Tuesday, July 7, 2026 1:26 am

केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने की दुआ, राजस्थान-अजमेर दरगाह में PM मोदी की ओर से चादर पेश

अजमेर। सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की अजमेर दरगाह पर शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से चादर पेश की गई। प्रधानमंत्री मोदी की ओर से अजमेर दरगाह के लिए 11वीं बार चादर भेजी गई है। सालाना उर्स के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने सभी को मुबारकबाद दी और देश-दुनिया में अमन-चैन और भाईचारे की कामना की। इस चादर को केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलात मंत्री किरेन रिजिजू और भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी ने पेश किया। पहली बार दरगाह पहुंचे रिजिजू केंद्रीय मंत्री रिजिजू पहली बार अजमेर दरगाह आए। उन्होंने गरीब नवाज की दरगाह में पीएम मोदी की ओर से भेजी गई मखमली चादर और अकीदत के फूल पेश किए। इस दौरान देश और दुनिया में शांति और भाईचारे के लिए दुआ की। दिल्ली की दरगाहों की जियारत चादर पेश करने से पहले, शुक्रवार को किरेन रिजिजू और जमाल सिद्दीकी ने दिल्ली स्थित निजामुद्दीन औलिया और हजरत कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की दरगाह पर जियारत की। इसके बाद अजमेर आकर गरीब नवाज की दरगाह पर चादर चढ़ाई। इस दौरान दरगाह परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए भारी पुलिस बल भी तैनात रहा। किरेन रिजिजू ने ऐप किया लॉन्च केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने दरगाह के महफिल खाने में एक समारोह में दरगाह कमेटी के विशेष मोबाइल ऐप को भी लॉन्च किया। दरगाह कमेटी की ओर से बनवाई गई इस ऐप से ख्वाजा साहब के जीवन, उनकी शिक्षाओं और दरगाह ख्वाजा साहब एक्ट 1995 एवं बाई लॉ, 1958 के तहत प्रशासनिक और प्रबंधकीय कार्यों की जानकारी डिजिटल रूप में उपलब्ध होगी। इससे कमेटी की प्रशासनिक और प्रबंधकीय सेवा की जानकारी भी ली जा सकती है।  कमरों की बुकिंग, ऑनलाइन दान और गुंबद शरीफ और अन्य प्रमुख स्थानों का सीधा प्रसारण मोबाइल ऐप के माध्यम से देखा जा सकेगा। recent visitors 92

‘सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए सब कुछ हो रहा’, राजस्थान-अजमेर की दरगाह के शिव मंदिर होने के दावे पर दीवान बोले

अजमेर. राजस्थान के अजमेर मे स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह को हिंदू मंदिर बताने वाली याचिका को निचली अदालत ने बुधवार को सुनवाई के लिए मंजूर कर लिया है। कोर्ट ने सभी पक्षकारों को नोटिस जारी किया है और सुनवाई के लिए 20 दिसंबर की तारीख तय की है। हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने सिविल न्यायाधीश के समक्ष वाद पेश किया है, जिसमें उन्होंने अजमेर दरगाह में संकट मोचन महादेव मंदिर होने का दावा किया है। इस मामले पर अब दरगाह दीवान के उत्तराधिकारी सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती का बयान सामने आया है। सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने कहा कि “हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने दरगाह से संबंधित वाद को अजमेर न्यायालय में प्रस्तुत किया था। कोर्ट ने वाद दर्ज कर नोटिस जारी किया है। यह एक न्यायिक प्रक्रिया है, इस मामले में ज्यादा कहना उचित नहीं है। न्याय प्रक्रिया पर हम लोग नजर लगाए हुए हैं। हम अपने वकीलों से राय ले रहे हैं। हम वकीलों से आगे की प्रक्रिया की राय ले रहे हैं। जैसे ही हमें एक्सपर्ट ओपिनियन मिलेगा, उसके अनुसार हम आगे की कानूनी कार्रवाई करेंगे। हमें मालूम हुआ कि है वादी ने दरगाह कमेटी, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और अल्पसंख्यक मंत्रालय को पक्षकार बनाया है। गरीब नवाज के किसी वंशज को पक्षकार नहीं बनाया गया है। इसलिए, हम वकीलों से राय लेकर आगे की जो प्रक्रिया पर विचार करेंगे। उन्होंने कहा कि देश नई परंपरा डाली जा रही है। आए दिन जो देखने में आ रहा है कि हर दरगाह या मस्जिद पर हर कोई लोकप्रियता पाने के लिए दावा कर रहा है कि यहां मंदिर था, उसे तोड़कर मस्जिद बनाई गई या दरगाह बनाई गई। उन्होंने कहा, “यह परंपरा देश के हित में सही नहीं है। हमारे समाज के हित में सही नहीं है। यह सिर्फ सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए है। ये लोग अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं।” उन्होंने कहा कि यह हिंदुस्तान की वह दरगाह है, जिससे पूरी दुनिया के हर मजहब का आदमी जुड़ा हुआ है। हर मजहब के आदमी की आस्था दरगाह से जुड़ी हुई है। इस दरगाह की तारीख कोई सौ दो सौ साल पुरानी नहीं, लगभग 850 साल पुरानी है। साल 1195 में गरीब नवाज हिंदुस्तान में तशरीफ लाए थे। साल 1236 में आपका विसाल हुआ था। उसी समय से यह दरगाह कायम है। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान में इस तारीख के दौरान जो हिंदू राजा गुजरे हैं, यह दरगाह सबकी अकीदत का मरकज रही है। सबने अपने अपने तरीके से गरीब नवाज की बारगाह में नजराना पेश किया है। दरगाह में चांदी का कटहरे है जो जयपुर महाराज का चढ़ाया हुआ है। उस दौर में जितने राजा रजवाड़े हुए हैं, चाहे वह किसी भी मजहब के हों, इस बारगाह से किसी न किसी तरीके से जुड़ रहे हैं। तारीख में कोई ऐसा इतिहासकार नहीं है, जिसने इस बारगाह के बारे में लिखा होगा कि यहां पर मंदिर था या कुछ तोड़ करके बनाया गया। कहीं तारीख नहीं है। सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने कहा कि वादी ने हरविलास शारदा की किताब को आधार बनाया है जो कोई इतिहासकार नहीं थे। वह अजमेर के सम्मानित शख्सियत थे। उनकी किताब अजमेर हिस्टोरिकल एंड डिस्क्रिप्टिव 1910 में आई और 1920 में पुनः प्रकाशित हुई। उस किताब को आधार बनाकर के इस तरह के मनगढ़ंत दावे पेश करना या बात करना बिल्कुल गलत है। recent visitors 66

एक महीने से रह रहा था अवैध, राजस्थान-अजमेर की दरगाह से बांग्लादेशी युवक को पकड़ा

अजमेर. अजमेर की दरगाह थाना पुलिस और सीआईडी की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए बांग्लादेशी घुसपैठी युवक को गिरफ्तार किया है। युवक करीब एक महीने पहले बॉर्डर पर तार के नीचे से भारत में आया था। पुलिस युवक से पूछताछ में जुटी है। पूछताछ के बाद युवक को अलवर के डिटेनिंग सेंटर भेजा जाएगा। दरगाह थानाधिकारी नरेंद्र जाखड़ ने बताया कि अजमेर एसपी वंदिता राणा के निर्देश पर ऑपरेशन एरिया डोमिनेशन अभियान चलाया गया है। इस अभियान के तहत थाने पर एक टीम का गठन कर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। दरगाह थानाधिकारी नरेंद्र जाखड़ ने बताया कि इस दौरान सीआईडी और थाने की टीम को दरगाह क्षेत्र में एक संदिग्ध युवक के घूमने का इनपुट मिला था। सीआईडी और थाने की टीम मंगलवार दोपहर मौके पर पहुंचे तो युवक मजदूरी करता हुआ पाया गया। पूछताछ करने पर संतोषजनक जवाब नहीं दे सका।जाखड़ ने बताया कि तलाशी लेने पर उसके पास से बांग्लादेश के दस्तावेज बरामद हुए। जिससे उसकी पहचान ढांका बांग्लादेश निवासी सैयफुल होसेन सुमोन (20) पुत्र मोहम्मद हसन अली के रूप में हुई। युवक को डिटेन कर थाने पर लाया गया है। जिससे पूछताछ की जा रही है। दरगाह थानाधिकारी नरेंद्र जाखड़ ने बताया कि प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया की बांग्लादेशी युवक सैयफुल होसेन सुमोन 1 महीने पहले ही बांग्लादेश से तारों के नीचे से अवैध रूप से भारत में घुसा था। वह यहां दरगाह जियारत करने और मजदूरी के लिए आया था। आरोपी अपनी पहचान छुपाने के लिए खानाबदोश के रूप में दरगाह क्षेत्र में रह रहा था। आरोपी के साथ और कौन शामिल है इसे लेकर पूछताछ की जा रही है। पूछताछ के बाद उसे अलवर के डिटेनिंग सेंटर भेजा जाएगा। अजमेर के दरगाह इलाके में लगातार पुलिस व सीआईडी के द्वारा संयुक्त रूप से अभियान चलाकर बांग्लादेशी, रोहिंग्या सहित अन्य लोगों की जांच की जा रही है। recent visitors 73