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संभल

यूपी के संभल में बिजली विभाग ऐक्शन में हैं। बिजली विभाग की टीम ने सांसद जियाउर्रहमान बर्क के घर पर छापेमारी करते हुए बिजली मीटर में गड़बड़ी की आशंका के चलते बड़ी कार्रवाई की। इस दौरान एएसपी श्रीशचंद्र पुलिस बल और आरआरएफ के साथ मौके पर मौजूद रहे। टीम ने सांसद के घर पर लगे बिजली कनेक्शनों और उपकरणों की गहन जांच की। मीटरों की जांच की की है कि बिल जीरो कैसे आया? करीब एक घंटे की जांच के बाद टीम वापस लौट गई है। पुलिस बल अभी भी बल्ले के तिराहे पर तैनात है।

क्या है मामला

सपा सांसद के घर पर दो कनेक्शन हैं, जिनमें से प्रत्येक चार-चार किलोवाट का है। बीते एक साल में इन दोनों कनेक्शनों पर मात्र 14 हजार रुपये का बिजली बिल आया है। जांच में सामने आया कि दोनों कनेक्शनों के मीटर अलग-अलग समय पर लंबे समय तक बंद रहे, जिससे शून्य रीडिंग दर्ज हुई। एक मीटर पांच माह और दूसरा सात माह तक बंद रहा।

स्मार्ट मीटर की जांच में क्या मिला?

बिजली विभाग ने पुराने मीटरों को लैब जांच के लिए भेज दिया और घर पर आर्मर्ड केबल के साथ स्मार्ट मीटर लगाया। जांच में पाया गया कि एक मीटर पर शून्य लोड था, जबकि दूसरे पर 5.9 किलोवाट का लोड दर्ज हुआ।

घर के उपकरण और सौर ऊर्जा का विवरण

सांसद के अधिवक्ता कासिम जलाल ने बताया कि घर में 10 किलोवाट का सोलर पैनल और 5 किलोवाट का जनरेटर लगा है। घर में दो एयर कंडीशनर, आधा दर्जन पंखे, एक फ्रिज और लाइटें भी हैं। घर में केवल चार लोग ही रहने वाले हैं। बिजली कनेक्शन का न्यूनतम फिक्सक्ड चार्ज नियमानुसार जमा किया जा रहा है।

टीम की कार्रवाई और आगे की प्रक्रिया

जांच टीम ने एक घंटे तक गहन जांच की और सभी कनेक्शनों व उपकरणों का परीक्षण किया। जांच पूरी करने के बाद एसडीएम डॉ. वंदना मिश्रा भी मौके पर पहुंचीं। बिजली विभाग अब जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगा।

सांसद पर बढ़ रहा दबाव

बिजली चोरी मामले में सांसद जियाउर्रहमान बर्क और उनके परिवार पर शिकंजा कसता नजर आ रहा है। यदि मीटर में गड़बड़ी साबित होती है, तो विद्युत अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई हो सकती है। वहीं, सांसद और उनके अधिवक्ता ने सोलर पैनल और जनरेटर के उपयोग को लेकर अपनी सफाई दी है।

जांच में सामने आएगा सच

बिजली अधिकारियों का कहना है कि सांसद के घर पर दो कनेक्शन पर लगे उपकरण और उपभोग के अनुसार हर महीने कम से कम छह हजार का बिल आना चाहिए। बिल में इतना बड़ा अंतर देख कर विभाग ने पुराने मीटर को जांच के लिए भेजा है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि कहीं मीटरों से छेड़छाड़ तो नहीं की गई है। स्मार्ट मीटर में अब यह चेक किया जाएगा कि दोनों कनेक्शनों की खपत में इतनी असमानता क्यों है। सांसद के कनेक्शन पर पांच महीने व दादा के कनेक्शन पर सात महीने शून्य यूनिट दर्ज की गई है।

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