सिंध में नहर परियोजना का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों ने असीफा भुट्टो जरदारी के काफिले पर किया हमला

कराची पाकिस्तान में कराची से सिंध के नवाबशाह जा रहीं नेशनल असेंबली की मेंबर और पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की बेटी असीफा भुट्टो जरदारी के काफिले को प्रदर्शनकारियों ने बीच सड़क पर घेर लिया. वे जमशोरो टोल प्लाजा से गुजर रही थीं, जब नहर परियोजना का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों ने कुछ समय के लिए उन्हें रोक लिया, और लाठी-डंडों से काफिले पर हमले करने की भी कोशिश की. इससे हाईवे पर तनावपूर्ण माहौल पैदा हो गया. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे विवादित नहर परियोजना और कॉर्पोरेट फार्मिंग के खिलाफ विरोध जता रहे थे. उन्होंने इस परियोजना को किसानों और आम जनता के हितों के खिलाफ बताया. पुलिस के मुताबिक, इस घटना के दौरान सुरक्षा बल और फोर्स ने तुरंत कार्रवाई करते हुए असीफा जरदारी का वाहन सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और काफिले को सुरक्षित निकाला.   एक मिनट से भी कम समय के लिए रोका गया काफिला! लोकल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिंध स्थित जमशोरो के SSP जफर सिद्दीक ने बताया कि काफिला सिर्फ एक मिनट से भी कम समय के लिए रोका गया और किसी तरह का कोई नुकसान नहीं हुआ. उन्होंने कहा, "कहीं भी कानून व्यवस्था भंग होती है, तो पुलिस उचित कार्रवाई करती है." कुछ संदिग्ध लोगों को किया गया गिरफ्तार! एसएसपी ने यह भी जानकारी दी कि इस मामले में FIR दर्ज कर ली गई है और कुछ संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है. उन्होंने चेतावनी दी कि जो कोई भी सार्वजनिक शांति भंग करने की कोशिश करेगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सुरक्षा बल मामलों को गंभीरता से लेते हैं और सामाजिक शांति बनाए रखने के लिए तत्पर रहते हैं.   recent visitors 62

राजधानी में मिला कोरोना का पहला मरीज, MMI नारायणा हॉस्पिटल में भर्ती

रायपुर  देश के कई इलाकों में कोविड-19 के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिसको लेकर सरकारों ने चिंता जताई है और नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। इसी बीच राजधानी रायपुर में कोरोना संक्रमित मरीज़ चिन्हित किया गया है, जिससे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। कोरोना कंट्रोल एवं डिमांड सेंटर के राज्य नोडल अधिकारी डॉ. खेमराज सोनवानी ने इस मामले की पुष्टि की है। बता दें कि संक्रमित मरीज़ को MMI नारायणा हॉस्पिटल में भर्ती किया गया है, जहाँ उसका इलाज कोरोना प्रोटोकॉल के तहत किया जा रहा है। मरीज को सिंगल वार्ड में रखा गया है और इलाज की अलग से विशेष व्यवस्था की गई है। बताया जा रहा है कि लक्ष्मीनगर, पचपेड़ी नाका निवासी यह व्यक्ति सर्दी-खाँसी के रूटीन चेकअप के लिए अस्पताल पहुँचा था। लक्षणों के आधार पर डॉक्टरों को कोरोना की आशंका हुई, जिसके बाद उसका सैंपल लिया गया। रिपोर्ट पॉज़िटिव आने के बाद तुरंत उसे आइसोलेट कर इलाज शुरू कर दिया गया। अस्पताल प्रबंधन ने भी मरीज के संक्रमित होने की पुष्टि की है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से मरीज के परिजनों का सैंपल लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही, हाल के दिनों में मरीज़ के संपर्क में आए लोगों की ट्रैकिंग और स्क्रीनिंग की जा रही है। गौर करने वाली बात यह है कि मरीज की किसी अन्य राज्य की यात्रा का कोई इतिहास नहीं है, जिससे यह संदेह गहरा रहा है कि संक्रमण स्थानीय स्तर पर फैला हो सकता है। राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे सावधानी बरतें, भीड़-भाड़ से बचें और यदि कोई लक्षण दिखें तो तुरंत नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाँच कराएँ। recent visitors 65

नीति आयोग की बैठक में पीएम मोदी ने सीएम साय से कहा – छत्तीसगढ़ की बात अभी बाकी है

रायपुर   नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक के दौरान एक आत्मीय क्षण सामने आया, जिसने सबका ध्यान खींचा। लंच ब्रेक के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का हाथ थामते हुए मुस्कराकर कहा कि  "छत्तीसगढ़ की बात अभी बाकी है।" इस एक वाक्य में प्रधानमंत्री का स्नेह, विश्वास और राज्य के प्रति विशेष रुचि झलक रही थी। उस क्षण, आसपास उपस्थित आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडू और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री श्री एम.के. स्टालिन भी मुस्कराते हुए इस संवाद के साक्षी बने। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचलों में हो रहे सकारात्मक बदलाव, औद्योगिक निवेश, और ‘आत्मनिर्भर बस्तर’ की दिशा में राज्य सरकार द्वारा उठाए गए ठोस कदमों की सराहना की। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया कि कैसे बस्तर अब संघर्ष नहीं, संभावना का प्रतीक बन रहा है – जहाँ कभी बंदूकें चलती थीं, वहाँ अब मशीनें, लैपटॉप और स्टार्टअप की चर्चा हो रही है। नवा रायपुर में देश की पहली सेमीकंडक्टर यूनिट और एआई डेटा सेंटर की स्थापना से लेकर लिथियम ब्लॉक की नीलामी तक – छत्तीसगढ़ अब संसाधनों से परिपूर्ण राज्य बनने की ओर अग्रसर है और देश के विकास में छत्तीसगढ़ की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका है। यह क्षण किसी औपचारिक संवाद का नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के द्वारा छत्तीसगढ़ के विकास के लिए प्रतिबद्ध मुख्यमंत्री श्री साय के प्रयासों की सहज स्वीकृति और सराहना का था। नीति आयोग की बैठक में जहां देशभर के राज्यों ने अपने विकास मॉडल प्रस्तुत किए, वहीं छत्तीसगढ़ की प्रस्तुति ने प्रधानमंत्री की विशेष रुचि और सराहना प्राप्त की। यह स्पष्ट संकेत है कि छत्तीसगढ़ अब केवल एक उभरता हुआ राज्य नहीं, बल्कि देश के समग्र विकास में एक निर्णायक भूमिका निभाने वाला राज्य बन चुका है। recent visitors 69

हाईकोर्ट ने पं. रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी के प्रभारी कुलपति की नियुक्ति को ठहराया अवैध

बिलासपुर हाईकोर्ट ने रायपुर स्थित पं. रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी के प्रभारी कुलपति की नियुक्ति अवैध ठहरा दिया है. मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुनाया, जिसमें लिखा है कि शैलेन्द्र पटेल प्रभारी कुलसचिव पद के लिए निर्धारित योग्यता को पूरा नहीं करते हैं, और इस पद पर उनकी नियुक्ति अवैध है. इस फैसले के साथ ही हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता प्रभारी कुलसचिव शैलेन्द्र पटेल की याचिका को खारिज कर दिया. वर्ष 2022 में जब शैलेन्द्र पटेल की प्रभारी कुलसचिव पद पर नियुक्ति को लेकर राहुल गिरी गोस्वामी ने आपत्ति दर्ज कराई थी, तब से यह मामला चल रहा था. शिकायतकर्ता ने पटेल की योग्यता और नियुक्ति प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाए थे. शिकायत के आधार पर एक FIR दर्ज की गई थी, जिसका उल्लेख हाईकोर्ट के आदेश में किया गया है. मामले की अंतिम सुनवाई 6 मार्च 2025 को हाई कोर्ट में हुई. सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. जिसे जारी किया गया है. राहुल गिरी गोस्वामी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि शैलेन्द्र पटेल की नियुक्ति नियमों के खिलाफ गैर-कानूनी ढंग से की गई. शिकायत के बाद दर्ज FIR दर्ज की गई थी. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में लिखा है कि याचिकाकर्ता प्रभारी कुलसचिव शैलेन्द्र पटेल कुलसचिव पद के लिए आवश्यक शैक्षणिक और प्रशासनिक योग्यता को पूरा नहीं करते. इसलिए उन्हें कुलसचिव पद पर नियुक्त नहीं किया जा सकता. recent visitors 54

नक्सल क्षेत्र में एक्सिस बैंक की शाखा खुलने पर वित्त मंत्री बोले – हां कभी बंदूकें बोलती थीं, अब वहां खुलेंगे भरोसे के खाते

रायपुर छत्तीसगढ़ के कोर नक्सल प्रभावित इलाकों में अब विकास की झलक दिखने लगी है. नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षा बलों के लगातार ऑपरेशन के चलते अब नक्सलवाद अंतिम सांसे ले रहा है. हाल ही में उत्तर बस्तर कांकेर के सुदूर क्षेत्र पानीडोबीर में एक्सिस बैंक ने अपनी एक नई शाखा की शुरुआत की है. इसे लेकर प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा- “जिस धरती पर कभी बंदूकें बोलती थीं, अब वहाँ भरोसे के खाते खुलेंगे”. वित्त मंत्री चौधरी ने आगे लिखा कि पानीडोबीर (पखांजूर, उत्तर बस्तर कांकेर) में एक्सिस बैंक की नई शाखा का उद्घाटन सिर्फ एक बैंक का खुलना नहीं ,यह उस विश्वास की जीत है जो हिंसा पर विकास को चुनता है. जब निजी बैंक नक्सल प्रभावित क्षेत्र में शाखाएं खोलने लगें, तो समझिए कि बदलाव ने जड़ें पकड़ ली हैं. यह शाखा नहीं, आत्मनिर्भरता की अलख है. recent visitors 57

सांसद प्रियंका चतुर्वेदी पाकिस्तान पर हमलावर रहीं, कहा-पाकिस्तान के घर में घुसकर आतंकी मॉडल को खत्म करेंगे

नई दिल्ली आतंकवाद को संरक्षण देने पर पाकिस्तान को शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अगर भारत में आतंकवाद फैलाने की कोशिश करेगा तो हम पाकिस्तान के घरों में घुसकर उसके आतंकी मॉडल को खत्म करेंगे। अपनी सेना पर हमें गर्व है जिन्होंने पाकिस्तान में 9 आतंकी ठिकानों को तबाह किया। भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद के नेतृत्व में विदेश जाने वाले सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में प्रियंका चतुर्वेदी भी शामिल हैं। शनिवार को मीडिया से बातचीत के दौरान सांसद पाकिस्तान पर हमलावर रहीं। उन्होंने कहा कि जिस तरह से पाकिस्तान ने लगातार भारत में अपने 'आतंकिस्तान' मॉडल को आगे बढ़ाया है और उस ढांचे के तहत आतंकी हमलों को अंजाम दिया है उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनका ये कृत्य केवल भारत तक ही सीमित नहीं है; यहां तक कि दुनिया भर में होने वाले आतंकी हमलों की जड़ें अक्सर पाकिस्तान से जुड़ी पाई जाती हैं, चाहे वह ओसामा बिन लादेन हो या हाफिज सईद। हमें दुनिया के सामने जाकर यह स्पष्ट करने की जरूरत है। भले ही हम विपक्ष में हैं, लेकिन आतंकवाद के प्रति हम एकजुट हैं और आतंक तो हमें कतई बर्दाश्त नहीं है। पाकिस्तान की आतंकी सोच की वजह से भारत को ऐसे पड़ोसी होने के दुष्परिणाम भुगतने पड़े हैं। अब समय आ गया है कि हम ग्लोबल अलायंस बनाएं और इसके जरिए आतंकवाद के प्रति अपनी जीरो टॉलरेंस की नीति को रेखांकित करे। जो भी देश आतंकी को पालता है उस देश को विश्व स्तर पर बेनकाब करने की जरूरत है। हम लोग इसी संदेश को लेकर विदेश जा रहे हैं। बीते 3 से 4 दशकों से हम पाकिस्तान पोषित आतंक को झेल रहे हैं। अब जागरूक होने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से पाकिस्तान बार-बार परमाणु की धमकी देता है और इसकी आड़ में आतंक फैला रहा है, पूरी दुनिया में उसका यह चेहरा भी बेनकाब होना चाहिए। नीति आयोग की बैठक पर उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की अध्यक्षता में इस बैठक में उम्मीद है कि देश के सामने जो चुनौतियां हैं उस पर विचार किया जाएगा। recent visitors 75

छत्तीसगढ़ में नगरी-सिहावा के आंदोलन का एक चक्र हुआ पूरा, नक्सलवाद से घिरे क्षेत्र में अहिंसा की मिसाल

रायपुर तिहत्तर साल बीत गए, पांच पीढ़ियां खप गईं, तब जाकर छत्तीसगढ़ में नगरी-सिहावा के आंदोलन का एक चक्र पूरा हुआ। दुष्यंत कुमार की पंक्तियां याद आती हैं – “पिछले सफर की न पूछो, टूटा हुआ एक रथ है, जो रुक गया था कहीं पर फिर साथ चलने लगा है।” नक्सलवाद के लाल गलियारे के बीच नगरी-सिहावा अहिंसा का एक टापू है। 1952 से अब तक यहां के आदिवासियों ने पीढ़ी दर पीढ़ी अपने भूमि अधिकारों के लिए निरंतर अहिंसक संघर्ष किया। जब नया छत्तीसगढ़ राज्य बन रहा था, तब लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहकर हजारों आदिवासी ने राजधानी रायपुर में डेरा डाले थे और देश की आज़ादी के बाद से चल रहे इस आंदोलन को गति दे रहे थे। डॉ. राममनोहर लोहिया सन् 1952 में छत्तीसगढ़ अंचल में धमतरी जिले के उमरादेहान गांव में आए थे। यहीं से उन्होंने जंगलों में बसे आदिवासियों के भूमि-अधिकार का मुद्दा उठाया था। आज भारत में आदिवासियों को आजीविका के लिए ज़मीन मिली है, वनग्रामों को राजस्व ग्राम जैसी सुविधाएं मिल रही हैं। इन सबके मूल में नगरी-सिहावा का ही आंदोलन है। इसी उमरादेहान गांव में आगामी 24 मई को डॉ. राममनोहर लोहिया की अर्ध-प्रतिमा का अनावरण होने जा रहा है। आदिवासियों ने एक-एक मुठ्ठी अनाज हर घर से लेकर प्रतिमा तैयार कराई है। लोहिया जी जब तक रहे, यानी 1967 तक, इस आंदोलन का नेतृत्व किया। 1977 के बाद इसकी बागडोर देश के सुप्रसिद्ध समाजवादी नेता रघु ठाकुर ने संभाली। उनका समूचा जीवन संघर्ष और आंदोलनों में बीता। आपातकाल में उन्नीस महीने जेल में रहे। अनेक संघर्षों के बाद सन् 1990 आते-आते नगरी-सिहावा के अठारह में से तेरह गांवों के आदिवासियों को ज़मीन का पट्टा मिल गया, पर पांच गांव फिर भी छूट गए। इससे पांच साल पहले प्रधानमंत्री राजीव गांधी यहां दुगली में आए थे, आदिवासियों की झोपड़ी के सामने चारपाई पर बैठे थे, पर आदिवासियों को उनके हक बिना पदयात्रा, प्रदर्शन व अनशन के नहीं मिले। रघु ठाकुर ने जाकर आदिवासियों के इस आंदोलन को तेज किया। उसी दुगली से रायपुर तक 120 किमी की पदयात्रा की जिसमें हजारों आदिवासी – आदमी, औरतें और बच्चे पैदल चले थे। इन आंदोलनों में पत्रकार मधुकर खेर, गोविंदलाल वोरा, सत्यनारायण शर्मा, नारवानी जी व रमेश वल्यानी का बड़ा सहयोग मिला। सरकार के मंत्रियों ने आकर आश्वासन देकर आंदोलन स्थगित कराया, पर वादा पूरा नहीं किया। रघु जी को फिर रायपुर आकर अंबेडकर चौक पर अनशन शुरू करना पड़ा। सांसद जॉर्ज फर्नांडीस और शरद यादव ने आकर गिरफ्तारियां दीं, मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा ने हस्तक्षेप किया, तब जाकर दोनों पक्ष में समझौते के कागज़ तैयार हुए। इसके तहत तय हुआ कि अठारह गांवों के कब्जे की ज़मीन की जांच कराई जाएगी और निर्धारित नियम के तहत पट्टे दिए जाएंगे। जिन पांच गांवों को उजाड़ा गया है, उन गांवों के लोगों की भी झोपड़ियों को दुरुस्त कराकर बसाया जाएगा, ज़मीन दी जाएगी। तेरह गांवों को तो पट्टा मिल गया, लेकिन यही पांच गांव को पट्टा मिलने में पच्चीस साल और लग गए। देश की जनता के सामने जब भी इस आंदोलन का इतिहास आएगा, सुखराम नागे, जुगलाल नागे, बिसाहूलाल साहू, रामू, बिसाहिन बाई, समरीनबाई, रामप्रसाद नेताम, गौड़ा राय, वंशी श्रीमाली, जालिम सिंह जैसे अनेक लोगों का संघर्ष सभी को प्रेरणा देगा। इस आंदोलन के संदर्भ में यह बताना भी जरूरी है कि कुछ लोग सत्ता में रहते हुए भी समय पर कुछ नहीं कर पाए, कुछ ने समय का लाभ उठाकर अपने वैचारिक समर्थकों को उपकृत किया, तो कुछ आदिवासियों को समाजवादी धारा से हटाकर अपनी-अपनी राजनीतिक ज़मीन पुख्ता करने का प्रयास किया। नगरी-सिहावा का तिहत्तर साल चला आंदोलन अभी थमा नहीं है। यह चिकित्सा और शिक्षा के मूल अधिकार की लड़ाई को आगे ले जाएगा। इस आंदोलन का कई कारणों से ऐतिहासिक महत्व है। नक्सली हिंसा से घिरे वनांचल में यह अहिंसा का टापू है। भारत का पहला वनग्राम सम्मेलन यहीं से शुरू हुआ। और, वन अधिकार कानून का जन्मदाता यही क्षेत्र है। यहां की महिलाओं की मुक्त भावना और संघर्ष के जज़्बे से शेष भारत प्रेरणा ले सकता है। recent visitors 52