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लखनऊ
ट्रांसफार्मर बनाते समय एक संविदाकर्मी की मौत पर मुआवजे को लेकर यूपी पावर कारपोरेशन गाढ़े में पड़ गया। संविदाकर्मी की मौत पर स्थाई लोक अदालत ने मुआवजे का आदेश दिया था। इस आदेश को चुनौती देना यूपी पावर कॉरपोरेशन को महंगा पड़ गया। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने न सिर्फ याचिका खारिज की बल्कि लोक अदालत द्वारा दिए गए 13 लाख 15 हजार रुपये के मुआवजे के आदेश को बढ़ाकर 23 लाख 78 हजार रुपये कर दिया। साथ ही मुआवजे से इंकार कर, मुकदमा दाखिल करने पर 50 हजार रुपये का अतिरिक्त हर्जाना भी लगाया है। हाईकोर्ट के इस आदेश से संविदाकर्मी के परिवार ने बड़ी राहत महसूस की है।

यह निर्णय न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने यूपी पॉवर कॉर्पोरेशन की याचिका पर पारित किया। न्यायालय ने टिप्पणी की कि यह एक दुखद मामला है, जिसमें एक पब्लिक यूटिलिटी सर्विस ने यह याचिका दाखिल की है और ऐसे तर्क प्रस्तुत कर रही है जो उस जनकल्याण के उद्देश्य के अनुकूल नहीं हैं जिसके लिए उसकी स्थापना की गई है।

कॉर्पोरेशन ने यह स्वीकार किया था कि मृतक उसका संविदाकर्मी था जिसकी मृत्यु एक ट्रांसफार्मर ठीक करते हुए हो गई थी। हालांकि कॉर्पोरेशन की ओर से लोक अदालत द्वारा मुआवजे का आदेश देने की शक्ति पर सवाल उठाया गया। वहीं न्यायालय ने पाया कि मृतक संविदाकर्मी के परिवार को मुआवजे की जो धनराशि निर्धारित की गई है, वह तय मानकों से कम है।

न्यायालय ने इस सम्बंध में विस्तृत आदेश और गणना करते हुए, 24 लाख 78 हजार रुपये की धनराशि को उपयुक्त माना जिसमें से एक लाख रुपये कॉर्पोरेशन द्वारा पूर्व में ही दिए गए। न्यायालय ने कहा कि बाकी की 23 लाख 78 हजार रुपये की रकम तीन माह में लोक अदालत के समक्ष जमा करायी जाय जो संविदाकर्मी की परिवार को दी जाएगी।

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