चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, कपिल सिब्बल बहुमत साथ नहीं तो पद पर क्यों?
Demand for Election Commissioner Gyanesh Kumar’s resignation; Kapil Sibal asks: Why hold the post if you don’t have the majority’s support? SIR News: वोटर लिस्ट में बदलाव को लेकर चल रही SIR की प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा में है। राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कई सवाल उठाए हैं। सिब्बल ने कहा कि चुनाव आयोग के अंदर ही कुछ फैसलों को लेकर दो चुनाव आयुक्तों ने कई बार आपत्ति जताई है। सिब्बल ने अपनी बात रखते हुए द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट का हवाला दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और काम करने के तरीके पर आपत्ति जताई। ये आपत्तियां वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने, नाम हटाने और वोटर लिस्ट से जुड़े कंप्यूटर सिस्टम जैसे मामलों पर थीं। आखिर SIR को लेकर सवाल क्या है?SIR यानी वोटर लिस्ट की खास तरीके से जांच। इसके तहत यह देखा जा रहा है कि वोटर लिस्ट में किसका नाम होना चाहिए और किस नाम में बदलाव की जरूरत है। इसी प्रक्रिया को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। सिब्बल का कहना है कि चुनाव आयोग में तीन सदस्य होते हैं। ऐसे में अगर दो चुनाव आयुक्त किसी फैसले पर आपत्ति जता रहे हैं तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि फैसला किस तरह लिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, संधू और जोशी ने कई मामलों में कहा कि कुछ फैसले उनकी जानकारी या मंजूरी के बिना लिए गए। दोनों ने वोटर लिस्ट के कंप्यूटर सिस्टम तक स्थानीय अधिकारियों की पहुंच को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि वोटर लिस्ट का काम जमीन पर मौजूद अधिकारियों के हाथ में रहना चाहिए। नए वोटर के फॉर्म पर भी सवालनए वोटर बनने के लिए Form 6 भरा जाता है। सिब्बल ने इस फॉर्म में हुए बदलाव का भी मुद्दा उठाया। रिपोर्ट के अनुसार, फॉर्म 6 में SIR से जुड़ा एक नया सवाल जोड़ा गया। इसमें आवेदक से पूछा गया कि उसका या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम पिछली SIR वाली वोटर लिस्ट में था या नहीं। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने मई में इस बदलाव को लेकर सवाल उठाया था और कहा था कि नियम बदले बिना फॉर्म में इस तरह का बदलाव नहीं किया जा सकता। बाद में सुखबीर सिंह संधू ने भी इस बदलाव को लेकर आपत्ति दर्ज की। वोटर लिस्ट से नाम हटाने का भी मुद्दासिब्बल ने वोटर लिस्ट से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का भी दावा किया। रिपोर्ट के मुताबिक, SIR के तहत 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 13 करोड़ से ज्यादा नामों पर असर पड़ा है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इतने सभी नाम अंतिम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। रिपोर्ट में गोवा का एक मामला भी सामने आया है। वहां 97 लोगों को स्थानीय चुनाव अधिकारियों ने वोटर लिस्ट में शामिल किए जाने के योग्य माना, लेकिन सॉफ्टवेयर में उन्हें वापस जोड़ने की सुविधा समय पर नहीं मिल सकी। इसके चलते उनके नाम अंतिम सूची में नहीं आ पाए। सिब्बल ने क्या मांग की?इन मुद्दों को लेकर सिब्बल ने CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने और SIR की प्रक्रिया रोकने की मांग की है। उन्होंने चुनाव आयोग के फैसलों और उसके काम करने के तरीके पर भी सवाल उठाए। वहीं, चुनाव आयोग के भीतर सामने आई आपत्तियों पर भी आयोग से सवाल पूछे गए थे, लेकिन आयोग की ओर से जवाब नहीं दिया गया। अब SIR को लेकर बहस सिर्फ वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने या हटाने तक सीमित नहीं रह गई है। चुनाव आयोग के अंदर दो आयुक्तों की ओर से दर्ज की गई आपत्तियों ने भी इस मामले को चर्चा में ला दिया है। recent visitors 17