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हिंदू धर्म में अमावस्या की तिथि बड़ी पावन और विशेष मानी गई है. अमावस्या का दिन पितरों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है. साल में 12 अमावस्या पड़ती है. जो अमावस्या शनिवार को पड़ती है, उसको शनि या शनिश्चरी अमावस्या कहते हैं. इस दिन शनि देव की पूजा का विधान हिंदू धर्म शास्त्रों में है. शनि अमावस्या का दिन शनि देव के पूजन के लिए सबसे अच्छा और शुभ माना जाता है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनि अमावस्या के दिन सच्चे भक्ति भाव से शनि देव का पूजन करने पर जीवन की परेशानियों से मुक्ति मिल जाती है. जीवन की बाधाएं दूर होती है. पृत और ग्रह दोषों से भी मुक्ति मिल जाती है. हिंदू धर्म शास्त्रों में शनि अमावस्या के दिन शनि देव के पूजन के साथ ही कुछ नियमों का पालन करने के लिए भी कहा गया है. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस दिन क्या करना और क्या नहीं करना चाहिए.

कब है शनि अमावस्या?
इस साल शनि अमावस्या 29 मार्च को मनाई जाएगी. ये चैत्र माह की अमावस्या होगी. इस दिन साल का पहला सूर्य ग्रहण होगा. इसी दिन शनि देव कुंभ से मीन राशि में जाएंगे. चैत्र माह की अमावस्या तिथि की शुरुआत 28 मार्च को रात को 7 बजकर 55 मिनट पर होगी. वहीं इस तिथि का समापन 29 मार्च को शाम 4 बजकर 27 मिनट पर हो जाएगा. इसलिए उदया तिथि के अनुसार, शनि अमावस्या 29 मार्च रहेगी. ये इस साल की पहली शनि अमावस्या होगी.

शनि अमावस्या पर क्या करें
इस दिन शनि देव के समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाएं. उसमें काली उड़द की साबुत दाल, काले तिल और एक लोहे की कील डालें. इस दिन काले तिल, काले रंग का कंबल और काले रंग कपड़े गरीबों में दान करें. पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाकर सात बार उसकी परिक्रमा करें. शमि के पेड़ की पूजा करें. काले कुत्ते को सरसों का तेल लगी रोटी खिलाएं. गंगा स्नान करें.

क्या न करें
शनि अमावस्या के दिन मांसाहार और शराब का सेवन करने से बचें. बड़ों और पूर्वजों का अनादर न करें. इस दिन गाय, कुत्ते और कौवे को कष्ट न दें. ऐसा करना अच्छा नहीं माना जाता. बाल, दाढ़ी, और नाखून न काटें. इससे ग्रह दोष लग सकता है. किसी तरह का विवाद न करें. लोहे का सामान और शनि से जुड़ी वस्तुएं न खरीदें.

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