Thursday, July 2, 2026 3:00 pm

Amarnath Yatra : कैसे जा सकते हैं अमरनाथ यात्रा पर, किन तैयारियों की जरूरत? यहां जानें मन में आ रहे हर सवाल का जवाब

Amarnath Yatra Registration2026, आरएफआईडी कार्ड, स्वास्थ्य प्रमाणपत्र और सुरक्षा नियमों की जानकारी होना बेहद जरूरी है। सही तैयारी और जरूरी दिशानिर्देशों का पालन करने से यात्रा सुरक्षित और सुगम बन सकती है। तो अगर आप इस साल बाबा बर्फानी के दर्शन की योजना बना रहे हैं तो यहां आपके सावलों के जावब मिल सकते हैं।

अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू होने जा रही। यात्रा से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय का जायजा लिया। हर साल लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए इस कठिन तीर्थयात्रा पर निकलते हैं, लेकिन यात्रा पर जाने से पहले पंजीकरण, स्वास्थ्य प्रमाणपत्र, यात्रा मार्ग, सुरक्षा नियम और जरूरी दिशानिर्देशों की जानकारी होना बेहद आवश्यक है।

ऐसे में आइए जानते हैं कि आप कैसे पहुंच सकते हैं अमरनाथ गुफा? यात्रा में श्रद्धालुओं को कौन-कौन सी सुविधाएं मिलती हैं? अमरनाथ यात्रा के लिए कैसे पंजीकरण किया जा सकता है? इसकी पात्रता शर्तें क्या हैं? अमरनाथ यात्रा के दौरान क्या करें और क्या नहीं? यात्रा पर जाते समय क्या साथ रखें? और इस बार की सुरक्षा व्यवस्था कैसी है?

कैसे पहुंच सकते हैं अमरनाथ गुफा? Amarnath Yatra Registration2026


इस साल अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगी। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु इस पवित्र गुफा मंदिर के दर्शन के लिए जम्मू-कश्मीर पहुंचते हैं। अमरनाथ गुफा तक पहुंचने के लिए श्रद्धालु दो आधिकारिक मार्गों में से किसी एक का चयन कर सकते हैं।

पहला पारंपरिक पहलगाम मार्ग है, जिसमें जम्मू, पहलगाम, चंदनवाड़ी, पिस्सू टॉप, शेषनाग और पंचतरणी होते हुए श्रद्धालु पवित्र अमरनाथ गुफा तक पहुंचते हैं। यह अपेक्षाकृत लंबा मार्ग है और रास्ते में कई पड़ाव व सुविधाएं उपलब्ध रहती हैं। इसकी दूरी 32 किलोमीटर है। इस मार्ग का बेस कैंप नुनवान (पहलगाम के पास), अनंतनाग जिले में स्थित है। यह श्रीनगर से सड़क मार्ग के जरिए करीब 90 किलोमीटर दूर है। इस मार्ग का यात्रा एक्सेस कंट्रोल गेट नुनवान से करीब 12 किलोमीटर दूर चंदनवाड़ी में स्थित है।

दूसरा बालटाल मार्ग है, जिसमें जम्मू, बालटाल, दोमेल और बरारी से होकर श्रद्धालु पवित्र अमरनाथ गुफा तक पहुंचते हैं। यह दूरी के लिहाज से छोटा है, लेकिन इसकी चढ़ाई अधिक खड़ी होने के कारण इसे अपेक्षाकृत चुनौतीपूर्ण माना जाता है। इसकी दूरी 14 किलोमीटर है। इस मार्ग का बेस कैंप बालटाल (सोनमर्ग के पास), गांदरबल जिले में स्थित है। यह श्रीनगर से सड़क मार्ग के जरिए करीब 95 किलोमीटर दूर है। इस मार्ग का यात्रा एक्सेस कंट्रोल गेट बालटाल से करीब 2.5 किलोमीटर दूर दोमेल में स्थित है।

अमरनाथ यात्रा में श्रद्धालुओं को कौन-कौन सी सुविधाएं मिलती हैं?

ठहरने की व्यवस्था: यात्रा मार्ग पर नुनवान, बालटाल, शेषनाग और पंचतरणी जैसे प्रमुख पड़ावों पर किराये पर टेंट उपलब्ध कराए जाते हैं, जहां श्रद्धालु रुक सकते हैं। इसे जुड़ी सारी जानकारी https://jksasb.nic.in/Other-Services.html पोर्टल पर मिलेगी।

लंगर की सुविधा: यात्रा के दौरान दोनों मार्गों पर कई सामाजिक संस्थाएं और एनजीओ श्रद्धालुओं के लिए मुफ्त भोजन, पीने का पानी और हल्के नाश्ते की व्यवस्था करते हैं।

चिकित्सा सुविधा: जम्मू-कश्मीर का स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग, सेना, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) और विभिन्न एनजीओ मिलकर यात्रा मार्ग पर बेस अस्पताल, मेडिकल सहायता केंद्र, आपातकालीन सहायता, ऑक्सीजन बूथ और एंबुलेंस जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं।

क्लॉक रूम: श्रद्धालुओं के सामान को सुरक्षित रखने के लिए यात्रा के विभिन्न कैंपों और पवित्र गुफा के पास क्लॉक रूम की सुविधा उपलब्ध रहती है।

पार्किंग: बालटाल में दोपहिया, हल्के और भारी वाहनों के लिए किराये पर पार्किंग की सुविधा उपलब्ध है।

मोबाइल नेटवर्क: यात्रा क्षेत्र में बीएसएनएल, जियो और एयरटेल की नेटवर्क सेवाएं उपलब्ध हैं। बेस कैंप सहित कई स्थानों पर प्रीपेड और पोस्टपेड सिम कार्ड भी खरीदे जा सकते हैं।

पोनी, पिट्ठू और पालकी: जिन श्रद्धालुओं को पैदल चलने में कठिनाई होती है, वे यात्रा मार्ग पर निर्धारित स्थानों से किराये पर पोनी, पिट्ठू या पालकी की सुविधा ले सकते हैं।

हेलीकॉप्टर सेवा नहीं मिलेगी: वर्ष 2026 की अमरनाथ यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध नहीं होगी। सरकार ने 1 जुलाई 2026 से यात्रा समाप्त होने तक पहलगाम और बालटाल, दोनों मार्गों को ‘नो फ्लाइंग जोन’ घोषित किया है। इसलिए श्रद्धालुओं को पवित्र गुफा तक पैदल या पोनी और पालकी के माध्यम से ही पहुंचना होगा।

अमरनाथ यात्रा के लिए कैसे करें पंजीकरण?

ऑनलाइन
अमरनाथ यात्रा के लिए श्रद्धालु श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं।

  • एक मोबाइल नंबर से अधिकतम चार श्रद्धालुओं का पंजीकरण किया जा सकता है।
  • आवेदन जमा करने के बाद उसमें कोई बदलाव नहीं किया जा सकता।
  • यात्रा के लिए अग्रिम ऑनलाइन पंजीकरण 3 जुलाई 2026 से 12 अगस्त 2026 तक खुला रहेगा। इसके बाद की तारीखों के लिए पंजीकरण बाद में उपलब्ध कराया जाएगा।
  • पंजीकरण के लिए अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाणपत्र आपके राज्य के अधिकृत डॉक्टर या अस्पताल से जारी होना चाहिए।

ऑफलाइन

अमरनाथ यात्रा के लिए श्रद्धालु ऑन-द-स्पॉट पंजीकरण भी करा सकते हैं।
इसके लिए जम्मू में बनाए गए निर्धारित पंजीकरण केंद्रों से टोकन लेकर रजिस्ट्रेशन और आरएफआईडी कार्ड प्राप्त किया जा सकता है।
इसके अलावा, देशभर में एसबीआई, पंजाब नेशनल बैंक, यस बैंक और जम्मू-कश्मीर बैंक की 500 से अधिक अधिकृत शाखाओं में भी पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध है।

आरएफआईडी कार्ड क्यों जरूरी है?

अमरनाथ यात्रा 2026 में सभी श्रद्धालुओं के लिए आरएफआईडी कार्ड अनिवार्य होगा। यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन कराने के बाद श्रद्धालुओं को जम्मू-कश्मीर के तय केंद्रों से बायोमेट्रिक ईकेवाईसी सत्यापन कराने के बाद यह कार्ड लेना होगा। आरएफआईडी कार्ड के बिना किसी भी श्रद्धालु को डोमेल या चंदनवाड़ी चेक पोस्ट से आगे जाने की अनुमति नहीं मिलेगी।

क्या है ट्रैफिक एडवाइजरी?

  • जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अमरनाथ यात्रा के लिए ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है।
  • श्रद्धालुओं, पर्यटकों और आम यात्रियों से निर्धारित ट्रैफिक नियमों का पालन करने की अपील की गई है।
  • यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के काफिले को सुरक्षित निकालने के लिए नव्युग टनल पर कुछ समय के लिए आम वाहनों की आवाजाही सीमित रहेगी।
  • कश्मीर से जम्मू जाने वाले वाहन सुबह 11:30 बजे से पहले नव्युग टनल पार नहीं कर सकेंगे।
  • जम्मू से कश्मीर जाने वाले वाहन दोपहर 3 बजे के बाद नव्युग टनल में प्रवेश नहीं कर सकेंगे।
  • घाटी के कई प्रमुख स्थानों पर भी वाहनों के लिए तय समय लागू रहेगा।
  • मीर बाजार से श्रीनगर और अनंतनाग की ओर जाने वाले वाहनों को शाम 4 बजे से पहले निकलना होगा।
  • नव्युग टनल की ओर जाने वाले वाहनों को शाम 5 बजे से पहले निर्धारित स्थान पार करना होगा।

अमरनाथ यात्रा के दौरान क्या करें और क्या नहीं?
क्या करें?

  • यात्रा से कम से कम एक महीने पहले रोज सुबह या शाम 4-5 किलोमीटर पैदल चलने की आदत डालें, ताकि शरीर यात्रा के लिए तैयार हो सके।
  • शरीर में ऑक्सीजन की क्षमता बढ़ाने के लिए योग और प्राणायाम नियमित रूप से करें।
  • पर्याप्त पानी पिएं। दिनभर में करीब पांच लीटर तरल पदार्थ लेने से शरीर में पानी की कमी और सिरदर्द जैसी समस्याओं से बचाव होता है।
  • थकान कम करने और ऊर्जा बनाए रखने के लिए कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन करें।
  • अगर ऊंचाई पर जाने के बाद सांस लेने में तकलीफ, चक्कर या हाई एल्टीट्यूड सिकनेस के लक्षण महसूस हों, तो तुरंत नीचे की ओर उतरें।
  • यात्रा मार्ग पर लगभग हर दो किलोमीटर पर मेडिकल सुविधा उपलब्ध है। किसी भी तरह की परेशानी होने पर तुरंत नजदीकी चिकित्सा केंद्र से संपर्क करें।

क्या ना करें?

  • यात्रा के दौरान शराब, धूम्रपान और कैफीन वाले पेय पदार्थों का सेवन न करें।
  • अगर कोई श्रद्धालु बीमार हो, तो उसकी हर बात पर बिना सोचे-समझे भरोसा न करें, क्योंकि बीमारी की स्थिति में वे कुछ भी बोल सकते हैं।
  • हाई एल्टीट्यूड सिकनेस के किसी भी लक्षण, जैसे तेज सिरदर्द, सांस फूलना, चक्कर आना या अत्यधिक थकान को नजरअंदाज न करें।

यात्रा पर जाते समय क्या साथ रखें?

अगर आप अमरनाथ यात्रा पर जा रहे हैं, तो मौसम और कठिन ट्रैक को देखते हुए पहले से अच्छी तैयारी करना जरूरी है। यात्रा के दौरान ये जरूरी चीजें अपने साथ रखें:

  • जरूरी दवाइयां रखें, जैसे बुखार, सिरदर्द, उल्टी की दवा। साथ में एक छोटी फर्स्ट एड किट और बैंडेज भी रखें।
  • गर्म कपड़े जरूर ले जाएं, क्योंकि ऊंचाई पर मौसम अचानक ठंडा हो सकता है।
  • रेनकोट या बरसाती, छाता और वाटरप्रूफ जूते साथ रखें, क्योंकि रास्ते में बारिश हो सकती है।
  • सनस्क्रीन, धूप का चश्मा और टोपी रखें, ताकि तेज धूप से बचाव हो सके।
  • रात या अंधेरे में जरूरत पड़ने पर टॉर्च या हेडलैंप काम आएगा।
  • पहाड़ी रास्तों पर चलने में मदद के लिए ट्रैकिंग स्टिक साथ रख सकते हैं।
  • सामान और मोबाइल को बारिश से बचाने के लिए वाटरप्रूफ बैग या कवर रखें।
  • पहचान पत्र और यात्रा से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज हमेशा अपने पास रखें, क्योंकि रास्ते में कई जगह उनकी जांच हो सकती है।

कैसे ही सुरक्षा व्यवस्था?

  • जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियां लगातार मॉक ड्रिल कर रही हैं, ताकि यात्रा के दौरान किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
  • पहलगाम और बालटाल दोनों मार्गों, ट्रांजिट कैंप, बेस कैंप और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा अभ्यास किया जा रहा है।
  • सीआरपीएफ, जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना, अन्य सुरक्षा बल, स्वास्थ्य विभाग, फायर एंड इमरजेंसी सर्विस और सिविल प्रशासन संयुक्त रूप से इन अभ्यासों में हिस्सा ले रहे हैं।
  • अभ्यास के जरिए विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल, संचार व्यवस्था, रेस्क्यू और निकासी की प्रक्रिया को परखा जा रहा है।
  • नुनवान बेस कैंप में अमरनाथ यात्रा की महिला तीर्थयात्रियों की तैलाशी और कतार प्रबंधन के लिए महिला सीआरपीएफ कर्मी तैनात हैं।
  • पूरे यात्रा मार्ग पर अत्याधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम और हाईटेक निगरानी नेटवर्क तैनात किया गया है।
  • इनका उद्देश्य यह है कि यात्रा के दौरान किसी भी संकट की स्थिति में श्रद्धालुओं को तुरंत और सुरक्षित सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
Loading spinner
Advertisement