मौसम विभाग ने छत्तीसगढ़ के 11 जिलों में ऑरेंज और 12 जिलों में येलो अलर्ट किया जारी

रायपुर मौसम विभाग ने छत्तीसगढ़ के 11 जिलों में ऑरेंज और 12 जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है। अगले तीन घंटे में 40-60 किमी प्रति घंटे की तफ्तार से तेज हवा के साथ बारिश और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है. मौसम विभाग ने सुकमा, बीजापुर, दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा, बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव , उत्तर बस्तर कांकेर, धमतरी, बालोद, राजनांदगांव, गरियाबंद जिले में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. इन जिलों में 40-60 किमी प्रति घंटे की तफ्तार से तेज आंधी के साथ बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना है. वहीं सुकमा, बीजापुर, दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा, बस्तर, उत्तर बस्तर कांकेर, धमतरी, बालोद, राजनांदगांव, गरियाबंद, महासमुंद, रायपुर और दुर्ग में येलो अलर्ट जारी किया गया है. इन जिलों में 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने के साथ बारिश की संभावना जताई गई है. बता दें कि बुधवार को दुर्ग का पारा 41.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा, जबकि अंबिकापुर सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 23.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग संभाग के कुछ इलाकों में हल्की बारिश और गरज-चमक हुई, लेकिन तापमान में कोई खास गिरावट नहीं आई. आज सुबह से बादल छाए रहने से प्रदेश के तापमान में गिरावट दर्ज की गई है. recent visitors 44

मोबाइल नंबर फ्रॉड तो नहीं, सरकार लाई नया टूल

नई दिल्ली देश में बढ़ रहे साइबर अपराधों ने सरकार को भी चिंता में डाला है। इससे निपटने के लिए सरकारी स्‍तरों पर काम तेज किए गए हैं। भारत सरकार के दूरसंचार विभाग यानी डीओटी ने एक टूल पेश किया है। इसका नाम है फाइनेंशल फ्रॉड रिस्‍क डिटेक्‍टर यानी एफआरआई। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह टूल डिजिटल इंटेलिजेंस प्‍लेटफॉर्म का हिस्‍सा है जिसका मकसद ऐसे मोबाइल नंबरों को आइडेंटिफाइ करना है जो साइबर धोखाधड़ी से जुड़े हो सकते हैं। कहा जा रहा है कि ऐसे नंबरों को बहुत जल्‍द फाइनेंशल इंस्‍टीट्यूशंस के साथ जैसे बैंक आदि से शेयर किया जाएगा। इसका फायदा यह होगा कि किसी ऑनलाइन पेमेंट से पहले यूजर को यह मालूम चल जाएगा कि जिस नंबर पर पर पेमेंट करने जा रहे हैं, कितना रिस्‍की है। तीन कैटिगरी में बांटे जाएंगे मोबाइल नंबर मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एफआरआई के अंतर्गत आने वाले मोबाइल नंबरों को तीन कैटिगरी में बांटा जाएगा। मीडियम, हाई या वेरिहाई। वेरिहाई का मतलब ऐसे मोबाइल नंबरों से है, जिन पर पेमेंट करने पर धोखाधड़ी की संभावना बहुत अधिक है। सवाल हो सकता है कि नंबर आइडेंटिफाई कैसे किए जाएंगे। दरअसल, सरकार को उसके अलग-अलग पोर्टलों पर लोगों की कंप्‍लेंट मिल रही हैं, जिनमें ऐसे मोबाइल नंबरों की शिकायत है जिनके जरिए धोखाधड़ी की गई। ये नंबर चक्षु प्‍लेटफॉर्म, एनसीआरपी यानी साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल आदि पर रिपोर्ट किए गए हैं। इसके अलावा बैंकों के पास भी ऐसी शिकायतें आती हैं, जिनमें ग्राहक अपने साथ हुई धोखाधड़ी के बारे में बताते हैं और मोबाइल नंबरों का जिक्र करते हैं। PhonePe इस्‍तेमाल कर रहा नया टूल रिपोर्टों के अनुसार, फोनपे ने एफआरआई टूल का इस्‍तेमाल करना शुरू कर दिया है। यह ऐप ऐसे नंबरों पर ट्रांजैक्‍शंस को रोकता है जिन्‍हें हाई रिस्‍क कैटिगरी में रखा गया है। ऐसे नंबर जो मीडियम रिस्‍की होते हैं उन पर पेमेंट करने वालों को अलर्ट भेजा जाता है। रिपोर्टों के अनुसार, अब पेटीएम, गूगलपे जैसे यूपीआई प्‍लेटफॉर्म्‍स ने एफआरआई सिस्‍टम को इंटीग्रेट करना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, यूपीआई सर्विस प्राेवाइडर तो इस टूल का इस्‍तेमाल करेंगे ही, NBFC भी इस टूल की मदद से लोगों को आगाह करेंगी। दूरसंचार विभाग चाहता है कि एफआरआई टूल का इस्‍तेमाल हर जगह किया जाएगा ताकि ऑनलाइन धोखाधड़ी को कम करने में मदद मिले। इससे देश का डिजिटल इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर और मजबूत व‍ सिक्‍योर होगा। दावा है कि यह टूल, रियल टाइम में काम करता है और जैसे-जैसे फ्रॉड से जुड़े नंबर सामने आते हैं उन्‍हें बैंकों और यूपीआई प्‍लेटफॉर्म्‍स के साथ शेयर किया जाता है। recent visitors 76

एशिया में कोविड का नया वेरिएंट JN.1 से खतरे की घंटी? पिछले 1 साल में सबसे ज्यादा एक्टिव केस, डॉक्टर ने कही ये बात

नई दिल्ली कोरोना वायरस कहें या कोविड-19 साल 2020 के बाद से इसका खौफ लोगों के बीच खूब देखने को मिला. इस महामारी से दुनियाभर में सैंकड़ों लोगों ने जान गवाईं. अभी लोग ढंग से कोविड-19 द्वारा मचाई गई तबाही को भूले भी नहीं थे के इस बीच एशिया के कुछ देशों में कोरोना के केस फिर से बढ़ने लगे हैं. सिंगापुर, हांगकांग और थाईलैंड में संक्रमित लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. इसकी वजह है ओमिक्रॉन का JN.1 वैरिएंट है जो बहुत जल्दी फैलता है और अब इसका असर दुनिया के कई हिस्सों में देखा जा रहा है. सिंगापुर में 3 मई तक के हफ्ते में 14,200 नए कोरोना केस मिले, जबकि पिछले हफ्ते यह संख्या 11,100 थी. वहां अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में भी 30% बढ़ोतरी हुई है. इस वजह से वहां के हेल्थ ऑफिसर ज्यादा सतर्क हो गए हैं. हांगकांग में भी हालात अच्छे नहीं हैं. वहां कोरोना का फैलाव काफी ज्यादा बताया जा रहा है. हेल्थ ऑफिसर अल्बर्ट औ के मुताबिक, इस साल अब तक सबसे ज्यादा कोरोना पॉजिटिव केस सामने आए हैं. एक ही हफ्ते में 31 लोगों की मौत भी हुई है, जो एक साल में सबसे ज्यादा है. कई लोग गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं. भारत में अभी कोरोना के मामले कम हैं, लेकिन थोड़ी बढ़त जरूर हुई है. 19 मई तक 257 एक्टिव केस सामने आए हैं. आसपास के देशों में मामले बढ़ने की वजह से भारत के डॉक्टर और हेल्थ ऑफिर्स अलर्ट पर हैं और हालात पर नजर रख रहे हैं ताकि समय रहते कोई जरूरी कदम उठाया जा सके. लेकिन सवाल ये उठता है कि आखिर ओमिक्रॉन का ये नया वेरिएंट JN.1 क्या है? इसके लक्षण क्या हैं और ये कैसे फैलता है? चलिए जानते हैं. JN.1 वैरिएंट क्या है? JN.1 कोरोना वायरस का एक नया रूप है, जो ओमिक्रॉन से जुड़ा है. यह BA.2.86 नाम के पुराने वेरिएंट से निकला है, जिसे पिरोला भी कहा जाता है. इस वेरिएंट की पहचान सबसे पहले 2023 के आखिरी में हुई थी. इसके बाद यह अमेरिका, यूके, भारत, सिंगापुर और हांगकांग जैसे देशों में तेजी से फैल गया. इस वेरिएंट में स्पाइक प्रोटीन (वायरस का वो हिस्सा जिससे वह शरीर की सेल्स से चिपकता है) में एक खास बदलाव (म्यूटेशन) हुआ है. इस बदलाव की वजह से यह वायरस ज्यादा तेजी से फैल सकता है. यह शरीर की उस इम्युनिटी को भी बेद सकता है, जो वैक्सीन लगवाने या पहले कोविड होने के बाद बनी थी. कितना खतरनाक है JN.1? फिलहाल के आंकड़ों के मुताबिक, JN.1 वेरिएंट ओमिक्रॉन के पुराने वेरिएंट्स की तरह ही है और इससे गंभीर बीमारी होने का खतरा बहुत कम है. अधिकतर लोगों में इसके लक्षण हल्के से मध्यम लेवल के ही देखे गए हैं. इनमें गले में खराश, बहती नाक, हल्का बुखार, थकान और खांसी जैसे लक्षण शामिल हैं. ये लक्षण पहले वाले ओमिक्रॉन वायरस से बहुत मिलते-जुलते हैं. हालांकि, JN.1 की सबसे बड़ी चिंता इसकी तेजी से फैलने की क्षमता है. यह वेरिएंट बहुत आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है, इसलिए इसके केस तेजी से बढ़ सकते हैं. अभी तक डॉस्पिटल में एडमिट होने वालों की संख्या में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं देखी गई है, लेकिन फिर भी बुज़ुर्ग लोगों, पहले से बीमार लोगों और जिनकी इम्युनिटी कमजोर है उन्हें सतर्क रहने की जरूरत है. इस वेरिएंट को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी और सतर्कता बहुत जरूरी है, ताकि वायरस को फैलने से रोका जा सके. कोविड का नया वेरिएंट JN.1 क्या खतरे की घंटी कोरोना एक बार फिर एशिया के कुछ हिस्सों में दस्तक दे रहा है। भारत में पिछले एक साल में सबसे अधिक 257 सक्रिय केस दर्ज किए गए हैं, जिससे लोगों में हलचल तेज हो गई है। हालांकि, AIIMS के एक्सपर्ट डॉ संजय रॉय का कहना है कि JN-1 एक साल पुराना वेरिएंट है, कोई नया वायरस नहीं है। न ही यह कोई नया स्ट्रेन है। पॉजिटिव केस इसलिए सामने आ रहे हैं क्योंकि टेस्ट किए जा रहे हैं। मौजूदा हालात में JN.1 को लेकर घबराने वाली बात नहीं है। अभी तक इसको लेकर साइंस यही कहता है कि यह कॉमन कोल्ड है, इससे ज्यादा कुछ नहीं। स्वास्थ्य मंत्रालय का भी कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है। एम्स के कम्युनिटी मेडिसिन के एक्सपर्ट और कोरोना वैक्सीन ट्रायल के प्रमुख रहे डॉक्टर संजय रॉय ने बताया कि कोरोना फैमिली के हजार से भी ज्यादा वेरिएंट हैं। लेकिन, मुख्य रूप से सात ऐसे वायरस हैं जो इंसानों को प्रभावित करते हैं। 2002 तक कोरोना वायरस (CoV) इंसानों के लिए मामूली वायरस माना जाता था। लेकिन पिछले 20 से 25 सालों में इसके इफेक्ट को देखें तो कोरोना परिवार का 5वां वायरस सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (SARS) आया। इसके बाद इस परिवार का छठा वायरस मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम कोरोना वायरस (MERS-CoV) आया। अब इसका 7वां वायरस कोविड-19 है। जहां तक वर्तमान हालात की बात है तो अब यह कॉमन कोल्ड है। इसके ज्यादा खतरनाक होने का कोई एविडेंस अभी नहीं है। वैज्ञानिक समझ के आधार पर करनी होगी बात डॉक्टर संजय ने कहा कि साइंस की बातें तो साइंस के आधार पर ही होनी चाहिए। वट्सऐप से जानकारी लेकर बातें नहीं करनी चाहिए। JN.1 वेरिएंट में नया कुछ नहीं है। एक साल पुराना है। इसको लेकर इतनी बातें करने के पीछे कोई साइंस तो नहीं दिख रहा है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर किसी का कमर्शियल इंट्रेस्ट हो तो यह अलग बात है, लेकिन यह भी बहुत दिनों तक नहीं चलता है। अमेरिका जैसे देश ने अपने यहां छह महीने तक के बच्चों का भी कोविड वैक्सीनेशन करा दिया, जबकि हमने साइंस की बात की। हमारी सरकार ने भी इसे तवज्जो दिया और 12 साल से कम उम्र के बच्चों को एक भी वैक्सीन नहीं लगी और वायरस का उनपर असर भी कुछ नहीं हुआ। हमें समझना होगा और वैज्ञानिक समझ के आधार पर ही बात करनी होगी। सिक्वेंसिंग में पहले भी मिला था वेरिएंट JN.1 दिल्ली में कोरोना वायरस पर नजर रखने के लिए जीनोम सिक्वेंसिंग की जाती थी, लेकिन सूत्रों का कहना है … Read more

अदालत ने आदेश में कहा पत्नी के पास पति से अलग रहने का कोई ठोस कारण नहीं, भरण-पोषण की हक़दार नहीं

इंदौर कुटुंब न्यायालय ने एक महिला की तरफ से लगाई गई भरण-पोषण की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि पत्नी के पास अपने पति से अलग रहने का कोई पर्याप्त वैधानिक कारण नहीं है. इसलिए वह भरण-पोषण पाने की अधिकारी नहीं है. हालांकि धीरेंद्र सिंह की कोर्ट ने अवयस्क बच्चों को भरण-पोषण दिए जाने के आदेश दिए हैं. अधिवक्ता डॉ. रूपाली राठौर ने कहा कि अदालत ने अपने फैसले में एक तरह ये माना कि पत्नी स्वयं का भरण पोषण करने में सक्षम नहीं है और पति अपनी पत्नी का भरण पोषण करने में उपेक्षा कर रहा है. लेकिन दूसरी तरफ़ ये भी माना कि पत्नी के पास अपने पति से अलग रहने का कोई पर्याप्त वैधानिक कारण नहीं है. महिला ने मई 2022 में पति के खिलाफ थाने में दर्ज कराई थी शिकायत बताया कि सुलोचना(परिवर्तित नाम) का विवाह सन 2013 में अमन(परिवर्तित नाम) से हुआ था. सन 2022 में सुलोचना ने पति के खिलाफ विवाह के बाद से ही कम दहेज लाने को लेकर ताने मारना, पांच लाख रुपये दहेज की मांग करना, गाली-गलौच व मारपीट करना, डिलीवरी का खर्चा उठाने से मना करने, घर से निकालने को लेकर मई 2022 में पुलिस थाने में शिकायत की. जिसके आधार पर पत्नी ने स्वयं और बच्चों के लिए पति से भरण-पोषण की मांग करते हुए कुटुंब न्यायालय, इन्दौर में याचिका लगाई. पति की और से जवाब पेश करते हुए वकील कृष्ण कुमार कुन्हारे ने कोर्ट को बताया कि पत्नी ने झूठे आधारों पर केस लगाया था. कोर्ट में पत्नी के बयानों एवं पति के वकील के द्वारा पत्नी से पूछे गये सवाल-जवाब के दौरान महत्वपूर्ण बातें उजागर हो गईं. कोर्ट ने माना कि पत्नी खुद और अवयस्क बच्चे का भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं है कुटुंब न्यायालय ने अपने फैसले में यह तो माना कि पत्नी खुद और अवयस्क बच्चे का भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं है. और पति भरण -पोषण करने में उपेक्षा कर रहा है. लेकिन माननीय न्यायालय में अपने फैसले में यह भी कहा कि पत्नी ने 2013 में शादी के पश्चात कोई शिकायत नहीं की. पत्नी ने सिर्फ मई 2022 में मामले की शिकायत दर्ज कराई. मई 2022 के पूर्व पत्नी द्वारा प्रताड़ना की कोई रिपोर्ट क्यों नहीं की गई. महिला द्वारा इसका स्पष्टीकरण नहीं देने पर कोर्ट ने विवाह के बाद पैसों के लिए उसको परेशान करने के बयानो को संदेहास्पद माना. ये महत्वपूर्ण फैसला उनके लिए नजीर है जो बिना पर्याप्त वैधानिक कारण पति से अलग रहती हैं और कोर्ट में ख़ुद के भरण-पोषण के लिए गलत आधार पर केस लगाती हैं. recent visitors 49

जबलपुर से 31 मई को होगी जय हिंद सभा की शुरुआत, राहुल, प्रियंका के आने की उम्मीद

जबलपुर  सेना और नारी शक्ति को लेकर भाजपा नेताओं के आपत्तिजनक बयानों और ताजा हालातों को लेकर कांग्रेस अब जमीन पर उतरेगी। देशभर में जय हिंद सभा करने की योजना बनाई है। इसकी शुरुआत जबलपुर से 31 मई को होगी। यह आयोजन इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि इसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रदेश के दौरे पर रहेंगे। कांग्रेस लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी या सांसद प्रियंका गांधी को सभा सबोधित करने के लिए बुलाएगी। कांग्रेस करेगी जय हिन्द सभा, जबलपुर से शुरुआत तैयारी के लिए जबलपुर आए केवलारी विधायक व सह प्रभारी रजनीश सिंह ने कहा कि इन दोनों में से किसी एक नेता का आना निश्चित है। महाकोशल सहित प्रदेश में संदेश पहुंचाने के लिए देश की पहली जय हिंद सभा को मेगा इवेंट बनाने के लिए कांग्रेस ने दो विधायक आरके दोगने को प्रदेश प्रभारी और रजनीश सिंह को सह प्रभारी नियुक्त किया है।  31 मई को राहुल या प्रियंका का हो सकता है दौरा बुधवार को इन दोनों विधायकों ने जबलपुर के कांग्रेस नेताओं और पदाधिकारियों के साथ तैयारी पर चर्चा की। सभा में कई वरिष्ठ नेता सबोधित करेंगे। सभा स्थल के लिए जगह का ऐलान तो नहीं किया है, लेकिन इसे शहीद स्मारक गोलबाजार में आयोजित करने पर विचार किया गया है। बैठक में विधायक लखन घनघोरिया, पूर्व मंत्री तरुण भनोत, पूर्व विधायक संजय यादव, जिला ग्रामीण अध्यक्ष डॉ नीलेश जैन ने सभा की तैयारी और रणनीति पर बात रखी।  संगठनात्मक समन्वय पर विस्तार से चर्चा अध्यक्षता जिला शहर कांग्रेस अध्यक्ष सौरभ शर्मा ने की। उन्होंने बताया कि बैठक में कार्यक्रम की रूपरेखा, जिमेदारियों का निर्धारण एवं संगठनात्मक समन्वय पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान कौशल्या गोटिया, कमलेश यादव, पूर्व विधायक नित्यरंजन खंपरिया, समति सैनी, सतीश तिवारी, अमरीश मिश्रा, राजेश पटेल,इंदिरा पाठक तिवारी, विजय रजक, सचिन रजक, चमन राय, अनुराग जैन गड़वाल, राजकिशोर पटेल, अयोध्या तिवारी, अतुल बाजपेई, संतोष दुबे आदि मौजूद रहे। recent visitors 62

आठ साल पहले मृत व्यक्ति की आत्मा गांव के कोटे से राशन ले रही है, अब हुआ खुलासा

  सतना  सतना के टिकुरी अकौना गांव में कुछ अजीब हो रहा है. आठ साल पहले मृत व्यक्ति की आत्मा कथित तौर पर गांव के कोटे से राशन ले रही है. यह आत्मा बकायदा पीडीएस मशीन में अंगूठा लगाकर अपने हिस्से का राशन ले जाती है. यह आत्मा बलवंत सिंह की है, जो आठ साल पहले एक हादसे में मृत्यु को प्राप्त हो चुके हैं, लेकिन राशन लेने के लिए उनका नाम आज भी राशन कार्ड में दर्ज है. साक्ष्य मिलने के बाद गांव की महिला सरपंच श्रद्धा सिंह ने इसकी शिकायत तहसीलदार से की, लेकिन कोटर तहसीलदार ने कोई कार्रवाई नहीं की. इसके बाद उन्होंने सीएम हेल्पलाइन का सहारा लिया.   जांच हुई तो सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में चौंकाने वाला घोटाला सामने आया है. यहां 8 साल पहले मृत बलवंत सिंह के नाम पर आज भी राशन कार्ड से राशन उठाया जा रहा है, जबकि जिंदा शंकर आदिवासी को 2017 में मृत घोषित कर राशन सहित सरकारी सुविधाओं से वंचित कर दिया गया. यह मामला तब उजागर हुआ, जब गांव की महिला सरपंच श्रद्धा सिंह ने जिंदा व्यक्ति को राशन दिलाने की कोशिश की और मृतक के नाम पर राशन वितरण का खुलासा हुआ. बलवंत सिंह की 8 साल पहले एक हादसे में मौत हो चुकी है, लेकिन उनका नाम राशन कार्ड पोर्टल से नहीं हटाया गया. फूड इंस्पेक्टर ब्रजेश पांडेय ने बताया कि शुरुआती जांच में पाया गया कि बलवंत सिंह का नाम समग्र पोर्टल से हटाया गया था, लेकिन राशन पोर्टल पर उनका नाम बरकरार रहा. उनके परिवार के अन्य सदस्य, धर्मेंद्र सिंह और प्रदीप सिंह, उनके नाम पर अंगूठा लगाकर राशन ले रहे थे. परिवार के 8 सदस्यों के नाम पर राशन वितरित हो रहा था. शिकायत के बाद खाद्य विभाग ने बलवंत सिंह का नाम राशन पोर्टल से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. वहीं, शंकर आदिवासी को 2017 में मृत घोषित कर दिया गया था. जैसे-तैसे उन्होंने खुद को जिंदा साबित किया, लेकिन राशन और अन्य सरकारी सुविधाओं से आज भी वंचित हैं. फूड इंस्पेक्टर ने बताया कि पात्रता और अपात्रता की जांच पंचायत स्तर पर होती है और पंचायत सचिव को राशन मित्र पोर्टल के जरिए नाम विलोपन की प्रक्रिया पूरी करने की जिम्मेदारी दी गई है. शंकर आदिवासी का नाम भी जल्द अपडेट कर लिया जाएगा. गांव के पंच और सरपंच पति अनुराग सिंह ने इस भ्रष्टाचार पर हैरानी जताते हुए कहा कि जिंदा लोग राशन के लिए भटक रहे हैं, जबकि मृतक के नाम पर राशन उठाया जा रहा है. उन्होंने तहसीलदार से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर सीएम हेल्पलाइन का सहारा लिया. कोटर तहसील के सेल्समैन शिव कुमार गौतम ने इस मामले से अनभिज्ञता जताई और कहा कि अब नाम हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. यह मामला पीडीएस में भ्रष्टाचार की काली छाया को उजागर करता है. भारत सरकार की मंशा हर गरीब को पर्याप्त राशन देने की है, जहां गरीबी रेखा से नीचे वालों को 35 किलो और उससे ऊपर वालों को 15 किलो राशन प्रति माह मिलता है. लेकिन टिकुरी अकौना जैसे हालात व्यवस्था की खामियों को दर्शाते हैं, जहां जिंदा लोग राशन के लिए तरस रहे हैं और मृतकों के नाम पर राशन का दुरुपयोग हो रहा है.   recent visitors 60

देश में ‘हनी मिशन’ में 2,29,409 मधुमक्खी बक्से और मधु कॉलोनियां की गई वितरित

केवीआईसी के ‘हनी मिशन’ में 20 हजार मीट्रिक टन शहद का हुआ उत्पादन मधुमक्खी पालकों को 325 करोड़ रुपये की हुई आमदनी देश में 'हनी मिशन' में 2,29,409 मधुमक्खी बक्से और मधु कॉलोनियां की गई वितरित भोपाल खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी), सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार ने ‘विश्व मधुमक्खी दिवस-2025’ के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया। इस वर्ष का आयोजन थीम – "प्रकृति से प्रेरित मधुमक्खी, सबके जीवन की पोषक" पर आधारित था, जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण "श्वेत क्रांति से स्वीट क्रांति" के अभियान को सशक्त करता है। इसमें महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों से आए मधुमक्खी पालक लाभार्थी, प्रशिक्षु, वैज्ञानिकों, सफल मधुमक्खी पालकों, विद्यार्थियों और विशेषज्ञों की उपस्थिति में एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें मधुमक्खी पालन के क्षेत्र में केवीआईसी की उपलब्धियों को साझा किया गया। यह आयोजन न केवल एक तकनीकी मंच रहा, बल्कि ग्रामीण भारत के नवाचार, प्रेरणा और स्वावलंबन की सजीव मिसाल बना। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि केवीआईसी अध्यक्ष मनोज कुमार ने, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सुरूप राशि की उपस्थिति में किया। केवीआईसी अध्यक्ष मनोज कुमार ने मधुमक्खी दिवस पर आयोजित समारोह में कहा कि "मधुमक्खियां हमारे पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ हैं। ये न केवल शहद देती हैं, बल्कि परागण के जरिए हमारी खेती को समृद्ध करती हैं और पर्यावरण का संरक्षण करती हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किया गया ‘हनी मिशन’ आज गांवों की आजीविका का बड़ा आधार बन चुका है। "उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने जब ‘स्वीट क्रांति’ का आह्वान किया, तब उन्होंने एक नया रास्ता दिखाया, जिसमें शहद उत्पादन न केवल आर्थिक समृद्धि का, बल्कि स्वास्थ्य समृद्धि का भी स्रोत बना। उनके नेतृत्व में केवीआईसी ने इस दिशा में जो कार्य किया है, वह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम है।" केवीआईसी अध्यक्ष ने ‘हनी मिशन’ की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि केवीआईसी द्वारा अब तक देशभर में 2,29,409 मधुमक्खी बक्से और मधु कॉलोनियां वितरित की गई हैं। इससे लगभग 20,000 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन हुआ है। मधुमक्खी पालकों को इससे लगभग 325 करोड़ रुपये की आमदनी हुई है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में हनी मिशन से जुड़े मधुमक्खी पालकों ने करीब 25 करोड़ रुपये मूल्य का शहद विदेश में भी निर्यात किया है। केवीआईसी की सीईओ सुरूप राशि ने भी प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा, "हनी मिशन केवल एक योजना नहीं, बल्कि यह एक समग्र आजीविका मॉडल है। आज ग्रामीण क्षेत्रों में हजारों युवाओं, महिलाओं और किसानों को इस मिशन से रोजगार मिल रहा है। उन्होंने कहा कि केवीआईसी द्वारा संचालित हनी प्रोसेसिंग प्लांट्स, प्रशिक्षण केंद्र और मार्केटिंग नेटवर्क ने मधुमक्खी पालन को आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर किया है।" कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने बताया कि मधुमक्खियां केवल शहद उत्पादन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लगभग 75 प्रतिशत खाद्य फसलों का परागण मधुमक्खियों से होता है। मधुमक्खियां यदि न रहें, तो 30 प्रतिशत खाद्य फसलें और 90 प्रतिशत जंगली पौधों की प्रजातियां संकट में आ सकती हैं। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश सहित देश के सभी हिस्सों से लाभार्थियों ने डिजिटल रूप से अपनी सफलता की कहानियां साझा कीं। कार्यक्रम में बच्चों द्वारा प्रस्तुत नाटक, कविता, और निबंध ने कार्यक्रम में जीवंत कर दिया। कार्यक्रम में केवीआईसी के अधिकारी, कर्मचारी और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।   recent visitors 42