पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई नीति आयोग की अहम बैठक, ममता, सिद्धारमैया और केरल सीएम ने बनाई दूरी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज दिल्ली के भारत मंडपम में नीति आयोग की 10वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक हुई। बैठक की थीम "विकसित राज्य से विकसित भारत @2047" रखी गई है। हालांकि इस अहम बैठक से कुछ बड़े राज्यों के मुख्यमंत्री नदारद रहे। बंगाल सीएम ममता बनर्जी, कर्नाटक सीएम सिद्धारमैया और केरल के मुख्यमंत्री विजयन ने बैठक से दूरी बनाकर रखी। 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य एएनआई के मुताबिक, बैठक में राज्यों को अपने-अपने संसाधनों और भूगोल के अनुसार दीर्घकालिक और समावेशी विकास की योजनाएं तैयार करने के लिए कहा गया है, ताकि 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाया जा सके। इसमें मानव विकास, आर्थिक वृद्धि, सतत आजीविका, तकनीक और सुशासन जैसे क्षेत्रों पर फोकस की बात की गई। केंद्र ने यह भी कहा है कि राज्यों को डेटा-आधारित कार्यप्रणाली, प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग यूनिट्स और ICT-सक्षम इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिये परिणाम आधारित बदलाव लाने होंगे। ममता, सिद्धारमैया और केरल सीएम ने बनाई दूरी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बैठक से दूरी बनाई। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने न तो दिल्ली का रुख किया और न ही कोई प्रतिनिधि भेजा। यह पहला मौका नहीं है जब ममता बनर्जी ने नीति आयोग की बैठक में भाग नहीं लिया हो। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया भी इस बैठक में शरीक नहीं हुए। हालांकि उनके करीबी सूत्रों ने स्पष्ट किया कि यह कोई बहिष्कार नहीं था बल्कि मुख्यमंत्री की पहले से तय मैसूरु यात्रा के चलते वे बैठक में शामिल नहीं हो सके। उन्होंने अपना वक्तव्य दिल्ली भिजवाया है, लेकिन यह साफ नहीं है कि बैठक में उनकी तरफ से कौन आएगा। केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी बैठक में शिरकत नहीं की। उन्होंने वित्त मंत्री के. एन. बालगोपाल को नामित किया, लेकिन सूत्रों के अनुसार चूंकि यह मुख्यमंत्रियों की बैठक है, इसलिए बालगोपाल की भागीदारी को लेकर असमंजस बना हुआ है। इन राज्यों के सीएम पहुंचे बैठक में पहुंचे मुख्यमंत्रियों में उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ, गुजरात के भूपेंद्र पटेल, उत्तराखंड के पुष्कर सिंह धामी, छत्तीसगढ़ के विष्णुदेव साय, मध्य प्रदेश के मोहन यादव, आंध्र प्रदेश के एन. चंद्रबाबू नायडू, तमिलनाडु के एम.के. स्टालिन, ओडिशा के मोहन चरण माझी, पंजाब के भगवंत मान, जम्मू-कश्मीर के उमर अब्दुल्ला, तेलंगाना के रेवंत रेड्डी, त्रिपुरा के माणिक साहा और हिमाचल प्रदेश के सुखविंदर सिंह सुक्खू शामिल हैं। हिमाचल के सीएम सुखविंदर सुक्खू ने बैठक से पहले मीडिया से कहा, “नीति आयोग राज्यों से जुड़े मसलों को देखता है। मेरा प्रमुख मुद्दा यह होगा कि हिमाचल प्रदेश में एनएचपीसी और एनटीपीसी की जो पावर परियोजनाएं कर्ज मुक्त हो चुकी हैं, उनसे उपभोक्ताओं से पास-थ्रू के जरिए जो 12% फ्री रॉयल्टी ली जाती है, उसे बढ़ाया जाए और परियोजनाएं लोगों को लौटाई जाएं। इसके लिए एक समय-सीमा भी तय की जानी चाहिए।”   recent visitors 56

राज्यपाल डेका ने कहा कि यह संस्थान न केवल शिक्षा का केंद्र है, बल्कि यह ज्ञान, सेवा और संस्कृति का संगम

 रायपुर विप्र पब्लिक स्कूल, रायपुर के नव-निर्मित भवन का लोकार्पण जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज के करकमलों से संपन्न हुआ। इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि केवल डिग्री प्राप्त करना ही शिक्षा नहीं है, बल्कि यह हमारे व्यक्तित्व को संवारने और समाज के प्रति जिम्मेदार बनाने की प्रक्रिया है। अपने उद्बोधन में राज्यपाल डेका ने विप्र शिक्षा समिति और विप्र कॉलेज के 30 वर्षों की शिक्षायात्रा को गौरवपूर्ण बताते हुए सभी पदाधिकारियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह संस्थान न केवल शिक्षा का केंद्र है, बल्कि यह ज्ञान, सेवा और संस्कृति का संगम है। राज्यपाल डेका ने कहा कि “आज जब पूरा विश्व डिजिटल क्रांति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब ऐसी शिक्षा की जरूरत है जो आधुनिकता के साथ-साथ हमें हमारी जड़ों और भारतीय जीवन मूल्यों से भी जोड़े रखे। राज्यपाल ने डेका कहा कि भवन कैसा है यह न देख हुए वहां कैसी शिक्षा मिल रही है यह देखा जाए। हमे ऐसी शिक्षा देना  है जो स्थानीय भाषाओं और सांस्कृतिक समझ के साथ-साथ विज्ञान, गणित और तकनीकी शिक्षा को समन्वित करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नव-निर्मित भवन आने वाले वर्षों में शिक्षा की गुणवत्ता का प्रतीक बनेगा। डेका ने कहा कि देश में गुरूकुल परंपरा को स्थापित करने में ब्राह्यण समाज का बहुत बड़ा योगदान है। ब्राह्यण समाज ने सदैव शिक्षा और नैतिकता तथा सामाजिक मार्गदर्शन को अपना कर्त्तव्य माना है। इस अवसर पर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज ने अपना आर्शीवचन दिया।  कार्यक्रम  में सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायकगण राजेश मूणत, पुरंदर मिश्रा, अनुज शर्मा, रायपुर की महापौर श्रीमती मीनल चौबे, पूर्व मंत्री रवींद्र चौबे ने भी अपना संबोधन दिया।   इस अवसर पर संतगण सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, अभिभावक, विद्यार्थी और विप्र समाज के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। recent visitors 46

भारत निर्वाचन आयोग ने देश में सुगम और समावेशी निर्वाचन के लिए पिछले तीन महीनों में 18 नए नवाचार प्रारंभ किए

एमसीबी भारत निर्वाचन आयोग ने देश में सुगम और समावेशी निर्वाचन के लिए पिछले तीन महीनों में 18 नए नवाचार प्रारंभ किए हैं। इनमें सुविधाजनक मतदान से लेकर राजनीतिक दलों की सहभागिता बढ़ाने, प्रक्रियागत सुधार से लेकर निर्वाचन कार्यों में लगे अमलों की क्षमता बढ़ाने, सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग से निर्वाचन की पूरी प्रक्रिया को सुगम एवं पारदर्शी बनाने से लेकर ईसीआई मुख्यालय में ई-ऑफिस सिस्टम लागू करने जैसे कई प्रभावी और अभिनव कदम शामिल हैं। भारत निर्वाचन आयोग ने नई पहल करते हुए एक मतदान केंद्र पर अधिकतम 1200 मतदाताओं की सीमा निर्धारित की है। ऊंची इमारतों एवं कालोनियों में अतिरिक्त मतदान केंद्र स्थापित करने का भी निर्णय लिया गया है। मतदाता सूची के अद्यतनीकरण हेतु मृत्यु पंजीकरण का डेटा रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (RGI) डेटाबेस से सीधे प्राप्त किया जाएगा और सत्यापन के बाद अद्यतनीकरण किया जाएगा। आयोग ने मतदाता सूचना पर्चियों को और अधिक उपयोगकर्ता अनुकूल बनाने का भी निर्णय लिया है। अब इसमें मतदाता का क्रमांक और भाग संख्या अधिक स्पष्टता के साथ प्रदर्शित किए जाएंगे। भारत निर्वाचन आयोग निवार्चन की संपूर्ण प्रक्रिया में हर स्तर पर राजनीतिक दलों की सहभागिता बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रहा है। इसके लिए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी स्तर पर राजनीतिक दलों के साथ देशभर में 4719 बैठकें आयोजित की गई हैं। इन बैठक में राजनीतिक दलों के 28 हजार से अधिक प्रतिनिधियों ने भागीदारी दी है। सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को मिलाकर सीईओ स्तर पर 40, डीईओ स्तर पर 800 तथा ईआरओ स्तर पर राजनीतिक दलों के साथ 3879 बैठकें आयोजित की गई हैं। इन बैठक में राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर के प्रमुख दलों आम आदमी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया-मार्क्सवादी, एनपीपी की मौजूदगी रही है। राजनीतिक दलों के साथ अलग-अलग स्तरों पर बैठकों के साथ ही भारत निर्वाचन आयोग द्वारा राजनीतिक दलों के बूथ स्तरीय एजेंटों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। भारत निर्वाचन आयोग प्रक्रियात्मक सुधारों (Procedural Reforms) की दिशा में भी सक्रियता से काम कर रही है। आयोग द्वारा निर्वाचन प्रक्रिया के विभिन्न स्टेकहोल्डर्स की सुविधा के लिए नया एकीकृत डैशबोर्ड ईसीआईनेट (ECINET) शुरू किया गया है। इसमें सभी हितधारकों के लिए एक ही स्थान पर सभी सेवाएं उपलब्ध हैं। ईसीआई के 40 से अधिक एप्स एक ही प्लेटफार्म पर मौजूद हैं। इसके साथ ही डुप्लीकेट इपिक (EPIC) नंबर की समस्या के समाधान के लिए ईसीआई द्वारा अब विशिष्ट इपिक नंबर की नई प्रणाली लागू की गई है। भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची तैयार करने और निर्वाचन कराने की पूरी प्रक्रिया में 28 हितधारकों की पहचान की है। इनमें मतदाता, निर्वाचन अधिकारी, राजनीतिक दल, उम्मीदवार एवं लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950, 1951 निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम 1960 और निर्वाचन संचालन नियम 1961 और भारत निर्वाचन आयोग द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों पर आधारित अन्य शामिल हैं। इन सभी हितधारकों के लिए अधिनियमों, नियमों और आयोग के निर्देशों के आधार पर प्रशिक्षण प्रस्तुतियाँ तैयार की जा रही हैं। आयोग ने निर्वाचन कार्मिकों (Election Staff) के सशक्तिकरण के लिए भी नए कदम उठाए हैं। बीएलओ को मानक फोटो पहचान पत्र (Standard Photo ID Card) दिए जाने के साथ ही नई दिल्ली स्थित आईआईआईडीईएम (IIIDEM) में लगातार क्षमता निर्माण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इसमें अब तक 3000 से अधिक बूथ स्तर पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। अगले कुछ वर्षों में एक लाख से अधिक बीएलओ पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालयों के एसएमएनओ (SMNOs) और एमएनओ (MNOs) के लिए ओरिएंटेशन प्रोग्राम भी आयोजित किए गए हैं। निर्वाचन में सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण पहलू के मद्देनजर बिहार के पुलिस अधिकारियों को भी आईआईआईडीईएम (IIIDEM) में प्रशिक्षण दिया गया है। नई दिल्ली स्थित भारत निर्वाचन आयोग के मुख्यालय में भी कार्यों में बेहतरी और कसावट के लिए कई सुधार जारी हैं। बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने के साथ ही वहां ई-ऑफिस का कार्यान्वयन शुरू हो चुका है। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ बेहतर समन्वय के लिए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों के साथ आयोग नियमित बैठकें भी कर रहा है। recent visitors 49

विराट कोहली दुनिया के एकमात्र बल्लेबाज हैं, जिन्होंने 800 चौके एक टीम के लिए टी20 क्रिकेट में जड़े

नई दिल्ली विराट कोहली का बल्ला IPL 2025 में जमकर हल्ला बोल रहा है। वे लगातार ऑरेंज कैप की रेस में बने हुए हैं और इसी दौरान एक वर्ल्ड रिकॉर्ड भी विराट कोहली ने बना लिया है। वे दुनिया के पहले ऐसे बल्लेबाज बन गए हैं, जिन्होंने टी20 क्रिकेट में एक टीम के लिए 800 चौके जड़ दिए हैं। दुनिया का अन्य कोई बल्लेबाज एक टीम के लिए टी20 क्रिकेट में 700 चौके भी नहीं जड़ पाया है। विराट कोहली ने ये कमाल रॉयल चैलेंजर्स बेंगुलरू यानी आरसीबी के लिए किया है। दाएं हाथ के बल्लेबाज विराट कोहली ने शुक्रवार 23 मई को लखनऊ को भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी इकाना क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए मैच में आरसीबी के लिए 800वां चौका जड़ा। वे सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ मुकाबला खेल रहे थे। विराट कोहली ने इसी दौरान एक नए कीर्तिमान को अपने नाम किया। वे अब दुनिया के एकमात्र बल्लेबाज हैं, जिन्होंने 800 चौके एक टीम के लिए टी20 क्रिकेट में जड़े हैं। वे आईपीएल और चैंपियंस लीग टी20 को मिलाकर आरसीबी के लिए 800 चौके जड़ चुके हैं। लिस्ट में दूसरा नाम इंग्लैंड के जेम्स विंस का है, जिन्होंने हैंपशायर के लिए 694 चौके जड़े हैं। लिस्ट में तीसरे नंबर पर एलेक्स हेल्स हैं। वे भी इंग्लैंड के हैं। उन्होंने अपनी डोमेस्टिक टीम नॉटिंघमशायर के लिए 563 चौके टी20 फॉर्मेट में जड़े हैं। इसके अलावा रोहित शर्मा का नाम भी इस सूची में शामिल है। वे मुंबई इंडियंस के लिए अब तक 550 चौके जड़ चुके हैं। वे लिस्ट में चौथे नंबर पर हैं। पांचवें नंबर पर ल्यूक राइट का नाम आता है, जिन्होंने ससेक्स के लिए 529 चौके टी20 क्रिकेट में जड़े हैं। टी20 क्रिकेट में एक टीम के लिए सबसे ज्यादा चौके: 800 – विराट कोहली, आरसीबी 694 – जेम्स विंस, हैम्पशायर 563 – एलेक्स हेल्स, नॉटिंघमशायर 550 – रोहित शर्मा, एमआई 529 – ल्यूक राइट, ससेक्स   recent visitors 68

नई-नवेली दुल्हन के साथ उसके पति ने बिना बताए कोल्डड्रिंक में बीयर और ठंडई में भांग मिलाकर पिला दी, मामला पंहुचा थाने

लखनऊ शादी को लेकर अक्सर लोग सपनों और उम्मीदों से भरे होते हैं, लेकिन यूपी के मिर्जापुर से आई यह घटना रिश्तों पर विश्वास को झकझोर कर रख देती है। यहां एक नई-नवेली दुल्हन के साथ उसके पति ने सुहागरात को ऐसा धोखा किया, जिसने रिश्ते की नींव को पांच दिन में ही तोड़ दिया। दूल्हे ने अपनी पत्नी को बिना बताए कोल्डड्रिंक में बीयर और ठंडई में भांग मिलाकर पिला दी, जिससे मामला थाने तक जा पहुंचा। क्या है पूरा मामला? यह मामला मिर्जापुर के कछवां थाना क्षेत्र का है, जहां 15 मई को वाराणसी के कपसेठी थाना क्षेत्र की एक युवती की शादी धूमधाम से हुई थी। लेकिन शादी की पहली ही रात को दूल्हे ने अपनी पत्नी के साथ विश्वासघात कर डाला। दुल्हन को यह नहीं बताया गया कि उसे जो पेय दिया जा रहा है, उसमें नशा मिला हुआ है। रात के बाद जब होश में आई तो उसे अजीब तरह की हालत का अनुभव हुआ और बाद में उसे इस बात का पता चला कि उसके साथ धोखा किया गया है। मायके लौटी दुल्हन, पुलिस तक पहुंचा मामला इस शर्मनाक हरकत की जानकारी दुल्हन ने अपने परिजनों को दी। इसके बाद उसे ससुराल से मायके वापस ले जाया गया। जब परिजनों ने कपसेठी थाने में शिकायत दर्ज करानी चाही तो पुलिस ने सीमा विवाद का हवाला देते हुए मिर्जापुर के कछवां थाने जाने की सलाह दी। कछवां थाने में आखिरकार दुल्हन की शिकायत दर्ज हुई। पुलिस ने दोनों पक्षों को थाने बुलाया, जहां थानाध्यक्ष रणविजय सिंह की निगरानी में घंटों पंचायत चली, लेकिन दुल्हन ने अपने फैसले पर अडिग रहते हुए पति के साथ रहने से साफ इनकार कर दिया। recent visitors 75

बड़े सरकारी अस्पताल एसएमएस में बड़ी लापरवाही, गलत खून चढ़ाने से हुई प्रसूता की मौत, फाइल भी गायब

जयपुर राजधानी के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एसएमएस में एक बार फिर ऐसी लापरवाही सामने आई है, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। अस्पताल में 11 दिन से भर्ती महिला को गलत ब्लड चढ़ाने से उसकी मौत हो गई। हैरान करने वाली बात ये है कि अब उस महिला की मेडिकल फाइल तक अस्पताल में मौजूद नहीं है। मौजूदा मामला न सिर्फ लापरवाही की कहानी है, बल्कि पूरे सिस्टम की सड़ांध की गवाही देता है। जब भास्कर ने इस मामले की तह तक जाने की कोशिश की तो सामने आया कि मौत के 35 घंटे बाद भी अस्पताल प्रशासन यह तय नहीं कर पाया कि गलती किसकी थी, ड्यूटी पर कौन था और किसने ब्लड चढ़ाया। सबके पास एक ही जवाब था कि महिला सीरियस थी। दरअसल हकीकत ये है कि अस्पताल में ब्लड चढ़ाने की प्रक्रिया में कई स्तर पर जांच और पुष्टि होनी चाहिए। रेजिडेंट डॉक्टर और नर्स को मिलकर यह देखना होता है कि जो ब्लड मंगवाया गया है, वही ब्लड मरीज को चढ़ाया जा रहा है या नहीं लेकिन सिस्टम की खामियां इतनी हैं कि जवाबदेही कहीं तय ही नहीं होती। ब्लड बैंक में 70 प्रतिशत स्टाफ ठेके पर है, जिसके पास यदि पर्ची आई तो एंट्री की और बिना पुष्टि के ब्लड दे दिया गया। जिसे ब्लड वार्ड तक पहुंचाना होता है, वह वार्ड बॉय भी ठेके पर ही है। यानी पूरी जिम्मेदारी एक ऐसे ढांचे पर टिकी है, जहां न कोई स्थायित्व है, न जवाबदेही। यह कोई पहला मामला नहीं है। फरवरी 2024 में 23 साल के सचिन को गलत ब्लड चढ़ाया गया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी। दिसंबर में भरतपुर का 10 साल का मुस्तफा भी इसी लापरवाही का शिकार हुआ और अब यह प्रसूता, जिसकी मौत को पहले छुपाने की कोशिश हुई और अब उसकी फाइल तक 'गायब' कर दी गई। मानवाधिकार आयोग ने इस गंभीर मामले पर संज्ञान लिया है। आयोग ने एसएमएस के अधीक्षक और प्राचार्य को नोटिस जारी कर 12 जून तक तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। साथ ही दोषियों पर सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया गया है लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ एक और जांच कमेटी इस मौत का जवाब दे पाएगी? या फिर कार्रवाई की घोषणा से कर्तव्य की इतिश्री हो जाएगी। recent visitors 63

12 वीं बोर्ड के छात्र-छात्राओं के लिए खुशखबरी, 75% या उससे अधिक अंक लाने वाले मेधावी स्टूडेंट्स को लैपटॉप के लिए राशि देने का आदेश जारी

भोपाल मध्य प्रदेश के 12वीं के बोर्ड छात्रों के लिए खुशखबरी है. माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल ने 12वीं की परीक्षा में 75% या उससे अधिक अंक लाने वाले मेधावी छात्रों को लैपटॉप के लिए राशि देने का आदेश जारी किया है. शुक्रवार को लोक शिक्षण संचालनालय ने इसके लिए आदेश जारी कर दिए गए हैं. जिला शिक्षा अधिकारियों से बच्चों के बैंक खाता की जानकारी मांगी गई है. संचालक लोक शिक्षण डीके कुशवाहा ने मध्य प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी कर निर्देश दिया है. मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना के तहत मिल रहा लाभ प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत माध्यमिक शिक्षा मंडल के सत्र 2024 25 की कक्षा 12वीं की परीक्षा में 75% या उससे अधिक अंक लाने वाले छात्रों के शिक्षा पोर्टल पर दर्ज बैंक खाता संबंधित पत्र जारी किया जाए. जिला शिक्षा अधिकारियों को जारी पत्र में संचालक ने साफ किया कि पिछले वर्षों में देखा गया था कि कई छात्रों के बैंक खाता उनके परिवारजनों के नाम से संचालित थे ओर कई बैंक खातों में गड़बड़ी भी देखी गई,जिससे वन क्लिक के माध्यम से छात्रों के खाते में राशि ही नहीं पहुंच पाई थी. ऐसे में पूर्व सावधानी से पात्र छात्रों के बैंक खाते की प्रविष्टि की जाए. एक हफ्ते में पोर्टल में दर्ज करना होगी जानकारी इसमें पात्र विद्यार्थियों के नाम से संचालित बचत बैंक खाता क्रमांक, आईएफसी कोड और बैंक शाखा का नाम एक सप्ताह के अंदर शिक्षा पोर्टल पर दर्ज करवाना है। प्रदेश में मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना के तहत मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल से 12वीं में 75 प्रतिशत या उससे अधिक अंक लाने वाले मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप के लिए 25-25 हजार रुपये की राशि दी जाती है। इस बार माशिम की 12वीं की परीक्षा में 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या 94 हजार के आसपास है। जुलाई में लैपटाप की राशि मिलने की संभावना पिछले सत्र के मेधावी विद्यार्थियों को इस साल फरवरी में लैपटॉप की राशि दी गई थी। इस बार सरकार का प्रयास है कि जुलाई तक विद्यार्थियों को लैपटॉप की राशि प्रदान कर दी जाए। माध्यमिक शिक्षा मंडल ने अपलोड की पात्र स्टूडेंट्स की लिस्ट मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना के अंतगर्त 12 वीं के एग्जाम में जिन छात्र-छात्राओं को लाभ मिलना है, उनकी लिस्ट माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल ने अपने पोर्टल पर अपलोड की है. यदि टॉपर छात्र-छात्राएं नाम देखना चाहते हैं, तो पोर्टल पर विजिट कर सकते हैं. लैपटॉप के लिए पैसे मिलने की जानकारी जैसे ही टॉपर्स स्टूडेंट्स को मिली, तो उनके चेहरे खुशी से खिल उठे. योजना के मुख्य उद्देश्य…     डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देना।     मेधावी छात्रों को लैपटॉप खरीदने के लिए आर्थिक सहायता देना।     छात्रों को तकनीकी दक्षता और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रोत्साहित करना।     शिक्षा में समानता और अवसर प्रदान करना। पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria)…     आवेदक मध्य प्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए।     MP बोर्ड से 12वीं पास हो।     सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए न्यूनतम 85% अंक।     SC/ST/अन्य आरक्षित वर्ग के लिए न्यूनतम 75% अंक।     परिवार की वार्षिक आय 6 लाख रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए।     आधार कार्ड, बैंक खाता, और आवश्यक दस्तावेज होना अनिवार्य। 1. आधिकारिक वेबसाइट [shikshaportal.mp.gov.in] पर जाएं। 2. ‘पात्रता जांचें’ लिंक पर क्लिक करें। 3. 12वीं बोर्ड का रोल नंबर दर्ज करें और जानकारी प्राप्त करें। 4. पात्रता मिलने पर ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरें। 5. सभी जरूरी दस्तावेज अपलोड करें। 6. आवेदन सबमिट करें और प्रिंट निकाल लें। 7. आवेदन की स्थिति पोर्टल पर चेक करें। राशि ट्रांसफर सीधे DBT के जरिए बैंक खाते में…     चयनित छात्रों को 25,000 रुपए की राशि सीधे उनके बैंक खाते में डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर (DBT) के जरिए दी जाएगी।     राशि से छात्र अपने मनपसंद लैपटॉप खरीद सकते हैं।     साथ ही सरकार की ओर से सम्मान पत्र भी दिया जाएगा। इस साल कितने प्रतिशत पर मिलेगा लैपटॉप?     सामान्य वर्ग के लिए 12वीं बोर्ड में 85% या उससे अधिक अंक।     SC/ST और अन्य आरक्षित वर्ग के लिए 75% या उससे अधिक अंक। फ्री लैपटॉप योजना के फायदे…     25,000 की आर्थिक सहायता सीधे खाते में।     छात्रों के लिए डिजिटल शिक्षा और तकनीकी कौशल विकास।     प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद।     ऑनलाइन शिक्षा में सहजता।     आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन और पारदर्शी।     सभी वर्गों के मेधावी छात्रों को समान अवसर। योजना से जुड़ी जरूरी जानकारियां (Important Information)… बिंदु                              जानकारी योजना का नाम       मध्य प्रदेश फ्री लैपटॉप योजना लाभार्थी                 12वीं में अच्छे अंक लाने वाले छात्र प्रोत्साहन राशि         ₹25,000 कटऑफ प्रतिशत     सामान्य – 85%, SC/ST – 75% आवेदन तरीका        ऑनलाइन जरूरी दस्तावेज        आधार, मार्कशीट, जाति प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक आधिकारिक वेबसाइट     shikshaportal.mp.gov.in राशि का वितरण           डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर (DBT) योजना के लिए आवश्यक दस्तावेज…     आधार कार्ड     12वीं बोर्ड की मार्कशीट     जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)     बैंक पासबुक या बैंक खाता विवरण पिछले वर्षों का डेटा और योजना की सफलता पिछले साल 78,641 छात्रों ने इस योजना का लाभ लिया। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में और अधिक मेधावी छात्र इस योजना का लाभ उठाएं और डिजिटल शिक्षा से जुड़ें। एमपी फ्री लैपटॉप योजना के लाभ…     ऑनलाइन पढ़ाई का मौका     प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी     तकनीकी कौशल में सुधार     रोजगार के नए अवसर     आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनना डिजिटल युग में सफलता की एक मजबूत सीढ़ी… यह योजना मध्य प्रदेश के छात्रों के लिए डिजिटल युग में सफलता की एक मजबूत सीढ़ी साबित हो रही है। अगर आप भी 12वीं में अच्छे अंक लाए हैं तो इस अवसर का लाभ अवश्य उठाएं। recent visitors 50