गर्मी में पानी की कमी से बाघों के बीच वर्चस्व की जंग, जंगल की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा

उमरिया मध्य प्रदेश के जंगलों में गर्मी के मौसम के दौरान बाघों के बीच वर्चस्व की जंग और तेज हो जाती है। इस बार ऐसा न होने पाए, इसकी तैयारी में वन प्रबंधन जुटा हुआ है। इसके लिए जंगलों में समर अलर्ट घोषित किया गया है और जंगल की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मौसम में परिवर्तन के साथ न सिर्फ जंगल के स्वरूप में परिवर्तन होने लगता है, बल्कि वन्य प्राणियों के विचरण में भी परिवर्तन दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि उनकी सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता होती है। पानी का संकट यूं तो जंगलों में पानी के संकट को दूर करने के लिए अब सोलर पावर पंप का उपयोग किया जाने लगा है। प्रदेश के छह टाइगर रिजर्व में करीब साढ़े तीन सौ सोलर पावर पंप के माध्यम से वाटर होल भरे जाते हैं। जबकि प्राकृतिक जल स्रोतों को भी संरिक्षत किया जाता है। इसके बाद भी पानी की कमी कहीं न कहीं गर्मी के दिनों में उत्पन्न हो जाती है और ज्यादा उम्र के बाघ पानी की तलाश में अपना क्षेत्र छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। इस दौरान उनका दूसरे बाघों से आमना-सामना हो जाता है। जंगल की आग महुआ का सीजन होने के कारण जंगल के बाहरी हिस्सों में गांवों के नजदीक अक्सर लोग आग लगा देते हैं। आग के कारण बफर जोन में सक्रिय बूढ़े और कमजोर बाघ उस स्थान को छोड़ने के लिए मजबूर हो जाते हैं। घने जंगल के अंदर पहुंचते ही फिर उनका सामना जवान और ताकतवर बाघों से होता है और इस तरह वर्चस्व की जंग शुरू हो जाती है। बांधवगढ़ में जंग बांधवगढ़ के खितौली रेंज में इन दिनों डी-वन बाघ सक्रिय हो गया है जो दूसरे बाघों को इस तरफ टिकने नहीं दे रहा है। छोटा भीम के घायल होने के बाद जब से उसे भोपाल के वन विहार शिफ्ट किया गया है, तबसे उसके संपूर्ण क्षेत्र में डी-वन का कब्जा हो चुका है। डी-वन इन दिनों अपनी प्राइम ऐज में है। ऐसे में बाघ लगातार अपनी टेरिटरी बढ़ाता है। हाल ही में इसी बाघ ने बाघिन तारा के दो शावकों को मौत के घाट उतार दिया था। यहां का एक दूसरा बाघ पुजारी भी अब लगभग दस साल का हो चुका है। स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में वर्चस्व की जंग तेज हो सकती है। रक्षा के लिए ये इंतजाम     जंगलों में गश्त बढ़ाई गई और सुरक्षा श्रमिकों की संख्या भी।     पानी की कमी नहीं होने पाए इसके इंतजाम पर रख रहे हैं नजर।     जीरो फायर मिशन के तहत जंगल में आग नहीं लगे इसके लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है।     जिन क्षेत्रों में बाघों की आपसी दूरी सामान्य से कम है वहां हाथी दल के माध्यम से नजर रखी जा रही है।   recent visitors 46

अब चंदन नगर चौराहे पर बनेगा फ्लाई ओवर, ट्रैफिक का दबाव होगा काम, जाम से मिलेगी निजात

 इंदौर  इंदौर के गंगवाल बस स्टैंड से चंदन नगर चौराहा होते हुए धार रोड आना-जाना किसी मुसीबत से कम नहीं है। यहां दिनभर ट्रैफिक का दबाव रहता है और कई बार जाम लगता है। यह समस्या जल्द हल होने वाली है, क्योंकि चंदन नगर चौराहे पर फ्लाई ओवर बनेगा। महापौर के प्रस्ताव पर इंदौर विकास प्राधिकरण (आइडीए) ब्रिज का फिजिबिलिटी सर्वे कराएगा। ट्रैफिक समस्या से राहत इंदौर में ट्रैफिक समस्या के निदान के लिए प्रमुख चौराहों पर ओवर ब्रिज बनाए जा रहे हैं। इसी क्रम में चंदन नगर चौराहे का नाम भी दर्ज होने जा रहा है। इस चौराहे से धार, रतलाम, झाबुआ और अहमदाबाद से इंदौर आने-जाने वाले वाहन गुजरते हैं। भारी वाहनों के अलावा ट्रेवल्स की बसों और बड़ी संख्या में निजी वाहनों की आवाजाही भी रहती है। भारी ट्रैफिक होने से हर दिन सुबह व शाम जाम लगता है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव का कहना है कि चंदन नगर चौराहे पर फ्लाई ओवर बनाने का प्रस्ताव रखा है। इसे आइडीए बनाएगा। सिक्स लेन फ्लाई ओवर जिला अस्पताल के पास से शुरू होकर सिरपुर तालाब के आगे उतरेगा। डेढ़ लाख से अधिक गुजरते हैं वाहन चंदन नगर चौराहे से करीब डेढ़ लाख वाहन नियमित गुजरते हैं। धार रोड पर दूर-दूर तक बसाहट होने से रहवासी भी शहर में आने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। सड़क किनारे सब्जी व फल वाले ठेला लगा लेते हैं, जिससे ट्रैफिक उलझता है और हटाने के बात पर कई बार विवाद की स्थिति बन चुकी है। फ्लाई ओवर बनने से यह समस्या भी दूर होगी। डेढ़ दर्जन चौराहों का हो रहा सर्वे हाल ही में आइडीए ने भंवरकुआं, फूटी कोठी, खजराना और लवकुश चौराहे पर ओवर ब्रिज बनाए हैं। इनसे काफी राहत मिली है। शहर के अन्य डेढ़ दर्जन से अधिक चौराहों पर ब्रिज को लेकर फिजिबिलिटी सर्वे चल रहा है। नगर निगम बनाएगा सड़क तीन दशक से अधूरे पश्चिमी रिंग रोड को पूरा करने की तैयारी है। चंदन नगर से मोहता बाग के बीच 18 मीटर चौड़ी और दो किमी लंबी सड़क नगर निगम बनाएगा। इसके लिए शासन से 25.63 करोड़ मांगे हैं। शहर के मध्य व दक्षिण से वाहन चालकों को एयरपोर्ट रोड की ओर जाने व आने के लिए यह सड़क काफी राहत वाली साबित होगी। अभी राज मोहल्ला, बड़ा गणपति से कालानी नगर वाले मार्ग से आना-जाना पड़ता है। recent visitors 41

ओएफके में भी बफीर्ली पहाड़ियों में बर्फ का वबंडर बनाने वाले 84 एमएम अटेक्स तैयार किया गया

जबलपुर निगमीकरण के बाद आयुध निर्माणियों में नए डिफेंस प्रोडक्ट के निर्माण को लेकर तेजी आई है। शहर की चारों निर्माणियां भी इसमें आगे हैं। टी-72 टैंक प्रोजेक्ट इसमें सबसे नया है। अब धनुष से आगे के फीचर वाली तोप का निर्माण चल रहा है। दूसरी तरफ ब्रहोस मिसाइल के बारहेड की फिलिंग और टैंक भेदी बम के नए वर्जन बन रहे हैं। आयुध निर्माणियों में नए उत्पाद जुड़े आयुध निर्माणियों में 18 मार्च को स्थापना दिवस मनाया जाता था। इस अवसर पर ओएफके, जीसीएफ, वीएफजे और ओएफजे (पूर्व नाम जीआइएफ) में प्रदर्शनी लगती थी। इनके सभी हथियारों का प्रदर्शन किया जाता था। लोग इन्हें अपने हाथों से छूने के साथ ही विध्वंसक क्षमता की जानकारी जुटाते थे। लेकिन निगमीकरण के बाद आयुध निर्माणी दिवस नहीं मनाया जाता। एक पखवाड़े में आएंगे दो टी-72 टैंक सेना के लिए वाहन बनाने वाली वीकल फैक्ट्री जबलपुर (वीएफजे) अब टैंक की ओवरहालिंग करेगा। इसे एमआरओ प्रोजेक्ट नाम दिया गया है। वीएफजे के पीआरओ विपुल वाजपेयी बताते है कि एक पखवाड़े के भीतर चेन्नई की ऑर्डनेंस फैक्ट्री आवडी से दो टी-72 टैंक जबलपुर लाए जाएंगे। उसके लिए यूनिट तैयार कर ली गई है।  टोड से माउंटेड गन सिस्टम पर काम गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) ने 155 एमएम 45 कैलीबर धनुष तोप का निर्माण कर रक्षा क्षेत्र में नया रेकॉर्ड बनाया था। जीसीएफ के महाप्रबंधक राहुल चौधरी ने बताया कि अब इससे आगे 155 एमएम 52 कैलीबर टोड और माउंटेड धनुष तोप बनाई जाएगी। इसके प्रोटोटाइप बन चुके हैं। इसी प्रकार डबल बैरल एल-70 एंटी एयरक्राफ्ट गन भी बनेगी। जमीन से आसमान तक मार ओएफके में भी बफीर्ली पहाड़ियों में बर्फ का वबंडर बनाने वाले 84 एमएम अटेक्स तैयार किया गया है। बहोस मिसाइल के वारहेड में बारूद की फिलिंग का ट्रायल चल रहा है। एल-70 एंटी एयरक्राट एमुनेशन को अपग्रेड किया गया है। recent visitors 23

भारतीय थल सेना : अग्निवीर भर्ती के लिए सेना भर्ती कार्यालय रायपुर ने अधिसूचना की जारी

रायपुर भारतीय थल सेना में अग्निवीर भर्ती के लिए सेना भर्ती कार्यालय रायपुर द्वारा अधिसूचना जारी की गई है, जो भारतीय सेना की वेबसाइट ज्वाइन इंडियन आर्मी डॉट एनआईसी डॉट इन पर उपलब्ध है। इस वेबसाइट में भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रकिया 12 मार्च से प्रारंभ की गई है जो 10 अप्रैल तक खुली रहेगी। इन युवाओं की सुनहरा मौका कक्षा आठवीं और दसवीं (हाईस्कूल) परीक्षा उत्तीर्ण योग्य युवाओं के लिए सुनहरा अवसर है। अग्निवीर की भर्ती जनरल ड्यूटी, तकनीकी स्टॉफ, क्लर्क, ट्रेडमेन, महिला सैन्य पुलिस और रेगुलर कैडर भर्ती, धर्मगुरू, नर्सिंग, सहयोगी, सिपाही, फार्मासिस्ट आदि श्रेणी में की जाएगी। अग्निवीर क्लर्क के उमीदवारों को ऑनलाइन परीक्षा (सीईई) के समय टाइपिंग टेस्ट भी देना होगा। ऑनलाइन परीक्षा (सीईई) जून 2025 के बाद होने की संभावना हैं। अन्य किसी भी प्रकार की जानकारी और समस्या के लिए सेना भर्ती कार्यालय रायपुर में संपर्क कर सकते हैं। इस बार भर्ती वर्ष 2025-26 से ऑनलाइन सामान्य प्रवेश परीक्षा और रैली के आयोजन में कुछ बदलाव किए गए हैं। ऑनलाइन सामान्य प्रवेश परीक्षा 13 भाषाओं अंग्रेजी, हिंदी, मलयालम, कन्नड़, तमिल, तेलुगु, पंजाबी, उड़िया, बंगाली, उर्दू, गुजराती, मराठी और असमिया में आयोजित की जाएगी। Agniveer Recruitment 2025: यहां देख सकते हैं पूरी जानकारी सेना भर्ती कार्यालय रायपुर के मुताबिक अग्निवीरों की भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की जा चुकी है। इंडियन आर्मी की वेबसाइट www.joinindianarmy.nic.in पर उपलब्ध है। भर्ती के लिए 17 से 21 साल के अभ्यर्थी अग्निवीर के दो पदों के लिए अपनी योग्यता अनुसार आवेदन कर सकते है। recent visitors 39

माँ ने सालों बाद कबूला काला सच, बेटी के एक्स से हो गई थी गर्भवती

लंदन 16साल से एक काला सच दबाकर बैठी थी। लेकिन जब दबाना हुआ मुश्किल तो सोशल मीडिया पर कबूल किया कि उसने अपनी बेटी के पति के साथ शारीरिक रिश्ता बनाया था। पूरी कहानी दंग कर देगी। आज जो हकीकत आप पढ़ने जा रहे हैं वो किसी कहानी सरीखी लगती है, लेकिन ये एक सच्ची कहानी है। ये एक मां का कुबूलनामा है जिसने अपनी बेटी से ऊपर हमेशा ड्रग्स और नशे को रखा। ये हकीकत है उस महिला की ज़िंदगी की जिसने नशे में डूबकर एक ऐसी शर्मनाक हरकत कर डाली, जिसके बाद वो अपनी ही बेटी से नज़र नहीं मिला सकी। लेकिन घटना के 16 साल बाद इस मां ने दुनिया के सामने आकर अपना सच बताया है। एक ऐसा सच जिसे जिस किसी ने सुना, जिस किसी ने पढ़ा, हैरान हो गया। इस महिला के मन पर उस घटना का ऐसा भार था, जिसे कम करने के लिए उसने Reddit पर स्वीकार किया कि वो अपनी बेटी के एक्स ब्वायफ्रेंड के साथ हमबिस्तर हुई। लेकिन उसे धक्का तब लगा जब इस घटना के कुछ समय बाद एक बार फिर उसकी बेटी और ब्वॉयफ्रेंड रिलेशनशिप में दोबारा आ गए। वो बताती हैं, 'मैं 38 साल की थी और मेरी बेटी 18 साल की थी। मेरी बेटी हैरी से डेटिंग कर रही थी जो 24 साल का था। मैं शराबी थी और दूसरे नशीले पदार्थों का सेवन करती थी, खासकर कोकीन का। मैं एक अच्छी इंसान नहीं थी, मां तो दूर की बात है। ऐसा नहीं है कि मैं अपनी बेटी के साथ दुर्व्यवहार करती थी या कुछ और लेकिन मैं आमतौर पर लापरवाह थी। अपनी बेटी से ज़्यादा अपनी शराब और नशीले पदार्थों के बारे में सोचती थी, खासकर जब वह किशोरावस्था में थी। बेटी ने नशे की वजह से ब्वॉयफ्रेंड को छोड़ दिया था उसने आगे लिखा, 'मैं अब 14 साल से शराब नहीं पी रही हूं। मैंने हमेशा अपनी बेटी को हैरी के साथ डेटिंग को गलत बताया लेकिन मैं उसे कभी भी इसकी वजह नहीं बता सकी। वह लगातार मेरे साथ फ्लर्ट करता था। वो भी मेरी तरह ड्रग्स और नशे का आदि था। हम दोनों के बीच उम्र का अंतर भी मुझे परेशान करता था। एक बात हम दोनों में कॉमन थी, वो ये कि वो भी मेरी तरह शराबी और ड्रग्स का नशा करने वाला था। उसकी इसी आदत की वजह से मेरी बेटी उससे अलग हो गई। इसके तुरंत बाद वह दूर चली गई, बहुत दूर नहीं, लेकिन फिर भी वह अब मेरे साथ नहीं रहती थी।' बेटी के एक्स से हो गई थी गर्भवती बेटी के साथ रिश्ता हैरी का भले ही खत्म हो गया था। लेकिन मां को वो ड्रिंक और घूमने के नाम पर बुलाता रहा। कई बार महिला ने उसे मना किया, लेकिन आखिरकार हार मान ली और उससे मिलने चली गई। इसी के साथ दोनों के बीच टॉक्सिक रिलेशनशिप की शुरुआत हुई। एक दिन वो बहुत सारा कोक लेकर आया और मैं उसका विरोध नहीं कर पाई। हमने कोक का सेवन किया और फिर सेक्स। इसके बात करीब चार महीने तक हम कभी-कभी मिलते थे और सेक्स करते थे। कोई भी ड्रग एडिक्ट जानता है कि इस तरह से ड्रग एडिक्ट दोस्त होना कैसा होता है। फिर मैं गर्भवती हो गई। मुझे पता था कि यह उसी की वजह से है, मैंने बेवकूफी में कई बार बिना कंडोम के सेक्स किया। मैंने उसे कभी नहीं बताया कि मैं गर्भवती हूं, और मैंने जाकर गर्भपात करवा लिया और इसे गुप्त रखा।' बेटी एक्स से दोबारा मिली और कर ली शादी इसके बाद मैंने उससे मिलना बंद कर दिया। दो साल बाद मेरी बेटी ने हैरी के बदलाव के बारे में बताया। उसने बताया कि वो शराब पीना छोड़ चुका है और वो पूरी तरह बदल गया है। वो दोनों फिर से साथ हैं। उनका रिश्ता ठीक चल रहा है। महिला आगे बताती है कि मैं सच में बेटी की बात सुनकर शर्मिदा थी। मैं उसे बताने वाली थी कि हम एक साथ सोए। मुझे इस बात का अहसास था कि वो मुझसे अब सारी ज़िंदगी नफरत करेगी। लेकिन एक दिन हैरी मेरी बेटी के साथ मुझसे मिलने आया। मेरी बेटी की गैर मौजूदगी में उसने मुझसे कहा कि जो कुछ भी हमारे बीच हुआ, उसके बारे में उसे बताने की कोई वजह नहीं है। मैंने उसकी बात मान ली। उनकी शादी को अब 16 साल हो चुके हैं और उनका एक बच्चा भी है। हैरी को कैंसर हुआ लेकिन वो कैंसर से जंग जीत गया। नाती को देखकर चीजें अजीब लगती है "मैं उनसे हमेशा नहीं मिल पाती। वे टेक्सास में रहते हैं और मैं ईस्ट कोस्ट पर रहती हूं। लेकिन हम जब भी मिलते हैं मेरे और हैरी के बीच एक तनाव सा रहता है। तमाम बातें दिमाग में आती हैं। सेक्स के बारे में नहीं लेकिन अक्सर लगता है हमने ऐसा क्यों किया या हमें ऐसा क्यों करना पड़ा? ख़ासकर जब मैं अपने नाती को देखती हूं तो लगता है कि चीज़ें अलग होतीं तो वो मेरा बेटा हो सकता था। लेकिन अगर मैंने उस बच्चे को रखने का फैसला कर लिया होता तो कितनी बड़ी दिक्कत खड़ी हो सकती थी।" ये एक मां की सच्चाई थी जिसे वो सालों से जी रही है, लेकिन अंदर की घुटन को शांत करने के लिए उन्होंने अपना सच दुनिया के सामने रखा, ये जानते हुए भी कि अगर उनकी बेटी ये जान जाती है तो उन सभी की ज़िंदगी में कितना बड़ा तूफान आ सकता है recent visitors 39

नगरीय निकायों में स्वच्छता को जन-आंदोलन बनाने के प्रयास

भोपाल मध्यप्रदेश में नगरीय निकायों में हर साल की तरह स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 शुरू हो चुका है। इस साल इसमें देश के 4900 से अधिक शहर स्वच्छता में श्रेष्ठता की दावेदारी प्रस्तुत कर रहे हैं। स्वच्छ सर्वेक्षण मुख्य रूप से जमीनी स्वच्छता के साथ शहरों के स्वच्छता प्रमाणीकरण के लिए किया जा रहा है। प्रमाणीकरण में खुले में शौच से मुक्ति के लिए ओडीएफ, जल के पुन: उपयोग के लिए वॉटर प्लस और कचरा मुक्ति हेतु स्टार रेटिंग प्रमुख हैं। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत नगरीय निकायों की टीम साल भर काम करती हैं। इसमें नियमित रूप से सफाई के अलावा, कचरा संग्रह, प्र-संस्करण, अधोसंरचना विस्तार, रख-रखाव और शहरों का सौंदर्यीकरण शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हस्तक्षेप से आज यह देश ही नहीं दुनिया का सबसे बड़ा आयोजन बन गया है। हर शहर को इसमें शामिल होना और अपनी रैंकिंग में सुधार करना गौरव का अनुभव कराता है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने स्वच्छ सर्वेक्षण के संबंध में मैदानी अमले को निर्देश भी जारी किये हैं। वर्ष-2024 का स्वच्छ सर्वेक्षण अब तक का 9वां सर्वेक्षण है, जिसकी प्रमुख थीम 3-आर (रिसाइकल, रिड्यूस, रियूज) पर आधारित है। इसके प्रारंभ होने से मध्यप्रदेश ने देश के स्वच्छता परिदृश्य में अपनी बढ़त बना ली थी। अपने नियमित योगदान से मध्यप्रदेश शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। वर्ष 2022 में मध्यप्रदेश को देश के सर्वश्रेष्ठ स्वच्छ प्रदेश का सम्मान प्राप्त हुआ एवं वर्ष 2023 में यह नजदीकी मुकाबले में देश के दूसरे नंबर का बेहतर राज्य घोषित किया गया। मध्यप्रदेश का शहर इंदौर लगातार सात सालों से देश का सबसे स्वच्छ शहर बना हुआ है। वर्ष 2024 में इसे सुपर लीग श्रेणी में शामिल किया गया है। इस वर्ष मध्यप्रदेश के सभी शहर इसमें अपनी दावेदारी कर रहे हैं। प्रदेश के सभी शहरों ने स्टार रेटिंग, ओडीएफ डबल प्लस के लिए अपना दावा किया है। इसके अलावा 44 शहरों ने वॉटर प्लस के लिए अपनी दावेदारी की है। हर शहर स्वच्छता के मापदंडों पर सफाई, संग्रहण, कचरा निपटान, प्रोसेसिंग आदि पर पूरा ध्यान दे रहा है। आज प्रदेश में लगभग 6700 टन कचरा प्रतिदिन संग्रह किया जाता है। इसके लिए 7500 से अधिक कचरा वाहन उपलब्ध कराए गए हैं। इस संग्रहित कचरे की प्रोसेसिंग के लिए हर छोटे-बड़े शहर में कम्पोस्टिंग इकाइयां, मटेरियल रिकवरी फैसिलिटीज, निर्माण अपशिष्ट प्रबंधन इकाई और मल-जल निस्तारण के लिये एफएसटीपी उपलब्ध हैं। प्रदेश के बड़े शहरों में कचरा प्रोसेसिंग के लिए अत्याधुनिक इकाइयों की स्थापना की गई है। इसमें जबलपुर और रीवा में कचरे से बिजली, सागर व कटनी में कम्पोस्टिंग, के साथ इंदौर में कचरे से बॉयो सीएनजी निर्माण की इकाइयां लगाई जा चुकी हैं। इसके अलावा भोपाल में कपड़ा, थर्माकोल, प्लास्टिक, निर्माण के साथ मांसाहारी बाजारों से आने वाले कचरे के निपटान के लिए व्यवस्थाएं की गई हैं। प्रदेश में आज 700 से अधिक रिसाइकल, रिड्युज और रियूज़ (आरआरआर) केंद्र संचालित हैं। प्रदेश में एक लाख से कम जनसंख्या के शहरों में मल-जल प्रबंधन व्यवस्थाओं को तैयार करने के लिए कार्यवाही की जा रही है। इसके अंतर्गत जिन शहरों में सीवेज लाइन नहीं हैं, वहाँ नालियों को आपस में जोड़कर उन्हें एसटीपी तक ले जाने का कार्य किया जा रहा है।   recent visitors 27

छत्तीसगढ़ में अब अवैध धर्मांतरण रोकने सख्त कानून बनाया जाएगा

रायपुर छत्तीसगढ़ में अब गैरकानूनी रूप से धर्म परिवर्तन करना गुनाह है। प्रदेश के डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने साफ कहा है कि इसे रोकने के लिए सख्त कानून बनाया जाएगा। विजय शर्मा डिप्टी सीएम होने के साथ छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री भी हैं। आज विधानसभा में भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने धार्मिक धर्मांतरण का मुद्दा उठाया था। चंद्राकर ने कहा कि 'चंगाई सभा' (उपचार बैठक) के बहाने निर्दोष,असहाय,गरीब लोगों को प्रलोभन के माध्यम से धर्मांतरित किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि स्वास्थ्य,शिक्षा और सामाजिक कार्य क्षेत्रों में काम करने के उद्देश्य से बने एनजीओ विदेशी देशों से धन प्राप्त कर रहे हैं,जिसका कथित रूप से धर्मांतरण गतिविधियों के लिए उपयोग किया जा रहा है। राज्य में ऐसे कई एनजीओ हैं,जो धार्मिक आधार पर पंजीकृत हैं और विदेशों से धन भी प्राप्त कर रहे हैं। अजय चंद्राकर ने आरोप लगाया कि बस्तर जिले में 19 पंजीकृत संगठनों में से 9 और जशपुर जिले में 18 संस्थानों में से 15 ईसाई मिशनरियों की ओर से चलाए जा रहे हैं। इन संगठनों पर नियंत्रण की कमी के कारण धर्मांतरण गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर संगठन जशपुर जिले (मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का गृह जिला) में काम कर रहे हैं,जहां धर्मांतरण के ज्यादातर मामले सामने आते हैं। भाजपा विधायक ने इस साल की शुरुआत में बिलासपुर और रायपुर जिलों में पुलिस में दर्ज धार्मिक धर्मांतरण के कुछ मामलों का भी हवाला दिया। धर्मांतरण में विदेशी फंडिंग के उपयोग से इनकार नहीं किया जा सकता। चंद्राकर ने दावा किया कि हालांकि सरकार ऐसे फंडों पर प्रतिबंध लगाने का दावा करती है,लेकिन ये संस्थान ऑडिट रिपोर्ट न देकर अपना रास्ता निकाल लेते हैं। अपने जवाब में उपमुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि यह कहना सही नहीं है कि एनजीओ पर स्थानीय प्रशासन के नियंत्रण की कमी के कारण धर्मांतरण की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस उचित जांच करती है और जब ऐसी चंगाई सभाओं में लोगों को धर्मांतरित करने के लिए लुभाने की शिकायतें मिलती हैं तो तुरंत कानूनी कार्रवाई करती है।शर्मा ने कहा कि 2020 में एक मामला दर्ज किया गया,2021 में सात, 2022 में तीन,2023 में शून्य,2024 में कुल 12 और 2025 में अब तक चार मामले दर्ज किए गए हैं। इसके बाद चंद्राकर ने कहा कि यह मुद्दा बहुत गंभीर है और मुख्यमंत्री साय ने हाल ही में इसके बारे में बात की है। राज्य में विदेशी धन प्राप्त करने वाले एनजीओ का निरीक्षण यह सुनिश्चित करने के लिए कि ऐसी सहायता का उपयोग धार्मिक धर्मांतरण सहित अवैध गतिविधियों में नहीं किया जा रहा है। चंद्राकर ने राज्य में विदेशी धन प्राप्त करने वाले एनजीओ का विवरण और क्या ऐसे संस्थानों के खिलाफ कोई शिकायत मिली है। शर्मा ने कहा कि विदेशी धन प्राप्त करने वाले एनजीओ विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) के तहत पंजीकृत हैं और केंद्रीय गृह मंत्रालय ऐसे विदेशी धन की प्राप्ति की निगरानी करता है। शर्मा ने कहा कि पहले राज्य में 364 एनजीओ थे जो विदेशी धन प्राप्त कर रहे थे। इसके बाद,चंद्राकर ने पूछा कि क्या सरकार अवैध धार्मिक धर्मांतरण को रोकने के लिए नए प्रावधान या कानून लाएगी। जवाब में डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बहुत गंभीर है। हालांकि छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम लागू है,सरकार सोच रही है कि नए कानूनी प्रावधान लागू होने चाहिए। उचित समय पर नए प्रावधान पेश किए जाएंगे। विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए विजय शर्मा ने कहा कि पुलिस प्रशासन अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए पूरी गंभीरता से काम कर रहा है। वर्तमान में, पुराने प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा रही है। सरकार नए प्रावधानों की आवश्यकता पर विचार कर रही है। हम जल्द ही नया कानून लाएंगे। अवैध धार्मिक धर्मांतरण को रोकने के लिए जल्द ही एक सख्त कानून बनाया जाएगा। recent visitors 37