्पित कोच उपलब्ध हैं, जबकि वंदे भारत ट्रेनें दिव्यांगजनों के लिए स्वचालित दरवाजे, निर्धारित स्थान और ब्रेल साइनेज जैसी सुविधाओं के साथ बेहतर सुगमता प्रदान करती हैं।   recent visitors 52