भोपाल
मध्य प्रदेश में सड़क दुर्घटनाएं रोकने, घायलों को चिकित्सकीय सहायता और यातायात नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई के लिए साल 2015-16 में राष्ट्रीय राजमार्गों पर 46 पुलिस चौकियां बनाई गई थीं। इसके पीछे लक्ष्य था कि हाइवे के लिए अलग से हाइवे पुलिस की भर्ती कर इन चौकियों में तैनात किया जाएगा। मगर, आज तक यह संवर्ग ही नहीं बना है। जिला पुलिस बल के पुलिसकर्मी अपनी सुविधा अनुसार इन चौकियों में पदस्थ किए जाते हैं। मगर, कई जगह अमला कम होने के कारण चौकियों पर कोई नहीं रहता। पूरा प्रोजेक्ट 250 करोड़ रुपये का था, जिसमें अलग-अलग शीर्ष में पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत अभी भी राशि आ रही है, पर पुलिस चौकियों पर ध्यान नहीं है।
 
    हाइवे पुलिस बनाने के पीछे लक्ष्य यह है कि यातायात नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध कार्रवाई की जा सके। सड़क दुर्घटना में घायलों को उपचार के लिए चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई जा सके। हाइवे में पुलिस की पेट्रोलिंग हो सके।- अनिल कुमार गुप्ता, पीटीआरआई के एडीजी

एमपी में बढ़ रहे सड़क हादसे
दरअसल, प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं और इनमें मृत्यु के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इन्हें रोकने के लिए हाइवे पुलिसिंग का प्लान बनाया गया था। पुलिस प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान (पीटीआरआई) के तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) यूके लाल के समय यह प्रोजेक्ट स्वीकृत हुआ था।

इसमें हाइवे में निर्धारित दूरी में पुलिस चौकियां तो बना दी गईं, पर अलग से अमला और अन्य संसाधन स्वीकृत नहीं हुआ। यह स्थिति तब है जब राष्ट्रीय राजमार्गों में होने वाली दुर्घटनाओं में मध्य प्रदेश देश में चौथे स्थान पर है। डेढ़ सौ से अधिक ब्लैक स्पॉट राष्ट्रीय राजमार्गों में हैं, जो अन्य मार्गों की तुलना में सर्वाधिक हैं।

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