तहसील पहुंचकर कलेक्टर के नाम सौंपा ज्ञापन, तहसील कार्यालय के सामने मैदान बनाने की मांग।

Upon reaching the Tehsil office, a memorandum addressed to the Collector was submitted, demanding the construction of a ground in front of the Tehsil office.

  • नांदपुर पंचायत में स्वीकृति की खबर से निराशा, आंदोलन की चेतावनी।
  • आमला में खेल मैदान की मांग को लेकर लामबंद हुए खिलाड़ी।

हरिप्रसाद गोहे
आमला। आमला नगर में प्रतिभावान खिलाड़ियों और उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन की कमी नहीं है। यहां के ऊर्जावान खिलाड़ियों ने विभिन्न खेलों में आमला का नाम सार्वजनिक मंच पर गौरवान्वित किया है। लेकिन जब शहर में खेल मैदान की बात आती है तो खेल प्रेमियों में मायूसी छा जाती है।


नगर में युवाओं के लिए व्यवस्थित खेल मैदान नहीं है। ऐसा नहीं है कि खिलाड़ियों और स्वयंसेवी संगठनों ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से मांग नहीं की हो, फिर भी जायज मांग पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। सवाल यही है कि क्या शहर की प्रतिभाओं को आमला में मैदान मिलेगा या फिर किसी अन्य गांव में मैदान बना दिया जाएगा।
इसी मांग को लेकर बुधवार सुबह करीब आधा सैकड़ा युवा और खिलाड़ी लामबंद होकर आमला तहसील कार्यालय पहुंचे और तहसीलदार के माध्यम से कलेक्टर बैतूल के नाम ज्ञापन सौंपा।


खिलाड़ियों ने मांग की है कि तहसील कार्यालय के सामने उपलब्ध शासकीय खुली भूमि पर खेल मैदान विकसित किया जाए। यह भूमि नगर के बीचोंबीच और आसानी से पहुंच योग्य है। यहां क्रिकेट, फुटबॉल, वॉलीबॉल, कबड्डी सहित अन्य खेलों के लिए सुविधा विकसित हो सकती है।
खिलाड़ियों के बताए अनुसार विधायक डॉ. योगेश पंडाग्रे द्वारा इसी भूमि पर खेल मैदान बनाने की घोषणा विभिन्न मंचों से की गई थी। युवा इसी उम्मीद में थे, लेकिन मंगलवार शाम सोशल मीडिया पर नांदपुर पंचायत में खेल मैदान स्वीकृति की पोस्ट आने के बाद युवाओं में नाराजगी है। युवाओं का कहना है कि जब नगर में ही भूमि उपलब्ध है तो प्राथमिकता आमला को क्यों नहीं दी जा रही है। हालांकि स्थान चयन को लेकर आधिकारिक स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
ज्ञापन में भूमि का स्थल निरीक्षण एवं सीमांकन कर उपयुक्तता का परीक्षण करने और नियमानुसार स्वीकृति देने की मांग की गई है। खिलाड़ियों ने कहा कि मैदान केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि शारीरिक विकास और प्रतिभा निखारने का माध्यम है।साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो युवा आंदोलन और सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे।

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