राज्य में ट्रांसमिशन अवेलेबिलिटी को ऐतिहासिक रूप से 99.47 % के उच्चतम स्तर तक पहुँचाने में सफलता प्राप्त हुई

प्रदेश में पारेषण उपलब्धता का नया कीर्तिमान 98 प्रतिशत लक्ष्य के मुकाबले हासिल किया 99.47 प्रतिशत मध्यप्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग पारेषण उपलब्धता बढ़कर 99.47 प्रतिशत तक हो गई राज्य में ट्रांसमिशन अवेलेबिलिटी को ऐतिहासिक रूप से  99.47 % के उच्चतम स्तर तक पहुँचाने में सफलता प्राप्त हुई भोपाल ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेश के विद्युत क्षेत्र में ट्रांसमिशन नेटवर्क (पारेषण प्रणाली) की अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण एवं विस्तारीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। इसके फलस्वरूप राज्य में पारेषण उपलब्धता (ट्रांसमिशन अवेलेबिलिटी) को ऐतिहासिक रूप से  99.47 प्रतिशत के उच्चतम स्तर तक पहुँचाने में सफलता प्राप्त हुई है। ऊर्जा मंत्री तोमर ने जानकारी दी है कि मध्यप्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा वर्ष 2024-25 के लिये निर्धारित 98 प्रतिशत लक्ष्य के मुकाबले इस वित्तीय वर्ष में पारेषण उपलब्धता (ट्रांसमिशन अवेलेबिलिटी) बढ़कर 99.47 प्रतिशत तक हो गई है।  वर्ष 2023-24 में पारेषण उपलब्धता (ट्रांसमिशन अवेलेबिलिटी) 99.42 प्रतिशत के मुकाबले यह उल्लेखनीय सुधार है, जो राज्य विद्युत कंपनियों की कार्यकुशलता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। प्रदेश के विद्युत क्षेत्र की यह सफलता राज्य के लिए गर्व की बात है, इस उपलब्धि के लिये उन्होंने विद्युत कार्मिकों को बधाई दी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह उपलब्धि न केवल मध्यप्रदेश में विद्युत आपूर्ति की गुणवत्ता को बेहतर बनाएगी, बल्कि उपभोक्ताओं को अधिक स्थिर और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में भी सहायक सिद्ध होगी। विद्युत आपूर्ति की गुणवत्ता होगी बेहतर तोमर ने  कहा है कि एम.पी. ट्रांसको द्वारा किए गए नवाचारों, उन्नत तकनीकी समाधानों जैसे स्काडा प्रणाली, विद्युत ग्रिडों की निगरानी और समय-समय पर रख-रखाव के चलते यह सफलता संभव हो पाई है। कंपनी द्वारा विद्युत नेटवर्क के आधुनिकीकरण और क्षमतावर्धन की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। पारेषण उपलब्धता अधिक होने के फायदे किसी भी ट्रांसमिशन सिस्टम में ट्रांसमिशन अवेलेबिलिटी (पारेषण उपलब्धता) अधिकतम होने से विद्युत आपूर्ति में बाधाएँ कम होती हैं, जिससे उपभोक्ताओं को निरंतर बिजली मिलती है। इससे औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि होती है और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है। यह प्रणाली की विश्वसनीयता और दक्षता को भी सुनिश्चित करता है। साथ ही आपात स्थितियों में शीघ्र बिजली आपूर्ति संभव होती है।   recent visitors 52

अमरनाथ यात्रा शुरू होने से पहले सेवा प्रदाताओं और टट्टुओं के पंजीकरण में तेजी

जम्मू/श्रीनगर   वार्षिक श्री अमरनाथ जी यात्रा-2025 के निर्बाध और शांतिपूर्ण संचालन के लिए उन्नत ढांचा स्थापित करने के लिए मंडलायुक्त कश्मीर विजय कुमार बिधूड़ी ने अधिकारियों की एक बैठक बुलाई, जिसमें आधार शिविरों और पवित्र गुफा के रास्ते में विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंडलायुक्त ने अधिकारियों को आवश्यक विकास कार्यों को प्रभावी ढंग से निष्पादित करने और निर्धारित समय सीमा के भीतर उन्हें पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने मौसम संबंधी आपात स्थितियों का सामना करने के लिए आधार शिविरों की क्षमता बढ़ाने का भी आह्वान किया। साथ ही, मंडलायुक्त ने श्रम और पशुपालन विभागों से यात्रा शुरू होने से पहले लक्ष्य को पूरा करने के लिए सेवा प्रदाताओं और टट्टुओं के पंजीकरण में तेजी लाने का आग्रह किया। उन्होंने यात्रियों को सुविधाओं की उपलब्धता के बारे में जानकारी देने के लिए प्रमुख स्थानों पर साइनेज लगाने के लिए भी कहा। विभिन्न स्थानों पर यात्रियों के पंजीकरण के संबंध में मंडलायुक्त ने अन्य स्थानों के अलावा नौगाम और अनंतनाग रेलवे स्टेशनों पर आर.एफ.आई.डी. काऊंटर स्थापित करने का निर्देश दिया। उन्होंने बी.आर.ओ. को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि पवित्र गुफा तक जाने वाले मार्ग गड्ढों से मुक्त हों। बैठक के दौरान श्रीनगर, अनंतनाग, बड़गाम, गांदरबल और बांदीपोरा के उपायुक्तों के अलावा के.पी.डी.सी.एल., एफ.सी.एस. एंड सी.ए., पी.एच.ई., आर. एंड बी., एस.एम.सी., स्वास्थ्य, पर्यटन, सोनमर्ग विकास प्राधिकरण, पहलगाम विकास प्राधिकरण सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने श्री अमरनाथ जी यात्रा-2025 के तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए चल रहे कार्यों और योजनाओं के बारे में बैठक में जानकारी दी। recent visitors 56

प्रदेश में संविदा कर्मचारियों, अधिकारियों के तबादलोें की प्रक्रिया को स्थान परिवर्तन का नाम दिया

भोपाल मध्यप्रदेश में ट्रांसफर पर बड़ा अपडेट सामने आया है। राज्य के संविदाकर्मियों को भी अब हटाकर इधर से उधर किया जा सकेगा। पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग ने इसके लिए नई व्यवस्था लागू कर दी है। संविदा कर्मचारियों, अधिकारियों को नई जगह पर पदस्थापना के लिए वर्तमान स्थल पर पदस्थापना का अनुबंध समाप्त कर नई पदस्थापना का अनुबंध करना होगा। हालांकि नई पदस्थापना के लिए उन्हें भत्ता और छुट्‌टी का लाभ नहीं मिलेगा। विभाग ने संविदा कर्मचारियों, अधिकारियों के तबादलोें की इस प्रक्रिया को स्थान परिवर्तन का नाम दिया है। जिले में कार्यरत संविदा कर्मचारियों में से केवल 10 प्रतिशत को ही स्थान परिवर्तित किया जा सकेगा। एमपी में कर्मचारियों, अधिकारियों के तबादलों के लिए ​30 मई तक का समय नियत है। राज्य के नियमित कर्मचारियों, अधिकारियों के जैसे ही संविदा कर्मचारियों के लिए भी नई तबादला प्रक्रिया लागू की गई है। पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग ने इसके लिए प्रावधान जारी किए हैं। अभी तक इनके तबादलों के लिए कोई नीति नहीं बनाई गई थी। संविदा कर्मचारियों के तबादलों के प्रावधान नई जगह पर पदस्थापना के लिए पुराना अनुबंध निरस्त करना होगा। नई पदस्थापनास्थल पर नियोक्ता नया कार्य सौंपेगा। स्थान परिवर्तन होने पर पांच साल तक वहीं रहना होगा। नए पदस्थापना स्थल के लिए यात्रा भत्ता या छुट्‌टी का लाभ नहीं मिलेगा। आदेश जारी होने के दो सप्ताह में संविदाकर्मी को कार्यमुक्त करना होगा। नगर निगम कमिश्नर ने लिया बड़ा एक्शन, शुरू की बदलाव की तैयारी…  नगर निगम में वार्ड कर्मचारियों का रिश्वत लेते हुए वीडियो वायरल होने और टैक्स कलेक्शन में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद कमिश्नर ने अब नगर निगम में अंगद की तरह जमे अधिकारियों और कर्मचारियों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। जोनल अधिकारियों को बदलने के बाद अब इंजीनियर और बाबुओं की लिस्ट तैयार की गई है जिन्हें एक ही विभाग में नौकरी करते कई वर्ष बीत चुके हैं। सूची में कई अधिकारी ऐसे हैं जिन्होंने वर्ष 2003 में नगर निगम में नौकरी मिलने के बाद एक ही विभाग में पूरी सर्विस निकाल दी। अधिकारी इसलिए सुनवाई नहीं करते नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने नगर परिषद की बैठक में आरोप लगाया था कि नगर निगम में पिछले कई सालों से एक ही विभाग में इंजीनियर अधिकारी और कर्मचारी जमे हुए हैं। भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है और जनप्रतिनिधियों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। 10 से 25 साल तक नौकरी करने वालों पर गाज इंजीनियर लालजी चौहान ने वर्ष 2010 से अब तक बिल्डिंग परमिशन सेल में ही पूरी नौकरी की। एई महेश सिरोहिया ने 22 साल, राजाराम अहिरवार ने वर्ष 2003 से अब तक, नंदकिशोर डेहरिया ने भी 2003 से अब तक एवं डीके सिंह राजधानी परियोजना प्रशासन से प्रतिनियुक्ति पर आकर वर्ष 2018 से अब तक एक ही विभाग में जमे हैं। इसी प्रकार सब इंजीनियर गोपी लाल चौधरी 22 साल से, अंकित शाक्य, अमित दुबे, श्रीपदा दीक्षित ने 2018 में नौकरी ज्वाइन करने के बाद भवन अनुज्ञा से संबंधित काम संभाले हुए हैं। एक ही विभाग में जमे बाबुओं में सुनील जैन 30 साल, राकेश लहरिया 30 साल, मोहमद साबिर 20 साल, तपेंद्र सिंह 10 साल, रामचरण मालवीय 15 साल, सरिता बर्वे 22 साल, साधु प्रसाद खंडित 22 साल, सिद्दीकी हसन को 25 वर्ष का समय एक ही विभाग में हो चुका है। अब होगा बदलाव जोनल अफसरों के प्रभारों में परिवर्तन किया गया है। एक ही विभाग में बरसों से जमे अन्य स्टाफ भी बदला जाएगा। –हरेंद्र नारायण, निगमायुक्त recent visitors 51

4 राशि वालों की किस्मत को शनि जयंती से लगेंगे पंख, शुरू होंगे अच्छे दिन-बढ़ेगा बैंक बैलेंस

इस बार शनि जयंती का पर्व 27 मई, मंगलवार को मनाया जाएगा। इस दिन कईं शुभ योग भी बनेंगे जिसके चलते 4 राशि वालों की किस्मत चमक सकती है। इन्हें धन लाभ के साथ दूसरे फायदे भी होंगे। शनि जयंती 2025 पर किसका होगा भाग्योदय?  धर्म ग्रंथों के अनुसार, हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या को शनि जयंती का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 27 मई, मंगलवार को मनाया जाएगा। इस दिन सुकर्मा नाम का शुभ योग दिन भर रहेगा। साथ ही इस दिन ज्येष्ठ मास का तीसरा मंगल भी रहेगा, जिसके चलते इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है। इस दिन से 4 राशि वालों की किस्मत चमक सकती है और अच्छे दिन भी शुरू होंगे। आगे जानिए कौन-सी हैं ये 4 राशियां… वृषभ राशिफल शनि जयंती 2025 इस राशि के स्वामी शुक्र हैं, जो शनि के मित्र हैं। इस राशि के लोगों के जीवन में अचानक खुशियों का आगमन होगा। जिस काम के लिए लंबे समय से इंतजार था वो हो सकता है। पहले किए गए इन्वेस्टमेंट का लाभ भी इस समय मिल सकता है। लव लाइफ से जुड़े मामलों में सफलता मिलेगी। बैंक बैलेंस में अचानक वृद्धि हो सकती है। कन्या राशिफल शनि जयंती 2025 इस राशि के स्वामी बुध हैं। ये भी शनि के मित्र हैं। इस राशि वालों पर शनि की कृपा बनी रहती है। शनि जयंती से इस राशि के लोगों के अच्छे दिन शुरू हो सकते हैं। नौकरी-बिजनेस में लाभ की स्थिति बनेगी। पुश्तैनी संपत्ति से धन लाभ संभव है। राजनीति से जुड़े लोगों को बड़ा पद मिल सकता है। संतान से सुख मिलेगा। मकर राशिफल शनि जयंती 2025 इस राशि के स्वामी स्वयं शनिदेव हैं। कुछ दिनों पहले ही मकर राशि पर से शनि की साढ़ेसाती खत्म हुई है जिसके चलते इस राशि के लोगों की लाइफ बहुत ही खुशहाल रहेगी। प्रॉपर्टी से धन लाभ होगा। नया काम शुरू करने के लिए समय बहुत ही शुभ है। परिवार में कोई शुभ प्रसंग जैसे विवाह, सगाई आदि हो सकती है। सेहत से जुड़ी परेशानी दूर होगी। कुंभ राशिफल शनि जयंती 2025 इस राशि के स्वामी भी चंद्रदेव हैं। इस राशि पर अभी शनि की साढ़ेसाती का अंतिम चरण चल रहा है जो शुभ फल देने वाला है। स्टूडेंट्स के लिए समय अनुकूल फल देने वाला रहेगा। अविवाहितों का विवाह तय हो सकता है। बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। अतिरिक्त आय होने के योग भी बन रहे हैं। शेयर बाजार से जुड़े लोगों को लाभ होगा। recent visitors 82

ग्वालियर से भोपाल के बीच यात्रा करने वाले के लिए अच्छी खबर, अब दिन में भोपाल आएंगे शाम को वापस ग्वालियर लौट सकेंगे, जाने कैसे

भोपाल ग्वालियर से भोपाल के बीच यात्रा करने वाले लोगों के लिए अच्छी खबर है. अब वो जिस दिन भोपाल आएंगे, उसी दिन वापस ग्वालियर भी लौट सकेंगे. रेलवे प्रशासन ने यह निर्णय भोपाल-ग्वालियर के बीच यात्रियों के दबाव को कम करने और लंबे समय से की जा रही मांग के बाद लिया है. अब सप्ताह में प्रतिदिन ट्रेन की सुविधा मिलने से ग्वालियर और भोपाल के बीच आवागमन और भी सुगम होगा. इसका सबसे अधिक फायदा प्रतिदिन अप डाउन करने वालों को होगा. अब प्रतिदिन मिलेगी भोपाल इंटरसिटी की सुविधा मंडल रेल प्रबंधक देवाशीष त्रिपाठी ने बताया कि "भोपाल मंडल द्वारा यात्रियों की सुविधा और मांग को ध्यान में रखते हुए ट्रेन सेवाओं में लगातार सुधार किया जा रहा है. इसी क्रम में रेल प्रशासन द्वारा एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए ट्रेन संख्या 12197/12198 ग्वालियर-भोपाल-ग्वालियर एक्सप्रेस (भोपाल इंटरसिटी) की सेवा को 5 दिन से बढ़ाकर प्रतिदिन कर दिया गया है." बुधवार और रविवार को नहीं चलती थी ट्रेन वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ कटारिया ने बताया कि "यह गाड़ी अभी तक सप्ताह में 5 दिन (बुधवार और रविवार को छोड़कर) संचालित होती थी. अब यह गाड़ी दिनांक 26 मई 2025 से ग्वालियर और भोपाल दोनों दिशाओं से प्रतिदिन चलाई जाएगी. इस निर्णय से न केवल यात्रियों को अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे, बल्कि इन दोनों शहरों के बीच आवागमन और अधिक सुगम होगा." इन स्टेशनों पर होगा भोपाल इंटरसिटी का स्टाप भोपाल इंटरसिटी दोनों दिशाओ में ग्वालियर जंक्शन, मोहना, शिवपुरी, कोलारस, बदरवास, गुना, शाढोरा गांव, अशोकनगर, पिपराइगांव, मुंगावली, बीना जंक्शन, गंज बासौदा, विदिशा, भोपाल जंक्शन पर ठहराव लेती है. इसमें कोई परिवर्तन नहीं किया गया है. अभी यह ट्रेन (12198) ग्वालियर जंक्शन से सुबह 6:20 बजे चलती है और दोपहर 2:35 बजे भोपाल जंक्शन पहुंचती है. भोपाल से ग्वालियर जाने वाली इंटरसिटी ट्रेन 12197, भोपाल जंक्शन से दोपहर 3:15 से चलती है और ग्वालियर जंक्शन पर देर रात 11:58 बजे पहुंचती है. सिंधिया ने की थी मांग, रेलवे ने किया खंडन बता दें कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शिवपुरी-ग्वालियर-भोपाल सुपरफास्ट एक्सप्रेस को सातों दिन चलाने की मांग थी. जिसके बाद रेलवे प्रशासन ने यह ट्रेन प्रतिदिन चलाने का निर्णय लिया है. इसको लेकर सिंधिया के कार्यालय से 22 मई को प्रेस नोट भी जारी किया गया था. हालांकि 23 मई को रेलवे ने अधिकारिक प्रेस नोट जारी कर बताया कि भोपाल रेल मंडल के यात्रियों की सुविधा और मांग को देखते हुए भोपाल -ग्वालियर इंटरसिटी को प्रतिदिन चलाने का निर्णय लिया गया है. recent visitors 54

बस एक फूंक मारो और जान लो अपना शुगर लेवल, बालाघाट के प्रोफेसर और छात्रों ने निकाली ऐसी अनोखी तरकीब

बालाघाट शुगर के मरीजों के लिए अच्छी खबर. फूंक मारकर पता कीजिए शरीर का शुगर लेवल. अब बार बार सुई चुभाने और खून निकालने की जरूरत नहीं है, बस एक फूंक मारो और जान लो अपना शुगर लेवल. बालाघाट के प्रोफेसर और छात्रों ने निकाली ऐसी अनोखी तरकीब. सेकंडों में पता करें अपना सुगर लेवल बालाघाट के शासकीय जटाशंकर त्रिवेदी कॉलेज के प्रोफेसर और छात्रों ने मिलकर एक ऐसी मशीन बनाई है, जिससे आप उस मशीन में फूंक मारकर सेकंडों में पता कर सकेंगे कि आपके शरीर का शुगर लेवल कितना है. अब आपको बार बार डॉक्टर के पास जाने के झंझट से छुटकारा मिल जायेगा साथ ही आप अपने शरीर का ध्यान भी रख सकेंगे. प्रोफेसर और कॉलेज के छात्रों के द्वारा बनाई गई इस मशीन की तारीफ अब हर तरफ हो रही है. भोपाल में आयोजित सृजन कार्यक्रम में बालाघाट के इस प्रोजेक्ट ने पहला स्थान हासिल किया है, जबकि इस कार्यक्रम में प्रदेश भर से 150 प्रोजेक्ट चयनित हुए थे. बालाघाट के शुगर ब्रीथ एसीटोन 3.0 प्रोजेक्ट को पहला स्थान बता दें कि भोपाल में आयोजित सृजन कार्यक्रम के लिए पूरे प्रदेश से 150 प्रोजेक्ट चयन किये गये थे, जिसमें इस शुगर ब्रीथ एसीटोन 3.0 नाम के प्रोजेक्ट का भी चयन हुआ था. बालाघाट के इस शुगर ब्रीथ एसीटोन 3.0 नाम के प्रोजेक्ट को पहला स्थान मिला. शुगर ब्रीथ एसीटोन 3.0 मशीन क्या है? यह एक ऐसी डिवाइस है, जिसमें बिना सुई चुभाए यानी शरीर से बिना खून निकाले ही शुगर लेवल का पता लगाया जा सकता है. इस डिवाइस में सिर्फ फूंक मारना होता है. इसके बाद ये मशीन चंद सेकंड में ही आपका शुगर लेवल बता देती है. इसमें एकदम इग्जैक्ट शुगर लेवल की मात्रा तो नहीं पता चलती, लेकिन ये तीन तरह से शुगर की रीडिंग दिखाती है, इसमें 'लो' का मतलब शुगर लेवल कम है. वहीं, 'मॉडरेट' यानी शुगर लेवल सामान्य है, जबकि मशीन में जब 'हाई' दिखाता है, तो शुगर लेवल ज्यादा है, यानी कि डायबिटीज होने की आशंका है. एसिटोन और ग्लूकोज के संबंध का अध्ययन गौरतलब हो कि शासकीय जटाशंकर त्रिवेदी कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. दुर्गेश अगासे इस प्रोजेक्ट पर पिछले 8 सालों से काम कर रहे थे तब कहीं जाकर यह डिवाइस बन पाई है. प्रोफेसर डॉ. दुर्गेश अगासे ने बताया कि "2017 में उन्होंने इस प्रोजेक्ट को बनाना शुरू किया था. शुगर के मरीजों में कीटोजेनिक मेटाबॉलिज्म शुरू हो जाता है. उनकी बॉडी के अंदर कीटोन का निर्माण होने लगता है. फिर कीटोन में उपस्थित एसिटोन उनकी सांस में आने लगता है. ऐसे में एसिटोन और ग्लूकोज के संबंध का अध्ययन किया गया. फिर इस आधार पर इस मशीन का आविष्कार हो पाया है. इसका पेटेंट साल 2023 में किया गया. इस मॉडल में इंजीनियरिंग की अहम भूमिका रही, क्योंकि एसिटोन और ग्लूकोज के संबंध का अध्ययन और इसके अनुपात को स्पष्ट करने के लिए कोडिंग की गई. दोनों के संबंध को स्थापित करने के लिए फिर प्रोग्रामिंग की गई. ऐसे में इंजीनियरिंग की मदद से यह प्रोजेक्ट पूरा हो पाया." ब्रेथ एनलाइजर डिवाइस, एसिटोन पर करती है काम जनरल फिजिशियन डॉ. वेदप्रकाश लिल्हारे ने चर्चा में बताया कि "प्रोफेसर और बच्चों के द्वारा यह एक अच्छा नवाचार है, जिस तरह से खून निकाल कर शुगर की जांच होती थी उससे छुटकारा मिलेगा. वहीं, डॉक्टर ने बताया कि प्रोफेसर अगासे का जो ब्रेथ एनलाइजर है वो एसिटोन पर काम कर रहा है और एसिटोन हर शुगर के मरीजों में नहीं बनता है. मैं उनसे लगातार चर्चा में हूं, वे और क्या अपडेट कर रहे हैं इसकी चर्चा भी लगातार हो रही है." recent visitors 52

यूनुस और सेना प्रमुख के बीच जुबानी जंग से बांग्लादेश का सियासी माहौल गर्म, यूनुस सत्ता में बने रहने की कोशिश में बनाई रणनीति

ढाका बांग्लादेश एक बार फिर नेतृत्व संकट से घिर गया है. ढाका की राजनीति संवेदनशील मोड़ पर आ खड़ी हुई है. देश के अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार और नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. मुहम्मद यूनुस अब खुद को बढ़ते दबावों के बीच घिरा पा रहे हैं. सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज़-ज़मान की दो टूक चेतावनी के बाद यूनुस इस्तीफा देने पर विचार कर रहे हैं और प्लान B की तैयारी में जुट गए हैं. कहा जा रहा है कि यूनुस अब सत्ता में बने रहने के लिए सड़कों पर ताकत दिखाने जा रहे हैं. वहीं, राजनीतिक गलियारों और सैन्य हलकों में उनकी मंशा को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं. पिछले साल बांग्लादेश में जनविरोध के बाद सत्ता में उलटफेर हुआ था और 84 साल के यूनुस के हाथों में सत्ता सौंपी गई थी. बांग्‍लादेश के आर्मी चीफ जनरल वकर-उज-जमान ने रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में कहा था कि मुहम्मद यूनुस अगले डेढ़ साल तक सत्ता में रहेंगे. इसी बीच चुनाव कराए जाएंगे और नई सरकार का गठन होगा.उन्होंने आगे कहा था, हम जल्द ही देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया शुरू करना चाहते हैं. बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने आर्मी को मजिस्ट्रेट की पावर सौंपी है, जिसके बाद अंदेशा लगाया जा रहा था कि शायद अब सेना के हाथ में देश की सत्ता होगी और दोनों मिलकर सरकार चलाएंगे. सेना प्रमुख ने साफ किया था कि जब तक अंतरिम सरकार रहेगी, तब तक सेना उसके पीछ रहकर काम करेगी. यह तब तक चलेगा, जब तक कि यूनुस देश में चल रहे सुधारों को पूरा नहीं कर लेते हैं. आर्मी चीफ ने यह भी आश्वासन दिया था कि वे अंतरिम सरकार के साथ हमेशा खड़े रहेंगे, कैसी भी परिस्थिति हो. अब विवाद क्यों भड़का… दरअसल, सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज़-ज़मान ने यूनुस के सुधार एजेंडे को खारिज कर दिया है और दिसंबर 2025 तक चुनाव कराने का आह्वान किया. जनरल वाकर-उज़-ज़मान ने पहली बार सार्वजनिक तौर पर कहा कि अंतरिम सरकार का काम सिर्फ चुनाव कराना है, नीतिगत निर्णय लेना नहीं. सैन्य मामलों में हस्तक्षेप, आंतरिक सुरक्षा में एकपक्षीय निर्णय और बाहरी शक्तियों के दबाव को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. सेना को हर रणनीतिक और सुरक्षा नीति में विश्वसनीय साझेदार की तरह शामिल किया जाना चाहिए. यह बयान यूनुस की सत्ता को खुली चुनौती के रूप में देखा गया. ज़मान ने इस बात पर भी जोर दिया कि अंतरिम सरकार कोई भी ऐसा महत्वपूर्ण निर्णय ना ले, जिससे बांग्लादेश की स्थिरता और संप्रभुता पर असर पड़े. ऐसे मुद्दों को भविष्य में निर्वाचित सरकार पर छोड़ दिया जाए. बुधवार को सेना प्रमुख ने स्पष्ट किया कि अब और देरी नहीं चलेगी. सेना को नजरअंदाज कर रणनीतिक फैसले नहीं लिए जा सकते हैं. सेना प्रमुख ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि वे सैन्य अधिग्रहण के खिलाफ हैं. वे यूनुस से बस यही उम्मीद करते हैं कि वे स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी चुनाव करवाएं ताकि सत्ता का सुचारू और शांतिपूर्ण हस्तांतरण निर्वाचित सरकार को हो सके, जिसके बाद सेना वापस अपने बैरक में जा सकती है. बुधवार को उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि सेना अब भीड़तंत्र और अराजकता, अंतरिम सरकार द्वारा सैन्य मामलों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप और बांग्लादेश की संप्रभुता और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण निर्णयों में सेना को दरकिनार करने के किसी भी प्रयास को बर्दाश्त नहीं करेगी. उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी सुरक्षा और रणनीतिक मामलों में सैन्य नेतृत्व से सलाह ली जानी चाहिए और पीठ पीछे कुछ भी नहीं किया जाना चाहिए. यूनुस आर्मी चीफ के खिलाफ ही रच रहे साजिश, भारत के दुश्मनों के साथ सीक्रेट मीट…  बांग्लादेश में सियासी माहौल फिर से गर्म हो गया है. यूनुस और सेना प्रमुख के बीच जुबानी जंग चल रही है. ऐसे में यूनुस सेना प्रमुख को हटाना चाहते हैं. अंतरिम सरकार के प्रमुख और नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस ने भारत विरोधी दलों की एक अहम बैठक बुलाई है, लेकिन इस बैठक में क्या बात होगी, यह अभी रहस्य बना हुआ है. ढाका की सड़कों पर चर्चा है कि यूनुस अगले पांच साल तक सत्ता में बने रहना चाहते हैं. इसके लिए उनके समर्थक ‘मार्च फॉर यूनुस’ नाम से एक विशाल जनसभा की तैयारी कर रहे हैं. दूसरी तरफ, सेना प्रमुख की सख्त चेतावनी और राजनीतिक दलों की नाराजगी ने इस ड्रामे को और रोचक बना दिया है. मोहम्मद यूनुस अब सीक्रेट मीटिंग कर रहे हैं. यूनुस ने  बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी के नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें बुलाई हैं. बीएनपी के एक नेता ने बताया कि यूनुस के दफ्तर ने उन्हें इस बैठक के लिए आमंत्रित किया है. लेकिन, इन बैठकों का असली मकसद क्या है, यह कोई नहीं जानता. हालांकि उनके इस तरह के मीटिंग करने से माना जा रहा है मोहम्मद यूनुस सत्ता छोड़ने के मूड में नहीं हैं और वह सेना प्रमुख को ही विलेन बनाकर हटाना चाहते हैं. गुरुवार को यूनुस ने NCP नेता नाहिद इस्लाम से मुलाकत की थी. माना जा रहा है कि दोनों मिलकर सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज-जमान को हटाने की रणनीति बना रहे हैं. नाहिद वही भारत विरोधी नेता है, जिसने पिछले साल शेख हसीना की सरकार के खिलाफ छात्र आंदोलन को लीड किया था. नाहिद और यूनुस की मुलाकात के बाद ये अटकलें और तेज हो गई हैं. यूनुस पांच साल संभालेंगे सत्ता? यूनुस इस पूरी लड़ाई में अपनी चालें चल रहे हैं. एक तरह वह इस्तीफा देने की बात कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर अपने समर्थकें के जरिए प्रदर्शन करवा रहे हैं. यूनुस के समर्थकों ने ढाका के मशहूर शाहबाग चौराहे पर शनिवार को ‘मार्च फॉर यूनुस’ नाम से एक बड़ी रैली की घोषणा की है. शहर में पोस्टर लगाए जा रहे हैं और सोशल मीडिया पर ‘पांच साल तक यूनुस को सत्ता में रखो’ और ‘पहले सुधार, फिर चुनाव’ जैसे नारे ट्रेंड कर रहे हैं. समर्थकों का कहना है कि यूनुस को देश में सुधार लाने के लिए लंबा समय चाहिए. लेकिन इस रैली की टाइमिंग ने सबके कान खड़े कर दिए हैं. आर्मी चीफ की चेतावनी सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज-जमान ने साफ कहा है कि बिना चुनाव के सत्ता में बने रहना गैरकानूनी है. सेना ने यूनुस सरकार को दिसंबर … Read more