कृषि क्षेत्र में बड़ा राहत: विष्णु सरकार ने किसानों के खाते में ट्रांसफर किए 1061 करोड़, दूर होंगे कष्ट

राजनांदगांव छतीसगढ़ की साय सरकार ने राजनांदगांव जिले के किसानों को बड़ा सौगात दी है। साय सरकार ने किसानों के खाते में 1061 करोड़ डाल दिए हैं। राजनांदगांव जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का यह सीजन किसानों के लिए आर्थिक राहत बनकर सामने आया है। इस बार धान विक्रय के बाद किसानों के खातों में 1061 करोड़ रुपए से अधिक की राशि पहुंची है। इससे न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिली है, बल्कि स्थानीय बाजारों में भी बहार लौटने का संकेत है एक लाख से ज्यादा किसानों ने बेचा धान जिला सहकारी बैंक के अनुसार इस खरीफ सीजन में जिले के 1 लाख 24 हजार 95 किसानों ने धान खरीदी केंद्रों में अपनी फसल बेची। केंद्र सरकार से घोषित 2369 रुपए प्रति क्विंटल की दर से किसानों को कुल 1483 करोड़ 51 लाख रुपए का भुगतान किया गया। धान बिक्री की कुल राशि में से 42245.15 लाख रुपये की कटौती लिंकिंग के तहत की गई थी। कटौती के बाद किसानों के खातों में 1061 करोड़ की राशि जमा हुई। किसानों के खातों में राशि  पहुंच गई और अब बाजारों में भी रौनक लौट सकती है। ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा जैसे क्षेत्रों से जुड़े व्यापारियों व्यापार में लाभ होने की उम्मीद है। व्यापारियों का कहना है कि धान खरीदी के बाद बाजार में उछाल आता है, इसका बाजार में असर भी दिखने लगा है। विवाह से जुड़े सामग्री की बिक्री शुरू हो गई है तो वहीं ट्रैक्टर सहित मोटर साइकिल, कार की बुकिंग हो रही है।  लिहाजा साय सरकार की सौगात से किसानों की स्थिति में सुधार आएगा ।  recent visitors 30

कैबिनेट मीटिंग में अहम निर्णय: एंटी नार्कोटिक्स टीम से लेकर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनियों तक बड़े बदलाव

रायपुर   मुख्यमंत्री विष्णदेव साय की अध्यक्षता में बुधवार 4 फरवरी को मंत्रिमंडल की बैठक की गई. कैबिनेट सदस्यों के बीच कई विषयों पर चर्चा हुई, जिसके बाद अहम मुद्दों पर मुहर लगाई गई. इस बैठक में नशे पर शिकंजा कसने 10 जिलों में एंटी नार्कोटिक्स टीम के गठन किए जाने का फैसला लिया गया है. साथ ही पुलिस मुख्यालय के विशेष शाखा स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) का गठन होगा, जिसके लिए 44 नए पद स्वीकृत किए गए हैं. साय कैबिनेट की बैठक में लिए गए कई महत्वपूर्ण निर्णय 1. मादक पदार्थाें की रोकथाम की दिशा में बड़ा निर्णय लेते हुए मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश के 10 जिलों में जिला स्तरीय एन्टी नारकोटिक्स टॉस्क फोर्स के गठन हेतु वित्तीय वर्ष 2025-26 के मुख्य बजट में प्रावधानित 100 नवीन पदों की स्वीकृति प्रदान की गई. इसमें रायपुर, महासमुंद, बिलासपुर, दुर्ग, बस्तर, सरगुजा, कबीरधाम, जशपुर, राजनांदगांव एवं कोरबा जिला शामिल हैं. 2. मंत्रिपरिषद की बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के मुख्य बजट में पुलिस मुख्यालय के विशेष शाखा अंतर्गत एस.ओ.जी. (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) के गठन के लिए प्रावधानित 44 नवीन पदों की स्वीकृति प्रदान की गई है. एसओजी का काम किसी भी बड़ी या अचानक हुई घटना में तुरंत मौके पर पहुँचकर हालात को संभालना और आतंकी हमला या गंभीर खतरे को जल्दी खत्म करना होता है. एसओजी एक खास तरह की प्रशिक्षित टीम होती है, जिसे ऐसे खतरनाक कामों के लिए तैयार किया जाता है. 3. मंत्रिपरिषद द्वारा राज्य के विभिन्न एयरपोर्ट एवं हवाई पट्टियों में उड़ान प्रशिक्षण संगठन (एफटीओ) की स्थापना का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया तथा इसके संचालन के दिशा-निर्देशों का अनुमोदन किया गया. जिसके तहत छत्तीसगढ़ में पायलट प्रशिक्षण की सुविधा के लिए राज्य में उड़ान प्रशिक्षण संगठन की स्थापना की जाएगी. विमानन क्षेत्र में बढ़ती मांग को देखते हुए और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए यह संस्थान उपयोगी होगा. इससे एयरक्राफ्ट रिसाइकिलिंग, हेलीकॉप्टर बंकिंग तथा एयरो स्पोर्ट्स जैसी सुविधाएं विकसित होगी. फ्लाइट ट्रेनिग ऑर्गनाइजेशन की स्थापना निजी सहभागिता से किया जाएगा. 4. मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ नवाचार एवं स्टार्टअप प्रोत्साहन नीति 2025-26 का अनुमोदन किया गया. इस नीति से स्टार्टअप ईको सिस्टम के साथ-साथ इन्क्यूबेटर्स एवं अन्य हितधारकों का विकास होगा. छत्तीसगढ़ को देश में एक प्रमुख नवाचार केन्द्र के रूप में विकसित किया जा सकेगा. भारत सरकार के उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग द्वारा जारी स्टेट्स स्टार्टअप रैंकिंग में सुधार होने से राज्य में निवेश का आकर्षण बढ़ेगा. 5. मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल और रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा बनाई गई और पूरी हो चुकी 35 आवासीय कॉलोनियों को नगर निगम और नगर पालिकाओं को सौंपने का निर्णय लिया गया है. इन कॉलोनियों में खुले भू-खंड, उद्यान और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं शामिल होंगी. हालांकि, आवासीय, व्यावसायिक और अर्द्धसार्वजनिक बिक्री योग्य संपत्तियां इसमें शामिल नहीं होंगी. अभी इन कॉलोनियों का हस्तांतरण नहीं होने के कारण वहां रहने वाले लोगों को कई मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं. कॉलोनियों के रखरखाव के लिए निवासियों को दोहरा खर्च उठाना पड़ रहा है. एक ओर वे नगर निगम को संपत्ति कर दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गृह निर्माण मंडल को भी रखरखाव शुल्क देना पड़ता है. इन कॉलोनियों के हस्तांतरण से नगरीय निकायों द्वारा यहां पानी, बिजली, सड़क, सफाई जैसी सुविधाएं दी जा सकेंगी और कॉलोनीवासियों को अतिरिक्त रखरखाव शुल्क से राहत मिलेगी. 6. मंत्रिपरिषद द्वारा नवा रायपुर अटल नगर में शासकीय विभागों तथा निगम मंडल के कार्यालयों के लिए नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण द्वारा एक वृहद बहुमंजिला भवन बनाने का निर्णय लिया गया है और यहां विभागों को स्पेस आबंटित किया जाएगा, ताकि भूमि का पूर्ण उपयोग किया जा सके. 7. मंत्रिपरिषद द्वारा सिरपुर एवं अरपा क्षेत्र में सुनियोजित विकास और विकास कार्यों को गति देने के लिए संबंधित क्षेत्र में शासकीय भूमि के आबंटन का अधिकार संबंधित जिले के कलेक्टर को प्रदान किया गया है. गौरतलब है कि सिरपुर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण एवं अरपा विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण का उद्देश्य संबंधित नदी तटीय क्षेत्रों का योजनाबद्ध और समग्र विकास करना है. इसके लिए मास्टर प्लान के क्रियान्वयन, भूमि नियोजन एवं नगर विकास योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाना आवश्यक है. विकास कार्यों को गति देने के लिए शासकीय भूमि का आबंटन जरूरी था. वर्तमान में दोनों प्राधिकरणों की वित्तीय स्थिति को देखते हुए शासकीय भूमि का आबंटन रु. 1/- प्रीमियम एवं भू-भाटक पर किए जाने का निर्णय लिया गया है. साथ ही, भूमि आबंटन के अधिकार संबंधित जिला कलेक्टरों को दिया गया है. 8. मंत्रिपरिषद ने ‘‘छत्तीसगढ़ क्लाउड फर्स्ट नीति‘‘ को प्रदेश में लागू किए जाने की स्वीकृति प्रदान की है. छत्तीसगढ़ क्लाउड फर्स्ट नीति का प्रस्ताव छत्तीसगढ़ शासन के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा प्रस्तुत किया गया. छत्तीसगढ़ क्लाउड फर्स्ट नीति के अनुसार राज्य शासन के सभी विभाग, उपक्रम एवं स्वायत्त संस्थाएं केवल भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा अनुमोदित क्लाउड सेवा प्रदाताओं या भारत में स्थित सुरक्षित डेटा सेंटर एवं डिजास्टर रिकवरी सेंटर से ही क्लाउड सेवाएं लेंगी. किसी विशेष या असाधारण आवश्यकता के लिए राज्य क्लाउड परिषद से अनुमति लेना अनिवार्य होगा. नीति के तहत कम प्राथमिकता वाले एप्लिकेशन एवं आर्काइव डेटा का क्लाउड माइग्रेशन वर्ष 2027-28 तक तथा उच्च प्राथमिकता सेवाओं का माइग्रेशन 2029-30 तक किया जाएगा. सभी नए एप्लिकेशन क्लाउड-नेटिव तकनीक पर विकसित किए जाएंगे. कैबिनेट ने इस नीति में भविष्य में आवश्यक संशोधन करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग को अधिकृत किया है. इस नीति से आईटी ढांचे में लागत में कमी, संचालन में दक्षता, बेहतर साइबर सुरक्षा, आपदा के समय सेवाओं की निरंतरता तथा नागरिक सेवाओं की 24×7 उपलब्धता सुनिश्चित होगी. साथ ही नागरिकों के डेटा की सुरक्षा, पारदर्शिता और ट्रैकिंग व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी. 9. मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य में डिजिटल अवसंरचना को विस्तार देने के लिए मोबाइल टावर योजना का अनुमोदन किया गया है. भौगोलिक विषमता और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में मोबाइल कनेक्टिविटी सीमित होने से शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन बाधित हो रहा है. इस योजना से मोबाइल टावर स्थापना हेतु चयनित सेवा प्रदाताओं को अनुमति और प्रशासनिक स्वीकृतियों की प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध किया जाएगा. मोबाइल टावर योजना के अंतर्गत चयनित मोबाइल नेटवर्क विहीन बसाहटों … Read more

लंबित देयों का मानवीय व न्यायसंगत समाधान सुनिश्चित करें: मुख्यमंत्री

लंबित आवास मामलों के निस्तारण हेतु ‘एकमुश्त समाधान योजना’ लागू करें: मुख्यमंत्री सभी पात्र आवंटियों तक ओटीएस योजना की जानकारी पहुंचे, मुख्यमंत्री ने व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए लंबित देयों का मानवीय व न्यायसंगत समाधान सुनिश्चित करें: मुख्यमंत्री डिफॉल्टर मामलों के निस्तारण में गति लाएं, प्रक्रिया को पूरी तरह यूजर-फ्रेंडली बनाएं: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को आवास एवं शहरी नियोजन विभाग की बैठक में लंबित आवासीय और व्यावसायिक आवंटनों के त्वरित निस्तारण के लिए एक नई ‘एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस-2026)’ लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्षों से लंबित देयों और विवादित मामलों के कारण न केवल योजनाओं की प्रगति प्रभावित होती है, बल्कि आम नागरिकों को भी अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है। सरकार का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था लागू करना है, जिसमें समाधान तेज, पारदर्शी और सभी के लिए व्यावहारिक हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की किसी भी योजना में लंबित भुगतान या विवादित आवंटन राज्य की विकास गति को धीमा करते हैं। इसलिए आवास विभाग को ऐसी समाधान-प्रधान व्यवस्था लागू करनी चाहिए, जिससे विभाग को आवश्यक राजस्व प्राप्त हो और आवंटियों को भी राहत मिले। उन्होंने कहा कि यह योजना जन-केंद्रित होनी चाहिए, जिसमें हर वास्तविक आवंटी को स्पष्ट और सरल विकल्प उपलब्ध हों। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2020 में लागू की गई ओटीएस-2020 योजना से बड़ी संख्या में मामलों का निस्तारण हुआ था, लेकिन कोविड-19 के कारण कई आवंटी अंतिम भुगतान नहीं कर पाए। विभाग द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों में प्रदेश के विभिन्न आवासीय और व्यावसायिक परिसरों में मौजूद ऐसे सभी डिफॉल्ट मामलों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ओटीएस-2026 योजना को अधिक व्यावहारिक और लाभकारी स्वरूप दिया जाए। एकमुश्त भुगतान करने वाले आवंटियों को देयों पर उपयुक्त छूट दी जाए। साथ ही, किस्तों में भुगतान की सुविधा हो। उन्होंने कहा कि योजना के प्रावधानों को अंतिम रूप देते समय यह ध्यान रहे कि योजना के मूल में आम आदमी को राहत देने का ही भाव निहित हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि विभाग द्वारा प्रत्येक आवेदन का निस्तारण निर्धारित समयसीमा में कर दिया जाए।  मुख्यमंत्री ने कहा कि नई योजना लागू होने से हजारों आवंटियों को राहत मिलेगी और विभाग को राजस्व भी प्राप्त होगा।  मुख्यमंत्री ने विभाग को निर्देश दिया कि योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार की विशेष व्यवस्था की जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग इससे अवगत हो सकें। उन्होंने कहा, 'एकमुश्त समाधान योजना' के बारे में आम जनता के बीच सक्रिय रूप से जानकारी पहुंचाई जाए, ताकि सभी पात्र लोग इसका लाभ प्राप्त कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि योजना की संपूर्ण प्रक्रिया ऑनलाइन, पारदर्शी और उपयोगकर्ता-अनुकूल होनी चाहिए। recent visitors 32

उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी होगी परीक्षा से जुड़ी सभी जानकारी व निर्देश

उत्तर प्रदेश पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा की तारीख घोषित, 8 से 10 जून तक होगी लिखित परीक्षा प्रदेश में कुल 32,679 पदों के लिए तीन दिन होगी लिखित परीक्षा, दो पालियों में होगा आयोजन उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी होगी परीक्षा से जुड़ी सभी जानकारी व निर्देश लखनऊ  उत्तर प्रदेश पुलिस में बतौर सिपाही भर्ती होने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर है। योगी सरकार ने आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती-2025 के तहत होने वाली लिखित परीक्षा की तारीखें घोषित कर दी हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड (UPPBPB) की ओर से मंगलवार को जारी सूचना के अनुसार सिपाही भर्ती-2025 की लिखित परीक्षा 8 जून (सोमवार), 9 जून (मंगलवार) और 10 जून (बुधवार) को आयोजित की जाएगी। यह परीक्षा तीनों दिनों में दो-दो पालियों में कराई जाएगी। इस भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से कुल 32,679 पदों को भरा जाएगा। सिपाही भर्ती परीक्षा से संबंधित अन्य जानकारी, परीक्षा केंद्र, एडमिट कार्ड एवं दिशा-निर्देश उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे। अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत बना योगी सरकार का फैसला उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश में पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं को योगी आदित्यनाथ सरकार ने वर्तमान सिपाही भर्ती प्रक्रिया में बड़ी राहत दी है। अभ्यर्थियों के हितों को प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर पुलिस में आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर प्रस्तावित सीधी भर्ती-2025 के लिए अधिकतम आयु सीमा में एकमुश्त तीन वर्ष का शिथिलीकरण प्रदान किया गया है। सरकार द्वारा यह निर्णय उत्तर प्रदेश लोक सेवा (भर्ती के लिए आयु सीमा का शिथिलीकरण) नियमावली-1992 के नियम-3 के आलोक में लिया गया। यह फैसला 31 दिसंबर 2025 को जारी भर्ती विज्ञप्ति के अनुक्रम में 5 जनवरी 2026 को जारी शासनादेश के माध्यम से लागू किया गया, जिससे बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थियों को अवसर मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ जो आयु सीमा के कारण अब तक भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो रहे थे। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा वर्ष 2024 में प्रदेश में कांस्टेबल के कुल 60,244 पदों पर भर्तियां की गई थीं। यह प्रदेश सरकार की अब तक की सबसे बड़ी भर्ती थी। भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत चयनित सभी पदों में से 20 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए आरक्षित रखते हुए उन्हें नियुक्ति प्रदान की गई है। recent visitors 32

RCB के लिए बड़ी घोषणा: बिक्री प्रक्रिया शुरू, डियाजियो की ओर से वैल्यूएशन और दस्तावेज़ प्रस्तुत

बेंगलुरु रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की बिक्री से जुड़ी चर्चाएं अब अटकलों से आगे बढ़कर अमल के चरण में पहुंच चुकी हैं। टीम के मालिक डायजियो ने आधिकारिक तौर पर RCB को बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और संभावित खरीदारों को सूचना दस्तावेज भेजे जा चुके हैं। यह अब तक का सबसे स्पष्ट संकेत है कि IPL की सबसे कीमती फ्रेंचाइज़ियों में से एक बाजार में उपलब्ध है। इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी स्पोर्टिको ने दी है, जो खेल कारोबार से जुड़ा प्रतिष्ठित जर्नल है। प्रक्रिया से जुड़े एक सूत्र के अनुसार, डायजियो ने अपनी भारतीय इकाई यूनाइटेड स्पिरिट्स के जरिए RCB से संबंधित दस्तावेज संभावित निवेशकों को भेजे हैं। भले ही बाध्यकारी बोली की समयसीमा तय होने में अभी वक्त लगे, लेकिन यह साफ हो गया है कि पिछले साल के अंत में शुरू की गई समीक्षा अब सक्रिय बिक्री प्रक्रिया में बदल चुकी है। यहां यह समझना जरूरी है कि जिन दस्तावेजों को भेजा गया है, उन्हें कंफिडेंशियल इंफॉर्मेशन मेमोरेंडम कहा जाता है। यह किसी भी कंपनी या संपत्ति को बेचने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला मुख्य दस्तावेज होता है, जिसमें 30 से 150 पन्नों तक की विस्तृत जानकारी शामिल रहती है, ताकि खरीदार व्यवसाय का सही मूल्यांकन कर सकें और शुरुआती प्रस्ताव दे सकें। रिपोर्ट्स के मुताबिक, IPL 2025 का खिताब जीतने और जबरदस्त व्यावसायिक मजबूती के बाद RCB की वैल्यूएशन करीब दो अरब डॉलर आंकी जा रही है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 18 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा बैठती है। RCB के साथ विराट कोहली जुड़े हैं, जिन्हें भारत का सबसे बड़ा और सबसे प्रभावशाली क्रिकेट ब्रांड माना जाता है। यूनाइटेड स्पिरिट्स ने इस सौदे के लिए सिटीग्रुप को अपना सलाहकार नियुक्त किया है। इस डील में प्राइवेट इक्विटी फर्मों, बड़े निवेशकों और हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स की रुचि दिखने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि पूरी प्रक्रिया मार्च के अंत तक पूरी हो सकती है। IPL 2026 का सीजन 26 मार्च से शुरू होना है और डायजियो की कोशिश है कि उससे पहले भारत में अपनी सबसे बड़ी संपत्ति की बिक्री पूरी कर ली जाए। RCB की बिक्री में सेलिब्रिटी और बड़े निवेशकों की दिलचस्पी RCB की संभावित बिक्री ने देश के कई बड़े नामों का ध्यान खींचा है। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला ने पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा था कि वह फ्रेंचाइज़ी के लिए एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी बोली लगाएंगे। हालांकि, अब तक यह साफ नहीं है कि उन्होंने औपचारिक प्रस्ताव दिया है या नहीं। इसके अलावा बॉलीवुड अभिनेता अनुष्का शर्मा और रणबीर कपूर के नाम भी निवेशकों के समूह से जुड़ी चर्चाओं में सामने आए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, अनुष्का शर्मा करीब तीन प्रतिशत हिस्सेदारी में रुचि दिखा रही हैं, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 400 करोड़ रुपये बताई जा रही है। वहीं रणबीर कपूर की दिलचस्पी करीब दो प्रतिशत हिस्सेदारी को लेकर है। यह दोनों निवेश ब्रांड से जुड़ाव की रणनीति के अनुरूप माने जा रहे हैं। रणबीर कपूर पहले ही ISL क्लब मुंबई सिटी एफसी में निवेशक रह चुके हैं। हालांकि, यहां हितों के टकराव का सवाल भी उठता है। वर्ष 2007 में बीसीसीआई ने खिलाड़ियों को किसी भी IPL टीम में हिस्सेदारी खरीदने से रोक दिया था। विराट कोहली RCB की पहचान माने जाते हैं, ऐसे में उनके लिए सीधे तौर पर मालिकाना हक लेना संभव नहीं हो सकता। लेकिन इस स्थिति में उनकी पत्नी के जरिए निवेश का रास्ता खुल सकता है। अगर ये रिपोर्ट्स सही साबित होती हैं, तो कोहली परिवार के लिए कुछ कानूनी और तकनीकी प्रक्रियाएं अपनाई जा सकती हैं। डायजियो RCB क्यों बेच रहा है और खरीदार क्या सोच रहे हैं अब सवाल उठता है कि डायजियो आखिर RCB को क्यों बेच रहा है। इसकी वजह व्यावसायिक प्राथमिकताएं बताई जा रही हैं। यूनाइटेड स्पिरिट्स ने नवंबर में सेबी को जानकारी दी थी कि RCB को एक नॉन-कोर एसेट के रूप में देखा जा रहा है, जो कंपनी के अल्कोहल और बेवरेज कारोबार से अलग है। इसके अलावा, पिछले साल बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में RCB की खिताबी जीत के जश्न के दौरान मची भगदड़ ने भी कंपनी को चिंता में डाल दिया था। इस घटना में कई लोगों की मौत हुई थी, जिससे डायजियो को अपनी छवि को नुकसान पहुंचने और संभावित कानूनी परेशानियों का अंदेशा हुआ। इन्हीं कारणों को देखते हुए कंपनी अब RCB से बाहर निकलने का रास्ता तलाश रही है। recent visitors 41

एमपी का सफर प्रभावित, घने कोहरे से विजिबिलिटी कम, 12+ ट्रेनें लेट और शाजापुर में हादसे में जान गई

भोपाल  मध्य प्रदेश में ओले और बारिश का दौर थमने के बाद बुधवार सुबह घने कोहरे ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया। ग्वालियर में दृश्यता 50 मीटर से भी कम दर्ज की गई। कोहरे के कारण दिल्ली से भोपाल, इंदौर और उज्जैन आने वाली एक दर्जन से ज्यादा ट्रेनें देरी से चल रही है।  बुधवार सुबह ग्वालियर के अलावा दतिया, रीवा, रतलाम, उज्जैन, दमोह, नौगांव, सीधी, भोपाल, इंदौर, राजगढ़, खजुराहो, गुना, छिंदवाड़ा, जबलपुर, मंडला, सागर, टीकमगढ़, मलाजखंड, शाजापुर, छतरपुर, विदिशा, आगर-मालवा, सीहोर, भिंड और मुरैना समेत कई जिलों में मध्यम से घने कोहरे का असर देखने को मिला। कुछ इलाकों में विजिबिलिटी बेहद कम होने से सड़क और रेल यातायात प्रभावित हुआ। राजगढ़ सबसे ठंडा, न्यूनतम तापमान 8.8 डिग्री सेल्सियस कोहरे के कारण शाजापुर जिले के अकोदिया-शुजालपुर स्टेट हाईवे पर कार और बाइक की भिड़ंत हो गई, जिसमें एक युवक की मौत हो गई। वहीं विदिशा में सुबह हल्की बूंदाबांदी भी दर्ज की गई। उत्तरी मध्य प्रदेश में कोहरे के साथ सर्द हवाएं चल रही हैं, हालांकि रात के तापमान में ज्यादा गिरावट नहीं आई है। प्रदेश में राजगढ़ सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 8.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल और इंदौर में न्यूनतम तापमान 14 डिग्री, ग्वालियर में 13.1, उज्जैन में 14 और जबलपुर में 14.8 डिग्री सेल्सियस रहा। अन्य जिलों में पारा 10 से 16 डिग्री के बीच दर्ज किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार ग्वालियर में विजिबिलिटी 50 मीटर से भी कम, दतिया और रीवा में 50 से 200 मीटर, जबकि भोपाल, इंदौर और राजगढ़ में एक किलोमीटर से ज्यादा रही। रेल यातायात पर पड़े असर के चलते पंजाब मेल 3 घंटे, शताब्दी एक्सप्रेस करीब 3 घंटे, कर्नाटक एक्सप्रेस 4 घंटे से अधिक और मालवा एक्सप्रेस 8 घंटे 15 मिनट की देरी से चल रही है। recent visitors 30

बलूचिस्तान संकट: बवाल के बावजूद US और चीन क्यों बने हुए हैं गवाह?

बलूचिस्तान बलोचों के मुस्लिम भर होने से कलात (बलूचिस्तान) को पाकिस्तान का हिस्सा नहीं बन जाना चाहिए… 27 मार्च 1948 को जब पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना ने बलूचिस्तान को जबरन कब्जाया तो इसका काफी विरोध हुआ. जिन्ना अपनी ही बातों से मुकर गए. जिस जिन्ना ने बलूचिस्तान को स्वायत्त रहने देने की सलाह दी थी, उन्होंने ही जबरन आजाद बलूचिस्तान को पाकिस्तान में मिला लिया.  पाकिस्तानी इतिहासकार याकूब खान बंगाश अपनी किताब, 'अ प्रिंसली अफेयर' में लिखते हैं, 'आजाद रहने के प्रतिरोध को पाकिस्तान की सरकार ने कुचल दिया और बलपूर्वक कलात को अपने में मिला लिया.' पाकिस्तान जब आजाद हुआ तब कलात को अलग स्वायत्त प्रदेश की मान्यता मिली थी. 11 अगस्त 1947 को कलात और मुस्लिम लीग के बीच हुए समझौते में बलूचिस्तान एक अलग देश बना लेकिन उसकी सुरक्षा पाकिस्तान के जिम्मे दी गई. 12 अगस्त को बलूचिस्तान के शासक मीर अहमद खान ने अपनी रियासत को एक आजाद देश घोषित किया. लेकिन बलूचिस्तान की आजादी महज 227 दिनों की मेहमान थी.  27 मार्च 1948 को मीर अहमद खान से पाकिस्तान में विलय के पत्र पर हस्ताक्षर कराए गए. उसी दिन से बलूचिस्तान में हिंसा और टकराव का सिलसिला शुरू हुआ, जो आज भी थमा नहीं है. बीएलए के हमलों से दहल उठा पाकिस्तान बीते शुक्रवार रात को बलूचिस्तान की आजादी के लिए लड़ रहे हथियारबंद समूह बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने प्रांत के करीब एक दर्जन ठिकानों को सिलसिलेवार तरीके से निशाना बनाया. हमले अगले दिन भी जारी रहे और एक के बाद एक हुए इन धमाकों से पाकिस्तान दहल उठा. करीब 200 बीएलए लड़ाके, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, ने छोटे-छोटे समूहों में बंटकर एक साथ आत्मघाती धमाके और गोलीबारी की. पुलिस थानों, लोगों के घरों और सेना से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया. बीएलए का दावा है कि उसके हमलों में 200 से अधिक पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं. लेकिन पाकिस्तान की तरफ से कहा जा रहा है कि हमले में 17 सैनिक और 31 नागरिक मरे हैं.  पाकिस्तानी सेना की जवाबी कार्रवाई में विद्रोही लड़ाकों को भारी नुकसान पहुंचा है. सेना की कार्रवाई में 177 बीएलए लड़ाके मारे गए हैं.  पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हमले पर बोलते हुए सोमवार को कहा कि बलूचिस्तान में बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती जरूरी है. पाकिस्तान की संसद में खड़े होकर आसिफ ने कहा, 'भौगोलिक रूप से बलूचिस्तान पाकिस्तान के 40 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है. इसे कंट्रोल करना किसी घनी आबादी वाले शहर से कहीं ज्यादा मुश्किल है. ऐसी जगह को कंट्रोल करने के लिए भारी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की जरूरत होती है. हमारे सैनिक वहां तैनात हैं और आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं, लेकिन इतने बड़े इलाके की निगरानी और वहां पेट्रोलिंग करना बेहद चुनौती भरा है.' ये वही बलूचिस्तान है जिसके कीमती पत्थर देख ट्रंप की आंखों में आ गई चमक पिछले साल सितंबर में पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ अमेरिका पहुंचे थे. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में दोनों से मुलाकात की. इस दौरान मुनीर ने शहबाज शरीफ की मौजूदगी में ट्रंप के सामने एक ब्रीफकेस खोला… ब्रीफकेस खुलते ही बिजनेसमैन राष्ट्रपति ट्रंप की आंखें चमक उठीं. अंदर चमकते कीमती पत्थरों और खनिजों का एक सेट था. मुनीर का यह गिफ्ट ट्रंप को पाकिस्तान की ताजा पेशकश का हिस्सा था. मतलब साफ था कि पाकिस्तान अपने खनिज संसाधनों को अमेरिकी निवेश के लिए खोलने को तैयार है. पाकिस्तान के खनिज संसाधन यानी बलूचिस्तान के खनिज संसाधन. गैस, सोने, तांबे की खान है बलूचिस्तान बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर प्रांत है. पाकिस्तान की कुल जमीन का करीब 44 प्रतिशत हिस्सा बलूचिस्तान है जहां पाकिस्तान के गैस, कोयला, सोना, तांबा का अधिकांश रिजर्व है. बलूचिस्तान में कीमती पत्थरों की भी भरमार है और पाकिस्तान के कुल कीमती पत्थरों का 90% हिस्सा यही से निकाला जाता है. यहां के संगमरमर काफी मशहूर है जो हाई क्वालिटी के होते हैं. जियारत व्हाइट, ब्लैक एंड गोल्ड मार्बल यहां की पहचान हैं. बलूचिस्तान में रेयर अर्थ मिनरल्स के भी बड़े भंडार हैं. पाकिस्तान के कुल खनिज संसाधनों का 75% हिस्सा बलूचिस्तान से निकाला जाता है. लेकिन इन संसाधनों से होने वाली आय का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान की सरकार के पास जाता है. बलूचिस्तान का ईरान और अफगानिस्तान एंगल बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है बावजूद इसके, यहां की आबादी काफी कम है. पाकिस्तान की 25 करोड़ आबादी का केवल छह फीसद हिस्सा यहां रहता है. बलूचिस्तान में बलूच जनजाति की बहुलता है जो यहां के स्थानीय निवासी हैं. कुछ संख्या में पश्तून भी बलूचिस्तान में रहते हैं.  बलूचिस्तान क्षेत्र तीन देशों के बीच बंटा है जिसमें पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत, ईरान का सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत और अफगानिस्तान के निमरुज, हेलमंद और कांधार शामिल हैं. दोनों देशों से लगती बलूचिस्तान की सीमाएं हमेशा से अस्थिर रही हैं. ईरान और पाकिस्तान के बीच यूं तो भाईचारे वाला संबंध रहा है लेकिन दोनों देश एक-दूसरे पर बलूच विद्रोहियों को लेकर आरोप लगाते रहे हैं. ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान में स्थित विद्रोही समूहों को लेकर पाकिस्तान और बलूचिस्तान स्थित समूहों को लेकर ईरान एक-दूसरे पर दोष मढ़ते रहते हैं. इसी लड़ाई को लेकर 16 जनवरी 2024 को ईरान ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे. ईरान का दावा था कि उसने बलोच सुन्नी मिलिटेंट समूह जैश अल-अदल के ठिकानों को निशाना बनाया क्योंकि वो ईरान पर हमले कर रहा है.  जवाब में पाकिस्तान ने भी ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान में रॉकेट और मिसाइलों से हमले किए. पाकिस्तान ने दावा किया कि ये हमले उसने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) के ईरान स्थित ठिकानों पर किए हैं. इन हमलों से दोनों देशों में भारी तनाव देखा गया था. अफगानिस्तान से लगती बलूचिस्तान की सीमा भी लंबे समय से अस्थिर बनी हुई है.  पाकिस्तान लगातार अफगानिस्तान के तालिबान शासन पर आरोप लगाता रहा है कि वो इन सीमाओं से आतंकियों की आवाजाही रोकने में नाकाम रहा है. बलूचिस्तान में अशांति को लेकर पाकिस्तान कभी अफगानिस्तान तो कभी भारत पर बेबुनियाद आरोप लगाता है लेकिन वो … Read more