पीलीभीत
दो कुंतल के वजन वाले भारी-भरकम बाघ की भूख से मौत हो गई। शनिवार रात को पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) की माला रेंज में उसका शव मिला।
रविवार को बरेली के भारतीय पशु चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान (आइवीआरआइ) में उसके पोस्टमार्टम में यह स्पष्ट हो गया कि उस पर हमला या किसी से संघर्ष नहीं हुआ था। वह बीमारी अथवा किसी अन्य कारण से जूझते हुए झाड़ियों में लेटा था, वहीं उसकी मौत हो गई। उसका पेट खाली पाया गया, जोकि संकेत कर रहा कि आठ दिन से उसे शिकार नहीं मिला था।
शनिवार देर रात गश्त पर निकले वनकर्मियों ने धमेला वाच टावर के पास उसका शव देखा था। इसकी सूचना पर फील्ड डायरेक्टर पीटीआर पीपी सिंह, डीएफओ भरत कुमार डीके व अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने बाघ के शव का निरीक्षण किया गया ताकि हमले या संघर्ष की स्थिति का आकलन किया जा सके।
डीएफओ ने बताया कि बाघ के शरीर पर किसी प्रकार की चोट नहीं थी। उसका शव पोस्टमार्टम के लिए बरेली भेजा गया। रविवार को पोस्टमार्टम करने वाली टीम के विज्ञानी ने फोन पर बताया कि बाघ की मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका, इसलिए विसरा सुरक्षित रखा है। विसरा की जांच में कुछ तथ्य सामने आ सकते हैं।
पोस्टमार्टम के समय देखा गया कि बाघ का पेट खाली था, यानी उसे एक सप्ताह से शिकार नहीं मिला। उसके अंदरुनी हिस्से प्रभावित थे, जो संक्रमण का संकेत कर रहे थे। संक्रमण का कारण क्या रहा होगा, इस पर विज्ञानी ने कहा कि संभव है कि वह किसी बीमारी से पीड़ित हो।
दूसरा कारण यह भी हो सकता है कि उसने किसी ऐसे पशु का शिकार कर लिया, जिसका मांस जहरयुक्त हो। इसके पीछे आशंका जताई जा सकती है कि जहरीला पदार्थ खाने वाला वन्यजीव जंगल में बाघ के सामने आ गया हो। बाघ ने उसका शिकार कर लिया।
ऐसे में उस वन्यजीव का जहरीला मांस बाघ के पेट में पहुंचने पर भी संक्रमण हो सकता है। यह सिर्फ अनुमान या आशंका ही है। वास्तविक कारण विसरा की जांच में सामने आ सकेगा। यह तय है कि संक्रमण के बाद बाघ शिकार नहीं कर सका, इसी कारण उसका पेट पूरी तरह खाली था। उसका उम्र सात वर्ष थी।
टाइगर रिजर्व में हैं 80 से अधिक बाघ
पीलीभीत टाइगर रिजर्व की पांचों रेंज में 80 से अधिक बाघ हैं। माला और बराही रेंज में बाघों की गतिविधियां अधिक दिखती हैं। टाइगर रिजर्व आने वाले पर्यटकों को भी बराही रेंज में ही मुख्य रूप से घुमाया जाता है।

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