Wednesday, July 15, 2026 11:57 pm

श्रीनगर : 25 जून से शुरू हो जाएगी अमरनाथ यात्रा, 9 अगस्त तक होगी यात्रा अवधि….

श्रीनगर  इस साल अमरनाथ यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। श्री अमरनाथ यात्रा 2025 के लिए तारीख सामने आ गई है। श्रद्धालुओं के लिए बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई शुरू होगी और 9 अगस्त तक चलेगी। 39 दिनों तक चलने वाली यात्रा के लिए प्रशासन ने खास इंतजाम किए हैं। श्री अमरनाथ यात्रा का शेड्यूल जारी हो गया। इसे लेकर श्रद्धालु 3 जुलाई से 9 अगस्त तक बाबा बर्फानी के दर्शन कर सकेंगे। अमरनाथ यात्रा 39 दिनों तक चलेगी। जानकारी के मुताबिक श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड (Shri Amarnath Ji Shrine Board) जल्द ही एडवांस पंजीकरण के लिए अधिकृत किए जाने वाले बैंकों की शाखाओं की विस्तार से जानकारी उपलब्ध करवाएगा। चूंकि पंजीकरण के लिए स्वास्थ्य प्रमाणपत्र जरूरी है। इसलिए देश भर के राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में स्वास्थ्य प्रमाणपत्र बनने वाले अस्पतालों व डॉक्टरों की टीमों की सूची जारी की जाएगी। आम तौर पर पंजाब नेशनल बैंक, यस बैंक और जम्मू कश्मीर बैंकों की करीब साढ़े पांच सौ शाखाओं से पंजीकरण करने की व्यवस्था होती है। बोर्ड जल्द ही ग्रुप पंजीकरण के लिए दिशा-निर्देश जारी करेगा। साथ ही ऑनलाइन पंजीकरण को भी खोला जाएगा। कितनी ऊंचाई पर हैं अमरनाथ गुफा? यात्रा स्कंद षष्ठी के शुभ अवसर पर शुरू होती है और श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर समाप्त होती है। वर्ष के इस समय के दौरान, तीर्थयात्रियों के लिए मौसम काफी सुखद रहता है। यह क्षेत्र वर्ष के बाकी समय बर्फ से ढका रहता है, इसलिए उन महीनों के दौरान यहां नहीं जाया जा सकता है। अमरनाथ की यात्रा श्रीनगर और पहलगाम से शुरू होती है और अमरनाथ गुफा तक जाती है जो 3,888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इन मार्गों से होती है अमरनाथ यात्रा 38 दिनों तक चलने वाली अमरनाथ यात्रा दो रास्तों से होती है। एक एास्ता अनंतनाग जिले में पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबा नुनवान-पहलगाम मार्ग का है जबकि दूसरा रास्ता गांदेरबल जिले में 14 किलोमीटर लंबा बालटाल से होते हुए है। श्रीनगर से 141 किलोमीटर दूर और समुद्र तल से 12,756 फीट की ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ यात्रा करने के लिए हर साल लाखों की तादाद में भक्त बाबा बर्फानी के दर्शन करने पहुंचते हैं। अमरनाथ यात्रा के लिए कहां से करें रजिस्ट्रेशनबाबा बर्फानी के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होता है। ऐसे में भक्त श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट https://jksasb.nic.in पर जाकर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। इसके अलावा अमरनाथ श्राइन बोर्ड की मोबाइल एप्लिकेशन से भी अमरनाथ यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है। यात्रा का मार्ग      मंद‍िर तक पहुंचने वाले मार्ग पर बेहद ही कठ‍िनाई होती है। लिहाजा इसल‍िए अमरनाथ यात्रा मार्ग को जुलाई-अगस्त के आसपास श्रावण के महीने में ही जनता के लिए खोला जाता है। सड़क के रास्ते अमरनाथ पहुंचने के लिए पहले जम्मू तक जाना होगा फिर जम्मू से श्रीनगर तक का सफर करना होता है। श्रीनगर से तीर्थयात्री पहलगाम या बालटाल पहुँचते हैं। पहलगाम या बालटाल तक आप किसी भी वाहन से पहुंच सकते हैं लेकिन इससे आगे का सफर आपको पैदल ही करना होता है। क्योंकि पहलगाम और बालटाल से ही श्री अमरनाथ यात्रा की शुरुआत होती है और पवित्र गुफा तक पहुंचने के लिए यहाँ से दो रास्ते निकलते हैं। पहलगाम से अमरनाथ की पवित्र गुफा की दूरी जहाँ करीब 48 किलोमीटर है वहीं बालटाल से गुफा की दूरी 14 किलोमीटर है। यहाँ से तीर्थयात्रियों को पैदल मार्ग से ही गुफा तक यात्रा करनी होती है।   चूँकि बालटाल से अमरनाथ गुफा तक की दूरी कम है और यह छोटा रूट है लिहाजा तीर्थयात्री कम समय में गुफा तक पहुंच सकते हैं। लेकिन यह रास्ता काफी कठिन और सीधी चढ़ाई वाला है इसलिए इस रूट से ज्यादा बुजुर्ग और बीमार नहीं जाते हैं। जबकि बात करें पहलगाम रूट की तो यह अमरनाथ यात्रा का सबसे पुराना और ऐतिहासिक रूट है। इस रूट से गुफा तक पहुंचने में करीब 3 दिन लगते हैं। लेकिन यह ज्यादा कठिन नहीं है। पहलगाम से पहला पड़ाव चंदनवाड़ी का आता है जो पहलगाम बेस कैंप से करीब 16 किलोमीटर दूर है यहां तक रास्ता लगभग सपाट होता है इसके बाद चढ़ाई शुरू होती है। इससे अगला स्टॉप 3 किलोमीटर आगे पिस्सू टॉप है। तीसरा पड़ाव शेषनाग है जो पिस्सू टॉप से करीब 9 किलोमीटर दूर है। शेषनाग के बाद अगला पड़ाव पंचतरणी का आता है जो शेषनाग से 14 किलोमीटर दूर है। पंचतरणी से पवित्र गुफा केवल 6 किलोमीटर दूर रह जाती है। पिछले साल 29 जून से शुरू हुई थी यात्रा पिछले साल अमरनाथ यात्रा के लिए पहला जत्था 29 जून को रवाना हुआ था. यह यात्रा रक्षाबंधन के दिन यानी 19 अगस्त तक चली थी. पिछले साल श्रद्धालुओं की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे. जम्मू-कश्मीर पुलिस की सुरक्षा विंग ने जम्मू में अमरनाथ बेस कैंप के आसपास के इलाके में तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम किए थे. recent visitors 39

अमरनाथ यात्रा पर 1112 श्रद्धालुओं का जत्था रवाना, 36 दिनों में 4.90 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किए बाबा बर्फानी के दर्शन

श्रीनगर श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (एसएएसबी) के अधिकारियों ने बताया कि पिछले 36 दिनों में 4.90 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने अमरनाथ यात्रा के दर्शन किए हैं। रविवार को 1,112 तीर्थयात्रियों का एक नया जत्था जम्मू से कश्मीर के लिए रवाना हुआ। 1,112 श्रद्धालुओं का जत्था भगवती नगर यात्री निवास से दो सुरक्षा काफिलों में घाटी के लिए रवाना हुआ। अधिकारियों ने बताया, “इनमें से 11 वाहनों का पहला काफिला 204 यात्रियों को लेकर उत्तरी कश्मीर के बालटाल बेस कैंप के लिए रवाना हुआ, जबकि 39 वाहनों का दूसरा काफिला 908 तीर्थयात्रियों को लेकर दक्षिण कश्मीर के नुनवान (पहलगाम) बेस कैंप के लिए रवाना हुआ। सुबह गंदेरबल जिले के काव चेरवान गांव में श्रीनगर-लेह राजमार्ग पर बादल फटने से श्रीनगर से बालटाल बेस कैंप जाने वाला रास्ता अवरुद्ध हो गया।अधिकारियों ने बताया कि मलबा हटाने का काम चल रहा है और जब तक यात्रियों का काफिला गंदेरबल जिले में पहुंचेगा, तब तक बालटाल बेस कैंप और आगे लद्दाख क्षेत्र तक राजमार्ग बहाल हो जाएगा। जम्मू से लेकर दोनों बेस कैंपों तक 350 किलोमीटर से अधिक लंबे मार्ग पर पुलिस और सीएपीएफ सहित बड़ी संख्या में सुरक्षा बल चौबीसों घंटे ड्यूटी कर रहे हैं, ताकि तीर्थयात्रियों के लिए मार्ग सुरक्षित हो सके। इसके अलावा, यात्रियों की सुरक्षा के लिए ट्रांजिट कैंप, बेस कैंप और गुफा मंदिर में पर्याप्त संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। स्थानीय लोग यह सुनिश्चित करने में पीछे नहीं हैं कि यात्रियों को पहाड़ी यात्रा को आसानी से करने में सहायता मिले। स्थानीय लोग तीर्थयात्रियों के लिए टट्टू उपलब्ध कराते हैं और अक्सर कमजोर और अशक्त भक्तों को अपनी पीठ पर ढोकर गुफा मंदिर ले जाते हैं। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की अध्यक्षता में श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (एसएएसबी) के अधिकारी पेशेवर दक्षता के साथ यात्रा के मामलों का प्रबंधन कर रहे हैं। इन सभी ने मिलकर इस वर्ष हिमालय के सबसे कठिन और जोखिम भरे पहाड़ी इलाकों से होकर गुफा मंदिर की सुरक्षित, सुचारू और परेशानी मुक्त तीर्थयात्रा सुनिश्चित की है। गुफा मंदिर में बर्फ की एक संरचना है जो चंद्रमा के चरणों के साथ घटती-बढ़ती रहती है। भक्तों का मानना ​​है कि यह बर्फ की संरचना भगवान शिव की पौराणिक शक्तियों का प्रतीक है। यह गुफा कश्मीर हिमालय में समुद्र तल से 3,888 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। भक्त पारंपरिक दक्षिण कश्मीर पहलगाम मार्ग या उत्तर कश्मीर बालटाल मार्ग से गुफा मंदिर तक पहुँचते हैं। पहलगाम-गुफा मंदिर की धुरी 48 किलोमीटर लंबी है और तीर्थयात्रियों को मंदिर तक पहुँचने में 4-5 दिन लगते हैं। बालटाल-गुफा मंदिर की धुरी 14 किलोमीटर लंबी है और तीर्थयात्रियों को ‘दर्शन’ करने और बेस कैंप पर लौटने में एक दिन लगता है। उत्तर कश्मीर मार्ग पर बालटाल और दक्षिण कश्मीर मार्ग पर चंदनवारी दोनों जगहों पर तीर्थयात्रियों के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएँ भी उपलब्ध हैं। इस वर्ष की यात्रा 52 दिनों के बाद 19 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा और रक्षा बंधन त्योहारों के साथ समाप्त होगी।   recent visitors 112

अमरनाथ यात्राः 152 महिलाओं सहित 990 से अधिक तीर्थ यात्रियों का एक और जत्था जम्मू से रवाना

जम्मू  152 महिलाओं सहित 990 से अधिक तीर्थयात्रियों का एक और छोटा जत्था शनिवार सुबह जम्मू के भगवती नगर स्थित आधार शिविर से कश्मीर के दो मुख्य आधार शिविरों के लिए रवाना हुआ। अमरनाथ यात्रा के लिए 41 साधु और नौ साध्वियाँ सहित 991 तीर्थयात्रियों का 37वां जत्था कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आज सुबह 3.30 बजे भगवती नगर बेस कैंप से घाटी के लिए रवाना हुए। कुल 991 तीथयात्रियों में से 815 तीर्थयात्री पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबे पहलगाम मार्ग की ओर जा रहे हैं, जबकि 176 यात्रियों ने 14 किलोमीटर लंबे बालटाल मार्ग का विकल्प चुना है। 29 जून को अनंतनाग जिले के पहलगाम और गांदरबल जिले के बालटाल के जुड़वां आधार शिविरों से 52 दिवसीय यात्रा शुरू होने के बाद से जम्मू के भगवती नगर आधार शिविर से रवाना होने वाले श्रद्धालुओं का यह सबसे छोटा जत्था था। अब तक 4.85 लाख से अधिक तीर्थयात्री 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ गुफा मंदिर में बर्फ के बने भगवान शिव के दर्शन कर चुके हैं। अधिकारियों ने बताया कि लगभग 5,000 तीर्थयात्री अभी भी प्रतिदिन गुफा में पूजा करने के लिए आ रहे हैं। तीर्थयात्रा 14 अगस्त को अपने अंतिम चरण में प्रवेश करेगी, जब भगवान शिव की पवित्र छड़ी ‘छड़ी मुबारक’ पहलगाम में यात्रा में शामिल होगी।     recent visitors 93

अमरनाथ दर्शन के लिए 1 हजार 221 यात्रियों का एक और जत्था यात्रा के लिए रवाना

जम्मू  अमरनाथ यात्रा 29 जून से बालटाल और पहलगाम मार्ग पर बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था के बीच जारी है. गुरुवार 1अगस्त को 1221 यात्रियों को लेकर 36वां जत्था जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से अमरनाथ यात्रा के लिए रवाना हुआ. एक अधिकारी ने बताया कि 35वें दिन 1221 यात्री 54 वाहनों में जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से कश्मीर घाटी के पहलगाम और बालटाल आधार शिविरों में पहुंचे और जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा बलों की निगरानी में अमरनाथ पवित्र गुफा में पूजा-अर्चना किए. गुरुवार सुबह जम्मू से घाटी की ओर रवाना हुए यात्रियों में 958 पुरुष, 322 महिलाएं, 6 बच्चे, 32 साधु और 3 साध्वियां शामिल थीं. इनमें 395 तीर्थयात्री बालटाल मार्ग से और 826 तीर्थयात्री पहलगाम मार्ग से क्रमशः 21 और 33 वाहनों में सवार होकर गए. अधिकारियों के अनुसार 29 जून को अमरनाथ यात्रा शुरू होने के बाद से अब तक 4.80 लाख से अधिक तीर्थयात्री अमरनाथ की पवित्र गुफा में दर्शन कर चुके हैं. तीर्थयात्रियों का 35वां जत्था बुधवार को कश्मीर हिमालय में गुफा मंदिर की यात्रा शुरू करने के लिए बालटाल और नुनवान में जुड़वां आधार शिविरों से रवाना हुआ. यात्रियों के नए जत्थे ने सुबह-सुबह पारंपरिक 48 किलोमीटर नुनवान-पहलगाम मार्ग और 14 किलोमीटर बालटाल मार्ग से अपनी यात्रा शुरू की. 52 दिवसीय अमरनाथ यात्रा 29 जून से शुरू होकर 19 अगस्त तक जारी रहेगी. recent visitors 124

बाबा बर्फानी के 33 दिनों में 4.76 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

श्रीनगर अमरनाथ यात्रा शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ रही है। पिछले 33 दिनों में 4.76 लाख से अधिक तीर्थयात्री अमरनाथ यात्रा कर चुके हैं। अधिकारियों ने बताया कि कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच तीर्थयात्रा सुचारू रूप से चल रही है। अमरनाथ यात्रा 29 जून को शुरू हुई थी। यह 52 दिनों के बाद 19 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन के त्यौहार के साथ समाप्त होगी। अधिकारियों ने गुरुवार को बताया, कल यानी बुधवार को 5 हजार से ज्यादा लोगों ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए। 1,295 यात्रियों का एक नया जत्था गुरुवार सुबह 3:32 बजे दो सुरक्षा काफिलों में जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से घाटी के लिए रवाना हुआ।     33 दिनों में 4.76 लाख श्रद्धालुओं ने किये बाबा बर्फानी के दर्शन     अमरनाथ यात्रा 29 जून को शुरू हुई थी     19 अगस्त को रक्षाबंधन के त्यौहार के साथ समाप्त होगी 1,295 यात्रियों का एक नया जत्था हुआ रवाना 15 वाहनों का पहला सुरक्षा काफिला 349 यात्रियों को लेकर उत्तरी कश्मीर के बालटाल बेस कैंप के लिए रवाना हुआ, जबकि 33 वाहनों का दूसरा काफिला 946 यात्रियों को लेकर दक्षिण कश्मीर के नुनवान बेस कैंप के लिए रवाना हुआ। पवित्र छड़ी के संरक्षक स्वामी दीपेंद्र गिरि ने बताया कि 9 अगस्त को भगवान शिव की छड़ी श्रीनगर शहर के श्री अमरेश्वर दशनामी अखाड़ा मंदिर में अपने स्थान से आगे बढ़ेगी। 14 अगस्त को पहलगाम से पवित्र गुफा मंदिर के लिए रवाना होगी। सुरक्षा, सामुदायिक लंगर, पारगमन और बेस कैंपों की व्यवस्था तथा जम्मू से कश्मीर तक राजमार्ग पर सुरक्षा बलों की तैनाती ने इस साल सुरक्षित, सुचारू और परेशानी मुक्त यात्रा सुनिश्चित की है। गुफा मंदिर में बर्फ की एक संरचना है जो चंद्रमा के चरणों के साथ घटती-बढ़ती रहती है। भक्तों का मानना है कि यह बर्फ की संरचना भगवान शिव की पौराणिक शक्तियों का प्रतीक है। यह गुफा कश्मीर हिमालय में समुद्र तल से 3.888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। भक्त या तो पारंपरिक दक्षिण कश्मीर पहलगाम मार्ग से या फिर उत्तर कश्मीर बालटाल मार्ग से गुफा मंदिर तक पहुंचते हैं। जानें, गुफा मार्ग से बाबा बर्फानी तक पहुंचने में कितने दिन लगते हैं पारंपरिक पहलगाम गुफा मंदिर मार्ग 48 किलोमीटर लंबा है। जिससे बाबा बर्फानी तक पहुंचने में 4 से 5 दिन लग जाते हैं। दूसरा मार्ग बालटाल का है। ये 14 किलोमीटर लंबा है। इस मार्ग का चयन करने वाले लोग ‘दर्शन’ करने के बाद उसी दिन आधार शिविर लौट आते हैं। बता दें कि उत्तरी कश्मीर मार्ग पर बालटाल और दक्षिण कश्मीर मार्ग पर चंदनवाड़ी में तीर्थयात्रियों के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं भी उपलब्ध हैं। recent visitors 216