सोने की कीमत में बड़ी गिरावट, चांदी भी हो गई काफी सस्ती, जान लीजिए लेटेस्ट दाम

मुंबई सोने की कीमतों में गुरुवार को बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। सोने के घरेलू और वैश्विक दोनों भाव गुरुवार सुबह गिरावट के साथ लाल निशान पर ट्रेड करते दिखाई दिए। एमसीएक्स एक्सचेंज पर भी सोना लाल निशान पर बना हुआ था। शुरुआती कारोबार में एमसीएक्स पर 5 जून 2025 की डिलीवरी वाना सोना  0.69 फीसदी या 636 रुपये की गिरावट के साथ 91,629 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड करता दिखाई दिया। सोने के साथ ही चांदी की कीमतों में भी आज गिरावट आई है। गुरुवार सुबह वैश्विक और घरेलू दोनों बाजारों में चांदी लाल निशान पर ट्रेड करती दिखी। चांदी में भी बड़ी गिरावट सोने के साथ ही चांदी की कीमतों में भी बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। एमसीएक्स एक्सचेंज पर गरुवार सुबह चांदी लाल निशान पर ट्रेड करती दिखी। शुरुआती कारोबार में 4 जुलाई 2025 की डिलीवरी वाली चांदी 1.06 फीसदी या 1009 रुपये की गिरावट के साथ 94,457 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड करती दिखाई दी। सोने का वैश्विक भाव सोने की वैश्विक कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है। कॉमेक्स पर सोने का वैश्विक भाव 0.94 फीसदी या 30.10 डॉलर की गिरावट के साथ 3,158.20 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करता दिखाई दिया। वहीं, सोने का वैश्विक हाजिर भाव 0.76 फीसदी या 23.70 डॉलर का गिरावट के साथ 3,153.55 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करता दिखाई दिया। चांदी का वैश्विक भाव सोने के साथ ही चांदी की वैश्विक कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है। कॉमेक्स पर चांदी का भाव गुरुवार सुबह 1.31 फीसदी या 0.42 डॉलर की गिरावट के साथ 32.02 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करता दिखाई दिया। वहीं, सिल्वर स्पॉट 1.03 फीसदी या 0.33 डॉलर की गिरावट के साथ 31.89 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करती दिखी। recent visitors 56

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रथम फील्ड मार्शल स्व. करिअप्पा की पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि

भोपाल       मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारतीय सेना के प्रथम कमांडर इन चीफ, फील्ड मार्शल स्व. के.एम. करिअप्पा की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की है।       मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर फील्ड मार्शल करिअप्पा के राष्ट्र निर्माण में योगदान को नमन करते हुए कहा कि स्वतंत्र भारत को सशक्त बनाने और सेना की सुदृढ़ता के लिए किए गए उनके प्रयास अविस्मरणीय रहेंगे। देश सेवा के आदर्श के रूप में वे सदैव जवानों के प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।       मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा और गौरव के लिए स्व. करिअप्पा का जीवन हम सभी के लिए प्रेरक है। उनके योगदान का सदैव स्मरण किया जाएगा।       उल्लेखनीय है कि फील्ड मार्शल के.एम. करिअप्पा भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर इन चीफ थे, जिन्होंने 15 जनवरी 1949 को ब्रिटिश जनरल फ्रांसिस बुचर से कमान संभाली थी। उनके नेतृत्व में भारतीय सेना ने न केवल पेशेवर मजबूती हासिल की, बल्कि अनुशासन और समर्पण के नए मानक भी स्थापित किए।   recent visitors 36

पाकिस्तान क्रिकेट में हलचल, शोएब मलिक ने मेंटर का पद छोड़ दिया, इन 4 दिग्गजों की भी छुट्टी तय!

इस्लामाबाद पाकिस्तान क्रिकेट से जुड़ी एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है. पूर्व पाकिस्तान शोएब मलिक ने मेंटर का पद छोड़ दिया है. शोएब समेत पांच खिलाड़ियों को पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने घरेलू प्रतियोगिताओं के लिए मेंटर नियुक्त किया था. पांचों खिलाड़ियों ने 3-3 साल के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन शोएब ने लगभग एक साल बाद ही पद छोड़ दिया. शोएब मलिक ने बतया है कि उन्होंने दो सप्ताह पहले बोर्ड को अपना इस्तीफा सौंप दिया था. मलिक ने कहा कि वो अपने बाकी कॉन्ट्रैक्ट संबंधी दायित्वों को पूरा करेंगे, लेकिन अगले सत्र के लिए मेंटर नहीं होंगे. बाकी चारों मेंटर्स की भी हुई छुट्टी? शोएब मलिक का इस्तीफा ऐसे समय में हुआ है, जब बाकी चारों मेंटर के भविष्य को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं. बता दें कि शोएब के अलावा मिस्बाह उल हक, सकलैन मुश्ताक, सरफराज अहमद और वकार यूनुस को भी पीसीबी ने मेंटर बनाया था. इधर शोएब ने अपना इस्तीफा सार्वजनिक किया, उधर पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि पीसीबी ने सभी पांच मेंटरों को हटाने का फैसला किया है क्योंकि वे पिछले साल काफी व्यस्त रहे घरेलू सत्र को कम करना चाहते हैं. पीसीबी के प्रवक्ता के मुताबिक चेयरमैन मोहसिन नकवी ने आधिकारिक रूप से अपने निर्णय के बारे में नहीं बताया है. पिछले साल अगस्त में इन पांचों की नियुक्ति हुई थी. हालांकि इन मेंटरों की नियुक्ति विवादास्पद रही. बताया जाता है कि इन मेंटरों को प्रति महीने लगभग 15 लाख रुपये (18,000 डॉलर) की सैलरी पर अनुबंधित किया गया. इसने लोगों को चौंका दिया क्योंकि इनकी सैलरी बाबर आजम, शाहीन शाह आफरीदी और मोहम्मद रिजवान को छोड़कर बाकी पाकिस्तानी क्रिकेटर्स से अधिक है. इसके अलावा ये भी सवाल उठे कि ये पांचों वास्तव में क्या करेंगे. शुरुआत में ये पांचों चैम्पियंस कप में भाग लेने वाली टीमों के मेंटर नियुक्त किए गए. चूंकि प्रत्येक टीम के पास एक अलग कोचिंग सेटअप था, ऐसे में मेंटरों को कोचिंग क्वालिफिकेशन की आवश्यकता नहीं थी. शोएब मलिक ने अपने इस फैसले पर कहा, 'यह कोई आसान विकल्प नहीं था, लेकिन अपनी प्रतिबद्धताओं पर विचार करने के बाद मुझे एहसास हुआ कि कई जिम्मेदारियों को एक साथ निभाने के चलते मैं अपना सर्वश्रेष्ठ देने में असमर्थ हो जाऊंगा. मेरा मानना ​​है कि यह बदलाव का सही समय है. पाकिस्तान के कुछ सबसे प्रतिभाशाली क्रिकेटरों के साथ काम करना काफी फायदेमंद अनुभव रहा है, जिसे मैं हमेशा संजो कर रखूंगा.' शोएब मल‍िक ने साल 2015 में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की थी. फिर 2019 वर्ल्ड कप के बाद उन्होंने वनडे क्रिकेट को अलविदा कह दिया था. हालांकि शोएब टी20 फॉर्मेट में अब भी सक्रिय हैं. 43 वर्षीय शोएब पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) के मौजूदा सीजन में क्वेटा ग्लैडिएटर्स टीम का हिस्सा पार्ट हैं. शोएब मल‍िक का इंटरनेशनल कर‍ियर 35 टेस्ट, 1898 रन, 32 विकेट 287 वनडे, 7534 रन, 158 विकेट 124 टी20, 2435 रन, 28 विकेट   recent visitors 44

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पूर्वोत्तर क्षेत्र को भविष्य के विकास का केंद्र बताया

नई दिल्ली केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा है कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को पाने में पूर्वोत्तर राज्यों की अहम भूमिका होगी। ‘राइजिंग नॉर्थ ईस्ट इन्वेस्टर समिट’ के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम “हमारे अद्भुत ‘अष्ट लक्ष्मी’- आठ राज्यों को प्रदर्शित करेगा।” प्रधानमंत्री मोदी का संकल्प और प्रतिबद्धता यह सुनिश्चित करते हैं कि पूर्वोत्तर क्षेत्र भविष्य में विकास का प्रमुख केंद्र बने केंद्रीय मंत्री ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प, प्रतिबद्धता और उनका विजन यह सुनिश्चित करना है कि पूर्वोत्तर क्षेत्र भविष्य के विकास और भारत के भविष्य के मार्ग का केंद्र बने, क्योंकि देश 2047 तक विकसित भारत के अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है।” पूर्वोत्तर जिसे एक दशक पहले तक भारत का दूरस्थ क्षेत्र माना जाता था, आज भारत के विकास का केंद्र बन गया है सिंधिया ने कहा कि सकल बजटीय सहायता (जीबीएस) का 10 प्रतिशत (लगभग एक लाख करोड़ रुपए) प्रति वर्ष पूर्वोत्तर को दिया जाता है। इसने रीजन के विकास में अहम भूमिका निभाई है। पूर्वोत्तर जिसे एक दशक पहले तक भारत का दूरस्थ क्षेत्र माना जाता था। आज भारत के विकास का केंद्र बन गया है। आज पूर्वोत्तर को आर्थिक शक्ति के रूप में उभरने के लिए मंच तैयार कर दिया है, जो न केवल भारत के लिए बल्कि विश्व के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि है उन्होंने कहा, “पूर्वोत्तर की सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक संसाधनों का भंडार और रणनीतिक भौगोलिक स्थिति ने इस क्षेत्र को दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए दुनिया के सबसे शक्तिशाली प्रवेश द्वार में बदल दिया है।” उन्होंने कहा, “पिछले 10 वर्षों के प्रतिबद्ध निवेश, बुनियादी ढांचे पर प्रधानमंत्री के पिछले 10 वर्षों के संकल्प, स्वास्थ्य देखभाल, पनडुब्बी केबल पर शिक्षा ने आज पूर्वोत्तर को आर्थिक शक्ति के रूप में उभरने के लिए मंच तैयार कर दिया है, जो न केवल भारत के लिए बल्कि विश्व के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि है।” 23-24 मई को होने वाला ‘राइजिंग नॉर्थ ईस्ट इन्वेस्टर समिट’ क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देगा 23-24 मई को होने वाला ‘राइजिंग नॉर्थ ईस्ट इन्वेस्टर समिट’ क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देगा।शिखर सम्मेलन का फोकस पर्यटन और आतिथ्य, कृषि-खाद्य प्रसंस्करण और उससे जुड़े हुए क्षेत्र, कपड़ा, हथकरघा और हस्तशिल्प, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और कौशल विकास, आईटी/आईटीईएस, इन्फ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स, एनर्जी और मनोरंजन एवं खेल पर होगा। recent visitors 59

आतंकवादियों की फैक्‍ट्री चलाने वाले पाकिस्‍तान को भारत ने दिया जवाब, तीसरे देश की मध्‍यस्‍तता को नकारा

डॉ राघवेंद्र शर्मा ऑपरेशन सिंदूर ने और उसे अंजाम देने वाली भारतीय सेना ने देश के प्रत्येक नागरिक का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। वहीं यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने इस कार्रवाई को एक ऐसे मुकाम तक पहुंचा दिया है, जिसके परिणाम स्वरूप भविष्य में पाकिस्तान और वहां बैठे आतंकी भारत पर हमला करना तो दूर उसकी ओर आंख उठा कर देखने का दुस्साहस भी ना कर सकेंगे। प्रधानमंत्री की मंशा अनुरूप हमारी सेना के जांबाज सिपाहियों ने भी पाकिस्तान की नापाक हरकतों का मुंह तोड़ जवाब दे कर यह जता दिया कि पहले हम किसी को छेड़ते नहीं, और यदि कोई हमें छेड़े तो फिर उसे हम छोड़ते नहीं। हालांकि भारत सरकार ने शत्रु देश का काफी नुकसान करने के बावजूद अपनी सैन्य कार्रवाई को औपचारिक रूप से युद्ध का नाम नहीं दिया। किंतु जिस प्रकार से हमारी सीमाओं के आसपास पड़ोसी देश के ड्रोन देखे गए, मिसाइलें गिराने की असफल कोशिशें हुईं। जवाबी कार्रवाई में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के सैन्य संसाधनों को हवा में ही नष्ट किया और शत्रु देश के अनेक एयरबेस उड़ाने में सफल रही। पाकिस्तान में संचालित आतंकियों के अनेक प्रशिक्षण केंद्रों को ध्वस्त किया गया। इस कार्रवाई में 100 से अधिक ऐसे आतंकवादी मारे गए, जो भारत सहित दुनिया की अनेक आतंकवादी घटनाओं में शामिल थे या फिर अनगिनतआतंकवादी घटनाओं के रणनीतिकार रहे। भारत की जवाबी कार्रवाई में अनेक ऐसे लोग भी मारे गए जो पाकिस्तान सरकार और वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई के इशारे पर वहां आतंकवाद की फैक्ट्री चला रहे थे। उपरोक्त स्थानों पर आतंकवादियों को प्रशिक्षित कर उन्हें दुनिया भर में शांति भंग करने के लिए निर्यात कर रहे थे। भारतीय सेना की आक्रमकता को देखते हुए तत् समय ही यह स्पष्ट हो गया था कि परिस्थितियां औपचारिक युद्ध के मार्ग पर कदम आगे बढ़ा चुकी थीं। इसी से भयाक्रांत होकर पाकिस्तानी हुक्मरान अमेरिकी दरबार में ढोक लगाने को मजबूर हुए। यही वजह रही कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दोनों देशों के बीच स्वस्फूर्त मध्यस्थता करने के लिए प्रयासरत दिखाई दिए। हालांकि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और तीनों सेनाओं के भारतीय प्रमुखों ने प्रेस वार्ताओं के माध्यम से तत्काल यह स्पष्ट कर दिया कि यह विशुद्ध दो देशों के बीच का मामला है, इसमें भारत को किसी तीसरे देश की मध्यस्थता कतई स्वीकार नहीं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी भली भांति जानते हैं कि भारत पाकिस्तान की अकल ठिकाने लगाने के मूड में है और वह इस मामले में किसी भी तीसरे देश की मध्यस्थता स्वीकार नहीं करेगा। यही वजह रही की ट्रंप केवल दावा करते दिखाई दिए कि भारत पाकिस्तान सीज फायर के लिए तैयार हो गए हैं।  यह बात भी अब स्पष्ट हो चुकी है कि पाकिस्तान के शीर्ष सेना अधिकारी और वहां के हुक्मरान भारत से सीज फायर की गुहार लगा चुके हैं ।  इसे भारत का बड़प्पन ही कहा जाएगा कि उसने पाकिस्तान की गिड़गिड़ाहट को नजरअंदाज नहीं किया। फल स्वरुप कुछ देर के लिए दुनिया ने भारत और पाकिस्तान के बीच सीज फायर की स्थिति भी देखी। लेकिन हमारी सरकार और सेना ने इस बीच एहतियाती इंतजाम ढीले नहीं किये और पाकिस्तान की ओर से होने वाली हरकतों पर नजर बनाए रखी। जैसी कि पुख्ता धारणा है, पाकिस्तान अस्तित्व में आने के बाद से ही भरोसेमंद देश नहीं रहा है। इस बार भी उसने गैर भरोसेमंद काम ही किया। एक ओर वह अमेरिका को माध्यम बनाकर भारत सरकार की बारगाह में सैन्य कार्यवाही रोकने की गुहार लगाता रहा, तो दूसरी ओर उसने भारतीय सीमा के भीतर एक बार फिर सशस्त्र ड्रोन भेजने की हिमाकत कर डाली। अंतर्राष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि शांति की गुहार लगाकर भारतीय सीमाओं में ड्रोन भेजने की स्थिति पाकिस्तानी सेना और वहां की चुनी हुई सरकार के बीच उठा पटक मचने के चलते बनी होगी। क्योंकि पाकिस्तान का इतिहास रहा है, वहां के हुक्मरान आवाम की चिंता किए बगैर खुद की सलामती सुनिश्चित करने और अपना राजनीतिक उल्लू साधने में संलग्न बने रहते हैं। जबकि पाकिस्तान की सेना हमेशा इस ताक में बनी रहती है कि कब सरकार गलती करे और कब उसका तख्ता पलट कर पाकिस्तान में सैन्य शासन स्थापित किया जाए। खैर, यह उनका अंदरूनी मामला है। हमारा काम तो केवल इतना सा है कि हमारी सेना ने उन सभी ड्रोन को या तो हवा में ही नष्ट कर दिया या फिर उन्हें निष्क्रिय करके वापस पाकिस्तान की ओर भागने को मजबूर किया। यानि एक बार फिर सिद्ध हुआ कि पाकिस्तान कहता कुछ और है, करना कुछ और चाहता है। इससे भी ज्यादा हास्यास्पद बात यह है कि उसकी अपेक्षाओं से विपरीत जाकर हो कुछ और ही जाता है। जहां तक भारत से मुकाबले की बात है तो इस मामले में पाकिस्तान ने हमेशा मुंह की ही खाई है।  यदि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगातार आगे बढ़ रहे नए भारत की बात की जाए तो इसी कालखंड में सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक के माध्यम से पाकिस्तान की अकल ठिकाने लगाई जा चुकी है। अब जब एक बार फिर पाकिस्तान ने अपनी नापाक हरकतों से जम्मू कश्मीर की भूमि को रक्त रंजित किया, तो भारत का कोप उस पर कुछ ज्यादा ही भारी पड़ गया। पाकिस्तान में स्थित आतंकवाद के अड्डों और वहां सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण जगहों पर भारतीय सेना ने एक  प्रकार से आफत ही बरसा दी । यानि परिस्थितियां कुछ ऐसी निर्मित हुईं कि प्रत्येक भारतीय नागरिक  पाकिस्तान को ठिकाने लगाने के मूड में आ गया। यह बात अपनी जगह सही भी है कि जब दो देश युद्ध लड़ते हैं, तब लड़ाई केवल दो सेनाओं के बीच नहीं होती। और फिर भारत जैसे जिम्मेदार देश को तो एक साथ अनेक मोर्चों पर युद्ध लड़ना होता है। उसे अपनी सैन्य कार्रवाई एकदम सटीक निशाने पर करनी होती है, जिसका अपेक्षित परिणाम शत प्रतिशत लक्ष्य की प्राप्ति करता हो। इसी के साथ उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वही  प्रामाणिकता प्रदर्शित करनी होती है, जैसा वह चाहता है अथवा जैसा उसने सोच रखा होता है। इसी के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दुश्मन की नापाक हरकतों  को ठीक तरह से एक्सपोज … Read more

तुर्किए में शांति वार्ता आज राष्ट्रपति पुतिन ने बैठक से बनाई दूरी

अंकारा  व्लादिमीर पुतिन ने जब हाल ही में तुर्की में वोलोडिमिर जेलेंस्की के साथ शांति वार्ता में शामिल होने पर अपनी सहमति दी तो दुनिया को लगा कि रूस और यूक्रेन के बीच वर्षों से जारी संघर्ष का अंत हो सकता है। लेकिन अब जो खबर सामने आ रही है वह परेशान करने वाली है। कहा जा रहा है कि पुतिन ने तुर्की में प्रस्तावित यूक्रेन-रूस शांति वार्ता में फिलहाल शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है। वहीं, जेलेंस्की ने भी अपनी स्थिति साफ करते हुए कहा है कि जब तक पुतिन नहीं आते हैं तो वह भी इस वार्ता में शामिल नहीं होंगे। पुतिन के इस निर्णय के पीछे मुख्य वजह यह मानी जा रही है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस वार्ता में शामिल होने की कोशिश कर रहे थे। अगर दोनों देशों के बीच सहमति बनती है तो वह इसका श्रेय लेने की कोशिश करते। सूत्रों का मानना है कि पुतिन ट्रंप को कूटनीतिक स्तर पर किसी भी तरह की बढ़त नहीं देना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने न केवल खुद को इस वार्ता से दूर रखा, बल्कि अपने वरिष्ठ राजनयिकों को भी वार्ता में शामिल नहीं होने दिया। हालांकि, डिप्टी स्तर के कुछ मंत्रियों और अधिकारियों को जरूर भेजने की बात कही है। 14 मई को क्रेमलिन द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, रूस ने शांति वार्ता के लिए अपने प्रतिनिधिमंडल की सूची जारी कर दी है। इसमें ना तो पुतिन शामिल हो रहे हैं और ना ही विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव। रूसे ने किसी वरिष्ठ अधिकारी को भी इसमें भेजना का फैसला टाल दिया है। हालांकि एक प्रतिनिधिमंडल भेजने की बात जरूर कही है। जिसमें राष्ट्रपति के सलाहकार और प्रचार रणनीतिकार व्लादिमीर मेडिंस्की, उप विदेश मंत्री मिखाइल गैलुजिन, सैन्य खुफिया प्रमुख इगोर कोस्त्युकोव और उप रक्षा मंत्री अलेक्जेंडर फोमिन शामिल होंगे। पुतिन के अलावा किसी से बात नहीं करेंगे जेलेंस्की पुतिन के इस फैसल पर यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने तुर्की में व्लादिमीर पुतिन के साथ संभावित बैठक से पहले यह कहकर दांव बढ़ा दिया कि वह राष्ट्रपति के अलावा किसी अन्य रूसी प्रतिनिधि से बातचीत नहीं करेंगे। जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पुतिन से मिलने के आग्रह के बाद ही तुर्की की यात्रा करेंगे। सीएनएन ने जब उनसे बैठक के एजेंडे के बारे में पूछा तो जेलेंस्की ने कहा कि युद्धविराम समझौते के अलावा कुछ भी विफल ही साबित होगा। ऐसे में अगर दोनों देशों के प्रमुख के बगैर यह वार्ता होती भी है तो इसका खास संदेश नहीं जाएगा। यह भी एक कारण हालांकि एक तर्क भी दिया जा रहा है कि पुतिन द्वारा स्वयं को वार्ता से दूर रखना इस बात का संकेत हो सकता है कि रूस फिलहाल वार्ता को केवल एक औपचारिक प्रक्रिया के रूप में देख रहा है, ना कि वास्तविक समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम है। 2022 वाली वार्ता फिर से होगी शुरू? पुतिन ने युद्ध विराम के आह्वान को अस्वीकार करा और युद्ध विराम लागू होने से पहले शांति वार्ता शुरू करने पर दोर दिया है. वहीं जवाब में, ज़ेलेंस्की ने कहा है कि वह शांति वार्ता के लिए तुर्की जाएंगे और उन्होंने पुतिन को वहां मिलने के लिए आमंत्रित किया है. लेकिन पुतिन आज तुर्की नहीं जा रहे हैं. रूस ने कहा है कि 15 मई की वार्ता, फरवरी 2022 में यूक्रेन के खिलाफ रूस के पूर्ण पैमाने पर युद्ध की शुरुआत के समय तुर्की में आयोजित 2022 शांति वार्ता की बहाली होगी. जिससे अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रभाव की वजह से यूक्रेन पीछे हट गया था. क्या थी 2022 की डील? लीक हुए 2022 शांति मसौदा प्रस्ताव के मुताबिक दोनों पक्ष क्रीमिया को संधि से बाहर करने पर सहमत हुए, जिससे वह रूसी कब्जे में रहेगा और यूक्रेन उस पर रूसी संप्रभुता को मान्यता नहीं देगा. अन्य रूसी कब्जे वाले क्षेत्रों की स्थिति का निर्णय बाद में राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की और पुतिन के बीच होने वाली वार्ता में किया जाना था. इस संधि के तहत यूक्रेन कथित तौर पर नाटो या किसी अन्य सैन्य गठबंधन में शामिल होने की आकांक्षाओं को त्याग देगा, लेकिन यूरोपीय संघ में प्रवेश की अनुमति देगा. रूस ने सभी प्रतिबंधों को हटाने, कीव के भाषा और राष्ट्रीय पहचान से संबंधित कानूनों को निरस्त करने और यूक्रेन की सशस्त्र सेनाओं को सीमित करने की भी मांग की थी. recent visitors 49