क्रिकेट बोर्ड ने टेस्ट मैचों के दौरान बच्चों की एंट्री को फ्री की, अब बच्चे स्टेडियम में बैठकर देख पाएंगे टेस्ट मैच

नई दिल्ली टेस्ट क्रिकेट का क्रेज इस समय कम हो रहा है। हर कोई इस फॉर्मेट को बढ़ावा देने के लिए नए-नए पैंतरे अपना रहा है। यही कारण है कि आईसीसी ने वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल की प्राइज मनी को दोगुना से ज्यादा कर दिया है। इस बीच एक क्रिकेट बोर्ड ने टेस्ट मैचों के दौरान बच्चों की एंट्री को फ्री कर दिया है। ये कदम वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड ने उठाया है। सीडब्ल्यूआई ने कहा है कि वेस्टइंडीज और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेली जाने वाली 3 मैचों की टेस्ट सीरीज के दौरान स्टेडियम में बच्चों की एंट्री फ्री रहेगी। अगले महीने से शुरू होने वाली तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में वेस्टइंडीज और ऑस्ट्रेलिया के बीच मुकाबला देखने के लिए कैरेबियाई देशों के बच्चों को एक पैसा भी खर्च नहीं करना पड़ेगा। क्रिकेट वेस्टइंडीज (सीडब्ल्यूआई) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) क्रिस डेह्रिंग ने इसको लेकर खुलासा किया। बारबाडोस के केंसिंग्टन ओवल, ग्रेनेडा के ग्रेनेडा नेशनल स्टेडियम और जमैका के सबीना पार्क में होने वाले आगामी टेस्ट मैचों के लिए सभी बच्चों को निशुल्क प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। केंसिंग्टन ओवल में ‘WI होम – फुल आह एनर्जी’ कैंपेन के आधिकारिक लॉन्च के दौरान बोलते हुए डेह्रिंग ने कहा कि यह पहल CWI की नई नीति के हिस्से के रूप में शुरू की गई है। उन्होंने कहा, “CWI में हम मानते हैं कि हर बच्चे के लिए टेस्ट क्रिकेट तक पहुंच पाना एक मानवाधिकार है। टेस्ट क्रिकेट में आने में सक्षम होना कैरेबियन में एक मानवाधिकार है और इसलिए, इस साल पहली बार हम एक नीति के रूप में सभी बच्चों को मुफ्त में टेस्ट मैच को देखने के लिए सक्षम कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा, "आपको टिकट की जरूरत नहीं है, यह आपका अधिकार है। टिकट सिर्फ पैसे देकर खरीदने वालों के लिए है, आपका अधिकार नहीं है और अगर यह हमारे बच्चों का अधिकार है, तो यह हमारे माता-पिता और हमारे संगठनों और हमारी सरकारों और हर वयस्क का कर्तव्य है कि वे सुनिश्चित करें कि हमारे बच्चों को यह अधिकार मिले।" वहीं, सीडब्ल्यूआई के अध्यक्ष डॉ. शैलो ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस कदम से टेस्ट सीरीज के दौरान स्टेडियम पूरी तरह भरे रहेंगे। हालांकि, अभी तक यह जानकारी नहीं दी गई है कि कितनी उम्र तक के बच्चों को एंट्री फ्री मिलने वाली है। recent visitors 31

छत्तीसगढ़ में मौसम ने एक बार फिर अपना मिजाज बदला,5 दिन आंधी-बारिश…11 में यलो, 7 जिलों में ऑरेंज अलर्ट

रायपुर  छत्तीसगढ़ में मौसम ने एक बार फिर अपना मिजाज बदला है। भीषण गर्मी झेल रहे प्रदेशवासियों को अब तेज अंधड़, गरज-चमक और बारिश का सामना करना पड़ सकता है। मौसम विभाग ने 17 से 21 मई तक के लिए ऑरेंज और यलो अलर्ट जारी किया है। इसमें 7 जिलों को ऑरेंज अलर्ट, जबकि 11 जिलों को यलो अलर्ट में रखा है। इस दौरान तेज हवाएं चलने, बिजली गिरने और बौछारें पड़ने की संभावना है। खासकर मध्य और दक्षिण छत्तीसगढ़ में इसका असर ज्यादा दिखेगा। वहीं तापमान की बात करें तो बिलासपुर 41.4 डिग्री सेल्सियस के साथ प्रदेश का सबसे गर्म जिला रहा, जबकि जगदलपुर 23.8 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान के साथ सबसे ठंडा रहा। बीते 24 घंटे इन जगहों में हुई बारिश बीते 24 घंटे में बस्तर संभाग के कई इलाकों में हल्की बारिश हुई। सबसे ज्यादा बारिश भोपालपट्टनम में 5 सेमी दर्ज की गई। इसके बाद तोकापाल में 4 सेमी, बालोद और नगरी में 3-3 सेमी, छोटेडोंगर, नानगुर, दरभा में बारिश हुई। गरज-चमक के साथ बरसेंगे बादल रायपुर में दिन का तापमान 40.6 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया, जो सामान्य से करीब 1.5 डिग्री कम रहा। सुबह और शाम को काफी नमी रही। सुबह 64% और शाम को 41% रही। राजधानी में 60% बादल छाए रहे और गर्मी से कुछ राहत मिली। देर शाम तक मौसम बदला और कई इलाकों में बारिश भी हुई। मौसम विभाग का कहना है कि 17 मई को रायपुर में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। गरज-चमक के साथ हल्की बारिश या बौछारें पड़ने की संभावना है। अधिकतम तापमान करीब 41°C और न्यूनतम 28°C रहने का अनुमान है। अगले 48 घंटे तक होगी बारिश मौसम विज्ञानी गायत्री वाणी कंटिभोटला ने बताया कि बस्तर संभाग में बिजली गिरने के साथ और गरज चमक की संभावना बढ़ने वाली है। ऐसी स्थिति अगले 4 से 5 दिनों तक दक्षिण छत्तीसगढ़ में देखने को मिलेगी। वहीं मध्य छत्तीसगढ़ में ऐसी स्थिति थोड़ी कम रहेगी, लेकिन प्रदेश में गरज चमक के साथ बिजली गिरने के गतिविधियां बढ़ेंगी। रायपुर में मौसम का हाल रायपुर में दिन का तापमान 40.6 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया, जो सामान्य से करीब 1.5 डिग्री कम रहा। सुबह और शाम को काफी नमी रही। सुबह 64% और शाम को 41% रही। राजधानी में 60% बादल छाए रहे और गर्मी से कुछ राहत मिली। देर शाम तक मौसम बदला और कई इलाकों में बारिश भी हुई। मौसम विभाग का कहना है कि 17 मई को रायपुर में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। गरज-चमक के साथ हल्की बारिश या बौछारें पड़ने की संभावना है। अधिकतम तापमान करीब 41°C और न्यूनतम 28°C रहने का अनुमान है। अगले 2 दिन गरज चमक की स्थिति ज्यादा मौसम विज्ञानी गायत्री वाणी कंटिभोटला ने बताया कि बस्तर संभाग में बिजली गिरने के साथ और गरज चमक की संभावना बढ़ने वाली है। ऐसी स्थिति अगले 4 से 5 दिनों तक दक्षिण छत्तीसगढ़ में देखने को मिलेगी। वहीं मध्य छत्तीसगढ़ में ऐसी स्थिति थोड़ी कम रहेगी, लेकिन प्रदेश में गरज चमक के साथ बिजली गिरने के गतिविधियां बढ़ेंगी। क्या अलर्ट है आने वाले दिनों के लिए? मौसम विभाग की चेतावनी के मुताबिक,अगले 2 दिनों तक प्रदेश के कुछ हिस्सों में 50-60 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। इसके बाद 3 दिन और ऐसा ही मिजाज रहने वाला है। बस हवाएं थोड़ी धीमी (40-50 किमी/घंटा) हो सकती हैं। recent visitors 42

10 लाख फिलिस्तीनियों को लीबिया Settle करने की तैयारी में हैं ट्रंप – रिपोर्ट , पढ़ें क्या है पूरा मामला

वाशिंगटन गाजा को लेकर अमेरिका का एक चौंकाने वाला प्लान सामने आया है। अमेरिका की डोनाल्ड ट्रंप सरकार युद्धग्रस्त गाजा पट्टी से करीब 10 लाख फिलिस्तीनियों को स्थायी रूप से लीबिया भेजने की योजना बना रही है। ट्रंप प्रशासन इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रहा है और इस संबंध में लीबिया के नेतृत्व के साथ चर्चा भी कर चुका है। इस योजना के तहत, लीबिया को उन अरबों डॉलर की धनराशि को जारी करने का प्रस्ताव दिया गया है, जो अमेरिका ने एक दशक से अधिक समय पहले फ्रीज कर दी थी। एनबीसी न्यूज ने पांच सूत्रों के हवाले से लिखा है कि इस योजना पर पिछले कुछ समय से अमेरिका तथा लीबिया की लीडरशिप के बीच बातचीत चल रही है। इन चर्चाओं की जानकारी रखने वाले दो व्यक्तियों और एक पूर्व अमेरिकी अधिकारी ने NBC को बताया कि इस प्रस्ताव के तहत अमेरिका लीबिया की अरबों डॉलर की संपत्ति को वापस देने पर विचार कर रहा है। हालांकि, अमेरिकी सरकार के एक प्रवक्ता ने इन रिपोर्ट्स को खारिज करते हुए कहा, “ये रिपोर्टें असत्य हैं। जमीन पर हालात ऐसे किसी प्लान के अनुकूल नहीं हैं। ऐसी कोई योजना चर्चा में नहीं रही और इसका कोई तर्क नहीं बनता।” लीबिया में दो प्रतिस्पर्धी प्रशासनों का शासन नाटो समर्थित विद्रोह के बाद 2011 में लीबिया में अराजकता फैल गई थी, जिसमें लंबे समय से शासन कर रहे तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी को सत्ता से हटा दिया गया और उनकी हत्या कर दी गई. देश विभाजित हो गया, और इसके पूर्वी और पश्चिमी हिस्से पर दो प्रतिद्वंद्वी मिलिशिया समूहों ने नियं​त्रण कर लिया. लीबिया में वर्तमान में दो प्रतिस्पर्धी प्रशासनों का शासन है: अब्दुल हामिद दबीबेह के नेतृत्व वाली अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय एकता सरकार (Government of National Unity), और प्रतिनिधि सभा समर्थित राष्ट्रीय स्थिरता सरकार (Government of National Stability), जिसका नेतृत्व लीबियाई नेशनल आर्मी और उसके कमांडर खलीफा हफ्तार के वास्तविक शासन के तहत ओसामा हम्माद द्वारा किया जाता है. जीएनयू त्रिपोली में स्थित है और देश के पश्चिमी हिस्से को नियंत्रित करता है, जबकि जीएनएस पूर्वी और मध्य क्षेत्र में काम करता है. इस विभाजन ने लीबिया में सत्ता के दो केंद्र स्थापित कर दिए हैं, जिसमें दोनों सरकारें वैधता और देश पर नियंत्रण के लिए होड़ कर रही हैं. कई सालों से अस्थिरता से जूझ रहा लीबिया 2011 में मुअम्मर गद्दाफी की हत्या और शासन के पतन के बाद से लीबिया लगातार अस्थिरता का सामना कर रहा है। देश पूर्व और पश्चिम में दो भागों में विभाजित हो गया है, जहां विभिन्न सशस्त्र गुट सत्ता के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में फिलिस्तीनी नागरिकों को वहां पुनर्वासित करना एक व्यवहारिक और मानवीय चुनौती बन सकती है। गाजा में भीषण हमले, 100 से अधिक की मौत इधर, इजरायल ने शुक्रवार को गाजा में दर्जनों हवाई हमले किए, जिनमें स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार 108 लोगों की मौत हो गई, जिनमें अधिकांश महिलाएं और बच्चे शामिल थे। इजरायल का कहना है कि ये हमले हमास पर दबाव बनाने और बंधकों की रिहाई के लिए युद्ध को अगले चरण में ले जाने की तैयारी का हिस्सा हैं। इजरायल ने यमन के दो बंदरगाहों पर भी हमले किए, जिनके बारे में उसका दावा है कि वहां से हूती विद्रोही हथियारों को ट्रांसफर कर रहे थे। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि इन हमलों में एक व्यक्ति की मौत हो गई और नौ घायल हो गए। ट्रंप की फिलिस्तीनियों को अन्य अरब देशों में बसाने की इच्छा जनवरी में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वे चाहते हैं कि जॉर्डन, मिस्र और अन्य अरब देश गाजा से फिलिस्तीनी शरणार्थियों को अधिक संख्या में स्वीकार करें, ताकि "इस तबाह हो चुके इलाके को साफ किया जा सके और एक नया शुरुआत दी जा सके।" उन्होंने कहा था, “यह लगभग एक ध्वस्त इलाका है। लगभग सब कुछ नष्ट हो गया है, लोग मर रहे हैं। मैं चाहूंगा कि कुछ अरब देशों के साथ मिलकर कहीं और मकान बनाएं, जहां ये लोग शायद शांति से रह सकें।” हमास ने बंधक सौदे के बदले युद्ध रोकने का प्रस्ताव दिया हमास के गाजा प्रमुख और इजरायल के साथ अप्रत्यक्ष वार्ताओं में शामिल खलील अल-हय्या ने टेलीविजन पर दिए एक भाषण में कहा कि उनका संगठन सभी बंधकों के बदले इजरायली जेलों में बंद फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई के लिए तत्पर है- बशर्ते युद्ध को पूरी तरह समाप्त किया जाए। उन्होंने अंतरिम संघर्षविराम के किसी भी प्रस्ताव को ठुकरा दिया। इजराइल ने गाजा और यमन में हमले बढ़ाए इस बीच, इजरायल ने शुक्रवार को गाजा में दर्जनों हवाई हमले किए, जिसमें स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि 108 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे थे. इजरायली अधिकारियों ने इसे हमास पर बंधकों को रिहा करने के लिए दबाव बनाने के अभियान की शुरुआत बताया. इजराइल ने यमन में दो बंदरगाहों पर भी हमला किया, जिसके बारे में उसने कहा कि हूती उग्रवादी समूह द्वारा हथियारों को स्थानांतरित करने के लिए इनका इस्तेमाल किया जाता था. स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई और नौ घायल हो गए. इस बीच हमास के गाजा प्रमुख ने कहा कि समूह सभी बंधकों को इजरायल द्वारा जेल में बंद फिलिस्तीनियों की एक निश्चित संख्या के साथ बदलने के लिए तत्काल बातचीत करने के लिए तैयार है, जिससे इस क्षेत्र में युद्ध समाप्त हो जाएगा. इजरायल के साथ अप्रत्यक्ष वार्ता के लिए हमास वार्ता दल का नेतृत्व करने वाले खलील अल-हय्या ने टेलीविजन पर दिए भाषण में कहा कि समूह अंतरिम युद्धविराम समझौते से इनकार करता है.   recent visitors 52

दुआ है कि गंगा-जमुनी तहज़ीब को कभी कोई बुरी नज़र न लगे और इसकी खूबसूरती बनी रहे

भोपाल: तहज़ीब, तालीम, तरक्क़ी और तासीर का शहर  ताहिर अली यदि मंदिरों से घंटियों की मधुर आवाज़ और मस्जिदों से बुलंद अज़ान एक साथ गूंजे, तो समझ लीजिए आप उस शहर में हैं, जहाँ सदियों से गंगा-जमुनी तहज़ीब ने अपने खूबसूरत रंग बिखेरे हैं। यह शहर है भोपाल – झीलों की नगरी, नवाबी संस्कृति की परछाईं, प्राकृतिक सौंदर्य की मिसाल और ऐतिहासिक धरोहरों का सजीव संग्रह। तहज़ीब और भाईचारा भोपाल की सबसे बड़ी खासियत इसकी साझा संस्कृति है। यहाँ तालाब के बीचों-बीच मंदिर, मस्जिद और मजारों का साथ-साथ दिखना आम बात है। यही वह शहर है, जहाँ सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक – ताजुल मस्जिद है, तो वहीं विश्व की सबसे छोटी मस्जिद मानी जाने वाली ‘ढाई सीढ़ी मस्जिद’ भी यहीं स्थित है। भोपाल में उर्दू भाषा का उपयोग लगभग सभी समुदाय के लोग करते हैं। भोपाल की सड़कों पर चलते हुए अगर कोई राहगीर किसी मोहल्ले का पता पूछ ले, तो भोपाली उसे दरवाजे तक छोड़कर आते हैं। यही इसकी तहज़ीब है, यही इसकी पहचान है। भोपाल की एक बात ओर मशहूर है कि जो भी भोपाल आता है यहां के लोग उसे सीने से लगा लेते हैं। हिन्दुस्तान के किसी भी कोने से जो भोपाल आया जैसे नौकरीपेशा या कोई भी व्यवसाय के लिए यहीं का होकर रह गया। भेल कारखाना इसका जीता-जागता उदाहरण है। ज्यादातर नौकरी पेशा अधिकारी एवं कर्मचारी रिटायर होने के बाद भोपाल को ही अपना मानकर यहीं बस गए। काफी लोग कारोबार करने के उद्देश्य से यहीं आकर आबाद हो गये। भोपाल की मज़ेदार ‘उर्फ़ियत’ – नाम के पीछे नाम की दुनिया! भोपाल, भोपाली और भोपालियत की पहचान  केवल ताल-ता‍लैया और ऐतिहासिक इमारतों आबोहवा, तहजीब और संस्‍क़ति तक सीमित नहीं है,  बल्कि अपनी अनोखी और मज़ेदार ‘उर्फ़ियतों’ के लिए भी मशहूर है। जब किसी मोहल्ले में एक ही नाम के कई लोग हों, तो पहचान बनाने के लिए नाम के पीछे कुछ जोड़ना लाज़मी हो जाता है, फिर चाहे वो पहनावे से जुड़ा हो, बोलचाल से, शौक से या किसी मज़ेदार किस्से से – हर भोपाली को मिल जाता है उसका ख़ास "उर्फ़ी टाइटल"। तो मिलिए भोपाल की इस अनोखी नामावली से – तारिक़ टाई, जो हमेशा टाई में दिखते थे, तारिक़ चपटे, जिनके गाल खुद गवाही देते हैं, तारिक़ होंठ कटे, जिनके होंठों की कहानी हर गली जानती है, और तारिक़ झबरे, जिनकी आंखें ही उनकी पहचान हैं। आरिफ़ अंडे का नाश्ता शहर भर में मशहूर है, तो आरिफ़ बुलबुल अपने गले से सबको दीवाना बना देते हैं। बाबूलाल 501 नाम की सिगरेट की तरह मशहूर हैं, और सेठ छगनलाल, जिनका "सेठपना" मोहल्ले में आज भी कायम है। रविंद्र सिंह लखरत, बाबूलाल लठमार, चांदमल हिटलर, मोहन पंचायती, लाला मुल्कराज, सरदारमल लालवानी, नाहर सिंह सूरमा भोपाली, कन्हैयालाल ‘बीड़ी’ और के. अमीनउद्दीन-301 तो अपनी शान और रसूख़ के लिए पहचाने जाते हैं। अखिलेश अग्रवाल गफूरे और वहीद अग्रवाल की उर्फ़ियतें उनकी दोस्ती और कारोबार की दास्तान सुनाती हैं। हफ़ीज़ पाजामे और चांद कटोरे का नाम सुनते ही भोपाल मुस्कुरा उठता है, वहीं चांद चुड़वे मोहल्ले की कहानियों के नायक हैं। सुरेश 501, अनिल अग्रवाल पटीये, और देवेश सिमहल वकील साहब अपने नाम से ही काफ़ी असरदार हैं। बाबू साहब घोड़े और बाबू साहब नाम की सादगी में गजब की शान है। आलू बड़े, ज़ायकों की दुनिया के हीरो हैं, और लोक सिंह ताल ठोंकू हर बहस में जीत की गारंटी हैं। रईस भूरा, मुन्ने मॉडल ग्राउंड, मुन्ने पेंटर, मुईन क़द्दे और माहिर मदीना – ये नाम जैसे ही कान में पड़ें, पूरा मोहल्ला मुस्करा उठता है। भोपाल की गलियों में लोग नाम से कम और उर्फ़ियत से ज़्यादा जाने जाते हैं। जावेद चपटे और जावेद चिराटे जैसे नामों में मज़ाकिया तंज है, तो बन्ने पहलवान और बन्ने लखेरा में मोहल्ले की दो अलग-अलग शख्सियतें झलकती हैं। कल्लू अट्ठे, बाबू भड़भुजे, मुन्ने फुक्की, ईरानी और डूंड जैसे नाम रोज़मर्रा की आदतों, मज़ाक या पेशे से जुड़े हैं। सईद बुल, छुटकटे, वहीद ढेलकी, आरिफ पिस्स, और अनफिट भोपाल की उस खास तासीर को दर्शाते हैं, जहां हर नाम के पीछे एक किस्सा है — हँसी, अपनापन और तंज से भरा। यही भोपाल की असली पहचान है — उर्फ़ियतों में बसी यारी और यादें। भोपाल की इन मज़ेदार उर्फ़ियतों में वो अपनापन है, जो किसी GPS में नहीं मिलता – सिर्फ मोहल्लों की यादों और बातों में ही जिंदा रहता है। भोपाल में हिंदू-मुस्लिम एकता : सांस्कृतिक सह-अस्तित्व की मिसाल भोपाल की सांस्कृतिक विरासत की सबसे मजबूत कड़ी उसकी हिंदू-मुस्लिम एकता है, जो सिर्फ सामाजिक सौहार्द का प्रतीक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक संघर्षों के बीच पनपी सहिष्णुता और साझेदारी की अनूठी मिसाल है। जब देश के अन्य हिस्सों में अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ नीति ने सांप्रदायिक तनाव को जन्म दिया, तब भी भोपाल ने अपनी गंगा-जमुनी तहज़ीब को संजोए रखा। हर वर्ग के लोगों ने एक दूसरे से बहुत प्यार मोहब्बत के साथ दिली लगाव रखा। सन 1812 की लड़ाई में हिंदू योद्धाओं जैसे डांगर सिंह, जय सिंह, और अमन सिंह पटेल ने भोपाल की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यहां तक कि युद्ध में महिलाओं ने भी सक्रिय भागीदारी की, यह दिखाते हुए कि भाईचारा केवल धार्मिक स्तर पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना के स्तर पर भी जीवित था। भोपाल रियासत के प्रशासन में हर कालखंड में हिंदुओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही। दीवान (प्रधानमंत्री) जैसे उच्च पदों पर लाला घानी राम, लाला फूलानाथ, राजा अवध नारायण जैसे हिंदू अधिकारी रहे। यह समावेशिता केवल औपचारिक नहीं थी — ये अधिकारी नवाबों के विश्वासपात्र भी थे। नवाब क़ुदसिया बेग़म के दरबार में एक हिंदू, एक मुसलमान और एक ईसाई मंत्री नियुक्त थे — यह उस समय की धार्मिक विविधता के प्रति सम्मान का प्रतीक था। रियासत के इंजिमाम (शामिल करने) के बाद शरीफ़ शरणार्थियों में (उच्च परिवार के शरणार्थी) सरदार गुरबख्श सिंह भी थे, जिनके बेटे अमरीक सिंह रंजीत होटल चलाते हैं। वे बहू मियाँ के साथ ईद पर नवाब साहब को सलाम करने जाते। एक बार नवाब साहब ने पूछा कि भोपाल कैसा लग रहा है, तो सरदार साहब ने हाथ जोड़कर कहा कि जहाँ गरीब परवर सरकार का साया हो, वहाँ कोई कैसे न खुश हो — यह कहते हुए वे भावुक हो … Read more

ग्वालियर में एक पति ने अपने पति को रंगे हाथों पकड़ा, फेक आईडी पर 2 महीने हुई बात, सोचा नई गर्लफ्रेंड मिल गई, मिलने पहुंचा तो…

 ग्वालियर शादी के बाद भी खुद को अविवाहित बताकर लड़कियों को प्रेम जाल में फंसाने वाले एक शख्स का भेद उसकी पत्नी ने खोल दिया. पत्नी ने सोशल मीडिया के जरिए दोस्ती कर पति को एक रेस्टोरेंट में मिलने बुलाया और उसे रंगे हाथों पकड़ लिया. मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर के माधौगंज थाना क्षेत्र में रहने वाली 23 वर्षीय युवती की शादी 2023 में एक प्राइवेट कंपनी में सेल्समैन के रूप में काम करने वाले अतुल (बदला हुआ नाम) से हुई थी. शादी के बाद अतुल अक्सर मोबाइल फोन पर घंटों व्यस्त रहता और घर से बाहर जाकर ही बात करता था. उसकी इन गतिविधियों से पत्नी को शक हुआ. पूछताछ करने पर अतुल ने बताया कि कंपनी के कॉल आते हैं. इसके अलावा, पति का मोबाइल लॉक रखना, देर रात तक इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर चैट करना और अधिकतर समय घर से बाहर रहना नवविवाहिता को अखरने लगा. पत्नी ने शक होने पर अपनी बहन की आईडी से एक सिम खरीदी और फर्जी नाम से इंस्टाग्राम अकाउंट बनाकर एक खूबसूरत लड़की की डीपी लगाई. फिर उसी आईडी से पति को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी. पति अतुल ने तुरंत रिक्वेस्ट स्वीकार कर ली और घंटों चैट करने लगा. करीब दो महीने तक दोनों के बीच बातचीत चली. अतुल को शक न हो, इसलिए जब भी बातचीत करनी होती, पत्नी अपनी बहन से वॉयस कॉल पर बात करवाती थी. अंत में, पति को रंगे हाथों पकड़ने के लिए पत्नी ने सोशल मीडिया गर्लफ्रेंड के रूप में उसे रेस्टोरेंट में मिलने बुलाया. अतुल तुरंत राजी हो गया और मिलने पहुंच गया. लेकिन जब उसने इंस्टाग्राम गर्लफ्रेंड की जगह अपनी पत्नी को देखा, तो उसके होश उड़ गए. शातिर पति ने फिर भी अपनी पत्नी से झूठ बोला कि वह किसी क्लाइंट से मिलने आया है. लेकिन जब पत्नी ने चैट हिस्ट्री दिखाई, तो उसका झूठ पकड़ा गया. पत्नी ने बताया कि इंस्टाग्राम पर जिस लड़की से वह प्रेम की बातें करता था, वह कोई और नहीं, बल्कि वह खुद थी. इसके बाद रेस्टोरेंट में दोनों के बीच झगड़ा शुरू हो गया और मामला महिला थाने पहुंच गया. पत्नी ने पति पर धोखेबाजी का आरोप लगाया और तलाक की मांग की. वहीं, पति ने मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाकर अलग होने की बात कही. परामर्श केंद्र में काउंसलर महेंद्र शुक्ला ने एक महीने तक दोनों की काउंसलिंग की. अंत में, पति ने अपनी गलती स्वीकार की और भविष्य में ऐसी गलती न करने का वादा किया. इसके बाद दोनों हंसी-खुशी अपने घर लौट गए. पुलिस की काउंसलिंग ने एक रिश्ता टूटने से बचा लिया.   recent visitors 25

इंदौर के 411 पुराने कुओं का जीर्णोद्धार कार्य तेजी से किया जा रहा, 15 तालाबों का गहरीकरण किया

इंदौर नगर निगम आयुक्त शिवम वर्मा ने बताया है कि शहर के 411 पुराने कुओं का जीर्णोद्धार कार्य तेजी से किया जा रहा है। इसके साथ ही शहर की पारंपरिक बावड़ियों को पुनर्जीवित करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। नदियों में जल की सतत आवक सुनिश्चित करने हेतु हाईड्रोलॉजिकल सर्वे भी कराया जा रहा है। जल कार्य समिति के प्रभारी अभिषेक शर्मा बबलू ने बताया कि यह अभियान तीन साल पहले शुरू किया गया था और अब तक 15 तालाबों का गहरीकरण किया जा चुका है। मुख्यमंत्री की पहल पर जलगंगा संवर्धन अभियान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आव्हान पर पूरे प्रदेश में जलगंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य जल संरक्षण को बढ़ावा देना है। अभियान के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने वाले विभागों को सम्मानित किया जाएगा। इसके तहत कलेक्टरों और जिला पंचायत के सीईओ को नकद पुरस्कार भी दिए जाएंगे, जिससे कार्य में उत्साह और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की पुरस्कार योजना पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने जलगंगा संवर्धन में उल्लेखनीय योगदान के लिए पुरस्कारों की घोषणा की है। समग्र प्रदर्शन के आधार पर जिले के कलेक्टर को क्रमशः ₹1,50,000, ₹1,25,000 और ₹1,00,000 की पुरस्कार राशि से सम्मानित किया जाएगा। इसी प्रकार जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को ₹1,00,000, ₹75,000 और ₹50,000 की नकद राशि प्रदान की जाएगी। वहीं, जिले के अमले को भी ₹6 लाख, ₹4.5 लाख और ₹3 लाख की पुरस्कार राशि दी जाएगी। ए और बी श्रेणी में बांटी जाएंगी पुरस्कार श्रेणियां पुरस्कार वितरण दो श्रेणियों – ए और बी – में किया जाएगा। जिला स्तरीय पुरस्कार के लिए ए श्रेणी में चार या उससे कम जनपद और बी श्रेणी में पांच या उससे अधिक जनपदों को शामिल किया गया है। विकासखंड स्तरीय पुरस्कार के लिए ए श्रेणी में 70 या उससे कम ग्राम पंचायतों वाली जनपद पंचायतें और बी श्रेणी में 71 या उससे अधिक ग्राम पंचायतों वाली पंचायतें आएंगी। दोनों स्तरों पर प्रथम पुरस्कार के तहत कलेक्टर को ₹1 लाख, सीईओ को ₹75 हजार, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के कार्यपालन यंत्री को ₹50 हजार और जिले के अमले को ₹2.75 लाख दिए जाएंगे। recent visitors 26

आशिक ने अपनी प्रेमिका के भाई की हत्या कर लाश तालाब के किनारे गड्ढा कर गाढ़ दी, अब पहुंचाया जेल

इंदौर  इंदौर जिले में बॉलीवुड फिल्म ‘दृश्यम’ जैसी सस्पेंस वाली मर्डर मिस्ट्री का खुलासा हुआ है। इंदौर के पास खुडैल थाना क्षेत्र में एक आशिक ने अपनी प्रेमिका के भाई की हत्या कर लाश तालाब के किनारे गड्ढा कर गाढ़ दी थी। बीते कुछ दिनों से बारिश के होने कारण उसे लगा कि लाश दुर्गंध मार रही होगी। यह सोचकर वह लाश को नमक में दबाने के लिए कुछ कुछ मजदूरों को अपने साथ ले गया, लेकिन शराब के नशे में उन मजदूरों ने पूरी कहानी उगल दी। इसके बाद इस सनसनीखेज हत्या का खुलासा हुआ। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। डीएसपी उमाकांत चौधरी के मुताबिक, एक युवती द्वारा 03 मई को थाना खुडैल में अपने 21 वर्षीय भाई विशाल की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। पुलिस उस युवक की तलाश में लगी थी। इस बीच, कुछ ग्रामीणों ने उन्हें युवती के प्रेम प्रसंग की बात बताई। पुलिस इस एंगल पर भी काम कर रही थी कि तभी उसे सेमलियाचाउ के पास एक अज्ञात शव मिलने की जानकारी मिली। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा ही था कि कुछ मुखबिरों ने पुलिस को बताया कि कुछ शराबी नशे में एक व्यक्ति की लाश को नमक में दबाने के लिए कुछ रुपये मिलने की बात कर रहे हैं। इस पर पुलिस ने पहले उन नशेड़ियों को थाने लाकर पूछताछ की तो अज्ञात शव और गुमशुदा युवक दोनों की कहानी एक ही निकली। दरअसल, इलाके में रहने वाले आरोपी रोहित परमार और मृतक विशाल की बहन के बीच 5 साल से प्रेम संबंध थे। दोनों के प्रेम कहानी की खबर विशाल को लगी तो उसने रोहित को ब्लैकमेल कारण शुरू कर दिया। दोनों के अफेयर की बात यदि गांव में पता चल जाती तो उससे बखेड़ा खड़ा हो जाता। रोहित गांव में एक डॉक्टर के पास कंपाउंडर का काम करता था। वहीं मृतक विशाल और उसकी बहन एक कपड़े की दुकान में काम करते थे। विशाल ने जब रोहित को ब्लैकमेल करना नहीं छोड़ा तो उसने गुस्से में आकर विशाल को रास्ते से हटाने का प्लान बनाया। उसने फोन कर पहले विशाल को एक सुनसान इलाके में मिलने बुलाया, फिर उसे गोली मारकर लाश नजदीक के तालाब के किनारे छोटे से गड्डे में गाड़ दी थी। रोहित ने कई बार ‘दृश्यम’ फिल्म देख रखी थी। उसने परिवार को गुमराह करने के लिए मृतक विशाल के मोबाइल से उसके घर में कुछ एमएमएस किए और इंदौर से सांवरिया सेठ दर्शन करने जाने की बात कही। फिर विशाल का मोबाइल लेकर रोहित सांवरिया सेठ भी गया। उसे लगा कि यदि विशाल के मोबाइल फोन की लोकेशन निकलेगी तो वो बाहर की आएगी। इसके बाद वो खुडैल आ गया, लेकिन कई दिन से लगातार बारिश हो रही थी। उसने सोचा कि लाश पानी में जल्दी सड़ जाएगी और तालाब में पानी बढ़ने पर वो जल्द ऊपर या सकती है। पुलिस को मुखबिर से मिली थी सूचना आरोपी रोहित ने गांव आकर कई कुंटल नमक खरीदा और शव को नमक में दबाने के लिए इलाके के दो मजदूर बबलू खाड़पा और सोनू परमार से 40 हजार रुपये में सौदा तय किया। इतनी बड़ी रकम सुन दोनों ने इस काम के लिए हां कर दी। उन्होंने शव को अच्छे से दफना कर आरोपी से 40 हजार लिए और चले गए। एक दिन दोनों मजदूरों बबलू और सोनू ने शराब के नशे में एक लाश को नमक दबाने के लिए 40 हजार मिलने की बात उगल दी। यह खबर किसी पुलिस के मुखबिर को मिल गई और उसने पुलिस को जानकारी दी। इसके बाद परत दर परत यह कहानी खुल गई। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। recent visitors 46