28 को बोत्सवाना से भारत आ रहे चीते, एमपी में बढ़ेगा चीता कुनबा

भोपाल  40 महीने पहले देश में चीतों को बसाने का शुरू हुआ सिलसिला अब और बढऩे जा रहा है। 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से 8 चीतों के साथ शुरू हुए प्रोजेक्ट में अब 28 फरवरी को बोत्सवाना से 8 और चीते लाए जाएंगे। उन्हें कूनो नेशनल पार्क में रखा जाएगा। इससे पहले 18 फरवरी 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते लाए गए थे। सीएम डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को दिल्ली में मीडिया से बातचीत में 28 फरवरी को 8 चीतों को लाने की बात कही। गांधी सागर है चीतों का दूसरा घर 40 माह पहले देश में चीतों का इकलौता घर एमपी का कूनो था। 20 अप्रेल 2025 को मंदसौर जिले के गांधीसागर में चीतों का दूसरा घर बनाया गया। यहां कूनो से शिफ्ट तीन चीते हैं, इनमें नर प्रभास, पावक तो मादा धीरा है।  असम का जंगली भैंसा भी आएगा मध्यप्रदेश सीएम डॉ मोहन यादव ने बताया कि असम से जंगली भैंसा को मध्यप्रदेश लाने की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है. नई दिल्ली में हुई इस बैठक में दोनों राज्यों और केंद्र सरकार के बीच तंत्रगत प्रक्रियाओं पर विस्तार से चर्चा हुई. उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में जैव विविधता को सुरक्षित करते हुए वन्यजीव संरक्षण को नई दिशा दी जा रही है. बोत्सवाना से 8 चीते लाए जाएंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इसी महीने 28 फरवरी के आसपास बोत्सवाना से 8 चीते मध्यप्रदेश लाए जाएंगे। चीतों के पुनर्स्थापन के लिए केंद्रीय मंत्री यादव से आवश्यक सहयोग और व्यवस्थाओं पर भी विस्तृत रूप से बात की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नई दिल्ली में यह जानकारी दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव चीता प्रोजेक्ट , असम से गैंडे और जंगली भैंसे सहित अन्य वन्य प्राणियों को लाने के प्रोजेक्ट पर तेजी से काम कर रहे हैं। बोत्सवाना से 8 चीते लाने की प्रक्रिया पूरी कराने सहित प्रोजेक्ट की मंजूरी सहित अन्य कार्यों को लेकर वे दिल्ली पहुंचे थे। उन्होंने दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से विभिन्न विषयों पर विस्तार से बातचीत की गई है। सीएम यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि दिल्ली में ने बताया कि कि मध्यप्रदेश में पर्यटन क्षेत्र के विकास, रिजर्व फॉरेस्ट के विस्तार और वन्यजीव संरक्षण की अपार संभावनाएं हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन एवं केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य सरकार वन्य जीवों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। कूनो में 27 चीते, इनमें से 19 यहीं जन्मे – 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से 8 चीते लाए गए। – 18 फरवरी 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते लाए गए।  अभी कूनो में 27 चीते हैं। – इनमें से विदेशों में जन्मे 8 चीते हैं। – भारत में जन्मे चीतों की संख्या 19 है। यह कूनो में ही हैं। recent visitors 28

कूनो नेशनल पार्क में एक और मादा चीता धीरा गर्भवती, वर्तमान में 10 वयस्क चीते और 19 शावक

शिवपुरी  मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में बसाए गए चीतों ने एक बार फिर अभयारण्य की सीमा से बाहर चले गए हैं। कल रात पांच चीतों का समूह पार्क से बाहर निकल गया था। इसे बाद आज सुबह ये शिवपुरी जिले के पोहरी तक पहुंच गए हैं। चीतों को देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई है। चीता धीरा गर्भवती, पखवाड़े भीतर कुनबा बढ़ने की संभावना कूनो नेशनल पार्क में एक और मादा चीता धीरा गर्भवती है। अगले एक पखवाड़े में उसके संभावित प्रसव से यहां शावकों की संख्या में और इजाफा हो सकता है। वर्तमान में 10 वयस्क चीते और 19 शावक हैं। इन्हीं में से दो चीता प्रभाष व पावक को मंदसौर के गांधीसागर अभयारण्य भेजा गया है। नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए 20 चीतों में 10 मादा चीता थीं। इनमें से जीवित सात मादा चीतों में से अब केवल नाभा चीता ही शेष है, जो गर्भवती नही हुई है। भारत में पैदा हो रहे शावकों की बढ़ती संख्या से चीता पुनर्वास परियोजना को मजबूती मिली है। दो साल की हो चुकी है मुखी सबसे पहले ज्वाला चीता ने चार शावकों को जन्म दिया था, जिसमें से तीन की मौत हो गई थी, जबकि एक मादा शावक मुखी जिंदा बची थी, जो अब दो साल की हो चुकी है। ज्वाला इसके अलावा चार और शावकों को भी जन्म दे चुकी है। विशेष निगरानी की जा रही है आशा के तीन, गामिनी के चार, वीरा के दो, निर्वा के पांच शावक हैं। अब मादा चीता धीरा के गर्भवती होने की खुशखबरी से पार्क प्रबंधन ने उसे खुले जंगल से पकड़कर बाड़े में छोड़ा है। सिंह परियोजना के मुख्य वन संरक्षक उत्तम कुमार शर्मा के अनुसार मादा चीता धीरा को बाड़े में रखकर विशेष निगरानी की जा रही है। बाड़े में 13 चीता हो गए बाड़े में अब 13 चीता हो गए हैं। धीरा कुछ दिन पहले कूनो की सीमा से बाहर निकलकर कराहल के वन क्षेत्र तक पहुंच गई थी। इसलिए भी एहतियातन यह कदम उठाया गया है। खुले जंगल में ज्वाला के शावकों सहित कुल 16 चीता हैं। दस दिन पहले ही कूनो में निर्वा चीता ने पांच शावकों को जन्म दिया है, जो पूरी तरह स्वस्थ हैं। पहले भी निकले थे सीमा से बाहर दरअसल, ज्वाला और उसके चार बच्चे शनिवार शाम को पहली बार कूनो नेशनल पार्क की सीमा से बाहर निकले थे। रविवार दोपहर तक वे वापस जंगल में चले गए थे। लेकिन, रविवार रात को वे फिर से वीरपुर तहसील के श्यामपुर गांव के पास दिखाई दिए। वे श्योपुर-ग्वालियर ब्रॉडगेज रेल ट्रैक से लगभग 1 किलोमीटर दूर थे। लाठी-डंडे और पत्थर लेकर टूट पड़े गांव वाले ग्रामीणों ने चीतों को भगाने के लिए लाठियां उठाई। जब चीतों ने गाय पर हमला किया, तो लोगों ने उन्हें पत्थर मारे। सोमवार सुबह, ये पांचों चीते कूनो सायफन के पास से होते हुए कूनो नदी में पहुंचे। वे निर्माणाधीन रेलवे पुल के नीचे काफी देर तक बैठे रहे। इस दौरान, वहां से गुजरने वाले लोग चीतों को देखने के लिए जमा हो गए। गाय पर हमले से गुस्से में आए ग्रामीण मादा चीता और उसके बच्चे एक-एक करके रास्ता पार कर रहे थे। तभी उन्होंने एक गाय पर झपट्टा मारा। गाय पर हमला होते देख ग्रामीण गुस्से में आ गए। वे लाठी लेकर दौड़े और चीतों को पत्थर मारने लगे। चीता ज्वाला ने काफी देर तक गाय का गला पकड़ रखा था। लेकिन, जैसे ही उसे पत्थर लगा, उसने गाय को छोड़ दिया और अपने बच्चों के साथ भाग गई। रेल ट्रैक के पास लगी लोगों की भीड़ घटना के बाद, सुबह लगभग 10 बजे, चीतों का दल कूनो पुल क्षेत्र से निकल वीरपुर के तिललिडेररा क्षेत्र में पहुंच गया। निर्माणाधीन श्योपुर-ग्वालियर ब्रॉडगेज रेल ट्रैक के पास चीतों को देखने के लिए भीड़ जमा हो गई। एक महीने पहले ही छोड़ा गया था ज्वाला और उसके शावकों को 21 फरवरी को खजूरी क्षेत्र के जंगल में छोड़ा गया था। एक महीने तक वे पार्क की सीमा में ही रहे। चीतों के बाहर निकलने पर, क्षेत्र के चीता मित्रों और उनकी टीम ने आसपास के लोगों को जागरूक किया। उन्होंने लोगों को बताया कि चीते लोगों पर हमला नहीं करते हैं। उन्होंने लोगों से चीतों को न भगाने और उनकी सुरक्षा का ध्यान रखने की अपील की। बीते दो दिन से चीतों का समूह इस इलाके में डेरा डाले हुए है। recent visitors 36

चीता परियोजना संचालन समिति ने कुनो नेशनल पार्क से गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में कुछ चीतों को स्थानांतरित करने की अनुमति दी

मंदसौर  मध्य प्रदेश में चीतों को बसाने की योजना में एक नया मोड़ आया है। केंद्र सरकार केन्या, दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना से और चीते लाने की बात कर रही है। वहीं, कुछ चीतों को कूनो नेशनल पार्क से गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में भेजने की मंजूरी मिल गई है। समिति ने यह भी कहा है कि चीतों को सड़क मार्ग से ले जाते समय गर्मी जैसे तनाव देने वाले कारकों का ध्यान रखा जाए। 300 किलोमीटर है दोनों जगह के बीच की दूरी गांधी सागर, कुनो से लगभग 300 किलोमीटर दूर है। यह फैसला पिछले हफ्ते हुई एक बैठक में लिया गया। अभी भी यह चिंता बनी हुई है कि गांधी सागर में चीतों के लिए पर्याप्त शिकार है या नहीं और वहां तेंदुए जैसे शिकारी जानवर भी हैं। गांधी सागर को चीतों के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण जगह माना जा रहा है। इसका लक्ष्य कूनो-गांधी सागर क्षेत्र में 60-70 चीतों की आबादी बनाना है। एक साल से चीतों के लिए तैयार हो रहा गांधी सागर मध्य प्रदेश का वन विभाग एक साल से गांधी सागर को चीतों के लिए तैयार कर रहा है। पहले यह योजना थी कि अफ्रीका से आने वाले चीतों को यहां रखा जाएगा, लेकिन अभी तक भारत और अफ्रीकी देशों के बीच बात नहीं बन पाई है। पहले चरण में, चार-पांच चीतों को अभयारण्य के पश्चिमी भाग में एक बाड़े में छोड़ा जाएगा। 64 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को घेर लिया गया है और तेंदुओं को वहां से हटा दिया गया है ताकि चीतों और तेंदुओं के बीच लड़ाई न हो। अभी यह तय नहीं हुआ है कि गांधी सागर में कूनो से लाए गए चीतों को छोड़ा जाएगा या उन चीतों को जो अभी भी बड़े बाड़ों में हैं। कूनो के जंगल में घूम रहे 17 चीते कूनो में 26 चीतों में से 17 जंगल में हैं और नौ बाड़ों में हैं। गांधी सागर में शिकार की कमी एक चिंता का विषय है। समिति ने मध्य प्रदेश के अन्य जंगलों से चीतल लाकर शिकार बढ़ाने के प्रयासों पर भी चर्चा की। गांधी सागर में शाकाहारी जानवरों के बाड़े भी हैं ताकि शिकार वहीं पर पैदा हो सके। मध्य प्रदेश वन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) सुभारंजन सेन ने कहा कि गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में शिकार बढ़ाने का काम चल रहा है। हमारे पास शिकार के तौर पर फिलहाल चिंकारा, चौसिंघा, नीलगाय और चीतल हैं। चीता परियोजना संचालन समिति देख रही मामला इस पूरे मामले को चीता परियोजना संचालन समिति देख रही है। समिति ने हाल ही में एक वीडियो पर भी बात की। इस वीडियो में वन विभाग द्वारा काम पर रखे गए एक ड्राइवर को चीता फैमिली को पानी पिलाते हुए दिखाया गया था। सदस्यों ने इस पर नाराजगी जताई और वन विभाग को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी कि चीतों के साथ बातचीत के लिए बने नियमों का पालन किया जाए। क्या है चीता परियोजना संचालन समिति का काम चीता परियोजना संचालन समिति का गठन राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने मई 2023 में किया था। इसका काम परियोजना की समीक्षा और निगरानी करना और एक सलाहकार निकाय के रूप में कार्य करना है। प्रोजेक्ट चीता 2022 में शुरू हुआ था। इसके तहत नामीबिया से आठ और दक्षिण अफ्रीका से 12 चीतों को कूनो नेशनल पार्क में लाया गया था। इस परियोजना को उस समय झटका लगा जब इनमें से आठ चीतों और कूनो में पैदा हुए पांच शावकों की मौत हो गई। recent visitors 25

कूनो में ज्वाला अपने शावकों के साथ 6 बकरियों शिकार किया, युवक का चीता के झुंड को पानी पिलाने का वीडियो अब जमकर वायरल

श्योपुर  अगर आपका सामना शेर, तेंदुआ या फिर चीते से हो जाए तो क्या होगा. सुनकर ही शरीर में सिहरन दौड़ जाती है. लेकिन अगर कोई व्यक्ति इस भीषण गर्मी में चीतों के झुंड को पानी पिलाए तो इसे पशुओं से बेइंतहा प्रेम कहें या फिर दुस्साहस. ये कहानी कोई काल्पनिक नहीं है. बल्कि सच है. कूनो नेशनल पार्क के चीते शिकार करने के बाद छांव में बैठे हुए थे. इन्हें भीषण गर्मी में पानी की सख्त जरूरत थी. लेकिन आसपास पानी नहीं था. पेड़ की छांव में बैठे 6 चीतों की प्यास बुझाई ऐसे में एक ग्रामीण ने प्लास्टिक का बर्तन पानी से भरा और चीतों के झुंड के पास ले जाकर इसे रख दिया. चीतों ने छककर पानी पीया और फिर पेड़ की छांव में विश्राम करने लगे. दरअसल, कई दिनों से कूनो नेशनल पार्क से चीतों का झुंड बाहर घूम रहा है. इनकी संख्या 6 है. इन चीतों ने उमरी गांव में 6 बकरियों शिकार किया और फिर जमकर दावत उड़ाई. मादा चीता ज्वाला और उसके शावकों के दो वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहे हैं. इनमें ज्वाला चीता अपने शावकों के साथ बकरियों का शिकार करती नजर आ रही है. बकरियों का शिकार के बाद चीते प्यासे थे वहीं, एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है. इसमें एक ग्रामीण चीता और उसके शावकों को पानी पिलाते नजर आ रहा है. ये वही चीते हैं, जिन्होंने बकरियों का शिकार करके पेट भरा था. ये चीते पानी नहीं मिलने से परेशान थे, क्योंकि शिकार का भोजन करने के बाद चीतों को पानी की सख्त जरूरत थी. प्यास से परेशान चीते पेड़ के नीचे छांव में बैठकर हांफ रहे थे. उमरी कलां गांव के पास खेतों में जब ग्रामीण सत्यनारायण गुर्जर ने देखा कि चीते प्यास से परेशान हैं तो प्लास्टिक के बर्तन में पानी भरा और चीतों के झुंड के पास ले जाकर रख दिया. चीतों ने छककर पानी पीया. इस घटना से ये बात फिर साबित हो गई कि चीता इंसानों के लिए खतरा नहीं, बल्कि उनके मित्र हैं. हालांकि वन विभाग की टीम चीतों की मॉनिटरिंग भी कर रही हैं. कूनो नेशनल पार्क में 120 चीता मित्र भी हैं कूनो नेशनल पार्क के अधिकारी बताते है "चीतों से इंसानों को कोई खतरा नहीं है. चीते इंसानों को देखकर अपना रास्ता मोड़ लेते हैं. चीतो की निगरानी के लिए कूनो नेशनल पार्क की मॉनिटरिंग टीम सहित वन विभाग की टीम लगातार नजर बनाए हुए है." बता दें कि कूनो नेशनल पार्क में 120 चीता मित्रों को प्रशिक्षण देकर तैयार किया गया है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इन चीता मित्रों के साथ संवाद किया था. चीता मित्रों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है. खासकर ऐसे समय जब चीते पार्क की सीमा लांघते हैं. चीता मित्रों की अहम जिम्मेदारी ग्रामीणों को जागरूक कर मानव-चीता द्वंद्व रोकने की है. recent visitors 33

कूनो नेशनल पार्क से निकलकर रिहायशी इलाके में पहुंची अग्नि चीता, किया कुत्ते का शिकार

 श्योपुर कूनो नेशनल पार्क के खुले जंगल से निकलकर 90 किलोमीटर दूर श्योपुर के नजदीक पहुंचे चीते ने चार दिनों बाद शहर के रास्ते वापस जंगल की ओर रवानगी ले ली है. खास बात यह है कि चीता जंगल लौटते समय आधी रात को शहर की सड़कों पर दौड़ लगाता कैमरे में कैद हुआ है. अब चीता वापस जंगल की ओर रुख कर गया है. बताया जा रहा है कि वह अब कूनो के बफर जोन में जा पहुंचा है. पिछले शनिवार को कूनो की हद छोड़ 90 किलोमोटर की दूरी तय कर चीता अग्नि श्योपुर शहर से सटे ढेंगदा गांव और शहरी सीमा में पॉलिटेक्निक कॉलेज के पास अमराल नदी के किनारे लगी क्रेशर के कुछ दूर आया और बीते 4 दिन तक आसपास ही चहल कदमी करता रहा. चीते की निगरानी में ट्रेकिंग टीमें 24 घंटे लगी थी. वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक अग्नि चीता गोरस कलमी के बीच भीमलत गांव के पास है। उधर अग्नि साथ छोड़ा गया वायु चीता मुरैना की ओर घूम रहा है। अभी दो ही चीते बाहर हैं, बाकी 10 चीते और 12 शावक बाड़े में हैं। इसके पहले भी चीता अग्नि श्योपुर में सीएम राइज स्कूल के करीब देखी गई थी। इसका वीडियो तब भी वायरल हो रहा था। इसी बीच, मंगलवार-बुधवार की दरम्यानी रात चीता शहर के वीर सावरकर स्टेडियम के पास देखा गया. फिर आधी रात को ही श्योपुर शिवपुरी हाइवे पर निकल पड़ा. और चीता स्टेडियम, कलेक्ट्रेट और ईको सैंटर होते हुए बावंदा नाले तक सड़क पर दौड़ लगाता कैमरे के कैद हुआ. चीता के पीछे ट्रेकिंग टीम की गाड़ी लगी रही. बुधवार को चीता अग्नि को लोकेशन भेला भीम लत गांव के पास बताई जा रही है. इस इलाके से सामान्य और कूनो वन मंडल का बफर जोन का जंगल लगा हुआ है. कयास लगाए जा रहे हैं कि चीता अब कूनो वापस लौट जाएगा. पता हो कि कूनो नेशनल पार्क के खुले जंगल में अग्नि और वायु नाम के दो चीतों को छोड़ा गया था. यह दोनों चीते साउथ अफ्रीका से कूनो लाए गए थे जिन्हें पिछले 4 दिसम्बर को खुले जंगल में छोड़ा गया था. दोनों चीते रिश्ते में सगे भाई हैं, जो हमेशा एक साथ रहते हैं और एक साथ शिकार करते हैं और मिल बांटकर उस शिकार को खाकर अपना पेट भरते हैं. पहली दफा यह दोनों अलग हुए थे. दोनों अलग-अलग दिशा में कूनो के रिज़र्व जोन से बाहर निकल गए थे. अब उम्मीद जताई जा रही है कि दोनों एक दूसरे को तलाशते हुए कूनो वापस पहुंच जाएंगे. recent visitors 52

मप्र और राजस्थान के बीच चीता संरक्षण परियोजना को सुचारू रूप से संचालित करने एक संयुक्त प्रबंधन समिति का गठन किया

भोपाल मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच चीता संरक्षण परियोजना को सुचारू रूप से संचालित करने और चीता कॉरिडोर के विकास के लिए दोनों राज्यों ने एक संयुक्त प्रबंधन समिति का गठन किया है। यह समिति चीता के संरक्षण, पर्यटन संभावनाओं और क्षेत्रों के विकास के लिए विस्तृत योजना बनाएगी। साथ ही, यह हर तीन माह में अपनी रिपोर्ट दोनों राज्यों की सरकारों को सौंपेगी। इस समिति के संयुक्त अध्यक्ष मध्यप्रदेश और राजस्थान के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्य-जीव अभिरक्षक होंगे। अन्य सदस्य के रूप में चीता प्रोजेक्ट के निदेशक, क्षेत्र संचालक/संचालक, वन्य-प्राणी विशेषज्ञ, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के प्रतिनिधि और भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून द्वारा नामांकित प्रतिनिधि होंगे। समिति मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच चीता परियोजना कॉरिडोर के लिए एमओयू का मसौदा तैयार करेगी। यह कॉरिडोर चीतों के सुरक्षित भ्रमण और उनके संरक्षण के लिए विकसित किया जाएगा। समिति कूनो और रणथंबौर क्षेत्रों को जोड़ने वाले राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य क्षेत्र में पर्यटन के लिए नए मार्गों का मूल्यांकन करेगी। यह पर्यटन के अवसरों को बढ़ावा देने के साथ-साथ चीतों के संरक्षण में भी सहायक होगा। समिति उन अधिकारियों और फ्रंट-लाइन कर्मचारियों के क्षमता निर्माण पर भी ध्यान देगी, जो कूनो से राजस्थान तक मौजूदा कॉरिडोर में चीतों की निगरानी और गश्त में शामिल हैं। इससे चीतों की सुरक्षा और संरक्षण में सुधार आएगा। कूनो और गांधी सागर अभ्यारण्य क्षेत्रों से चीतों के भविष्य के माइग्रेशन के लिए उपयुक्त क्षेत्रों का विकास भी समिति के कार्यक्षेत्र में शामिल रहेगा। इसके लिए प्रि-औगमेंटेशन बेस तैयार कर सुधारात्मक उपाय किए जाएंगे। recent visitors 111

गांधीसागर अभयारण्य में अफ्रीका व केन्या के दलों ने भी दी हरी झंडी, दिसंबर के अंत तक आ सकते हैं चीते

मंदसौर  अब सबकुछ ठीक रहा तो साल के अंत में गांधीसागर अभयारण्य में चीते आ जाएंगे। इसके साथ ही देश में कूनो के बाद गांधीसागर अभयारण्य चीतों के दूसरे घर के रूप में पहचाना जाएगा। यहां बड़े घास के मैदान, पानी, कंदराएं सभी कुछ चीतों के लिए मुफीद हैं। अभयारण्य भी उनके स्वागत के लिए तैयार है। अभी चीतों के लिए हिरण, चीतल को यहां लाने का काम भी फिर से शुरू हो गया है। 1250 हिरण-चीतल लाने हैं और अभी तक 434 ही पहुंचे हैं।अभयारण्य में 6400 हेक्टेयर में चीतों के लिए बड़े बाड़े बनकर तैयार हैं। इनमें आठ क्वारंटाइन बाड़े भी हैं, जहां शुरुआत में आठ चीतों को क्वारंटाइन बाड़ों में रखा जाएगा। चीतों के भोजन को लेकर भी हुई चर्चा केंद्र सरकार की तरफ से जो संकेत मिले हैं, उसके अनुसार साल के आखिर तक चीते गांधीसागर में आ सकते हैं। ये अफ्रीका से लाए जाएंगे या केन्या से यह अभी तय नहीं है। दक्षिण अफ्रीका व फिर केन्या से आए दल ने गांधीसागर अभयारण्य में चीतों को बसाने के लिए की गई सभी तैयारी का निरीक्षण किया है। गांधीसागर अभयारण्‍य में हिंगलाजगढ़ किले के आस-पास घना जंगल वन्‍य प्राण‍ियों के लिए काफी अच्‍छा है। विशेषज्ञों ने बाड़े, क्वारंटाइन बाड़ों, हाईमास्ट कैमरा, जलस्रोत मॉनिटरिंग के लिए बनाए गए स्थल और उपचार केंद्र सहित सभी तैयारी देखी है। चीतों के भोजन को लेकर भी उनकी चर्चा हो चुकी है। बड़े जानवरों का शिकार नहीं कर सकता चीता चीता बड़े जंगली जानवरों का शिकार नहीं कर सकता हैं। इसके लिए हिरण, खरगोश, जंगली श्वान जैसे छोटे जानवर ही उपयुक्त रहते हैं। चीते के भोजन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए गांधी सागर अभयारण्य क्षेत्र में 1250 चीतल और हिरणों को बीते वर्ष ही छोड़ा जाना था लेकिन अभी तक करीब 434 ही छोड़े गए हैं। शाजापुर जिले के साथ ही भोपाल के वन विहार, नरसिंहगढ़ सेंचुरी और कान्हा टाइगर सफारी आदि स्थानों से हिरण व चीतल को पकड़कर यहां छोड़ने के लिए अफ्रीकी वाइल्ड लाइफ एंड साल्यूशन कंपनी को अनुबंधित किया गया है। केन्या से आए दल ने देखी व्यवस्था     गांधीसागर अभयारण्य में चीतों को लाने की तैयारी हमारी तरफ से पूरी हो गई है। अफ्रीका, केन्या से आए दल ने भी सारी व्यवस्था देख कर संतुष्टि जताई है। अब सरकार की हरी झंडी का इंतजार है। साल के अंत में आते हैं या बाद में यह हम भी आदेश का ही इंतजार कर रहे हैं। – संजय रायखेरे, डीएफओ, मंदसौर   recent visitors 106