एमपी पुलिस में अब वर्दी वाली रील बंद! AI पर सरकारी फाइल डाली तो एक्शन, 30 दिन में बतानी होगी सोशल मीडिया कमाई

No more ‘uniform reels’ for MP Police! Action to be taken if official files are uploaded to AI; social media earnings must be disclosed within 30 days.

मध्यप्रदेश पुलिस ने अपने अधिकारी-कर्मचारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। डीजीपी कैलाश मकवाना की तरफ से जारी आदेश में अब पुलिसकर्मी वर्दी में रील, फोटो, वीडियो या ऑडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं कर सकेंगे। वहीं केस डायरी, जांच रिपोर्ट, खुफिया जानकारी और दूसरे गोपनीय सरकारी दस्तावेज चैटजीपीटी जैसे एआई टूल पर डालने पर भी रोक रहेगी। पुराना आपत्तिजनक कंटेंट भी हटाना होगा।
एआई पर सरकारी फाइल अपलोड की तो कार्रवाई
नई गाइडलाइन के अनुसार पुलिस अधिकारी-कर्मचारी किसी भी संवेदनशील सरकारी दस्तावेज को AI प्लेटफॉर्म पर अपलोड नहीं कर सकेंगे। इसमें केस डायरी, जांच से जुड़ी रिपोर्ट, खुफिया इनपुट और अन्य गोपनीय दस्तावेज शामिल हैं। इन दस्तावेजों का सारांश बनाने, समझने या ड्राफ्ट तैयार कराने के लिए भी उन्हें एआई टूल पर अपलोड नहीं किया जा सकेगा। पुलिस मुख्यालय ने इसकी वजह संवेदनशील जानकारी के बाहरी सिस्टम तक पहुंचने का खतरा बताया है।
वर्दी में रील और फोटो भी नहीं
पुलिसकर्मी सोशल मीडिया पर सरकार की नीतियों, विभागीय कामकाज, फैसलों या वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ आलोचनात्मक टिप्पणी नहीं कर सकेंगे। सोशल मीडिया पर ऐसी पोस्ट से भी बचना होगा, जिससे विभाग की छवि प्रभावित हो। पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान या ड्यूटी के बाद वर्दी में रील, फोटो, वीडियो या ऑडियो पोस्ट नहीं कर सकेंगे। अशोभनीय वेशभूषा में सोशल मीडिया कंटेंट डालने पर भी रोक रहेगी। पहले से ऐसा कोई कंटेंट मौजूद है तो उसे हटाना होगा।
सोशल मीडिया से कमाई की जानकारी देनी होगी
बिना अनुमति सोशल मीडिया अकाउंट को मॉनेटाइज करने, पेड प्रमोशन करने या निजी कारोबार का प्रचार करने पर भी रोक लगाई गई है। यदि किसी पुलिसकर्मी ने पहले सोशल मीडिया के जरिए कमाई की है तो उसे 30 दिन के भीतर उसकी जानकारी देनी होगी। आपराधिक या असामाजिक गतिविधियों से जुड़े लोगों की सोशल मीडिया फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने, उन्हें फॉलो करने या उनके साथ फोटो पोस्ट करने पर भी रोक रहेगी।

सरकारी इंटरनेट से निजी सोशल मीडिया नहीं
पुलिसकर्मी निजी सोशल मीडिया अकाउंट चलाने के लिए सरकारी सीयूजी सिम, सरकारी वाई-फाई, इंटरनेट, आईपी एड्रेस या आधिकारिक ई-मेल का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। निजी मोबाइल में सरकारी सोशल मीडिया अकाउंट लॉगिन करने पर भी पाबंदी रहेगी।

ऑपरेशन और हथियार प्रशिक्षण की लाइव स्ट्रीमिंग पर रोक
दबिश, संवेदनशील ड्यूटी, वीआईपी सुरक्षा, हथियार प्रशिक्षण और फायरिंग प्रैक्टिस से जुड़ी लाइव स्ट्रीमिंग, फोटो-वीडियो बनाने और जियो टैगिंग पर भी रोक लगाई गई है। गाइडलाइन का मकसद पुलिस से जुड़ी संवेदनशील जानकारी को सार्वजनिक होने से रोकना और सोशल मीडिया पर पुलिसकर्मियों की गतिविधियों के लिए स्पष्ट नियम तय करना है।

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