आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थापना और नंदीशालाओं के बजट आवंटन को लेकर गहन चर्चा हुई, दिया कुमारी ने दिया जवाब

जयपुर राजस्थान विधानसभा में मंगलवार को आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थापना और नंदीशालाओं के बजट आवंटन को लेकर गहन चर्चा हुई। प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक रोहित बोहरा ने प्रदेश में नवीन आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थापना और बजट खर्च को लेकर सरकार से सवाल पूछा। बजट खर्च पर क्या बोलीं दिया कुमारी? विधायक रोहित बोहरा ने सरकार से यह जानकारी मांगी कि पिछले बजट में आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए आवंटित राशि में से कितना धन खर्च किया गया है। इसके जवाब में उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थापना के लिए तय मानकों की जानकारी दी। जब विधायक बोहरा ने दोबारा यह सवाल किया कि आदर्श आंगनबाड़ी केंद्रों पर कितना बजट खर्च हुआ है, तो दिया कुमारी ने इसे मूल प्रश्न से अलग बताते हुए कहा कि इस पर अलग से जानकारी दी जाएगी। विधायक ने सरकार पर इस दिशा में खर्च न करने का आरोप लगाया, जिस पर दिया कुमारी ने स्पष्ट किया कि सरकार ने 365 आदर्श आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए वित्तीय स्वीकृति जारी की है। नंदीशालाओं के बजट पर भी हुआ सवाल-जवाब चित्तौड़गढ़ जिले में नंदीशालाओं के बजट को लेकर विधायक श्रीचंद कृपलानी ने सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि चित्तौड़गढ़ में नंदीशालाओं से जुड़े आवेदन लंबित क्यों हैं और उनकी वर्तमान स्थिति क्या है? इसके जवाब में मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि जिले में कई आवेदकों के मापदंड पूरे न करने के कारण उनके आवेदन निरस्त कर दिए गए हैं। सरकार इस दिशा में काम कर रही है और उचित मापदंड पूरे करने वाले आवेदनों पर विचार किया जाएगा। recent visitors 36

मुख्यमंत्री साय की अध्यक्षता में हुई जनजाति सलाहकार परिषद की पहली बैठक, लिए कई अहम फैसले

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज छत्तीसगढ़ जनजाति सलाहकार परिषद की पुनर्गठन पश्चात पहली बैठक विधानसभा परिसर स्थित समिति कक्ष में संपन्न हुई। बैठक में जनजातीय समुदाय के सशक्तिकरण, शिक्षा, सामाजिक-आर्थिक उन्नयन, प्रशासनिक सुधार और संस्कृति संरक्षण से जुड़े अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में कैबिनेट मंत्री एवं जनजाति सलाहकार परिषद के उपाध्यक्ष रामविचार नेताम सहित प्रदेश के वरिष्ठ मंत्रीगण, विधायक, प्रशासनिक अधिकारी एवं परिषद के सभी सदस्य उपस्थित रहे। recent visitors 36

भारत 2028 तक दुनिया का सबसे बड़ा वेब3 डेवलपर हब बन जाएगा !, लेटेस्ट रिपोर्ट में मिली जानकारी

बेंगलुरु भारत वेब3 स्पेस में तेजी से ग्लोबल लीडर के रूप में उभर रहा है। इसके 2028 तक दुनिया का सबसे बड़ा वेब3 डेवलपर हब बनने की उम्मीद है। मंगलवार को आई एक लेटेस्ट रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। हैशड इमर्जेंट की लेटेस्ट ‘इंडिया वेब3 लैंडस्केप’ रिपोर्ट से पता चला है कि देश ने 2024 में सालाना आधार पर डेवलपर भागीदारी में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की, जिससे गिटहब में 4.7 मिलियन से अधिक डेवलपर जुड़े। यह वैश्विक स्तर पर सभी नए वेब3 डेवलपर्स का 17 प्रतिशत है, जिससे भारत दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा क्रिप्टो डेवलपर बेस बन गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 45.3 प्रतिशत भारतीय वेब3 डेवलपर्स कोडिंग में योगदान देते हैं, 29.7 प्रतिशत बग्स को ठीक करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं और 22.4 प्रतिशत डॉक्यूमेंटेशन पर काम करते हैं। विकास के लोकप्रिय क्षेत्रों में गेमिंग, नॉन-फंजिबल टोकन (एनएफटी), विकेंद्रीकृत वित्त और रियल-वर्ल्ड एसेट शामिल हैं। भारत के वेब3 डेवलपर्स का एक बड़ा हिस्सा नए लोग हैं, जिनमें से 50 प्रतिशत से अधिक ने पिछले दो वर्षों में इस क्षेत्र में प्रवेश किया है। उनमें से अधिकांश 27 वर्ष से कम आयु के हैं। हैकाथॉन एक ऐसा आयोजन है, जहां कंप्यूटर प्रोग्रामर मिलकर कुछ नया बनाने के लिए काम करते हैं। यह डेवलपर्स के लिए प्राथमिक प्रवेश द्वार बना हुआ है। हालांकि, वेब3 फर्म भुवनेश्वर, चेन्नई और केरल के विश्वविद्यालयों के साथ भी सक्रिय रूप से सहयोग कर रही हैं ताकि छात्रों को ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी से जल्द परिचित करवाया जा सके। हैशेड इमर्जेंट के सीईओ और मैनेजिंग पार्टनर टाक ली ने कहा, "देश की तकनीक को लेकर तेजी से आगे बढ़ने की योग्यता, उद्यमशीलता की भावना और डिजिटल अपनाने का अनूठा मिश्रण प्रगति को गति दे रहा है।" उन्होंने कहा कि अब हम नए सिरे से खुदरा भागीदारी, निवेशकों के रुझान में बदलाव और उद्यमों और सरकार द्वारा वेब3 सॉल्यूशन के डीपर इंटीग्रेशन को देख रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, "पिछले साल, हमने वेब3 अपनाने में भारत के ग्लोबल लीडरशिप को नोटिस किया और आज यह भारतीय इनोवेटर्स की लीडरशिप में ठोस प्रगति में बदल रहा है।" भारत वेब3 स्टार्टअप संस्थापकों के मामले में भी वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर है। इस क्षेत्र में 1,200 से अधिक स्टार्टअप संचालित हैं। देश के वेब3 इकोसिस्टम में निवेशकों का विश्वास बढ़ा है, जिससे 2023 की तुलना में फंडिंग में 109 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2024 में भारतीय स्टार्टअप ने 564 मिलियन डॉलर जुटाए, जिससे इस क्षेत्र में कुल निवेश 3 बिलियन डॉलर से अधिक हो गया। रिपोर्ट में एआई, आरडब्ल्यूए और स्टेकिंग सॉल्यूशन को निवेश आकर्षित करने वाले प्रमुख क्षेत्रों के रूप में उजागर किया गया है। कई ग्लोबल वेंचर कैपिटल और घरेलू फर्म भारतीय वेब3 परियोजनाओं पर बड़ा दांव लगा रही हैं। इसके अतिरिक्त, लेयर 1 और लेयर 2 ब्लॉकचेन नेटवर्क से इकोसिस्टम फंड ने पर्याप्त निवेश किया है, जिससे ग्लोबल वेब3 लैंडस्केप में भारत की स्थिति और मजबूत हुई है। recent visitors 41

परामर्शदात्री समिति की बैठक में आए सुझावों पर होगी कार्यवाही :ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा है कि ऊर्जा विभाग की परामर्शदात्री समिति की बैठक में विधायकों द्वारा दिये गये सुझावों पर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी का मार्गदर्शन विभाग के लिये उपयोगी सिद्ध होगा। ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने कहा कि आरडीएसएस योजना की संभागवार समीक्षा करेंगे। समीक्षा में विधायकों को भी ऑनलाइन जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि मीटर आधारित कनेक्शन देने पर विचार किया जाएगा। मंत्री श्री तोमर ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन में आ रही समस्याओं के निराकरण में ऊर्जा विभाग नम्बर एक है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में कृषि एवं अन्य क्षेत्रों में विद्युत की निरंतर बढ़ती मांग की पूर्ति के लिये पर्याप्त बिजली उपलब्ध है। अपर मुख्य सचिव ऊर्जा श्री नीरज मण्डलोई ने गत् एक वर्ष में विभाग द्वारा किये गए कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में वर्तमान में कुल विद्युत्‍उत्पादन क्षमता में राज्य का अंश 23 हजार 788 मेगावॉट है। राज्य में पिछले 5 वर्षों में प्रति व्यक्ति बिजली की खपत 1086 यूनिट से बढ़कर 1332 यूनिट हो गई है। यह प्रदेश के विकास का द्योतक है। बैठक में टीकमगढ़ के विधायक श्री यादवेन्द्र सिंह, कटंगी विधायक श्री गौरव सिंह पारधी, पिपरिया विधायक श्री ठाकुरदास नागवंशी और कालापीपल विधायक श्री घनश्याम चंद्रवंशी ने ऊर्जा विभाग के कार्यों में सुधार संबंधी महत्वपूर्ण सुझाव दिये। उन्होंने क्षेत्रीय समस्याओं से भी अवगत कराया। उप सचिव ऊर्जा श्री मंदार पुराणिक ने पॉवर पॉइन्ट प्रेजेन्टेशन से विभागीय योजनाओं की प्रगति के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर एमडी मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी श्री क्षितिज सिंघल एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।   recent visitors 37

मंत्री सिलावट ने कहा- मोदी एवं सीएम यादव का संकल्प है कि हर घर स्वच्छ पेयजल और खेती के लिए हर खेत तक पानी पहुंचे

भोपाल जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संकल्प है कि हर घर स्वच्छ पेयजल और खेती के लिए हर खेत तक पानी पहुंचे। इसके लिए प्रदेश में केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजनाओं के बाद ताप्ती मेगा बेसिन परियोजना बनाई जा रही है। इसके साथ ही प्रदेश के विभिन्न सिंचाई योजनाओं के माध्यम से सिंचाई के रकबे में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। प्रदेश में जल संरक्षण एवं संवर्धन के लिए तालाब एवं अन्य जल स्त्रोतों के उन्नयन, विकास, गहरीकरण, जल स्त्रोतों को अतिक्रमण मुक्त करने और उनके आसपास पौधा-रोपण आदि के उद्धेश्य से प्रदेश में 30 मार्च 2025 से 30 जून 2025 तक “जल गंगा संवर्धन अभियान” चलाया जाएगा। उन्होंने प्रदेश में जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का जनता से आहवान किया। जल संसाधन मंत्री श्री सिलावट ने मंगलवार को प्रमुख अभियंता जल संसाधन कार्यालय के सभाकक्ष में अभियान की तैयारियों के संबंध में बैठक ली। बैठक में अपर मुख्य सचिव जल संसाधन विभाग डॉ. राजेश राजौरा, प्रमुख अभियंता जल संसाधन श्री विनोद कुमार देवड़ा सहित सभी संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। जल संसाधन मंत्री श्री सिलावट ने कहा कि जल संसाधन विभाग में प्रदेश में 32 वृहद, 120 मध्यम एवं 5 हजार 800 लघु जल संरचनाएं हैं। इनमें बनाए गए बांधों की नहर प्रणाली 40 हजार किलोमीटर की है जिनमें 16 हजार किलोमीटर पक्की और 24 हजार किलोमीटर कच्ची नहरें हैं। इन नहरों से सिंचाई के लिए खेतों तक पानी पहुंचाया जाता है। अभियान के अंतर्गत जल संरचनाओं की आवश्यक मरम्मत, सौंदर्यीकरण एवं विकास कार्य किया जाना है। जल संसाधन मंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में जल संरक्षण एवं संवर्धन की समृद्धशाली परंपरा रही है। यहां की चंदेल कालीन जल संरक्षण प्रणाली न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व में प्रसिद्ध रही है। जल संसाधन संभाग छतरपुर में 44, टीकमगढ़ में 71 और पन्ना में 5 चंदेल/बुंदेलकालीन तालाब हैं। अभियान के अंतर्गत इन सभी का संरक्षण किया जाना है। जल संसाधन मंत्री श्री सिलावट ने निर्देश दिए कि प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए छोटी-छोटी योजनाएं बनाकर कार्य कराया जाए। आगामी बारिश के पूर्व प्रदेश के सभी पुराने बांधों एवं जल स्त्रोतों की मरम्मत सुनिश्चित की जाए। इसके लिए गत वर्ष में जिन-जिन तालाबों/ जल स्त्रोतों में क्षति हुई उनकी सूची बनाई जाए तथा उन जल स्त्रोतों का विशेष ध्यान रखा जाए। बांधों की सुरक्षा के लिए हर संभव उपाय किए जाएं। जल संसाधन मंत्री ने विभाग के सभी मुख्य अभियंताओं को निर्देश दिए कि वे अपने बेसिन के अंतर्गत आने वाली जल संरचनाओं के संरक्षण एवं विकास का कार्य सुनिश्चित करें। जल संरक्षण एवं विकास कार्य में जन सहयोग लें। सीएसआर गतिविधि के अंतर्गत तालाबों को रख-रखाव के लिए गोद दिया जा सकता है। जल संरक्षण एवं जल संवर्धन के इस कार्य में समाज के सभी वर्गों, जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों, धर्म गुरूओं, मीडिया आदि का पूरा सहयोग लिया जाए। जल संसाधन विभाग के अंतर्गत प्रदेश में 10 रिवर बेसिन (नदी कछार) हैं। जल गंगा संवर्धन अभियान में होने वाली प्रमुख गतिविधियां सभी नहरों को विलेज मेप पर राजस्व विभाग की सहायता से मार्क किया जाना तथा विलेज मेप पर "शासकीय नहर" अंकित किया जाना। बांध तथा नहरों को अतिक्रमण मुक्त किया जाना। नहर के अंतिम छोर पर जहां नहर समाप्त होकर किसी नाले मे मिलती है, उस स्थान पर किलो मीटर स्टोन लगाया जाना। 40 हजार किलोमीटर की नहर प्रणाली में मनरेगा की सहायता से सफाई का कार्य किया जाना। जलाशयों में यदि रिसाव की स्थिति हो तो रिसाव रोकने के लिये पडल तथा आवश्यक हटिंग कार्य किये जा रहे हैं। तालाब के पाल (बंड) की मिट्टी के कटाव अथवा क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में पुनः निर्मित किये जाने का कार्य। तालाबों की पिचिंग, बोल्डर टो तथा घाट आदि की मरम्मत का कार्य। स्टॉप-डेम, बैराज, वियर में गेट लगाना तथा मेन-वॉल, साइड-वॉल, की-वॉल, एप्रॉन इत्यादि में मरम्मत/अतिरिक्त निर्माण कार्य। जल संरचनाओं के किनारों पर यथा संभव बफर – जोन तैयार किए जाकर जल संरचनाओं के किनारों पर अतिक्रमण को रोकने के लिये फेंसिंग के रूप में वृक्षारोपण का कार्य किए जाना। फ्लशबार की मरम्मत का कार्य किए जाना। स्लूस वैल की सफाई का कार्य किए जाना।   recent visitors 41

भारत निर्वाचन आयोग, चुनावी प्रक्रिया को मजबूत बनाने पार्टी अध्यक्षों और वरिष्ठ नेताओं से करेगा बातचीत

भोपाल भारत निर्वाचन आयोग ने कानून ढांचे के अंतर्गत चुनावी प्रक्रियाओं को और मजबूत बनाने के लिए पार्टी अध्यक्षों और वरिष्ठ नेताओं को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। आयोग ने मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों से ईआरओ, कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय स्तर पर अनिराकृत प्रकरणों की 30 अप्रैल, 2025 तक जानकारी मांगी है। आयोग ने इस संबंध में राजनीतिक दलों को व्यक्तिगत रूप से पत्र भी जारी किया है। पिछले सप्ताह भारत निर्वाचन आयोग द्वारा एक सम्मेलन किया गया था। इसमें भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार ने सभी प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों के साथ बैठक की थी। बैठक में उन्होंने सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सीईओ, डीईओ और ईआरओ को राजनीतिक दलों के साथ नियमित बैठक करने और प्राप्त सुझावों पर नियमानुसार निराकरण करने के निर्देश दिए थे। आयोग ने राजनीतिक दलों से विकेंद्रीकृत जुड़ाव के इस तंत्र का सक्रिय रूप से उपयोग करने का आग्रह भी किया है। चुनाव प्रकिया से संबंधित 28 हितधारक हैं, जिसमें राजनीतिक दल एक प्रमुख हितधारक है। जिन्हें संविधान और वैधानिक ढांचे के तहत चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े सभी पहलुओं में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मान्यता दी गई है। आयोग द्वारा राजनीतिक दलों को जारी किए गए पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और 1951; निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960; चुनाव संचालन नियम, 1961; माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश और भारत निर्वाचन आयोग द्वारा समय-समय पर जारी निर्देश, मैनुअल और हैंडबुक (ईसीआई वेबसाइट पर उपलब्ध) ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए एक विकेंद्रीकृत, मजबूत और पारदर्शी कानूनी ढांचा स्थापित किया है।   recent visitors 43

पशुओं की बीमारियों के समुचित इलाज के लिए वैकल्पिक पशु चिकित्सा पद्धतियों का उपयोग भी आवश्यक: मंत्री लखन पटेल

भोपाल पशु पालन एवं डेयरी राज्यमंत्री, स्वतंत्र प्रभार श्री लखन पटेल ने कहा है कि पशुओं की बीमारियों के समुचित इलाज के लिए वैकल्पिक पशु चिकित्सा पद्धतियों का उपयोग भी आवश्यक है। वर्तमान में आधुनिक चिकित्सा पद्धति के कारण मनुष्यों एवं पशुओं में जीवाणु रोधी दवाइयां के प्रति प्रतिरोधकता का बढ़ना महामारी का रूप ले रहा है, जो एक भयानक वैश्विक खतरा बनता जा रहा है। आधुनिक चिकित्सा पद्धति से एवं एंटीबॉयोटिक के दुरुपयोग से इसका दुष्प्रभाव मनुष्य एवं पशुओं में देखा जा रहा है, जिसके कारण एएमआर (एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस) की वैश्विक समस्या उत्पन्न हो गई है। अल्टरनेट वेटरिनरी प्रैक्टिस जैसे आयुर्वेद, होम्योपैथी, पारंपरिक चिकित्सा, यूनानी चिकित्सा इत्यादि का प्रयोग अत्यंत आवश्यक है, जिससे कम खर्च पर आसानी से पशुओं की बिना किसी दुष्प्रभाव के चिकित्सा की जा सकती है। पशु पालन राज्यमंत्री श्री पटेल ने मंगलवार को होटल पलाश रेसीडेंसी में “पशुओं की वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति” पर दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यशाला में पूर्व मंत्री उत्तर प्रदेश श्री महेंद्र सिंह, दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट के श्री अभय महाजन, अध्यक्ष, वेटनरी काउंसिल ऑफ इंडिया डॉ. उमेशचंद शर्मा, संचालक, पशुपालन एवं डेयरी डॉ. पी एस पटेल आदि उपस्थित थे। कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों के 13 विषय विशेषज्ञ और लगभग 100 से अधिक विभागीय अधिकारी शामिल हुए। पशु पालन राज्यमंत्री श्री पटेल ने कहा कि भारत में आदिकाल से पारंपरिक एवं वैकल्पिक पशु चिकित्सा पद्धति का उपयोग किया जाता था, जिसे पुनः पशुओं की चिकित्सा में बढ़ावा देने एवं जन-जन तक पहुंचाने के लिए कार्यशाला आयोजित की गई है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि दो दिवसीय इस कार्यशाला में विषय विशेषज्ञों के विचार मंथन से पशु चिकित्सा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुझाव आयेंगे।   recent visitors 38