नये साल में मिली बड़ी उपलब्धि, छत्तीसगढ़-ग्रीन जीडीपी वाला बना देश का पहला राज्य

रायपुर। नये साल की पूर्व संध्या पर छत्तीसगढ़ ने कीर्तिमान रचा है। नये साल 2025 में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वन पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं को ग्रीन जीडीपी के साथ जोड़ने की पहल शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। इससे पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के व्यापक मूल्य को मापकर छत्तीसगढ़ में विकास की गति को आगे बढ़ाया जायेगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 विज़न और सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप विज़न डॉक्यूमेंट तैयार कर रही है, जिसमें वन विभाग नेसंचालित पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के मूल्यांकन की अवधारणा शामिल है।  यह समग्र दृष्टिकोण राज्य में पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक प्रगति के बीच संतुलन बनाए रखने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए सतत और समृद्ध भविष्य सुनिश्चित हो सके। वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का मूल्यांकन न केवल बजटीय योजना को अधिक सुव्यवस्थित बनाएगा, बल्कि भविष्य की रणनीतियों को दिशा प्रदान करेगा, धन आवंटन को अधिक प्रभावी बनाएगा और वानिकी विकास के प्रयासों को सशक्त करेगा। यह प्रक्रिया सतत विकास और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। छत्तीसगढ़ में संयुक्त वन प्रबंधन कार्यक्रम ने स्थानीय समुदायों को और अधिक सशक्त बनाया है। गुरु घासीदास, कांगेर घाटी और इंद्रावती जैसे राष्ट्रीय उद्यानों के साथ छत्तीसगढ़ में प्रकृति आधारित पर्यटन के लिए असीम संभावनाएं हैं। स्थानीय निवासियों को जंगल सफारी, नेचर ट्रेल्स और इको-कैंपिंग जैसी सुविधाओं के प्रबंधन में सक्रिय रूप से शामिल किया जा रहा है, जिससे न केवल सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिला है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को भी सशक्त किया गया है। छत्तीसगढ़ का 44 प्रतिशत भू-भाग वन क्षेत्र से आच्छादित है। यह राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत आधार हैं और लाखों लोगों की आजीविका में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये वन विभिन्न प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ प्रदान करते हैं। वनों से प्राप्त होने वाले अन्य महत्वपूर्ण अमूर्त लाभ अक्सर उपेक्षित रहते हैं और उनका उचित मूल्यांकन नहीं हो पाता। इनमें जलवायु संतुलन बनाए रखने के लिए कार्बन अवशोषण, कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण परागण, पोषक तत्वों का चक्रण, मृदा उर्वरता में सुधार और जैव विविधता संरक्षण जैसी सेवाएं शामिल हैं। वनों का बाढ़ और रोग नियंत्रण, जल प्रवाह का प्रबंधन और वेक्टर जनित रोगों के जोखिम को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका है। वहीं वनों से जल पुनर्भरण और शुद्धिकरण होता है, शुद्ध ऑक्सीजन प्रदान कर वायु गुणवत्ता में सुधार होता है, और सुंदर प्राकृतिक दृश्य तथा जैव विविधता-समृद्ध क्षेत्रों के माध्यम से मनोरंजन के साथ-साथ भावनात्मक संतुष्टि भी प्रदान होती है। इन वनों का गहरा आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व भी है, क्योंकि पवित्र स्थलों और देवगुड़ी जैसे क्षेत्रों के माध्यम से ये आदिवासी विरासत और परंपराओं को संरक्षित रखते हैं। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के वन अनेक नदियों का उद्गम स्थल हैं, जो सतत जल प्रवाह, जलग्रहण क्षेत्र संरक्षण और कृषि तथा आजीविका के लिए आवश्यक जैविक पदार्थ से मृदा को समृद्ध करने में सहायक हैं। इन प्रत्यक्ष लाभों का राज्य की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर व्यापक आर्थिक प्रभाव पड़ता है। ये सभी लाभ ग्रामीण उद्योगों और आजीविका को प्रोत्साहित करते हैं और राज्य के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान करते हैं। recent visitors 184

‘अनुकम्पा नियुक्ति 10 जनवरी तक करें पूरी’, 353 नए पद मंजूर, छत्तीसगढ़-डिप्टी सीएम साव ने समीक्षा बैठक में दिये निर्देश

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सभी नगरीय निकायों को अनुकम्पा नियुक्ति की प्रक्रियाएं 10 जनवरी तक पूरी करने के निर्देश दिये गये हैं। ये निर्देश उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों की समीक्षा बैठक में दिये।  नगरीय प्रशासन विभाग ने अनुकम्पा नियुक्ति के लिए प्रदेशभर के नगरीय निकायों में 353 नए पद मंजूर किए हैं। डिप्टी सीएम साव ने बैठक में नगर निगमों के आयुक्तों तथा नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को रोजाना वार्डों का भ्रमण कर निर्माण कार्यों, साफ-सफाई और प्रकाश व्यवस्था की मॉनिटरिंग करने को कहा। उन्होंने नगरीय निकायों में बन रहे अटल परिसरों और नालंदा परिसरों के काम में तेजी लाने और इनके उत्कृष्ट निर्माण के निर्देश दिए। श्री साव ने अधिकारियों को गंभीरता और सक्रियता से काम करते हुए राज्य के शहरों को साफ, सुंदर और सुविधापूर्ण बनाने को कहा। नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस., विशेष सचिव श्री आर. एक्का और संचालक श्री कुंदन कुमार भी समीक्षा बैठक में शामिल हुए। उन्होंने  समीक्षा बैठक में सभी नगरीय निकायों में अटल परिसर के निर्माण कार्यों में तेजी लाते हुए अच्छी गुणवत्ता की उत्कृष्ट मूर्ति स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अटल परिसर का इस तरह निर्माण करें कि शहर में इसकी विशेष पहचान और दर्शनीय स्थल बनें। उन्होंने प्रदेश के 12 शहरों में बनाए जा रहे नालंदा परिसर के लिए निविदा की प्रक्रिया पूरी कर शीघ्र काम प्रारंभ करने को कहा। साव ने अधिकारियों से कहा कि नालंदा परिसर का शानदार और आइकॉनिक निर्माण होना चाहिए। नालंदा परिसर और अटल परिसर का निर्माण सरकार के महत्वाकांक्षी कार्य हैं। उन्होंने आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को खुद इनकी मॉनिटरिंग करने और प्रगति की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। बैठक में अधोसंरचना मद और 15वें वित्त आयोग के तहत स्वीकृत कार्यों के साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी), अमृत मिशन 2.0, एसटीपी निर्माण और आकांक्षी शौचालयों के कार्यों में भी तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माण कार्यों में सामग्री और निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने सभी नगरीय निकायों के अधिकारियों को रोजाना प्रातः भ्रमण कर निर्माण कार्यों, साफ-सफाई और प्रकाश व्यवस्था की मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। उन्होंने 01 जनवरी से ही इसकी शुरूआत कर शहरों में प्रकाश और सफाई की व्यवस्था दुरूस्त करने को कहा। श्री साव ने इसमें किसी भी तरह की कोताही न बरतते हुए गंभीरता और सक्रियता से प्रतिदिन कार्यों की मॉनिटरिंग करने को कहा। इसमें किसी तरह का हीला-हवाला पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। recent visitors 60

वित्तीय प्रबंधन के लिये की तारीफ, छत्तीसगढ़-नये साल पर केंद्र सरकार ने दी 250 करोड़ प्रोत्साहन राशि

रायपुर। नये साल पर छत्तीसगढ़ के लिए खुशखबरी है। छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता लाने के लिए आईटी आधारित वित्तीय प्रबंधन प्रणाली को लागू कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केंद्र सरकार ने इस डिजिटल सुधार की तारीफ करते हुए प्रदेश को 250 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) के रूप में दी है। छत्तीसगढ़ राज्य ने केंद्र प्रवर्तित योजनाओं के वित्तीय प्रबंधन के लिए "जस्ट इन टाइम" (जेआईटी) मॉडल और एसएनए स्पर्श प्रणाली को अपनाया है। यह प्रणाली वित्तीय प्रवाह को कुशल बनाते हुए निधियों के वितरण, ट्रैकिंग और भुगतान को आसान बनाती है। इसके तहत राज्य सरकार ने केंद्र की निधि को आरबीआई के ई-कुबेर नेटवर्क और राज्य की निधि को वित्तीय प्रबंधन एवं सूचना प्रणाली (एफएमआईएस) के माध्यम से समेकित किया है। इस पहल से निधि के सही समय पर उपयोग और वास्तविक समय में व्यय की रिपोर्टिंग भी सुनिश्चित हुई है। इस सुधार के तहत स्मार्ट भुगतान  एल्गोरिथम का उपयोग किया गया है, जिससे भुगतान ट्रिगर नियमों के आधार पर वास्तविक समय में किया जाता है। इससे सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) के परिणाम बेहतर हुए हैं। साथ ही, राज्य में डिजिटल प्लेटफॉर्म और पोर्टल्स का निर्माण कर आम जनता को सरकारी योजनाओं का लाभ तेजी से और पारदर्शी तरीके से पहुंचाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार ने डिजिटल इंडिया और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) को बढ़ावा देने के लिए अपने तकनीक आधारित सुधारों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रासंगिक बनाया है। राज्य की अधोसंरचना परियोजनाओं और इन्फ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम को इस प्रोत्साहन राशि से और अधिक मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा है कि तकनीक आधारित सुधार और सुशासन ही छत्तीसगढ़ के आर्थिक विकास का मूलमंत्र है। यह उपलब्धि न केवल प्रशासनिक दक्षता का प्रमाण है, बल्कि जनता के प्रति हमारी सरकार के सुशासन के संकल्प का प्रमाण है। छत्तीसगढ़ सरकार का यह प्रयास न केवल राज्य को तकनीकी रूप से सशक्त बनाएगा, बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणा बनेगा। आईटी को बढ़ावा छत्तीसगढ़ सरकार प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाने आईटी के प्रयोग को बढ़ावा दे रही है।इसी के तहत् केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं के लिए राशि जारी करने, वितरित करने एवं निधियों की ट्रैकिंग करने तथा बेहतर नकद प्रबंधन के लिए राज्य शासन द्वारा एसएनए स्पर्श के अंतर्गत जेआईटी (जस्ट इन टाईम) मॉडल को अपनाया गया है। इसके माध्यम से केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं के लिए नवीन सिस्टम के माध्यम से कार्य किया जा रहा है जिसका उद्देश्य केन्द्र और राज्य की समेकित निधि से राशि को उचित समय पर प्राप्त कर कुशल भुगतान प्रसंस्करण पर ध्यान केन्द्रित करते हुए निधि के उपयोग को अनुकूलित करना एवं व्यय की वास्तविक समय रिपोर्टिंग की सुविधा प्रदान करना है। इसमें केन्द्र प्रवर्तित योजना के राज्य की हिस्से की राशि एफएमआईएस (वित्तीय प्रबंधन एवं सूचना प्रणाली) तथा केन्द्र के हिस्से की राशि आरबीआई के ई-कुबेर नेटवर्क के माध्यम से जारी की जाती है, जिससे रियल टाईम फण्ड यूटिलाईजेशन किया जा रहा है। "जस्ट इन टाइम" पर फोकस केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं के लिए कुशल निधि प्रवाह प्रणाली के साथ भुगतान सह लेखा नेटवर्क की स्थापना कर सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली की सुविधा प्रदान करने के लिए जस्ट इन टाईम के माध्यम से "सही समय पर" राशि हस्तांतरण की प्रक्रिया अपनायी गई है। इसमें स्मार्ट भुगतान के तहत एल्गोरिदम के माध्यम से ट्रिगर नियमों पर आधारित वास्तविक समय में कुशल भुगतान किया जा रहा है जिससे सार्वजनिक क्षेत्र में वित्तीय प्रबंधन परिणामों को बेहतर बनाने में मदद मिली है। छत्तीसगढ़ शासन केन्द्र सरकार के डिजिटल इण्डिया पहल को मजबूत करने हेतु प्रतिबद्ध है। बेहतर नकद प्रबंधन एवं सार्वजनिक वित्त प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) के लिए जस्ट इन टाईम मॉडल डिजिटल इण्डिया एवं डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) को सहयोग प्रदान करता है। "तकनीक आधारित रिफॉर्म और सुशासन तीव्र आर्थिक विकास" वित्तीय वर्ष 2024-25 के बजट वक्तव्य में शामिल स्ट्रैटेजिक स्तंभों में से एक है। केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं के लिए वित्तीय प्रबंधन प्रणाली अपनाने हेतु किये गये इस रिफॉर्म के लिए भारत सरकार द्वारा भी पूर्ण सहयोग दिया जा रहा है। इस रिफॉर्म के लिए राज्य को भारत सरकार से 250 करोड़ प्रोत्साहन राशि पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) के लिए प्रदान की है। इसके अतिरिक्त 250 करोड़ प्रोत्साहन राशि प्राप्त होना संभावित है। इस राशि का उपयोग राज्य के अधोसंरचना निर्माण परियोजनाओं में इन्फ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के लिये किया जा रहा है। recent visitors 72

ठंडी हवाओं की कंपकंपी में अलाव बना सहारा, छत्तीसगढ़-कड़ाके की ठंड से नए साल का स्वागत

रायपुर। मैकल पर्वत श्रंखला और अमरकंटक की तराई में बसे पेंड्रा गौरेला मरवाही इलाके में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। नए साल के पहले दिन घने कोहरे से पूरा क्षेत्र कोहरे की चादर में लपटा नजर आया। मौसम साफ होते ही ठंड का एहसास कुछ ज्यादा ही हो रहा है। वहीं उत्तर भारत में हो रही बर्फबारी के चलते भी दिन के वक्त भी लोग गर्म कपड़े पहने नजर आ रहे हैं। मौसम खुलते ही तापमान नीचे की ओर लुढका और यहां न्यूनतम तापमान सात डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में ओस की बूंदे भी जमने लगी है। तो लोग ठंड से बचने के लिए अलाव का सहारा ले रहे है। नये साल के पहले दिन पेंड्रा गौरेला मरवाही इलाके में कड़ाके की ठंड शुरू हो गई। उत्तर भारत में हो रही लगातार बर्फबारी का असर इस इलाके में भी देखने को मिल रहा है। इलाके का तापमान 7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। यहां पर लगातार तापमान में गिरावट के साथ दिन के समय भी ठंडी-ठंडी हवाएं चल रही हैं। लोग दिन के समय भी गर्म कपड़े पहनने को मजबूर हैं। हालांकि दिन के वक्त धूप निकलने की वजह से ठंड से थोड़ी राहत जरूर मिल रही है। हालांकि, ठंड की वजह से ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग ठंड से बचने के लिए अलाव का सहारा ले रहे हैं। वहीं मैकल पर्वत श्रंखला और अमरकंटक की तराई में बसे ग्रामीण क्षेत्रों में ओस की बूंदे भी जमने लगी है। तो ठंड से बचने के लिए लोग चाय की चुस्की का सहारा भी ले रहे हैं। चाय की गर्म-गर्म चुस्कियां लेते लोग सुबह से ही ठेलो में नजर आने लग जाते हैं। हालांकि अब तक चौक चौराहों में प्रशासन के द्वारा अलाव जलाने की व्यवस्था नहीं की गई है। यह कहा जा सकता है कि उत्तर भारत में हो रही बर्फबारी के बाद उत्तरी हवाओं के असर के चलते ही इलाका कड़ाके की ठंड और शीतलहर की चपेट में है। recent visitors 58

कलाकृतियों के गिफ्ट पाकर खुश हुए मुख्यमंत्री साय, छत्तीसगढ़-स्कूली बच्चों ने नई शिक्षा नीति के तहत बनाई लकड़ी की नेम प्लेट और पोट्रेट

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और कैबिनेट के मंत्रीगणों के लिए नारायणपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत मडानार स्कूल से आज विशेष उपहार आया। शासकीय उच्च प्राथमिक शाला मडानार के स्कूली बच्चों ने मुख्यमंत्री और सभी मंत्री गणों के लिए अपने हाथों से तैयार लकड़ी की नेम प्लेट भेंट की। मुख्यमंत्री साय उपहार पाकर इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने इस नेम प्लेट को तत्काल मंत्रालय स्थित अपने चेंबर के टेबल पर लगवाया और सभी मंत्रियों से भी कहा कि सभी अपने चेंबर में इसे लगवाएं। इन बच्चों ने आज मुख्यमंत्री से मंत्रालय स्थित उनके कार्यालय कक्ष में मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि बस्तर की अद्भुत कला को जिस समर्पण के साथ हमारे बच्चे आगे बढ़ाने का काम कर रहे है, वह सराहनीय है। बच्चों की शिक्षा और नया सीखने के प्रति लगन बस्तर की उन्नति का रास्ता खोलने का काम करेगी। उन्होंने सभी बच्चों का परिचय लिया और उनकी कला की प्रशंसा की। मुख्यमंत्री साय ने इस कला को सीखने के लिए बच्चों के प्रयासों को सराहा और जब उन्हें पता चला कि नई शिक्षा नीति के अंतर्गत प्रशिक्षण प्राप्त कर बच्चों ने यह सीखा है, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यही उद्देश्य था कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से बच्चे न केवल पढ़ाई करें बल्कि अपने रुचि के कार्यों में भी पारंगत हो। शिक्षा को रुचिकर बनाने, कला-संस्कृति को सहेजने के साथ-साथ रोजगार के बड़े उद्देश्य की पूर्ति नई शिक्षा नीति के माध्यम से साकार हो रही है। इस दौरान मुख्यमंत्री को बच्चों ने काष्ठ पर उकेरे गए संविधान की उद्देशिका भेंट की और उपमुख्यमंत्री द्वय अरुण साव और विजय शर्मा को पोट्रेट भेंट किया। स्कूली बच्चों के साथ आए शिक्षक शिवचरण साहू ने मुख्यमंत्री को बताया कि नेम प्लेट को 12वीं कक्षा की छात्रा कशिक ने अपने हाथों से तैयार किया है। वहीं पोट्रेट को खिलेंद्र बघेल ने और संविधान की उद्देशिका को छात्र सागर ने तैयार किया है। उन्होंने बताया कि सभी बच्चों को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में पूर्व व्यवसायिक शिक्षा अंतर्गत यह प्रशिक्षण मिला है और बच्चे रुचि के साथ इसे सीख रहे हैं। शिवचरण साहू ने बताया कि सालाना लगभग 3 लाख रुपए इन कलाकृतियों के विक्रय के माध्यम से उन्हें प्राप्त हो रहे हैं। बच्चों द्वारा तैयार यह कलाकृतियां अब अमेजॉन और फ्लिपकार्ट जैसे बड़े ऑनलाइन बाजार में भी उपलब्ध है। इस अवसर पर कई मंत्री रहे उपस्थित इस अवसर पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम, खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल, वन केदार कश्यप, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन उपस्थित थे। recent visitors 85

अस्पतालों में बढ़ेगी सुरक्षा व्यवस्था, छत्तीसगढ़-गिरने लगा पारा

रायपुर. छत्तीसगढ़ में ठंड एक बार फिर बढ़ने लगी है. बारिश और ठंडी हवाओं से 2 डिग्री तक पारा गिरा है. शहरों का अधिकतम व न्यूनतम तापमान 2 डिग्री तक कम है. मौसम विभाग के मुताबिक, आगामी दिनों में न्यूनतम तापमान में 4 से 5 डिग्री की गिरावट दर्ज की जा सकती है. पश्चिमी विभोक्ष का असर कम होने से प्रदेश में हवा की दिशा में परिवर्तन हुआ है. रायपुर में रविवार को अधिकतम तापमान 28.9 डिग्री और न्यूनतम तापमान 18.7 डिग्री सेल्सियस रहा. माना में अधिकतम तापमान 29 डिग्री, बिलासपुर में 28.2 डिग्री, पेंड्रारोड में 25.6 डिग्री, अम्बिकापुर में 26 डिग्री, जगदलपुर में 30.2 डिग्री, दुर्ग में 31.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. वहीं रायपुर में न्यूनतम तापमान 18.7, माना में 16.8 डिग्री सेल्सियस, बिलासपुर में 18 डिग्री सेल्सियस, पेंड्रारोड में 13.2 डिग्री सेल्सियस, अम्बिकापुर में 13.6 डिग्री सेल्सियस, जगदलपुर में 18.1 डिग्री सेल्सियस और दुर्ग में 17.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है. स्टॉफ की बढ़ेगी सुरक्षा व्यवस्था रायपुर. अस्पतालों में अब डॉक्टर और स्टॉफ की सुरक्षा व्यवस्था सख्त होगी. यह निर्देश रायपुर कमिश्नर महादेव कावरे ने बैठक में अधिकारियों को दिए हैं. इसके लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया गया है. कावरे ने अस्पतालों में सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाने की बात कही है. कमिश्नर ने अस्पतालों के परिसर में किसी भी अप्रिय घटना के संबंध में हेल्पलाइन नंबर 112 में आई शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए. राजधानी में आज बढ़ते कदम संस्था द्वारा मॉडल ब्लड बैंक के सहयोग से मरीन ड्राइव तेलीबांधा में रक्तदान शिविर लगाया जा रहा है. यह शिविर शाम 4 से रात 8 बजे तक लगाया जाएगा. श्री दिगंबर जैन पंचायत ट्रस्ट और महिला व बालिका मंडल द्वारा श्री आदिनाथ बड़ा जैन मंदिर मालवीय रोड में भक्तामर काव्य की दपोर्चना एवं महाआरती का कार्यक्रम रखा गया है. यह कार्यक्रम रात्रि 8 बजे से होगा. recent visitors 100

खाद्य विभाग ने की फैक्टरी सील, छत्तीसगढ़-2500 किलो नकली पनीर जब्त

रायपुर। अगर आप पनीर खाने के शौकीन हैं, तो जरा संभलकर। दरअसल, छत्तीसगढ़ खाद्य एवं औषधि विभाग ने मिलावटखोरों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए रायपुर स्थित नकली पनीर बनाने की फैक्टरी को सील किया है। इतना ही नहीं फैक्टरी से 2500 किलोग्राम नकली पनीर भी जब्त किया है। विभाग ने जांच में पाया कि पनीर में डालडा, पाम ऑयल, तेल, मैदा, हानिकारक रसायन  समेत कई चीजों को मिलाया गया था। ये स्वास्थ्य के लिये बहुत खतरनाक हैं। खाद्य एवं औषधि विभाग के नियंत्रक चंदन कुमार ने बताया कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन कार्यालय को सूचना मिली थी कि बीरगांव के काशी एग्रो फूड्स में बिना दूध के कैमिकल एवं अन्य रसायन जैसे डालडा जैसे एमएसपी डालकर नकली पनीर बनाकर पैक किया जा रहा था। इस पर विभाग की उड़नदस्ता टीम ने काशी एग्रो फूड्स में छापामार कार्रवाई करते हुए फैक्टरी को सील किया है। बताया जाता है कि ये नकली पनीर नये साल पर बाजार में बेचने की तैयारी थी। टीम ने मौके पर किसी भी प्रकार के दस्तावेज जैसे स्टॉक रजिस्टर, किट रहित प्रणाम पत्र, पोषणकारी मान जैसे प्रोटीन की मात्रा आदि की जानकारी नहीं दी गई। वहीं पानी से जो पनीर बनाया जा रहा था उसका टीडीएस 900 है, जो बहुत अधिक है। इसमें हैवी मेटल पीएच 8.3 मिला है। वहीं मौके से खतरनाक रसायन भी जब्त किया गया है। ये पूरी कार्रवाई में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के नियंत्रक के निर्देशन में की गई. टीम में सहायक आयुक्त मोहित बेहरा, नितेश मिश्रा, खाद्य सुरक्षा अधिकारी राखी ठाकुर, खीर सागर पटेल, अजीत बघेल, संतीश राज, प्रकाश परमार लैब स्टाफ आदि शामिल रहे। recent visitors 43