He announced a war in support of IAS Verma.
- 18 जनवरी को भोपाल जाम करेंगे आरक्षित वर्ग के 5 लाख लोग, दिखाएंगे ताकत
- वर्मा पर अवैधानिक कार्रवाई के खिलाफ ST/SC/OBC में भारी आक्रोश, जुल्मी कार्यवाही वापस करने की मांग
- आरोप : आदिवासी समाज की आवाज को दबाव में दवा रही मोहन सरकार
- बच्चों सहित सड़कों पर उतरने आदिवासी समेत संपूर्ण आरक्षित समाज ने दी धमकी
भोपाल। अजाक्स के प्रांताध्यक्ष एवं वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा के विरुद्ध की गई कार्यवाही से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के संयुक्त सामाजिक संगठनों में सरकार के खिलाफ दिनोंदिन नाराजगी बढ़ती जा रही है। सभी जिलों से आवाज उठने की खबरें लगातार आ रही हैं। संगठनों का आरोप है कि यह कार्रवाई सरकार की संकुचित मानसिकता का परिणाम है। सरकार वंचित वर्ग के ईमानदार अधिकारियों को निशाना बना रही है। लोगों का कहना है कि संतोष वर्मा को बदनाम करने की साजिश आदिवासी समाज का अपमान है, जिसे बर्दास्त नहीं किया जाएगा।
कलेक्टर ऑफिस तक निकला मार्च
13 दिसंबर को प्रदेश के सभी जिलों में धरना-प्रदर्शन किया गया। भोपाल में भी बड़ी संख्या में एससी-एसटी और ओबीसी के लोग सड़कों पर उतरे और राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपना विरोध दर्ज कराया। पदाधिकारियों का कहना है कि… “छेड़ा है तो छोड़ेंगे नहीं”। ईट का जवाब पत्थर से देंगे। एससी/एसटी/ओबीसी संयुक्त मोर्चा मध्य प्रदेश के मुख्य पदाधिकारी लोकेश मुजल्दा, महेंद्र लोदी और प्रियंका जाटव का कहना है कि यह कार्यवाही न केवल एक ईमानदार आदिवासी अधिकारी की गरिमा पर आघात है, बल्कि संविधान की मूल आत्मा- ‘समता, बंधुता और सामाजिक न्याय’ के विरुद्ध है।
आईएएस वर्मा सच्चे लोकसेवक और समाजसुधारक
23 नवंबर को अजाक्स अधिवेशन में आईएएस संतोष वर्मा ने सामाजिक समरसता, जाति व्यवस्था खत्म करने, रोटी-बेटी संबंध बनाने, हिंदू एकता और संविधान सर्वोपरि रखने की बात की थी। 27 मिनट के इस भाषण में से समाज विरोधी तत्वों ने 7 सेकंड की तोड़-मरोड़कर कट वीडियो बनाई और उसे प्रसारित किया। जिसके बाद तथाकथित सामाजिक संघटनों ने इस वक्तव्य को अपनी असिमता से जोड़ा और विरोध जताने लगे। जिसके दबाव में सरकार ने आईएएस वर्मा को बिना वीडियो के मूल भाव को समझे नोटिस थमा दिया, जो गलत है। आरक्षित वर्ग के संगठनों ने कहा कि “यह कार्यवाही संविधान, न्याय और आदिवासी सम्मान पर सीधा हमला है।” सयुंक्त मोर्चा के अनुसार आईएएस वर्मा ने संबोधन में जातिवाद उन्मूलन, मानवता की सर्वोच्चता, संविधान की प्रधानता तथा यह स्पष्ट किया कि प्रशासनिक पद पर पहुँचने के बावजूद सामाजिक भेदभाव स्वतः समाप्त नहीं होता है।
मोर्चा का आरोप है कि कुछ षड़यंत्रकारियों ने आईएएस वर्मा का 7 सेकंड की वीडियो क्लिप प्रचारित किया, जिससे समाज में भ्रम और वैमनस्यता फैली। इसके लिए प्रचारित करने वाले ही जिम्मेदार हैं।

वर्मा पर एकपक्षीय कार्यवाही से एससी-एसटी वर्ग में बड़ा आक्रोश
सयुंक्त मोर्चा ने कहा कि इस प्रकार का दुष्प्रचार लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए घातक है। आईएएस वर्मा पर एकपक्षीय कार्यवाही करते हुए उनके विरुद्ध विभागीय जाँच बैठा दी गई है। यह कार्यवाही समाज विशेष द्वारा फैलायी गई भ्रामक जानकारी के दबाव में की गई है। जो आदिवासी समाज की आवाज को दबाने का प्रयास है। यह कार्यवाही भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15(4), 16(4), 21, 38(2) एवं 46 की भावना के विपरीत है। यह अनुच्छेद समानता और वंचित वर्गों के संरक्षण की गारंटी देता है।
जयस समेत अन्य संगठनों ने दी चेतावनी… 18 जनवरी को भोपाल में 5 लाख लोगों का जंगी प्रदर्शन
अजाक्स, जयस समेत अन्य संगठनों ने ऐलान किया है कि 18 जनवरी 2026 को भोपाल में प्रदेश के सभी जिलों से 5 लाख से अधिक लोग जुटेंगे। इस जंगी आंदोलन में एससी-एसटी वर्ग के अधिकारियों और सामाजिक लोगों पर हो रहे दमनकारी जुल्म तथा वर्मा पर की गई कार्यवाही का विरोध जताएँगे। इसी दौरान सभी लोग संविधान की शपथ भी लेंगे। लोगों का कहना है कि अब किसी भी SC/ST/OBC अधिकारी पर अन्याय सहन नहीं करेंगे।” एससी/एसटी/ओबीसी संयुक्त मोर्चा मध्य प्रदेश के मुख्य पदाधिकारी लोकेश मुजल्दा, महेंद्र लोदी और प्रियंका जाटव ने चेतावनी दी है कि “आरक्षित वर्ग के अधिकारियों पर की जा रही प्रताड़ना तुरंत बंद करना होगी। नहीं तो मोहन सरकार को इसके परिणाम भुगतने होंगे।
आरक्षित वर्गों की लगातार हो रही उपेक्षा, मांगों पर तत्काल एक्शन ले सरकार
- आदिवासी संतोष वर्मा आईएएस की पूर्व पदस्थापना बहाल की जाए।
- 2003 से लंबित SC/ST/OBC बैकलॉग भर्ती शुरू की जाए।
- प्रमोशन में आरक्षण लागू करो।
- OBC पर 13% होल्ड हटाओ, जनसंख्या अनुपात आरक्षण लागू करो।
- आदिवासी क्षेत्रों में 5वीं अनुसूची लागू करो।
- संतोष वर्मा को धमकी देने वालों पर FIR दर्ज करो।
- नरोत्तम मिश्रा द्वारा आरक्षित वर्ग SC,ST,OBC को अपमानित करने पर कार्यवाही हो।
- संविधान व बाबा साहब का अपमान करने वाले अनिल मिश्रा पर एफआईआर दर्ज हो।
- प्रदेश में सामाजिक सौहार्द व कानून व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
- उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा सिविल जज परीक्षा-2022 के परिणामों की निष्पक्ष जाँच की जाए।

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