Tuesday, July 7, 2026 4:33 am

गीता प्रेस धार्मिक पुस्तकों के जरिये समाज में फैला रहा वर्ण, जाति, लिंग आधारित व्याप्त कटुता एवं वैमनष्यता

Geeta Press: Bitterness and animosity based on caste, gender is spreading in the society through religious books. भोपाल। हिन्दू धर्म में समाज के सभी वर्गों के उत्थान की बात कही गई है, लेकिन कुछ चाणक्य बुद्धि वालों ने हिन्दू धर्म की आड़ में समाज में द्वेष भावना फैला रहे हैं। यही वजह है कि आज हिन्दू समाज में जमकर बिखराव है। यह बात किसी से छिपी नहीं है। मीडिया में खबरें भी आये दिन सुर्खियां बनते हुए हम पढ़ और सुन रहे हैं। पुस्तकों के जरिये भी यह काम कुछ प्रकाशन बेधड़क और बेरोकटोक कर रहे हैं। इसमें गीता प्रेस की भूमिका सामने आ रही है। गीता प्रेस ने हिन्दू धर्म की कुछ धार्मिक पुस्तकों का प्रकाशन किया है। जिसके कुछ अंश भागो में वर्ण, जाति, लिंग आधारित व्याप्त कटुता एवं वैमनष्यता वाली बातें उल्लेखित हैं। जिससे समाज में भेदभाव की लकीर और लंबी हो रही है। यह बात मप्र कैडर के रिटायर्ड आईएएस राजा भैया प्रजापति ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघ संचालक मोहन भागवत-डा. हेडगेवार भवन, संघ बिल्डिंग, रोड, महल-नागपुर, महाराष्ट्र को भेजे पत्र में कही। उन्होंने यही पत्र गीता प्रेस-प्रबंध संचालक, गीता प्रेस, पी.ओ. गोरखपुर (उ.प्र.) को भी भेजा है। उन्होंने उक्त अंशों को हटाने तथा समाज में सामाजिक समरसता की भावना स्थापित करने की भी बात लिखी है। उन्होंने अपनी चिंता 5 बिंदुओं में व्यक्त की है। सामाजिक असमानता की खाई को पटना जरुरी 1. इस बात को सारा देश जानता है कि भारतवर्ष में हिन्दु समाज में वर्ण व्यवस्था तथा जाति व्यवस्था में व्याप्त असमानताओं के कारण एकता न होने से देश लंबे समय तक गुलाम रहा। सामाजिक असमानता तथा विषमताओं के कारण ही वर्तमान में सोशल मीडिया, समाचार पत्रों तथा समाचार चैनल्स में जातीय विद्वेष के बड़े-बड़े उदाहरण देखने को मिलते है। इस वर्ण व्यवस्था में महिलाओं को सम्मिलित मानते हुए करीब 95% प्रतिशत आबादी हिन्दु वर्णव्यवस्था में जातीय / वर्णनीय असमानता का शिकार है। शिक्षा के प्रचार – प्रसार से काफी हद तक सुधार भी परिलक्षित हुआ है, लेकिन अभी बहुत बड़े सुधार की आवश्यकता है। 2. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने अपना शताब्दी वर्ष मनाते हुए विज्ञान भवन, नई दिल्ली तथा नागपुर में कार्यक्रम करते हुए समाज में सामाजिक एकता के रूप में किये गये कार्यों का बखान किया है। फिर भी सामाजिक असमानता एवं विषमता अभी बरकरार है। अब समय आ गया है कि समय रहते सभी प्रकार की विषमताओं को खत्म करने के लिये भारत के सभी लोगों में समरसता तथा समान भ्रातृत्व की भावना का निर्माण कर वैज्ञानिक दृष्टिकोण उत्पन्न करने की जरूरत है, ताकि आने वाली पीढ़िया सामाजिक समरसता के साथ जी सकें। 3. देश में दो प्रकार का आरक्षण वर्तमान में लागू है। एक तो धर्म आधारित (जाति/वर्ण) व्यवस्था के तहत लगभग 5 हजार वर्ष से लागू आरक्षण जो कि एक सामाजिक प्रभुत्व के रूप में है। दूसरा विधि/कानून द्वारा स्थापित 75 वर्ष वाला एवं 35 साल वाला राजनैतिक / सरकारी नौकरियों मे आरक्षण। भविष्य मे धीरे-धीरे यह सब समाप्त हों उसके लिये यह जरूरी है कि पहले सामाजिक प्रभुत्त्व के रूप में बरकरार आरक्षण को समाप्त करते हुए कानून द्वारा स्थापित आरक्षण को धीरे-धीरे समाप्त किया जाए, लेकिन सबको समानता बरकरार करने के उपरान्त । 4. देश का सफल संचालन विधि द्वारा स्थापित कानूनों भर से नहीं होता है, बल्कि देश में व्याप्त परम्पराओ, रूढ़ियों एवं धर्म आधारित स्थापित मापदण्डो से भी होता है। वहीं धर्म आधारित जाति एवं वर्ण व्यवस्था एवं महिला असमानता के कारण व्यापक सुधार की जरूरत है। जिन धार्मिक पुस्तकों में वर्ण, जाति एवं लिंग के संबंध मे कटुता / वैमनष्यता के अंश निहित है उन अंशो को हटाने की नितान्त आवश्यकता है। 5. आशा है कि आप सामाजिक एकता स्थापित करने की कड़ी में समस्त वर्गों के सन्त, महात्माओं तथा समाज सुधारकों से समन्वय कराकर सामाजिक समरसता कायम कराएंगे। साथ ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघ संचालक के पद पर सभी वर्गो को क्रमशः प्रतिनिधित्व (नेतृत्व) दिलवायेंगे। recent visitors 101

IAS वर्मा के समर्थन में जंग छेड़ने का ऐलान, बोले… छेड़ा है तो छोड़ेंगे नहीं, परिणाम भुगतने ही होंगे

He announced a war in support of IAS Verma. भोपाल। अजाक्स के प्रांताध्यक्ष एवं वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा के विरुद्ध की गई कार्यवाही से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के संयुक्त सामाजिक संगठनों में सरकार के खिलाफ दिनोंदिन नाराजगी बढ़ती जा रही है। सभी जिलों से आवाज उठने की खबरें लगातार आ रही हैं। संगठनों का आरोप है कि यह कार्रवाई सरकार की संकुचित मानसिकता का परिणाम है। सरकार वंचित वर्ग के ईमानदार अधिकारियों को निशाना बना रही है। लोगों का कहना है कि संतोष वर्मा को बदनाम करने की साजिश आदिवासी समाज का अपमान है, जिसे बर्दास्त नहीं किया जाएगा। कलेक्टर ऑफिस तक निकला मार्च 13 दिसंबर को प्रदेश के सभी जिलों में धरना-प्रदर्शन किया गया। भोपाल में भी बड़ी संख्या में एससी-एसटी और ओबीसी के लोग सड़कों पर उतरे और राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपना विरोध दर्ज कराया। पदाधिकारियों का कहना है कि… “छेड़ा है तो छोड़ेंगे नहीं”। ईट का जवाब पत्थर से देंगे। एससी/एसटी/ओबीसी संयुक्त मोर्चा मध्य प्रदेश के मुख्य पदाधिकारी लोकेश मुजल्दा, महेंद्र लोदी और प्रियंका जाटव का कहना है कि यह कार्यवाही न केवल एक ईमानदार आदिवासी अधिकारी की गरिमा पर आघात है, बल्कि संविधान की मूल आत्मा- ‘समता, बंधुता और सामाजिक न्याय’ के विरुद्ध है। आईएएस वर्मा सच्चे लोकसेवक और समाजसुधारक 23 नवंबर को अजाक्स अधिवेशन में आईएएस संतोष वर्मा ने सामाजिक समरसता, जाति व्यवस्था खत्म करने, रोटी-बेटी संबंध बनाने, हिंदू एकता और संविधान सर्वोपरि रखने की बात की थी। 27 मिनट के इस भाषण में से समाज विरोधी तत्वों ने 7 सेकंड की तोड़-मरोड़कर कट वीडियो बनाई और उसे प्रसारित किया। जिसके बाद तथाकथित सामाजिक संघटनों ने इस वक्तव्य को अपनी असिमता से जोड़ा और विरोध जताने लगे। जिसके दबाव में सरकार ने आईएएस वर्मा को बिना वीडियो के मूल भाव को समझे नोटिस थमा दिया, जो गलत है। आरक्षित वर्ग के संगठनों ने कहा कि “यह कार्यवाही संविधान, न्याय और आदिवासी सम्मान पर सीधा हमला है।” सयुंक्त मोर्चा के अनुसार आईएएस वर्मा ने संबोधन में जातिवाद उन्मूलन, मानवता की सर्वोच्चता, संविधान की प्रधानता तथा यह स्पष्ट किया कि प्रशासनिक पद पर पहुँचने के बावजूद सामाजिक भेदभाव स्वतः समाप्त नहीं होता है।मोर्चा का आरोप है कि कुछ षड़यंत्रकारियों ने आईएएस वर्मा का 7 सेकंड की वीडियो क्लिप प्रचारित किया, जिससे समाज में भ्रम और वैमनस्यता फैली। इसके लिए प्रचारित करने वाले ही जिम्मेदार हैं। वर्मा पर एकपक्षीय कार्यवाही से एससी-एसटी वर्ग में बड़ा आक्रोश सयुंक्त मोर्चा ने कहा कि इस प्रकार का दुष्प्रचार लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए घातक है। आईएएस वर्मा पर एकपक्षीय कार्यवाही करते हुए उनके विरुद्ध विभागीय जाँच बैठा दी गई है। यह कार्यवाही समाज विशेष द्वारा फैलायी गई भ्रामक जानकारी के दबाव में की गई है। जो आदिवासी समाज की आवाज को दबाने का प्रयास है। यह कार्यवाही भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15(4), 16(4), 21, 38(2) एवं 46 की भावना के विपरीत है। यह अनुच्छेद समानता और वंचित वर्गों के संरक्षण की गारंटी देता है। जयस समेत अन्य संगठनों ने दी चेतावनी… 18 जनवरी को भोपाल में 5 लाख लोगों का जंगी प्रदर्शनअजाक्स, जयस समेत अन्य संगठनों ने ऐलान किया है कि 18 जनवरी 2026 को भोपाल में प्रदेश के सभी जिलों से 5 लाख से अधिक लोग जुटेंगे। इस जंगी आंदोलन में एससी-एसटी वर्ग के अधिकारियों और सामाजिक लोगों पर हो रहे दमनकारी जुल्म तथा वर्मा पर की गई कार्यवाही का विरोध जताएँगे। इसी दौरान सभी लोग संविधान की शपथ भी लेंगे। लोगों का कहना है कि अब किसी भी SC/ST/OBC अधिकारी पर अन्याय सहन नहीं करेंगे।” एससी/एसटी/ओबीसी संयुक्त मोर्चा मध्य प्रदेश के मुख्य पदाधिकारी लोकेश मुजल्दा, महेंद्र लोदी और प्रियंका जाटव ने चेतावनी दी है कि “आरक्षित वर्ग के अधिकारियों पर की जा रही प्रताड़ना तुरंत बंद करना होगी। नहीं तो मोहन सरकार को इसके परिणाम भुगतने होंगे। आरक्षित वर्गों की लगातार हो रही उपेक्षा, मांगों पर तत्काल एक्शन ले सरकार recent visitors 270