Wednesday, July 8, 2026 2:33 am

ऊर्जा मंत्री तोमर ने किया ऐलान: विद्युत समाधान योजना की अवधि 31 मार्च तक बढ़ाई

विद्युत समाधान योजना की अवधि 31 मार्च तक बढ़ाई गई : ऊर्जा मंत्री  तोमर 31 मार्च तक एकमुश्त राशि जमा करने पर सरचार्ज में मिलेगी 90 प्रतिशत तक की छूट भोपाल  ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने जानकारी दी है कि मध्यप्रदेश सरकार की समाधान योजना 2025-26 के द्वितीय व अंतिम चरण को 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया है। पूर्व में यह योजना 28 फरवरी तक लागू थी। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष 3 नवम्बर को समाधान योजना 2025-26 की शुरुआत हुई थी। समाधान योजना में तीन माह से अधिक के बकायादार उपभोक्ताओं को एकमुश्त राशि जमा करने पर 90 प्रतिशत तक सरचार्ज में छूट का लाभ दिया जा रहा है। मंत्री  तोमर ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि यदि वे तीन माह से अधिक के बकाएदार हैं और योजना में अभी तक शामिल नहीं हो पाए वे अब 31 मार्च तक योजना में शामिल होकर अपना बकाया बिल एकमुश्त जमा करके 90 फीसदी तक सरचार्ज माफी का लाभ उठा सकते हैं। 21 लाख 67 हजार उपभोक्ताओं ने लिया लाभ मध्यप्रदेश सरकार की समाधान योजना 2025-26 में 28 फरवरी तक 21 लाख 67 हजार बिजली उपभोक्ताओं ने इस योजना का लाभ लिया है। कुल 1043 करोड़ 53 लाख रूपये जमा किये गये हैं, जबकि 388 करोड़ 77 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 6 लाख 38 हजार बकायादार उपभोक्ताओं ने अपना पंजीयन कराकर लाभ लिया है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के खाते में 616 करोड़ 42 लाख से अधिक की मूल राशि जमा हुई है, जबकि 285 करोड़ 39 लाख रूपए का सरचार्ज माफ किया गया है। इसी तरह पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 8 लाख से अधिक उपभोक्ताओं ने योजना का लाभ लिया है। कंपनी के खाते में 222 करोड़ 82 लाख रूपये जमा हुए हैं, जबकि 73 करोड़ 7 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 7 लाख 29 हजार उपभोक्ताओं ने योजना का लाभ लिया है। कंपनी के खाते में 204 करोड़ 29 लाख रूपये जमा हुए हैं, जबकि 30 करोड़ 31 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। यह योजना उन बकायादार उपभोक्ताओं के लिए वरदान बनी है जो सरचार्ज के कारण मूलधन राशि जमा नहीं कर पा रहे थे। अब उन्हें समाधान योजना में सरचार्ज में 50 से लेकर 90 प्रतिशत तक छूट के साथ एकमुश्त अथवा किस्तों में भुगतान करने का विकल्प मिल रहा है। समाधान योजना 2025-26 एक नजर में समाधान योजना 2025-26 का उद्देश्य 3 माह से अधिक अवधि के उपभोक्ताओं को बकाया विलंबित भुगतान के सरचार्ज पर छूट प्रदान करना है। यह योजना जल्दी आएं, एकमुश्त भुगतान कर ज्यादा लाभ पाएं के सिद्धांत पर आधारित है। योजना में एक मुश्त भुगतान करने पर 70 से 90 फीसदी तथा किस्तों में भुगतान करने पर 50 से 60 फ़ीसदी तक सरचार्ज माफ किया जा रहा है। समाधान योजना 2025-26 का लाभ उठाने के लिए उपभोक्ताओं को कंपनी के पोर्टल पर पंजीयन करना है। पंजीयन के दौरान अलग-अलग उपभोक्ता श्रेणी के लिए पंजीयन राशि निर्धारित की गई है। घरेलू एवं कृषि उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 10 प्रतिशत तथा गैर घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 25 प्रतिशत भुगतान कर पंजीयन कराकर योजना में शामिल होकर लाभ उठा सकते हैं। योजना की विस्तृत जानकारी तीनों कंपनियों की वेबसाइटों पर भी देखी जा सकती है। साथ ही विद्युत वितरण केंद्र में पहुंचकर भी योजना के संबंध में जानकारी ले सकते हैं।   recent visitors 22

मार्च में अवकाश के सभी दिनों में बिजली बिल भुगतान केंद्र खुले रहेंगे

मार्च में सभी अवकाश दिनों में बिजली बिल भुगतान केन्द्र खुलेंगे भोपाल  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत 07 मार्च, 14 मार्च, 21 मार्च, 28 मार्च शनिवार एवं 01 मार्च, 08 मार्च, 15 मार्च, 22 मार्च, तथा 29 मार्च रविवार, 03 मार्च होली, 19 मार्च गुड़ी पड़वां, 20 मार्च जमात- उल-विदा/ ईद उल-फितर के ठीक पूर्व का दिवस/ रानी अवंती बाई का बलिदान दिवस, 27 मार्च रामनवमीं तथा 31 मार्च महावीर जयंती को बिल भुगतान केन्द्र सामान्य कार्य दिवसों की तरह कार्य करते रहेंगे। भोपाल शहर वृत्त के अंतर्गत चारों शहर संभाग यथा पश्चिम, पूर्व, दक्षिण तथा उत्तर संभाग के अंतर्गत सभी जोनल कार्यालय और दानिश नगर, मिसरोद, मण्डीदीप में बिल भुगतान केन्द्र उक्त अवकाश के दिन भी सामान्य कार्य दिवस की तरह खुले रहेंगे। बिजली उपभोक्ता राजधानी के जोनल आफिस में पीओएस (pos) मशीन से कैश के जरिए बिल भुगतान तथा ऑनलाइन माध्यम से भी बिल भुगतान कर सकते हैं। कंपनी ने यह भी निर्देश दिए हैं कि कंपनी कार्यक्षेत्र के सभी 16 जिलों में बिजली वितरण केन्द्र/बिल भुगतान केन्द्र अवकाश के दिनों में खुले रहेंगे। इसके लिए सभी मैदानी महाप्रबंधकों को निर्देशित किया गया है। ऑनलाइन भुगतान करें और पाएं छूट मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा निम्नदाब घरेलू उपभोक्ताओं को ऑनलाइन भुगतान करने पर उनके कुल बकाया बिल पर 0.50 प्रतिशत की छूट प्रदान की जा रही है। साथ ही अधिकतम छूट के लिए कोई सीमा बंधन नहीं है। इसी प्रकार उच्चदाब उपभोक्ताओं को प्रति बिल कैशलेस भुगतान पर 100 रूपये से 1000 रुपये तक की छूट दी जा रही है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने उपभोक्ताओं से बिजली का बिल ऑनलाइन भुगतान करने की अपील की है। कंपनी ने कहा है कि उपभोक्ताओं को एम.पी.ऑनलाईन, कॉमन सर्विस सेन्टर, कंपनी पोर्टल portal.mpcz.in (नेट बैंकिंग, क्रेडिट/डेबिट कार्ड, यूपीआई, ईसीएस, बीबीपीएस, कैश कार्ड एवं वॉलेट आदि) फोन पे, अमेजान पे, गूगल पे, वॉट्सऐप पे, पेटीएम एप एवं उपाय मोबाइल एप के माध्यम से बिल भुगतान की सुविधा उपलब्ध है।   recent visitors 20

नई प्रणाली के तहत, व्यवसायी अब घर बैठे ही स्टेट सिंगल विंडो पोर्टल पर अस्थायी बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकते

 छत्तीसगढ़ में अस्थायी बिजली कनेक्शन के लिए ऑनलाइन सिस्टम लागू व्यवसायों के लिए अस्थायी बिजली कनेक्शन प्राप्त करने की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और सरल बनाया नई प्रणाली के तहत, व्यवसायी अब घर बैठे ही स्टेट सिंगल विंडो पोर्टल पर अस्थायी बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकते व्यवसायियों को मिली राहत रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार ने एक अभिनव कदम उठाते हुए व्यवसायों के लिए अस्थायी बिजली कनेक्शन प्राप्त करने की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और सरल बना दिया है। स्टेट सिंगल विंडो पोर्टल के माध्यम से शुरू की गई इस ऑनलाइन प्रणाली का उद्देश्य नियमों में सुधार करना और कठिन प्रक्रियाओं को सरल बनाना है। इस पहल से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि व्यवसायियों को समय और लागत की बचत भी होगी। छत्तीसगढ़ सरकार की इस पहल को उद्यमियों और व्यापारियों ने खूब सराहा है। नई प्रणाली के तहत, व्यवसायी अब घर बैठे ही स्टेट सिंगल विंडो पोर्टल पर अस्थायी बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की स्थिति को रीयल-टाइम में ट्रैक करने की सुविधा ने प्रक्रिया को और भी पारदर्शी बना दिया है। पहले जहां कागजी कार्रवाई और कई दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे, वहीं अब यह काम कुछ ही क्लिक में पूरा हो जाएगा। स्वचालित सिस्टम यह सुनिश्चित करता है कि सभी नियामक आवश्यकताएं पूरी हों, जिससे त्रुटियों की संभावना कम हो और ऑडिट प्रक्रिया भी सरल हो। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि हमारी सरकार का लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ में व्यवसाय करना आसान और सुगम हो। इस ऑनलाइन सिस्टम के जरिए हमने अस्थायी बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया को न केवल तेज किया है, बल्कि इसे पारदर्शी और व्यवसायी-अनुकूल भी बनाया है। यह ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो हमारे राज्य में निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा। इस डिजिटल प्रणाली ने कागजी कार्रवाई और बार-बार सरकारी दफ्तरों के दौरे की जरूरत को खत्म कर दिया है, जिससे प्रशासनिक खर्चों में भारी कमी आई है। छोटे और मझोले उद्यमी, जो पहले जटिल प्रक्रियाओं से जूझते थे, अब इस सुविधा का लाभ उठा रहे हैं। रायपुर के एक युवा व्यवसायी हरीश पटेल ने बताया, पहले कनेक्शन लेने में कई हफ्ते लग जाते थे, लेकिन अब यह काम कुछ ही दिनों में हो जाता है। सरकार का यह कदम वाकई सराहनीय है। यह सिस्टम न केवल तेज और सुगम है, बल्कि पूरी तरह नियमों के अनुरूप भी है। डिजिटल रिकॉर्ड-कीपिंग से ऑडिट प्रक्रिया आसान हो गई है, जिससे सरकारी विभागों और व्यवसायियों दोनों को फायदा होगा। सरकार का कहना है कि यह डिजिटलीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। भविष्य में अन्य सरकारी सेवाओं को भी इसी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी बनाने की योजना है। छत्तीसगढ़ सरकार की इस पहल से न केवल व्यवसायियों को   राहत मिली है, बल्कि यह राज्य को निवेश के लिए और आकर्षक बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। यह प्रणाली निश्चित रूप से नए छत्तीसगढ़ के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगी। recent visitors 35

मध्यप्रदेश को आगामी दो से तीन वर्षों में दो चरणों में 1230 मेगावॉट विद्युत की अतिरिक्त उपलब्धता रहेगी

भोपाल मध्यप्रदेश को आगामी दो से तीन वर्षों में दो चरणों में 1230 मेगावॉट विद्युत की अतिरिक्त उपलब्धता रहेगी। इसके लिये बिजली कंपनी के मुख्यालय जबलपुर में आरईसी ने अदानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड को ट्रांसमिशन एसपीव्ही सौंपा। इस परियोजना के तहत मेसर्स महान एनर्जेन लिमिटेड के बंधौरा (सिंगरौली) पॉवर जनरेटिंग प्लांट से मध्यप्रदेश के हिस्से की 1230 मेगावॉट विद्युत निकासी के लिये ट्रांसमिशन नेटवर्क तैयार किया जाना है। पारेषण अद्योसंरचना होगी विस्तारित एम.पी. ट्रांसको के मुख्य अभियंता देवाशीष चक्रवर्ती ने बताया कि मध्यप्रदेश पॉवर मैनेजमेंट कंपनी ने 1230 मेगावॉट विद्युत प्रदाय हेतु मेसर्स महान एनर्जेन लिमिटेड से पॉवर परचेस अनुबंध किया था। मेसर्स महान एनर्जेन लिमिटेड द्वारा 2X800 मेगावॉट क्षमता के पॉवर जनरेटिंग प्लांट की स्थापना प्रस्तावित है। पॉवर प्लांट से मध्यप्रदेश के हिस्से की 1230 मेगावॉट विद्युत निकासी हेतु नियामक आयोग के विनियमानुसार टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धा बोली प्रक्रिया के अंतर्गत पारेषण अधोसंरचना के विस्तार हेतु मध्यप्रदेश पॉवर मैनेजमेंट कंपनी द्वारा मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी/एस.टी.यू. से अनुरोध किया गया था। शासन ने निविदा प्रक्रिया समन्वयक (बी.पी.सी.) के लिये आर.ई.सी.पी.डी.सी.एल. (आरईसी पॉवर डेवलपमेंट एंड कंसलटेंसी लिमिटेड) को नियुक्त किया। टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धा बोली (टीबीसीबी) में मेसर्स अदानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड ने 2000 करोड़ रूपये की इस परियोजना को अन्य बिडर्स के मध्य न्यूनतम दर के आधार पर हासिल करने में सफलता प्राप्त की। पारेषण सेवा अनुबंध हस्ताक्षरित चक्रवर्ती ने जानकारी दी कि वैधानिक औपचारिकताओं को पूर्ण करने के बाद मध्यप्रदेश पॉवर मैनेजमेंट कंपनी एवं मेसर्स अदानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड के मध्य पारेषण सेवा अनुबंध (ट्रांसमिशन सर्विस एग्रीमेंट) हस्ताक्षरित हुये, जिसके तहत टी.बी.सी.बी. में 400 के.व्ही., 220 के.व्ही. एवं 132 के.व्ही. की विभिन्न ट्रांसमिशन लाइनों सहित दो 400 के.व्ही. के सब-स्टेशन रीवा (सगरा) एवं अमरपाटन (मैहर) में स्थापित किये जाने है। recent visitors 25

मध्य प्रदेश विद्युत वितरण कम्पनी 60 किलोमीटर की लाइन डाल रही, अब नहीं होगी बिजली कटौती

 जबलपुर बिजली उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना न करना पड़े, इसलिए आरआरडीएसएस योजना के तहत पहले चरण में 60 किलोमीटर की विद्युत लाइन को इंटर कनेक्ट किया जा रहा है। ऐसे में यदि एक जगह से आपूर्ति बाधित हुई, तो दूसरी जगह से तत्काल शुरू हो जाएगी। इससे औद्योगिक क्षेत्र के उपभोक्ता और कृषि उपभोक्ताओं को फायदा होगा। मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी के संचारण एवं संधारण वृत्त द्वारा यह 60 किलोमीटर की यह लाइन डालने का कम किया जा रहा है। यह लाइनें दो विद्युत लाइनों को जोड़ेंगी। पांच एमवीए का ट्रांसफार्मर, चार फीडर ओएंडएम के अंतर्गत आने वाले मुरई सब स्टेशन का काम पूरा हो चुका है। यहां 33/11 केवी का सब स्टेशन तैयार किया गया। इस सब स्टेशन से चार फीडर निकाले गए हैं। वहीं पांच एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर यहां लगाया गया है। औद्योगिक क्षेत्र को भी होगा फायदा लाइनों के इंटरकनेक्ट होने से सबसे ज्यादा फायदा औद्योगिक क्षेत्र हरगढ़ को होगा। यहां पहले एक ही लाइन और फीडर से सप्लाई की जा रही है। लाइनों के इंटरनेक्ट होने के बाद यहां बिजली की समस्या से निजात मिलेगी। इतना ही नहीं बिजली कम्पनी यहां आवश्यकतानुसार लोड बढ़ा और घटा भी सकेगी। वहीं लोड को ट्रांसफर भी किया जा सकेगा। हरगढ़ और रमखरिया की लाइनों को इंटरकनेक्ट किया जाएगा। इसके साथ ही ओएंडएम के अंतर्गत पाटन से ग्राम रौसरा, किसरोद से शहपुरा, कटंगी से पोला, रौसरा से बोरिया, बेलखेड़ा वन से बेलखेड़ा टू को जोड़ा जाएगा। वहीं शहर में कई जगहों पर रिंगमेन सिस्टम है। जहां यह सिस्टम नहीं है, वहां भी लाइनों का इंटरकनेक्ट किया जाएगा। आरआरडीएसएस योजना के तहत 60 किलोमीटर की विद्युत लाइन का इंटरकनेक्ट किया जा रहा है। इससे डबल सप्लाई का ऑप्शन मिल जाएगा। यदि एक फीडर बंद होता है, तो उसी लाइन के जरिए दूसरे फीडर से विद्युत सप्लाई की जा सकेगी। जल्द ही काम पूरा हो जाएगा।   recent visitors 34

खुद की बिजली से दमकेंगे एमपी के 10 बड़े शहर, 12 मेगावाट तक की क्षमता के लगेंगे पावर प्लांट

भोपाल नगरीय विकास विभाग ने घरेलू कचरे के निस्तारण के मामले में बड़े जुर्माने से बचने के लिए प्रयास शुरू किए हैं। इसके तहत कहीं कचरे से सीएनजी बनाने के प्लांट लगाए जा रहे हैं तो कहीं कंपोस्टिंग के प्लांट लग रहे हैं। इसी सिलसिले में अब मध्यप्रदेश के 10 शहरों में कचरे से बिजली बनाने के प्लांट लगाए जा रहे हैं। इन्हें केन्द्र से अनुमति मिल गई है। यह वर्ष 2026 तक शुरू होने की संभावना है। सरकार ने प्रदेश में नगरीय निकायों को वर्ष 2027 तक कचरा प्रबंधन में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य तय किया है। यहां पहले से बनाई जा रही रीवा, जबलपुर में कचरे से बिजली बनाने की यूनिट संचालित हैं। प्रतिदिन 950 टन कचरे का प्र-संस्करण कर 18 मेगावॉट बिजली पैदा की जा रही है। लीगेसी वेस्ट खत्म करने में मिलेगी मदद एनजीटी ने 2022 में सॉलिड वेस्ट प्रबंधन में लापरवाही के लिए 3 हजार करोड़ का जुर्माना लगाया था। तत्कालीन सीएस ने छह माह में प्रबंधन करने का शपथ-पत्र दिया था। इसके बाद जुर्माना स्थगित किया गया, लेकिन अब भी निकायों की डंपिंग साइट पर 25 लाख टन से ज्यादा लीगेसी वेस्ट जमा है। बिजली प्लांट बनने से वेस्ट भी खत्म करने में मदद मिलेगी। जुर्माने से बचा जा सकेगा। हाल ही में गीले कचरे की कंपोस्टिंग के लिए कटनी, सागर में स्वचालित यूनिट लगाई गई हैं। इन 10 नई इकाइयों को अनुमति 10 नगरीय निकायों के लिए क्लस्टर आधार पर 1018.85 टन प्रतिदिन क्षमता की इकाइयों के लिए मंजूरी मिली है। इन निकायों में सांची, हरदा, नया हरसूद, शाहगंज, आलीराजपुर, देपालपुर, उन्हेल, बाबई, धारकोटि और इंदौर शामिल हैं। इनमें आसपास के स्थानों को भी जोड़ा गया है। जहां कचरा कम निकलता है वहां समीपस्थ अन्य शहरों को जोड़ा गया है। इंदौर-उज्जैन को मिलाकर 607 टन कचरे से बिजली बनाने की यूनिट्स का काम प्रस्तावित है। इसके शुरू होने से 12.15 मेगावाट बिजली बन सकेगी। recent visitors 25

बिजली का बिल दे सकता है शोक, बढ़े सकता है प्रति यूनिट 50 पैसे रेट

जबलपुर बिजली कंपनी दरें बढ़ाकर घरेलू उपभोक्ताओं पर बोझ डालना चाह रही है। मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी ने 151-300 के बीच का स्लैब खत्म कर 151 यूनिट के बाद फ्लैट रेट वसूलने का प्रस्ताव मप्र विद्युत नियामक आयोग को दिया है। प्रस्ताव स्वीकृत हुआ तो सबसे ज्यादा नुकसान मध्यवर्ग के उन उपभोक्ताओं को होगा जो सब्सिडी के दायरे से बाहर आते हैं। प्रदेश में ऐसे करीब 25 लाख घरेलू उपभोक्ता हैं, जिन पर 50 पैसे प्रति यूनिट का बोझ डालने की तैयारी हो रही है। 24 जनवरी तक बुलाई गई आपत्ति मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी ने इस संबंध में याचिका मप्र विद्युत नियामक आयोग में दी है। इस पर सुनवाई से पूर्व आयोग ने जनता से 24 जनवरी तक आपत्ति बुलाई है। बता दें कि एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कुल राजस्व आवश्यकता 58744 करोड़ व वर्तमान दरों पर प्राप्त राजस्व 54637 करोड़ बताया है। कंपनी ने इस अंतर की राशि 4107 करोड़ रुपये की भरपाई के लिए औसत 7.52 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव दिया है। उपभोक्ताओं की चार श्रेणियों को तीन में समेटा इस प्रस्ताव में कंपनी ने घरेलू उपभोक्ता की बिजली खपत की चार श्रेणी को तीन में समेट दिया है। पहली श्रेणी 50 यूनिट, दूसरी श्रेणी 51 से 150 यूनिट और तीसरी श्रेणी 151 से ऊपर की रखी गई है। अभी 151 से 300 यूनिट की श्रेणी के लिए अलग दर तय थी। अब कंपनी 151 यूनिट के ऊपर एक दर तय करना चाह रही है। इससे 50 पैसे का बोझ प्रति यूनिट उपभोक्ता पर डालने का प्रस्ताव है। प्रदेश में अभी एक करोड़ 27 लाख कुल घरेलू उपभोक्ता हैं। इसमें बिजली कंपनी करीब एक करोड़ उपभोक्ता को सब्सिडी देती है। ये उपभोक्ता 150 यूनिट मासिक खपत के दायरे में आते हैं। कंपनी 100 यूनिट के लिए 100 रुपये और अगली 50 यूनिट पर सामान्य दर से बिलिंग करती है, इससे उपभोक्ता को करीब 450 रुपये से अधिक की बचत होती है। इस बीच 25 लाख से ज्यादा ऐसे बिजली उपभोक्ता है जिनकी मासिक खपत 151 से 300 यूनिट के भीतर रहती है। ऐेसे उपभोक्ताओं को भी अब फ्लैट रेट पर बिल भरना होगा। मध्यवर्गीय पर बोझ अधिक बिजली मामलों के जानकार एडवोकेट राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि टैरिफ में बदलाव करने से मध्यम वर्ग के उपभोक्ता जिनकी मासिक खपत 151 यूनिट से 300 यूनिट के बीच है उन पर अधिक बोझ डाला जा रहा है। ये वर्ग सरकारी सब्सिडी के दायरे से बाहर होता है, इसलिए उन्हें बिजली की पूरी कीमत देनी पड़ती है। एक दर की योजना मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी के सीजीएम शैलेंद्र सक्सेना ने बतााया कि कंपनी 151 से 300 यूनिट के स्लैब को खत्म कर एक दर तय करना चाहती है। ऐसी श्रेणी के उपभोक्ता से एक सामान्य दर से बिजली बिल लिया जाएगा। recent visitors 120

बिजली उपभोक्ताओं को अब सस्ते में मिलेगा बिजली कनेक्शन! लोड आधारित कनेक्शन शुल्क तय

भोपाल बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अब नए कनेक्शन पर बिजली कंपनी उपभोक्ताओं को अफोर्डेबल चार्ज का नया विकल्प देगी। उपभोक्ता चाहे तो घर के बिजली पॉइंट की जांच करवाकर कनेक्शन शुल्क जमा कर सकता है या नए एसएसी से तय औसत शुल्क से राशि जमाकर कनेक्शन ले सकता है, साथ ही तुरंत कनेक्शन भी मिल जाएगा। मप्र विद्युत नियामक आयोग इस पर 27 नवंबर को सुनवाई करेगा। आम उपभोक्ताओं को ज्यादा लाभ इस नए विकल्प का सबसे ज्यादा लाभ आम उपभोक्ता को मिलेगा। 0 से 3 किलोवॉट भार के कनेक्शन सामान्य घरों में होते हैं। इनके लिए मौजूदा से करीब 50 फीसदी राशि औसत दर में घट रही है। इंफ्रा चार्ज से भी ये मुक्त रहेंगे। 112 किलोवॉट भार के लिए एसएसी तय की है। 50 किलोवॉट तक भार के कनेक्शन को शुल्क से मुक्त रखा गया है। सप्लाई अफोर्डेबल चार्ज को लेकर 27 नवंबर को सुनवाई होगी। संबंधित लोगों से मामले में सुझाव आमंत्रित कराए थे। इसके बाद इसे लागू किया जाएगा। -उमाकांत पांडा, सचिव एमपीइआरसी सप्लाई अफोर्डेबल चार्ज के विकल्प में शुल्क गणना ● 0 से 03 किलोवॉट भार के लिए- 340 रुपए प्रति किलोवॉट ● 03 से 10 किलोवॉट भार के लिए- 1000 रुपए प्रति किलोवॉट ● 10 किलोवॉट से 25 किलोवॉट के लिए- 8080 रुपए व बाद में 2520 रुपए प्रति किलोवॉट ● 25 किलोवॉट से 50 किलोवॉट के लिए 46 हजार रुपए व बाद में प्रति किलोवॉट 4200 रुपए ● 50 किलोवॉट से 112 किलोवॉट के लिए 10 हजार रुपए प्रति किलोवॉट के लिए नोट- ये मल्टी यूजर कॉम्प्लेक्स व आवासीय कॉलोनी उपभोक्ता के लिए हैं। इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर, सर्विस लाइन व सुपरविजन चार्ज है। इस तरह तीन श्रेणियों में चार्ज तय किया है। नियामक आयोग से इसका ड्राफ्ट लिया जा सकता है। recent visitors 188

उज्जैन में स्थापित टेस्टिंग लेब को नेशनल एक्रिडिएशन बोर्ड फार टेस्टिंग कालिब्रेशन लेबोरेटरीज (NABL ) प्रमाण पत्र मिला

भोपाल मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा उज्जैन में स्थापित टेस्टिंग लेब को नेशनल एक्रिडिएशन बोर्ड फार टेस्टिंग कालिब्रेशन लेबोरेटरीज (NABL ) प्रमाण पत्र मिला है। आत्म-निर्भर भारत के उद्देश्य से कंपनी की जरूरत की विद्युत सामग्री की जांच के लिए अब इस तरह की एनएबीएल प्रयोगशाला स्थानीय स्तर पर ही होने से अन्यत्र सामग्री भेजने में लगने वाला समय, शुल्क बचेगा। कंपनी की प्रबंध निदेशक सुरजनी सिहं और मुख्य महाप्रबंधक प्रकाश सिंह चौहान ने उज्जैन की लेब को आगामी चार वर्षों के लिए राष्ट्रीय स्तर का प्रमाण पत्र मिलने पर बधाई दी है।  अतिरिक्त मुख्य अभियंता आरके नेगी ने बताया कि उक्त लेब पांच करोड़ की लागत से उज्जैन के शंकरपुर में तैयार हुई है। यहां अत्याधुनिक तरीके से ट्रांसफार्मर, तार और केबल की टेस्टिंग की जाएगी, जांच रिपोर्ट भी ऑटोमेटेड़ जनरेटेड़ प्राप्त होगी। उक्त लेब की स्थापना में विभागीय अधिकारी सोमनाथ मरकाम, अजीत लाल, अंशुल कारपेंटर, अमित कुमार का सरहानीय सहयोग रहा है। इस तरह की NABL प्रमाणीकरण वाली लेब इंदौर स्थित पोलोग्राउंड मुख्यालय में पहले से ही कार्यरत है। NABL स्तर की लेब से न केवल कंपनी का कामकाज तेज होती है, बल्कि आर्थिक बचत भी होती है।   recent visitors 100