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One lakh crore for the historic train and not even five percent for the railways: Raghu Thakur

  • सरकार की भेदभावपूर्ण नीति का होली पर विरोध का आह्वान 
  • राज्यसभा सांसद संजय सिंह बोले-भारत-अमेरिका व्यापार समझौता किसानों का डेथ वारंट 
  • बुंदेलखंड सर्वदलीय संघर्ष मोर्चा ने जंतर-मंतर पर दिया धरना

भोपाल। सरकार यदि आबादी के हिसाब से बजट आवंटित करे तो बुंदेलखंड जैसे अंचलों का पिछड़ापन, बेरोजगारी और गरीबी दूर हो सकती है, लेकिन सरकार एक ओर बुलेट ट्रेन पर एक लाख करोड़ खर्च कर सकती है लेकिन बुंदेलखंड को उसकी जरूरत के मुताबिक रेल लाइन के लिए पांच हजार करोड़ भी नहीं देना चाहती। सही नीति से इसे ठीक किया जा सकता है। सोशलिस्ट चिंतक व जननेता रघु ठाकुर ने आज दिल्ली के जंतर-मंतर पर बुंदेलखंड सर्वदलीय नागरिक संघर्ष मोर्चा के धरना में बोलते हुए यह बात कही। उन्होंने आह्वान किया कि सरकार की  भेदभावपूर्ण नीति का प्रतीकात्मक विरोध आने वाली होली से शुरू किया जाये। इस धरने में शामिल होने व समर्थन देने बुंदेलखंड सहित छत्तीसगढ़ व विदर्भ से भी लोग आये थे। 

रघु ठाकुर की अगुवाई में साल 2009 से यह धरना हर साल जाड़ों में होता है। इस साल धरने के तहत भारतीय हॉकी के गौरव मेजर ध्यानचंद व सागर विश्वविद्यालय के संस्थापक हरिसिंह गौर को भारतरत्न से अलंकृत करने, बुंदेलखंड को रेल सेवाओं से जोड़ने व अंचल में पर्यटन परिपथ विकसित करने की मांग मुख्य रूप से शामिल है। जिन मार्गों पर रेल सेवा शुरू करने की मांग की गई है उनमें भिंड- बांदा-महोबा, ललितपुर-सागर, सागर- छिंदवाड़ा, छतरपुर-सागर, झांसी-शिवपुरी और ललितपुर-चंदेरी मार्ग शामिल हैं। धरने के बाद प्रधानमंत्री, रेलमंत्री व वनमंत्री को ज्ञापन सौंपा गया। धरने को राज्यसभा सदस्य व आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह सहित अनेक गणमान्य लोगों ने संबोधित किया।

संजय सिंह ने केन्द्र सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि लगातार जनविरोधी और किसान-विरोधी फैसले लिए जा रहे हैं। हाल का भारत – अमरीका व्यापार समझौता इसका ताजा प्रमाण है, जिसमें अमेरिका तो भारतीय माल पर मनमाना आयात कर लगा रहा है, लेकिन भारत में अमेरिकी माल आने की पूरी छूट का इंतजाम कर दिया गया है। यह समझौता नहीं, बल्कि किसानों के ‘डेथ वारंट’ पर दस्तखत हैं जिसके चलते भारत के किसान बर्बाद होंगे और अमरीका के उन किसान मुनाफा कमाएंगे, जिन्हें वहां की सरकार अच्छी खासी सब्सिडी देती है।

संजय सिंह ने भाजपा की सरकार को ‘भारतीय जुमला पार्टी ‘ बताते हुए कहा कि हर साल दो करोड़ नौकरी, फसल का दाम दोगुना करने , हर खाते में पंद्रह लाख रुपए आने जैसे वादे तो पूरे किए नहीं, उल्टे देशभर में एक लाख स्कूल बंद कर दिए गए, प्रति व्यक्ति आय घटती चली गई और देश तरक्की के मामले में 142 वें नंबर पर चला गया। संजय सिंह ने इन नीतियों के विरोध में सड़क से संसद तक संघर्ष करने की जरूरत बताई।

रघु ठाकुर ने कहा कि विभिन्न अंचल के जनप्रतिनिधि बंधुआ मजदूर जैसा व्यवहार कर रहे हैं। उन्हें लगातार अंचल के हित में मांग करनी चाहिए, लेकिन वे चुप रहते हैं। दूसरी ओर विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री राजे रजवाड़ों के अंदाज में लोकलुभावन घोषणाएं कर रहे हैं, जबकि हर क्षेत्र को उसकी जनसंख्या के हिसाब से बजट मिलना चाहिए। आखिर जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा है।

रघु ठाकुर ने योजना के लागू होने में विलम्ब का विषय उठाते हुए याद दिलाया कि अटल विहारी वाजपेई के प्रधानमंत्री काल में छतरपुर में केन-वेतवा परियोजना की घोषणा की थी जिसे अमली जामा पहनाने में दो दशक से ज्यादा लग गये।

धरने में आये लोगों को कांग्रेसी पूर्व विधायक तरवर सिंह, आप की नेत्री अनीता सिंह लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंभूदयाल बघेल, उपाध्यक्ष श्यामसुंदर यादव व मुकेश चंद्रा, जावेद लोसपा महासचिव, मप्र के अध्यक्ष विन्ध्येश्वरी पटेल, हरपाल सिंह जयंत तोमर, सतीश भारतिय ब्रिज किशोरजेन(ललितपुर) अनूप सिंह (छिंदवाड़ा), अशोक पंडा (छत्तीसगढ़),  प्रवीण पांडे फतेहपुर, दया शंकर शर्मा, मसौढ़ी से  धीरेन्द्र पासवान, निसार  कुरेशी, हकीम असगर खान शिव नेताम (धमतरी, छत्तीसगढ़), डॉ शिवा श्रीवास्तव आप के सर्वेश मिश्रा आदि ने संबोधित किया। रामकुमार पचौरी ने संचालन किया।

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