प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर ग्वालियर-चंबल के दौरे पर आ रहे, सेफ हाउस और पीएमओ यूनिट बनाई

 ग्वालियर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर ग्वालियर-चंबल के दौरे पर आ रहे हैं। पीएम मोदी आज शुक्रवार 11 अप्रैल को अशोकनगर जिले की ईसागढ़ तहसील स्थित आनंदपुर धाम में होने वाले कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस दौरान उनका ट्रांजिट स्टे ग्वालियर में रहेगा, जहां वे आने और जाने में दोनों बार सिर्फ 5-5 मिनट के लिए रुकेंगे। पीएम मोदी दोपहर 2 बजे ग्वालियर एयरफोर्स स्टेशन पर पहुंचेंगे और यहां से सेना के हेलिकॉप्टर से अशोकनगर के लिए रवाना होंगे। कार्यक्रम के बाद वे शाम करीब 6 बजे वापस ग्वालियर लौटेंगे और यहां से दिल्ली रवाना होंगे।   12 से शुरू होगा बैसाखी मेला दरअसल, ईसागढ़ तहसील स्थित आनंदपुर धाम में 12 अप्रैल से वार्षिक बैसाखी मेले का आयोजन शुरू हो रहा है। जिसमें देश-विदेश के श्रद्धालु शामिल होंगे और आनंद सरोवर में स्नान कर गुरु महाराज के समक्ष मत्था टेकेंगे। बैसाखी मेले की शुरुआत से पहले  आज 11 अप्रैल को पीएम नरेंद्र मोदी आनंदपुर धाम पहुंचेंगे और श्रद्धा निवेदन करेंगे। मेले की तैयारियों को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बीडी शर्मा पहले ही निरीक्षण कर चुके हैं। आनंदपुर धाम को दुल्हन की तरह सजाया गया प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए आनंदपुर धाम को विशेष रूप से सजाया गया है। मंदिर परिसर को फूलों, झालरों और रोशनी से सजाया गया है। चारों तरफ उत्सव का माहौल है, लेकिन आमजन के लिए प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित है। ट्रस्ट के एक पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि केवल कुछ चुनिंदा जिला स्तरीय पदाधिकारियों और जन प्रतिनिधियों को ही कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति दी गई है। 2700 पुलिसकर्मियों की तैनाती पीएम मोदी की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। सेना के हेलीकॉप्टरों ने बुधवार को दो बार रिहर्सल की। पीएम के मंदिर तक पहुंचने की संपूर्ण प्रक्रिया का परीक्षण किया गया। एसपीजी के वाहन पहले ही आनंदपुर पहुंच चुके हैं। भोपाल से चलकर सुरक्षा से लैस वाहन ईसागढ़ होते हुए स्थल पर पहुंचे, जिनका वीडियो दिनभर सोशल मीडिया पर वायरल होता रहा। मीडिया और आमजन को कार्यक्रम से बाहर रखा गया इस कार्यक्रम में स्थानीय मीडिया और आमजन को बाहर रखा गया है, जिससे नाराजगी भी देखी जा रही है। जिले के मीडियाकर्मियों का कहना है कि वे शासन की योजनाओं को जनता तक पहुंचाते हैं और स्थानीय नेताओं के कार्यक्रमों की नियमित कवरेज करते हैं, लेकिन इस ऐतिहासिक कार्यक्रम से उन्हें बाहर रखा जाना उनके अधिकारों का हनन है। अधिकारियों की छुट्टियां रद्द जिले के कलेक्टर ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं और उन्हें मोबाइल चालू रखने के निर्देश दिए हैं। अन्य जिलों से भी पुलिसबल मंगवाया गया है। कुल मिलाकर आनंदपुर धाम को अभेद किले में तब्दील कर दिया गया है, जहां हर कोना सुरक्षा की निगरानी में है। पीएम का स्वागत तैयारियों की कसौटी पर पीएम मोदी का यह दौरा प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती और जिम्मेदारी दोनों है। तैयारियों में कोई कमी न रहे, इसके लिए जिला प्रशासन दिन-रात एक किए हुए है। अब सभी की निगाहें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत और आनंदपुर धाम में उनके प्रवास पर टिकी हैं। नो-फ्लाइंग जोन रहेगा प्रधानमंत्री मोदी की ट्रांजिट विजिट को लेकर शहर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। ट्रांजिट विजिट के दौरान ग्वालियर में नो-फ्लाइंग जोन रहेगा। एयरफोर्स स्टेशन से तीन किलोमीटर के दायरे में किसी भी तरह की हवाई गतिविधि पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। इसके लिए जिला प्रशासन, पुलिस और एयरफोर्स के बीच बैठके भी हुई है। सेफ हाउस और पीएमओ यूनिट बनाई जा रही पीएम मोदी के लिए ग्वालियर एयरफोर्स स्टेशन पर ग्रीन रूम, सेफ हाउस और पीएमओ यूनिट तैयार की जा रही है। इन व्यवस्थाओं के लिए अधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारिया सौंप दी गई हैं। तय कार्यक्रम के अनुसार, पीएम मोदी हेलिकॉप्टर से अशोकनगर जाएंगे। लेकिन, खराब मौसम होने की स्थिति में उनके लिए सड़क मार्ग का भी विकल्प तैयार किया गया है। सुरक्षा एजेंसियों ने रूट का निरीक्षण भी किया है, जिससे आपात हालात में सड़क मार्ग का इस्तेमाल किया जा सके। पुलिस कर रही होटलों की जांच पीएम की ट्रांजिट विजिट को लेकर पुलिस पूरी तरह से अलर्ट पर है। पुलिस की टीमों ने शहर के होटलों की चेकिंग, एंट्री रजिस्टरों की जांच और बाहर से आए मेहमानों की डिटेल्स खंगालनी शुरू कर दी हैं। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और शहर के प्रवेश द्वारों पर नाकाबंदी कर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।  recent visitors 43

देश के बटवारे के वक्त पाकिस्तान से आए सिंधी लोगों को अब तक भारत की नागरिकता नहीं मिली, भोपाल-इंदौर में सबसे ज्यादा

भोपाल  देश बंटवारे के बाद पाकिस्तान से मध्यप्रदेश आए सैकड़ों सिंधी परिवारों को अब तक भारतीय नागरिकता नहीं मिली है। वे कलेक्टर कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं। पूज्य सिंधी पंचायत के अध्यक्ष मधु चंदवानी के अनुसार मप्र में करीब 3000 हजार सिंधी परिवार को नागरिकता का मामला लंबित है। इनमें भोपाल और इंदौर में संख्या ज्यादा है। नागरिकता की आस रखने वालों में सात से लेकर 25 वर्ष साल पहले भारत आए सिंधियों के मामले शामिल हैं। यह स्थिति तब है जब केंद्र सरकार ने भोपाल और इंदौर कलेक्टर को सिंधियों को नागरिकता देने का अधिकार दिया है। भोपाल के ईदगाह हिल्स, बैरागढ़ (संत हिरदाराम नगर) और टीला जमालपुरा में 500 से अधिक सिंधी, सिख समुदाय के लोग लॉन्ग टर्म वीजा पर टेंपरेरी तौर पर रह रहे हैं। ये यहां निवास तो कर रहे हैं लेकिन सभी पाकिस्तानी नागरिक हैं, जिनका परमानेंट पता सिंध प्रांत है। नहीं मिलता स्पष्ट जवाब पूज्य सिंधी पंचायत के महासचिव नंद ददलानी का कहना है कि नागरिकता संबंधी मामलों में विलंब होने पर कलेक्टर कार्यालय से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिलता। यही बताया जाता है कि प्रक्रिया जारी है। कई सालों से समाज के लोग नागरिकता(Citizenship) के इंतजार में हैं। सीएए के बाद भी प्रक्रिया में नहीं आई तेजी 2019 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) लागू होने के बाद सिंधियों को जल्द नागरिकता मिलने की उम्मीद बंधी थी। लेकिन अब तक संघर्ष जारी है। विदिशा के बासौदा के 65 वर्षीय नानिकराम माधवानी पिछले 35 वर्षों से नागरिकता के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे दर्जनों सिंधी हैं, जबकि सीएए के अनुसार जो सिंधी सात साल से भारत में रह रहा है वह नागरिकता का हकदार है। हाल के वर्षों तक आने का सिलसिला जारीः देश बंटवारे के बाद बैरागढ़ में बड़ी संख्या में सिंधी आए। राज्य के गृह विभाग के सूत्रों के अनुसार भोपाल में लगभग 150 ऐसे सिंधी परिवार हैं, जिन्हें भारत आए अभी सात साल भी पूरे नहीं हुए हैं। हर दो साल में देना पड़ता है हलफनामा पाकिस्तान से आए सिंधी परिवारों को भारतीय नागरिकता(Citizenship) देने के लिए केंद्र सरकार ने 2016 में गुजरात, राजस्थान सहित मप्र सरकार को अधिकार दिया था। बावजूद इसके वर्ष 1997-98 से 2016 तक के 118 मामले अब भी लंबित हैं। इन्हें प्रत्येक दो साल में एसपी कार्यालय में हलफनामा देना पड़ता है। कलेक्टरों का ढुलमुल रवैया मप्र विधानसभा के पूर्व प्रमुख सचिव और सिंधी समुदाय के पूर्व अध्यक्ष भगवान देव इसरानी का कहना है कि नौ साल पहले नागरिकता कानून में संशोधन होने पर राज्य सरकार ने सिंधियों को नागरिकता देने के लिए सभी जिला कलेक्टरों को आदेश दिया था। लेकिन प्रक्रिया में कोई तेजी नहीं आई। 1997 से 2018 तक ऐसे 118 मामले लंबित हैं। इसमें इंदौर और भोपाल के मामले शामिल नहीं हैं।   recent visitors 37

ओलंप‍िक में क्रिकेट की 128 साल बाद ऐत‍िहास‍िक वापसी, 1900 के बाद पहली बार क्रिकेट ओलंपिक में शामिलहोगा

मुंबई ओलंप‍िक में क्रिकेट की 128 साल बाद ऐत‍िहास‍िक वापसी (कमबैक) होने जा रही है. क्रिकेट का खेल लॉस एंजेल‍िस 2028 ओलंपिक खेलों में शामिल होगा. वहीं 1900 के पेरिस ओलंपिक के बाद यह पहली बार होगा जब क्रिकेट को ओलंपिक में शामिल किया जाह रहा है. तब यहां केवल एक ही मैच खेला गया था. इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (IOC) ने पुष्टि की है कि क्रिकेट 128 वर्षों में पहली बार ओलंपिक खेलों में वापसी करेगा, जिसमें पुरुष और महिला दोनों वर्गों में छह टीमें ह‍िस्सा लेंगे. इवेंट में कुल 90 खिलाड़ी हिस्सा लेंगे. क्रिकेट उन पांच नए खेलों में से एक है जिन्हें लॉस एंजेल‍िस ओलंपिक में शामिल किया जाएगा. इसके साथ ही इसमें स्क्वैश, फ्लैग फुटबॉल, बेसबॉल/सॉफ्टबॉल और लैक्रोस भी शामिल हैं. ओलंपिक में क्रिकेट के लिए क्वाल‍िफ‍िकेशन क्राइटेर‍िया अभी तक फाइनल नहीं हुआ है.   टेस्ट और वनडे फॉर्मेट के विपरीत, टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट लगभग 100 देशों द्वारा खेला जाता है, जिससे क्वाल‍िफ‍िकेशन प्रोसेस काफी चैलेंज‍िंग होगी. वहीं खास बात यह है कि मेजबान के रूप में अमेरिका  को टूर्नामेंट में सीधे प्रवेश मिल सकता है. लॉस एंजेलिस ओलंपिक के लिए इवेंट प्रोग्राम को आईओसी एग्जीक्यूट‍िव बोर्ड ने बुधवार (9 अप्रैल) को मंजूरी दी. 2028 के ओलंप‍िक में कुल 351 मेडल इवेंट होंगे. जो पेरिस ओलंपिक से 22 ज्यादा हैं. आईओसी ने घोषणा की कि कोर एथलीट कोटा 10,500 पर बना रहेगा, साथ ही पांच नए खेलों में 698 अतिरिक्त एथलीट आवंट‍ित होंगे. क्रिकेट ने हाल ही में मल्टी स्पोर्ट्स इवेंट में फिर से वापसी की है. बर्मिंघम में 2022 के कॉमनवेल्थ गेम्स में महिला क्रिकेट को पहली बार शामिल किया गया. जहां ऑस्ट्रेलिया ने गोल्ड और भारत ने स‍िल्वर मेडल जीता. हांगझोऊ में आयोजित 2023 एश‍ियन गेम्स में 14 पुरुष टीमों और 9 महिला टीमों ने भाग लिया, जिसमें भारत ने दोनों कैटगरी में गोल्ड मेडल जीता था. 2021 में शुरू हुआ था प्रोसेस लॉस एंजिल्स खेलों में क्रिकेट को शामिल करने का प्रोसेस  अगस्त 2021 में शुरू हुआ.  तब इंटरनेशनल क्रिकेट काउंस‍िल (ICC) ने औपचारिक रूप से इसे शामिल करने के लिए कैंपेन चलाया था. इसके परिणामस्वरूप ICC और LA28 ऑर्गनाइज‍िंग कमेटी के बीच एक कोलैबरेशन एफर्ट हुआ, जो अक्टूबर 2023 में खत्म हुआ. तब क्रिकेट को आधिकारिक तौर पर पांच नए खेलों में से एक के रूप में प्रस्तावित किया गया था. आईसीसी के चेयरमैन जय शाह पहले से ही ब्रिस्बेन 2032 सहित भविष्य के ओलंपिक गेम्स में क्रिकेट की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए दीर्घकालिक रणनीति पर काम कर रहे हैं. पूर्व बीसीसीआई सच‍िव ने 2028 में क्रिकेट को ओलंपिक मंच पर लाने के अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. कब हुआ था ओलंप‍िक में क्रिकेट केवल एक बार 1900 के पेरिस ओलंपिक में शामिल हुआ था. तब ग्रेट ब्रिटेन और फ्रांस की टीमों ने इसमें हिस्सा लिया था. ग्रेट ब्रिटेन गोल्ड और फ्रांस स‍िल्वर मेडल जीतने में कामयाब रहा थी. तब ग्रेट ब्रिटेन और फ्रांस के बीच उस ओलंपिक में क्रिकेट का सिर्फ एक मैच खेला गया था और इसी को फाइनल का र‍िजल्ट घोष‍ित किया गया था.   recent visitors 50

प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान जन भागीदारी से निंरतर जारी, जन भागीदारी से चल रहे हैं पानी सहेजने के कार्य

भोपाल प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान जन भागीदारी से निंरतर जारी है। समाज का प्रत्येक तबका इस कार्य में स्वयं को जोड़ रहा है। प्रशासनिक अमला भी समान रूप से इस अभियान में शामिल हो रहा है। जन सहयोग से चौपड़ा की सफाई की गई अशोकनगर जिले के ईसागढ़ विकासखंड में माता देवकानी मंदिर के पास चौपड़ा जन भागीदारी से सफाई अभियान में ग्रामीणों ने भागीदारी की। स्थानीय लोगों द्वारा बताया गया कि चौपड़ा प्राचीन जल स्त्रोत रहा है। पहले यह जल स्त्रोत पानी से भरा रहता था। साथ-सफाई के अभाव में अब यह सूखता जा रहा है। जन अभियान परिषद के कार्यकर्ताओं ने ग्रामीणों को शामिल कर चौपड़ा की साफ-सफाई कराई और शपथ दिलाकर भविष्य में भी इसे संरक्षित करने की शपथ दिलाई गई। अशोकनगर जिले में नवांकुर संस्था द्वारा दीवार लेखन से जन सामान्य को जल संरक्षण का महत्व बताया जा रहा है। सरदारपुर में माही नदी सहित पुराने जल स्त्रोतों का होगा जल संरक्षण धार जिले के सरदारपुर नगर में एक प्रेरणादायी पहली की शुरूआत हुई। जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत पुरानी उपेक्षित जल स्त्रोतों को पुनर्जीवित करने का बीड़ा प्रशासन और आम नागरिकों ने उठाया है। माही नदी के तट पर अभियान की विधिवत शुरूआत हुई विभिन्न संस्थाओं के स्वयं सेवक श्रमदान कर घाट क्षेत्र की सफाई कर रहे हैं। माही नदी के पास ऐतिहासिक कुआं, शनिदेव मंदिर के पीछे आम के बागीचे में स्थित 3 पुराने कुए, ताल कटोरा मैदान का ब्रिटिश कालीन कुआं और प्राचीन बावड़ी के सफाई कार्य को भी इसके शामिल किया गया है। सरदारपुर की ब्रांड एम्बेसडर डॉ. शीरीन कुरैशी ने नगरवासियों को जल संरक्षण की शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि इस पवित्र अभियान को जन आंदोलन का रूप देना है। प्रसिद्ध कथा वाचक पं. प्रदीप मिश्रा एवं विधायक श्री राय ने किया श्रमदान सीहोर शहर में सीवन उत्थान समिति के आहवान पर प्रसिद्ध कथावाचक पं. प्रदीप मिश्रा, विधायक श्री सुदेश राय सहित अनेक जन-प्रतिनिधियों एवं नागरिकों ने जल गंगा संवर्धन अभियान में सीवन नदी में श्रमदान किया। श्रमदान के दौरान पं. प्रदीप मिश्रा ने कहा कि नदी का गहरीकरण एक सराहनीय पहल है। सीहोर विधायक श्री सुदेश राय ने कहा कि हम सबका प्रयास होना चाहिए कि सीवन नदी में साल भर पानी का बहाव रहे। उन्होंने कहा कि सीवन नदी के सौंदर्यीकरण के लिये हरसंभव प्रयास किये जायेंगे। उन्होंने राय परिवार की ओर से इस अभियान के लिये 10 लाख रूपये देने की भी घोषणा की। बोदरी नदी में जल गंगा संरक्षण अभियान छिंदवाड़ा शहर की प्रमुख नदी बोदरी है। बोदरी नदी के तट के ग्राम मटकुली में जन भागीदारी से सफाई का कार्य शुरू किया गया। सफाई कार्य में जुड़े कार्यकर्ताओं को जल स्त्रोतों के संरक्षण की शपथ दिलाई गई। 200 वर्ष पुरानी बावड़ी पर श्रमदान शाजापुर में सुन्दरसी की 200 वर्ष पुरानी बावड़ी पर श्रमदान कर सफाई की गई। श्रमदान में शामिल कार्यकर्ताओं को शपथ दिलाई गई कि हम से अपने क्षेत्र के आस-पास जल स्त्रोतों की सफाई और संरक्षण का कार्य निस्वार्थ भावना से करेंगे। श्रमदान के दौरान यह तय किया गया कि‍इस अभियान में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी विशेष रूप से महिलाओं की भागीदारी को भी सुनिश्चित किया जायेगा।   recent visitors 47

मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ में सहभागिता कर जल संरक्षण के प्रति जनजागरूकता का संदेश दिया

भोपाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास व श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने गुरुवार को गुना जिले की ग्राम पंचायत पुरैनी अंतर्गत ग्राम कंजा में स्थित कूनो नदी के उद्गम स्थल पर ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ में सहभागिता कर जल संरक्षण के प्रति जनजागरूकता का संदेश दिया। इस अवसर पर बालिकाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश धारण कर यात्रा निकाली। मंत्री श्री पटेल ने सभी बालिकाओं का तिलक कर उनके चरण स्पर्श किए। इसके बाद उन्होंने कूनो नदी के उद्गम स्थल पर पहुंचकर ग्रामीणों से संवाद करते हुए इस स्थान के ऐतिहासिक महत्व की जानकारी ली। उद्गम स्थल पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कलश पूजन एवं भूमि-पूजन किया गया। आवन गुरुकुल के आचार्य एवं छात्रों ने मंत्रोच्चार किया। कार्यक्रम में गुना विधायक श्री पन्नालाल शाक्य सहित जनप्रतिनिधिगण एवं अधिकारी उपस्थित रहे। पौधरोपण के लिए समर्पित दृष्टिकोण रखें मंत्री श्री पटेल ने कहा कि नदियां सदियों से समाज की जल आवश्यकताओं को पूरा करती आ रही हैं। उन्होंने पौधरोपण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमें ऐसे पौधे लगाने चाहिए जो भू-जल स्तर बनाए रखने में सहायक हों। उन्होंने पौधरोपण के लिए तीन प्रमुख बातों पर बल दिया। उपयुक्त स्थान का चयन पौधों की तार फेंसिंग द्वारा सुरक्षा एवं पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करना। मंत्री श्री पटेल ने कलेक्टर श्री कन्याल को कहा कि, ऐसी शासकीय भूमि का चयन किया जाए जहाँ पौधे सुरक्षित रूप से पनप सकें और एक दिन विशाल वृक्ष बन सकें। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस कार्य के लिये आवश्यक सभी सहयोग उनकी ओर से उपलब्ध कराया जाएगा। महिला स्व-सहायता समूहों की प्रदर्शनी को मिला प्रोत्साहन मंत्री श्री पटेल ने मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों एवं स्थानीय नागरिकों द्वारा उत्पादों की खरीदारी की गई, जिससे समूहों को आर्थिक प्रोत्साहन प्राप्त हुआ। कार्यक्रम के अंत में जनपद पंचायत के फायर फाइटर टैंकर की कार्यक्षमता का प्रदर्शन और उपयोगिता बताई गई।   recent visitors 51

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में अटल जी का देश के कायाकल्प का स्वप्न हो रहा है साकार: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरूवार को धार जिले के बदनावर के ग्राम खेड़ा में आयोजित कार्यक्रम में 5800 करोड़ रूपए की लागत वाली 10 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं एवं संबद्ध अधोसंरचना निर्माण कार्यों का भूमि-पूजन एवं लोकार्पण किया। केन्द्रीय मंत्री श्री गडकरी ने कहा कि मध्यप्रदेश में डबल इंजन की सरकार है। यहां तेजी से विकास हो रहा है। सबको सुखी, समृद्ध और सशक्त बनाने का विजन लेकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव बड़ी तेजी से प्रदेश को विकास के पथ पर आगे ले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजमार्ग सिर्फ एक मार्ग नहीं, यह जन-जन का जीवन बदलने वाले प्रगति पथ होते हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में पिछले 10 सालों में हम देश की अधोसंरचना में व्यापक बदलाव लेकर आए हैं। देश को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाना है, इसमें मध्यप्रदेश की भागीदारी भी होगी। म.प्र. में विकास की ललक दिखाई देती है, इसलिए हम इसे देश के विकास का सबसे बड़ा अंशभागी राज्य बनायेंगे। केन्द्रीय मंत्री श्री गडकरी ने घोषणा करते हुए कहा कि अगले तीन साल में हम मध्यप्रदेश में उपलब्ध राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क को अमेरिका से अच्छा और सुंदर बनायेंगे। उन्होंने कहा कि अगले एक साल में हम देश में तीन लाख करोड़ रूपए से अधिक के राष्ट्रीय राजमार्ग व अन्य अधोसंरचना निर्माण कार्य पूरे करेंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी देश-प्रदेश के विकास के लिए 4 प्रमुख संसाधनों जल, ऊर्जा, परिवहन और अधोसंरचनात्मक विकास की जरूरत होती है और उन्हें खुशी है कि मध्यप्रदेश इन चारों संसाधनों के विकास पर तेजी से बढ़ रहा है। केन्द्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मांग पर की 6 नई परियोजनाएं मंजूर केन्द्रीय मंत्री श्री गडकरी ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मांग पर मंच से ही केन्द्रीय सड़क निधि से 12 हजार करोड़ रूपए लागत से 400 कि.मी. लंबाई 6 नई राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के निर्माण एवं विकास कार्यों को मंजूरी दी। केन्द्रीय मंत्री ने मध्यप्रदेश में 33 हजार करोड़ रूपए की लागत से एनएचएआई द्वारा निर्मित किए जाने वाले 5 नए ग्रीनफील्ड इकॉनामिक कॉरिडोर निर्माण कार्य, रिंग रोड, एलिवेटेड कॉरीडोर, सेतु एवं अन्य निर्माण कार्यों को भी मंजूरी देते हुए इन निर्माण कार्यों के पूर्ण होने की समय-सीमा भी घोषित की। राजमार्ग होते हैं हैप्पीनेस लाने वाले हाइवे केन्द्रीय मंत्री श्री गडकरी ने कहा कि सड़क परियोजनाओं के पूरा होने पर क्षेत्र का विकास होगा। युवाओं को रोजगारमिलेगा, गरीबी दूर होगी। किसानों की फसल को अच्छा दाम मिलेगा। रोड कनेक्टिविटी बढ़ेगी और लोगों के जीवन में खुशहाली आएगी। उन्होंने कहा कि राजमार्ग हैप्पीनेस लाने वाले हाई-वे होते हैं। हम मध्यप्रदेश के गांव-गांव को सड़कों से जोड़ेंगे, ताकि यहां सबको शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य उपचार और विकास का लाभ मिले। सभी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं से सिंहस्थ-2028 के सफल आयोजन में मिलेगी भरपूर मदद : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश में अमृतकाल चल रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने देश का कायाकल्प करने का जो स्वप्न देखा था, प्रधानमंत्री श्री मोदी अटल जी के उसी स्वप्न को साकार करने की दिशा में अनथक गति से अग्रसर हैं। उन्होंने कहा कि इसी अमृतकाल में हमारा देश, विश्व का सबसे अच्छा देश बनकर उभरेगा। सड़कें विकास का सहज पैमाना होती है। इसलिए गांव-गांव तक रोड कनेक्टिविटी बढ़ाकर हम मध्यप्रदेश की जनता की जिन्दगी में बदलाव लाने की दिशा में तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम रोड कनेक्टिविटी बढ़ाकर गांव के साथ-साथ शहरों को भी स्मार्ट सिटी बनाने के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने कहा कि इंदौर और भोपाल जल्द ही मेट्रोपॉलिटिन सिटी बनेंगे। ग्रामीण हो या शहरी सभी को इसका लाभ मिलेगा। उन्होंने केन्द्रीय मंत्री श्री गडकरी द्वारा मुक्त हृदय से मध्यप्रदेश को 5800 करोड़ रूपए लागत की 10 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की सौगात देने के लिए आभार जताते हुए कहा कि श्री गडकरी देश के राजमार्ग विकास पुरूष हैं। उनके नेतृत्व में देश में तेजी से अधोसंरचनात्मक विकास हो रहा है। उन्होंने कहा कि मालवा अंचल को सीधे तौर पर लाभान्वित करने वाली इन सभी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं से सरकार को सिंहस्थ-2028 के सफल आयोजन में भरपूर मदद मिलेगी। ज्योर्तिलिंग महाकालेश्वर, सोमनाथ और ओंकारेश्वर को जोड़ेंगे एक सूत्र में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम विरासत से विकास की ओर बढ़ रहे हैं। अपनी विरासतों को समृद्ध कर लोगों को जोड़ रहे हैं। केन्द्र सरकार की मदद से हम श्री महाकालेश्वर ज्योर्तिलिंग को केन्द्र में रखकर इसे गुजरात स्थित सोमनाथ ज्योर्तिलिंग और ओंकारेश्वर से एक सूत्र में जोड़ेंगे। इसके लिए हमने केन्द्र सरकार से मांग की है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार केन्द्र सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ेगी, जिससे विकासरूपी अमृत का सर्वाधिक लाभ मध्यप्रदेश को मिले। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केन्द्रीय मंत्री से मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों का नेटवर्क और बढ़ाने की मांग करते हुए अपना विस्तृत मांग पत्र उनके समक्ष रखा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमने जो भी मांगा, केन्द्रीय मंत्री श्री गडकरी ने हमें समय-समय पर वो सब दिया, पर हम यही नहीं रूकेंगे। प्रदेश के हित में हम नई राष्ट्रीय परियोजनाओं के लिए सतत् मांग करेंगे। सिंहस्थ : 2028 के बेहतर आयोजन और श्रद्धालुओं के सहज और सुगम आवागमन के लिए मध्यप्रदेश में एक स्ट्रांग रोड नेटवर्क की स्थापना के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहेंगे। इन सड़क परियोजनाओं का हुआ भूमि-पूजन और लोकार्पण केन्द्रीय मंत्री श्री गडकरी और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन-बदनावर खंड पर नवनिर्मित 4 लेन सड़क, उज्जैन-गरोठ के खेड़ा खजुरिया से सुहागड़ी तक 4/6 लेन ग्रीनफील्ड हाई-वे, उज्जैन-गरोठ के सुहागड़ी से बर्डिया अमरा तक 4/6 लेन ग्रीनफील्ड हाई-वे, जीरापुर-सुसनेर-मध्यप्रदेश एवं राजस्थान बॉर्डर खंड पर पेव्ड शोल्डर के साथ 2 लेन सड़क और बाकानेर घाट पर पेव्ड शोल्डर के साथ अतिरिक्त 3 लेन सड़क का भी लोकार्पण किया। इसी प्रकार संदलपुर-नसरुल्लागंज खंड पर 4-लेन सड़क, चंदेरी-पिछोर खंड पर पेव्ड शोल्डर के साथ 2 लेन सड़क, इंदौर-गुजरात खंड पर 7 फ्लाई ओवर एवं अंडरपास, शाजापुर, कनासिया एवं एमआईडीसी इंडस्ट्रियल एरिया में 3 फ्लाई ओवर, अंडरपास तथा रसलपुर जंक्शन पर फ्लाई ओवर के कार्यों का भूमि-पूजन किया। भव्य आयोजन के लिये हार्दिक आभार : केन्द्रीय राज्यमंत्री श्रीमती ठाकुर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री … Read more

छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव सरकार नक्सली संगठन से बातचीत के लिए तैयार

रायपुर  छत्तीसगढ़ में एक महत्वपूर्ण गतिविधि में एक ओर प्रतिबंधित नक्सली संगठन ने एक बार फिर राज्य सरकार के सामने शांति वार्ता का प्रस्ताव रखा है वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी नीत सरकार ने सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार नक्सलियों से बातचीत के लिए तैयार है। नक्सलियों के उत्तर-पश्चिम सब जोनल ब्यूरो के प्रभारी ‘रुपेश’ की ओर से जारी प्रेस नोट पर गुरुवार को अपने निवास कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रतिक्रिया देते हुए राज्य के उपमुख्यमंत्री, जिनके पास गृह विभाग का भी प्रभार है, विजय शर्मा ने कहा कि सरकार नक्सलियों से बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने कहा,“सरकार के पास नक्सलियों के पुनर्वास के लिए एक स्पष्ट और प्रभावी नीति है। साथ ही उन्होंने नक्सलियों से अपील की कि वे हथियार छोड़कर सामने आएं और बातचीत का रास्ता अपनाएं।” बातचीत करना चाहते हो तो मुख्यधारा में आओ डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि मैं सभी नक्सलियों से कहना चाहता हूं कि वे बंदूक छोड़ें। मैं उनसे बात करने के लिए तैयार हूं। बंदूक का जवाब बंदूक से होता है। अगर आप चर्चा चाहते हैं तो मुख्यधारा में आना होगा। आप लोग अवैध गतिविधियों में शामिल हैं और भारत के संविधान को नहीं मान रहे हैं। यह भारत है, यहां लोकतंत्र है…। डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि देश के गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलियों से मुख्यधारा में लौटने की अपील की है। सरकार की नई पॉलिसी के तहत यदि कोई नक्सली सरेंडर करता है तब भी उस पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। यदि कोई व्यक्ति सरेंडर करना चाहता है तो हम तैयार हैं। हम छोटे-बड़े सभी समूहों के साथ चर्चा करने के लिए तैयार हैं। इससे पहले भी रखी थी शांति वार्ता की बात बता दें कि इससे पहले नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी ने पर्चा जारी किया था। उन्होंने शांति वार्ता की अपील करते हुए कहा था कि पिछले 15 महीनों में उनके 400 साथी एनकाउंटर मारे गए हैं। अगर नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन रुकती है, तो हम शांतिवार्ता के लिए तैयार हैं। इस पर गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा था कि वे शांतिवार्ता को तैयार हैं, लेकिन इसके लिए कोई शर्त न हो। सिर्फ सरेंडर करें और बातचीत करें। केंद्रीय कमेटी का पर्चा पहले तेलगू में आया था और अब उत्तर-पश्चिम सब जोनल ब्यूरो के प्रभारी रूपेश का पत्र सामने आया है, जिसमें शांति और सीजफायर की बात कही गई है।  शर्मा ने कहा, “अगर कोई एक व्यक्ति भी बातचीत के लिए तैयार है तो सरकार भी तैयार है। चाहे वह छोटा समूह हो या बड़ा, सरकार हर स्तर पर चर्चा के लिए तत्पर है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में की जा रही है। शर्मा ने यह भी कहा कि बंदूक के जवाब में केवल चर्चा नहीं की जा सकती, जरूरत पड़ने पर सरकार कड़ी कार्रवाई भी करेगी। उन्होंने नक्सल संगठन की ओर से आया पत्र ‘सही और प्रामाणिक’ बताते हुए कहा कि इसमें सरकार से बातचीत की अपील की गई है। नक्सल संगठन ने इस नोट में स्पष्ट किया है कि वे पुलिस जवानों को अपना दुश्मन नहीं मानते और बार-बार पोस्टरों एवं पर्चों के माध्यम से इसी संदेश को दोहराया है। प्रेस नोट में नक्सलियों ने कहा है, “हमें समझना होगा कि आपसी संघर्ष की स्थिति बनाई गई है। हम जनता और अपने कैडर को ही अपना मानते हैं, उन पर गोली न चलाई जाए। शांति वार्ता के हमारे प्रयास का समर्थन करें।”श्री शर्मा ने कहा कि इस प्रस्ताव पर सरकार का मानना है कि शांति वार्ता के जरिए नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थायित्व और विकास को बढ़ावा दिया जा सकता है। गौरतलब है कि केंद्र व छत्तीसगढ़ सरकार के 31 मार्च तक नक्सल समस्या को समाप्त किए जाने के प्रयासों से माओवादियों ने एक बार फिर से शांति का प्रस्ताव सरकार के सामने रखा है। प्रतिबंधित नक्सली संगठन भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) उत्तर-पश्चिम सब जोनल ब्यूरो की ओर से रूपेश ने आठ अप्रैल की तारीख में सरकार से शांति वार्ता के लिए एक सशर्त प्रेस नोट जारी किया है। इस प्रेस नोट में नक्सली संगठन ने साफतौर पर लिखा है कि हम सरकार से शांति वार्ता के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए अनुकूल वातावरण पहले बनना चाहिए। इस प्रेस नोट में कहा गया है कि शांति वार्ता के लिए सुरक्षा बलों की कार्रवाई रुकनी चाहिए। वार्ता एकपक्षीय न होकर दोनों तरफ से होनी चाहिए। नक्सलियों ने ये रखा प्रस्ताव बता दें, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) उत्तर-पश्चिम सब जोनल ब्यूरो की ओर से प्रस्ताव जारी किया गया था. बयान में शांति वार्ता के लिए तैयार होने की बात कहते हुए इसके लिए अनुकूल माहौल बनाए जाने की जरूरत बताई है. उन्होंने इस पेशकश का मुख्य उद्देश्य बस्तर में हो रहे हिंसा (हत्याकांड) तुरंत रोकना बताया है. पहले भी रखा था प्रस्ताव वहीं, सप्ताह भर पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के छत्तीसगढ़ दौरे से पहले भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) केंद्रीय समिति की ओर से तेलगु में जारी बयान के जरिए शांति वार्ता का प्रस्ताव दिया गया था. इसके बाद अब भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) उत्तर-पश्चिम सब जोनल ब्यूरो की ओर हिन्दी में शांति वार्ता का प्रस्ताव दिया गया है. कहा कि वार्ता के लिए अनुकूल माहौल बनाने की मांग को गृह मंत्री विजय शर्मा ने ठुकरा दिया था. इससे जाहिर है कि सरकार अपनी वर्तमान नीति को जारी रखना चाहती है. इसके साथ ही सरकार की आत्मसमर्पण की नीति को समस्या के पूर्ण समाधान बताए जाने का भी विरोध किया गया है. माओवादियों ने कहा कि शांति वार्ता की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने संबंधित निर्णय लेने के लिए हमें कुछ नेतृत्वकारी साथियों से मिलना है. स्थानीय नेतृत्व का राय लेना भी जरूरी है. लगातार चल रहे अभियानों के बीच में यह सब नहीं हो पाएगा. ऐसे में अनुकूल माहौल के लिए कगार अभियान को रोकना जरूरी है, वार्ता का प्रक्रिया को अंजाम तक पहुंचाने के लिए अनुकूल माहौल बनाना जरूरी है, यह सरकार की जिम्मेदारी है. अब सरकार ने दिया जवाब इस पर गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सलियों ने शांति … Read more