MP में जिला अध्यक्षों के चयन के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त, इन पर्यवेक्षकों को एआईसीसी ने दिए निर्देश

भोपाल  कांग्रेस ने जिला अध्यक्षों (MP congress Districts Presidents List) को महत्त्वपूर्ण बनाने के अहमदाबाद अधिवेशन के प्रस्ताव (Ahmedabad Session Proposal) पर काम शुरू हो गया है। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश के जिला अध्यक्षों के चयन के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई है। पर्यवेक्षकों की नियुक्ति को मंजूरी देने के साथ ही एआइसीसी (AICC) ने इन्हें तत्काल प्रभाव से अपना काम शुरू करने के लिए कहा है। संगठन सृजन अभियान के तहत 50 पर्यवेक्षकों की नियुक्ति संगठन सृजन अभियान के तहत मध्यप्रदेश के लिए 50 पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई है। मध्यप्रदेश के लिए सप्तगिरि उलाका, गुरदीप सिंह सप्पल, अखिलेश प्रताप सिंह, डॉ. अजय कुमार, विवेक बंसल, रिपुन बोरा, कृष्णा तीरथ सहित 50 नेताओं को रखा गया है। गुजरात का फार्मूला लागू करने की तैयारी कांग्रेस में अब गुजरात फार्मूला लागू करने की तैयारी है। इसके तहत पर्यवेक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। जिला इकाई गठन में केन्द्रीय और राज्य पर्यवेक्षकों की राय भी मायने रखेगी। इसे पार्टी में नये बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। असल में कांग्रेस में संगठन को और मजबूत किए जाने की कवायद चल रही है। प्रयास है कि सभी कार्यकर्ताओं को मौका मिले, सिर्फ नाम के लिए पदाधिकारी न हो। recent visitors 77

जेनेटिक इंजीनियरिंग में करियर

        जेनेटिक इंजीनियरिंग विज्ञान का एक अत्याधुनिक ब्रांच है। जिसमें सजीव प्राणियों के डीएनए कोड में मौजूद जेनेटिक को अत्याधुनिक तकनीक केजरिए परिवर्तित किया जाता है। यह क्षेत्र बायोटेक्नोलॉजी के अंतर्गत ही आता है। जेनेटिक इंजीनियरिंग का कमाल कुछ वर्ष पहले ही दुनिया देख चुकी है, जब इयान विल्मुट और उनके सहयोगी रोसलिन ने जेनेटिक तरीके से भेड़ का बच्चा तैयार किया, जिसे डोली दिया था। यह हुबहु भेड़ का जेनेटिक कॉपी था। इन दिनों जेनेटिक इंजीनियर की डिमांड इंडिया के साथ-साथ विदेश में तेजी से बढ़ रहा है। क्या है जेनेटिक इंजीनियरिंग जेनेटिक तकनीक के जरिए जींस की सहायता से पेड़-पौधे, जानवर और इंसानों में अच्छे गुणों को विकसित किया जाता है। जेनेटिक तकनीक के द्वारा ही रोग प्रतिरोधक फसलें और सूखे में पैदा हो सकने वाली फसलों का उत्पादन किया जाता है। इसके जरिए पेड़-पौधे और जनवरों में ऐसे गुण विकसित किए जाते हैं, जिसकी मदद से इनके अंदर बीमारियों से लडने की प्रतिरोधिक क्षमता विकसित की जाती है। इस तरह के पेड़-पौधे जीएम यानी जेनेटिकली मोडिफाइड फूड के रूप में जाने-जाते हैं। बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में जेनेटिक इंजीनियरिंग का इस्तेमाल बृहत पैमाने पर होता है, क्योंकि यह इंडस्ट्री फॉमास्युटिकल प्रोडक्ट जैसे कि इंश्युलीन और दूसरे दवाइयों के लिए एक हद तक जेनेटिक पर ही निर्भर रहती है। योग्यता और कोर्स योग्य जेनेटिक इंजीनियर उसे ही माना जा सकता है, जिनके पास जेनेटिक और इससे संबंधित फील्ड में ग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट डिग्री हो, जैसे कि बायोटेक्नोलॉजी, मोलिक्युलर बायोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री। इस कोर्स में एंट्री के लिए 12वीं बायोलॉजी, केमिस्ट्री और मैथ से पास होना जरूरी है। इस समय अधिकतर यूनिवर्सिटी और इंस्टीट्यूट में जेनेटिक इंजीनियरिंग के लिए अलग से कोर्स ऑफर नहीं किया जाता है, लेकिन इसकी पढ़ाई बायोटेक्नोजी, माइक्रोबायोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री में सहायक विषय के रूप में होती है। बायोटेक्नोलॉजी के अडंर ग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट में जेनेटिक इंजीनियरिंग में स्पेशलाइजेशन कर सकते हैं। गेेजुटए कोर्स, बीईध्बीटेक में एंट्री प्रवेश परीक्षा के आधार पर होता है। एमएससी इन जेनेटिक इंजीनियरिंग में एडमिशन के लिए जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी हर साल 120 सीटों के लिए संयुक्त परीक्षा का आयोजन करती है। तकरीबन 20 हजार छात्र इस परीक्षा में बैठते हैं। उगा अंको के आधार पर 20 छात्र को जेएनयू परिसर, नई दिल्ली में एडमिशन दे दिया जाता है। जेनेटिक डिग्री कोर्स के लिए भी यहां कुछ सीटें निश्चित हैं। इसके लिए भी एंटे्रस टेस्ट में बैठना जरूरी है। रोजगार के अवसर जान-मानी करियर एक्सपर्ट परवीन मलहोत्रा कहती हैं कि जेनेटिक इंजीनियर के लिए भारत के साथ-साथ विदेश में भी जॉब के अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। इनके लिए मुख्यत रोजगार के अवसर मेडिकल व फार्मास्युटिकल कंपनी, एग्रीकल्चर सेक्टर, प्राइवेट और सरकारी रिसर्च और डेवलपमेंट सेंटर में होते हैं। टीचिंग को भी करियर ऑप्शन के रूप में आजमा जा सकता है। इसके अलावा, इनके लिए रोजगार के कई और भी रास्ते हैं। बायोटेक लेबोरेटरी में रिसर्च, एनर्जी और एंवायरनमेंट से संबंधित इंडस्ट्री, एनिमल हसबैंड्री, डेयरी फार्मिंग, मेडिसन आदि में भी रोजगार के खूब मौके हैं। कुछ ऐसे संस्थान भी हैं, जो जेनेटिक इंजीनियर को हायर करती है, जैसे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोलॉजी, नई दिल्ली, सेंटर फॉर डीएनए फिंगरप्रिंट ऐंड डाइग्नोस्टिक, हैदराबाद, बायोकेमिकल इंजीनियरिंग रिसर्च ऐंड प्रोसेस डेवलॅपमेंट सेंटर, चंडीगढ़, द इंस्टीट्यूट ऑफ जिनोमिक ऐंड इंटेग्रेटिव बायोलॉजी, दिल्ली आदि। सैलॅरी पैकेज जेनेटिक इंजीनियरिंग में पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री रखने वाले स्टूडेंट्स को शुरुआती दौर में आठ से 12 हजार रुपये प्रति माह सैलॅरी मिलने लगती है। यदि आपके पास डॉक्ट्रोरल डिग्री है, तो सैलॅरी 15-25 हजार रुपये शुरुआती महीनों में हो सकती है। इंस्टीट्यूट वॉच… -इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मद्रास, खडगपुर -आईआईटी गुवाहाटी -आईआईटी, दिल्ली -दिल्ली यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली -उस्मानिया यूनिवर्सिटी, हैदराबाद -पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, लुधियाना -राजेंद्र एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, समस्तीपुर, बिहार -जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली -बनारस हिंदु यूनिवर्सिटी, वाराणसी -ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, नई दिल्ली   recent visitors 60

लोकायुक्त की टीम कड़ी कार्रवाई, किसान से 5 हजार की रिश्वत लेते लोकायुक्त ने पटवारी को रंगेहाथों पकड़ा

छतरपुर मध्यप्रदेश में रिश्वतखोर अधिकारियों-कर्माचारियों पर लगातार लोकायुक्त की टीम कड़ी कार्रवाई कर रही है। प्रदेश में रोजाना सरकारी दफ्तरों में रिश्वत लेते अधिकारियों-कर्माचारियों को रंगेहाथों पकड़ा जा रहा है लेकिन इसके बावजूद भी मामले कम होने का नाम नहीं ले रहे है। घूसखोरी का नया मामला छतरपुर जिले से सामने आया है। यहां किसान से 5 हजार की रिश्वत लेते लोकायुक्त ने पटवारी को रंगेहाथों पकड़ा है। सीमांकन की एवज में पैसे की मांग छतरपुर जिले के ग्राम पंचायत नौगांव में करारा हल्का में पदस्थ पटवारी पंकज दुबे को सोमवार को उसके निवास पर सागर लोकायुक्त की टीम ने रिश्वत लेते रंगेहाथों पकड़ा है। बता दें कि पटवारी पंकज दूबे ने किसान दयाराम राजपूत से सीमांकन की एवज में पैसे की मांग की थी। किसाम ने इसकी शिकायत सागर लोकायुक्त टीम से की। पटवारी से पूछताछ जारी सागर लोकायुक्त टीम(lokayukta team) ने शिकायात के बाद सोमवार की सुबह नौगांव में बिजली ऑफिस के बगल में पंकज दुबे पटवारी के निज निवास पर छापामार कार्रवाई की। इस कार्रवाई में टीम को सफलता मिली। लोकायुक्त ने पटवारी को 5000 हजार की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ दबोच लिया। वहीं पटवारी के मकान पर लगे सीसीटीवी कैमरे का DVR सहित अन्य रिकॉर्ड जप्त कर लिए गए हैं। इस कार्रवाई के दौरान नौगांव थाना प्रभारी सतीश सिंह सहित कई पुलिसकर्मी मौजूद थें। फिलहाल पटवारी से पूछताछ जारी है। recent visitors 47

39 दिन का नवजात कोविड पॉजिटिव, अब तक 15 कोरोना संक्रमित आए सामने

जोधपुर प्रदेश में रविवार को कोरोना के तीन नए केस सामने आए हैं, जिनमें सबसे चौंकाने वाला मामला जोधपुर एम्स से सामने आया है। यहां 39 दिन का एक नवजात कोरोना पॉजिटिव पाया गया, जिसका जन्म 16 अप्रैल को हुआ था। फिलहाल नवजात को एम्स के एनआईसीयू (नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट) में भर्ती किया गया है, जहां उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। नवजात के माता-पिता नागौर जिले के डीडवाना कस्बे के निवासी हैं। जानकारी के मुताबिक रविवार को जोधपुर एम्स में भर्ती नवजात के अलावा उदयपुर के आरएनटी मेडिकल कॉलेज में एक युवक और जयपुर में अजमेर के केकड़ी निवासी 68 वर्षीय बुजुर्ग की रिपोर्ट भी कोविड पॉजिटिव पाई गई है। इससे यह स्पष्ट हो रहा है कि राज्य में कोविड का खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। प्रदेश में बीते चार माह और 25 दिनों के भीतर अब तक कुल 15 कोरोना संक्रमित मरीज सामने आ चुके हैं। इनमें फलौदी, बीकानेर और सवाई माधोपुर से एक-एक केस, कुचामन, अजमेर और जोधपुर से दो-दो केस तथा जयपुर और उदयपुर से तीन-तीन मरीजों की पुष्टि हो चुकी है। जोधपुर एम्स में अभी तक कुल पांच कोविड पॉजिटिव मरीज सामने आ चुके हैं, जिनमें से अधिकतर सर्जरी के लिए अस्पताल में भर्ती थे। चिंता की बात यह है कि नवजात शिशु का जन्म ही एम्स में हुआ था और जन्म के बाद से ही उसे एनआईसीयू में रखा गया था। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि संक्रमण नवजात तक कैसे पहुंचा? इस दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू कर दी है। वहीं बाकी चार मरीजों की ट्रेवल या कॉन्टेक्ट हिस्ट्री भी फिलहाल अस्पष्ट है। स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि हाल ही में नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल में विशेषज्ञों की बैठक हुई थी, जिसमें मौजूदा संक्रमण को ओमिक्रॉन के सब-वैरिएंट JN.1 से जुड़ा बताया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह वैरिएंट घातक नहीं है और इससे घबराने की जरूरत नहीं है। मरीज सामान्य लक्षणों के साथ डॉक्टर से परामर्श लेकर रूटीन दवाइयों से ठीक हो सकते हैं। गौरतलब है कि JN.1 वैरिएंट ओमिक्रॉन के BA.2.86 स्ट्रेन से विकसित हुआ है और इसे दिसंबर 2023 में WHO ने वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट घोषित किया था। इसमें करीब 30 म्यूटेशन्स हैं, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं। यह वैरिएंट तेजी से फैलता है लेकिन गंभीर लक्षण कम दिखाता है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि कोविड के लक्षण कई दिनों या हफ्तों तक बने रहें तो वह  लॉन्ग कोविड की स्थिति हो सकती है। ऐसे मामलों में विशेष निगरानी और देखभाल की आवश्यकता होती है। भले ही कोविड का यह नया वैरिएंट ज्यादा खतरनाक न हो लेकिन राज्य में एक बार फिर से इसके मामले सामने आना सतर्कता बरतने की जरूरत को रेखांकित करता है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस संक्रमण की चेन को समझने और नियंत्रण की दिशा में प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। recent visitors 64

बिना इंटरनेट डाटा ट्रांसफर, जानें कैसे करें

अगर आपको डाटा ट्रांसफर करना है तो इंटरनेट की जरूरत पड़ेगी ही। पीसी से डाटा मोबाइल पर भेजना तो इंटरनेट का इस्तेमाल करना ही होगा और स्मार्टफोन पर रिसीव करना है तो भी इंटरनेट डाटा की खपत तय है, लेकिन इन सिंपल ट्रिक्स से आप बिना इंटरनेट के डाटा ट्रांसफर कर सकते हैंः 1. सबसे पहले गूगल प्ले स्टोर से जेंडर एप डाउनलोड करें। यह एक डाटा ट्रांसफर एप है। इसकी खासियत है कि यह एप बिना इंटरनेट, यूएसबी और वाई-फाई के डाटा ट्रांसफर करता है। 2. अब पीसी में जेंडर एप डाउनलोड करें। 3. इसके बाद पीसी और मोबाइल दोनों को डाटा ट्रांसफर के लिए साथ रखें। 4. अब जैसे ही आप फोन पर जेंडर एप खोलेंगे, उसे पता चल जाएगा कि साथ रखें डिवाइस में जेंडर इंस्टॉल है। 5. इसके बाद डिवाइस के ग्रुप में ऐड करें। 6. अब जिन फाइल्स को भेजना है उन्हें सेलेक्ट करके सेंड ऑप्शन पर क्लिक करके भेज दें। 7. इस एप की खासियत है कि आप किन्हीं भी दो डिवाइसेज के बीच डाटा ट्रांसफर कर सकते है। आप चाहे तो दो स्मार्टफोन्स के बीच या फिर चार डिवाइसेज को कनेक्ट उनके बीच भी डाटा ट्रांसफर कर सकते है।   recent visitors 160

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समन्वय समिति गठित

भोपाल राज्य शासन द्वारा राज्य में 8वीं आर्थिक गणना, 2025-26 के सुचारू रूप से संचालन की तैयारियो, प्रगति की निगरानी तथा समस्याओं के समाधान के लिए मुख्य सचिव/मुख्य सचिव द्वारा नामित अधिकारी की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समन्वय समिति का गठन किया है। समिति में प्रमुख सचिव, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, श्रम, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, वित्त, नगरीय विकास एवं आवास, राजस्व, महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा एवं प्रतिनिधि, राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एन.एस.ओ) क्षेत्र संकार्य प्रभाग (एफ.ओ.डी) सदस्य होंगे। अपर मुख्य सचिव, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी, सदस्य/राज्य चार्ज अधिकारी तथा आयुक्त, आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय को सदस्य-सचिव/ राज्य नोडल अधिकारी बनाया गया है। समिति मुख्यत: आर्थिक गणना के संचालन में तैयारियों, प्रगति की निगरानी तथा आने वाली प्रशासनिक एवं तकनीकी समस्याओं का नियमित आधार पर समीक्षा और समाधान करेगी। राज्य में पर्याप्त संख्या में सुपरवाइजर्स की तैनाती तथा मासिक आधार पर क्षेत्रीय कार्य की प्रगति की समीक्षा की जायेगी। राज्य में पूर्ण कवरेज सुनिश्चित करना, राज्य और एन.एस.ओ (एफ.ओ.डी) के पर्यवेक्षकों द्वारा किए पर्यवेक्षण के आधार पर डेटा की शुद्धता पर रिपोर्ट तैयार करना, व्यापारिक संगठनों और आम नागरिकों को सहयोग के लिए संवेदनशील बनाना तथा जिला-स्तरीय प्राप्त फीडबैक की निगरानी करना तथा यदि कोई समस्या हो तो उसका समाधान समिति द्वारा किया जायेगा।   recent visitors 45

छत्तीसगढ़ देश के डिजिटल परिदृश्य में बड़ा कदम रखने जा रहा, AI डेटा सेंटर- ESDS करेगी 600 करोड़ रुपये का निवेश-CM साय

रायपुर छत्तीसगढ़ देश के डिजिटल परिदृश्य में बड़ा कदम रखने जा रहा है। रायपुर में अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए टेक्नोलॉजी कंपनी ESDS Software Solution Ltd ने 600 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का प्रस्ताव मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के समक्ष प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री से नई दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ सदन में मुलाकात के दौरान कंपनी के चेयरमैन पीयूष सोमानी और उपाध्यक्ष लोकेश शर्मा ने कहा कि यह सेंटर न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे भारत के डिजिटल भविष्य को गति देगा। इस प्रस्ताव के माध्यम से छत्तीसगढ़ को AI, क्लाउड टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल स्टोरेज के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में ठोस पहल होगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा, “डिजिटल इंडिया की भावना को छत्तीसगढ़ में धरातल पर उतारने के लिए यह निवेश मील का पत्थर साबित होगा। सरकार हरसंभव सहायता देगी ताकि यह परियोजना जल्द से जल्द मूर्तरूप ले।” ESDS की यह पहल छत्तीसगढ़ को एक टेक्नोलॉजी हब बनाने के साथ-साथ युवाओं के लिए उच्च स्तरीय रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी। यह सेंटर राज्य के IT इकोसिस्टम को मजबूती देगा और डिजिटल आत्मनिर्भरता की ओर एक बड़ा कदम होगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ के इनवेस्टमेंट कमिश्नर  ऋतु सेन भी उपस्थित थी । recent visitors 61