Sunday, July 5, 2026 11:05 am

पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति हेतु नवीनीकरण एवं नवीन आवेदनों के लिए ऑनलाइन आवेदन तीन चरणों में आमंत्रित

गौरेला पेण्ड्रा मरवाही शैक्षणिक सत्र 2025-26 में 12वीं से उच्चतर कक्षाओं के लिए ऑनलाइन पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति का पंजीयन, स्वीकृति एवं वितरण की कार्रवाई वेबसाइट postmatric-scholarship.cg.nic.in पर ऑनलाइन किया जा रहा है। छात्रवृत्ति हेतु प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों से ऑनलाइन आवेदन तीन चरणों में आमंत्रित किया गया है। नवीनीकरण के लिए विद्यार्थियों द्वारा आवेदन प्राप्ति की तिथि 31 मई, 31 अगस्त और 30 नवम्बर 2025 तक तथा नवीन विद्यार्थियों द्वारा आवेदन प्राप्ति की तिथि 31 अगस्त, 30 सितम्बर और 30 नवम्बर 2025 तक निर्धारित हैं। विद्यार्थियों को उनके आधार सीडेड बैंक खाते में भुगतान 7 कार्य दिवस में प्राप्त होगा। निर्धारित तिथि के पश्चात शिक्षा सत्र 2025-26 की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति ऑनलाइन आवेदन हेतु पोर्टल बंद कर दिया जावेगा एवं ड्रॉफ्ट प्रपोजल एवं सेंक्शन ऑर्डर लॉक करने का अवसर भी प्रदान नहीं किया जावेगा। निर्धारित तिथि तक कार्यवाही पूर्ण नहीं करने पर यदि संबंधित संस्थाओं के विद्यार्थी छात्रवृत्ति से वंचित रह जाते हैं तो इसके लिए संस्था प्रमुख जिम्मेदार होंगे।              सहायक आयुक्त आदिवासी विकास ने बताया है कि जिले में संचालित सभी सरकारी और निजी महाविद्यालयों, इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज, पॉलीटेक्निक कॉलेज और आईटीआई में अध्यनरत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थी, जो विभाग द्वारा संचालित पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए पात्रता रखते हैं, वे निर्धारित समय तक आवेदन कर सकते हैं। छात्रवृत्ति हेतु पात्रता के लिए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति विद्यार्थियों के पालक की आय-सीमा 2.5 लाख रूपए प्रतिवर्ष, अन्य पिछड़ा वर्ग हेतु आय-सीमा 1 लाख रूपए प्रतिवर्ष, सक्षम अधिकारी द्वारा जारी स्थाई जाति प्रमाण पत्र, छत्तीसगढ़ का मूल निवास प्रमाण पत्र, विद्यार्थी के अध्ययनरत पाठ्यक्रम के विगत वर्ष का परीक्षा परिणाम संलग्न करना होगा।  छात्रवृत्ति का भुगतान पीएफएमएस के माध्यम से आधार सीडेड बैंक खाते में पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति का भुगतान किया जा रहा है। इसलिए सभी विद्यार्थी अपने सक्रिय एवं आधार सीडेड बैक खाते की प्रविष्टि ऑनलाइन करते समय सुनिश्चित कर लें। वर्ष 2025-26 में अनुसूचित जाति,  अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को एनएसपी पोर्टल से ओटीआर (वन टाइम रजिस्ट्रेशन) प्राप्त करना आवश्यक है। इसके लिए राज्य छात्रवृत्ति पोर्टल में प्रदाय निर्देशों का अवलोकन किया जा सकता है। वर्ष 2025-26 में नवीन संस्था के संस्था प्रमुख एवं छात्रवृत्ति प्रभारी का बायोमेट्रिक अथेंटिकेशन किया जाना अनिवार्य है। recent visitors 50

हार्ट अटैक से बचने के उपाय

दिल की सेहत पर ही निर्भर करती है, हमारे शरीर की सेहत। और दिल को सेहतमंद रखने के लिए बहुत जरूरी है कि हम संतुलित जीवनशैली अपनाएं और नियमित व्याहयाम करें। पर्याप्त नींद हार्वर्ड के 70,000 महिलाओं पर किए गए एक अध्ययन के अनुसार, नींद हमारे दिल को सेहमतमंद रखने में काफी मदद करती है। इस अध्य यन में पाया गया कि जो लोग रात को एक घंटा अधिक सोते हैं, उन्हेंु दिल की बीमारी अन्यव लोगों की तुलना में कम होती है। वहीं सात घंटे से कम सोने वाले लोगों को दिल की बीमारी होने की आशंका अधिक होती हैद्य कोलेस्ट्रॉल कम करें रक्त में अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल धमनियों की भीतरी दीवारों पर जम जाता है। इससे धमनियां सिकुड़ जाती हैं और परिणामस्वॉरूप दिल तक कम मात्रा में खून पहुंचता है। इसलिए आपको चाहिए कि अपने कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखें और इसकी नियमित जांच भी करवाते रहें। उच्च रक्त कोलेस्ट्रॉल, कोरोनरी हृदय रोग विकसित होने की संभावना को बढ़ा देता है। नियमित रूप से व्यायाम करें नियमित रूप से व्यायाम स्वस्थ वजन बनाए रखने में मदद करता है। इससे मधुमेह होने की आशंका भी कम हो जाती है। मधुमेह रोगियों के बीच हार्ट अटैक का खतरा ज्याकदा होता है। गैर इंसुलिन निर्भर मधुमेह के रोगियों में सभी मौतों में से लगभग आधी दिल की बीमारी के कारण होती हैं। फैट से बचें भोजन में तेल का प्रयोग कम कर ताजी हरी सब्जियों और फल की मात्रा बढ़ाएं। ये रेशेदार और एंटी ऑक्सीडेंट्स के स्रोत हैं जो खून की वाहिकाओं में खराब कोलेस्ट्रोल के असर को कम करती हैं। इनके प्रतिदिन प्रयोग से दिल की बीमारी से बचा जा सकता है। साथ ही जंक फूड का सेवन कम से कम करें। भोजन समय पर करें। धूम्रपान न करें सिगरेट पीना महिलाओं में दिल की बीमारी का सबसे प्रमुख कारण है। मध्य म वर्ग की महिलाओं में तंबाकू के कारण लगभग 50 प्रतिशत हार्ट अटैक के मामलें देखने को मिलते हैं। वैज्ञानिकों द्वारा यह बात सिद्ध की जा चुकी है कि धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों में दिल का दौरा या आकस्मिक हृदय रोग से मृत्यु होने का खतरा आम व्यक्तियों की तुलना में दोगुनी होता है। धूम्रपान छोड़ देने के 10 वर्षो के अंदर इन बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। वजन को नियंत्रित करें यदि आपका वजन अधिक है तो आपके हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। उसे तेजी से धड़कना पड़ता है। अधिक वजन का कारण असंतुलित भोजन और व्यायाम की कमी है, जिससे कई अन्य रोग भी जन्म लेते हैं। इससे बचाव का सबसे अच्छा तरीका है, रेशे वाले अनाजों तथा उच्च किस्म के सलादों का सेवन। साथ ही नियमित रूप से आधे घंटे टहलना। यह आपके अच्छे कोलेस्ट्रोल यानी एचडीएल कोलेस्ट्रोल को बढ़ाने में आपकी मदद कर सकता है। तनाव में कमी मनोवैज्ञानिक तनाव को हार्ट अटैक की मुख्य वजह मानते हैं। तनाव के प्रभाव को कम करने के और दैनिक आधार पर सामना करने वाले तनाव का प्रबंधन के लिए स्वस्थ तरीके खोजें। इसके अलावा, पौष्टिक आहार योजना और नियमित रूप से व्यायाम आपके स्वापस्य्नी  पर पड़ने वाले तनाव को कम करने में मदद कर सकता है। शराब का सेवन कम अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, शराब का अत्यधिक सेवन हाई बीपी ओर दिल की बीमारियों का नेतृत्व कर सकता हैं। हालांकि, कुछ अध्ययनों से पता चला है कि कम मात्रा में शराब के सेवन से कोलेस्ट्रॉल सही रहता है और इसलिए यह दिल के लिए फायदेमंद है।   recent visitors 151

रायपुर : तटबंध निर्माण कार्य के लिए 77.35 लाख रूपए स्वीकृत

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन, जल संसाधन विभाग द्वारा बालोद जिले के विकासखण्ड-डौण्डीलोहारा के अंतर्गत ग्राम बड़ाजुंगेरा में स्थित स्थानीय नाले पर तटबंध निर्माण कार्य के लिए 77 लाख 35 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। जल संसाधन विभाग मंत्रालय महानदी भवन से मुख्य अभियंता महानदी गोदावरी कछार, जल संसाधन विभाग रायपुर को तटबंध निर्माण कार्य कराने प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है। recent visitors 42

महाविद्यालय परिसर को सुरक्षित करने के लिए बाउंड्रीवॉल बनाने की मिली मंजूरी, परिसर होगा सुरक्षित

बीना  शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में लंबी मांग के बाद बाउंड्रीवॉल निर्माण कराने को स्वीकृति मिली है। यह निर्माण 155.90 लाख रुपए में होना है और इस कार्य की निर्माण एजेंसी बिल्डिंग डेवलपमेंट कारपोरेशन है। यह कार्य कुछ माह बाद शुरू होने की उम्मीद है।  महाविद्यालय परिसर को सुरक्षित करने के लिए पूर्व में भी बाउंड्रीवॉल का निर्माण कराया गया था, जो जर्जर हो गई है और कई जगह गिर भी चुकी है। बाउंड्रीवॉल क्षतिग्रस्त होने के कारण अंदर मवेशी पहुंच रहे हैं, जिससे परिसर में लगे पेड़ सुरक्षित नहीं हैं। खेल मैदान भी खराब हो रहा है। साथ ही असामाजिक तत्व भी अंदर पहुंच जाते हैं। महाविद्यालय प्रबंधन लंबे समय से इसकी मांग कर रहा था और जनभागीदारी समिति में भी प्रस्ताव रखा था। प्राचार्य डॉ. एमएल सोनी ने बताया कि बाउंड्रीवॉल निर्माण की स्वीकृति मिल चुकी है और जल्द ही काम शुरू कराया जाएगा। इसके बनने से परिसर सुरक्षित होगा। जनभागदारी समिति की बैठक में प्रस्ताव रखा गया था, जिसे वरिष्ठ अधिकारियों को भेजकर यह मांग की गई थी। मुख्य गेट से होगी एंट्री बाउंड्रीवॉल बनने के बाद विद्यार्थियों की एंट्री एक ही गेट से होगी और बाहरी व्यक्ति सीधे अंदर नहीं पहुंच पाएंगे। अभी जगह-जगह से बाउंड्रीवॉल टूटी होने से विद्यार्थियों के अलावा अन्य व्यक्ति अंदर पहुंच जाते हैं। recent visitors 37

जानिए प्रेगनेंसी के दौरान कौन से मेडिकल टेस्ट है जरूरी

गर्भधारण के दौरान समय-समय पर कई तरह की जांच की जाती हैं। इससे मां और बच्चे के स्वास्थ्य की जानकारी मिलती है। साथ ही कोई कंप्लीकेशन ना हो इसकी जानकारी भी चिकित्सक को मिल जाती है। यदि कोई कंप्लीकेशन होती भी है तो चिकित्सक समय रहते उसका इलाज कर बच्चे और मां को किसी भी परेशानी से बचाया जा सकता है। आइये जानते हैं कि गर्भधारण के दौरान डिलिवरी तक कौन-कौन सी चिकित्सा जांच की जाती हैं सीबीसी यानी कम्पलीट ब्लड काउंट टेस्ट डॉक्टर आपका सीबीसी टेस्ट आपके गर्भवती होने के बाद करेगा। इससे आपके रक्त में लाल और सफेद कोशिकाओ का पता लगाया जाता है । इसके साथ ही हीमोग्लोबिन, हेमैटक्रीट और प्लेटलेट्स कणों को भी काउंट किया जाता है। हीमोग्लोबिन रक्त में मौजूद प्रोटीन होता है जो कि सेल्स को ऑक्सीजन देता है और हेमैटक्रीट शरीर में लाल रक्त कणों को जांचने का माप है। दोनों में से किसी के भी कम होने पर एनीमिया कहा जाता है। प्लेटलेट्स रक्त में थक्का जमने में सहायता करती हैं। महिला नार्मल डिलिवरी के दौरान तकरीबन आधा लीटर रक्त खो देती है। ऐसे में रक्त की कमी होने पर बच्चे और मां दोनों के लिए स्थिति खतरनाक हो सकती है। आरएच फैक्टर टेस्ट आरएच फैक्टर टेस्ट में लाल रक्त कणों के सरफेस में प्रोटीन की मात्रा देखने को किया जाता है। अगर प्रोटीन होता है तो इसे आरएच पॉजिटिव कहा जाता है अन्यथा नेगेटिव। यह टेस्ट लगभग 85 प्रतिशत महिलाओं में पॉजिटिव ही आता है। यूरिन टेस्ट डॉक्टर यूरिन टेस्ट से ही गर्भवती महिला के स्वास्थ्य की सही जानकारी लगा पाते हैं। इसमें मुख्यत शुगर की जांच की जाती है। इसके साथ ही किडनी के इन्फेक्शन का पता लगाने के लिए यूरिन में प्रोटीन की मात्रा, जांच की जाती है। इस टेस्ट के माध्यम से बैक्टीरिया की जांच की जाती है जिससे यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन का पता चल पता  है। केटोन्स की भी जांच होती है जिससे यह पता लगता  है कि शरीर कार्बोहाइड्रेट की जगह वसा का  इस्तेमाल ऊर्जा के लिए तो नहीं कर रहा है। रक्तचाप की जांच गर्भवती महिला के रक्तचाप की जांच की जाती है ताकि रक्तचाप ज्यादा या कम दोनों ही होने की स्तिथी में महिला को किसी भी प्रकार की हानि से बचाया जा सके। भ्रूण का अल्ट्रासाउंड भ्रूण के शारीरिक विकास को देखने के लिए समय समय पर अल्ट्रासाउंड किया जाता है। इसमें प्लेसेंटा की स्थिति और बच्चे के शरीर का हर माप देखा जाता है। बच्चे की मूवमेंट और अन्य क्रियाओं का भी पता अल्ट्रासाउंड से ही चलता है। मल्टीपल मार्कर स्क्रीनिंग यह दो तरह का होता है। ट्रिपल स्क्रीन टेस्ट और क्वाड स्क्रीन टेस्ट। यह आहार नाल न्यूरल टयूब में किसी भी तरह के डिफेक्ट को देखने के लिए किया जाता है। भ्रूण की हृदय गति मापना हर महीने भ्रूण की हृदय गति में बदलाव आता है। जन्म के समय भी यह बदल जाती है। डॉक्टर समय-समय पर जांच कर यह चेक करते हैं की हार्ट बीट सामान्य है या नहीं। यदि ह्रदय गति कम आये तो माना जाता है कि बच्चे को ऑक्सीजन कम मिल रही है।   recent visitors 163

साइबर ठगी के बढ़ते जाल को लेकर जयपुर कमिश्नरेट की तरफ से नई पहल

जयपुर राजधानी जयपुर के पुलिस कमिश्नरेट में आज से साइबर सपोर्ट सेंटर शुरू किया गया है। इस सेंटर के जरिए राजस्थान में साइबर ठगी के शिकार लोगों की मदद की जाएगी और उनकी काउंसिंग की जाएगी ताकि वे भविष्य में इस तरह की ठगी का शिकार होने से बचें। अक्सर साइबर क्राइम का शिकार बच्चे, महिलाएं एवं बुजुर्ग अवसाद में भी चले जाते हैं। ऐसे में यह सेंटर इस तरह के पीड़ित लोगों की काउंसिलिंग करेगा, जिससे वे मानसिक अवसाद से बाहर निकल सकें। डीजीपी यूआर साहू व डीजी साइबर क्राइम हेमंत प्रियदर्शी ने इस सेंटर की शुरुआत की है। यह सेंटर मुंबई स्थित एनजीओ रेस्पांसिबल नेटिजन्स द्वारा संचालित किया जाएगा। कोगटा फाउंडेशन इसमें आर्थिक सहयोग करेगा। यह सेंटर ऑनलाइन ठगी के शिकार हुए लोगों को मुकाबला करने, साइबर अपराधों के पीड़ितों को तत्काल सहायता प्रदान करने और #CyberSafe Jaipur अभियान के अंतर्गत साइबर वेलनेस को बढ़ावा देने के लिए स्थापित किया गया है। जानकारी के अनुसार साइबर अपराध के सबसे ज्यादा शिकार बच्चे होते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार साइबर स्पेस का उपयोग करने वाले 3 में से 1 बच्चे को ऑनलाइन बुलिंग का सामना करना पड़ता है। करीब 70 प्रतिशत बच्चों को साइबर खतरों का हर स्टेज पर सामना करना पड़ रहा है। एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार फाइनेंस से जुड़े साइबर अपराधों में 24.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है। साइबर धोखाधड़ी के कारण 2024 में 2054 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ है। राजस्थान में हर रोज 3 हजार साइबर मामले दर्ज हो रहे हैं। इनमें से 45.25 प्रतिशत अपराध पैसों के लेन-देन, 30.16 प्रतिशत यूपीआई घोटाले से संबंधित हैं। वहीं लगभग 12 प्रतिशत अपराध सोशल मीडिया  व 11 प्रतिशत यौन उत्पीड़न से संबंधित हैं। साइबर अपराध के शिकार लोगों ने बीते 3 साल में 1581 करोड़ रुपए गंवा दिए, वहीं समय पर पुलिस के हस्तक्षेप के कारण 676 करोड़ रुपए बैंकों से निकाले जाने बचा लिए गए। यह केंद्र रिस्पॉन्सिबल नेटिजन्सव के तहत संचालित होगा। इस टीम में परियोजना समन्वयक, वरिष्ठ परामर्शदाता और मनोवैज्ञानिक, कानूनी और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ, प्रशिक्षित प्रशिक्षक और कार्यशाला संचालक एवं केस डॉक्यूमेंटेशन के लिए फ्रंट डेस्क अधिकारी शामिल होंगे।  इस सेंटर में साइबर ठगी के शिकार लोगों को ऑनलाइन उत्पीड़न, ट्रोलिंग और इंटरनेट की लत के मामलों के लिए परामर्श व मनोवैज्ञानिक सहायता दी जाएगी। इसके साथ ही तकनीकी और कानूनी सहायता के तहत अकाउंट रिकवरी, धोखाधड़ी रोकथाम, पुलिस रेफरल उपलब्ध कराई जाएगी।  जागरूकता कार्यक्रम- छात्रों, कानून प्रवर्तन और वरिष्ठ नागरिकों के लिए ऑनलाइन सुरक्षा सत्र, जन जागरूकता अभियान- साइबर अपराधों की रोकथाम हेतु पहल। साइबर वेलनेस सहायता- तत्काल हस्तक्षेप और दीर्घकालीन पीड़ित सहायता दिए जाने की योजना है।   recent visitors 69

इंदौर: एमवाय अस्पताल में लापरवाही उजागर होने से बचने मीडिया का अस्पताल में प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया !

इंदौर एमपी के इंदौर में स्थित एमवाय अस्पताल (Maharaja Yashwantrao Hospital or MYH) में वहीं के स्टाफ द्वारा किराये के कर्मचारियों से कैजुअल्टी में काम कराने के खुलासे के बाद प्रबंधन मनमानी को दबाने में जुट गया है। आए दिन अस्पताल की लापरवाही उजागर होने से किरकिरी न हो, इसलिए एमवायएच अधीक्षक डॉ. अशोक यादव ने मीडिया का अस्पताल में प्रवेश प्रतिबंधित (Media Banned) कर दिया है। दलील दी कि कर्मचारियों ने शिकायत की थी कि कुछ लोगों के फोटो-वीडियो बनाने से परेशानी होती है। इसलिए मीडियाकर्मियों के प्रवेश पर रोक लगाई है। मालूम हो, एमवायएच में एवजियों का मामला उजागर होने से प्रबंधन की काफी फजीहत हुई थी। अस्पताल के कुछ लोगों ने कैजुअल्टी में काम करने के लिए 500 रुपए रोज पर अनाधिकृत रूप से कर्मचारियों को रख लिया था। यह काम वर्षों से चल रहा था, लेकिन किसी भी जिम्मेदार ने एक्शन नहीं लिया। मामला उजागर होने के बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। सख्ती के तौर पर मरीजों के साथ आने वालों से मुख्य गेट पर पूछताछ की जा रही है। कैजुअल्टी में मरीज के साथ एक ही परिजन को नियमानुसार जाने की अनुमति है। मरीजों की आवाज खामोश करने की साजिश मीडिया के प्रवेश पर प्रतिबंध का काला आदेश मरीजों की पीड़ा को खामोश करने की साजिश है। अस्पताल में सेवाभावी डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों की कमी नहीं है। वे हर पल इस प्रयास में रहते हैं कि किस तरह मरीज की पीड़ा कम की जाए। तकलीफ उन्हें है जो सरकारी नौकरी में आराम की गुंजाइश तलाशते हैं। वे नहीं चाहते हैं कि उनके अस्पताल से नदारद होने या मनमानी करने की बात उजागर हो। अस्पताल में मीडियाकर्मी या और किसी को मरीजों के इलाज में अड़चन बनने की इजाजत नहीं है। लेकिन, इस काले आदेश को वापस लेना होगा। मामले में स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन को भी हस्तक्षेप करना होगा। ताकि मनमर्जी जारी रहे एमवायएच में डॉक्टरों के समय पर नहीं आने, मरीजों से दुर्व्यवहार और इलाज में लापरवाही उजागर होती रहती है। मरीजों के परिजन से मारपीट, शव ले जाने में एंबुलेंस माफिया की मनमानी और निजी अस्पतालों में मरीजों को रेफर करने जैसे घटनाक्रम साबित हो चुके हैं। कहा जा रहा है कि इन्हें दबाने के लिए अधीक्षक ने मीडिया पर प्रतिबंध का आदेश दिया है। चार दिन बाद भी नहीं लगे फोटो एमवायएच में पीजी स्टूडेंट्स द्वारा बाहरी लोगों को किराये पर रखकर ओटी टेक्नीशियन व ड्रेसर का काम लिया जा रहा था। मामले में कार्रवाई नहीं हुई और नौकरी पर रखे एवजियों के फोटो भी नहीं लगाए गए। पुलिस को भी सूचना नहीं दी है। नाम सामने नहीं आने से पुलिस पूछताछ नहीं कर पा रही है। recent visitors 50