Saturday, July 4, 2026 11:02 pm

Budget 2026 में नई सौगात: भारत में डेटा सेंटर बनाने वाली कंपनियों को मिलेगा 2047 तक Tax Holiday

नई दिल्ली Budget 2026: वित्त मंत्री निर्माला सीतारमण ने आज लगातार अपना नौवां बजट पेश किया है। इस दौरान उन्होंने क्लाउड सर्विसेस और डेटा सेंटर्स को लेकर भी बड़ी घोषणा की। वित्त मंत्री ने लोकल डेटा सेंटर बनाए रखने वाली क्लाउड सर्विसेस के लिए Tax Holiday शुरू करने की योजना की घोषणा की। वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार भारत में स्थित डेटा सेंटर के जरिए दुनिया भर में क्लाउड सर्विस देने वाली विदेशी कंपनियों को 2047 तक टैक्स में छूट देगी। यह पहल देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस पॉलिसी का मकसद डेटा लोकलाइजेशन को बढ़ावा देना और क्लाउड प्रोवाइडर्स को घरेलू इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करना है।   भारत में मजबूत होगा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर दरअसल, प्रस्तावित टैक्स हॉलिडे खास तौर पर उन क्लाउड सर्विसेज को टारगेट करता है जो भारतीय क्षेत्र में डेटा सेंटर बनाते और चलाते हैं। यह कदम डेटा लोकलाइजेशन को बढ़ावा देने के साथ-साथ टेक्नोलॉजी कंपनियों को घरेलू इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दिखाता है। हालांकि, एलिजिबल होने के लिए, विदेशी कंपनियों को भारतीय ग्राहकों को विशेष रूप से भारतीय रीसेलर के जरिए सर्विस देनी होगी। केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए उन्होंने कहा, "मैं किसी भी विदेशी कंपनी को 2047 तक टैक्स हॉलिडे देने का प्रस्ताव करती हूं, जो भारत में स्थित डेटा सेंटर का इस्तेमाल करके ग्लोबल कस्टमर्स को क्लाउड सर्विस देती है। हालांकि, ऐसी कंपनियों को एक भारतीय रीसेलर एंटिटी के जरिए भारतीय कस्टमर्स को सर्विस देनी होगी।" "मैं यह भी प्रस्ताव करती हूं कि अगर भारत से डेटा सेंटर सर्विस देने वाली कंपनी एक संबंधित एंटिटी है, तो कॉस्ट पर 15% का सेफ हार्बर दिया जाए।" लोकल डेटा सेंटर वाले क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स को टैक्स इंसेंटिव देकर, इस पॉलिसी का मकसद डेटा संप्रभुता सुनिश्चित करते हुए भारत के टेक्नोलॉजी सेक्टर में ज्यादा निवेश को बढ़ावा देना है। विदेशी रिसोर्सेस पर निर्भरता कम होगी इससे पहल से देश में घरेलू डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूत बनाने और विदेशी डेटा स्टोरेज रिसोर्सेस पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। टैक्स छूट का ढांचा क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए लोकल डेटा सेंटर ऑपरेशंस को आर्थिक रूप से ज्यादा आकर्षक बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। यह नई पॉलिसी भारतीय बाजार में क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स के काम करने की रणनीति पर काफी असर डाल सकती है। लोकल डेटा सेंटर वाली कंपनियों को टैक्स में फायदा होगा, जिससे देश में इंफ्रास्ट्रक्चर में ज्यादा निवेश हो सकता है और बेहतर सर्विस मिल सकती हैं।   recent visitors 29

खुशखबरी युवाओं के लिए: Budget 2026 से बदलने वाला है भारत का डिजिटल भविष्य

नई दिल्ली Budget 2026 का ऐलान हो चुका है। इस बजट में सरकार ने एक अलग और नया रास्ता चुना है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण के दौरान बताया कि अब भारत सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि क्रिएटिव इंडस्ट्री को भी देश की अर्थव्यवस्था का मजबूत हिस्सा बनाना चाहता है। इसी सोच के तहत सरकार ने एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स यानी वीएफएक्स, गेमिंग और कॉमिक्स जैसे सेक्टर को 'ऑरेंज इकोनॉमी' का नाम दिया गया है। मोबाइल गेमिंग, OTT प्लेटफॉर्म, डिजिटल फिल्में और ऑनलाइन कंटेंट की बढ़ती मांग से ये इंडस्ट्री तेजी से आगे बढ़ रही है। सरकार का मानना है कि अगर सही ट्रेनिंग और प्लेटफॉर्म दिया जाए, तो यही युवा देश को ग्लोबल लेवल पर पहचान दिला सकते हैं। बजट में किए इन ऐलान से आने वाले सालों में Animation, VFX और Gaming जैसे क्षेत्र लाखों नौकरियां पैदा कर सकते हैं। खास बात यह है कि सरकार अब स्कूल और कॉलेज स्तर से ही छात्रों को कंटेंट क्रिएशन और डिजिटल स्किल्स से जोड़ना चाहती है। Orange Economy क्या है सरकार ने Budget 2026 में ‘Orange Economy’ की बात की है। इसमें Animation, VFX, Gaming, Comics और डिजिटल कंटेंट जैसे सेक्टर शामिल हैं। ये वो सेक्टर हैं जिनमें आइडिया, सोच और क्रिएटिविटी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। दुनिया भर में इन इंडस्ट्रीज की डिमांड तेजी से बढ़ रही है और भारत भी इस रेस में पीछे नहीं रहना चाहता। सरकार का मानना है कि भारत में पहले से ही कई बड़ी फिल्में, वेब सीरीज और गेम्स पर काम हो रहा है। VFX और Animation का इस्तेमाल अब हर फिल्म और ऐड में आम बात हो गई है। ऐसे में सरकार चाहती है कि यह काम विदेशों में आउटसोर्स होने के बजाय भारत में ही हो और इससे देश के युवाओं को रोजगार मिले। Budget 2026 में हुआ ये ऐलान Budget 2026 में सरकार ने ऐलान किया है कि देशभर के 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में Content Creator Labs खोली जाएंगी। इन लैब्स में छात्रों को Animation, Gaming, VFX और डिजिटल कंटेंट बनाने की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसका मकसद यह है कि बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ प्रैक्टिकल स्किल्स भी सीख सकें और भविष्य के लिए तैयार हो सकें। अगर क्रिएटिव स्किल्स को सही दिशा दी जाए, तो आने वाले समय में यह सेक्टर करोड़ों रुपये की इंडस्ट्री बन सकता है और लाखों युवाओं को नौकरी और स्वरोजगार दे सकता है। रोजगार और युवाओं को होगा फायदा Animation, Gaming और VFX जैसे सेक्टर में काम करने के लिए सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि स्किल्स की जरूरत होती है। बजट में किए ऐलानों से उन युवाओं को फायदा मिलेगा जो डिजाइन, स्टोरीटेलिंग, गेम डेवलपमेंट या डिजिटल आर्ट में रुचि रखते हैं। सरकार के अनुमान के मुताबिक आने वाले कुछ सालों में यह सेक्टर करीब 20 लाख लोगों को रोजगार दे सकता है। इसमें फ्रीलांस काम, स्टार्टअप और ग्लोबल प्रोजेक्ट्स के मौके भी शामिल होंगे। recent visitors 33

बजट 2026 का बड़ा ऐलान: शिक्षा पर रिकॉर्ड निवेश, छात्रों और युवाओं को क्या मिलेगा?

नई दिल्ली लोकसभा में आज बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शिक्षा सेक्टर को ध्यान में रखते हुए कई बड़े ऐलान किए। वित्त मंत्री ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए एजुकेशन सेक्टर के मद्देनजर 1,39,289 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट पेश किया है। इस मास्टरप्लान के जरिए सरकार का मानना है कि पढ़ाई को रोजगार, उद्यम और आधुनिक तकनीक से जोड़ना है, ताकि डिग्री हाथ में होने के साथ-साथ काम का हुनर भी युवाओं के पास हो। सरकार ने शिक्षा और नौकरी के बीच की दूरी कम करने के लिए एक नई सोच के साथ ‘शिक्षा से रोजगार और उद्यम’ (Education to Employment and Enterprise – EEE) स्टैंडिंग कमेटी बनाने का ऐलान किया है। यह कमेटी खासतौर पर सेवा क्षेत्र, नई इंडस्ट्री और उभरती टेक्नोलॉजी में युवाओं को दक्ष बनाने पर फोकस करेगी। इसका सीधा फायदा उन छात्रों को मिलेगा जो पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी के लिए भटकते हैं। हायर एजुकेशन और STEM में बेटियों पर खास फोकस बजट में उच्च शिक्षा और खासतौर पर STEM यानी साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। सरकार चाहती है कि इस क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी सिर्फ बढ़े ही नहीं, बल्कि स्थायी बने। इसी सोच के तहत देश के हर ज़िले में हायर एजुकेशन STEM संस्थानों से जुड़े गर्ल्स हॉस्टल बनाए जाने का प्रस्ताव रखा गया है। इससे दूर-दराज़ से आने वाली छात्राओं को सुरक्षित और सुविधाजनक रहने की जगह मिलेगी। इसके साथ ही, औद्योगिक और लॉजिस्टिक कॉरिडोर के पास 5 यूनिवर्सिटी टाउनशिप विकसित की जाएंगी। इन टाउनशिप का मकसद पढ़ाई और इंडस्ट्री को एक ही इकोसिस्टम में लाना है, ताकि छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही इंडस्ट्री एक्सपोजर, इंटर्नशिप और नौकरी के मौके मिल सकें। रिसर्च और साइंस को बढ़ावा देने के लिए देश में चार बड़े टेलीस्कोप इंफ्रास्ट्रक्चर सेंटर बनाए या अपग्रेड किए जाएंगे, जिससे युवा वैज्ञानिक और रिसर्चर अंतरिक्ष विज्ञान की ओर आकर्षित हों। स्किल डेवलपमेंट और फ्यूचर टेक्नोलॉजी पर दांव डिजिटल दौर की जरूरतों को समझते हुए बजट में स्किल डेवलपमेंट को केंद्र में रखा गया है। खासतौर पर तेजी से बढ़ रहे AVGC सेक्टर यानी एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स पर बड़ा ऐलान हुआ है। सरकार ने देश के 15,000 सेकेंडरी स्कूलों और 500 कॉलेजों में AVGC कंटेंट क्रिएटर लैब स्थापित करने का फैसला किया है। यह कदम उन युवाओं के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है, जो क्रिएटिव फील्ड में करियर बनाना चाहते हैं और सीधे रोजगार या स्टार्ट-अप की राह पकड़ना चाहते हैं। इसके अलावा, हेल्थ और केयर सेक्टर को ध्यान में रखते हुए 1.5 लाख मल्टी-स्किल्ड केयरगिवर्स को ट्रेनिंग देने की योजना बनाई गई है। बुजुर्गों, मरीजों और विशेष जरूरतों वाले लोगों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह सेक्टर आने वाले समय में रोजगार का बड़ा जरिया बन सकता है। वहीं, दिव्यांग युवाओं के लिए इंडस्ट्री की जरूरतों के मुताबिक कस्टमाइज्ड स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किए जाएंगे, ताकि वे भी आत्मनिर्भर बन सकें। खोले जाएंगे नए संस्थान बजट 2026 में शिक्षा और उद्योग के बीच तालमेल मजबूत करने के लिए कई नए संस्थानों की घोषणा की गई है। पूर्वी भारत में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (NID) खोला जाएगा, जिससे इस क्षेत्र में डिजाइन और क्रिएटिव एजुकेशन को नई पहचान मिलेगी। हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी की स्थापना की जाएगी, ताकि टूरिज्म और होटल इंडस्ट्री को स्किल्ड प्रोफेशनल्स मिल सकें। इसके साथ-साथ दस चुनिंदा विषयों में अलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स के लिए नए संस्थान बनाए जाएंगे और मौजूदा संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा। विदेश पढ़ाई करने वालों को राहत विदेश में पढ़ाई का सपना देखने वाले छात्रों के लिए भी बजट राहत लेकर आया है। लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत विदेश शिक्षा के लिए भेजे जाने वाले पैसे पर TCS दर को 5% से घटाकर 2% कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे न सिर्फ छात्रों बल्कि उनके परिवारों पर भी वित्तीय बोझ कम होगा और विदेशी शिक्षा पहले से ज्यादा सुलभ बनेगी।   recent visitors 29

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले – विकसित भारत की दिशा में ऐतिहासिक कदम, केंद्रीय बजट 2026-27

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय बजट 2026-27 पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह बजट भारत के सुनहरे और विकसित भविष्य की दिशा में एक ऐतिहासिक दस्तावेज है। कर्तव्य भवन में बना हुआ यह पहला बजट है, जिसमें देश के समग्र विकास और प्रत्येक नागरिक के कल्याण को ध्यान में रखते हुए तीन प्रमुख कर्तव्यों-आर्थिक विकास एवं रोजगार वृद्धि, जनता की अपेक्षाओं की पूर्ति तथा ‘सबका साथ, सबका विकास’ को केंद्र में रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत यह बजट गरीब, किसान, युवा, महिला, मध्यम वर्ग और श्रमिक वर्ग के उत्थान के लिए मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों को इस बजट का सीधा लाभ मिलेगा। कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती बजट में किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। एआई और आधुनिक तकनीक के माध्यम से कृषि उत्पादकता बढ़ाने, पशुपालन एवं डेयरी उद्योग को प्रोत्साहन देने की योजना बनाई गई है। साथ ही महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल के तहत स्थानीय उद्योग और हस्तशिल्प को बढ़ावा देकर ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बजट में युवाओं के लिए रोजगार सृजन पर विशेष जोर दिया गया है। स्टार्टअप, एमएसएमई, मैन्युफैक्चरिंग और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में नए अवसर पैदा होंगे। पर्यटन को बढ़ावा देने से स्थानीय आर्थिक विकास को गति मिलेगी और युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार मिलेगा। विदेश यात्रा और विदेशों में पढ़ाई भी पहले की तुलना में सस्ती होगी। स्वास्थ्य क्षेत्र में ऐतिहासिक पहल स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर बजट को ऐतिहासिक बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बायोफार्मा सेक्टर के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे कैंसर, डायबिटीज सहित अन्य गंभीर बीमारियों की दवाइयां सस्ती होंगी। जिला अस्पतालों के उन्नयन, हर जिले में इमरजेंसी एवं ट्रॉमा सेंटर की स्थापना, मानसिक स्वास्थ्य और आयुर्वेदिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के साथ-साथ मेडिकल टूरिज्म के लिए राज्यों में पांच रीजनल हब स्थापित किए जाएंगे। इससे छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर बेहतर होगा और रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे। महिला सशक्तिकरण को नई दिशा लखपति दीदी योजना के विस्तार के माध्यम से महिलाओं को क्रेडिट-लिंक्ड स्वरोजगार, उद्यमिता और स्थानीय बाजार से जोड़ने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा हर जिले में बालिकाओं के लिए छात्रावास निर्माण की घोषणा से उन्हें उच्च शिक्षा में सहायता मिलेगी। उद्योग, शिक्षा और खेल को बढ़ावा देश की आर्थिक मजबूती के लिए 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, 20 नए जलमार्ग, बड़े टेक्सटाइल पार्क और 4 राज्यों में खनिज कॉरिडोर की घोषणा की गई है। सेमीकंडक्टर मिशन के लिए 40 हजार करोड़ रुपये के निवेश से औद्योगिक विकास और रोजगार को नई गति मिलेगी। वहीं खेलो इंडिया मिशन और शिक्षा क्षेत्र में सुधारों से बच्चों और युवाओं को बेहतर अवसर मिलेंगे। कर सुधार और आम जनता को राहत आयकर प्रक्रिया को सरल बनाया गया है और छोटे करदाताओं के लिए आसान व्यवस्था की गई है। दवाइयां, कपड़े, जूते, मोबाइल, ईवी बैटरी, सोलर उपकरण, बायोगैस-सीएनजी सहित कई रोजमर्रा की वस्तुएं सस्ती होंगी, जिससे आम जनता को सीधी राहत मिलेगी। अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास और सबका विश्वास’ की भावना को और मजबूत करता है। यह बजट छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में समावेशी विकास सुनिश्चित करेगा। उन्होंने छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण को इस ऐतिहासिक, विकासशील और जनकल्याणकारी बजट के लिए हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित किया। recent visitors 28

बजट की खास बातें: टैक्सपेयर्स और मिडिल क्लास के लिए फायदे और नए फैसले

नई दिल्ली वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार (फरवरी) को लगातार नौवीं बार केंद्रीय बजट पेश किया। खास बात यह रही कि भारत के स्वतंत्र इतिहास में पहली बार बजट रविवार को प्रस्तुत किया गया। वित्त मंत्री ने बजट को पारंपरिक ‘बही-खाता’ शैली के कवर में रखे डिजिटल टैबलेट के माध्यम से पेश किया। अपने भाषण में निर्मला सीतारमण ने कहा कि 2014 के बाद से भारत की अर्थव्यवस्था स्थिरता, वित्तीय अनुशासन और सतत विकास के रास्ते पर आगे बढ़ी है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत को मार्गदर्शक सिद्धांत बनाते हुए सरकार ने घरेलू विनिर्माण को मजबूत किया, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की और महत्वपूर्ण आयात निर्भरता को कम किया है। इन प्रयासों के चलते भारत ने लगभग 7% की उच्च विकास दर हासिल की है और करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया है। आइए जानते हैं आम आदमी के लिए केंद्रीय बजट 2026 का क्या मतलब है? करदाताओं को राहत – संशोधित आयकर रिटर्न (Revised ITR) भरने की अंतिम तारीख 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च कर दी गई है। – ITR-1 और ITR-2 दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई पहले की तरह ही रहेगी। – गैर-ऑडिट मामलों और ट्रस्ट्स के लिए रिटर्न फाइल करने की समय-सीमा 31 अगस्त कर दी गई है। – एनआरआई को बड़ी राहत: संपत्ति बिक्री पर अब TDS की कटौती खरीदार करेगा, जिससे कागजी कार्रवाई आसान होगी। रोजगार के नए अवसर – पूंजीगत व्यय बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ किया गया है, जिससे सड़क, रेलवे और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होंगे। – 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से निर्माण कार्य और कनेक्टिविटी दोनों को बढ़ावा मिलेगा। छोटे व्यापारियों और MSME को मजबूती – ₹10,000 करोड़ का विशेष फंड छोटे और मझोले उद्योगों को मजबूत बनाने के लिए। – आसान लोन, नीति समर्थन और नई तकनीक से छोटे व्यापारियों को सीधा फायदा। महंगाई पर नियंत्रण और सस्ती चीजें – आत्मनिर्भर भारत पर जोर देकर आयात पर निर्भरता कम की जाएगी, जिससे लंबे समय में जरूरी वस्तुएं सस्ती रहेंगी। – सप्लाई चेन मजबूत होने से कीमतों में स्थिरता आएगी। महिलाओं और बेटियों के लिए सुविधाएं – देश के हर जिले में एक बालिका छात्रावास बनाया जाएगा, जिससे शिक्षा और सुरक्षा दोनों बेहतर होंगी। – टेक्सटाइल और MSME सेक्टर में महिलाओं के लिए रोजगार के नए मौके। यात्रा और रोजमर्रा की सुविधा – सड़क, रेलवे और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क बेहतर होने से यात्रा समय घटेगा और ईंधन खर्च कम होगा। – शहरों और गांवों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी। स्वास्थ्य और आयुष सेवाएं – आयुष फार्मेसियों और ड्रग टेस्टिंग लैब्स का उन्नयन किया जाएगा। – मेडिकल और वेटरनरी शिक्षा को बढ़ावा, जिससे बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। टेक्सटाइल और मैन्युफैक्चरिंग में नौकरियां – मेगा टेक्सटाइल पार्क से ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होंगे। मजबूत और स्थिर अर्थव्यवस्था – राजकोषीय घाटा घटकर GDP का 4.3% रहने का अनुमान। – सरकार के अनुसार 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले, जिससे आर्थिक स्थिरता मजबूत हुई। कुल मिलाकर आम आदमी को क्या फायदा? • रोजगार के अवसर बढ़ेंगे • टैक्स भरना आसान होगा • बेहतर सड़क, रेल और सुविधाएं मिलेंगी • शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार • महंगाई पर नियंत्रण और आर्थिक स्थिरता   recent visitors 29

भारत बनेगा एयरक्रॉफ्ट हब! टैक्स में छूट से घटेंगे विमान बनाने की लागत

नई दिल्ली यूनियन बजट 2026 में सरकार ने एविएशन सेक्टर के लिए बड़ा और दूरगामी कदम उठाया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सिविल और डिफेंस एविएशन में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए कस्टम ड्यूटी में छूट का ऐलान किया है। इस फैसले से न सिर्फ लागत घटेगी, बल्कि भारत को ग्लोबल एविएशन हब बनाने की दिशा में भी मजबूती मिलेगी।   सिविल एविएशन के लिए क्या बदला? बजट 2026 के तहत सरकार ने सिविलियन ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट और अन्य विमानों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कंपोनेंट्स और पार्ट्स पर बेसिक कस्टम ड्यूटी खत्म करने का फैसला किया है। इसका सीधा फायदा यह होगा कि अब भारत में विमान बनाना सस्ता और आसान हो जाएगा, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी। डिफेंस एविएशन को भी बड़ी राहत सिर्फ सिविल ही नहीं, डिफेंस एविएशन के लिए भी बजट 2026 में बड़ी घोषणा की गई है। डिफेंस एयरक्राफ्ट के पार्ट्स बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल (Raw Materials) पर बेसिक कस्टम ड्यूटी से छूट दी जाएगी। यह छूट खास तौर पर MRO (Maintenance, Repair and Overhaul) और डिफेंस यूनिट्स की ऑपरेशनल जरूरतों के लिए लागू होगी। घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को कैसे मिलेगा फायदा? वित्त मंत्री के मुताबिक इन फैसलों का मकसद लोकल प्रोडक्शन को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही मैन्युफैक्चरिंग की लागत कम करना और भारतीय कंपनियों को ज्यादा कॉम्पिटिटिव बनाना है। सरकार एविएशन और डिफेंस सेक्टर में नए निवेश को आकर्षित करना चाहती है। भारत बनेगा ग्लोबल एविएशन हब? सरकार पहले से ही चाहती है कि भारत सिर्फ विमान उड़ाने वाला देश न होकर, विमान बनाने वाला, उनके पार्ट्स तैयार करने वाला और MRO सर्विसेज देने वाला ग्लोबल सेंटर बने। ड्यूटी छूट जैसे कदम इस दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकते हैं। रोजगार और स्टार्टअप्स को भी मिलेगा बूस्ट इस फैसले का असर सिर्फ बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा। MSME सेक्टर, एविएशन स्टार्टअप्स, स्किल्ड मैनपावर सभी के लिए नए अवसर पैदा होंगे। आने वाले सालों में हजारों नई नौकरियां बनने की उम्मीद है। बजट 2026 (Budget 2026) में एविएशन इंडस्ट्री के लिए ड्यूटी-फ्री मैन्युफैक्चरिंग का ऐलान यह साफ संकेत देता है कि सरकार भारत को एयरोस्पेस और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का पावरहाउस बनाना चाहती है। इसके साथ ही सिविल और डिफेंस दोनों सेक्टर को साथ लेकर चलने वाली यह रणनीति आने वाले समय में भारत की एविएशन इंडस्ट्री को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।   recent visitors 35

बजट 2026 में टैक्स का ट्विस्ट! स्लैब बदलने पर वित्त मंत्री का बड़ा बयान, किसे होगा फायदा?

नई दिल्ली वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में केंद्रीय बजट 2026 पेश किया और इसके साथ ही उन्होंने इतिहास रच दिया। यह उनका लगातार नौवां बजट है, जो अब तक किसी भी वित्त मंत्री द्वारा पेश किए गए सबसे ज्यादा बजटों में शामिल हो गया है। बजट भाषण से पहले उन्होंने परंपरा के अनुसार कर्तव्य भवन स्थित वित्त मंत्रालय में कार्यभार संभाला और फिर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। अपने भाषण में वित्त मंत्री ने अर्थव्यवस्था, सुधारों और भविष्य की विकास योजनाओं पर जोर दिया। इनकम टैक्स स्लैब में हुआ है बदलाव? बजट 2026 में आम करदाताओं की सबसे ज्यादा नजर इनकम टैक्स स्लैब पर टिकी हुई थी। हालांकि, इस बार वित्त मंत्री ने आयकर की दरों या स्लैब में कोई बड़ा बदलाव करने का ऐलान नहीं किया। लेकिन राहत की बात यह रही कि उन्होंने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की समय-सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव रखा। अब करदाता 31 मार्च तक नाममात्र शुल्क के साथ रिटर्न दाखिल कर सकेंगे। माना जा रहा है कि इससे नौकरीपेशा और छोटे करदाताओं को काफी सहूलियत मिलेगी, जो तकनीकी या दस्तावेजी कारणों से समय पर रिटर्न नहीं भर पाते। पुरानी टैक्स व्यवस्था अगर पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) की बात करें, तो इसमें स्लैब पहले जैसे ही रखे गए हैं। सालाना ₹2.5 लाख तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। ₹2.5 लाख से ₹5 लाख तक की आय पर 5 फीसदी टैक्स देना होगा। ₹5 लाख से ₹10 लाख तक की आय पर 20 फीसदी टैक्स और ₹10 लाख से ऊपर की आय पर 30 फीसदी टैक्स लागू रहेगा। इस व्यवस्था में छूट और कटौतियों (जैसे HRA, 80C, 80D) का फायदा मिलता है, इसलिए कई करदाता अभी भी इसे पसंद करते हैं। नई टैक्स व्यवस्था वहीं नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) में ज्यादा स्लैब हैं और टैक्स दरें चरणबद्ध तरीके से बढ़ती हैं। ₹4 लाख तक की आय पर कोई टैक्स नहीं है। ₹4 से ₹8 लाख तक 5 फीसदी, ₹8 से ₹12 लाख तक 10 फीसदी, ₹12 से ₹16 लाख तक 15 फीसदी, ₹16 से ₹20 लाख तक 20 फीसदी और ₹20 से ₹24 लाख तक 25 फीसदी टैक्स लगेगा। ₹24 लाख से ज्यादा आय पर 30 फीसदी टैक्स देना होगा। यह व्यवस्था उन लोगों के लिए आसान मानी जाती है जो ज्यादा कटौतियों का दावा नहीं करते। कुल मिलाकर, बजट 2026 में टैक्स स्लैब भले न बदले हों, लेकिन प्रक्रियाओं को आसान बनाने की कोशिश जरूर दिखाई दी।   recent visitors 31