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  • उप्र के सीताराम शर्मा ने 2009 में फर्जी मूल निवासी बनाकर मप्र में मेडिकल सीट पर लिया प्रवेश, डॉक्टर को 3 साल की सजा 

A fake doctor was arrested following a complaint by Digvijay Singh.

Sitaram Sharma, a resident of Uttar Pradesh, obtained admission to a medical seat in Madhya Pradesh in 2009 by providing a false identity proof. The doctor was sentenced to three years in prison. 

भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री और राज्य सभा सांसद दिग्विजय सिंह ने 2009 में उप्र के निवासी सीताराम शर्मा द्वारा फर्जी तरीके से मप्र का मूल निवासी प्रमाण पत्र बनाकर मेडिकल सीट हथियाने की एसटीएफ को शिकायत की थी। जिसका मामला कोर्ट तक पहुंचा और अब 16 साल बाद फैसला आया है। जिसमें डॉक्टर सीताराम शर्मा को कोर्ट ने दोषी पाते हुए सजा सुनाई है। 

 आकिल खान एडीपीओ ने बताया कि 30 न्यायालय अतुल सक्सेना 23वें अपर सत्र न्यायाधीश  द्वारा कूटरचित मूल निवासी प्रमाण पत्र का उपयोग कर मेडिकल सीट पर प्रवेश लेने वाले आरोपी डॉक्टर सीताराम शर्मा पिता नत्थीलाल शर्मा को दोष सिद्ध  पाते हुए धारा 420 भादवि में 3 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 500 अर्थदंड एवं धारा 467 भादवि में 3 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 500 अर्थदंड धारा 468 भादवि में 3 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 500 अर्थदंड एवं धारा 471 भादवि में 2 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 500 अर्थदंड से दंडित किए जाने का निर्णय पारित किया है। उक्त प्रकरण में शासन द्वारा की ओर से विशेष लोक अभियोजक एसटीएफ भोपाल आकिल खान एवं सुधाविजय सिंह भदौरिया द्वारा पैरवी की गई है।  

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह तत्कालीन राज्य सभा सासंद द्वारा एसटीएफ भोपाल को शिकायत की गई थी कि व्यापाम वर्ष 2006 के बाद जो परीक्षाएं आयोजित हुई है और जो घोटाला हो रहा है, उसमे उत्तर प्रदेश के मूल निवासी मध्यप्रदेश में मेडिकल सीट प्राप्त करने के लिये मध्यप्रदेश का कूटरचित मूल निवासी प्रमाण पत्र बनवाकर कर मध्यप्रदेश कोटे की मेडिकल सीट पर प्रवेश ले रहे हैं। पुलिस थाना एसटीएफ भोपाल को वर्ष 2009 में प्राप्त शिकायत व्यावसायिक परीक्षा मंडल भोपाल द्वारा आयोजित पीएमटी परीक्षा में आरोपी सीताराम शर्मा द्वारा वर्ष 2009 में उत्तीर्ण होने पर मप्र राज्य कोटा का लाभ प्राप्त करने के लिये कूटरचित मूल निवास प्रमाण पत्र का उपयोग करने का गंभीर कृत्य किया था, जिसका मामला पंजीबद्ध किया गया था।  

सूचना के आधार पर पुलिस थाना एसटीएफ के अपराध 35/2019 धारा 420, 467, 468, 471 भादवि का अपराध पंजीबद्ध कर जांच पड़ताल की गई। विवेचना में सामने आया कि आरोपी सीताराम शर्मा द्वारा मध्यप्रदेश की अम्बाह तहसील से निर्मित कथित मूल निवासी होना दर्शाकर मेडिकल सीट पर प्रवेश लिया  था। जबकि आरोपी मूल रूप से उत्तरप्रदेश को रहने वाला है और उसने माध्यिमक शिक्षा परिषद उत्तरप्रदेश से 1984 हाईस्कूल की परीक्षा एवं 2001 में इंटरमीडियेट की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। 

अभियुक्त वर्तमान में जिला भिंड में शासकीय चिकित्यालय में चिकित्सा अधिकारी के पद पर पदस्थ है। जब उसके कथित मूल निवासी प्रमाण पत्र की जांच की गई तो उक्त प्रमाण पत्र तहसील अम्बाह जिला मुरैना से जारी होना नहीं पाया गया। इस प्रकरण को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। न्यायालय ने आरोपी सीताराम शर्मा को उक्त धाराओं में दोषसिद्ध का फैसला दिया।  

न्यायालय के निर्णय के पैरा 143 में बताया गया कि अभियुक्त द्वारा किया गया अपराध इसलिए गंभीर प्रकृति का है। क्योंकि मध्यप्रदेश का मूल निवासी ना होकर एक प्रतियोगी परीक्षा में अवास्तविक कूटरचित दस्तावेज का उपयोग कर बेईमानीपूर्वक आशय से स्थान सुनिश्चित किया गया। जिसके आधार पर वास्तविक प्रतियोगी परीक्षार्थी का अधिकार प्रभावित हुआ है। वर्तमान में अभियुक्त एक शासकीय चिकित्सालय में एक चिकित्सीय अधिकारी है। अभियुक्त का अपराध गंभीर प्रकृति का है, इसलिए अभियुक्त को कठोर दंड से दंडित करने की बात कही थी। न्यायालय ने अपना फैसला दे दिया है।

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