ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और रीजनल कॉन्क्लेव के निवेशकों को MP में प्लॉट लेना महंगा हो गया

भोपाल  मध्यप्रदेश में मई में निवेशक और उद्योगपति औद्योगिक क्षेत्रों में प्लॉट के लिए आवेदन कर सकेंगे। अब नई कलेक्टर गाइडलाइन के रेट लागू होने के बाद प्लॉट 30 से 50% तक महंगे हो गए हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और रीजनल कॉन्क्लेव में आए निवेशकों को भी प्लॉट लेना महंगा हो गया है। मध्यप्रदेश इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन ने अपने औद्योगिक पार्कों में 319 प्लॉट निकाले हैं। एमएसएमई पोर्टल के जरिए प्लॉट आवंटन प्रक्रिया एक मई से शुरू होने जा रही है। इसमें सूक्ष्म, लघु और मध्ययम उद्यमों के लिए लगभग 1100 प्लॉट उपलब्ध होंगे। एमएसएमई में प्रक्रिया में बदलाव के चलते पिछले करीब सात माह से प्लॉट(Property Rate) आवंटन बंद था। इस संबंध में उद्योग आयुक्त दिलीप कुमार ने बताया कि भूमि आवंटन के लिए पोर्टल बनाया गया है। इसी पर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकेगा। ऑनलाइन ही प्रस्ताव मंगाकर ई-ऑक्शन के माध्यम से प्लॉट आवंटन किया जाएगा। अब पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर प्लॉट आवंटन बंद कर दिया गया है। प्लॉट्स की नई दरें जारी कर दी गई हैं। इसी के अनुसार आवंटन होगा। पीथमपुर में जमीन सबसे ज्यादा महंगी नई कलेक्टर गाइडलाइन में प्रदेश में जमीन के औसतन रेट 30% तक बढ़े हैं। कुछ स्थानों पर 50% तक। एमपीआइडीसी के इंदौर, पीथमपुर, उज्जैन, देवास, जबलपुर, ग्वालियर के औद्योगिक क्षेत्रों में रेट ज्यादा बढ़े हैं। पीथमपुर में 50% तक रेट बढ़े हैं। जीआइएस, रीजनल कॉन्क्लेव में इन्हीं क्षेत्रों में निवेश के प्रस्ताव ज्यादा आए हैं। निवेशक यदि अब जमीन आवंटन कराएंगे तो 50% ज्यादा रेट देना होगा। एमएसएमई के औद्योगिक क्षेत्रों में भी मक्सी, उज्जैन, ग्वालियर, सुभाषनगर सागर, भोपाल के गोविंदपुरा आदि क्षेत्रों मेंरेट ज्यादा बढ़े हैं। एमपीआइडीसी के प्लॉट 15 जिलों में एमपीआइडीसी ने धार, झाबुआ, भिण्ड, मुरैना, ग्वालियर, उज्जैन, नीमच, रतलाम, पांढुर्णा, छिंदवाड़ा, राजगढ़, विदिशा, कटनी, मंडला और जबलपुर जिलों के औद्योगिक क्षेत्रों में कुल 319 प्लॉट निकाले हैं। एमपीआइडीसी से प्लॉट आवंटन के लिए 9 मई को ऑनलाइन ऑक्शन होगा। recent visitors 28

नक्सली सफाए अभियान के अंतर्गत तेंदूपत्ता ठेकेदार सूचना दिए बगैर जंगल में कैश और वाहन नहीं ले जा सकेंगे

बालाघाट एमपी की बालाघाट पुलिस ने तेंदूपत्ता सीजन में नक्सलियों के फंडिंग रोकने के लिए विशेष प्लान बनाया है. अब ठेकेदार पुलिस को सूचना दिए बगैर जंगल में कैश और वाहन नहीं ले जा सकेंगे. दरअसल, बालाघाट जिले में इस बार 21 ठेकेदार और 58 से अधिक तेंदूपत्ता समितियां काम करेंगी. करीब 720 फड़ों में तुड़ाई और संग्रहण का काम होगा. पुलिस ने 250 तेंदूपत्ता फड़ को नक्सल प्रभावित संवेदनशील श्रेणी में शामिल किया है. नक्सली तेंदूपत्ता के सीजन में अवैध वसूली करते हैं. लेकिन इस पर अंकुश लगाने के लिए बालाघाट पुलिस-प्रशासन ने 2026 नक्सली सफाए अभियान के अंतर्गत विशेष कार्य योजना बनाई है. बता दें कि जिले के दक्षिण और उत्तर सामान्य वनमंडल में तेंदूपत्ता तुड़ाई और संग्रहण का काम होता है. इस काम से स्थानीय आदिवासियों और ग्रामीणों को रोजगार मिलता है. शासन के निर्देश पर मजदूरों को बोनस भी दिया जाता है. बालाघाट का तेंदूपत्ता अच्छी क्वालिटी का होने से महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के ठेकेदार वहां आते हैं. recent visitors 28

धन कुबेर सौरभ के करीबियों पर भी कसेगा शिकंजा, एक इंस्पेक्टर व चार आरक्षकों को लोकायुक्त ने भेजा नोटिस

भोपाल  मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बहुचर्चित RTO के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा (Saurabh Sharma)  से मिली अकूत सम्पत्ति के मामले में भले ही उसके परिजनों को कोर्ट से जमानत की राहत मिल गई हो, लेकिन अब लोकायुक्त की रडार पर सौरभ के करीबी भी आ रहे हैं. इसी कड़ी में मंगलवार को लोकायुक्त (Loka Yukta) ने प्रदेश के विभिन्न  RTO चेक पोस्टों पर तैनात रहे एक इंस्पेक्टर और चार आरक्षकों को लोकायुक्त ने नोटिस भेजकर इस मामले में पूछताछ के लिए तलब किया है. एक मई को पेश होने के दिए आदेश लोकायुक्त भोपाल के जांच अधिकारी डीएसपी वीरेंद्र सिंह ने परिवहन विभाग जरिए  सौरभ शर्मा मामले में परिवहन विभाग के इंस्पेक्टर किशोर सिंह बघेल, सेवानिवृत्त इंस्पेक्टर वीरेश कुमार और तुमराम सहित 4 आरक्षकों को  नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया है. सौरभ शर्मा के नजदीकी कहे जाने परिवहन आरक्षकों में गौरव पाराशर, हेमंत जाटव, धनंजय चौबे, नरेंद्र सिंह भदौरिया को भी लोकायुक्त ने नोटिस जारी किया है.   इस नोटिस में कहा गया है कि सौरभ शर्मा प्रकरण में जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि आपसे तथ्यों के सम्बन्ध और परिस्थितियों को सुनिश्चित करने के लिए प्रश्न पूछने के पास ठोस युक्तियुक्त आधार है. लिहाजा, आपको एक मई को सुबह 11 बजे युक्तियुक्त कार्यालय भोपाल में उपस्थित हों.  गौरतलब है कि भोपाल के जंगल में एक कार में 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपये कैश मिलने के बाद भोपाल आरटीओ के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा सुर्खियों में आए थे. इसके बाद उनके खिलाफ लोकायुक्त, ईडी और इनकम टैक्स की जांच चल रही है. फिलहाल शर्मा अपने सहयोगियों के साथ जेल में बंद है.  recent visitors 40

देश में 12 नदियों को पुनर्जीवित करने वाले ‘जलपुरूष’ राजेन्द्र सिंह आज राजधानी भोपाल में

भोपाल भारत समेत दुनियाभर में ‘जलपुरूष’ के नाम से मशहूर राजेन्द्र सिंह आज  यानी 1 मई को भोपाल प्रवास पर रहेंगे। इन्होंने 12 नदियों को पुनर्जीवित किया, जल संरक्षण के लिए 60 देशों की यात्रा की। यहां तक कि राजेन्द्र सिंह ने सरकारी नौकरी छोड़ अपना जीवन जल संरक्षण के कार्यों में लगा दिया। इनके प्रयासों के ही कारण देशभर में अरवरी, रुपारेल, सरसा, भगानी, महेश्वरा, साबी, तबिरा, सैरनी, जहाजवाली, अग्रणी, महाकाली व इचनहल्ला समेत 12 नदियों को नया जीवन मिला। बता दें कि राजेंद्र सिंह को जल संचयन और जल प्रबंधन में समुदाय-आधारित प्रयासों में अग्रणी कार्य के लिए 2001 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। 1 मई को राजेन्द्र सिंह राजधानी भोपाल में रहेंगे। सुबह साढ़े दस बजे मानस भवन श्यामला हिल्स में राजेन्द्र सिंह ,”जल संसाधन, संरक्षण और संवर्धन पर व्याख्यान देंगे। ऐसे हुई बड़ी शुरूआत बता दें कि 1975 में राजेंद्र सिंह ने राजस्थान विश्वविद्यालय परिसर में अग्निकांड पीड़ितों की सेवा के लिए ‘तरुण भारत संघ’ की स्थापना की थी। इसी दौरान जब वह अलवर के एक गांव पहुंचे तो उन्हें एक बुजुर्ग ने बड़ी चुनौती दे डाली। दरअसल बुजुर्ग ने उनसे कहा कि अगर गांव का इतना ही विकास करना है तो बातें छोड़ गेंती और फावड़ा पकड़ो। हम लोगों की मदद ही करनी है तो गांव में पानी लाओ। राजेंद्र सिंह(Waterman Rajendra Singh) ने यह चुनौती स्वीकार कर ली और अपने दोस्तों के साथ फावड़ा पकड़ इस काम में जुड़ गए। उनकी मेहनत का ही नतीजा था कि राजस्थान में 11800 जल संरचनाएं बनवाई गई। इसके साथ ही उन्होंने 60 देशों में जल संरक्षण के लिए यात्रा भी की। recent visitors 26

मई में 11 दिन बैंकों में रहेगा अवकाश, देख लीजिए पूरी लिस्ट

नई दिल्ली आज  गुरुवार को बैंक बंद रहने वाले हैं। 1 मई 2025 को बैंक देश के ज्यादतर राज्यों में बंद रहेंगे। यानी ग्राहक गुरुवार को बैंक जाकर अपना काम नहीं निपटा सकते।  यहां जानें RBI ने कल गुरुवार 1 मई 2025 की छुट्टी क्यों दी है और किन राज्यों में बैंक बंद रहने वाले हैं। 1 मई को क्यों बंद रहेंगे बैंक? गुरुवार 1 मई को बैंक महाराष्ट्र, कर्नाटक, बिहार, कोलकाता, गोवा, आंधप्रदेश जैसे तमाम राज्यों में बंद रहेंगे। महाराष्ट्र में बैंक महाराष्ट दिवस के कारण बैंक बंद हैं। वहीं, बाकि सभी राज्यों में बैंक लेबर डे के कारण नहीं खुलेंगे। यहां बैंक लेबर डे के कारण बंद हैं। 1 मई को बंद रहेंगे बैंक 1 मई (गुरुवार) – मजदूर दिवस / महाराष्ट्र दिवस: बेलापुर, बेंगलुरु, चेन्नई, गुवाहाटी, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, इंफाल, कोच्चि, कोलकाता, मुंबई, नागपुर, पणजी, पटना और तिरुवनंतपुरम में बैंक बंद रहेंगे। मई में छुट्टियों की पूरी लिस्ट 4 मई (रविवार) – रविवार 9 मई (शुक्रवार) – रवींद्रनाथ टैगोर जयंती: कोलकाता में बैंक बंद रहेंगे। 10 मई (शनिवार) – मई महीने का दूसरा शनिवार 11 मई (रविवार) – रविवार 12 मई (सोमवार) – बुद्ध पूर्णिमा: अगरतला, आइज़ोल, बेलापुर, भोपाल, देहरादून, ईटानगर, जम्मू, कानपुर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, नागपुर, नई दिल्ली, रायपुर, रांची, शिमला और श्रीनगर में बैंक बंद रहेंगे। 16 मई (शुक्रवार) – राज्य दिवस: गंगटोक में बैंक अवकाश रहेगा। 18 मई (रविवार) – रविवार 24 मई (शनिवार) – चौथा शनिवार 25 मई (रविवार) -रविवार 26 मई (सोमवार) – काजी नजरुल इस्लाम की जयंती: अगरतला में बैंक बंद रहेंगे। 29 मई (गुरुवार) – महाराणा प्रताप जयंती: शिमला में बैंक बंद रहेंगे। क्या ऑनलाइन बैंकिंग सर्विस मिलेंगी? हालांकि बैंक शाखाएं इन छुट्टियों पर बंद रहेंगी, लेकिन ग्राहकों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। डिजिटल बैंकिंग सेवाएं जैसे UPI, IMPS, नेट बैंकिंग और मोबाइल ऐप्स सामान्य रूप से काम करते रहेंगे। ग्राहक फंड ट्रांसफर, बिल पेमेंट और अन्य ट्रांजेक्शन कर सकते हैं। ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी बैंक शाखा से जुड़े काम समय से पहले निपटा लें, ताकि छुट्टियों के दौरान कोई असुविधा न हो। 46 दिन तक स्कूलों में छूट्टी मध्यप्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों(School Holiday) में गर्मी की छु‌ट्टी की घोषणा कर दी है। इस बीच छात्रों को गर्मी से राहत मिलेगी और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन छुट्टियों की घोषणा हुई है। 1 मई से लेकर 15 जून तक स्टूडेंट्स को 46 दिन की छुट्टी मिलने वाली है। जबकि शिक्षकों को एक महीने की छुट्टी मिलेगी recent visitors 40

राजधानी भोपाल में 100 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की तैयारी, मैनिट के एक्सपर्ट ने तैयार किया रूट प्लान

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 100 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की तैयारी है। भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड और मैनिट के एक्सपर्ट हैदराबाद की तर्ज पर भोपाल में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का मॉडल तैयार कर रहे हैं। पिछले दिनों हैदराबाद से लाकर कुछ बसों को ट्रॉयल किया गया।   24 लाख आबादी के बीच 200 बसें करीब 24 लाख की आबादी वाले भोपाल शहर में अभी 200 लो लोर बसें संचालित हैं। इनके अलावा कुछ बसें स्थानीय ऑपरेटर्स संचालित करते हैं, इन बसों में क्षमता से 3 गुना ज्यादा यात्री सफर करते हैं। इलेक्ट्रिक बसों के सीमित संख्या में चलते यह समस्या और बढ़ सकती है। अरेरा हिल्स, राज भवन और न्यू मार्केट मैनिट के विशेषज्ञ यह भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि भोपाल के पहाड़ी इलाकों में ओवरलोडेड बसों के संचालन में कोई समस्या न हो। खासकर, अरेरा हिल्स, राज भवन और न्यू मार्केट जैसे चढ़ाई वाले रूट पर इलेक्ट्रिक बसों को आने जाने में परेशनी न हो।    मैनिट के विशेषज्ञों की टीम शहर के पहाड़ी इलाकों के हिसाब से इलेक्ट्रिक बसों में यात्रियों की पूरी संख्या भरने के बाद लोडेड व्हीकल को पहाड़ी की ऊंचाई पर चलने योग्य रूट का चयन करेगी। अरेरा हिल्स, राज भवन, न्यू मार्केट जैसे घाट क्षेत्र में इलेक्ट्रिक बसों ने बेहतर प्रदर्शन किया था। भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड अब इस बात को सुनिश्चित करना चाह रहा है की दोगुनी संख्या में यात्रियों को लेकर चलने के दौरान इन बसों के संचालन में किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो। इसलिए परीक्षण जरूरी भोपाल शहर 24 लाख की आबादी वाला शहर है। इसके मुकाबले भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड एकमात्र ऐसी संस्था है जो सस्ता पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम उपलब्ध कराती है। शहर में बीसीएलएल के अलग-अलग ठेकेदार 200 लो लोर बसों को संचालित करते हैं जिनमें क्षमता से तीन गुना तक ज्यादा यात्री सफर करते हैं। इलेक्ट्रिक बसों के सीमित संख्या में चलने के बाद भी यही हश्र हो सकता है। बीसीएलएल चला रही लो फ्लोर बसें भोपाल में लो फ्लोर बसों के संचालन की जिम्मेदारी संभाल रही कंपनी बीसीएलएल के डायरेक्टर मनोज राठौर ने ई-बसों के संचालन की तैयारियां की जा रही हैं। विषय विशेषज्ञों से भी इसके लिए सलाह ली जा रही है। EV हब बनेंगे इंदौर-भोपाल मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल और इंदौर को ईवी (इलेक्ट्रिक वाहन) हब के रूप में विकासित करने का ऐलान किया है। इन शहरों में ई-रिक्शा और ई-बसों के संचालन पर जोर दिया जा रहा है। आम नागरिकों को भी ई-कार और ई-बाइक खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इनके लिए चार्जिंग स्टेशन सहित अन्य सुविधाएं मुहैया कराए जाने का प्रयास जारी है। recent visitors 41

भेल की 4 हजार एकड़ जमीन पर लगेंगे उद्योग, मोहन सरकार ने जमीन लेने के लिए बनाई कार्ययोजना

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के बीचों-बीच हजारों एकड़ जमीन खाली पड़ी है। इस पर चाहकर भी मध्यप्रदेश सरकार विकास कार्य नहीं कर पा रही है। यहां पर हजारों एकड़ भूमि खुले रूप में मौजूद है। जिस पर अवैध कब्जा हो चुका है। लेकिन अब प्रदेश सरकार ने इसे लेने के लिए नए सिरे से प्रयास शुरू कर दिया है। दरअसल, यह भूमि भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) की है। पूर्व में यह जमीन सरकार मांग चुकी है, लेकिन भेल ने इसे देने से मना कर दिया। अब सरकार इस जमीन को भेल से लेकर उसका पुनर्विकास करने का प्लान बना रही है। मुख्य सचिव अनुराग जैन की निगरानी में यहां प्लान तैयार हो रहा है। 4000 एकड़ पर विकास कार्य का मॉडल यह जमीन थोड़ी बहुत नहीं, बल्कि 4 हजार एकड़ है। जब तक जमीन नहीं मिल जाती, तब तक विकास मॉडल के आधार पर यहां काम किया जाएगा। ये ऐसे मॉडल होंगे, जिनमें भेल की अतिक्रमण वाली खाली पड़ी जमीनों पर भोपाल के विकास से जुड़े प्रोजेक्ट जैसे हाईराइज बिल्डिंग व औद्योगिक इकाईयों का निर्माण किया जाएगा। सीएम मोहन यादव ने कहा कि यह पहल भोपाल के विकास के साथ भेल को भी आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में काम करेगी। राजस्व का होगा 50-50 बंटवारा सरकार भेल से यह जमीन यूं ही नहीं लेने वाली। इसके बदले में जमीन का कुछ हिस्सा भेल को भी विकसित करके दिया जाएगा। यही नहीं, इस जमीन में लगने वाले उद्योग या अन्य साधनों से मिलने वाले राजस्व को भेल और शासन के बीच 50-50 फीसदी बांटे जाने का प्लान है। क्या है भेल करीब 62 वर्ष पहले भारत हैवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड (भेल) को भोपाल में 6000 एकड़ जमीन मिली थी। इसमें से करीब 764 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा है। करी 700 एकड़ पर निजी खेती की जा रही है। 90 एकड़ जमीन पर जंबूरी मैदान है और करीब 12 एकड़ जमीन पर अवैध रूप से अन्ना नगर बसा है। कुछ वर्ष पहले राज्य शासन ने भेल से जमीन मांगी थी, लेकिन भेल प्रशासन ने साफ-साफ मना कर दिया था। केंद्र सरकार से ऐसे मांगेगे जमीन दरअसल, भोपाल को मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र बनाने की दिशा में कार्य चल रहा है। लेकिन भोपाल के एक ओर वन क्षेत्र की बड़ी सीमा है, जिसे टाइगर रिजर्व के रूप में अधिसूचित किया है। यहां विकास नहीं किया जा सकता। दूसरा भोपाल झीलों की नगरी है, बड़ा तालाब रामसर साइट है। यह भोपाल की बड़ी सीमा को घेरता है। दूसरे तालाब व नदियां भी हैं, उन्हें प्रभावित नहीं किया जा सकता। वहीं, भोपाल का बड़ा हिस्सा भेल को दी जमीन से लगा है। उक्त जमीन का बड़ा हिस्सा खाली है। भोपाल से लगे बाकी जो क्षेत्र बचे हैं, उनमें लगातार विकास हो रहा है, आबादी बस रही है। ऐसे में भेल की जमीन सरकार के लिए उपयोगी हो सकती है। यहां विकास के ऐसे कार्य किए जाए जिससे राजस्व की प्राप्ति हो सके। खाली जमीन पर हो रहा अतिक्रमण भेल को मिली 6 हजार एकड़ जमीन में से अभी तक 2000 एकड़ जमीन खाली पड़ी है। इस खाली पड़ी जमीन पर लगातार अतिक्रमण हो रहा है। भेल की 700 अधिक अतिक्रमण वाली जमीन पर निजी लोग खेती कर रहे हैं। वहीं, यहां के खाली पड़े जर्जर आवासों का लोग अवैध तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं। recent visitors 52