हमें विश्वास है कि एकनाथ शिंदे सरकार में शामिल होंगे. सीएम, डिप्टी सीएम सिर्फ तकनीकी शब्द हैं: देवेंद्र फडणवीस

मुंबई शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे, भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस, एनसीपी प्रमुख अजित पवार ने राज्य में सरकार बनाने का दावा पेश किया। देवेंद्र फडणवीस कल, 5 दिसंबर को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। महाराष्ट्र के भावी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, "हमने राज्यपाल से मुलाकात की है और राज्य में सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए समर्थन पत्र सौंपा है। राज्यपाल ने हमें कल शाम 5.30 बजे शपथ समारोह के लिए आमंत्रित किया है। महाराष्ट्र के मनोनीत मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, "आज हमने राज्यपाल से भेंट की है…और शिवसेना के अध्यक्ष और शिवसेना विधायक दल के नेता के तौर पर एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद के लिए मेरे नाम की सिफारिश करते हुए एक पत्र दिया है…राज्यपाल ने हमें सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया है। शपथ ग्रहण समारोह 5 दिसंबर(कल) शाम 5.30 बजे प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति में होगा…हमने महाराष्ट्र की जनता से जो वादे किए हैं उनको पूरा करने के लिए यह सरकार काम करेगी। . हमें विश्वास है कि एकनाथ शिंदे सरकार में शामिल होंगे. सीएम, डिप्टी सीएम सिर्फ तकनीकी शब्द हैं. एनसीपी प्रमुख अजित पवार ने कहा, "…हम राज्य में सरकार चलाने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देंगे। पार्टी से संबंधित गतिविधियों को (भाजपा प्रमुख) चंद्रशेखर बावनकुले और एनसीपी के सुनील तटकरे संभालेंगे। शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने कहा, "मुझे बहुत खुशी है कि हमारी सरकार, महायुति सरकार, हमारी टीम ने ढाई साल में जो काम किया है वह उल्लेखनीय है और इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। recent visitors 68

कल सुबह 10 बजे विधायक दल की बैठक में पर्यवेक्षक की मौजूदगी में देवेंद्र फडणवीस के नाम पर मुहर लग जाएगी!

मुंबई  पांच साल के सीएम, फिर 72 घंटे के मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और फिर ढाई साल के डिप्टी सीएम। पिछले 10 साल तक अलग-अलग रोल में देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र की राजनीति की राजनीति के हीरो बने रहे। अब पांच दिसंबर को वह तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की तैयारी कर रहे हैं। महाराष्ट्र में अब पांच साल के मराठा राज के बाद 'पेशवा' की 'पेशवाई' की चलेगी। बीजेपी ने फडणवीस के नाम को सीएम पद के लिए फाइनल कर लिया है। चार दिसंबर को सुबह 10 बजे विधायक दल की बैठक में पर्यवेक्षक निर्मला सीतारमन और विजय रूपाणी की मौजूदगी में उनके नाम पर मुहर लग जाएगी। महाराष्ट्र के पहले ब्राह्मण नेता, जो दूसरी बार सीएम बनेंगे मराठा इतिहास में पंतप्रधान यानी 'पेशवा' अपने कूटनीति और युद्धनीति के लिए जाने जाते थे। देवेंद्र फडणवीस के प्रशंसक भी उन्हें 'पेशवा' और देवा भाऊ ही कहते हैं। देवेंद्र फडणवीस पहले भी दो बार महाराष्ट्र के सीएम रह चुके हैं, मगर उनके लिए यह कुर्सी 'लॉलीपॉप' की तरह नहीं मिली। हर बार उन्होंने बड़े चैलेंज को स्वीकार किया और हर दांव से पार्टी को जीत दिलाई। उनकी खासियत यह है कि उन्होंने युवा पार्षद के तौर पर राजनीति में एंट्री ली है, इसलिए वह जनता और कार्यकर्ताओं के नब्ज को पहचानते हैं। देवेंद्र फडणवीस संघ के 'लाडले' हैं और शाह-मोदी के प्रिय भी। काबिलियत के कारण ही वह मराठा राजनीति वाले राज्य में दूसरे ब्राह्मण सीएम बने। महाराष्ट्र के पहले ब्राह्मण सीएम शिवसेना के नेता मनोहर जोशी थे, मगर वह पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सके थे। कांग्रेस-एनसीपी के 15 साल के शासन का किया था अंत 2014 में पहली बार देवेंद्र फडणवीस जब सीएम बने थे, तब उन्होंने एनसीपी-कांग्रेस के 15 साल के शासन का अंत किया था। फडणवीस ने विधानसभा से सड़क तक कांग्रेस-एनसीपी शासन में हुए सिंचाई घोटाले को लेकर आवाज बुलंद की। मोदी लहर के बीच प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र ने चुनाव का ताना-बाना बुना और जीत हासिल की। दूसरी बार भी एंटी इम्कबेंसी को दरकिनार कर गठबंधन के साथ बहुमत हासिल किया, मगर सत्ता हासिल नहीं कर सके। 72 घंटे की सरकार बनाई, तब उन्होंने शरद पवार से बातचीत की थी। जब सरकार गिरी, तब फडणवीस ने विधानसभा में चेतावनी के लहजे में पवार और ठाकरे को एक शेर सुनाया था। 'मेरा पानी उतरता देख, मेरे किनारे पर घर मत बसा लेना। मैं समंदर हूं…लौटकर आऊंगा।' ढाई साल बाद ही शिवसेना दो हिस्सों में टूट गई। एनसीपी के दो टुकड़े हो गए। बीजेपी को फडणवीस सत्ता में ले आए। 2024 में एक बार फिर अपनी रणनीति से एंटी इम्कबेंसी की हवा बदल दी। बीजेपी सर्वाधिक 132 सीटें जीती ही, महायुति ने भी इतिहास रच दिया। नरेंद्र मोदी क्यों हुए देवेंद्र फडणवीस के मुरीद ? रिपोर्टस के मुताबिक 2014 के लोकसभा चुनाव में रैली के दौरान नरेंद्र मोदी एयरपोर्ट पर बीजेपी के बड़े नेताओं से बातचीत कर रहे थे। वहां नितिन गडकरी, गोपीनाथ मुंडे और देवेंद्र फडणवीस भी थे। नरेंद्र मोदी ने पूछा कि महाराष्ट्र में बीजेपी को कितनी सीटें मिलेंगी? गडकरी और मुंडे 17-18 के आंकड़े तक पहुंच सके। तब देवेंद्र फडणवीस ने 40 सीटें जीतने की भविष्यवाणी की और यह सच साबित हुई। फिर विधानसभा चुनाव के दौरान फडणवीस ने शिवसेना से अलग चुनाव लड़ने के लिए केंद्रीय नेतृत्व को राजी किया। यह प्रयोग भी सफल हुआ। 2014 में पहली बार शिवसेना से अलग प्रदेश में बीजेपी अकेले चुनाव लड़ी और 125 सीटें हासिल कीं। उनकी इस रणनीति का बीजेपी के बड़े नेताओं ने विरोध किया था, मगर फडणवीस की रणनीति कामयाब रही और बीजेपी को महाराष्ट्र की पहली बार सत्ता मिली। उद्धव ठाकरे के घमंड को तोड़ने वाले 'पेशवा'! यह कहानी महाराष्ट्र की सियासी गलियारों में सुनाई जाती है। सच या झूठ, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। 2014 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के केंद्रीय नेताओं ने उद्धव ठाकरे को बातचीत का निमंत्रण दिया था। बताया जाता है कि उद्धव ठाकरे ने संदेश दिया कि बीजेपी नेता मातोश्री में आकर उनसे चर्चा करे। यह बात बीजेपी को पसंद नहीं आई। तब देवेंद्र फडणवीस ने इसे चुनौती के तौर पर लिया। पहले बीजेपी अकेले चुनाव लड़कर बड़ी पार्टी बनी। 44 साल की उम्र में जब पहली बार सीएम बने, तब फडणवीस ने पहली बार शिवसेना को गठबंधन का जूनियर पार्टनर बनाया। पांच साल तक सरकार चलाई। दूसरी बार बीजेपी और शिवसेना साथ में उतरी। महायुति को बहुमत मिला, मगर उद्धव ठाकरे सीएम पोस्ट पर अड़ गए। देवेंद्र फडणवीस ने एनसीपी के क्षणिक बागी अजित पवार के साथ 80 घंटे के लिए सरकार बनाई, मगर चल नहीं सकी। फडणवीस विपक्ष में बैठे और उद्धव ठाकरे की शिवसेना ढाई साल में ही दो हिस्सों में बंट गई। जब चुनाव में उतरे तो ठाकरे की सेना को 20 पर समेट दिया। धीरे-धीरे देवेंद्र बनते गए मराठा राजनीति के सूरमा देवेंद्र फडणवीस के पिता गंगाधर फडणवीस जनसंघ और बीजेपी के नेता रहे। नागपुर के गंगाधर फडणवीस को नितिन गडकरी भी अपना राजनीतिक गुरु बताते रहे हैं। 22 साल की उम्र में फडणवीस ने नागपुर के पार्षद से राजनीति शुरूआत की, फिर 27 साल की आयु में युवा मेयर बनने का रेकॉर्ड बनाया। 1999 में दक्षिण पश्चिम नागपुर सीट से विधानसभा चुनाव लड़े और लगातार जीतते रहे। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बने। 2014 के विधानसभा चुनाव से पहले गोपीनाथ मुंडे के आकस्मिक निधन के बाद नेतृत्व की चर्चा चल रही थी। नितिन गडकरी और एकनाथ खडसे जैसे दिग्गज कतार में थे। चुनाव के दौरान दिल्ली में नरेंद्र, महाराष्ट्र में देवेंद्र का नारा काफी लोकप्रिय हुआ। देखते ही देखते वह बीजेपी के पोस्टर बॉय बन गए। अपनी बेदाग छवि और लोकप्रियता के कारण आरएसएस ने भी उन्हें नेक्स्ट जेनरेशन के नेता के तौर पर चुना, जिसमें वह खरे साबित हुए। उन्होंने गठबंधन की सरकार चलाकर अपने नेतृत्व क्षमता को भी साबित कर दिया। recent visitors 57

देश और प्रदेश की जनता प्रधानमंत्री मोदी के साथ हैं, मतदाताओं के ध्रुवीकरण के प्रयासों को जनता ने नाकाम कर दिया: देवेंद्र फडणवीस

मुंबई महाराष्ट्र चुनाव के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि प्रदेश की जनता ने हमें अभूतपूर्व जीत दी है। उन्होंने आगे कहा कि देश और प्रदेश की जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हैं। उनके दिए नारे 'एक हैं तो सुरक्षित हैं' के अनुरूप सभी वर्गों और समुदायों के लोगों ने एकजुट होकर हमें वोट दिया। यह महायुति, सीएम एकनाथ शिंदे, डिप्टी सीएम अजित पवार और रामदास अठावले की जीत है, यह एकता की जीत है। विपक्ष की ओर से धर्म के आधार पर मतदाताओं के ध्रुवीकरण के प्रयासों को जनता ने नाकाम कर दिया। प्रदेश की जनता को हमारी सरकार की ओर से चलाई जा रही योजनाओं का लाभ बड़े पैमाने पर मिला है। जिसका परिणाम यह है कि जनता ने हमें बड़े बहुमत के साथ सेवा करने का एक और अवसर दिया है। महाराष्ट्र के अगले सीएम के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के चेहरे पर कोई विवाद नहीं होगा। यह पहले दिन से तय था कि चुनाव के बाद तीनों पार्टियों के नेता एक साथ बैठेंगे और इस पर फैसला करें। फैसला सभी को मान्य होगा, इस पर कोई विवाद नहीं है। जो होगा उचित निर्णय होगा। देवेंद्र फडणवीस ने आगे कहा कि मैंने पहले कहा था कि मैं आधुनिक अभिमन्यु हूं और चक्रव्यूह तोड़ना जानता हूं। मुझे लगता है कि इस जीत में मेरा योगदान छोटा है, यह हमारी टीम की जीत है। लोगों ने एकनाथ शिंदे को असली शिवसेना के रूप में स्वीकार कर लिया है। वहीं जनता ने अपने जनादेश से अजित पवार की एनसीपी को असली माना है। हम इस जीत के लिए प्रदेश की जनता का आभार जताते हैं। संजय राउत के बयान पर प्रतिक्रिया करते हुए उन्होंने तंज कसा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा ने झारखंड में जीत हासिल की है। वहां चुनाव पूरी तरह से निष्पक्ष हुआ। वहां चुनाव आयोग ने अच्छा काम किया। वहां ईवीएम इतनी मजबूत थी कि उसे हैक नहीं किया जा सका और महाराष्ट्र में हमें बहुत बड़ी जीत मिली है। यहां ईवीएम पक्षपाती हो गई। यहां लोकतंत्र की हत्या कर दी गई है। कभी-कभी आत्मनिरीक्षण करने की जरूरत होती है। उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) भारी बहुमत की ओर अग्रसर है। वहीं झारखंड में जेएमएम-कांग्रेस गठबंधन ने बहुमत का आंकड़ा पार किया है और सत्ता में लगातार दूसरी बार लौटने में कामयाब रही है। महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन 226 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं विपक्ष महाविकास अघाड़ी (एमवीए) 288 सदस्यीय विधानसभा में 54 सीटों पर आगे है। झारखंड में शुरू में काफी कड़ी टक्कर देखने को मिली लेकिन हेमंत सोरेन की झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 41 के बहुमत के आंकड़े को पार कर लिया है और 55 सीटों पर बढ़त बना ली। वहीं एनडीए 25 सीटों पर आगे चल रहा है। recent visitors 82

महाराष्ट्र में बंपर जीत के बाद तेवर में देवेंद्र फडणवीस, जनता ने महायुति को आशीर्वाद दिया, तोड़ा चक्रव्यूह

मुंबई महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों से भाजपा गदगद है। सूबे के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कई बड़े नेताओं के साथ मिलकर मीडिया से बात की है। उन्होंने कहा कि यह जीत एकता की है। हम सभी ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा और जनता ने महायुति को आशीर्वाद दिया है। उन्होंने इस दौरान खुद को आधुनिक अभिमन्यु बताते हुए कहा कि हमने फेक नैरेटिव को तोड़ दिया है। फडणवीस ने कहा कि मैं आधुनिक युग का अभिमन्यु हूं और चक्रव्यूह को तोड़ना जानता हूं। डिप्टी सीएम ने कहा, 'महाराष्ट्र के सभी लोगों ने मिलकर जीत दिलाई है। लाडली बहनों और लाडले भाइयों का हमें समर्थन मिला है। लोकसभा चुनाव में जिस फेक नैरेटिव को तैयार किया गया था, उसे हमने तोड़ दिया है।' भाजपा लीडर ने कहा कि हमने उस चक्रव्यूह को खत्म कर दिया है, जिसे हमारे खिलाफ रचा गया था। इस चुनाव में एक धर्म विशेष के ध्रुवीकरण का प्रयास किया गया था, लेकिन वह कामयाब नहीं हुआ। हमें सभी साधु-संतों का भी आशीर्वाद मिला और उन्होंने एक रहने का संदेश दिया। हमारे मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, डिप्टी सीएम अजित पवार और सभी छोटे दलों ने भी मिलकर काम किया। महायुति की यह जीत है। मैं पीएम नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करता हूं, जिनके कारण यह जीत मिली है। इसके अलावा होम मिनिस्टर अमित शाह जी का भी आभार व्यक्त करता हूं। उन्होंने यहां समय दिया और जीत दिलाई। अमित शाह और गडकरी को भी दिया फडणवीस ने धन्यवाद फडणवीस ने इस दौरान राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी जैसे नेताओं को भी धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी के नेताओं ने अपनी सीटों पर ही नहीं बल्कि वहां भी काम किया, जहां हमारे दोस्त लड़ रहे थे। इस चुनाव ने साफ कर दिया कि एक हैं तो सेफ हैं। फडणवीस ने कहा कि मैंने पहले ही कहा था कि मैं आधुनिक अभिमन्यु हूं और मैं चक्रव्यूह को तोड़ना जानता हूं। कैसे होगा सीएम का फैसला, फडणवीस ने बताया पूरा प्लान डिप्टी सीएम ने कहा कि राज्य में लोगों को धार्मिक आधार पर बांटने की कोशिश सफल नहीं हुई। इस दौरान सीएम पद को लेकर पूछा गया तो देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि अमित शाह जी ने पहले ही क्लियर कर दिया था कि तीनों दल बैठकर फैसला लेंगे। पहले दिन से ही यह बात तय थी। एकनाथ शिंदे की पार्टी को असली शिवसेना के रूप में लोगों ने स्वीकार कर लिया है। इसी तरह एनसीपी पर अजित पवार का दावा मजबूत हुआ है। recent visitors 69

उलेमा काउंसिल ने एमवीए के सामने 15 मांगें रखी थीं, जिसे विपक्षी गठबंधन ने आसानी से मान लिया: देवेंद्र फडणवीस

मुंबई महाराष्ट्र में अगले हफ्ते विधानसभा चुनाव होने वाला है। इससे पहले भाजपा नेता और राज्य के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुस्लिम धर्मगुरुओं की संस्था उलेमा कांउसिल की मांगों को मानने के लिए महाविकास अघाड़ी (एमवीए) की आलोचना की। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि उलेमा काउंसिल ने एमवीए के सामने 15 मांगें रखी थीं, जिसे विपक्षी गठबंधन ने आसानी से मान लिया। एमवीएम पर जमकर निशाना साधते हुए फडणवीस ने कहा कि यह भूमि पूर्वजों की है न कि रजाकारों की। उलेमा कउंसिल की मांग मानने पर फडणवीस ने एमवीए को घेरा साक्षात्कार में एमवीए की आलोचना करते हुए महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा, "उलेमा काउंसिल ने उन्हें (एमवीए को) समर्थन देने की घोषणा की और अपनी 14 मांगों को उनके सामने रख दिया। उन्होंने (एमवीए) एक साधारण चिट्ठी के जरिए उनकी मांगों को मान लिया। अगर कोई अपनी मांग सामने रखता है, मुझे इससे कोई परेशानी नहीं है। मैं केवल यह सवाल करता हूं कि इनमें से कौन सी मांग स्वीकार्य है। यह मैं आपको बताऊंगा।" उन्होंने आगे कहा, "एक मांग यह है कि 2012 से लेकर 2024 तक दंगों में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ सभी मामले खारिज किए जाएं और वापस लिए जाएं। मैं यह पूछना चाहता हूं कि यह किस तरह की राजनीति है? अगर कोई भी पार्टी ऐसे दंगाइयों को साथ लेकर चुनाव लड़ना चाहती है तो हम बंटे रहेंगे और हमें मार दिया जाएगा।" एमवीए पर लगाए आरोप धर्मिक एकता पर भाजपा के रुख पर प्रकाश डालते हुए फडणवीस ने सीएम योगी के नारे को याद किया। उन्होंने कहा, "जब मुख्यमंत्री योगी ने कहा, बंटेंगे तो कटेंगे। वे हमें इतिहास की याद दिला रहे हैं। यह जमीन छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे हमारे पूर्वजों की है न कि रजाकाकों की।" विपक्षी एमवीए के उलेमा काउंसिल जैसे समूहों के साथ कथित गठबंधन के जवाब में फडणवीस ने कहा, "अगर 1920 में कांग्रेस ने वंदे मातरम् का आधा भाग गाने की मांग न मानी होती तो आजादी का बीज न बोया गया होता।" महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम ने महाविकास अघाड़ी पर राजनीति के लिए धर्म का विभाजन करने का आरोप लगाया। उन्होंने चेतावनी दी कि कांग्रेस की नीतियां का उद्देश्य ओबीसी समुदाय को विभाजित करना है। जब उनसे महायुति के सत्ता में आने के बाद सीएम चेहरे के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अभी तक कोई योजना नहीं बनाई गई है। उन्होंने महायुति की सरकार बनने पर जोर दिया और बताया कि तीनों पार्टियां (भाजपा, राकांपा और शिवसेना) एकसाथ बैठकर इसपर चर्चा करेगी।   recent visitors 80

देवेंद्र फडणवीस ने कहा- रिजल्ट के बाद ही पता चलेगा कौन किसके साथ

मुंबई महाराष्ट्र में कभी 4 राजनीतिक दल हुआ करते थे, लेकिन शिवसेना और एनसीपी में बंटवारे के चलते 6 पार्टियां चुनावी मैदान में हैं। इस बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या चुनाव के बाद भी यही तस्वीर बनी रहेगी या कुछ दल पालाबदल भी कर सकते हैं। अजित पवार की पार्टी ने इसके संकेत भी दिए हैं और कहा है कि असली तस्वीर चुनाव के बाद ही सामने आएगी। इस बीच डिप्टी सीएम और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने भी स्वीकार किया है कि चुनाव के बाद कुछ भी हो सकता है। उन्होंने गुरुवार को कहा कि विधानसभा चुनाव ‘अजब’ है और 23 नवंबर को परिणाम घोषित होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि कौन गुट किसका समर्थन कर रहा है। फडणवीस ने कहा कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना, अजित पवार के नेतृत्व वाली राकांपा और भाजपा के गठबंधन ‘महायुति’ को कांग्रेस, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) और शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा (एसपी) पर बढ़त हासिल है। फडणवीस ने कहा, ‘ये चुनाव अजीब हैं। हमें नतीजों के बाद ही पता चलेगा कि कौन किसके साथ है। महायुति के भीतर भी आंतरिक विरोधाभास है।’ उन्होंने दावा किया कि एमवीए को भी इसी तरह की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। फडणवीस ने कहा कि उनकी पार्टी का नारा ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ एमवीए के चुनाव प्रचार अभियान के जवाब में गढ़ा गया है। भाजपा नेता ने दावा किया कि उनके सहयोगियों अशोक चव्हाण और पंकजा मुंडे के साथ-साथ उप मुख्यमंत्री अजित पवार इसके ‘मूल’ अर्थ को समझने में विफल रहे। महाराष्ट्र में 20 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव के प्रचार अभियान में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा बार-बार इस्तेमाल किए जाने वाले इस नारे ने विपक्ष को इसकी निंदा करने के लिए एकजुट कर दिया है। विपक्ष का दावा है कि इस नारे के सांप्रदायिक निहितार्थ हैं, जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन के कुछ नेताओं ने भी इस पर आपत्ति जताई है। फडणवीस ने कहा कि ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ कांग्रेस नीत महाविकास आघाडी के विभाजनकारी चुनाव प्रचार अभियान के जवाब में गढ़ा गया नारा है। इस नारे का मूल संदेश यह है कि ‘सभी को एक साथ रहना होगा।’ फडणवीस ने कहा, ‘इस नारे का मतलब यह नहीं है कि हम मुस्लिमों के खिलाफ हैं। हमने यह नहीं कहा कि लाडकी बहिन योजना का लाभ मुस्लिम महिलाओं को नहीं दिया जाएगा।’ उन्होंने दावा किया, ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ भी कांग्रेस और एमवीए के तुष्टिकरण का जवाब है। उन्होंने लोकसभा चुनाव के दौरान ‘वोट जिहाद’ का प्रयोग किया और मस्जिदों में पोस्टर लगाए गए, जिसमें लोगों से एक विशेष पार्टी को वोट देने का आग्रह किया गया। यह किस तरह की धर्मनिरपेक्षता है। सीएम बनने के सवाल पर बोले- जीना यहां, मरना यहां इस दौरान देवेंद्र फडणवीस ने चुनाव बाद खुद के सीएम बनने की संभावनाओं पर भी बात की। उनसे पूछा गया कि क्या आपका प्रमोशन होगा? इस सवाल को वह हंसकर टाल गए। लेकिन यह भी कहा, 'भाजपा मुझसे जो भी करने को कहेगी, मैं वह करूंगा। ‘जीना यहां, मरना यहां, इसके सिवा जाना कहां।’ भाजपा जहां भी जाने को कहेगी, मैं वहां जाऊंगा।’ recent visitors 83