Tuesday, July 7, 2026 12:04 am

नवा रायपुर में 40 एकड़ में बनेगा NMIMS, आबकारी नीति के प्रस्ताव को मंजूरी, आईटी और हेल्थ सेक्टर में भी साय कैबिनेट के बड़े फैसले

नवा रायपुर में 40 एकड़ में बनेगा NMIMS, आबकारी नीति के प्रस्ताव को मंजूरी, आईटी और हेल्थ सेक्टर में भी साय कैबिनेट के बड़े फैसले

NMIMS to be built on 40 acres in Nava Raipur, excise policy proposal approved, major decisions taken by the Cabinet in IT and health sectors too रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक ने छत्तीसगढ़ के भविष्य के लिए विकास का एक नया ब्लूप्रिंट तैयार किया है। इस मीटिंग में लिए गए चार प्रमुख निर्णयों ने न केवल औद्योगिक बल्कि शैक्षणिक और सामाजिक ढांचे को भी मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। नवा रायपुर बनेगा ‘एजुकेशन हब’राज्य सरकार ने नवा रायपुर में विश्वस्तरीय शिक्षा की नींव रखते हुए ख्याति प्राप्त संस्थान ‘श्री विले पारले कलावनी मंडल’ (SVKM) को 40 एकड़ भूमि आवंटित करने की स्वीकृति दी है। यहां विख्यात नरसी मोंजी प्रबंधन अध्ययन संस्थान (NMIMS) की स्थापना होगी। 90 वर्षों की लीज पर दी गई इस भूमि के माध्यम से छत्तीसगढ़ के छात्रों को अब उच्च गुणवत्ता वाली प्रबंधन और डॉक्टोरल शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा। आईटी और स्टार्टअप्स को मिलेगी नई उड़ानतकनीकी क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को ‘स्टार्टअप हब’ बनाने के लिए सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) के साथ हाथ मिलाया गया है। इसके तहत नवा रायपुर में चार नवीन उद्यमिता केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जो विशेष रूप से AI, मेडटेक (हर्बल और वन उत्पाद आधारित), स्मार्ट सिटी और स्मार्ट एग्री पर केंद्रित होंगे। अगले पांच वर्षों में 133 स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, एक ‘इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एवं विकास’ (ESDD) केंद्र भी बनेगा, जो हर साल 40 से अधिक एमएसएमई और हार्डवेयर स्टार्टअप्स को प्रोटोटाइप विकसित करने में मदद करेगा। स्वास्थ्य सुविधाओं का सुदृढ़ीकरणकैबिनेट ने राज्य के आम नागरिकों की सेहत को प्राथमिकता देते हुए शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में जांच सुविधाओं के विस्तार का फैसला लिया है। जिला अस्पतालों से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक की लैब का प्रभावी संचालन किया जाएगा, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी मरीजों को मानक स्तर की पैथोलॉजी सुविधाएं मिल सकें। इसके अतिरिक्त, मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ आबकारी नीति 2026-27 के प्रस्ताव को भी मंजूरी प्रदान की है। recent visitors 124

क्या जहर पी रहा है भोपाल? ‘बड़े तालाब’ में घुल रहा सीवर का पानी, जानलेवा बीमारियों का तेजी से बढ़ गया खतरा

क्या जहर पी रहा है भोपाल? ‘बड़े तालाब’ में घुल रहा सीवर का पानी, जानलेवा बीमारियों का तेजी से बढ़ गया खतरा

Is Bhopal drinking poison? Sewage water is seeping into the ‘Bada Talab’, raising the risk of deadly diseases. माय सीक्रेट न्यूज ,प्रतिनिधि, भोपाल। वीआईपी रोड से खानूगांव की ओर जाते हुए कोहेफिजा स्क्वायर से ठीक पहले दाहिनी तरफ नगर निगम का एक सिवेज ट्रीटमेंट प्लांट बना हुआ है। वहां रुकते ही बदबू का झोंका रुकना दूभर बना देता है। देखने पर पता चलता है कि जिस सिरीन नदी (जो अब एक गंदा नाला है) के पानी को साफ करने के लिए वह शोधन संयंत्र लगा है उसका 60 प्रतिशत पानी प्लांट से पहले ही तालाब में गिर रहा है। यह बदबू उसी पानी की है। प्लांट से थोड़ा आगे एक पतली सी जलधारा तालाब में गिर रही है, यह शोधन संयंत्र से निकला साफ किया पानी है जो सिरीन की क्षमता का 40 प्रतिशत हिस्सा भी नहीं है। यह अकेली जगह नहीं है जहां गंदा नाला बड़े तालाब में आकर मिल रहा हो। वीआइपी रोड पर ही नगर निगम के पंप हाउस के पास पुराने शहर से निकली एक सिवेज लाइन सीधे तालाब में खुल रही है। बैरागढ़ का सीवर, सूरज नगर का नाला, बिशनखेड़ी का नाला और खानूगांव से आगे एक बड़ा नाला सीधे तालाब में छोड़ा जा रहा है। खानूगांव में तो निस्तारी और सिवेज के सभी छोटे-बड़े नाले सीधे तालाब में गिर रहे हैं। इसकी वजह से सतही पानी के इस अथाह स्रोत से भीषण बदबू उठ रही है। तालाब के किनारों पर जलकुंभी का दलदल उग आया है जो बता रहा है कि इस पानी में मलजल की मात्रा कितनी बढ़ी हुई है। यह उस तालाब का हाल है जो भोपाल की जीवनरेखा कहा जाता है। नगर निगम इसी तालाब से पानी लेकर शहर की 30 प्रतिशत आबादी को पेयजल के रूप में आपूर्ति करता है। पांच छोटे तालाब पहले से जहरीलेनेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की हालिया रिपोर्ट ने शहर के अन्य जल निकायों की डरावनी तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के मुताबिक, छोटे तालाब, शाहपुरा तालाब, मोतिया तालाब, मुंशी हुसैन खान तालाब और सिद्दीक हसन तालाब में फीकल कोलीफार्म बैक्टीरिया की मात्रा सामान्य से 1600 गुना अधिक पाई गई है। यह बैक्टीरिया सीधे तौर पर मानव मल-मूत्र में पैदा होता है। इतनी भारी मात्रा में बैक्टीरिया की मौजूदगी यह दर्शाती है कि इन तालाबों का पानी अब छूने लायक भी नहीं बचा है। यह स्थिति न केवल संक्रामक बीमारियों को न्योता दे रही है, बल्कि भूजल को भी स्थायी रूप से प्रदूषित कर रही है। तब महापौर बोलीं थी, उससे पानी नहीं पिलातेशहर के पांच तालाबों में फीकल कोलीफार्म की मात्रा अधिक होने के सवाल पर महापौर मालती राय का कहना था कि हम इन तालाबों का पानी शहर में पेयजल के लिए सप्लाई नहीं करते हैं। लेकिन बड़े तालाब का पानी तो शहर के लोग पीते हैं। वहां यह जहर मिल रहा है और उसको रोकने के लिए कोई कोशिश निगम की ओर से नहीं दिख रही है। प्रदूषण से मर रहा है जलीय जीवनविशेषज्ञों का कहना है कि जो पानी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में शोधन के बाद छोड़ा जा रहा है उसमें भी सिर्फ कालीफार्म को ही खत्म किया जाता है। सीवेज में मेडिकल बायो वेस्ट, कीटनाशक और खरपतवार नाशक भी मिलते हैं, जिन्हें न तो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से खत्म किया जा सकता है और न ही वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से। इस दूषित पानी से जलीय जीवों की संख्या लगातार कम हो रही है। recent visitors 58

गूगल करेगा म.प्र. में आईटी, आईटीईएस और डेटा सेंटर में निवेश

Google to invest in IT, ITES and data centres in Madhya Pradesh गूगल के एशिया पैसिफिक क्षेत्र के प्रेसिडेंट संजय गुप्ता के साथ दावोस में मंगलवार को मध्यप्रदेश के अधिकारियों ने बैठक कर राज्य में आईटी, आईटीईएस सेक्टर और मौजूदा प्रस्तावित डेटा सेंटर परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की। गुप्ता ने मध्यप्रदेश में आईटी, आईटीईएस और डेटा सेंटर में निवेश की रूचि दिखाई। बैठक में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला सहित अधिकारी उपस्थित रहे। गूगल की ओर से राज्य में जेमिनी एआई (Gemini AI) के माध्यम से कृषि एवं शिक्षा क्षेत्रों में नवाचार और डिजिटल समाधान लागू करने की संभावनाओं पर भी विचार साझा किए गए। बैठक में राज्य शासन द्वारा आईटी एवं डेटा सेंटर परियोजनाओं के लिए पर्याप्त एवं सतत विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु हरित ऊर्जा आधारित नीति तैयार करने की योजना से अवगत कराया गया। साथ ही, गूगल जैसी वैश्विक कंपनियों की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने की मध्यप्रदेश की क्षमता, अनुकूल नीतिगत ढांचा और सहयोगी दृष्टिकोण को भी रेखांकित किया गया। गूगल के एशिया पैसिफिक क्षेत्र के प्रेसिडेंट संजय गुप्ता ने आईटी अवसंरचना, डिजिटल नवाचार और कौशल विकास के माध्यम से मध्यप्रदेश को एक उभरते तकनीकी केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में सहयोग दिए जाने पर सहमति व्यक्त की। recent visitors 54

धार भोजशाला: बसंत पंचमी पर नमाज का समय तय करने की दिग्विजय सिंह की मांग, शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील

धार भोजशाला: बसंत पंचमी पर नमाज का समय तय करने की दिग्विजय सिंह की मांग, शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील

Dhar Bhojshala: Digvijay Singh demands fixing the time for namaz on Basant Panchami, appeals to maintain peace and order धार जिले की ऐतिहासिक भोजशाला एक बार फिर प्रशासन और पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने है। वर्ष 2026 में बसंत पंचमी शुक्रवार यानि 23 जनवरी को पड़ रही है। यह संयोग पहले भी तीन बार 2006, 2013 और 2016 में बन चुका है और उन सभी मौकों पर क्षेत्र में तनावपूर्ण हालात देखने को मिले थे। ऐसे में इस बार पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था को लेकर खास सतर्कता बरती जा रही है। क्या कहा दिग्विजय सिंह ने?इस वर्ष बसंत पंचमी का त्योहार शुक्रवार को आ रहा है। पूर्व में भी आया है और केंद्र सरकार के निर्णय अनुसार धार जिला प्रशासन ने उसे शांति से दोनों पक्षों से मिल कर मनाने की व्यवस्था की थी। मैं प्रशासन व सरकार से ये कहना चाहूँगा कि ASI द्वारा 2003, 2013 व 2016 में पहले ही अपने दिए गए आदेश में यह सपष्ट कर चुका है कि जब भी कभी बसंत पंचमी का त्योहार और शुक्रवार की नमाज़ साथ में होती है तो बसंत पंचमी की पूजा सूर्योदय से लेकर 1 तक और उसके बाद 3:30 बजे से सूर्यास्त तक की जाएगी और दोपहर 1 – 3 का समय शुक्रवार की नमाज अदा करने के लिए छोड़ा जाएगा। इस स्थिति में सरकार व प्रशासन की ये ज़िम्मेदारी है ASI द्वारा पारित किए गए आदेश की पूर्ण पालन किया जाए और धार में अमन शांति का पैग़ाम दिए जाने की पूरी कोशिश करते हुए सांप्रदायिक उन्माद व अफ़वाह फैलाने वालो पर सख्त कार्यवाही की जाए। मैं सभी हिन्दू मुसलमान भाइयों से सांप्रदायिक सौहार्द बनाये रखने की अपील करता हूँ। हमारा प्रदेश अमन का प्रतीक है और सरकार व प्रशासन की ये नैतिक ज़िम्मेदारी है कि इस अमन को क़ानूनी रूप से स्थापित किया जाए। इस वर्ष बसंत पंचमी का त्योहार शुक्रवार को आ रहा है।पूर्व में भी आया है और केंद्र सरकार के निर्णय अनुसार धार जिला प्रशासन ने उसे शांति से दोनों पक्षों से मिल कर मनाने की व्यवस्था की थी।मैं प्रशासन व सरकार से ये कहना चाहूँगा कि ASI द्वारा 2003, 2013 व 2016 में पहले ही अपने दिए… जवानों ने निकाला फ्लैग मार्चपुलिस अधिकारियों के अनुसार किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए दोनों समुदायों के प्रतिनिधियों से लगातार संवाद किया जा रहा है। रविवार को एहतियात के तौर पर करीब 2000 जवानों ने शहर में फ्लैग मार्च निकाला । इसके साथ ही भोजशाला और आसपास के इलाकों में ड्रोन कैमरों और करीब एक हजार सीसीटीवी कैमरों के जरिए 24 घंटे निगरानी की जा रही है। recent visitors 60