मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- जल की हर बूंद में जीवन, हर स्रोत में भविष्य का आधार

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि “आपः सुजिरा अमृतः सुवर्चाः शंभू मयोभूः", अर्थात जल न केवल अमृतस्वरूप है, बल्कि शुभ, पवित्र और जीवनदायक भी है। उन्होंने कहा है कि जल जीवन जीने का संसाधन मात्र नहीं, अपितु हमारा सनातन संस्कार है। हमारे ग्रंथ कहते हैं कि जल की हर बूंद में जीवन है और हर स्रोत में आने वाले कल का भविष्य छिपा है। इसलिए इस अमूल्य धरोहर की किसी भी मूल्य पर रक्षा करना हमारा दायित्व है। इसी दायित्व की पूर्ति के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ संचालित किया जा रहा है। इसमें नवीन जल संग्रहण संरचनाओं के साथ-साथ पूर्व से मौजूद जल संग्रहण संरचनाओं का जीर्णोद्धार, जल स्त्रोतों और जल वितरण प्रणालियों की साफ सफाई, जल स्त्रोतों के आस-पास पौध रोपण के कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। जन-जागरुकता अभियानों के माध्यम से प्रदेश के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में इस अभियान में जन-भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। छिंदवाड़ा जिले में सक्रिय जनसहयोग छिंदवाड़ा जिले के ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में 30 मार्च से शुरू हुए कार्यों के अंतर्गत कलेक्टर श्री शीलेंद्र सिंह ने जनपद पंचायत जुन्नारदेव पहुंच कर बुधवारा गांव में तालाब के गहरीकरण हेतु ग्रामवासियों के साथ मिलकर श्रमदान किया। तालाब के जीर्णोद्धार के साथ ही इसमें जमा गाद निकालकर सफाई की जा रही है। इसी के साथ छिंदवाड़ा जिले की जन अभियान परिषद शाखा ने कन्हांन नदी तट की सफाई करते हुए जल संरक्षण की शपथ दिलाई। बुरहानपुर में जल संरक्षण के साथ पर्यावरण संतुलन का प्रयास जल गंगा संवर्धन अभियान में वन विभाग द्वारा जिले के वन क्षेत्रों में स्थित जल-स्त्रोतों की सफाई, तालाब, बावड़ियों, स्टॉप डेम का गहरीकरण और पौधारोपण का कार्य किया जा रहा है। सोलाबरडी और गढ़ताल रेंज वन क्षेत्रों समेत जिले के 67 चिन्हित जल-स्त्रोतों की सफाई और गहरीकरण का काम किया जा रहा है। वन विभाग का अमला स्थानीय नागरिकों की भागीदारी से नदी, तालाबों, बावड़ियों में जमा कचरा, सूखे पत्ते, गाद और झाड़ियां को हटा रहा है। अमरावती नदी के तटों पर भी वृहद स्तर पर सफाई अभियान जारी है। इससे मानसून के दौरान इन स्त्रोतों में पानी का भराव आसानी से हो सकेगा। जल संरचनाओं में पानी का भराव होने से वन्य जीवों और पक्षियों को भी राहत मिलेगी और भूजल स्तर बना रहने से पर्यावरण भी संतुलित रहेगा। देवास जिले में नये एवं पुराने जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के संकल्पों को साकार करने के उद्देश्य से देवास जिले में भी ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ 30 मार्च से 30 जून तक चल रहा है। कलेक्टर श्री ऋतुराज सिंह एवं जिला पंचायत के सीईओ श्री हिमांशु प्रजापति के मार्गदर्शन में नये तालाबों का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ ही पुराने तालाबों, बावड़ियों, नदियों एवं कुँओं का जीर्णोद्धार व पौधारोपण के कार्य जन-भागीदारी से किये जा रहे हैं। जिले की जनपद पंचायत खातेगांव में ग्राम पंचायत बछखाल के बोरदा गांव में तालाब का गहरीकरण किया गया है। इसी क्रम में जिला प्रशासन एवं ग्रामीणों के जनसहयोग से जिले की जनपद पंचायत देवास की ग्राम पंचायत गदाईशा पीपल्या में तालाब का गहरीकरण किया जा रहा है। इससे बारिश के दिनों में जल-संचय बढ़ेगा जिससे पेयजल एवं कृषि दोनों के लिए पानी उपलब्ध हो सकेगा।  शिवपुरी एवं शहडोल में श्री हनुमान जन्मदिवस पर सामुदायिक श्रमदान शिवपुरी जिले के विकासखंड शिवपुरी में निवर्तमान नवांकुर संस्था, ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति बूढ़ीबरोद, सेक्टर सुरवाया व ग्राम विकास समिति धुवानी के संयुक्त प्रयास से ग्राम धुवानी तालाब में श्रमदान कर मिट्टी हटाई गई और जल संरक्षण हेतु प्रेरणा दी गई। वहीं, शहडोल जिले में हनुमान जयंती के अवसर पर जिला प्रशासन एवं नगरपालिका के संयुक्त तत्वावधान में प्राचीन विराटेश्वर मंदिर परिसर में स्थित बाणगंगा कुण्ड में सफाई अभियान चलाया गया। विधायक मनीषा सिंह, कलेक्टर डॉ. केदार सिंह एवं अन्य जनप्रतिनिधियों ने इस अभियान में भाग लेते हुए जल संरक्षण की शपथ भी ली। अभियान का समग्र उद्देश्य इस अभियान के अंतर्गत नई जल संरचनाओं का निर्माण और पुरानी संरचनाओं का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। जल स्रोतों और जल वितरण प्रणालियों की सफाई के साथ-साथ उनके आस-पास पौधारोपण को प्राथमिकता दी जा रही है। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में जन-जागरुकता अभियानों के माध्यम से लोगों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा रही है। ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ का उद्देश्य न केवल जल संरचनाओं के संरक्षण एवं जीर्णोद्धार में सहायता प्रदान करना है, बल्कि सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले जल स्रोतों को पुनर्जीवित करते हुए वर्तमान एवं भविष्य की पीढ़ियों में भारत के स्वर्णिम अतीत से परिचय एवं प्रेरणा का संचार करना भी है। अभियान में मशीन, सामग्री व श्रम का समुचित नियोजन कर आमजन, स्थानीय समुदाय, जनप्रतिनिधि एवं सरकार का संयुक्त प्रयास सुनिश्चित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे इस महत्त्वपूर्ण अभियान में एकजुटता के साथ भाग लेकर जल संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं, क्योंकि “जल है तो कल है”।   recent visitors 44

आईआईए के नैटकॉन-2025 के उपलक्ष्य में वीआईटी मेों पौधरोपण, 300 पौधों के साथ बायोडायवर्सिटी पार्क ट्रांसोम की शुरुआत

भोपाल. वीआईटी भोपाल यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स (आईआईए) द्वारा आयोजित  नैटकॉन- 2025 (NATCON 2025)  के उपलक्ष्य में शनिवार को एक विशेष पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया। इस अवसर पर यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट के पास लगभग 300 पौधे लगाए गए, जिनमें औषधीय, फलदार, सजावटी और स्थानीय प्रजातियों के पेड़ शामिल थे। यह आयोजन यूनिवर्सिटी के वाइस प्रेसीडेंट श्री शंकर विश्वनाथन जी के जन्मदिन (13 अप्रैल) को समर्पित था।​ यह पहल वीआईटी के ग्रीन कैंपस और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी को दर्शाती है।​ कार्यक्रम की खास बात थी  ट्रॉंसोम (TRANSOM)  बायोडायवर्सिटी पार्क की शुरुआत, जो न केवल पर्यावरण के लिए लाभकारी होगा, बल्कि छात्रों के लिए एक खुला क्लासरूम भी बनेगा, जहां वे प्रकृति से सीख सकेंगे।​ इस कार्यक्रम में प्रो-वाइस चांसलर डॉ. टी. बी. श्रीधरन, सभी डीन, फैकल्टी, छात्र, एनएसएस स्वयंसेवक और सोशल मीडिया टीम समेत सभी ने उत्साह से भाग लिया।​ वीआईटी स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर की डीन, डॉ. शीतल शर्मा ने कहा: "यह सिर्फ पेड़ लगाना नहीं है, बल्कि एक सोच है – प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने की और अगली पीढ़ी को एक हरित भविष्य देने की। TRANSOM (ट्रॉंसोम) पार्क इसका उदाहरण बनेगा।"​ कार्यक्रम में आईआईए के सदस्य भी शामिल हुए और उन्होंने इस पहल की सराहना की।डॉ. शीतल. शर्मा ने NATCON 2025 (नैटकॉन- 2025) और आईआईए  द्वारा ग्रीन डेवलपमेंट के लिए चलाए जा रहे की भी तारीफ की। उन्होंने आर्किटेक्ट जितेन्द्र मेहता और उनकी पर्यावरणीय सोच की सराहना की, साथ ही आर्किटेक्ट अक्षय सेलुकर और उनकी टीम के योगदान का भी उल्लेख किया।​ वीआईटी प्रबंधन की पर्यावरण के प्रति जागरूक सोच और स्मार्ट विकास की भी प्रशंसा हुई। यूनिवर्सिटी लगातार हरियाली और सस्टेनेबल डेवलपमेंट की ओर बढ़ रही है।​कार्यक्रम में दुनिया भर से आए मशहूर आर्किटेक्ट्स ने भी हिस्सा लिया, जैसे:​ मरियाना कबुगुएरा (UK)​ हसन रग़ाब (USA)​ अनुपमा कुंडू (Germany)​ लॉरेंस वोंग (Foster + Partners)​ पलिंदा कन्ननगरा (Sri Lanka)​ कार्यक्रम के बाद पूरे VIT परिवार ने मिलकर वाइस प्रेसीडेंट श्री शंकर विश्वनाथन जी का जन्मदिन मनाया ।इस  अवसर पर केक काटा गया और सभी ने इस खास दिन को खुशी से सेलिब्रेट किया।​ और श्री विश्वनाथन के लंबी उम्र और स्वस्थ जीवन की कामना की। यह आयोजन पर्यावरण, शिक्षा और नेतृत्व के प्रति यूनिवर्सिटी की सोच का एक सुंदर उदाहरण बना। आईआईए नैटकॉन -2025 (IIA NATCON 2025)  के सहयोग से यह स्पष्ट हुआ कि जब वास्तुकला प्रकृति से जुड़ती है, तो वह समाज में एक सकारात्मक बदलाव लाती है। recent visitors 50

जिन लोगों को गौशालाओं से बदबू आती है, वे भारत में रहने लायक नहीं हैं, CM मोहन यादव का अखिलेश पर पलटवार

इंदौर मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव ने सपा नेता अखिलेश यादव की गौशाला को लेकर दिए गए बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को गौशालाओं से बदबू आती है, वे भारत में रहने लायक नहीं हैं। दरअसल, अखिलेश यादव ने गौशालाएं बनाने के लिए योगी सरकार की खिल्ली उड़ाई थी। कहा था कि उन्हें बदबू पसंद है, जबकि हमने परफ्यूम पार्क बनाया है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शनिवार को समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव की बदबू और गौशालाओं को जोड़ने वाली टिप्पणी पर उनकी आलोचना की। मोहन यादव ने कहा कि ऐसे लोग भारत में रहने के लायक नहीं हैं। इत्र के लिए मशहूर उत्तर प्रदेश के कन्नौज में पिछले महीने पत्रकारों से बात करते हुए उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राज्य भर में गौशालाएं बनाने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार की खिल्ली उड़ाई थी। अखिलेश ने भाजपा पर कटाक्ष करते हुए कहा था, "उन्हें बदबू पसंद है, जबकि हमने परफ्यूम पार्क बनाया है।" उनके इस बयान पर पलटवार करते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि गाय का गोबर "जीवन के अमृत" जैसा है। इसकी खाद से गेहूं के कुछ बीज हजारों डंठलों में विकसित हो जाते हैं। सपा प्रमुख का नाम लिए बिना उन्होंने कहा, "उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में पशुपालन से जुड़े परिवार का एक व्यक्ति वोटों की खातिर कह रहा है कि उसे इत्र की खुशबू पसंद है और उसे गौशाला बदबूदार लगती है। मोहन यादव ने कहा, ''मुझे यह कहते हुए खेद है कि भारत में रहने वाले किसी भी व्यक्ति को गौशाला में बदबू आती है, तो उसे इस देश में रहने का अधिकार नहीं है।" इंदौर नगर निगम की एक गौशाला के शिलान्यास समारोह में बोलते हुए मध्य प्रदेश के सीएम ने कहा कि लोग आजकल गौशाला में बच्चों के जन्मदिन मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि गौशाला से बेहतर जगह और क्या हो सकती है। उन्होंने कहा कि गाय के गोबर में कैंसर को ठीक करने की क्षमता है। गाय के गोबर और गोमूत्र से कई आयुर्वेदिक दवाएं बनाई जाती हैं। recent visitors 43

छत्तीसगढ़ : दंतेवाड़ा में नक्सल उन्मूलन के तहत चल रहे लोन वर्राटू अभियान का असर, 8 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, 2 नक्सली 50 हजार के ईनामी

दंतेवाड़ा  छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में नक्सल उन्मूलन के तहत चल रहे लोन वर्राटू अभियान का असर एक बार फिर देखने को मिला है। इस अभियान से प्रेरित होकर आठ नक्सलियों ने मुख्यधारा में लौटते हुए सरेंडर किया है। इन नक्सलियों में दो ऐसे भी शामिल हैं, जिन पर प्रशासन ने 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। एसपी ऑफिस में किया सरेंडर ये सभी नक्सली विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय थे और लंबे समय से संगठन से जुड़े हुए थे। इन्होंने दंतेवाड़ा स्थित पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर सरेंडर किया। इस दौरान पुलिस और सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सीआरपीएफ की भूमिका  इस सफलता में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की भूमिका को अहम माना जा रहा है। सुरक्षा बलों की सतत कार्रवाई, जनसंपर्क और पुनर्वास नीतियों के चलते नक्सलियों में संगठन छोड़ने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है। बता दें, सरेंडर करने वाले नक्सलियों को शासन की पुनर्वास नीति के तहत जरूरी सहायता दी जाएगी और उन्हें समाज की मुख्यधारा में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। यह कदम नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्र में शांति बहाली की दिशा में एक और सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। एनकाउंटर में 3 नक्सलियों की मौत छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और बीजापुर जिलों की सीमा पर शनिवार की सुबह सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ शुरू हुई। यह मुठभेड़ सुबह करीब 7 बजे शुरू हुई, जो रुक-रुककर अभी भी जारी है। इस दौरान तीन नक्सलियों के मारे जाने की खबर सामने आई है। हथियार के साथ आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार देगी लाखों रूपए, एलएमजी के बदले 5 लाख और एके-47 पर 4 लाख रुपये छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत-पुनर्वास नीति 2025” को लागू करना वास्तव में छत्तीसगढ़ सरकार की राज्य में शांति बहाली, विकास और सामाजिक समरसता की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का कहना है कि जो हथियार छोड़ेंगे, उन्हें भय नहीं, बल्कि सम्मान मिलेगा। वर्षों से जंगल-जंगल भटक रहे युवा, जो किसी भ्रम या दबाववश नक्सली संगठन में शामिल हो गए हैं, उनके लिए यह नीति एक नया जीवन शुरू करने का द्वार है। आत्मसमर्पण कर वे न केवल खुद का, बल्कि अपने परिवार और समाज का भविष्य भी सुरक्षित कर सकते हैं। नई नीति में हथियारों के साथ आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार ने लाखों रूपए की मुआवजा राशि देने का प्रावधान किया है। एलएमजी के साथ आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली को 5 लाख रुपये मुआवजा के तौर मिलेगा। इसी तरह एके-47/त्रिची असॉल्ट रायफल पर 4 लाख रुपये, मोर्टार पर 2.50 लाख रुपये, एसएलआर/ इंसास रायफल पर 2 लाख रुपये, एक्स 95 असाल्ट रायफल/एमपी-9 टेक्टिल पर 1.50 लाख रूपए, थ्री नाट थ्री रायफल पर 1 लाख रूपए, एक्स-कैलिबर पर 75 हजार रूपए, और यूबीजीएल अटेचमेंट पर 40 हजार रूपए, 315/12 बोर बंदुक पर 30 हजार रूपए, ग्लॉक पिस्टल पर 30 हजार रूपए के साथ ही अन्य छोटे हथियारों जैसे कार्बाइन, रिवॉल्वर, वायरलेस, डेटोनेटर आदि पर भी मुआवजा राशि का प्रावधान है। हर आत्मसमर्पणकर्ता नक्सली को, भले ही उसके पास हथियार हों या न हों, उसे 50 हजार रूपए की नगद प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। यदि कोई आत्मसमर्पित नक्सली, नक्सलियों द्वारा छिपाए गए आईईडी या विस्फोटकों की सूचना देकर उन्हें बरामद कराता है, तो उसे 15,000 से 25,000 तक की अतिरिक्त राशि दी जाएगी। बड़े हथियार डंप या विस्फोटक सामग्री की जानकारी देने पर एक लाख तक का इनाम मिलेगा। आत्मसमर्पणकर्ता यदि विवाह करने के इच्छुक हैं तो उसको एक लाख की विवाह अनुदान राशि भी दी जाएगी। यदि पति और पत्नी दोनों आत्मसमर्पित नक्सली हैं, तो उन्हें एक इकाई मानते हुए यह लाभ दिया जाएगा। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा घोषित इनामी सूची में शामिल नक्सली के आत्मसमर्पण पर उन्हें पूरी इनामी राशि नियमों के अनुसार प्रदान की जाएगी। राज्य सरकार की इस नीति के साथ-साथ भारत सरकार की पुनर्वास योजनाओं का लाभ भी आत्मसमर्पित नक्सलियों को मिलेगा। इस नीति में यह सुनिश्चित किया गया है कि उन्हें समाज में दोबारा स्थापित होने के लिए हरसंभव मदद मिले। आत्मसमर्पणकर्ता को सिर्फ प्रोत्साहन राशि, मुआवजा, ईनाम ही न मिले बल्किे उसे इसके साथ शिक्षा, पसंद के अनुसार रोजगार-व्यवसाय के लिए कौशल प्रशिक्षण, स्वरोजगार और सामाजिक सम्मान भी मिेले। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का कहना है कि हिंसा किसी समाधान का रास्ता नहीं है। हिंसा का रास्ता छोड़कर विकास की मुख्यधारा में शामिल होने वाले नक्सलियों के सुरक्षित भविष्य और स्वरोजगार के लिए हमारी सरकार हरसंभव मदद देगी।   recent visitors 44

17 जिला स्तरीय आयोगों में जल्द शुरू होगी ई-सुनवाई की सुविधा – न्यायमूर्ति गौतम चौरड़िया

 उपभोक्ताओं को न्याय दिलाने में उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के कार्य सराहनीय – अरुण साव उपभोक्ता जागरूकता सम्मेलन में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री, आयोग के द्विवार्षिक प्रतिवेदन का किया विमोचन 17 जिला स्तरीय आयोगों में जल्द शुरू होगी ई-सुनवाई की सुविधा – न्यायमूर्ति गौतम चौरड़िया उपभोक्तताओं को जागरूक करने व्यापक प्रचार-प्रसार कार्यक्रम संचालित किया जाएगा रायपुर उप मुख्यमंत्री तथा विधि एवं विधाई कार्य मंत्री अरुण साव आज छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग द्वारा आयोजित उपभोक्ता जागरूकता सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने राजधानी रायपुर के नवीन विश्राम भवन में आयोजित सम्मेलन में आयोग के द्विवार्षिक प्रतिवेदन के मुद्रित एवं ई-संस्करण का विमोचन भी किया। छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति गौतम चौरड़िया ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा और सचिव अन्बलगन पी. विशिष्ट अतिथि के रूप में सम्मेलन में शामिल हुए। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने उपभोक्ता जागरूकता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि उपभोक्ताओं को न्याय दिलाने, धोखाधड़ी व ठगी से बचाने तथा जागरूक करने में राज्य एवं जिला स्तरीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग सराहनीय कार्य कर रहा है। उपभोक्ताओं को ई-जागृति पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन सुविधाएं भी मिल रही हैं। उनकी सहूलियत के लिए आयोग ऑनलाइन सुनवाई प्रारंभ करने की भी तैयारी कर रही है। उन्होंने सम्मेलन में मौजूद विधि के छात्र-छात्राओं से अपील की कि वे उपभोक्ताओं को जागरूक करने और उन्हें उनके अधिकारों से अवगत कराने का काम करें। साव ने आयोग के कार्यों को मजबूती प्रदान करने और विस्तारित करने राज्य शासन से हर तरह का सहयोग प्रदान करने की बात कही। उन्होंने उपभोक्ता अधिकारों के प्रति नागरिकों को जागरूक करने व्यापक प्रचार-प्रसार कार्यक्रम संचालित करने की घोषणा की। छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति गौतम चौरड़िया ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य शासन की ओर से आयोग को भरपूर सहयोग मिल रहा है। हमारे सभी प्रस्तावों को सरकार ने स्वीकृत किया है। वर्तमान में राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में ई-सुनवाई की व्यवस्था है। आगामी तीन महीनों में हम इस व्यवस्था को प्रदेश के सभी 17 जिला स्तरीय आयोगों में लागू करने जा रहे हैं। उपभोक्ताओं को शीघ्र न्याय मिले, इसके लिए राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के साथ ही सभी जिला स्तरीय आयोग सक्रियता से काम कर रहे हैं। न्यायमूर्ति चौरड़िया ने कहा कि पिछले दो वर्षों में लोगों को न्याय दिलाने आयोग ने मामलों की तेजी से सुनवाई की है। दो वर्ष पहले पूरे प्रदेश में दस हजार 600 मामले लंबित थे, जो अब घटकर 6500 रह गए हैं। अगले छह महीनों में सभी लंबित प्रकरणों के निराकरण का लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि आयोग आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में भी उपभोक्ता हितों के संरक्षण के लिए केस फाइलिंग, सुनवाई और दस्तावेजीकरण के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार शुरू करने जा रहा है। उन्होंने रायपुर में ज्यादा प्रकरणों को देखते हुए आयोग की एक अतिरिक्त बेंच प्रारंभ करने की भी जानकारी दी। उपभोक्ता जागरूकता सम्मेलन को संबोधित करते हुए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा ने कहा कि राज्य व जिला स्तरीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के संचालन के लिए समुचित व्यवस्थाएं प्रदान करना राज्य शासन का दायित्व है। आयोग द्वारा संचार और सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से उपभोक्ताओं के लिए ई-फाइलिंग और ई-सुनवाई की सुविधा विकसित की जा रही है। उपभोक्ताओं के हितों के संरक्षण के लिए राज्य शासन और आयोग मिलकर काम करते रहेंगे। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सचिव अन्बलगन पी. ने अपने संबोधन में कहा कि विगत 25-30 वर्षों में बाजार में हर सामग्री की वेराइटी काफी बढ़ी है। उत्पादों और उत्पादकों की लगातार बढ़ती संख्या के बीच उपभोक्ता हितों के संरक्षण की जरूरत भी बढ़ रही है। उपभोक्ताओं को जागरूक व शिक्षित करने तथा न्याय दिलाने उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रतिबद्धता से काम कर रहे हैं। राज्य शासन और उपभोक्ता संरक्षण विभाग की पूरी कोशिश है कि सभी नागरिकों तक इसका लाभ पहुंचे। राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के सदस्य प्रमोद कुमार वर्मा, संयुक्त रजिस्ट्रार श्रीमती मोना चौहान, लेखाधिकारी सुमधुलिका यादव, रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष डाकेश्वर प्रसाद शर्मा और रायपुर जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष हितेन्द्र तिवारी सहित विभिन्न जिलों के उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यगण, न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता तथा विधि के विद्यार्थी बड़ी संख्या में सम्मेलन में शामिल हुए। recent visitors 39

’90 दिनों के भीतर बिल पर फैसला लेना जरूरी’, पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति के लिए समय सीमा तय की

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट का राज्यपाल के मामले में फैसला शुक्रवार को ऑनलाइन अपलोड हो गया है। इस फैसले में पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने निर्धारित किया है कि राष्ट्रपति को राज्यपाल की तरफ से उनके विचार के लिए आरक्षित विधेयकों पर संदर्भ प्राप्त होने की तिथि से तीन महीने की अवधि के भीतर निर्णय लेना चाहिए। शीर्ष अदालत की तरफ से तमिलनाडु के राज्यपाल आर एन रवि की तरफ से राष्ट्रपति के विचार के लिए रोके गए और आरक्षित किए गए 10 विधेयकों को मंजूरी देने और राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों पर कार्रवाई करने के लिए सभी राज्यपालों के लिए समयसीमा निर्धारित की थी। फैसला करने के चार दिन बाद, 415 पृष्ठों का निर्णय शुक्रवार को रात 10.54 बजे शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर अपलोड किया गया। देरी पर राज्य को देनी होगी जानकारी शीर्ष अदालत ने कहा कि हम गृह मंत्रालय की तरफ से निर्धारित समय-सीमा को अपनाना उचित समझते हैं… और निर्धारित करते हैं कि राष्ट्रपति को राज्यपाल की तरफ से उनके विचार के लिए आरक्षित विधेयकों पर संदर्भ प्राप्त होने की तिथि से तीन महीने की अवधि के भीतर निर्णय लेना आवश्यक है। इस अवधि से परे किसी भी देरी के मामले में, उचित कारणों को दर्ज करना होगा और संबंधित राज्य को सूचित करना होगा। राज्यों को भी सहयोगात्मक होना चाहिए और उठाए जा सकने वाले प्रश्नों के उत्तर देकर सहयोग करना चाहिए और केंद्र सरकार द्वारा दिए गए सुझावों पर शीघ्रता से विचार करना चाहिए।' अनुच्छेद 200 का किया गया जिक्र जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने 8 अप्रैल को राष्ट्रपति के विचार के लिए दूसरे चरण में 10 विधेयकों को आरक्षित करने के फैसले को अवैध और कानून की दृष्टि से त्रुटिपूर्ण करार देते हुए खारिज कर दिया। कोर्ट ने बिना किसी लाग-लपेट के कहा था कि जहां राज्यपाल किसी विधेयक को राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित रखता है और राष्ट्रपति उस पर अपनी सहमति नहीं देते हैं, तो राज्य सरकार के लिए इस न्यायालय के समक्ष ऐसी कार्रवाई करने का अधिकार खुला रहेगा। संविधान का अनुच्छेद 200 राज्यपाल को अपने समक्ष प्रस्तुत विधेयकों पर अपनी सहमति देने, सहमति नहीं देने या राष्ट्रपति के विचार के लिए उसे आरक्षित रखने का अधिकार देता है। recent visitors 45

मुख्यमंत्री साय ने अखिल भारतीय विद्युत मजदूर महासंघ के 18वें त्रैवार्षिक अधिवेशन को किया संबोधित

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के गुढ़ियारी में आयोजित अखिल भारतीय विद्युत मजदूर महासंघ के 18वें त्रैवार्षिक अधिवेशन में शामिल हुए।मुख्यमंत्री साय ने अधिवेशन में 21 राज्यों से आए श्रमवीरों का प्रभु श्रीराम के ननिहाल में स्वागत किया और उन्हें हनुमान जयंती की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि देशभर से आए श्रमवीरों ने यहाँ आकर एकता और सामंजस्य का बड़ा संदेश देने का कार्य किया है। साय ने कहा कि प्रभु श्रीराम ने 14 वर्षों के वनवास में से 10 वर्ष यहाँ बिताए, जो प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली सरकार का गठन हुआ था, तब उन्होंने श्रम राज्य मंत्री के रूप में श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए थे। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के लिए न्यूनतम पेंशन निर्धारित की गई और पीएफ की अनक्लेम राशि का उपयोग श्रमिकों के हित में किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में बिजली की महत्ता को सभी भली-भाँति समझते हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में बिजली सरप्लस है, लेकिन आने वाले समय में बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए विद्युत उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदेश में 1350 और 850 मेगावाट की दो विद्युत परियोजनाओं की सौगात दी थी। साय ने आगे बताया कि ऊर्जा के क्षेत्र में 3 लाख 50 हज़ार करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से प्रदेश में हर घर तक बिजली पहुँचाने का कार्य किया जा रहा है। इस पहल से हम हाफ बिजली से मुफ्त बिजली देने की ओर बढ़ रहे हैं और योजना के लिए राज्य सरकार ने सब्सिडी देने का बजट में प्रावधान भी किया है। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर श्रमिकों के कल्याण के लिए आजीवन समर्पित रहे दत्तोपंत ठेंगड़ी का पुण्य स्मरण करते हुए उनके योगदानों को नमन किया। इस अवसर पर अखिल भारतीय विद्युत मजदूर महासंघ के मंत्री और प्रभारी राधेश्याम जायसवाल, मधुसूदन जोशी, श्रीमती शोभा सिंहदेव सहित देशभर के 21 राज्यों से आए विद्युत श्रमिक उपस्थित थे। recent visitors 31