उपलब्धता कैसे हो रही है चाइनीज मांझे की ? सीएम ने दिया पुलिस को सघन छापेमारी का निर्देश

लखनऊ.  प्रदेश में चाइनीज मांझे से होने वाली दुर्घटनाओं को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा रुख अपनाया है। उनका मानना है कि किसी व्यक्ति की चाइनीज मांझे की वजह से होने वाली मृत्यु हत्या की तरह है। इस तरह के मामलों में संबंधित के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि चाइनीज मांझा पूरी तरह प्रतिबंधित है और इसके बावजूद इसकी उपलब्धता गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने पुलिस को प्रदेशव्यापी सघन छापेमारी अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान चाइनीज मांझे की बिक्री ही नहीं, बल्कि भंडारण व परिवहन पर भी कठोर नजर रखी जाएगी। जन-सुरक्षा से कोई समझौता नहीं: योगी सीएम योगी ने प्रदेश भर में विशेष अभियान चलाकर चाइनीज मांझे की आपूर्ति श्रृंखला को पूरी तरह तोड़ने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने इस अभियान की प्रगति और कार्रवाई की उच्च स्तर पर नियमित समीक्षा करने का भी निर्देश दिया है, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि जनता की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता है। चाइनीज मांझा न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह आमजन, बच्चों और पशु-पक्षियों के लिए जानलेवा खतरा भी है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश को इस खतरनाक मांझे से पूरी तरह मुक्त किया जाए। recent visitors 29

प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्र की तर्ज पर स्थापित होंगे केन्द्र

लखनऊ. प्रदेश में पशुपालकों को सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण पशु औषधियां उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पशु औषधि केन्द्र स्थापित किए जाएंगे। यह केंद्र प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्र की तर्ज पर स्थापित होंगे। जनपद के प्रत्येक विकास खण्ड में एक पशु औषधि केन्द्र खोला जाएगा, जिससे पशुओं के उपचार  के लिए सस्ती दरों पर दवाएं सुलभ हो सकें। यह प्रपत्र होगा अनिवार्य लखनऊ के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि पशु औषधि केन्द्र खोलने के लिए आवेदक को फार्मासिस्ट का नाम एवं उसका वैध पंजीकरण विवरण, दुकान के लिए न्यूनतम 120 वर्ग फुट स्थान का प्रमाण पत्र तथा ड्रग सेल लाइसेंस का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। ऐसे करना होगा आवेदन  पशु औषधि केन्द्र स्थापित करने के इच्छुक आवेदकों को 5000 रुपये शुल्क अदा करना होगा। आवेदन की प्रक्रिया पूर्णतः ऑनलाइन होगी, इसके लिए इच्छुक अभ्यर्थी http://pashuaushadhi. dahd.gov.in पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। पशुपालकों को उपलब्ध होंगी सस्ती दवाएं डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत प्रधानमंत्री कृषक समृद्धि केन्द्र एवं सहकारी समितियों से जुड़े योग्य लाभार्थियों को प्राथमिकता प्रदान की जाएगी। यह योजना भारत सरकार की पशुधन स्वास्थ्य एवं बीमारी नियंत्रण कार्यक्रम (LHDCP) के अंतर्गत संचालित की जाएगी। पशु औषधि केन्द्रों की स्थापना से पशुपालकों को समय पर सस्ती दवाएं उपलब्ध होंगी, जिससे पशुपालन को और अधिक लाभकारी बनाया जा सकेगा। recent visitors 29

होम-स्टे, रिसोर्ट, पाथवे, लैंडस्केपिंग सहित आधुनिक पर्यटक सुविधाओं का होगा विकास

रायपुर. ग्लोबल टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित होगा मयाली – मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज भारत सरकार की स्वदेश दर्शन योजना 2.0 की उप-योजना सीबीडीडी के अंतर्गत स्वीकृत मयाली-बगीचा विकास परियोजना का मयाली नेचर कैंप में विधिवत भूमिपूजन किया। लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से क्रियान्वित इस परियोजना के तहत मयाली, विश्व प्रसिद्ध मधेश्वर पर्वत (विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग) तथा बगीचा स्थित कैलाश गुफा क्षेत्र में विभिन्न पर्यटन सुविधाओं का विकास किया जाएगा। यह परियोजना क्षेत्र की प्राकृतिक, सांस्कृतिक एवं जनजातीय विरासत के संरक्षण के साथ-साथ समुदाय आधारित पर्यटन को सशक्त बनाएगी। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और जशपुर जिले को एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में नई पहचान मिलेगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने क्षेत्रवासियों को बधाई देते हुए कहा कि मयाली-बगीचा विकास परियोजना जशपुर जिले के पर्यटन विकास के लिए एक ऐतिहासिक पहल है। आज मयाली के विकास की मजबूत नींव रखी गई है। मयाली अब पर्यटन मानचित्र पर तेजी से उभर रहा है और आने वाले समय में यह एक वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होगा।     मुख्यमंत्री ने कहा कि मयाली की पहचान सदियों से मधेश्वर महादेव से जुड़ी रही है, जिसे विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग माना जाता है। इस विकास परियोजना के माध्यम से मधेश्वर पर्वत के धार्मिक एवं पर्यटन महत्व को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। परियोजना के अंतर्गत मयाली डेम के समीप पर्यटक रिसोर्ट एवं स्किल डेवलपमेंट सेंटर का निर्माण किया जाएगा।  उन्होंने कहा कि मयाली को एक समग्र इको-टूरिज्म और एडवेंचर डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां के जंगल, झरने, पहाड़ और समृद्ध आदिवासी संस्कृति को देश-दुनिया के पर्यटकों तक पहुंचाया जाएगा। पर्यटन से होने वाली आय का सीधा लाभ स्थानीय लोगों को मिलेगा।  साय ने कहा इसी उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा होम-स्टे नीति लागू की गई है, जिससे ग्रामीण परिवार पर्यटन गतिविधियों से सीधे जुड़कर आय अर्जित कर सकेंगे और पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति को नजदीक से जानने का अवसर मिलेगा।   मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना क्षेत्र के युवाओं के लिए नए अवसर लेकर आई है। स्किल डेवलपमेंट सेंटर में टूर गाइड, होटल सेवा, एडवेंचर स्पोर्ट्स, हस्तशिल्प एवं डिजिटल बुकिंग से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे न केवल पर्यटन बल्कि जशपुर की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधताओं को भी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी। विकास कार्यों से बदलेगी मयाली की तस्वीर, उभरेगा नया पर्यटन केंद्र मयाली क्षेत्र को प्राकृतिक, धार्मिक एवं ग्रामीण पर्यटन के समग्र गंतव्य के रूप में विकसित किया जाएगा। परियोजना के अंतर्गत 5 पर्यटक कॉटेज, कॉन्फ्रेंस एवं कन्वेंशन हॉल, स्किल डेवलपमेंट सेंटर, भव्य प्रवेश द्वार, बाउंड्री वॉल, आधुनिक टॉयलेट सुविधा, लैंडस्केपिंग एवं पाथवे का निर्माण किया जाएगा। इन सुविधाओं से पर्यटकों के ठहराव एवं विभिन्न आयोजनों की बेहतर व्यवस्था होगी और रोजगार के अवसर सृजित होंगे। धार्मिक पर्यटन को सशक्त करने के लिए शिव मंदिर क्षेत्र में प्रवेश द्वार, टॉयलेट सुविधा, लैंडस्केपिंग एवं पाथवे का विकास किया जाएगा। वहीं बगीचा स्थित कैलाश गुफा परिसर में प्रवेश द्वार, पिकनिक स्पॉट, रेस्टिंग शेड, घाट विकास, पाथवे तथा सीढ़ियों एवं रेलिंग का जीर्णाेद्धार किया जाएगा, जिससे पर्यटकों को सुरक्षित एवं सुविधाजनक अनुभव मिलेगा।     यह समस्त कार्य भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा संचालित स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के अंतर्गत स्वीकृत मयाली-बगीचा विकास परियोजना के माध्यम से किए जाएंगे। परियोजना के पूर्ण होने से पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती तथा क्षेत्र की सांस्कृतिक-प्राकृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की संभावना है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय की धर्मपत्नी मती कौशल्या साय, सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं पत्थलगांव विधायक मती गोमती साय, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष  नीलू शर्मा, विभिन्न बोर्ड-निगमों के अध्यक्ष, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। recent visitors 29

स्पीकर ओम बिरला का बड़ा बयान, ‘मैंने पीएम मोदी से आग्रह किया था कि न आएं, कुछ भी हो सकता था’

नई दिल्ली  संसद के इतिहास में शायद यह पहली बार हुआ है जब लोकसभा अध्यक्ष ने खुद यह स्वीकार किया है कि देश के प्रधानमंत्री की सुरक्षा और सम्मान को सदन के भीतर ही खतरा था. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने गुरुवार को एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि उन्होंने ही कल (बुधवार) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सदन में आने से रोका था. बिरला ने आशंका जताई कि अगर पीएम मोदी कल सदन में आते, तो उनके साथ कोई “अप्रत्याशित और अप्रिय घटना” घट सकती थी. स्पीकर ओम बिरला ने बताया कि उन्हें खुफिया जानकारी और सदन के भीतर के हालात से यह इनपुट मिला था कि कांग्रेस के सांसद प्रधानमंत्री के आसन (कुर्सी) तक जाकर हंगामा करने और किसी अनहोनी को अंजाम देने की योजना बना रहे हैं. उन्होंने कहा, “मेरे पास जानकारी आई कि कांग्रेस के सांसद पीएम के आसन पर जाकर अप्रत्याशित घटना कर सकते थे. मुझे डर था कि प्रधानमंत्री के साथ कुछ भी हो सकता है. अगर वह घटना हो जाती, तो वह बेहद अप्रिय होती और लोकतंत्र के लिए काला दिन साबित होती.” ‘मैंने पीएम से आग्रह किया: आप मत आइए’ ओम बिरला ने बताया कि स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए उन्होंने तुरंत हस्तक्षेप किया. उन्होंने कहा, “इस संभावित खतरे और टकराव को टालने के लिए मैंने खुद पीएम से आग्रह किया कि वो सदन में न आएं.” बता दें क‍ि बुधवार शाम को विपक्ष की महिला सांसदों ने पीएम मोदी की खाली कुर्सी को घेर लिया था, जिसके बाद बीजेपी ने आरोप लगाया था कि विपक्ष पीएम पर ‘हमला’ करना चाहता था. अब स्पीकर के इस बयान ने बीजेपी के उन आरोपों की पुष्टि कर दी है कि कल सदन के भीतर का माहौल प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिहाज से सामान्य नहीं था. बीजेपी ने पूछा- क्‍या पीएम पर हमला करने का इरादा था ? बीजेपी सांसद मनोज तिवारी और बृजमोहन अग्रवाल ने विपक्ष पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में सेंध लगाने और उन पर ‘हमला’ करने की साजिश का बेहद गंभीर आरोप लगाया था. मनोज तिवारी ने तीखा सवाल किया कि विपक्षी सांसद हार की बौखलाहट में पीएम की कुर्सी तक क्यों आए? क्या इनका इरादा पीएम पर हमला करना था? वहीं, बृजमोहन अग्रवाल ने इसे कांग्रेस की ‘प्री-प्लान’ साजिश करार दिया. उन्होंने कहा कि महिला सांसदों को ढाल बनाकर पीएम को घेरना और भाषण से रोकना न केवल सुरक्षा से खिलवाड़ है, बल्कि पूरे सदन की अवमानना है, जिस पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए. recent visitors 30

पश्चिम बंगाल में महिलाओं को मिलेगा ₹500 का लाभ, गिग वर्कर्स के लिए भी ऐलान, ममता सरकार ने खोला खजाना

कोलकाता  पश्चिम बंगाल की वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 4.06 लाख करोड़ रुपये का अंतरिम बजट पेश किया. इस बजट में सबसे बड़ा ऐलान ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना को लेकर हुआ है. राज्य की 2.42 करोड़ महिलाओं के लिए मासिक सहायता राशि में 500 रुपये की बढ़ोतरी की गई है. यह बढ़ी हुई राशि फरवरी 2026 से ही लागू हो जाएगी. इस कदम को आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है. क्या है बंगाल बजट की अन्य बड़ी घोषणाएं? पश्चिम बंगाल बजट में केवल महिलाओं ही नहीं, बल्कि अन्य वर्गों पर भी फोकस किया गया है. गिग वर्कर्स यानी जोमैटो और स्विगी जैसे प्लेटफॉर्म पर काम करने वालों को अब ‘स्वास्थ्य साथी’ जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिलेगा. इसके अलावा आंगनवाड़ी वर्कर्स और सहायिकाओं के मानदेय में अप्रैल 2026 से 1000 रुपये की वृद्धि की जाएगी. बेरोजगारी दूर करने के लिए युवाओं को 1500 रुपये प्रति माह का भत्ता देने की नई योजना भी शुरू होगी. ‘लक्ष्मी भंडार’ के बदले समीकरण लक्ष्मी भंडार योजना ममता बनर्जी की सबसे सफल योजनाओं में से एक मानी जाती है. वर्तमान में इसमें सामान्य वर्ग को 1000 और एससी-एसटी वर्ग को 1200 रुपये मिलते हैं. अब 500 रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी के बाद यह राशि और बढ़ जाएगी. जानकारों का मानना है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महिलाओं के भारी मतदान ने एनडीए की जीत तय की थी. इसी पैटर्न को देखते हुए बंगाल में भी तृणमूल कांग्रेस अपनी पकड़ मजबूत कर रही है. महिलाओं को लुभाने की मची होड़ आजकल राजनीति में महिलाएं नई ‘किंगमेकर’ बनकर उभरी हैं. पश्चिम बंगाल ही नहीं, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी यही ट्रेंड दिख रहा है. महाराष्ट्र में बीजेपी के नेतृत्व वाली महायुति सरकार ने ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना’ के तहत 2.5 करोड़ महिलाओं को दिसंबर और जनवरी की किस्त एक साथ देने का फैसला किया है. तमिलनाडु की डीएमके सरकार ने भी ‘कलैग्नार मगलिर उरीमई थिट्टम’ योजना का दायरा बढ़ा दिया है. सभी पार्टियां जानती हैं कि महिलाओं का वोट जीत की गारंटी है. recent visitors 74

भोपाल से विदिशा, रायसेन और सीहोर तक मेट्रो, राजधानी के सैटेलाइट शहरों को मिलेगा फायदा

भोपाल  मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट के तहत अब भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन यानी बीएमआर में भी रूट तय होगा। भोपाल से सीहोर, विदिशा, रायसेन, राजगढ़ की ओर मेट्रो की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। बीएमआर के लिए बन रही डीपीआर में इसके प्रावधान किए जा रहे हैं। भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन की योजना में मेट्रो को शामिल करने शासन ने बीडीए को निर्देशित किया है। रोड नेटवर्क के साथ मेट्रो नेटवर्क से पास के शहरों में प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप को भोपाल से सीधे जोड़ा जाएगा। भोपाल शहर में 6 लाइनें तय अभी मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट में भोपाल शहर में ही छह लाइनें तय की हुई है। 103 किमी लंबी लाइन में से फिलहाल 6.22 किमी की लाइन पर मेट्रो का कमर्शियल रन शुरू किया जा चुका है। पहले चरण की दो लाइनों के 32 किमी में मेट्रो को आमजन यात्रियों के साथ चलाने 2028 से 2030 तक की समय सीमा तय की है। मेट्रो रेल कारपोरेशन धीरेधीरे मेट्रो को चरणबद्ध तरीके से तैयार करने की योजना बना रहा है। अब वहभोपाल के भीतर के साथ मेट्रोपॉलिटन रीजन वाले क्षेत्रों तक भी रूट तय करेगा। उपनगरीय परिवहन में बदलेगी मेट्रो बीएमआर की डीपीआर तैयार करने वाले अफसरों के अनुसार भोपाल के लिए लोकल ट्रांसपोर्ट का हिस्सा बनने जा रही मेट्रो बीएमआर में उपनगरीय रेल की भूमिका में रहेगी। इससे मौजूदा व बीएमआर में प्रस्तावित उपनगरों को जोड़ा जाएगा। बीएमआर में भोपाल की बसाहट को सैटेलाइट टाउनशिप से पास के शहरों में शिफ्ट किया जाएगा। यहां आबादी का दबाव बढऩे से रोकने के लिए नई टाउनशिप विकसित होगी। इन्हीं को आवाजाही में मदद के लिए मेट्रो उपनगरीय सेवा विकसित होगी। सवाल: छह किमी में दस साल, बीएमआर कब बनेगी? बीएमआर में मेट्रो की प्लानिंग तो ठीक है, लेकिन मौजूदा 103 किमी के प्रस्तावित नेटवर्क में से महज सात फीसदी ही बन पाया है। शहरी नेटवर्क का 93 फीसदी बनना बाकी है। सात फीसदी निर्माण में यूरोपियन बैंक से लोन लिया हुआ है। बचे हुए हिस्से को बनाने और बीएमआर से जुड़े शहरों तक मेट्रो पहुंचाने कई गुना ज्यादा बजट और समय लगेगा। मेट्रो, रोड सबका विकल्प है बीएमआर के लिए शासन की मंशा के अनुसार योजना तय की जा रही है। संबंधित क्षेत्रों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट सभी माध्यमों से जोड़ा जाएगा। मेट्रो, रोड सबका विकल्प है। -संजीव सिंह, अध्यक्ष बीडीए- संभागायुक्त recent visitors 36

चंबल में रेत माफियाओं पर भारी प्रहार, 2 दिनों में मुरैना में 4 करोड़ से ज्यादा की अवैध रेत की गई नष्ट

मुरैना  चंबल की रेत पर वर्षों से चल रहा माफिया का खेल अब प्रशासन के सीधे निशाने पर आ गया है. जिले के कलेक्टर ने रेत माफिया की कमर तोड़ने के लिए अधिकारियों को पूरी तरह फ्री हैंड दे दिया है. टास्क फोर्स की बैठक के बाद वन विभाग, पुलिस, राजस्व, परिवहन और माइनिंग विभाग की संयुक्त टीम ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू की. चंबल में करोड़ों की रेत नष्ट की गई महज दो दिनों में 4 करोड़ रुपये से अधिक की चंबल में रेत नष्ट की जा चुकी है. बुधवार की सुबह से शाम तक 20 जेसीबी और 5 लोडरों की मदद से चंबल राजघाट स्थित पिपरई और भानपुर क्षेत्र में रेत को नष्ट किया गया. इस सख्त कार्रवाई से रेत माफियाओं में हड़कंप मच गया है, वहीं हाईवे पर लगने वाली रेत मंडी भी दो दिनों से बंद पड़ी है. प्रशासन का यह अभियान अगले 15 दिनों तक लगातार जारी रहेगा. बीते रोज जिला कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने टास्क फोर्स की बैठक में स्पष्ट निर्देश देते हुए अधिकारियों को रेत माफियाओं पर सख्ती से कार्रवाई करने के लिए फ्री हैंड दे दिया था. इसके बाद प्रशासनिक मशीनरी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर आई. कलेक्टर के निर्देश पर वन मंडलाधिकारी हरिश्चंद्र बघेल के नेतृत्व में वन विभाग, पुलिस, परिवहन, राजस्व और माइनिंग विभाग की संयुक्त टीम ने चंबल राजघाट पुल क्षेत्र के पिपरई और भानपुर में बड़े पैमाने पर कार्रवाई की. चंबल नदी किनारे डंप कर रखी गई हजारों ट्राली रेत नष्ट मंगलवार और बुधवार को लगातार चली इस कार्रवाई में करीब 20 जेसीबी मशीनों और 5 लोडरों की मदद से 16,500 से अधिक ट्रॉली अवैध रेत को नष्ट किया गया. अधिकारियों के अनुसार, पहले चरण में चंबल नदी किनारे डंप कर रखी गई लगभग 1000 से अधिक ट्रॉली से अधिक रेत को नष्ट किया गया, जबकि बुधवार सुबह से शाम तक दोबारा अभियान चलाकर करीब 15,000 ट्रॉली अवैध रेत को मिट्टी में मिला दिया गया. यह रेत, माफियाओं द्वारा अवैध रूप से खनन कर नदी किनारे जमा की गई थी.  कार्रवाई के दौरान 150 पुलिस के जवान और 50 वन रक्षक तैनात दो दिनों में नष्ट की गई रेत का बाजार मूल्य करीब 4 करोड़ 10 लाख रुपये आंका गया है. प्रशासन इसे चंबल क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई बता रहा है. कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे. मौके पर करीब 150 पुलिस जवान और 50 वन रक्षक तैनात रहे, जिससे किसी भी तरह की अव्यवस्था या विरोध की स्थिति न बन सके. इस बड़ी कार्रवाई से रेत माफियाओं में हड़कंप मच गया है. हाईवे पर लगने वाली रेत मंडियां भी बीते दो दिनों से बंद पड़ी हैं. प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह अभियान यहीं नहीं रुकेगा, बल्कि आने वाले दिनों में भी लगातार कार्रवाई जारी रहेगी. चंबल में अवैध रेत कारोबार पर अब आर-पार की लड़ाई के संकेत साफ नजर आ रहे हैं. ट्रैक्टर-ट्रॉली का रास्ता पूरी तरह बंद किया गया कलेक्टर के निर्देश पर चंबल नदी से आने-जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर जेसीबी मशीनों से गहरे गड्ढे खुदवाए गए हैं, जिससे ट्रैक्टर-ट्रॉली का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है. रेत विनिष्टीकरण की इस बड़ी कार्रवाई में मंगलवार को 6 जेसीबी मशीनों का उपयोग किया गया, जबकि बुधवार को अभियान और तेज करते हुए 20 जेसीबी और 5 लोडरों की मदद ली गई. कार्रवाई के दौरान वनमंडलाधिकारी हरिशचंद्र बघेल के नेतृत्व में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेन्द्र पाल सिंह डाबर, एसडीएम मुरैना बीएस कुशवाह, जिला खनिज अधिकारी सुखदेव निर्मल, पुलिस लाइन आरआई रविकांत शुक्ला, सूबेदार गजेंद्र सिंह परिहार, राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य के एसडीओ सहित संबंधित राजस्व अमला मौके पर मौजूद रहा.  recent visitors 30