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A grave injustice was done to the reserved category in the recruitment of civil judges from whom every section of society gets justice.

  • SC, ST और OBC के 148 में से सिर्फ 6 पद ही भरे, आरक्षित वर्ग के साथ यह सबसे बड़ा भेदभाव
  • 191 पदों पर 2022 में निकली थी भर्ती, अब आया परिणाम
  • सामान्य के 43 पदों में से 41 भर लिए, बाकी वर्गों को छोड़ दिया
  • SC-18 में से चयन-1, ST- 121 में से चयन-0, OBC- 9 में से चयन-5

भोपाल। भाजपा सरकार भले ही आरक्षित वर्ग को लुभाने के लिए बड़ेबड़े विज्ञापनों को दिखाकर हिमायती होने का डिंडोरा पीट रही है, लेकिन उसकी जमीनी हकीकत उससे बिल्कुल नजर नहीं आती है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण पिछले दिनों आए सिविल जज भर्ती परीक्षा के परिणामों की सूची में देखा जा सकता है। आरक्षित वर्ग के साथ यह भेदभाव अनुचित है।
पिछड़ा दलित महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष ददन सिंह यादव ने आरोप लगाते हुए कहा कि वैसे तो हमेशा से आरक्षित वर्ग के साथ शासन स्तर पर भेदभाव होता आया है, जो आज भी हो रहा है। जिससे आरक्षित वर्ग के सभी समुदायों में भारी आक्रोश है।
दरअसल, विगत दिनों सिविल जज 2022 की परीक्षा का परिणाम घोषित किया गया, जिसमें SC, ST और OBC वर्ग की पूरी तरह अनदेखी की गई है। कुल 191 पदों में से 121 पद ST वर्ग के थे, लेकिन एक भी अभ्यर्थी का चयन नहीं किया गया। 18 पद SC वर्ग के थे, जिनमें से केवल 1 अभ्यर्थी का चयन हुआ। OBC वर्ग के 9 पद थे, जिनमें से 5 अभ्यर्थियों का चयन किया गया, जबकि 43 अनारक्षित पदों में से 41 पद भर लिए गए। यानि आरक्षित वर्ग के कुल 148 पदों में से केवल 6 पद ही भरे गए। जिससे स्पष्ट होता है कि सरकारी सिस्टम सरकार की मंशा के अनुरूप किस तरीके से आरक्षण को खत्म करने पर तुला है। हमारा संघठन इस षड़यंत्र का कड़ा विरोध करता है।

महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री यादव ने कहा कि आज आरक्षित वर्ग में शिक्षित और प्रतिभाशाली युवाओं की कमी नहीं है, लेकिन सरकारी सिस्टम उन्हें आगे आने के लिए रोड़ा अटका रहा है, जिसको समय रहते सुधारना ही होगा। उन्होंने मांग की है कि मुख्यमंत्री इस मसले पर जनता के सामने आएं और जवाब दें। उन्हें ऐसे परिणाम देने वाले षड़यंत्रकारी अधिकारियों और उनकी भेदभाव वाली नीतियों पर नकेल कसना होगी। साथ ही तत्काल प्रभाव से सिविल जज 2022 के परिणामों पर रोक लगाते हुए परीक्षा निरस्त की जाए एवं पुनः केवल MPPSC से ही परीक्षा कराई जाए। नहीं तो हमारा संघठन पूरे प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन करेगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

नेता प्रतिपक्ष सिंघार को दिलाई उनकी ताकत याद, बड़े मंच पर मुद्दा उठाने की मांग

कुछ सामाजिक संघठनों ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार से गुहार लगाई है कि आप भी आरक्षित वर्ग से आते हैं, इसलिए आप इस मामले को प्रमुखता से संज्ञान लें, ताकि आरक्षित वर्ग को न्याय मिल सके। भीम आर्मी ने नेता प्रतिपक्ष से कहा कि है कि आप इस मुद्दे को तत्काल प्रभाव से उचित मंच पर उठाएँ और आरक्षित वर्ग के साथ हो रहे अन्याय को रोकें। अन्यथा, हमारा संगठन एक सप्ताह बाद हजारों कार्यकर्ताओं के साथ पुनः घेराव करने के लिए विवश होगा।

  • 2007 से पूर्व यही परीक्षा MPPSC द्वारा संचालित की जाती थी और आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का चयन भी होता था। अतः उच्च न्यायालय की चयन समिति से यह जिम्मेदारी वापस लेकर, अन्य राज्यों की तरह मध्यप्रदेश में भी पुनः MPPSC को सौंपी जाए।
  • उच्च न्यायालय की चयन समिति द्वारा लागू किए गए अव्यावहारिक नियमों को बदलते हुए MPPSC के पुराने अथवा व्यावहारिक नियम लागू कर परीक्षा पुनः कराई जाए।
  • सिविल जज 2022 के परिणामों पर रोक लगाते हुए परीक्षा निरस्त की जाए एवं पुनः केवल MPPSC से ही परीक्षा कराई जाए।
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