जबलपुर बरगी बांध विस्थापितों ने खुद सड़क बनाने का काम किया शुरू, 40 साल इंतजार के बाद गैंती-फावड़ा लेकर उतरे ग्रामीण, बच्चे भी कर रहे मदद

Displaced residents of the Bargi Dam project in Jabalpur have started building a road themselves; after waiting 40 years, villagers have stepped out with pickaxes and shovels, and even children are helping. विशेष संवाददाता : जितेन्द्र श्रीवास्तव अर्पिता श्रीवास्तवजबलपुर । बरगी बांध विस्थापितों का सब्र आखिरकार टूट चुका है। दरअसल दुर्गानगर के ग्रामीणों ने सरकारी मदद का इंतजार छोड़कर अब खुद ही करीब 2 किलोमीटर सड़क बनाने का काम शुरू कर दिया है।जबलपुर बरगी बांध विस्थापितों ने खुद सड़क बनाने का काम किया शुरू, 40 साल इंतजार के बाद गैंती-फावड़ा लेकर उतरे ग्रामीण, बच्चे भी कर रहे मददजबलपुर जिले के शहपुरा जनपद के दुर्गानगर गांव में बरगी बांध परियोजना के विस्थापितों ने सड़क निर्माण की जिम्मेदारी अब खुद संभाल ली है। दरअसल करीब चार दशक पहले अपना गांव छोड़ने वाले परिवार आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वहीं सड़क नहीं बनने से परेशान ग्रामीण अब रोज सुबह गैंती, फावड़ा और तसला लेकर श्रमदान कर रहे हैं, ताकि बारिश के मौसम में गांव का संपर्क पूरी तरह न टूटे। दरअसल दुर्गानगर में करीब 100 परिवार और लगभग 1500 की आबादी रहती है। ग्रामीणों के अनुसार गांव की मुख्य सड़क हर बारिश में दलदल बन जाती है। कई दिनों तक लोगों का आना-जाना मुश्किल हो जाता है। स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है। इसी वजह से गांव वालों ने सरकारी इंतजार छोड़कर अपने स्तर पर सड़क सुधारने की शुरुआत कर दी। महिलाएं और बच्चे भी कर रहे मददवहीं ग्रामीणों के मुताबिक करीब दो किलोमीटर लंबे इस रास्ते की हालत इतनी खराब हो जाती है कि पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है। कई जगह कीचड़ और गड्ढों के कारण दोपहिया वाहन फंस जाते हैं। गांव के लोग अपने खर्च से मुरम और पत्थर लाकर सड़क पर डाल रहे हैं ताकि कम से कम आवाजाही बनी रहे। ग्रामीण सोनू राजपूत ने बताया कि कई बार अधिकारियों और प्रशासन को आवेदन दिए गए लेकिन सड़क निर्माण का काम आगे नहीं बढ़ा। इसके बाद गांव वालों ने सामूहिक श्रमदान का फैसला लिया। वहीं भीमा बाई ने बताया कि गांव के लोग रोज मजदूरी पर जाने से पहले दो से तीन घंटे सड़क बनाने में लगा रहे हैं। उनका कहना है कि अब लोगों को भरोसा हो गया है कि अगर वे खुद आगे नहीं आएंगे तो समस्या खत्म नहीं होगी। हैरानी की बात है इस अभियान में महिलाएं भी पुरुषों के साथ बराबरी से हिस्सा ले रही हैं और बच्चे भी मिट्टी और पत्थर पहुंचाने में मदद कर रहे हैं। सड़क नहीं होने से हो रही परेशानीदरअसल दुर्गानगर के लोगों का कहना है कि सड़क की खराब हालत का सबसे बड़ा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। बारिश के दौरान एंबुलेंस और 108 जैसी आपातकालीन सेवाएं गांव तक नहीं पहुंच पातीं है। गर्भवती महिलाओं को प्रसव से पहले दूसरे गांव में जाकर रुकना पड़ता है ताकि जरूरत पड़ने पर अस्पताल पहुंचना आसान रहे। जिला पंचायत सदस्य रामकुमार सैयाम ने बताया कि उन्होंने यह मुद्दा जिला पंचायत की बैठकों में तीन से चार बार उठाया और जिला पंचायत सीईओ को लिखित प्रस्ताव भी दिया लेकिन सड़क निर्माण शुरू नहीं हो सका। दूसरी ओर बरगी विधायक नीरज सिंह ने कहा है कि ग्रामीणों की परेशानी गंभीर है और अधिकारियों से चर्चा कर सड़क निर्माण के लिए बजट का प्रावधान किया जाएगा। recent visitors 6