Is Bhopal drinking poison? Sewage water is seeping into the ‘Bada Talab’, raising the risk of deadly diseases.
माय सीक्रेट न्यूज ,प्रतिनिधि, भोपाल। वीआईपी रोड से खानूगांव की ओर जाते हुए कोहेफिजा स्क्वायर से ठीक पहले दाहिनी तरफ नगर निगम का एक सिवेज ट्रीटमेंट प्लांट बना हुआ है। वहां रुकते ही बदबू का झोंका रुकना दूभर बना देता है। देखने पर पता चलता है कि जिस सिरीन नदी (जो अब एक गंदा नाला है) के पानी को साफ करने के लिए वह शोधन संयंत्र लगा है उसका 60 प्रतिशत पानी प्लांट से पहले ही तालाब में गिर रहा है। यह बदबू उसी पानी की है।
प्लांट से थोड़ा आगे एक पतली सी जलधारा तालाब में गिर रही है, यह शोधन संयंत्र से निकला साफ किया पानी है जो सिरीन की क्षमता का 40 प्रतिशत हिस्सा भी नहीं है। यह अकेली जगह नहीं है जहां गंदा नाला बड़े तालाब में आकर मिल रहा हो। वीआइपी रोड पर ही नगर निगम के पंप हाउस के पास पुराने शहर से निकली एक सिवेज लाइन सीधे तालाब में खुल रही है।
बैरागढ़ का सीवर, सूरज नगर का नाला, बिशनखेड़ी का नाला और खानूगांव से आगे एक बड़ा नाला सीधे तालाब में छोड़ा जा रहा है। खानूगांव में तो निस्तारी और सिवेज के सभी छोटे-बड़े नाले सीधे तालाब में गिर रहे हैं। इसकी वजह से सतही पानी के इस अथाह स्रोत से भीषण बदबू उठ रही है।
तालाब के किनारों पर जलकुंभी का दलदल उग आया है जो बता रहा है कि इस पानी में मलजल की मात्रा कितनी बढ़ी हुई है। यह उस तालाब का हाल है जो भोपाल की जीवनरेखा कहा जाता है। नगर निगम इसी तालाब से पानी लेकर शहर की 30 प्रतिशत आबादी को पेयजल के रूप में आपूर्ति करता है।
पांच छोटे तालाब पहले से जहरीले
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की हालिया रिपोर्ट ने शहर के अन्य जल निकायों की डरावनी तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के मुताबिक, छोटे तालाब, शाहपुरा तालाब, मोतिया तालाब, मुंशी हुसैन खान तालाब और सिद्दीक हसन तालाब में फीकल कोलीफार्म बैक्टीरिया की मात्रा सामान्य से 1600 गुना अधिक पाई गई है। यह बैक्टीरिया सीधे तौर पर मानव मल-मूत्र में पैदा होता है।
इतनी भारी मात्रा में बैक्टीरिया की मौजूदगी यह दर्शाती है कि इन तालाबों का पानी अब छूने लायक भी नहीं बचा है। यह स्थिति न केवल संक्रामक बीमारियों को न्योता दे रही है, बल्कि भूजल को भी स्थायी रूप से प्रदूषित कर रही है।
तब महापौर बोलीं थी, उससे पानी नहीं पिलाते
शहर के पांच तालाबों में फीकल कोलीफार्म की मात्रा अधिक होने के सवाल पर महापौर मालती राय का कहना था कि हम इन तालाबों का पानी शहर में पेयजल के लिए सप्लाई नहीं करते हैं। लेकिन बड़े तालाब का पानी तो शहर के लोग पीते हैं। वहां यह जहर मिल रहा है और उसको रोकने के लिए कोई कोशिश निगम की ओर से नहीं दिख रही है।
प्रदूषण से मर रहा है जलीय जीवन
विशेषज्ञों का कहना है कि जो पानी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में शोधन के बाद छोड़ा जा रहा है उसमें भी सिर्फ कालीफार्म को ही खत्म किया जाता है। सीवेज में मेडिकल बायो वेस्ट, कीटनाशक और खरपतवार नाशक भी मिलते हैं, जिन्हें न तो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से खत्म किया जा सकता है और न ही वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से। इस दूषित पानी से जलीय जीवों की संख्या लगातार कम हो रही है।

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