पाकिस्तान के बाद बांग्लादेश भी IPL से हो रहा ‘साइड लाइन’, किसी ने नहीं खरीदा एक भी खिलाडी

 मुंबई इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2025 सीजन का मेगा ऑक्शन सोमवार (25 नवंबर) को सऊदी अरब के जेद्दा में खत्म हुआ. दो दिन तक चले इस मेगा ऑक्शन में 10 टीमों ने 639.15 करोड़ रुपये खर्च कर कुल 182 खिलाड़ी खरीदे. इस बार जहां ऋषभ पंत और श्रेयस अय्यर ने इतिहास रच दिया है. लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) ने 27 करोड़ में खरीदा. इस तरह वो IPL इतिहास के सबसे मंहगे क्रिकेटर बन गए हैं. दूसरे सबसे मंहगे क्रिकेटर श्रेयस बने, जिन्हें पंजाब किंग्स ने 26.75 करोड़ में खरीदा. वहीं दूसरी ओर एक देश ऐसा भी रहा है, जिसका कोई खिलाड़ी नहीं बिका. बड़ी बात तो यह रही कि इस देश के 12 प्लेयर नीलामी में उतरे थे, लेकिन 2 खिलाड़ियों को छोड़कर किसी और का नाम भी बोली के लिए नहीं लिया गया. पाकिस्तान के बाद बांग्लादेश भी हो रहा 'साइड लाइन' इस तरह कह सकते हैं कि इस देश को 'चुपचाप' साइड लाइन कर दिया गया. हम बात कर रहे हैं बांग्लादेश की, जहां तख्तापलट के बाद हिंदुओं पर अत्याचार का मामला काफी गहराता जा रहा है. हाल ही में बांग्लादेश में हिंदू पुजारी और इस्कॉन के पूर्व प्रमुख चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी को गिरफ्तार किया गया है, जिस पर हंगामा मचा हुआ है. इसी बीच IPL का मेगा ऑक्शन आ गया, जिसमें 12 बांग्लादेशी क्रिकेटर्स को शॉर्टलिस्ट किया गया था. इनमें मुस्ताफिजुर रहमान और रिशाद हुसैन का नाम ही बोली के लिए आया था, लेकिन उन्हें किसी ने नहीं खरीदा. बाकी 10 खिलाड़ियों में लिटन दास, तस्कीन अहमद, शाकिब अल हसन, मेहदी हसन मिराज, शोरिफुल इस्लाम और तंजीम हसन साकिब जैसे स्टार भी शामिल रहे. मगर इनमें से किसी का भी नाम बोली तक नहीं पहुंचा. किसी ने भी इनको नहीं खरीदा. इस तरह कह सकते हैं कि पाकिस्तान के बाद अब बांग्लादेश भी IPL से साइड लाइन होता जा रहा है. यदि ऐसा ही चलता रहा तो भविष्य में बांग्लादेशी क्रिकेटर्स पर भी IPL में बाहर रहने का खतरा मंडरा सकता है. इस लिस्ट के जरिए जानिए कौन सा बांग्लादेशी प्लेयर किस बेस प्राइस के साथ IPL नीलामी में उतरा था. IPL मेगा ऑक्शन में उतरने वाले बांग्लादेशी क्रिकेटर बांग्लादेशी प्लेयर बेस प्राइस (INR) मुस्ताफिजुर रहमान (अनसोल्ड) 2 करोड़ तस्कीन अहमद 1 करोड़ शाकिब अल हसन 1 करोड़ मेहदी हसन मिराज 1 करोड़ शोरिफुल इस्लाम 75 लाख तंजीम हसन साकिब 75 लाख मेहदी हसन 75 लाख नाहिद राणा 75 लाख रिशाद हुसैन (अनसोल्ड) 75 लाख लिटन दास 75 लाख तौहीद हृदोय 75 लाख हसन महमूद 75 लाख एक ही IPL सीजन खेल सके पाकिस्तानी क्रिकेटर बता दें कि IPL का पहला सीजन 2008 में खेला गया था. तब पाकिस्तान के कुल 11 खिलाड़ी आईपीएल में खेले थे. 2008 आईपीएल सीजन के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते अच्छे नहीं रहे और राजनीतिक तनाव के चलते पाकिस्तानी प्लेयर्स को आईपीएल में मौका नहीं दिया गया है. इस तरह पाकिस्तानी खिलाड़ियों को आईपीएल के पहले यानी 2008 सीजन में पहली और आखिरी बार मौका मिला था. IPL के पहले सीजन में 11 पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने धमाल मचाया था. यह प्लेयर सलमान बट, शोएब अख्तर, मोहम्मद हफीज, उमर गुल, कामरान अकमल, यूनुस खान, सोहेल तनवीर, मोहम्मद आसिफ, शोएब मलिक, शाहिद आफरीदी और मिस्बाह उल हक हैं. तो क्या बांग्लादेशी क्रिकेटर्स को जान-बूझकर अनदेखा किया गया है, क्योंकि ऑक्शन के बाद उनकी बोली तक नहीं लगाई गई। शाकिब अल हसन जैसे क्रिकेटर, जो पहले आईपीएल में बांग्लादेश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं, उन्हें इस बार खरीदार नहीं मिल पाए, जिससे निराशा और बढ़ गई। हालांकि, कई प्रशंसकों का कहना है, कि बांग्लादेशी क्रिकेटर्स ने पिछले दिनों काफी खराब खेल दिखाया है और ना बिकने की वजह उनका प्रदर्शन है, ना की बांग्लादेश की मौजूदा हालात से कोई लेना देना है। बांग्लादेश ने पिछले दिनों जब भारत के साथ तीन टी-20 मैच खेले थे, उस दौरान उनका काफी खराब प्रदर्शन रहा था और ना ही बल्लेबाज अपना कोई प्रभाव छोड़ पाए थे और ना ही गेंदबाज। बांग्लादेश में हिंदुओं पर लगातार हो रहे हैं हमले विवाद को और हवा देने वाली बात यह है कि ढाका में हिंदू नेता चिन्मय कृष्ण दास प्रभु की हाल ही में हुई गिरफ़्तारी ने बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रहे व्यवहार को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। पिछले कुछ सालों में बांग्लादेश में हिंदू समुदाय को हमलों, उनकी संपत्ति के विनाश और व्यवस्थागत भेदभाव का सामना करना पड़ा है, जिससे अशांति बढ़ रही है।     भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। कई लोग आईपीएल फ्रैंचाइजी से अल्पसंख्यकों पर हमलों में कथित मिलीभगत के कारण बांग्लादेशी खिलाड़ियों का बहिष्कार करने का आग्रह कर रहे हैं। एक यूजर ने कहा, "अगर आतंकवाद के कारण पाकिस्तान को आईपीएल से बाहर रखा जाता है, तो बांग्लादेश को हिंदुओं पर अत्याचार करने के लिए इसी तरह के परिणाम भुगतने चाहिए।" बांग्लादेशी खिलाड़ियों को बाहर रखने से खेल और राजनीति के बीच के संबंध की ओर ध्यान खिंचा है। आईपीएल ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए पाकिस्तानी खिलाड़ियों को बाहर रखा है, लेकिन यह घटना इस बात पर प्रकाश डालती है, कि किस तरह व्यापक सामाजिक-राजनीतिक मुद्दे खिलाड़ियों के चयन को प्रभावित कर सकते हैं।   recent visitors 80

वेस्टइंडीज के खिलाफ बांग्लादेश ने बचाया फॉलोआन

नॉर्थ साउंड (एंटीगा). बांग्लादेश की टीम वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले क्रिकेट टेस्ट के तीसरे दिन फॉलोआन से बचने में सफल रही लेकिन टीम अब भी 181 रन से पीछे है जबकि उसका सिर्फ एक विकेट बचा है। खराब रोशनी के कारण जब खेल रोका गया तब बांग्लादेश ने पहली पारी में नौ विकेट पर 269 रन बना लिए थे। वेस्टइंडीज ने पहली पारी नौ विकेट पर 450 रन बनाकर घोषित की थी। दिन का खेल खत्म होने पर तास्किन अहमद 11 जबकि शरीफुल इस्लाम पांच रन बनाकर खेल रहे थे। वेस्टइंडीज की ओर से अल्जारी जोसेफ ने 69 रन देकर तीन विकेट चटकाए जबकि वेस्टइंडीज की पारी में शतक जड़ने वाले जस्टिन ग्रीव्स (34 रन पर दो विकेट) और जेडन सील्स (42 रन पर दो विकेट) ने भी दो-दो विकेट हासिल किए। बांग्लादेश ने दिन की शुरुआत दो विकेट पर 40 रन से की और उसकी तरफ से जाकिर अली (53) और मोमीनुल हक (50) ने अर्धशतक जड़े। लिटन दास ने भी 40 रन की उपयोग पारी खेली लेकिन कोई भी बल्लेबाज अच्छी शुरुआत को बड़ी पारी में नहीं बदल पाया। recent visitors 70

तख्तापलट के बाद बांग्लादेश की सत्ता संभाल रही अंतरिम सरकार लगातार कट्टरपंथ की ओर झुकाव

ढाका शेख हसीना के तख्तापलट के बाद बांग्लादेश की सत्ता संभाल रही अंतरिम सरकार लगातार कट्टरपंथ की ओर झुकाव दिखा रही है। देश की स्थापना करने वाले शेख मुजीबुर रहमान के अपमान से लेकर बंगाली राष्ट्रवाद तक से अब किनारा किया जा रहा है और पाकिस्तान की विचारधारा की तरफ झुकाव बढ़ा है। इस बीच बांग्लादेश सरकार ने कहा है कि देश में सेकुलरिज्म की ही कोई जरूरत नहीं है। बांग्लादेश के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद असदुज्जमां ने ऐसा कहा है। बांग्लादेशी अखबार Prothom Alo के अनुसार हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान असदुज्जमां ने यह बात कही। उन्होंने हाई कोर्ट में देश के संविधान में 15वें संशोधन के खिलाफ दायर अर्जी पर सुनवाई के दौरान ऐसा कहा। यह संविधान संशोधन शेख हसीना सरकार के दौर में 3 जुलाई, 2011 को हुआ था। इसी संशोधन के तहत देश को सेकुलर घोषित किया गया था और शेख मुजीबुर रहमान को राष्ट्रपिता माना गया था। महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने को भी इसके तहत मंजूरी मिली थी। एक तरह से उस संविधान संशोधन को बांग्लादेश की राजनीति में बड़े बदलाव के तौर पर देखा जाता है। अब उसे ही हटाने की तैयारी है। बांग्लादेश के अटॉर्नी जनरल ने अदालत में कहा कि यहां तो 90 फीसदी आबादी मुसलमानों की है। फिर सेकुलरिज्म जैसी चीज की यहां क्या जरूरत है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति संविधान के अनुच्छेद VIII में सेकुलरिज्म को रखना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले तो अल्लाह पर भरोसा रखने की बात कही जाती थी। अटॉर्नी जनरल ने मोहम्मद यूनुस सरकार से अपील की है कि इस संविधान संशोधन को खत्म किया जाए और पहले वाले नियम ही लागू किए जाएं। केस की सुनवाई के दौरान बांग्लादेश के अटॉर्नी जनरल ने कहा कि हमारे देश का आधिकारिक धर्म तो इस्लाम ही है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि देश में हिंदू समेत तमाम अल्पसंख्यक रहते हैं तो उन्हें भी अधिकार है कि वे अपने तरीके से धर्म का पालन कर सकें और पूजा-पाठ करें। हालात यह हैं कि नई सरकार अब संविधान में बंगाली राष्ट्रवाद को भी हटाने की बात कर रही है। बांग्लादेश के अटॉर्नी जनरल ने इसे लेकर कहा कि संविधान के आर्टिकल 9 में बंगाली राष्ट्रवाद की बात कही गई है, लेकिन यह गलत है। ऐसा करना तो उन दूसरी भाषाओं के लोगों का अपमान है, जिन्होंने स्वतंत्रता के संघर्ष में हिस्सा लिया था। इसलिए इसे हटा देना चाहिए। माना जा रहा है कि बंगाली राष्ट्रवाद की बजाय इस्लाम के आधार पर राष्ट्र की अवधारणा की ओर जाने का विचार बांग्लादेश की नई सरकार का है। recent visitors 65

‘फासीवादियों को रैली की इजाजत नहीं’, हसीना की आवामी लीग पर भड़की बांग्लादेश सरकार

ढाका. बांग्लादेश की सियासी गलियारों में लगातार हलचल मची हुई है। अब पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बांग्लादेश से भागने के तीन महीने बाद उनकी पार्टी अवामी लीग ने रविवार को ढाका में मौजूदा सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन रैली का आह्वान किया। इस पर मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार भड़क उठी और आवामी लीग को ‘फासीवादी’ करार देते हुए बांग्लादेश में रैली की इजाजत देने से इनकार कर दिया। दरअसल, अगस्त में छात्रों के विद्रोह के बाद से अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर बढ़ते हमलों का सामना करते हुए पूर्ववर्ती सत्तारूढ़ पार्टी अपने अधिकांश शीर्ष नेतृत्व के जेल में या निर्वासन में रहने के कारण फिर से संगठित होने और अपने पैरों पर खड़े होने की कोशिश कर रही है। इसी के चलते पार्टी ने रविवार यानी 10 नवंबर को ढाका में विरोध मार्च का आह्वान किया। क्या बोली अंतरिम सरकार? सरकार ने कहा कि अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को रविवार को प्रस्तावित रैली को आयोजित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस के प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने फेसबुक पर एक पोस्ट कर शनिवार को कहा कि अंतरिम सरकार देश में किसी भी तरह की हिंसा या कानून व्यवस्था को भंग करने के किसी भी प्रयास को बर्दाश्त नहीं करेगी। एजेंसियों की सख्ती का करना पड़ेगा सामना आलम ने कहा कि अवामी लीग अपने मौजूदा स्वरूप में एक फासीवादी पार्टी है। किसी भी सूरत में इस फासीवादी पार्टी को बांग्लादेश में विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही चेतावनी दी कि जो भी व्यक्ति रैली, सभा और जुलूस आयोजित करने की कोशिश करेगा, उसे कानून लागू करने वाली एजेंसियों की पूरी सख्ती का सामना करना पड़ेगा। आलम का यह बयान अवामी लीग की ओर से उस आह्वान के बाद आया, जिसमें पार्टी समर्थकों से रविवार को गुलिस्तान में शहीद नूर हुसैन छत्तर या जीरो पॉइंट पर ‘कुशासन’ के खिलाफ विरोध के लिए एकत्र होने का आग्रह किया गया है। यह कदम पिछले महीने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार द्वारा छात्र संघ की छात्र शाखा पर प्रतिबंध लगाने के बाद उठाया गया है। पांच अगस्त को हसीना को छोड़ना पड़ा था देश हसीना अपनी सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर छात्र नेतृत्व वाले विद्रोह के बीच पांच अगस्त को भारत चली गई थीं। उनके भारत जाने के बाद अवामी लीग द्वारा रैली का यह पहला आह्वान है। अवामी लीग ने पार्टी कार्यकर्ताओं से आग्रह किया है कि रविवार को देशभर में जमीनी स्तर पर रैलियां आयोजित करें। विरोध स्थल ‘शहीद नूर हुसैन छत्तर’ ऐतिहासिक महत्व रखता है, क्योंकि यहीं पर 10 नवंबर, 1987 को तत्कालीन सैन्य तानाशाह जनरल एचएम इरशाद के निरंकुश शासन के खिलाफ एक प्रदर्शन के दौरान अवामी लीग के युवा नेता नूर हुसैन की हत्या कर दी गई थी। recent visitors 71

बांग्लादेश में दुर्गा पूजा को लेकर कट्टरपंथियों की धमकी के बाद हिंदू डरे हुए

ढाका  बांग्लादेश में दुर्गा पूजा को लेकर कट्टरपंथियों की धमकी के बाद हिंदू डरे हुए हैं। इसके चलते बांग्लादेश के सबसे बड़े अल्पसंख्यक समुदाय में दुर्गा पूजा को लेकर जोश फीका पड़ गया है। बांग्लादेश में हिंसा की बढ़ती घटनाओं के बीच ढाका में राम कृष्ण मिशन ने इस साल कुमारी पूजा नहीं मनाई है। इसके बाद मिशन ने मुख्य पूजा को खुले में न करने का फैसला किया है। यह पूजा अब सभागार के अंदर ही मनाई जाएगी।   अपनी रिपोर्ट में इस बारे में जानकारी दी है। ढाका में अल्पसंख्यकों के लिए काम करने वाले एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने नाम न बताने की शर्त पर TNIE को बताया कि 'कट्टरपंथियों ने किसी भी तरह के साउंड का इस्तेमाल न करने की चेतावनी जारी की है। इससे पूरे देश में हिंदू डरे हुए हैं।' कार्यकर्ता ने बताया कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए राम कृष्ण मिशन में दुर्गा पूजा सभागार के अंदर आयोजित की जाएगी। कट्टरपंथियों के साथ अंतरिम सरकार बांग्लादेश में कट्टरपंथियों ने दुर्गा पूजा के दौरान माइक न लगाने के साथ ही किसी भी तरह के संगीत वाद्ययंत्र के इस्तेमाल को लेकर भी धमकी दी है। पूजा समितियों को पंडाल लगाने के लिए 5 लाख टका फिरौती के रूप में देने की मांग की जा रही है। इन कट्टरपंथियों को बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की मौन सहमति मिली हुई है। कुछ दिन पहले ही बांग्लादेश के गृह मंत्री ने भी इसी के सुर में सुर मिलाते हुए हिंदुओं से दुर्गा पूजा में नमाज के पहले साउंड और पूजा रोकने की बात कही थी। हिंदुओं के खिलाफ हिंसा 5 अगस्त को शेख हसीना के ढाका छोड़ने के बाद से बांग्लादेश के कुल 72 में से 62 जिलों में हिंदुओं को निशाना बनाकर 2010 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इसमें हिंदू समुदाय के घरों, पूजा स्थलों और कार्य स्थलों पर तोड़फोड़ और भीड़ द्वारा हत्या तक शामिल है। बांग्लादेश की मौजूदा सरकार ने आगामी त्योहार के दौरान पूजा पंडालों और हिंदुओं की सुरक्षा का आश्वासन दिया है, लेकिन यह सब दिखावा है। किसी भी आरोपी को न हिरासत में लिया गया है और न ही गिरफ्तार किया गया है। बांग्लादेश में घट रहे हिंदू बांग्लादेश में शेख हसीना के जाने के बाद अल्पसंख्यकों पर संकट खड़ा हो गया है। मौजूदा शासन हिंदुओं को अवामी लीग का समर्थक मानता है और उनके खिलाफ अत्याचारों पर आंख मूंदे हुए है। बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार की यह कहानी नई नहीं है। 1971 में जब बांग्लादेश के गठन के समय देश में हिंदू समुदाय आबादी का 21 प्रतिशत था। अब यह मात्र 8.7 प्रतिशत रह गया है। अल्पसंख्यक कार्यकर्ता ने कहा कि लगता है कि मौजूदा शासन नहीं चाहता कि बांग्लादेश में कोई अल्पसंख्यक रह जाए। recent visitors 77

बांग्लादेश में हिंदुओं को धमकी अगर दुर्गा पूजा मनाई तो खैर नहीं… रद्द किए जा रहे आयोजन

ढाका बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद वहां रहने वाले हिंदुओं को काफी उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। दुर्गा पूजा के दौरान भी यह थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसकी गूंज अमेरिका तक में सुनाई देने लगी है। हालांकि, बांग्लादेश की सरकार ने दुर्गा पूजा से पहले अतिरिक्त सुरक्षा उपाय करने का फैसला किया है। लेकिन इस बात पर अभी भी संदेह है कि सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बावजूद बंगाली भाषी हिंदू समुदाय इस साल अपना सबसे बड़ा त्योहार मना पाएगा या नहीं। हिंदू समुदाय के नेताओं ने अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। कुछ बंगाली हिंदू इस साल नवरात्रि उत्सव रद्द करने पर विचार कर रहे हैं। दुर्गा पूजा के खिलाफ सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो भी डाले जा रहे हैं। हालांकि उन वीडियो की अभी तक पुष्टि नहीं की जा सकी है। खुलना के डाकोप में कई मंदिरों को कथित तौर पर गुमनाम पत्र मिले, जिसमें धमकी दी गई है। उन्हें कहा गया है कि जब तक प्रत्येक मंदिरों से 5 लाख टका रंगदारी के तौर पर नहीं मिल जाते हैं, तब तक उन्हें दुर्गा पूजा मनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। बांग्लादेशी अखबार डेली स्टार ने डाकोप के कमरखोला सर्वजनिन दुर्गा पूजा उत्सव समिति के अध्यक्ष शेखर चंद्र गोल्डर के हवाले से कहा, "हमारे सदस्य अब इसमें रुचि नहीं रखते हैं। इस साल हमें पूजा रोकनी होगी।" विभिन्न पूजा उत्सव समितियों के नेताओं को दिए गए पत्रों में यह भी कहा गया है कि अनुपालन न करने पर गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। शुक्रवार को चार मंदिरों के प्रतिनिधियों ने डाकोप पुलिस स्टेशन में एक मामला दर्ज कराया। डेली स्टार ने प्रभारी अधिकारी सिराजुल इस्लाम के हवाले से कहा, "हम मामले की जांच कर रहे हैं। हम सेना की टीम के साथ नियमित रूप से गश्त कर रहे हैं।" recent visitors 77

WTC points table: भारत शीर्ष पर, ऑस्ट्रेलिया दूसरे स्थान पर, बांग्लादेश 7वें स्थान पर खिसका

WTC points table: India on top, Australia in 2nd place, Bangladesh slipped to 7th place

WTC points table: India on top, Australia in 2nd place, Bangladesh slipped to 7th place कमलेशभोपाल ! भारत बनाम बांग्लादेश दूसरे टेस्ट के बाद WTC अंक तालिका: कानपुर में रोहित शर्मा और कंपनी के आक्रामक प्रदर्शन ने टीम को WTC स्टैंडिंग में शीर्ष पर अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद की। भारत बनाम बांग्लादेश दूसरे टेस्ट के बाद WTC अंक तालिका:कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम में दूसरे टेस्ट में भारत ने बेहद आक्रामक प्रदर्शन किया और बांग्लादेश को सात विकेट से हराया। इस परिणाम ने भारत को पड़ोसी देश पर क्लीन स्वीप करने में मदद की, जिसने चेन्नई में पिछला मुकाबला 280 रनों से जीता था। इससे भी अधिक असाधारण बात यह रही कि भारत ने बाधाओं को पार करते हुए एक ऐसे मैच में सकारात्मक परिणाम हासिल किया, जिसमें ड्रॉ अपरिहार्य लग रहा था। मैच का अधिकांश हिस्सा बारिश से प्रभावित रहा और दो दिन पूरी तरह से बारिश की भेंट चढ़ गए। इस बीच, पहले दिन केवल 35 ओवर फेंके गए। भारत ने चौथे दिन स्थिति को नियंत्रण में कर लिया क्योंकि बारिश कम हो गई और अंतिम दिन में एक सत्र शेष रहते मैच को समाप्त कर दिया। मेजबान टीम ने पहले बांग्लादेश को 233 रनों पर ढेर कर दिया और फिर पारी घोषित करने से पहले 285/9 का स्कोर बनाकर अपनी लय में लौटी। 52 रनों की मामूली बढ़त के साथ, भारत चौथे दिन खेल खत्म होने से पहले दो बार बढ़त बनाने में भी सफल रहा। पांचवें और अंतिम दिन मेजबान टीम ने एक और धमाकेदार प्रदर्शन किया, जिसमें रविंद्र जडेजा और जसप्रीत बुमराह ने अहम भूमिका निभाई। रविचंद्रन अश्विन ने अंतिम दिन पहला विकेट लिया और इसके तुरंत बाद जडेजा भी इसमें शामिल हो गए। भारत का दबदबा इतना था कि भारत ने शुरुआती सत्र में बांग्लादेश को 146 रनों पर आउट कर दिया, जिससे उन्हें 95 रनों का मामूली लक्ष्य मिला। जडेजा और जसप्रीत बुमराह बांग्लादेश की धज्जियाँ उड़ाने वाले खिलाड़ी थे और दोनों ने दूसरी पारी में तीन-तीन विकेट लिए। जवाब में, भारत ने 40 ओवर शेष रहते लक्ष्य हासिल कर लिया। जब भारत सीरीज में 1-0 की अजेय बढ़त के बावजूद जीत की ओर बढ़ रहा था, तो उसका लक्ष्य काफी स्पष्ट हो गया, जो कि विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) है। भारत WTC फाइनल में पहुंच चुका है, लेकिन उसे हार का सामना करना पड़ा है। अब उनका लक्ष्य तीसरी बार फाइनल में जगह बनाना है और बांग्लादेश के खिलाफ 2-0 की सीरीज जीत ने उनके इस लक्ष्य को हासिल करने की संभावनाओं को मजबूत किया है। recent visitors 169