Sunday, July 5, 2026 9:32 am

भीषण गर्मी की दस्तक: राजस्थान में दिन–रात बढ़ी तपिश, लोगों की मुश्किलें बढ़ीं

जयपुर राजस्थान में तापमान लगातार बढ़ रहा है और अब दिन के साथ-साथ रातें भी गर्म होने लगी हैं। प्रदेश के ज्यादातर शहरों में न्यूनतम तापमान सामान्य से 2 से 7 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया जा रहा है। बाड़मेर में रात का तापमान 23 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो इस समय के लिहाज से ज्यादा है। पश्चिमी जिलों में तेज धूप के कारण लोग दिन के समय बाहर निकलने से बच रहे हैं। मौसम केंद्र मौसम केंद्र जयपुर के अनुसार राज्य में अगले एक सप्ताह तक मौसम शुष्क रहेगा। साथ ही आने वाले दो से तीन दिनों में तापमान 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है, जिससे गर्मी का असर और तेज होगा। रविवार को पूरे प्रदेश में आसमान साफ रहा और सुबह से शाम तक तेज धूप देखने को मिली। पिछले 24 घंटों में बाड़मेर में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 36.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा जोधपुर में 35.1, फतेहपुर (सीकर) में 35.5, जैसलमेर में 34.7, बीकानेर में 34.4, फलोदी में 34.6, चित्तौड़गढ़ में 34.6, करौली में 33.3, जालोर में 33.5, दौसा में 33.4, नागौर में 33.2, चूरू में 33.6, कोटा में 33.4, पिलानी में 33.7, वनस्थली में 33.6, भीलवाड़ा में 33 और जयपुर में 32.2 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। रात के तापमान में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कई शहरों में न्यूनतम तापमान 20 डिग्री के आसपास पहुंच गया है। बाड़मेर के अलावा जवाई डैम (पाली) में 20.6, जैसलमेर में 20, जालोर में 20.7, फलोदी में 19.8, बीकानेर में 18.9, कोटा में 18.8 और जयपुर में 18 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान दर्ज हुआ। इन सभी स्थानों पर रात का तापमान सामान्य से 2 से 7 डिग्री अधिक रहा। मौसम केंद्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा के अनुसार होली के बाद प्रदेश में गर्मी और तेज होने की संभावना है। अगले कुछ दिनों में दिन और रात दोनों के तापमान में 2 से 3 डिग्री तक वृद्धि हो सकती है, जिससे लोगों को और अधिक गर्मी का सामना करना पड़ेगा। recent visitors 27

चिदंबरम एस पोडुवल पर यौन उत्पीड़न का आरोप, कोच्चि में दर्ज हुआ केस

  कोच्चि केरल के कोच्चि (Kochi) शहर से एक बड़ी खबर सामने आई है. सुपरहिट फिल्म मंजुम्मेल बॉयज़ (Manjummel Boys) के निर्देशक चिदंबरम एस पोडुवल (Chidambaram S Poduval) के खिलाफ यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने सोमवार को इसकी पुष्टि की. शिकायत के आधार पर एर्नाकुलम साउथ पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया है. बताया जा रहा है कि यह मामला साल 2022 की एक कथित घटना से जुड़ा है. पुलिस अब पूरे मामले की जांच में जुट गई है. ये है आरोप की कहानी पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, महिला ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि 2022 में निर्देशक ने उसके फ्लैट में जबरन प्रवेश किया था. यह घटना कोच्चि के एलामकुलम इलाके में स्थित एक अपार्टमेंट की बताई जा रही है. महिला का आरोप है कि आरोपी ने उसके साथ अशोभनीय हरकत की और उसका यौन उत्पीड़न किया. शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने पहले पीड़िता का बयान दर्ज किया. इसके बाद तथ्यों के आधार पर मामला दर्ज किया गया. इन धाराओं में दर्ज हुआ केस पुलिस ने बताया कि मामला भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धाराओं के तहत दर्ज किया गया है. केस धारा 74 और 75 के तहत दर्ज हुआ है. धारा 74 महिलाओं की लज्जा भंग करने की नीयत से हमला या आपराधिक बल प्रयोग से जुड़ी है. वहीं धारा 75 यौन उत्पीड़न से संबंधित है. पुलिस के मुताबिक, कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए आगे की कार्रवाई की जा रही है. पूछताछ की तैयारी अधिकारियों ने बताया कि शिकायत दर्ज करने से पहले महिला का विस्तृत बयान लिया गया था. अब फिल्म निर्माता निर्देशक को नोटिस जारी किया जाएगा. उन्हें पूछताछ के लिए पेश होने को कहा जाएगा. पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी. अभी तक आरोपी निर्देशक की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. दो हिट फिल्मों के निर्देशक हैं चिदंबरम चिदंबरम एस पोडुवल मलयालम सिनेमा के चर्चित निर्देशक हैं. उन्होंने 2021 में फिल्म जान-ए-मन (Jan.E.Man) का निर्देशन किया था, जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया था. इसके बाद 2024 में आई फिल्म मंजुम्मेल बॉयज़ ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता हासिल की. इस फिल्म ने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई. ऐसे में उनके खिलाफ दर्ज हुए इस केस ने फिल्म इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है. आगे क्या होगा? फिलहाल पुलिस जांच की प्रक्रिया में जुटी है और आरोपी को नोटिस भेजने की तैयारी की जा रही है. पूछताछ के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस हर पहलू की जांच कर रही है. निर्देशक की ओर से सफाई या प्रतिक्रिया आने का इंतजार है. आने वाले दिनों में इस केस में और खुलासे हो सकते हैं.   recent visitors 20

सूर्य घर योजना से 60,000 से अधिक रोजगार सृजित, रोजाना ₹20-25 करोड़ का सौर कारोबार

प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत यूपी में रिकॉर्ड इंस्टॉलेशन, फरवरी में 35,804 रूफटॉप प्लांट स्थापित योजना के तहत ₹3,500 करोड़ से अधिक की सब्सिडी डीबीटी से हस्तांतरित, लगभग 4 लाख परिवार लाभान्वित सूर्य घर योजना से 60,000 से अधिक रोजगार सृजित, रोजाना ₹20-25 करोड़ का सौर कारोबार लखनऊ प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के चलते उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा विस्तार का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में रूफटॉप सोलर को जन-आंदोलन का रूप देते हुए प्रदेश ने ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। राष्ट्रीय पोर्टल के अनुसार राज्य में अब तक 11,64,038 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 3,93,293 रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन पूर्ण हो चुके हैं। इसके माध्यम से 3,98,002 परिवार सीधे लाभान्वित हुए हैं। प्रदेश में कुल स्थापित सौर क्षमता 1,343.5 मेगावाट तक पहुंच चुकी है।  ₹3,500 करोड़ से अधिक की सब्सिडी हस्तांतरित प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश न केवल स्वच्छ ऊर्जा अपनाने में अग्रणी बन रहा है, बल्कि रोजगार सृजन, आर्थिक गतिविधियों के विस्तार, भूमि संरक्षण और डिजिटल ऊर्जा भविष्य की दिशा में भी एक नए युग का नेतृत्व कर रहा है। इस योजना के अंतर्गत ₹2,663.57 करोड़ की केंद्रीय सरकार की सब्सिडी तथा लगभग ₹920 करोड़ की राज्य सरकार की सब्सिडी लाभार्थियों के खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से सीधे हस्तांतरित की गई है। उत्तर प्रदेश जुलाई 2025 से लगातार देश में इंस्टॉलेशन के मामले में शीर्ष दो राज्यों में बना हुआ है, जो राज्य की निरंतर प्रगति और मजबूत क्रियान्वयन क्षमता को दर्शाता है।        रिकॉर्ड 35,804 रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित यूपीनेडा के निदेशक इंद्रजीत सिंह ने बताया कि फरवरी माह 2026 में उत्तर प्रदेश के लिए सौर ऊर्जा क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियों का माह साबित हुआ। इस एक माह के भीतर रिकॉर्ड 35,804 रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित किए गए। साथ ही 28 फरवरी 2026 को एक ही दिन में 2,211 इंस्टॉलेशन कर उत्तर प्रदेश ने पूरे भारत में किसी भी राज्य द्वारा एक दिन में किए गए सर्वाधिक रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन का राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित किया। यह उपलब्धि राज्य की तीव्र कार्यक्षमता और मिशन मोड में चल रहे क्रियान्वयन का प्रमाण है।       60,000 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार इस योजना ने प्रदेश में व्यापक सौर ऊर्जा अर्थव्यवस्था को जन्म दिया है। वर्तमान में 4,500 से अधिक वेंडर्स सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं, जिससे 60,000 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हुआ है। प्रतिदिन औसतन 4 से 5 मेगावाट रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन किए जा रहे हैं, जिससे राज्य में प्रतिदिन लगभग ₹20 से ₹25 करोड़ का व्यवसाय उत्पन्न हो रहा है। रूफटॉप सोलर के माध्यम से प्रतिदिन 60 लाख यूनिट से अधिक मुफ्त बिजली का उत्पादन हो रहा है, जिसका अनुमानित आर्थिक मूल्य लगभग ₹4 करोड़ प्रतिदिन है।    5000 एकड़ से अधिक भूमि की बचत रूफटॉप सोलर मॉडल का एक महत्वपूर्ण लेकिन अप्रत्यक्ष लाभ भूमि संरक्षण के रूप में सामने आया है। इस योजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश में 5000 एकड़ से अधिक भूमि की बचत हुई है। यदि यही क्षमता ग्राउंड-माउंटेड सोलर प्लांट्स के माध्यम से स्थापित की जाती, तो विशाल भू-भाग की आवश्यकता होती। अब यह भूमि औद्योगिक, वाणिज्यिक, कृषि तथा अन्य विकासात्मक गतिविधियों के लिए उपलब्ध रह सकती है।     कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी तेजी से बढ़ते इंस्टॉलेशन ने सौर उद्योग से जुड़े उपकरणों जैसे मॉड्यूल, इन्वर्टर, स्ट्रक्चर और केबल की मांग को भी बढ़ाया है, जिससे प्रदेश में एक मजबूत सप्लाई चेन विकसित हुई है। साथ ही, सौर ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि से कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आ रही है, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उत्तर प्रदेश अब सौर ऊर्जा को भविष्य के डिजिटल ऊर्जा व्यापार मॉडल से जोड़ने की दिशा में भी अग्रसर है। यूपीनेडा से जुड़े वेंडर्स ऊर्जा उत्पादन को यूनिफाइड एनर्जी इंटरफेस जैसे प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। recent visitors 29

बच्चों के पोषण स्तर में 81 प्रतिशत का सुधार, कुपोषण के खिलाफ उल्लेखनीय उपलब्धि

कुपोषण के खिलाफ जीवनरक्षक ढाल बना योगी सरकार का ‘संभव अभियान’ आंगनबाड़ी केंद्रों में लाखों बच्चों को मिला नया जीवन, कुपोषण पर निर्णायक प्रहार बच्चों के पोषण स्तर में 81 प्रतिशत का सुधार, कुपोषण के खिलाफ उल्लेखनीय उपलब्धि  लखनऊ कुपोषण और भुखमरी दूर करने के लिए योगी सरकार की प्रतिबद्धता का ही परिणाम है कि प्रदेश में लाखों नौनिहालों की जान बचाने में सफलता मिली है। ‘संभव अभियान’ से अति गंभीर कुपोषित (सैम) बच्चों में से 81 प्रतिशत सामान्य स्थिति में आ चुके हैं। यह एक समग्र प्रयास है जो जीवन के पहले 1000 दिनों में कुपोषण की रोकथाम, समय पर पहचान और प्रभावी प्रबंधन को सुनिश्चित करता है। बच्चों को मिल रहा है पोषण और जीवनदान प्रदेश में बड़ी संख्या में बच्चे तीव्र कुपोषण से जूझ रहे थे, जिससे उनके जीवन और विकास पर खतरा मंडरा रहा था। सरकार ने इस समस्या को बड़ी चुनौती के रूप में लिया और केंद्र सरकार की मदद से इस पर व्यापक रणनीति बनाई। संभव अभियान को मजबूत करने में तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका रही। 1.89 लाख आंगनबाड़ी केंद्रों में ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइस का उपयोग और पोषण ट्रैकर का कार्यान्वयन सुनिश्चित किया गया। पंजीकृत कुपोषित बच्चों का डाटा स्वास्थ्य विभाग के ई-कवच एप्लीकेशन से जोड़ा गया, जिससे उपचार और फॉलोअप में पारदर्शिता आई। 1.7 करोड़ से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग कर 2.5 लाख कुपोषित बच्चों का पंजीकरण किया गया। एक लाख से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और एएनएम को प्रशिक्षित कर जमीनी स्तर पर क्षमता बढ़ाई गई। इस तरह बच्चों को उचित पोषण पहुंचाकर विकसित उत्तर प्रदेश की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिल रही है।  मां और शिशु पर विशेष फोकस सम्भव अभियान केवल बच्चों तक सीमित नहीं है, बल्कि गर्भावस्था से ही पोषण सुरक्षा की नींव रखता है। कम वजन और एनीमिया से ग्रस्त गर्भवती महिलाओं की पहचान कर प्रारंभिक पंजीकरण, नियमित वजन निगरानी, आयरन फोलिक एसिड और कैल्शियम सेवन तथा पोषण परामर्श सुनिश्चित किया जा रहा है। 0 से 6 माह तक के शिशुओं में लो बर्थ वेट और प्री-टर्म बच्चों की पहचान कर विशेष निगरानी की जाती है। जटिल मामलों को पोषण पुनर्वास केंद्रों में रेफर कर समुचित उपचार दिया जाता है। यह समन्वित दृष्टिकोण कुपोषण की जड़ पर प्रहार करता है। हर वर्ष जून से सितंबर तक प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में सघन अभियान चलाकर बच्चों की स्क्रीनिंग, पहचान और उपचार की समग्र व्यवस्था की जाती है। राष्ट्रीय स्तर पर बना आदर्श मॉडल सम्भव अभियान के परिणाम अब जमीन पर दिख रहे हैं। कुपोषित श्रेणी के बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाने की दर में दिनोंदिन वृद्धि हो रही है। यह राज्य के लिए उल्लेखनीय उपलब्धि है। सम्भव अभियान केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक आंदोलन है जो पोषण के प्रति समुदाय, सेवा प्रदाताओं और नीति निर्माताओं को एकजुट करता है। recent visitors 28

राज्य के सड़क विकास को रफ्तार: NH-30 के 122 किमी हिस्से के 4-लेन प्रस्ताव पर गडकरी–विजय शर्मा की बैठक

रायपुर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने नागपुर प्रवास के दौरान केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर राष्ट्रीय राजमार्ग-30 के धवईपानी (चिल्फी) से कवर्धा होते हुए सिमगा तक करीब 122 किलोमीटर लंबे सेक्शन को 4-लेन में उन्नत करने का आग्रह किया। केंद्रीय मंत्री ने प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए शीघ्र आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। उपमुख्यमंत्री ने बताया कि एनएच-30 के जबलपुर से मंडला और चिल्फी तक लगभग 160 किलोमीटर हिस्से को पहले ही 4-लेन में विकसित करने की स्वीकृति मिल चुकी है। वर्तमान में चिल्फी (धवईपानी) से कवर्धा और कवर्धा गुरूनाला से सिमगा तक का मार्ग 10 मीटर चौड़ाई की 2-लेन सड़क है। उन्होंने कहा कि जब जबलपुर-मंडला-चिल्फी सेक्शन 4-लेन में परिवर्तित होगा, तब आगे के 2-लेन हिस्से पर यातायात का दबाव और बढ़ जाएगा। भारी और व्यावसायिक वाहनों की आवाजाही को देखते हुए धवईपानी से सिमगा तक पूरे मार्ग को 4-लेन में अपग्रेड करना आवश्यक है, ताकि सड़क सुरक्षा और यातायात सुगमता सुनिश्चित की जा सके। उपमुख्यमंत्री ने जिला कबीरधाम मुख्यालय कवर्धा में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए 4-लेन मय पेव्ड शोल्डर कवर्धा बायपास के निर्माण का प्रस्ताव भी रखा। उनका कहना है कि बायपास बनने से शहर के भीतर दुर्घटनाओं की संभावना घटेगी और यातायात सुचारू रहेगा। नागपुर से लौटने के बाद रायपुर एयरपोर्ट पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए विजय शर्मा ने बताया कि सिमगा से रायपुर और धवईपानी से जबलपुर तक 4-लेन निर्माण के आदेश पहले ही जारी हो चुके हैं, लेकिन बीच का महत्वपूर्ण सेक्शन शेष था। इस कड़ी को भी 4-लेन में बदलने का आग्रह किया गया है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री का आभार जताते हुए कहा कि इस परियोजना के पूर्ण होने पर जबलपुर से रायपुर तक आमजन को निर्बाध 4-लेन मार्ग की सुविधा मिल सकेगी, जिससे क्षेत्रीय व्यापार, आवागमन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। recent visitors 117

भगोरिया मेले में सोशल मीडिया का जादू: रील बनाने की होड़, ₹500 में ‘इंस्टेंट एडिटिंग’ सर्विस और 3000 फॉलोअर्स का इजाफा

झाबुआ  मांदल की थाप, उड़ता हुआ गुलाल और पारंपरिक वेशभूषा… भगोरिया का मेला हमेशा से अपनी इसी रौनक के लिए जाना जाता रहा है। लेकिन इस बार मेले की तस्वीर थोड़ी बदली-बदली नजर आई। अब यहां युवा सिर्फ नाचने-गाने नहीं, बल्कि कंटेंट बनाने भी आ रहे हैं। ढोल बजते ही मोबाइल के कैमरे ऑन हो जाते हैं और देखते ही देखते अलीराजपुर और झाबुआ का यह पारंपरिक त्योहार इंस्टाग्राम की फीड पर छा जाता है। 5 दिन में 3 हजार फॉलोअर्स भगोरिया से जुड़े वीडियो पोस्ट करने वाले दीपक बताते हैं कि महज पांच दिनों में उनके पेज पर 3,000 नए फॉलोअर्स जुड़ गए। आलम यह है कि दिल्ली और मुंबई में रहने वाले लोग मैसेज करके पूछ रहे हैं कि अगला मेला कब और कहां लगेगा? पलायन की वजह से जो युवा बाहर चले गए थे, उनके लिए अब भगोरिया सिर्फ घर वापसी का जरिया नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर अपनी जड़ों को दिखाने का एक बड़ा मंच बन गया है। गहनों के साथ चश्मा और ब्रांडेड जूते मेले में आई कॉलेज स्टूडेंट रेखा लोहारिया कहती हैं, 'यह हमारा सबसे बड़ा त्योहार है। इसे सिर्फ यहां के लोग ही क्यों देखें? मेरे सूरत और अहमदाबाद के दोस्त हर साल मेरे वीडियो का इंतजार करते हैं।' दिलचस्प बात यह है कि इस बार फैशन में भी बदलाव दिखा। पारंपरिक चांदी के गहनों और कढ़ाई वाले ब्लाउज के साथ युवा धूप का चश्मा और ब्रांडेड जूते पहनकर कैमरे के सामने पोज देते नजर आए। ₹200 से ₹500 में 'इंस्टेंट रील' का धंधा इस ट्रेंड का फायदा स्थानीय फोटोग्राफर्स भी उठा रहे हैं। वे ₹200 से ₹500 के बीच मौके पर ही प्रोफेशनल रील्स बनाकर, एडिटिंग और म्यूजिक के साथ दे रहे हैं। हालांकि, बुजुर्ग इस बदलाव से थोड़े असहज हैं। झाबुआ के नत्थू सिंह कहते हैं, 'पहले लोग त्योहार में शामिल होने आते थे, अब सिर्फ रिकॉर्ड करने आते हैं।' बुजुर्गों की चिंता पर युवाओं का तर्क बुजुर्गों की चिंता पर युवाओं का अपना तर्क है। गुजरात की टेक्सटाइल यूनिट में काम करने वाले राकेश कहते हैं, 'हम अपनी पहचान दुनिया को दिखा रहे हैं। अगर हम इसे पोस्ट नहीं करेंगे, तो कोई और हमारी कहानी अपने तरीके से बताएगा।' भगोरिया अब सिर्फ एक मेला नहीं रह गया है, बल्कि एक डिजिटल ग्लोबल स्टेज बन चुका है। recent visitors 27

वाल्व फेल होते ही बढ़ा खतरा, दौसा में गैस टैंकर रिसाव पर जयपुर रेस्क्यू टीम की त्वरित कार्रवाई

दौसा दौसा जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग 48 पर बीती रात गैस से भरे टैंकर में रिसाव की सूचना से हड़कंप मच गया। घटना कैलाई बस स्टैंड के पास हुई, जब गुजरात से उत्तर प्रदेश जा रहा टैंकर कालाखोह के पास किसी अज्ञात वाहन से साइड में टकरा गया। टकराव से रोटो गेज वाल्व क्षतिग्रस्त हो गया और गैस रिसने लगी। चालक को इस रिसाव की जानकारी नहीं थी, लेकिन एक वाहन चालक ने कंट्रोल रूम को सूचना दी। सूचना मिलते ही प्रशासन सक्रिय हो गया। सिकंदरा पुलिस ने टोल प्लाजा से पहले टैंकर को रोककर करीब 300 मीटर दूर कैलाई देवनारायण मंदिर के पास एक खेत में खड़ा करा दिया। उपखंड अधिकारी सिकराय नवनीत कुमार, नायब तहसीलदार डोण्ढीराम मीना, थाना प्रभारी अशोक कुमार सहित अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। एहतियात के तौर पर फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस भी तैनात की गईं। विज्ञापन जैविक और रासायनिक खतरे को देखते हुए जयपुर से सेफ्टी टेक्निकल टीम को बुलाया गया। टैंकर में करीब साढ़े 17 टन गैस भरी हुई थी। टीम ने मौके पर पहुंचकर क्षतिग्रस्त वाल्व को सुरक्षित रूप से बंद किया, जिससे संभावित बड़ी दुर्घटना टल गई। इसके बाद टैंकर को जयपुर स्थित आईओसी प्लांट ले जाकर गैस खाली कराई गई। सेफ्टी अधिकारी निखिल शर्मा ने बताया कि अज्ञात वाहन से टकराने के कारण वाल्व में लीकेज हुआ था, जिसे समय रहते नियंत्रित कर लिया गया। देर रात अफरा-तफरी के बीच प्रशासन की सतर्कता और तकनीकी टीम की तत्परता से सड़क मार्ग सुचारु रूप से चालू कर दिया गया। इस घटना में किसी प्रकार की हताहत की सूचना नहीं मिली। recent visitors 26