बैसाख मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी (17 अप्रैल) को अनुसूया जयंती है। अनुसूया प्रजापति कर्दम और देवहूति की नौ कन्याओं में से एक थीं। यह ऋषि अत्रि की पत्नी थीं। ऐसा कहा जाता है कि उनकी पति-भक्ति का तेज इतना अधिक था कि आकाश मार्ग से जाते देवताओं को भी उनके तेज का अनुभव होता था। अपने इसी तेज के कारण उन्हें सती अनुसूया कहा जाता है। द्रौपदी, सुलोचना, सावित्री, मंदोदरी सहित उनकी गणना पांच सतियों में सबसे पहले हाेती है। उन्होंने घोर तपस्या करके मंदाकिनी नदी को पृथ्वी पर उतारा था।

एक पौराणिक कथा के अनुसार देवर्षि नारद पृथ्वी लोक से घूमते हुए देवी लक्ष्मी, सरस्वती और पार्वती के पास पहुंचे। वहां उन्होंने तीनों से ऋषि अत्रि की पत्नी अनुसूया के पतिव्रत धर्म की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके सतीत्व के तेज की बराबरी तीनों लोकों में काेई नहीं कर सकता। यह सुनकर तीनों देवियों ने अनुसूया के पातिव्रत्य धर्म की परीक्षा लेने के लिए अपने-अपने पतियों ब्रह्मा, विष्णु, महेश से आग्रह किया।

अपनी पत्नियों का आग्रह मानकर वे तीनों ऋषि पत्नी अनुसूया के सतीत्व की परीक्षा लेने के लिए पृथ्वी लोक में उनके आश्रम में पहुंच गए। उन्होंने उनकी कुटिया के बाहर खड़े होकर भिक्षा के लिए पुकार लगाई। उनकी पुकार सुनकर अनुसूया बाहर आईं। उन्होंने अतिथियों का स्वागत-सत्कार किया और उनकी इच्छा पूछी। उन्होंने कहा कि वे भूखे हैं और भोजन करना चाहते हैं। लेकिन हमारा यह नियम है कि हमें भिक्षा देने वाला निर्वस्त्र होकर हमें भोजन करवाता है, तभी हम भोजन करते हैं। यह सुनकर अनुसूया ने तीनों से कहा कि जैसी आपकी इच्छा। अनुसूया ने अपने हाथ में जल लिया और अपने पति को स्मरण करते हुए मन-ही-मन कहा कि अगर मेरा पतिव्रत धर्म अखंड है तो ये तीनों अतिथि इसी क्षण शिशु बन जाएं। यह कहकर उन्होंने तीनों अतिथियों पर जल छिड़क दिया। वे तीनों ही तत्काल नवजात शिशु बन गए। तब अनुसूया ने मातृ भाव से तीनों को भोजन कराया। भोजन के उपरांत पास ही पालने में तीनों शिशुओं को सुला दिया।

इधर काफी समय बीत जाने पर भी तीनों देव नहीं लौटे तो तीनों देवियों को चिंता हुई। वे नारदजी को साथ लेकर अनुसूया के आश्रम पहुंची। वहां देखा कि तीनों देव तो शिशु रूप में पालने में हैं। उन्होंने अनुसूया से क्षमा मांगते हुए अपने पतियों को उनके मूल स्वरूप में लौटा देने की प्रार्थना की। अनुसूया ने उन शिशुओं पर जल छिड़क कर पहले जैसा कर दिया। त्रिदेव ने उन्हें वरदान देते हुए कहा कि वे तीनों ‘दत्तात्रेय’ के रूप में उनके पुत्र होंगे। इस दिन महिलाएं अपने पति के दीर्घ जीवन की कामना से सती अनुसूया का व्रत और पूजन करती हैं।

Loading spinner
यूजफुल टूल्स
QR Code Generator

QR Code Generator

Age Calculator

Age Calculator

Word & Character Counter

Characters: 0

Words: 0

Paragraphs: 0