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नई दिल्ली
राज्यसभा में इमीग्रेशन एंड फॉरेनर्स बिल (आप्रवास और विदेशियों विषयक विधेयक)-2025 को गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार को सदन के समक्ष विचार के लिए रखा। विधेयक पर बोलते हुए शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत ने कहा कि देश को धर्मशाला बनाना किसी का मकसद नहीं है, लेकिन अगर यह देश धर्मशाला नहीं है तो यह देश जेल भी नहीं है। बीते 10 साल से देश के लोगों को एक तरह से जेल में रखा गया है। अब जो विदेश से लोग आएंगे, वह भी वैध वीजा और पासपोर्ट पर, यह कानून उन्हें भी शायद जेल में रखना चाहता है। संजय राउत ने कहा कि जिस तरह से इस विधेयक में बहुत से प्रावधान हैं, उससे धीरे-धीरे टूरिस्ट भी भारत में आना बंद करेंगे। हम नहीं चाहते कि कोई भी देश में अवैध तरीके से रहे, चाहे वह बांग्लादेशी हो, रोहिंग्या हो, या फिर अमेरिकन और यूरोपियन।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में अवैध तरीके से रह रहे भारतीयों को सेना के विमान में हाथों-पैरों में बेड़िया लगाकर वापस भेजा। यदि कोई अमेरिकी भारत में अवैध तरीके से रह रहा हो, तो उसे भी इसी तरह से बेड़िया लगाकर वापस भेजा जाए। पूरे देश में तीन करोड़ से ज्यादा बांग्लादेशी और रोहिंग्या हैं, उन्हें निकालना जरूरी है। यह मुहिम सबसे पहले मुंबई में हमने शुरू की थी। इस विधेयक का सेक्शन 7 यह कहता है कि जो विदेशी यहां आएगा, केंद्र सरकार यह तय करेगी कि वह किस होटल में ठहरेगा, कहां घूमेगा, कहां जाएगा।
राउत ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा लाया गया यह विधेयक ऐसा है, जिसके तहत यदि कोई विदेशी डेलिगेशन, जर्नलिस्ट या डिप्लोमेट भारत आता है और वह देश में किसी प्रमुख नेता से मिलना चाहता है, सोनिया गांधी से, राहुल गांधी से, उद्धव ठाकरे से मिलना चाहता है, तो सरकार से अनुमति लेनी पड़ेगी। यदि सरकार अनुमति देती है, तो मुलाकात कर सकेंगे और यदि अनुमति नहीं मिली, तो यह मुलाकात नहीं हो सकेगी।
उन्होंने सदन में कहा कि देश में जो आतंकवादी आए हैं, वे किसी वैध पासपोर्ट पर नहीं आए हैं। कसाब किसी वैध पासपोर्ट पर नहीं आया था। कसाब और उसके साथ जो टेररिस्ट आए थे, वे समुद्र मार्ग से अवैध तरीके से आए और किसी को पता भी नहीं चला। कानून को यदि आप मजबूत करना चाहते हैं, तो कीजिए, लेकिन इस विधेयक को स्थाई समिति के पास वापस भेजकर इस पर चर्चा की जानी चाहिए।
भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद रामचंद्र जांगड़ा ने कहा कि पुराने आव्रजन कानूनों के तहत देश की सीमाओं की रक्षा करने में, देश में घुसपैठ को रोकने में काफी बाधाएं आती थीं। देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। नए विधेयक में प्रमुख रूप से भारत में प्रवेश, प्रवास के लिए यात्रा दस्तावेज, वैध वीजा की अनिवार्य आवश्यकता, प्रवेश से इनकार आदि विधेयक का एक हिस्सा हैं। भारत को चिकित्सा, शैक्षणिक और विनिर्माण गतिविधियों का केंद्र बनाने, सरकार के प्रमुख कार्यक्रमों के अनुरूप विभिन्न गतिविधियों को बढ़ावा देने हेतु, सही उद्देश्य के लिए विदेशियों की भारत यात्रा को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि इसके साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों को भी ध्यान में रखने की आवश्यकता है। इसका प्रावधान इस विधेयक में किया गया है। भारत ने 169 देशों के नागरिकों के लिए ई-वीजा की शुरुआत की है। इस संबंध में आवश्यक है कि अधिकारियों को विदेश से आ रहे लोगों के दस्तावेज की जांच करने का अधिकार दिया गया है। राष्ट्रीय सुरक्षा या संप्रभुता को खतरा होने पर अधिकारियों को अधिकार दिया गया है कि वे विदेशियों को देश में प्रवेश से वंचित कर सकें।

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