मेघालय में कोयला खदान में बड़ा धमाका, 10 मजदूरों की मौत, हादसा हुआ दर्दनाक

 शिलॉन्ग मेघालय के ताशखाई इलाके में स्थित एक कोयला खदान में भीषण धमाका होने से बड़ा हादसा हो गया. इस दुर्घटना में कम से कम 10 मजदूरों की मौत होने की जानकारी सामने आई है. हादसे के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और स्थानीय प्रशासन तथा पुलिस ने तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया. जानकारी के मुताबिक, ताशखाई की कोयला खदान में अचानक जोरदार धमाका हुआ, जिसके कारण खदान के अंदर काम कर रहे मजदूर इसकी चपेट में आ गए. धमाका इतना तेज था कि खदान के अंदर मौजूद मजदूरों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिल पाया. आशंका जताई जा रही है कि मृतकों में सभी मजदूर असम के रहने वाले थे, हालांकि प्रशासन की ओर से अभी आधिकारिक पुष्टि की प्रक्रिया जारी है.   स्थानीय सूत्रों के अनुसार, मृत मजदूरों में से एक असम के कटिगारा क्षेत्र के बिहारा गांव का रहने वाला बताया जा रहा है. हादसे की सूचना मिलते ही मेघालय पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंच गए और राहत व बचाव कार्य शुरू कर दिया गया. खदान के अंदर फंसे अन्य मजदूरों की तलाश के लिए सघन सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है. प्रशासन ने आसपास के इलाके को घेरकर सुरक्षा बढ़ा दी है, ताकि बचाव कार्य में किसी तरह की बाधा न आए. अधिकारियों का कहना है कि धमाके के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है. शुरुआती तौर पर खदान में गैस रिसाव या तकनीकी खामी को हादसे की संभावित वजह माना जा रहा है, हालांकि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी. इस हादसे के बाद मजदूरों की सुरक्षा और अवैध खनन गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. स्थानीय प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मामले की गहराई से जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. वहीं, मृतकों के परिजनों को हर संभव सहायता देने की बात भी कही गई है. recent visitors 39

भोपाल में बनेगी AI और नॉलेज सिटी, 3700 एकड़ में होगा विकास, देश का सबसे उन्नत शहर बनेगा

 भोपाल  भोपाल अब देश के भविष्य के टेक–एजुकेशन मैप पर एक नई पहचान बनाने जा रहा है। राजधानी के भौंरी क्षेत्र में 3700 एकड़ (1500 हेक्टेयर) भूमि पर देश की सबसे उन्नत नॉलेज एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिटी विकसित की जाएगी। यह प्रोजेक्ट केवल एक एजुकेशन टाउनशिप नहीं होगा, बल्कि रिसर्च, स्टार्टअप्स, इंडस्ट्री और ग्लोबल यूनिवर्सिटीज का एकीकृत इकोसिस्टम तैयार किया जाएगा, जिससे मध्य प्रदेश को देश का बड़ा AI हब बनाने की दिशा में काम होगा। इस परियोजना के लिए 20 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने अर्बन प्लानिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर डिजाइन और डेवलपमेंट के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) दाखिल किए हैं। एजेंसी चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और फरवरी के अंत तक डेवलपमेंट एजेंसी तय होने की संभावना है। भौंरी में 3700 एकड़ जमीन पर भारत की सबसे उन्नत नॉलेज एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सिटी विकसित होने जा रही है। यह प्रोजेक्ट केवल एजुकेशन टाउनशिप नहीं होगा, बल्कि यह रिसर्च, स्टार्टअप्स, इंडस्ट्री और ग्लोबल यूनिवर्सिटीज का एक इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम बनेगा। बीडीए इसकी नोडल एजेंसी है, जबकि आइसर (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, एजुकेशन एंड रिसर्च) इसका पूरा रोडमैप तैयार करेगा। प्रोजेक्ट के लिए अर्बन प्लानिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर डिजाइन और डेवलपमेंट को लेकर 20 से ज्यादा ग्लोबल एजेंसियों ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट दाखिल किया है। चयन प्र्रक्रिया अंतिम चरण में है। इस माह के अंत तक डेवलपमेंट एजेंसी तय होने की संभावना है। नॉलेज एवं एआई सिटी के रोडमैप पर गुरुवार को राष्ट्रीय स्तर की बैठक भी रखी गई है। इसमें नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सहित केंद्रीय संस्थानों के निदेशक, कुलपति और प्राचार्य भाग लेंगे। नगरीय प्रशासन विभाग ने आइसर को एक्शन प्लान तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी है। इसके लिए 8 सदस्यीय कोर कमेटी बनी है, जिसके कन्वीनर प्रो. सौरभ दत्ता हैं। सुपरविजन आइसर डायरेक्टर गोवर्धन दास कर रहे हैं। बीडीए ने जमीन की पहचान के बाद ईओआई प्रक्रिया पूरी कर ली है। बीडीए सीईओ श्यामवीर सिंह ने बताया कि देश-विदेश की 20 से ज्यादा एजेंसियों ने रुचि दिखाई है। डेवलपमेंट एजेंसी क्या करेगी     पूरे प्रोजेक्ट का मास्टर प्लान तैयार करेगी     ग्रीन बिल्डिंग कांसेप्ट पर कैंपस डिजाइन     बड़े पैमाने पर ग्रीन जोन और ओपन स्पेस     ईवी, सीएनजी और हाइड्रोजन आधारित स्मार्ट ट्रांसपोर्ट     पीपीपी मॉडल, जॉइंट वेंचर और इंटीग्रेटेड पार्टनरशिप के विकल्प भौंरी क्षेत्र में पहले से मौजूद है एजुकेशन इको-सिस्टम देश के कई राज्य जैसे तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र एजुकेशन सिटी की दिशा में काम कर रहे हैं, लेकिन भोपाल की नॉलेज–AI सिटी का कॉन्सेप्ट अलग होगा। भौंरी क्षेत्र में पहले से आईसर भोपाल, निफ्ट, राष्ट्रीय फॉरेंसिक रिसर्च इंस्टीट्यूट, अटल बिहारी वाजपेयी पॉलिसी रिसर्च सेंटर, एमपी पुलिस अकादमी और शंकर दयाल शर्मा आयुर्वेदिक इंस्टिट्यूट मौजूद हैं। इसी क्लस्टर में ट्रिपल आईटी (IIIT) कैंपस के निर्माण का प्रस्ताव भी है। इन संस्थानों की मौजूदगी से यहां पहले से एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार है, जहां AI, स्पेस टेक, फॉरेंसिक, पब्लिक पॉलिसी, हेल्थ और डिजाइन जैसे क्षेत्रों में साझा रिसर्च की जा सकेगी। IISER तैयार कर रहा है रोडमैप नगरीय प्रशासन विभाग, मप्र शासन ने नॉलेज–AI सिटी के लिए एक्शन प्लान तैयार करने की जिम्मेदारी IISER भोपाल को सौंपी है। IISER ने पिछले वर्ष फरवरी में एक ब्रेन स्टॉर्मिंग सेशन किया था, जिसके बाद इस परियोजना को सभी संस्थानों को साथ लेकर आगे बढ़ाने की बात कही गई थी। पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी IISER के डायरेक्टर गोवर्धन दास कर रहे हैं। फरवरी के आखिर तक एजेंसी नियुक्त होगी भोपाल विकास प्राधिकरण (BDA) ने जमीन की पहचान के बाद EOI प्रक्रिया पूरी कर ली है। पहले यह परियोजना 2000 एकड़ में प्रस्तावित थी, जिसे बढ़ाकर अब 3700 एकड़ कर दिया गया है। लक्ष्य है कि वर्ष 2026 में नॉलेज–AI सिटी को धरातल पर उतारने का काम शुरू हो जाए। प्रोजेक्ट के कन्वीनर प्रोफेसर सौरभ दत्ता ने बताया कि इस परियोजना पर पिछले एक वर्ष से योजना बनाई जा रही है। नॉलेज और AI सिटी के माध्यम से ऐसा इकोसिस्टम तैयार करने का लक्ष्य है, जहां शिक्षा के साथ रिसर्च और इंडस्ट्री मिलकर काम करें। यह एक पूरी सिटी होगी, जिसे हायर एजुकेशन के साथ अर्बन डेवलपमेंट, हॉस्पिटल और मेट्रो से भी जोड़ा जाएगा। recent visitors 36

रूस और अमेरिका की परमाणु संधि समाप्त, 50 साल में पहली बार बिना नियम; क्या विनाश की ओर बढ़ रही है दुनिया?

मॉस्को  दुनिया को हिला देने वाली एक खबर सामने आई है. अमेरिका और रूस के बीच दशकों से चले आ रहे परमाणु हथियार नियंत्रण का सबसे अहम समझौता अब खत्म हो गया है. यह वही संधि थी जिसने दुनिया के दो सबसे बड़े परमाणु ताकतवर देशों के हथियारों की सीमा तय कर रखी थी. लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. समझौता खत्म होने के बाद दुनिया में टेंशन बढ़ गई है. रूस के पूर्व राष्ट्रपति और मौजूदा सुरक्षा अधिकारी दिमित्री मेदवेदेव ने इसे लेकर गंभीर चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि इस संधि का खत्म होना दुनिया को तबाही की ओर धकेल सकता है और ‘डूम्सडे क्लॉक’ यानी मानव विनाश का खतरा तेज हो सकता है. CNN की रिपोर्ट के अनुसार शीत युद्ध के दौर के बाद से ही रूस अपनी सुपरपावर छवि को बनाए रखने की कोशिश करता रहा है. सोवियत संघ के टूटने के बाद रूस का वैश्विक प्रभाव कमजोर जरूर हुआ लेकिन परमाणु ताकत के कारण उसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अहम भूमिका बनी रही. साल 2010 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूस के तत्कालीन राष्ट्रपति मेदवेदेव ने न्यू START संधि पर हस्ताक्षर किए थे. इस संधि के तहत दोनों देशों को अधिकतम 1550 तैनात परमाणु हथियार रखने की अनुमति थी. यह समझौता वैश्विक शांति के लिए बेहद अहम माना गया था. लेकिन अब इसके खत्म होने के साथ ही दुनिया एक नए और खतरनाक दौर में प्रवेश करती नजर आ रही है. सबसे पहले- New START संधि क्या है? न्यू स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी (New START) परमाणु हथियारों की होड़ को रोकने के लिए 2010 में किया गया एक ऐतिहासिक समझौता था। 2010 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने इस पर साइन किए थे। यह संधि 2011 में लागू हुई थी। इसका उद्देश्य उन रणनीतिक परमाणु हथियारों की तैनाती को सीमित करना था, जो किसी देश के प्रमुख राजनीतिक, सैन्य और औद्योगिक ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम होते हैं। तैनात हथियार वे माने जाते हैं जो सक्रिय सेवा में हों और तुरंत इस्तेमाल किए जा सकें। संधि कैसे बनी? पूरी कहानी परमाणु हथियारों पर रोक लगाने की कोशिश शीत युद्ध के समय से चली आ रही है। 1969 से अमेरिका और सोवियत संघ (बाद में रूस) ने कई दौर की बातें कीं।     1970 के दशक में SALT समझौते: हथियारों की संख्या पर सीमा लगाई, लेकिन कम नहीं किए।     1991 में START I: पहली बड़ी कटौती, जॉर्ज बुश और गोर्बाचेव के समय। हजारों हथियार कम हुए।     1993 में START II: और कटौती, लेकिन पूरी तरह लागू नहीं हुई।     2002 में SORT (मॉस्को संधि): बुश और पुतिन ने वारहेड्स 1,700-2200 तक कम करने पर सहमति, लेकिन जांच-पड़ताल कम थी। फिर आई न्यू स्टार्ट। 2009 में बराक ओबामा (अमेरिका) और दिमित्री मेदवेदेव (रूस) ने बात शुरू की। 8 अप्रैल 2010 को प्राग (चेक गणराज्य) में हस्ताक्षर हुए। अमेरिकी सीनेट ने 2010 में मंजूरी दे दी थी। रूसी संसद ने 2011 में दी। आखिरकार संधि 5 फरवरी 2011 से लागू हुई। इसका मूल समय 10 साल तक ही था। हालांकि इसे एक बार 5 साल बढ़ाने का प्रावधान भी था, जो 2021 में जो बाइडेन ने इस्तेमाल किया और 2026 तक बढ़ा दिया। 2021 के बाद क्या हुआ? 2023 में रूस ने संधि में हिस्सा रोक दिया जैसे निरीक्षण बंद कर दिए, लेकिन सीमाओं का पालन करने का दावा जारी रखा। वजह बताई कि यूक्रेन युद्ध में अमेरिका मदद कर रहा है। आखिरकार आज (5 फरवरी 2026) संधि खत्म हो गई। अब दोनों देश स्वतंत्र हैं – जितने चाहें हथियार बढ़ा सकते हैं। रूस बोला- अब परमाणु हथियारों की सीमा से मुक्त रूस ने कहा है कि वह अब अमेरिका के साथ रणनीतिक परमाणु हथियारों की संख्या को सीमित करने वाली न्यू स्टार्ट संधि से अब बंधा नहीं है, क्योंकि यह संधि गुरुवार को समाप्त हो रही है। इस बयान से वैश्विक सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ गई हैं। संयुक्त राष्ट्र ने इसे अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए “गंभीर क्षण” करार दिया है। रूसी विदेश मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि अमेरिका ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के उस प्रस्ताव पर कोई जवाब नहीं दिया, जिसमें दोनों देशों से 12 महीने तक संधि के तहत मिसाइलों और तैनात परमाणु वारहेड्स की सीमाओं का पालन जारी रखने की बात कही गई थी। मंत्रालय ने कहा- हम मानते हैं कि न्यू स्टार्ट संधि के पक्षकार अब इसके तहत किसी भी दायित्व या पारस्परिक घोषणाओं से बंधे नहीं हैं। हमारी बातों को जानबूझकर अनदेखा किया जा रहा है, जो गलत और अफसोसजनक है। संधि खत्म होने के संभावित असर संधि की अवधि समाप्त होने के साथ ही रूस और अमेरिका दोनों के लिए मिसाइलों की संख्या बढ़ाने और सैकड़ों अतिरिक्त रणनीतिक वारहेड्स तैनात करने का रास्ता खुल जाएगा। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा करना तकनीकी और लॉजिस्टिक रूप से चुनौतीपूर्ण होगा और इसमें समय लगेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले संकेत दिए थे कि वे संधि के विस्तार पर विचार कर सकते हैं, लेकिन जनवरी में उन्होंने कहा था कि अगर यह खत्म होती है तो कोई बेहतर समझौता किया जाएगा। ट्रंप ने भविष्य की किसी भी परमाणु वार्ता में चीन को शामिल करने की भी बात कही है। परमाणु हथियारों का मौजूदा संतुलन रूस और अमेरिका मिलकर दुनिया के 90 प्रतिशत से अधिक परमाणु हथियारों का भंडार रखते हैं। जनवरी 2025 तक रूस के पास 4,309 और अमेरिका के पास 3,700 परमाणु वारहेड्स थे। फ्रांस और ब्रिटेन के पास क्रमशः 290 और 225 वारहेड्स हैं, जबकि चीन के पास लगभग 600 परमाणु हथियार माने जाते हैं। विशेषज्ञों की चेतावनी सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि न्यू स्टार्ट के खत्म होने से एक नई हथियारों की होड़ शुरू हो सकती है, जिसमें चीन के परमाणु विस्तार का भी असर पड़ेगा। फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स के मैट कोर्डा के अनुसार सबसे अधिकतम स्थिति में दोनों देश अपनी तैनात परमाणु क्षमताओं को लगभग दोगुना कर सकते हैं। पोप लियो ने भी चेताया संधि की समाप्ति से पहले, पोप लियो ने दोनों देशों से अपील की कि वे हथियारों पर लगी सीमाओं को न … Read more

एक लाख ग्रामीण महिलाएं बनेंगी शहद उद्यमी, आय में एक लाख रुपये की सालाना वृद्धि का लक्ष्य

यूपी में एक लाख ग्रामीण महिलाओं के जीवन में मिठास घोलेगा शहद सीएम योगी का मिशन विलेज: अब ग्लोबल होगा यूपी का शहद, महिलाएं लॉन्च करेंगी अपना ब्रांड, देश-दुनिया में मिलेगी पहचान एक लाख ग्रामीण महिलाएं बनेंगी शहद उद्यमी, आय में एक लाख रुपये की सालाना वृद्धि का लक्ष्य 'डबल' मुनाफा : मधुमक्खियां बढ़ाएंगी फसल की पैदावार, बदलेगी खेती किसानी की तस्वीर लखनऊ  उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने और खेती-किसानी को नई ताकत देने के लिए बड़ा कदम उठाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत मधुमक्खी पालन कार्यक्रम शुरू किया गया है, जिसके माध्यम से प्रदेश के स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं शहद उत्पादन के साथ-साथ फसलों की उत्पादकता भी बढ़ाएंगी। योजना के अंतर्गत आगामी तीन वर्षों में एक लाख महिला मधुमक्खी पालक तैयार की जाएंगी। इसके तहत प्रत्येक महिला उद्यमी की आय में प्रति वर्ष एक लाख रुपये तक की वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है। मधुमक्खियों द्वारा परागण से गेहूं, सरसों, दलहन-तिलहन और बागवानी फसलों की पैदावार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी, जिससे किसानों को भी सीधा लाभ मिलेगा। यूपी का शहद वैश्विक पहचान बनाएगा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मिशन विलेज के तहत अब यूपी का शहद वैश्विक पहचान बनाएगा। महिलाएं शहद का अपना ब्रांड विकसित करेंगी और शहद व अन्य उत्पादों के विपणन से प्रदेश के आर्थिक विकास में साझीदार बनेंगी। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और महिलाओं का आत्मनिर्भरता का सपना साकार होगा। इस योजना के जरिए प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और उद्यमियों को बाजार से जोड़ने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि यूपी का शहद देश-दुनिया में गुणवत्ता और भरोसे की पहचान बने। recent visitors 32

राष्‍ट्रपति के भाषण पर PM ने नहीं दिया रिप्‍लाई, लोकसभा से पारित हुआ भाषण, 2004 के बाद पहली बार

 नई दिल्ली  लोकसभा के लिए गुरुवार 5 फरवरी 2026 का दिन अप्रत्‍याशित रहा. प्रधानमंत्री के जवाब के बिना ही राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण को लोकसभा से पारित कर दिया गया. साल 2004 के बाद यह पहला मौका है, जब प्रधानमंत्री के भाषण के बिना ही राष्‍ट्रपति के अभिभाषण को लोकसभा से पारित कर दिया गया है. इससे पहले जून 2004 में तत्‍कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह हंगामे की वजह से राष्‍ट्रपति के अभिभाषण पर जारी बहस में हिस्‍सा नहीं ले सके थे. उनको अपनी बात कहने का मौका नहीं मिला था. उनकी स्‍पीच के बिना ही राष्‍ट्रपति के अभिभाषण को लोकसभा से पारित कर दिया गया था. बजट सत्र के दौरान संसद में जारी गतिरोध के बीच गुरुवार 5 फरवरी 2026 को लोकसभा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संयुक्त सत्र में दिए गए अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को प्रधानमंत्री के जवाब के बिना ही पारित कर दिया. यह 2004 के बाद पहली बार हुआ है, जब सदन ने परंपरा से हटकर बिना प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया के प्रस्ताव को मंजूरी दी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुधवार 4 फरवरी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब देना था, लेकिन विपक्षी सांसदों के लगातार हंगामे और नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही. हालात को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी. इसके बाद गुरुवार को स्‍पीकर ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पढ़कर सुनाया, जिसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया, हालांकि इस दौरान भी विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी जारी रखी. लोकसभा में भारी हंगामे के चलते आज भी कार्यवाही स्थगित हुई है। इसके साथ ही अब तय हो गया है कि लोकसभा में पीएम नरेंद्र मोदी का भाषण नहीं होगा। वह राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुई चर्चा का जवाब देने वाले थे, लेकिन हंगामे के चलते ऐसा नहीं हो सका। उनके भाषण के लिए बुधवार शाम 5 बजे का समय तय था, लेकिन कांग्रेस समेत विपक्षी सांसदों के हंगामे के चलते कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। अब उनके भाषण के बिना ही राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को मंजूर कर लिया गया है। 2004 के बाद ऐसा पहली बार हुआ है। 2004 में तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह भी अपना भाषण नहीं दे सके थे। इस बार कुल तीन सांसद ही राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुई चर्चा में अपनी स्पीच पूरी कर सके। राष्ट्रपति की ओर से संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित किया जाता है और फिर उस पर परिचर्चा होती है। इस चर्चा के अंत में पीएम के जवाब देने की परंपरा रही है, लेकिन 2004 के बाद ऐसा पहली बार हो रहा है, जब प्रधानमंत्री के बिना ही राष्ट्रपति के भाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित होगा। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने धन्यवाद प्रस्ताव पर विपक्ष के सुझावों को सदन में रखा, जिन्हें खारिज कर दिया गया। इसके बाद स्पीकर ने धन्यवाद प्रस्ताव को मतदान के लिए रखा और उसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। हालांकि इस बीच लोकसभा सांसदों की ओर से नारेबाजी जारी रही। हंगामे के बीच ही धन्यवाद प्रस्ताव मंजूर, कार्य़वाही करनी पड़ी स्थगित हंगामे के चलते स्पीकर ने सदन की कार्यवाही को 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। इस बीच पीएम नरेंद्र मोदी का आज शाम को राज्यसभा में भाषण होने वाला है। जानकारी मिल रही है कि इस दौरान भी विपक्ष की ओर से हंगामा हो सकता है। दरअसल वह लोकसभा में बुधवार को ही बोलने वाले थे, लेकिन विपक्षी सांसदों के हंगामे के चलते ऐसा नहीं हो सका। विपक्षी नेताओं का कहना था कि यदि नेता विपक्ष राहुल गांधी को बोलने का मौका नहीं दिया गया है तो फिर पीएम को भी अवसर नहीं देंगे। राहुल गांधी को लोकसभा में भाषण से क्यों रोका गया था? गौरतलब है कि राहुल गांधी पूर्व आर्मी चीफ एम.एम नरवणे की एक पुस्तक का हवाला देते हुए लोकसभा में बोलना चाह रहे थे। यह पुस्तक प्रकाशित ही नहीं हुई है और इसके चलते रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और होम मिनिस्टर अमित शाह ने इस पर आपत्ति जताई थी। अंत में उन्हें इस पर भाषण देने से रोक दिया गया था। इसी को लेकर कांग्रेस हमलावर है और उसका कहना है कि यह विपक्ष के नेता के अधिकार का हनन है। तब से ही विपक्ष का कहना था कि हम पीएम मोदी को भी भाषण नहीं देने देंगे और अंत में प्रधानमंत्री की स्पीच के बिना ही धन्यवाद प्रस्ताव को मंजूर कर लिया गया। लोकसभा में नहीं थमा हंगामा गुरुवार को लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई, लेकिन कुछ ही देर में INDIA गठबंधन के सांसदों ने प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए, जिसके चलते सदन को फिर स्थगित करना पड़ा. विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने का अवसर नहीं दिया गया, जबकि वह 2020 के चीन गतिरोध पर पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल एमए नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा का हवाला देना चाहते थे. सरकार और विपक्ष के बीच टकराव मंगलवार को उस समय और तेज हो गया, जब कांग्रेस के आठ सांसदों को अनुशासनहीन व्यवहार के चलते बजट सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया. इसके बाद से विपक्षी दल लगातार सदन में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे विधायी कामकाज प्रभावित हुआ है. 21 साल पुरानी याद ताजा संसदीय परंपरा के अनुसार, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री का जवाब एक अहम प्रक्रिया मानी जाती है, जिसमें सरकार अपनी प्राथमिकताओं और विपक्ष के सवालों का समग्र उत्तर देती है. ऐसे में प्रधानमंत्री के बिना जवाब दिए प्रस्ताव का पारित होना असाधारण माना जा रहा है. इस घटनाक्रम के बीच 2004 की यादें भी ताजा हो गई हैं, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देने से रोका गया था. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर 10 मार्च 2005 का एक वीडियो साझा किया, जिसमें डॉ. सिंह जून 10, 2004 की उस घटना का जिक्र करते हैं, जब उन्हें सदन में बोलने नहीं दिया गया था. recent visitors 34

दिल्ली में 15 दिन में 800 बच्चे गायब, आसमान या जमीन ने उन्हें निगला? वसीम और ऋतिक के घर मातम

नई दिल्ली आधी रात का वक्त था, वसीम चैन से सोया था, पर अगली सुबह जब सूरज की पहली किरण बुराड़ी की गलियों में पहुंची तो वह बिस्तरों से गायब था. दिल्ली की सड़कों पर पहरा देने वाली पुलिस की नाक के नीचे महज 15 दिनों में 800 बच्‍चे गायब हो चुके हैं. कहीं संगीत का जुनून पालने वाला वसीम अपना हारमोनियम लेकर अंधेरे में खो गया, तो कहीं JEE की तैयारी कर रहा होनहार ऋतिक एक डांट के बाद सिस्टम की सुस्ती की भेंट चढ़ गया. यह सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं बल्कि उन बिलखती मांओं की चीख है जिनकी आंखें दरवाजे पर पथरा गई हैं. पुलिस की फाइलें लेटर लिखने में हफ्ता गुजार देती हैं और इधर मेट्रो की फुटेज से लेकर मासूमों के सुराग तक सब कुछ हमेशा के लिए मिट जाता है. क्या दिल्ली अब अपने ही बच्चों के लिए एक डरावना भूलभुलैया बन चुकी है? देश की राजधानी दिल्ली में लापता बच्चों की बढ़ती संख्या ने न केवल पुलिस महकमे को बल्कि आम जनता को भी हिलाकर रख दिया है. आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में महज 15 दिनों के भीतर 800 से ज्यादा लोगों के लापता होने की खबर ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है.  दिल्ली के बुराड़ी पहुंची, तो वहां दो परिवारों का दर्द सामने आया, जिनके बेटे दिसंबर महीने से लापता हैं. केस स्टडी 1: वसीम रजा का संगीत का सपना और अधूरी तलाश बिहार के किशनगंज से आकर बुराड़ी के मौर्य एनक्लेव में रहने वाले तेमुल हक और रूबी का 19 वर्षीय बेटा वसीम रजा 28 दिसंबर की सुबह से गायब है. • विवाद की जड़: वसीम को सिंगिंग का जुनून था लेकिन परिवार चाहता था कि वह AC रिपेयरिंग का काम सीखे. • गायब होने का घटनाक्रम: 27 दिसंबर की रात वसीम घर पर ही सोया था. सुबह 9 बजे वह घर में नहीं था और अपना हारमोनियम साथ ले गया था. • पुलिस पर सवाल: वसीम के पिता का कहना है कि पुलिस ने गली या उसके बाहर की CCTV फुटेज तक नहीं निकाली. • मां का दर्द: “जिसका बच्चा जाता है, उसके दिल पर क्या गुजरती है. वोट मांगने आते हैं तो सब छान मार देते हैं, लेकिन बच्चे के वक्त सुनवाई नहीं होती.” केस स्टडी 2: ऋतिक झा और सिस्टम की लेटलतीफी बुराड़ी के संत नगर का 16 वर्षीय ऋतिक झा JEE मेंस की तैयारी कर रहा था. 17 दिसंबर को मां की डांट के बाद वह घर से निकला और फिर कभी नहीं लौटा. • खोया हुआ मौका: ऋतिक की आखिरी लोकेशन नेताजी सुभाष पैलेस (NSP) मेट्रो स्टेशन पर मिली थी. • फुटेज का संकट: पुलिस को मेट्रो को पत्र लिखने में 7 दिन लग गए. तब तक मेट्रो की पुरानी फुटेज डिलीट हो चुकी थी. • मां का डर: ऋतिक की मां बेबी झा को डर है कि उनके बेटे का अपहरण हो गया है. आंकड़ों का आईना: दिल्ली में गायब होती सुरक्षा वसीम के पिता तेमुल हक का सवाल जायज है कि अगर 15 दिनों में 800 लोग गायब होंगे, तो दिल्ली खाली हो जाएगी. लापता व्यक्ति    उम्र       क्षेत्र                           लापता होने की तिथि वसीम रजा       19 साल    मौर्य एनक्लेव, बुराड़ी    28 दिसंबर ऋतिक झा       16 साल    संत नगर, बुराड़ी          17 दिसंबर सिस्टम की सुस्ती और परिवारों का इंतजार इन दोनों ही मामलों में परिवारों का सीधा आरोप पुलिस की कार्यप्रणाली पर है. कहीं CCTV फुटेज नहीं खंगाली गई तो कहीं लेटर लिखने की कागजी कार्रवाई में अहम सबूत (मेट्रो फुटेज) मिट गए. दिल्ली जैसे महानगर में जहां चप्पे-चप्पे पर कैमरे होने का दावा किया जाता है, वहां बच्चों का इस तरह गायब हो जाना और हफ्तों तक कोई सुराग न मिलना चिंताजनक है. सवाल-जवाब दिल्ली में हाल के दिनों में लापता होने वाले लोगों के आंकड़े क्या कहते हैं? न्यूज 18 इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में महज 15 दिनों के भीतर 800 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है, जिसने आम नागरिकों को हैरत में डाल दिया है. बुराड़ी से लापता वसीम रजा के मामले में पुलिस पर क्या आरोप हैं? वसीम के पिता तेमुल हक का आरोप है कि पुलिस उनके इलाके में घूमती तो है, लेकिन वसीम के लापता होने के बाद न तो उनकी गली की और न ही बाहर की सीसीटीवी फुटेज निकाली गई. ऋतिक झा के मामले में सीसीटीवी फुटेज क्यों नहीं मिल पाई? ऋतिक की मां बेबी झा के अनुसार, पुलिस को मेट्रो को पत्र लिखने में ही 7 दिन लग गए. इस लेटलतीफी के कारण मेट्रो का पुराना फुटेज डेटा डिलीट हो गया और ऋतिक का आगे का सुराग नहीं मिल सका. लापता बच्चों के माता-पिता की मुख्य चिंता और डर क्या है? वसीम की मां को डर है कि इतने दिनों तक कोई संपर्क न होने के कारण उनके बेटे के साथ कोई अनहोनी न हो गई हो. वहीं, ऋतिक की मां को अंदेशा है कि उनके बेटे का किडनैप (अपहरण) कर लिया गया है. बुराड़ी के जनप्रतिनिधियों से इन परिवारों को क्या आश्वासन मिला है? वसीम के पिता ने बताया कि वे बुराड़ी विधायक के दफ्तर में ‘जनता दरबार’ गए थे. वहां से उन्हें आश्वासन दिया गया कि एक-दो दिन में इस बारे में एसडीएम (SDM) या पुलिस कमिश्नर से बात की जाएगी. recent visitors 36

भारत के रणनीतिक ‘चिकन नेक’ पर केंद्र सरकार का धमाकेदार प्लान, 40 किमी अंडरग्राउंड रेलवे कॉरिडोर का निर्माण

भारत की रणनीतिक नब्ज 'चिकन नेक' पर केंद्र सरकार का धमाकेदार प्लान: जमीन के नीचे बनेगा 40 किमी लंबा अंडरग्राउंड रेलवे कॉरिडोर!  सिलीगुड़ी  पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी के पास स्थित 'चिकन नेक' – वह संकरी भूमि पट्टी जो भारत की शिराओं में सबसे संवेदनशील धमनी की तरह काम करती है। मात्र 20 किलोमीटर चौड़ी और 60 किलोमीटर लंबी यह पट्टी, नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाओं से घिरी हुई, पूर्वोत्तर के आठ राज्यों – अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा – को बाकी भारत से जोड़ने वाला एकमात्र जमीनी गलियारा है। वर्षों से दुश्मन ताकतें इसी की कमजोरी को निशाना बनाती रहीं, लेकिन अब केंद्र सरकार ने इसे अभेद्य किले में बदलने का मास्टरस्ट्रोक प्लान तैयार किया है। जी हां, केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बजट चर्चा के दौरान खुलासा किया कि 'चिकन नेक' के टिन माइल हाट और रंगापानी रेलवे स्टेशनों के बीच 40 किलोमीटर लंबा अंडरग्राउंड रेलवे टनल बनाया जाएगा। यह न केवल कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को भी अटल बना देगा!कल्पना कीजिए – पहाड़ों और जंगलों के बीच वह संकरा कॉरिडोर, जहां आज रेल लाइनें, हाईवे, तेल पाइपलाइन और कम्युनिकेशन नेटवर्क आपस में उलझे हुए हैं। भीड़भाड़, प्राकृतिक आपदाएं या दुश्मनी की साजिशें – सब कुछ यातायात को ठप कर सकती हैं। लेकिन अब यह सब भूमिगत हो जाएगा! नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे के जीएम चेतन कुमार श्रीवास्तव ने साफ कहा, "यह अंडरग्राउंड लाइन सुरक्षा के लिहाज से अनिवार्य है।" प्राकृतिक विपत्तियों हो या मानवीय खतरों, यह टनल सबको झेल लेगी। यात्री ट्रेनें तेज रफ्तार से दौड़ेंगी, मालगाड़ियां बिना रुकावट पहुंचेंगी, और सबसे अहम – डिफेंस लॉजिस्टिक्स यानी सेना का हथियार-बारूद, सैनिकों की आवाजाही बिल्कुल सुरक्षित रहेगी। दुश्मन भले ही आसमान से निगाह रखे या जमीन पर साजिश रचे, लेकिन भूमिगत कॉरिडोर को छू भी न पाएंगे!यह प्लान सिर्फ टनल तक सीमित नहीं। मौजूदा रेल ट्रैक को चार-लाइन (फोर-लेन) में बदला जाएगा, ताकि ट्रैफिक जाम जैसी समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाए। रेल मंत्री वैष्णव ने वीडियो कॉन्फ्रेंस में जोर देकर कहा, "नॉर्थ-ईस्ट को बाकी भारत से जोड़ने वाले इस 40 किमी स्ट्रैटेजिक कॉरिडोर पर अंडरग्राउंड रेल ट्रैक बिछाने की योजना है। इससे कनेक्टिविटी मजबूत और सुरक्षित होगी।" यह भारत की लॉन्ग-टर्म इंफ्रास्ट्रक्चर स्ट्रैटेजी का हिस्सा है, जो पूर्वोत्तर को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने के साथ-साथ सामरिक दृष्टि से अभेद्य बनाएगा। सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जो देश का सबसे व्यस्त और संवेदनशील ट्रांजिट जोन है, अब दुश्मनों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द साबित होगा। भारत अब चिकन नेक को चिकन नेक नहीं, बल्कि 'स्टील नेक' बना रहा है – मजबूत, लचीला और अटल!इस ऐतिहासिक कदम से पूर्वोत्तर के लाखों लोग लाभान्वित होंगे। तेज ट्रेनें, सस्ता माल ढुलाई, पर्यटन में उछाल और निवेश का दौर – सब कुछ संभव हो जाएगा। केंद्र सरकार की यह दूरदृष्टि न केवल सीमाओं की रक्षा करेगी, बल्कि 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के सपने को साकार करेगी। क्या आप तैयार हैं इस क्रांतिकारी बदलाव के साक्षी बनने को? recent visitors 35