कानपुर
कानपुर के कल्याणपुर स्थित जीडी गोयनका स्कूल में 15 अगस्त का सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने जा रही 11 साल की छात्रा मंच की सीढ़ी पर गिरकर बेहोश हो गई। उसे पहले संजीवनी अस्पताल और फिर कॉर्डियोलॉजी ले जाया गया। डॉक्टरों ने वहां उसे मृत घोषित कर दिया।
पिता का कहना है कि बेटी पूरी तरह से स्वस्थ थी। परिजनों ने बगैर पोस्टमार्टम कराए गुरुवार को ही छात्रा का अंतिम संस्कार कर दिया। कल्याणपुर निवासी व्यापारी विपिन गुप्ता और वैष्णवी गुप्ता की बेटी अवनि गुप्ता जीडी गोयनका स्कूल में कक्षा छह की छात्रा थी। अवनि ने कक्षा पांच से गोयनका स्कूल में दाखिला लिया था।
पिता विपिन ने बताया कि अवनि को स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में डांस में प्रतिभाग करना था। वह सुबह नाश्ता कर घर से निकली थी। उसको किसी तरह की कोई परेशानी नहीं थी। स्कूल में उसका डांस दो चरण में था। पहली डांस प्रस्तुति देने के बाद ग्रुप को 20 मिनट का ब्रेक दिया गया और उसके बाद फिर उनकी डांस प्रस्तुति होनी थी।
दूसरे बार में मंच पर जाने के लिए वह सीढ़ी पर चढ़ने के दौरान अवनि अचानक गिरकर बेहोश हो गई। छात्रा के गिरते ही प्रबंधन सकते में आ गया। प्रबंधन ने पहले छात्रा को स्कूल में ही फर्स्ट एड दिया गया। परिजनों को सूचना देने के बाद उसे लेकर संजीवनी अस्पताल पहुंचे। जहां छात्रा की पल्स न मिलने की बात कहकर डॉक्टरों ने उसे काॅर्डियोलॉजी रेफर कर दिया गया। पिता विपिन गुप्ता का कहना है कि स्कूल प्रबंधन की सूचना पर कॉर्डियोलॉजी में पहले से ही प्रबंध कर दिए गए थे। कॉर्डियोलॉजी में डॉक्टरों ने अवनि को मृत घोषित कर दिया। कॉर्डियोलॉजी के निदेशक डॉ. राकेश कुमार वर्मा ने बताया कि छात्रों को मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया था।
कार्यक्रम के दौरान बेहोश हो गई थी छात्रा
छात्रा कार्यक्रम के दौरान स्कूल में बेहोश हो गई थी। उसे तत्काल पहले संजीवनी और फिर कार्डियोलॉजी ले जाया गया। साथ ही उनके अभिभावकों को सूचना दे दी गई थी। अस्पताल में ही छात्रा का निधन हो गया। –चंदन अग्रवाल, चेयरमैन, जीडी गोयनका स्कूल
अचानक हृदय पैदाइशी बीमारी में रुकता है
गुरुवार को एक स्कूल में डांस की प्रस्तुति देने जा रही छात्रा अचानक बेहोश होकर गिर गई और उसकी मौत हो गई। मामले में एलपीएस कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रोफेसर राकेश कुमार वर्मा का कहना है कि ऐसे मामले पैदाइशी हृदय रोग में होते हैं।
उन्होंने बताया कि इतने छोटे बच्चे को हार्ट अटैक नहीं होता है। पैदाइशी दिक्कतों में हार्ट का वाॅल्व चोक हो सकता है। इसके अलावा कंजेनाइटल एओर्टिक स्टेनोसिस हो सकती है। इसमें हृदय के अंदर मांसपेशी बढ़ी हुई होती है जो रक्त के प्रवाह को प्रभावित करती है। जब इस तरह का रोगी डांस, व्यायाम आदि कार्य करता है तो हृदय को अधिक संचार की जरूरत पड़ती है। रोग के कारण रक्त संचार नहीं हो पाता और हृदय रुक जाता है। अक्सर ऐसी घटनाएं इन्हीं कारणों की वजह से होती हैं। डिहाइड्रेशन के कारण बेहोशी, चक्कर आ सकता है पर हार्ट अटैक नहीं पड़ता।

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