इलाज भी सस्ता, रोजगार भी: दवाइयों पर राहत के साथ टेक्सटाइल पार्क और हैंडलूम योजना का ऐलान

नई दिल्ली.  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में बजट 2026-27 पेश कर रही है। उनके भाषण पर पूरे भारत की नजर टिकी है। बजट से आम नागरिक, व्यवसायी, हेल्थ सेक्टर, शेयर मार्केट को उम्मीदें है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भाषण की शुरुआत में कहा, इस बजट में ग्लोबल अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूत बजट पर फोकस है। इसके अलावा इस साल के बजट में युवा शक्ति पर फोकस है। वित्त मंत्री ने कहा, "सरकार के कदमों से 7 प्रतिशत का विकास और गरीबी कम करने में मदद मिली है। भारत को वैश्विक बाजारों से एकीकृत होना होगा।" वित्त मंत्री ने कहा, "आर्थिक विकास को सतत और तेज बनाए रखना सरकार का पहला कर्तव्य है।" बजट में किन बातों को विशेष महत्व? मैन्युफैक्चरिंग में तेजी चैंपियन एमएसएमई का निर्माण इन्फ्रास्ट्रक्चर दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा स्वास्थ्य सेवा के लिए रणनीति क्या है मुख्य घोषणाएं? 2025 में रेअर परमानेंट मैग्नेट स्कीम शुरू की गई थी। इसमें आगे बढ़ते हुए खनिज संपन्न राज्यों की मदद की जाएगी। पांच राज्यों में रेयर अर्थ मिनरल के डेडिकेटेड कॉरिडोर बनेगा। इसके अलावा EMS PLI स्कीम का आवंटन 20 हजार से बढ़ाकर 40 हजार करोड़ किया जाएगा इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन – उपकरण और सामग्री उत्पादन, सप्लाई चेन मजबूत करने के लिए आईएसएम 2.0 शुरू किया जाएगा। 5 साल में बायोफार्मा में 10 हजार करोड़ रुपए का निवेश होगा दुर्लभ खनिज के लिए कॉरिडोर बनेगा     आंध्र, केरल, तमिलनाडु और ओडिशा में कॉरिडोर बनेगा     कैंसर, डायबिटीज की दवाइयां सस्ती होगी     टेक्सटाइल पार्क की स्थापना का एलान     महात्मा गांधी हैंडलूम योजना शुरू करेंगे     वस्त्र उद्योग सेक्टर में भी रिफॉर्म करेंगे     इससे बुनकरों को फायदा होगा डिफेंस के लिए क्या घोषणा?  रक्षा सामग्री (जैसे हथियार) खरीद के लिए 219306.47 करोड़ रुपये। पिछले बजट (2025-26) में 180000 करोड़ का प्रावधान किया गया था, जिसे संशोधित कर 186454.20 करोड़ किया गया है। सर्विस सेक्टर के लिए हाई‑पावर्ड स्थायी समिति की घोषणा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, 'मैं ‘Education to Employment and Enterprise’ नाम की एक हाई‑पावर्ड स्टैंडिंग कमेटी बनाने का प्रस्ताव रखती हूं, जो सर्विस सेक्टर को ‘विकसित भारत’ का मुख्य ड्राइवर बनाने के लिए जरूरी उपायों की सिफारिश करेगी। सरकार का टारगेट है कि 2047 तक भारत का सर्विस सेक्टर में वैश्विक हिस्सा 10% तक पहुंचे। इनकम टैक्स कानूनों, टैक्स कलेक्शन को लिए कई घोषणाएं नया इनकम टैक्स एक्ट 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। FY27 के लिए अनुमानित Non‑debt receipts 36.5 लाख करोड़ रुपये होगा। वहीं Net tax receipts 28.7 लाख करोड़ रुपये होगा। वित्त मंत्री ने कहा है कि शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए TCS रेट घटाया गया. यह 5% से घटाकर 2% किया जाएगा। रिटर्न संशोधन (Revised Returns) का समय बढ़ाया गया. नाममात्र फीस देकर रिवाइज रिटर्न फाइल करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।   recent visitors 48

अमेरिका और इजरायल बोले- हमारा हाथ नहीं, ईरान में धमाकों में 5 की मौत और कई घायल

तेहरान. कई महीनों से प्रदर्शन से परेशान ईरान को एक बार फिर झटका लगा है। दक्षिणी ईरान के समुद्र किनारे वाले शहर बंदर अब्बास में शनिवार को जोरदार धमाका हुआ है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक यह धमाका गैस के रिसाव की वजह से हुआ। इसके अलावा इराक सीमा के पास स्थित अहवाज शहर में भी गैस के रिसाव से एक धमाका हुआ। दोनों धमाकों में कुल मिलाकर पांच लोगों की मौत हो गई है, जबकि 14 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। कुछ रिपोर्ट्स में सात धमाकों की जानकारी सामने आई है। इनके मुताबिक राजधानी तेहरान, बंदर अब्बास, तबरीज, कोम, अहवाज, नंताज और परंद में धमाके हुए हैं। ईरान सरकार की तरफ से इनकी पुष्टि नहीं की गई है। ईरान के अग्निशमन विभाग के प्रमुख मोहम्मद अमीन लियाकत ने बंदर अब्बास में हुए धमाके पर ईरान की मीडिया एजेंसी मेहर को दिए अपने बयान में कहा, "शुरुआती जांच के हिसाब से पता चला है कि यह धमाका गैस की वजह से हुआ है। अगले कुछ घंटों में मेरे सहयोगी और अधिक जानकारी देंगे।” इस घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे हैं। इनमें मलबे में तब्दील इमारतों के सामने टूटी हुई गाड़ियां खड़ी हुई नजर आ रही हैं, जो कि इमारत के मलबे की वजह से क्षतिग्रस्त हुई हैं। रॉयटर्स ने इमारतों, पेड़ों और सड़क के लेआउट का विश्लेषण कर स्थान की पुष्टि की, जो सैटेलाइट और फाइल इमेजरी से मेल खाता है। हालांकि, स्वतंत्र रूप से यह सत्यापित नहीं की जा सकती कि वीडियो किस तारीख का है। ईरान में धमाकों की खबर सामने आने के बाद सबसे बड़ा शक अमेरिका और इजरायल की तरफ ही गया। हालांकि सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी और इजरायली अधिकाियों ने यह साफ किया है कि इन धमाकों के पीछे उनका कोई हाथ नहीं है। recent visitors 44

इन्फ्रा बूम 2026: सड़क-रेल-मेट्रो को रिकॉर्ड फंडिंग, ₹12.20 लाख करोड़ कैपेक्स से तेज होगा छोटे शहरों का विकास

नई दिल्ली. यूनियन बजट 2026 (Union Budget 2026) में सरकार ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि देश की ग्रोथ की रफ्तार इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर ही तेज की जाएगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया है कि वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ कर दिया गया है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं। कैपेक्स (Capex) यानी सरकार द्वारा किया जाने वाला वह खर्च, जो सड़क, रेलवे, मेट्रो, एयरपोर्ट, हाउसिंग और इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी लंबे समय की विकास परियोजनाओं पर होता है। इसका मतलब है कि जितना ज्यादा कैपेक्स (Capex) होगा, उतना ज्यादा रोजगार, निवेश और आर्थिक गतिविधियां भी बढेंगी। वित्त मंत्री ने बताया कि पिछले एक दशक में पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। 2014-15 में यह 2 लाख करोड़ था, जो 2025-26 (BE): में बढ़कर 11.2 लाख करोड़ हुआ और 2026-27 (प्रस्तावित) में इसको बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ तक कर दिया गया है, यानी 10 साल में सरकार का इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च कई गुना बढ़ चुका है। सरकार का खास जोर उन शहरों पर रहेगा जिनकी आबादी 5 लाख से ज्यादा है। ये शहर अब सिर्फ छोटे कस्बे नहीं, बल्कि नए ग्रोथ सेंटर्स बन चुके हैं। सरकार का लक्ष्य है कि Tier-2 और Tier-3 शहरों में बेहतर सड़कें हों। इसके साथ ही मजबूत पब्लिक ट्रांसपोर्ट, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, रियल एस्टेट और इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट हो। वित्त मंत्री ने बताया कि सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश ट्रस्ट (इन्विट) (Infrastructure Investment Trust -InvIT), रियल एस्टेट इंवेस्टमेंट ट्रस्ट (Real Estate Investment Trust -REIT) जैसे नए फाइनेंसिंग टूल्स को भी बढ़ावा दिया है, जिससे प्राइवेट निवेश को आकर्षित किया जा सके। इस बढ़े हुए Capex का सीधा असर रोजगार के नए अवसर, रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन सेक्टर पर पड़ेगा। छोटे शहरों में बेहतर सुविधाएं होंगी। इसके साथ ही बिजनेस और इंडस्ट्री के लिए आसान कनेक्टिविटी होगी।  recent visitors 141

डोनाल्ड ट्रंप बोले- हो गई डील, अब रूस और ईरान की जगह वेनेजुएला से तेल आयात करेगा भारत

नई दिल्ली. भारत और अमेरिका के बीच अभी कोई ट्रेड डील फाइनल नहीं हो पाई है लेकिन भारत को लेकर दावे करने से डोनाल्ड ट्रंप चूकते नहीं हैं। उन्होंने शनिवार को कहा कि भारत ईरान की जगह वेनेजुएला से तेल आयात करेगा। उन्होंने कहा, हम लोगों ने इसको लेकर डील कर ली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक एक दिन पहले ही अमेरिका ने भारत के सामने वेनेजुएला से तेल खरीदने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि भारत ने उसपर क्या प्रतिक्रिया दी है, यह सामने नहीं आया है। अमेरिका चाहता है कि भारत रूस और ईरान से तेल खरीदना बंद कर दे। जिस वेनेजुएला से आज ट्रंप तेल खरीदने की बात कर रहे हैं, उसी वेनेजुएला से तेल खरीदने पर वह विरोध भी करते थे। हालांकि अब उन्होंने वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति को बंधक बना लिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला से तेल खरीदने के लिए चीन का भी स्वागत है। कहां पहुंची है ट्रेड डील की बातचीत भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और दोनों देश इसे जल्द पूरा करने के लिए काम कर रहे हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को यह जानकारी दी उन्होंने भरोसा जताया कि निकट भविष्य में इस मोर्चे पर अच्छी खबर दी जाएगी। गोयल ने कहा, ''हर मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) अपनी शर्तों और खूबियों पर टिका होता है। हमारी बातचीत बहुत अच्छी चल रही है। अमेरिका में मेरे समकक्ष और मेरे बीच बहुत ही शानदार कामकाजी संबंध और व्यक्तिगत मित्रता है। हम इस समझौते को जल्द से जल्द पूरा करने की दिशा में काम कर रहे हैं।'' जब उनसे पूछा गया कि 'मदर ऑफ ऑल डील्स' (भारत-ईयू समझौता) के बाद अब भारत और अमेरिका के बीच 'फादर ऑफ ऑल डील्स' कब तक हकीकत बनेगी, तो उन्होंने कहा कि व्यापार समझौतों के लिए कभी कोई समय सीमा तय नहीं की जाती। इन्हें दोनों देशों के हितों को ध्यान में रखते हुए सही समय पर अंतिम रूप दिया जाएगा। अगले सप्ताह वॉशिंगटन की अपनी निर्धारित यात्रा से पहले, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बृहस्पतिवार को अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के साथ व्यापार, महत्वपूर्ण खनिजों और रक्षा सहित द्विपक्षीय संबंधों के प्रमुख आयामों पर चर्चा की। उम्मीद है कि वह अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। जब गोयल से पूछा गया कि क्या रूसी तेल की खरीद दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट का कारण है, तो उन्होंने कहा, ''मुझे नहीं लगता कि यह कोई बाधा या अड़चन है। कुछ गलतफहमियां हो सकती थीं, जिन्हें काफी हद तक सुलझा लिया गया recent visitors 41

बायो-फार्मा से सेमीकंडक्टर तक बदलेगी तस्वीर, बजट 2026 में ‘औद्योगिक संप्रभुता’ का बड़ा दांव

नई दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए जाने वाले वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में सरकार का पूरा जोर भारत को औद्योगिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर है। लगभग ₹54.1 लाख करोड़ के संभावित बजट आकार के बीच, सरकार ने आर्थिक सुधारों को गति देने के लिए 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' का ब्लूप्रिंट पेश किया है। यह पहल प्रधानमंत्री द्वारा 2025 के स्वतंत्रता दिवस पर की गई घोषणाओं और उसके बाद गठित उच्च स्तरीय समितियों के सुझावों पर आधारित है। केंद्र सरकार अब राज्य सरकारों के साथ मिलकर इन सुधारों को जमीनी स्तर पर उतारने की तैयारी में है। इस 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' के तहत 6 प्रमुख कर्तव्यों और 7 फोकस सेक्टर्स की पहचान की गई है, जिनका उद्देश्य भारत की 'इंडस्ट्रियल सॉवरेन्टी'  यानी औद्योगिक संप्रभुता को सुनिश्चित करना है। 1. बायो-फार्मा शक्ति: ₹10,000 करोड़ का बूस्टर फार्मास्यूटिकल सेक्टर में भारत को वैश्विक हब बनाने के लिए सरकार ने 'बायो-फार्मा शक्ति' की घोषणा की है। इस योजना के तहत अगले पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। • उद्देश्य: ज्ञान, टेक्नोलॉजी और नवाचार  के जरिए विकास करना और किफायती दवाएं उपलब्ध कराना। • इंफ्रास्ट्रक्चर: देश में बायो-फार्मा के 3 नए राष्ट्रीय संस्थान बनाए जाएंगे और 7 मौजूदा संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा। • रेगुलेशन: दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए 'सेंट्रल ड्रग कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन' (CDSCO) का भी आधुनिकीकरण किया जाएगा। 2. सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स: ₹40,000 करोड़ का प्रस्ताव टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए 'सेमीकंडक्टर मिशन' को विस्तार दिया गया है। इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्यूफैक्चरिंग स्कीम के तहत तय लक्ष्य से दोगुना हासिल करने के बाद सरकार का उत्साह बढ़ा है। • नया निवेश: इस सेक्टर में 40,000 करोड़ रुपये के खर्च का प्रस्ताव रखा गया है। • फोकस: मुख्य जोर उद्योग आधारित प्रशिक्षण केंद्रों पर होगा, ताकि इस सेक्टर के लिए स्किल्ड वर्कफोर्स तैयार की जा सके। 3. रेयर अर्थ मिशन: आयात निर्भरता घटाने की तैयारी महत्वपूर्ण खनिजों के लिए चीन या अन्य देशों पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार ने एक रणनीतिक कदम उठाया है। 'रेयर अर्थ' तत्वों के खनन और शोध के लिए देश के चार राज्यों में विशेष कॉरिडोर बनाए जाएंगे। • राज्य: ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु। • लक्ष्य: इन कॉरिडोर्स का मुख्य उद्देश्य आयात निर्भरता  को घटाना और घरेलू स्तर पर इन स्ट्रैटेजिक मिनरल्स की सप्लाई चेन बनाना है। 4. एमएसएमई और शहरी विकास 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' के तहत छोटे उद्योगों यानी एमएसएमई को 'चैम्पियन' बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा, शहरी क्षेत्रों में आर्थिक ढांचे  को मजबूत करने के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं, ताकि शहर विकास के इंजन बन सकें। भविष्य की ओर बढ़ती 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' कुल मिलाकर, ₹54.1 लाख करोड़ के बजट में 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' सरकार की दीर्घकालिक दृष्टि को दर्शाती है। बायो-फार्मा और सेमीकंडक्टर जैसे उच्च तकनीक वाले क्षेत्रों में भारी निवेश और रेयर अर्थ जैसे रणनीतिक क्षेत्र में घरेलू क्षमता का निर्माण यह बताता है कि सरकार अब केवल 'असेंबली' नहीं, बल्कि 'मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन' पर फोकस कर रही है। recent visitors 43

डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने कहा- मामले सिर्फ भारत तक सीमित, ‘निपाह एक दुर्लभ लेकिन गंभीर बीमारी’

वाशिंगटन. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि निपाह वायरस के मामले दुर्लभ हैं लेकिन गंभीर भी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि निपाह वायरस के प्रकोप से जुड़े मामले केवल भारत तक ही सीमित हैं। किसी अन्य देश से इनकी सूचना नहीं मिली है। पहली पहचान के बाद तीसरे मामला-घेब्रेयसस घेब्रेयेसस ने एक्स पर लिखा,"पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस संक्रमण के दो मामले सामने आए है। वे 1998 में वायरस की पहली पहचान के बाद से इस राज्य में तीसरे मामले हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में अधिकारी 190 से अधिक संपर्कों की निगरानी कर रहे हैं।  अभी तक किसी में भी यह बीमारी विकसित नहीं हुई है। उन्होंने आगे लिखा, "अधिकारियों ने बीमारी की निगरानी और परीक्षण बढ़ा दिए हैं, स्वास्थ्य देखभाल केंद्रों में रोकथाम और नियंत्रण के उपाय लागू किए हैं। जनता को खुद को सुरक्षित रखने के तरीकों के बारे में सूचित कर रहे हैं।" डब्ल्यूएचओ प्रमुख की यह चेतावनी वैश्विक स्वास्थ्य संस्था द्वारा यह कहने के एक दिन बाद आई है कि वायरस के फैलने का जोखिम कम है। किसी भी यात्रा या व्यापार प्रतिबंध की कोई आवश्यकता नहीं है। स्वास्थ्य निकाय ने यह भी कहा था कि मानव से मानव में संक्रमण बढ़ने का कोई सबूत नहीं है, और इसलिए जोखिम कम बना हुआ है। पश्चिम बंगाल में दो लोग हुए थे संक्रमित पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में निपाह वायरस के दो मामले सामने आए थे। दोनों ही नर्सें थीं। हालांकि, स्वास्थ्य अधिकारियों ने बाद में बताया कि उनकी हालत में सुधार हुआ है। उनकी जांच में संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। पुरुष नर्स को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जबकि महिला नर्स को वेंटिलेटर से हटा दिया गया है, लेकिन उन्हें अभी भी निगरानी में रखा गया है। डब्ल्यूएचओ ने एक विज्ञप्ति में कहा, "दोनों मामलों में दिसंबर 2025 के अंत में गंभीर एनआईवी संक्रमण के विशिष्ट लक्षण विकसित हुए और उन्हें जनवरी 2026 की शुरुआत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। 21 जनवरी 2026 तक, दूसरे मामले में नैदानिक सुधार देखा गया, जबकि पहला मामला गंभीर स्थिति में रहा।" निपाह वायरस चमगादड़ों से मनुष्यों में फैलता स्वास्थ्य निकाय ने बताया था कि निपाह वायरस चमगादड़ों से मनुष्यों में फैलता है और यह निकट संपर्क या दूषित भोजन के माध्यम से हो सकता है। इस वायरस से जुड़े लक्षण बुखार, मांसपेशियों में दर्द और सिरदर्द हैं, जिससे इसका पता लगाना अधिक कठिन हो सकता है। यदि कोई व्यक्ति इस वायरस से संक्रमित हो जाता है, तो उसे मस्तिष्क में सूजन होने की संभावना होती है और मृत्यु की संभावना 40% से 75% के बीच होती है। recent visitors 51

‘भारत की मदद से बलूच विद्रोही संगठन कर रहा हमले’, बलूचिस्तान में सैनिकों के ढेर होने पर पाक का आरोप

इस्लामाबाद. पाकिस्तान के बलूचिस्तान में विद्रोहियों ने एक बार फिर से बड़ा हमला किया है। इन हमलों में 80 पाकिस्तानी सैनिक ढेर हुए हैं। वहीं पाकिस्तान ने इससे उलट ही दावा करते हुए कहा है कि उसके 18 सैनिक मारे गए हैं, जबकि 92 बलूच विद्रोही मारे गए हैं। यही नहीं पाकिस्तान ने अपने घर में लगी आग के लिए भारत पर भड़ास निकाली है। चीन के हस्तक्षेप, CPEC प्रोजेक्ट और ग्वादर बंदरगाह के लिए बड़े पैमाने पर बलूचिस्तान के संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन वहां के स्थानीय निवासियों की जिंदगी बदतर है। इसी के विरोध में बलूच विद्रोही संगठन अकसर पाकिस्तानी सेना, पंजाबी मूल के लोगों और यहां तक की चीनी नागरिकों पर भी निशाना साधते रहते हैं। कई बार बलूच विद्रोही संगठनों ने खूनी हमले भी किए हैं। इस बार अब तक के सबसे बड़े हमलों में से एक अटैक किया है। लेकिन पाकिस्तान इन हमलों की वजह तलाशने की बजाय भारत पर ही भड़ास निकाल रहा है। पाकिस्तानी सेना की प्रोपेगेंडा यूनिट ISPR ने इसके लिए भारत को जिम्मेदार बताने की कोशिश की है। उसने कहा कि ये हमले भारत से मदद पाने वाले फितना-अल-हिन्दुस्तान नाम के संगठन ने किए हैं। ये हमले क्वेटा, मस्तंग, नुशकी, दलबंदीन, खारन, पंजगुर, ग्वादर और पसनी में हुए हैं। इस तरह एक साथ ही कई शहरों पर बलूच विद्रोहियों ने हमले किए हैं। दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान जैसे संगठन की बात कर रहा है, उसका कोई अस्तित्व ही नहीं है। पाकिस्तानी एजेंसी ने कहा कि उसकी सेना ने बलूचिस्तान में क्लियरेंस ऑपरेशन चलाया है। इसमें अब तक 92 बलूच विद्रोही मारे गए हैं। इस कार्रवाई के दौरान 18 नागरिक और 15 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी भी मारे गए हैं। बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा जैसे प्रांतों में पाकिस्तानी सेना और प्रशासन से गहरी नाराजगी है। यही नहीं यहां पर अकसर पंजाबियों को टारगेट करते हुए भी हमले किए जाते रहे हैं। इसकी वजह पंजाबी वर्चस्व को माना जाता है। इस बीच खबर है कि पंजाब से बलूचिस्तान जाने के सारे रास्तों को भी पाकिस्तान ने बंद कर दिया है। खौफ इतना कि पंजाब से बलूचिस्तान जाने के रास्ते ही बंद डेरा गाजी खान के डिप्टी कमिश्नर उस्मान खालिद ने कहा कि बलूचिस्तान से पंजाब जाने के सारे रास्ते बंद कर दिए गए हैं। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि ऑपरेशन के दौरान बलूच विद्रोही किसी आम नागरिक को टारगेट न कर सकें। अकसर बलूच विद्रोही पंजाबी मूल के लोगों को टारगेट करते रहे हैं। ऐसे में रूट ही बंद करने के पीछे यही एक वजह मानी जा रही है। खालिद ने कहा कि फोर्ट मुनरो हाइवे और मूसा खेल रोड को बंद किया गया है, जो बलूचिस्तान जाते हैं। इसके अलावा जो ट्रैफिक चल रहा था, उसे भी सीमाओं पर ही रोक दिया गया है। ये सारे कदम एहतियात के तौर पर उठाए गए हैं। recent visitors 30