मुख्यमंत्री साय ने की घोषणा , छत्तीसगढ़ में स्थापित होंगे 4 नए स्मार्ट औद्योगिक पार्क

रायपुर, छत्तीसगढ़ स्टेट इण्डस्ट्रियल डेव्हलेपमेंट कार्पाेरेशन लिमिटेड के नवनियुक्त अध्यक्ष राजीव अग्रवाल ने आज तेलीबांधा स्थित उद्योग भवन में अपना कार्यभार ग्रहण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने उन्हें अपनी बधाई एवं शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व में सीएसआईडीसी प्रदेश में औद्योगिक वातावरण के निर्माण में बेहतर कार्य करेगा। श्री राजीव अग्रवाल अनेक पदों पर किये हैं। उनके अनुभवों से उद्योग जगत को एक नई ऊंचाई मिलेगी। राज्य में नई औद्योगिक नीति से प्रदेश का विकास होगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वर्तमान में 4.50 लाख करोड़ रूपए का निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। राज्य में खनिज, बिजली और पानी की पर्याप्त उपलब्धता से उद्योगों को फलने-फूलने का अवसर मिलेगा।     वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य में सेक्टर आधारित उद्योगों को एक ही परिसर में सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने के दृष्टिकोण से मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राजनांदगांव जिला के ग्राम पटेवा में 322 एकड़ में इलेक्ट्रॉनिक मैन्यूफैक्चरिंग क्लस्टर की  स्थापना के लिए 350 करोड़ रूपए, राजनांदगांव जिला के ग्राम बिजेतला में 50 एकड़ में स्पेश मैन्यूफैक्चरिंग क्लस्टर की स्थापना के लिए 25 करोड़ रूपए, नवा रायपुर के 20 एकड़ में रेडिमेट गारमेंट पार्क के लिए 30 करोड़ रूपए तथा नवा रायपुर में ही 30 एकड़ में फर्नीचर क्लस्टर की स्थापना के लिए 40 करोड़ रूपए की घोषणा की। इस तरह कुल 445 करोड़ रूपए की लागत से 4 स्मार्ट औद्योगिक पार्क की स्थापना की जाएगी। छत्तीसगढ़ राज्य में उद्योगों के विकास के लिए एक अनुकुल एवं सकारात्मक वातावरण बनेगा।   इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने नवनियुक्त अध्यक्ष को बधाई देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के 25 वर्ष पूर्ण होने पर रजत जयंती वर्ष मनाया जा रहा है। राज्य के नई औद्योगिक नीति से उद्योग बेहतर तरीके से विकसित होंगे और राज्य तेजी से विकास करेगा। सीएसआईडीसी के नवनियुक्त अध्यक्ष श्री राजीव अग्रवाल ने कहा कि राज्य के औद्योगिक नीति विकसित राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। पिछले दिनों मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा नवा रायपुर में सेमीकंडक्टर उत्पादों के निर्माण के लिए भूमिपूजन किया गया है। अध्यक्ष के रूप में श्री राजीव अग्रवाल ने अपने कर्तव्यों को निष्ठापूर्वक निर्वहन करने की बात कही। इस मौके पर उप मुख्य मंत्री अरुण साव, उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन,  केबिनेट मंत्री केदार कश्यप, राम विचार नेताम, सांसद बृजमोहन अग्रवाल एवं विजय बघेल, विधायक धरम लाल कौशिक, किरण सिंह देव, मोतीलाल साहू, राजेश मूणत, पुरंदर मिश्रा, अनुज शर्मा, डोमन लाल कोर्सेवाड़ा, महापौर रायपुर श्रीमती मीनल चौबे, जिला पंचायत रायपुर के अध्यक्ष नवीन अग्रवाल, विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, सीएसआईडीसी के प्रबंध संचालक विश्वेश कुमार, छत्तीसगढ़ स्टील रि-रोलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय त्रिपाठी सचिव बांके बिहारी अग्रवाल, छत्तीसगढ़ मिनी स्टील प्लांट एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक कुमार अग्रवाल, छत्तीसगढ़ स्पंज आयरन मैन्युफेक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. मनीष कुमार मंडल सहित निगम, मंडल बोर्ड के अध्यक्ष सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। recent visitors 31

एक जिला एक उत्पाद योजना के अंतर्गत सीधी जिले की दरी और कालीन को खास पहचान मिली : मंत्री जायसवाल

सीधी जिले के कालीन मध्यप्रदेश की शान : मंत्री जायसवाल मंत्री जायसवाल ने कहा सीधी जिले के स्थानीय कारीगरों की मेहनत को नया बाजार मिलेगा एक जिला एक उत्पाद योजना के अंतर्गत सीधी जिले की दरी और कालीन को खास पहचान मिली : मंत्री जायसवाल भोपाल कुटीर एवं ग्रामोद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा है कि "एक जिला एक उत्पाद"योजना के अंतर्गत सीधी जिले की दरी और कालीन को खास पहचान मिली है। सीधी जिले के दरी और कालीन मध्यप्रदेश की शान हैं। मंत्री जायसवाल ने कहा कि स्थानीय कारीगरों की मेहनत को नया बाजार मिलेगा। साथ ही उनकी परंपरा और हुनर को नये मुकाम तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि बुनकर मुद्रा योजना के साथ प्रदेश के बुनकरों की तरक्की होगी। योजनांतर्गत, बुनकरों को अब 50 हजार रुपए से लेकर 5 लाख रूपए तक का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। राज्य और केन्द्र सरकार साझा प्रयास कर बुनकरों को हक और प्रोत्साहन दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्री जायसवाल ने कहा कि रेशम के धागे से दवाइयाँ और सेरीबैंडेज का निर्माण होगा। ऐसा नवाचार करने के मामले में मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है। उन्होंने कहा कि सतपुड़ा एवं नर्मदा के वनों के ककून से दवाएँ बनाई जाएंगी। पाउडर, क्रीम, सेरीबैंडेज, सिजेरियन ड्रेसिंग, डायबिटिक घाव की ड्रेसिंग तथा ऑपरेशन के बाद की ड्रेसिंग निर्मित होंगी। सेरीबैंडेज की विशेषताएं रेशम घाव को गीला नहीं रखता, शरीर के साथ भी नहीं चिपकता तथा रेशम से फायब्रोयिन नामक प्रोटीन निकलता है, जो जख्मों, डायबिटीज से ऊंगलियों में होने वाले घाव और गर्भवती महिलाओं के सर्जिकल डिलीवरी के घाव को कम समय में ठीक करता है। इससे संक्रमण की संभावना भी नगण्य हो जाती है। रेशम की विशेषताएं रेशम एक मजबूत प्राकृतिक फाइबर है, जो घर्षण और तनाव का प्रतिरोधी होता है। रेशम के धागे से पाउडर, क्रीम, सेरीबैंडेज और सिजेरियन बैंडेज का निर्माण होता है। रेशम नमी को सोख लेता है, जो इसे गर्मियों के कपड़ों के लिए एक अच्छा विकल्प बनाता है। रेशम लचीला होता है, जो इसे विभिन्न प्रकार के कपड़ों और उत्पादों के लिए उपयुक्त बनाता है।   recent visitors 30

टू-व्हीलर गाड़ी के साथ कंपनी की ओर से दो हेलमेट का प्रावधान, जानिए गडकरी ने क्या बताया

मुंबई केन्द्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सड़क पर लोगों की सेफ्टी और एक्सीडेंट को रोकने के लिए नया मास्टर प्लान बनाया है। उन्होंने एक टीवी प्रोग्राम के दौरान एक्सीडेंट को रोकने के लिए अपने मास्टर प्लान के बारे में खुलकर बताया। उनके इस प्लान में नए टू-व्हीलर के साथ 2 हेलमेट देना अनिवार्य होगा। वहीं, अब रोड पर सब मेंडेटरी प्रीकास्ट होगा। उन्होंने ये भी कहा कि रोड अब फैक्टरी में बनेगा। गडकरी ने बताया कि सिर्फ स्कूल के सामने हर साल 10 हजार बच्चे रोड एक्सीडेंट में मर जाते हैं। ये बड़ी चिंता का विषय है। इसे रोकने के लिए ही उन्होंने बड़ी तैयार की है। चलिए उनके मास्टर प्लान के बारे में विस्तार से जानते हैं। टू-व्हीलर के साथ 2 हेलमेट मिलेंगे गडकरी ने कहा कि जो भी टू-व्हीलर खरीदता है कंपनी उसे किसी अच्छी कंपनी के दो ISI स्टैंडर्ड वाले हेलमेट भी देगी, ताकी गाड़ी पर चलने वाले दोनों लोग हेलमेट पहनें। उन्होंने कहा कि रोड सेफ्टी में हम लंबे समय से काफी काम कर चुके हैं उसके बाद भी अभी सफलता नहीं मिली है। सिर्फ स्कूल के सामने ही हर साल 10 हजार बच्चों की मौत हो जाती है। जबकि, हर साल 1 लाख 80 हजार मौत रोड एक्सीडेंट में होती हैं। ऐसे में हम रोड सेफ्टी ऑडिट कर रहे हैं। ब्लैक स्पॉट का पता लगा रहे हैं। राहवीर योजना जल्द होगी लागू उन्होंने आगे बताया कि हमने एक राहवीर योजना भी तैयार की है। इस योजना में जिसका एक्सीडेंट होता है और उसे लेकर कोई अस्पताल आता है और उसकी जान बचाता है। तब हम उसे 25 हजार रुपए का अवॉर्ड देंगे। साथ ही, जो अस्पताल में एडमिट होगा उसको मैक्सिमम 7 दिन का खर्च या 1.50 लाख रुपए की सहायता देंगे और उसकी जान बचाने की कोशिश करेंगे। यदि लोग एक्सीडेंट होने वाले व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने का काम करते हैं तब हम हर साल 50 हजार लोगों की जान बचा सकते हैं। रोड पर सब मेंडेटरी प्रीकास्ट होगा गडकरी ने बताया कि अब रोड पर सब मेंडेटरी प्रीकास्ट होगा। यानी रोड अब फैक्टरी में बनेगा। अभी रोड के बीच में जो वैरियर होते हैं लोग उन्हें कूदकर आगे जाते हैं, जिससे एक्सीडेंट होते हैं। ऐसे में अब इन वैरिएट की ऊंचाई को 3 फीट तक बढ़ाया जाएगा। इसके दोनों तरफ एक मीटर की दूसरी रखी जाएगी जिसमें काली मिट्टी डालकर प्लांट लगाए जाएंगे। ऐसे में कोई इसे कूदकर पार नहीं कर पाएगा। उन्होंने कहा कि हम मलेशिया से नई टेक्नोलॉजी लाए हैं जिससे हजारों-करोड़ रुपए बच रहे हैं। जैसे तमिलनाडु के चेन्नई में मेट्रो बन रही हैं। उनका 70-75 हजार करोड़ रुपए कैबिनेट नोट आया था। ऐसे में हमने मलेशिया में इस्तेमाल होने वाली टेक्नोलॉजी से दो पिलर की दूरी को 120 मीटर कर दिया। जबकि पहले ये 30 मीट की होती थी। यानी 3 पिलर को कॉस्ट को बचाया गया। वहीं, ऊपर का बीम स्टील की जगह स्टील फाइबर में कास्ट होगा। साथ ही, प्रीकास्ट से पॉल्यूशन को कम करने में भी मदद मिलेगी। रोड एक्‍सीडेंट में 1.80 लाख मौतें इस दौरान उन्‍होंने कहा कि हम रोड सेफ्टी को लेकर काम कर रहे हैं, लेकिन जितनी सफलता मिलनी चाहिए थी, उतनी नहीं मिली है. उन्‍होंने बताया कि हर साल 10 हजार बच्‍चों की स्‍कूलों के सामने होने वाले एक्‍सीडेंट में मौत हो जाती है. उन्‍होंने बताया कि इसे लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ बुधवार को एक बैठक है. गडकरी ने बताया कि देश में हर साल एक लाख 80 हजार मौतें रोड एक्‍सीडेंट में होती हैं.  उन्‍होंने बताया कि हम रोड सेफ्टी ऑडिट कर रहे हैं और ब्‍लैक स्‍पॉट को बेहतर कर रहे हैं. राहवीर योजना को लेकर दी जानकारी इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार राहवीर योजना भी लेकर आ रही है, जिसमें एक्‍सीडेंट होने के बादा यदि कोई उस व्‍यक्ति को अस्‍पताल लेकर जाता है तो हम उसे 25 हजार रुपये का अवार्ड देंगे. साथ ही एडिमट होने वाले शख्‍स को सात दिन का खर्चा या डेढ लाख रुपये हम देंगे और उस शख्‍स की जान बचाने की कोशिश करेंगे. उन्‍होंने कहा कि यदि एक्‍सीडेंट के बाद घायल को तुरंत अस्‍पताल में भर्ती कराया जाए तो 50 हजार लोगों की जान बच सकती है. recent visitors 31

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि किसानों का ब्याज सरकार भरेगी, उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं

भोपाल एमपी में किसानों के लिए सीएम डॉ. मोहन यादव ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि किसानों की सहकारी बैंकों की कर्ज राशि का ब्याज राज्य सरकार वहन करेगी। भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधिमंडल ने CM डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की। संघ पदाधिकारियों ने भू अधिग्रहण संशोधन ड्राफ्ट मामले में कुछ सुझाव दिए और 31 मार्च तक सहकारी बैंकों के कर्ज जमा न कर पाने के कारण डिफाल्टर हुए किसानों का मामला उठाया। इस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि किसानों का ब्याज सरकार भरेगी, उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है। भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सरकार के भू अधिग्रहण संशोधन ड्राफ्ट के मामले में सीएम को किसानों की चिंता से अवगत कराते हुए उनका पक्ष रखा। किसान संघ ने सीएम डॉ. मोहन यादव से कहा कि किसानों की सलाह और उन्हें विश्वास में लिए बिना जमीन अधिग्रहण नहीं होना चाहिए। भारतीय किसान संघ के तीन प्रांतों, प्रदेश पदाधिकारियों और अखिल भारतीय पदाधिकारियों के सामने राज्य के अधिकारियों ने मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश (संशोधन) विधेयक 2025 का प्रजेंटेशन दिया। इसके बाद किसान संघ ने सीएम के समक्ष ही इसपर सुझाव दिए। 2025 के डिफाल्टर किसानों का ब्याज भरेगी सरकार किसान संघ ने 31 मार्च तक सहकारी बैंकों का कर्ज नहीं चुकाने के कारण डिफाल्टर हुए किसानों का मुद्दा भी उठाया। इस मामले पर सीएम डॉ. मोहन यादव ने किसान संघ से कहा कि किसानों को इसकी चिंता करने की जरूरत नहीं है। ऐसे किसानों का सहकारी बैंकों का ब्याज राज्य सरकार भरेगी। मध्यप्रदेश में कुल 4523 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियां हैं। इन समितियों से किसानों को खाद, बीज व अन्य कृषि कार्यों के लिए कृषि ऋण (Cooperative Bank Loan) दिया जाता है। खास बात यह है कि यह कृषि ऋण शून्य प्रतिशत ब्याज दर वाला होता है अर्थात किसानों को बिना ब्याज के ही लोन मिलता है लेकिन किसान डिफाल्टर हो जाते हैं तो ब्याज लगने लगता है। ब्याज राशि ज्यादा होने से किसान और परेशान हो जाता है। जो किसान तय अवधि में ऋण नहीं चुकाते हैं, उनसे समितियां आधार दर के साथ दंड ब्याज वसूलती है। recent visitors 37

बीआरटीएस कॉरिडोर को तोड़कर शुद्ध लाभ के रूप में निगम को 3.37 करोड़ रुपए की कमाई होगी

 इंदौर इंदौर नगर निगम ने बीआरटीएस कॉरिडोर के संपूर्ण सर्वे का कार्य पूर्ण कर लिया है। इस सर्वे में यह स्पष्ट हो गया है कि इस कॉरिडोर को तोड़ने में कितनी लागत आएगी और मलबा एवं अन्य सामग्री की बिक्री से कितनी आय होगी। सर्वे के अनुसार, कॉरिडोर को तोड़ने में लगभग 34.70 लाख रुपए का खर्च आएगा, जबकि मलबा और अन्य सामग्री की बिक्री से निगम को लगभग 3.71 करोड़ रुपए प्राप्त होंगे। इस प्रक्रिया से शुद्ध लाभ के रूप में निगम को 3.37 करोड़ रुपए की कमाई होगी। राज्य सरकार द्वारा कॉरिडोर को हटाने का निर्णय लिया गया था, जिसे हाईकोर्ट की स्वीकृति भी मिल चुकी है। अब नगर निगम द्वारा तोड़ाई की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाएगी। कॉरिडोर तोड़ने में आएगा इतना खर्च सर्वे के मुताबिक, कॉरिडोर में आरसीसी बीम की कुल लंबाई 10475 मीटर, चौड़ाई 0.35 मीटर तथा गहराई 0.30 मीटर है, जिसका कुल घनफल 2199 घनमीटर है। इसे हटाने की लागत प्रति घनमीटर 786 रुपए के अनुसार 17.29 लाख रुपए होगी। वहीं, 18 बस शेल्टर होम की कुल लंबाई 344 घनमीटर है, जिस पर 8.20 लाख रुपए का खर्च आएगा। इसके अतिरिक्त अन्य छोटे आरसीसी निर्माण 32207 घनमीटर क्षेत्र में फैले हैं और स्क्रब्स 40105 घनमीटर में निर्मित हैं। इन निर्माणों को हटाने पर 3.25 लाख रुपए का खर्च आएगा। कॉरिडोर के दोनों ओर लगी स्टील की रैलिंग, जिनका कुल क्षेत्रफल 3.67 लाख वर्गमीटर है, इन्हें निकालने पर भी कुछ खर्च आएगा। कुल मिलाकर यह पूरा कार्य 34.70 लाख रुपए में संपन्न होगा। मलबा और सामग्री से होगी करोड़ों की कमाई नगर निगम द्वारा कराए गए आकलन के अनुसार, कॉरिडोर से लगभग 1.53 लाख किलो स्टील निकलेगा, जिसकी बिक्री से 46 लाख रुपए मिलेंगे। इसके अतिरिक्त, 10000 मीटर लंबाई की रैलिंग और 90 प्रतिशत ए-श्रेणी का स्क्रैप मटेरियल निकलेगा, जिसकी बिक्री 45 रुपए प्रति किलो की दर से की जा सकेगी और इससे 2.31 करोड़ रुपए की कमाई होगी। वहीं, बस शेल्टर होम में प्रयुक्त अतिरिक्त आइटम की बिक्री से 90 लाख रुपए की आय होगी। इस प्रकार कुल मिलाकर निगम को 3.71 करोड़ रुपए की प्राप्ति होगी। दो महीने में होगा काम पूरा, टेंडर प्रक्रिया जल्द नगर निगम जनकार्य विभाग के प्रभारी और महापौर परिषद सदस्य राजेंद्र राठौर ने जानकारी दी कि कॉरिडोर को तोड़ने में लगभग दो महीने का समय लगेगा। निगम अब जल्द ही इस कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करेगा। ठेकेदारों को यह प्रस्ताव देना होगा कि वे तोड़ाई के काम के बदले निगम को कितनी राशि देंगे। जो ठेकेदार अधिकतम राशि का ऑफर देगा, उसे यह ठेका दिया जाएगा। ठेकेदार को ही मलबा और मटेरियल भी मिलेगा। निगम को कम से कम 3.37 करोड़ रुपए प्राप्त होने की संभावना है। इस प्रक्रिया से निगम को आर्थिक लाभ के साथ शहर के विकास कार्यों के लिए भी नई राह मिलेगी। recent visitors 24

देश को मिलेगा नया मुख्य न्यायाधीश, 14 मई को CJI के रूप में लेंगे शपथ

नई दिल्ली  जस्टिस बीआर गवई देश के अगले मुख्य न्यायाधीश होंगे। वर्तमान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) संजीव खन्ना ने बुधवार (16 अप्रैल) को आधिकारिक तौर पर जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई को अपना उत्तराधिकारी बनाने की सिफारिश कर दी। CJI ने उनके नाम को मंजूरी के लिए केंद्रीय कानून मंत्रालय को भेज दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस बीआर गवई 14 मई को मुख्य न्यायाधीश के पद की शपथ लेंगे। मौजूदा चीफ जस्टिस संजीव खन्ना 13 मई को रिटायर होंगे। जस्टिस गवई भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ लेंगे। 64 वर्षीय जस्टिस खन्ना ने भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में छह महीने का कार्यकाल पूरा किया है। जस्टिस गवई के 14 मई को शपथ लेने की उम्मीद है। जस्टिस गवई का शीर्ष अदालत के जज के रूप में छह महीने का कार्यकाल होगा। परंपरा के अनुसार, वर्मतान मुख्य न्यायाधीश अपना उत्तराधिकारी नामित करते हुए केंद्रीय कानून मंत्रालय को एक प्रस्ताव भेजता है। मंत्रालय ने पहले मुख्य न्यायाधीश से उनके उत्तराधिकारी के नाम का प्रस्ताव मांगा था। जस्टिस गवई लगभग छह महीने तक भारत के मुख्य न्यायाधीश रहेंगे क्योंकि वे नवंबर में रिटायर होने वाले हैं। जस्टिस केजी बालकृष्णन के बाद वे मुख्य न्यायाधीश का पद संभालने वाले दूसरे दलित होंगे। उन्हें 2007 में देश के शीर्ष न्यायिक पद पर प्रमोट किया गया था। जस्टिस गवई का 6 महीने का कार्यकाल होगा और वह 23 नवंबर, 2025 को सेवानिवृत्त होंगे। वह मई 2019 में ही सुप्रीम कोर्ट के जज बने थे और संयोग है कि इसी महीने में शीर्ष अदालत के चीफ जस्टिस हो जाएंगे। बीते साल 11 नवंबर को सीजेआई खन्ना ने पदभार संभाला था। उन्होंने केंद्रीय कानून मंत्रालय के समक्ष जस्टिस बीआर गवई के नाम की सिफारिश भेजी है। सुप्रीम कोर्ट के जज के लिए रिटायरमेंट की उम्र 70 साल है। महाराष्ट्र के अमरावती जिले में जस्टिस बीआर गवई का जन्म 24 नवंबर, 1960 को हुआ था। वह बॉम्बे हाई कोर्ट का हिस्सा 14 नवंबर 2003 को बने थे, जब उन्हें अतिरिक्त जज की जिम्मेदारी मिली थी। इसके बाद नवंबर 2005 में ही वह हाई कोर्ट के स्थायी जज बन गए थे। जस्टिस गवई सुप्रीम कोर्ट के कई अहम फैसलों का हिस्सा रहे हैं। इसके अलावा कई संवैधानिक बेचों में उन्हें शामिल किया गया है। आर्टिकल 370 हटाए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं की जिस 5 मेंबर वाली संवैधानिक बेंच ने सुनवाई की थी, उसका एक हिस्सा जस्टिस गवई भी थे। इसके अलावा राजनीतिक फंडिंग के लिए लाई गई इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को खारिज करने वाली बेंच का भी वह हिस्सा थे। यही नहीं नोटबंदी के खिलाफ दायर अर्जियों पर सुनवाई करने वाली बेंच में भी वह शामिल थे। 24 नवंबर, 1960 को अमरावती में जन्मे गवई ने 16 मार्च, 1985 को एक वकील के रूप में नामांकन कराया। शुरुआत में उन्होंने 1987 तक दिवंगत बार राजा एस भोंसले, पूर्व महाधिवक्ता और हाई कोर्ट के जज के अधीन काम किया। फिर उन्होंने 1987 से 1990 तक बॉम्बे हाई कोर्ट में स्वतंत्र रूप से प्रेक्टिस किया। 1990 के बाद उन्होंने मुख्य रूप से बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ में संवैधानिक और प्रशासनिक कानून पर ध्यान केंद्रित करते हुए प्रेक्टिस किया। उन्होंने नागपुर नगर निगम, अमरावती नगर निगम और अमरावती यूनिवर्सिटी के लिए स्थायी वकील के रूप में कार्य किया। उन्हें 14 नवंबर, 2003 को हाई कोर्ट के अतिरिक्त जज के रूप में नियुक्त किया गया था। फिर 12 नवंबर, 2005 को बॉम्बे हाई कोर्ट के स्थायी जज के रूप में नियुक्ति की गई थी। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने मुंबई में मुख्य सीट और नागपुर, औरंगाबाद और पणजी में बेंचों में विभिन्न मामलों की अध्यक्षता की। उन्हें 24 मई, 2019 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय के जज के पद पर प्रमोट किया गया। उनकी रिटायरमेंट की तारीख 23 नवंबर, 2025 निर्धारित है। recent visitors 30

दमोह में मिशनरी मिशन अस्पताल गंभीर विवादों में, CMHO का बड़ा एक्शन, अस्पताल का लाइसेंस निलंबित

दमोह  दमोह के मिशन अस्पताल पर अब एक और एक्शन हुआ है, प्रशासन ने अस्पताल का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया है और भर्ती मरीजों को तीन दिन में शिफ्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। बता दें अस्पताल का कार्डियोलोजिस्ट डॉ एन जान केम फर्जी निकला,  कैथ लैब फर्जी पाई गई जिसे सील किया गया है, प्रबंधन से जुड़े कई लोगों पर एफआईआर भी हो चुकी है। बीते कई दिनों से देश की सुर्ख़ियों में रहने वाली इस ईसाई मिशनरी द्वारा संचालित मिशन अस्प्ताल में फर्जी डाक्टर डॉ एन जान केम उर्फ नरेंद्र विक्रमादित्य यादव द्वारा की गई हार्ट सर्जरी और उनमें सात  मौतों के आरोपों के बीच लगातार अस्पताल पर एक्शन हो रहे हैं। 31 मार्च 2025 तक थी अस्पताल की लाइसेंस अवधि इस बीच आज बड़ी कार्यवाही को अंजाम देते हुए स्वास्थ्य विभाग ने मिशन अस्पताल का लाइसेंस निलंबित कर दिया है। जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ मुकेश जैन ने बताया कि मिशन अस्प्ताल के लाइसेंस की अवधि 31 मार्च 2025 तक थी नियमानुसार अस्पताल को लाइसेंस रिन्यूवल के लिए पोर्टल पर एप्लाय करना था, मिशन अस्पताल ने एप्लाय भी किया था लेकिन उसमे कमियां पाई गई है जिस वजह से अस्प्ताल का लाइसेंस निलंबित किया गया है। तीन दिन में मरीजों को डिस्चार्ज करने का आदेश जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मुकेश जैन ने बताया कि मिशन अस्पताल के लाइसेंस की अवधि 31 मार्च 2025 तक थी। नियमानुसार अस्पताल को लाइसेंस रिन्यूवल के लिए पोर्टल पर अप्लाई करना था, मिशन अस्प्ताल ने अप्लाई भी किया था लेकिन उसमे कमियां पाई गई है, जिस वजह से अस्पताल का लाइसेंस निलंबित किया गया है। डॉ. जैन के मुताबिक अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिए गए है कि तीन दिनों के भीतर वो यहां एडमिट मरीजों को डिस्चार्ज कर दे और यदि गंभीर मरीज हैं तो उन्हें जिला अस्पताल में दाखिल कराएं। डॉ जैन के मुताबिक अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिए गए है कि तीन दिनों के भीतर वो यहां एडमिट मरीजों को या तो डिस्चार्ज कर दे और यदि गम्भीर मरीज हैं तो उन्हें जिला अस्पताल में दाखिल कराएं। गौरतलब है कि फर्जी डाक्टर डॉ एन जान केम द्वारा हार्ट सर्जरी किए जाने के बाद सात मरीजों की मौत के बाद से इस अस्पताल पर स्वास्थ्य विभाग की पैनी निगाह है।   recent visitors 25