भारी ओलावृष्टि से ग्वालियर में तबाही: 4 इंच बर्फ जमी, फसलों को भारी नुकसान

ग्वालियर.  पश्चिमी विक्षोभ के असर के चलते ग्वालियर जिले में मंगलवार सुबह वर्षा और भारी ओलावृष्टि हुई। प्रकृति का यह प्रकोप भितरवार-चीनोर क्षेत्र के गांव कछौआ, बड़की सराय, जुझारपुर, भोरी, ररुआ, चीनोर, आंतरी, करहिया और सिकरौदा समेत 12 से अधिक गांवों में देखा गया। जहां पर भीषण ओलावृष्टि हुई। ओलावृष्टि की तीव्रता इतनी अधिक थी कि खेतों में फसलों के ऊपर चार-चार इंच तक बर्फ जम गई। बर्फ की चादर से ढका कश्मीर जैसा नजारा मंजर ऐसा था कि दूर-दूर तक फैली हरियाली गायब हो गई और पूरा इलाका बर्फ की चादर से ढका कश्मीर जैसा नजर आने लगा। किसानों के मुताबिक गेहूं, सरसों व चना आदि फसलों में 70 से 90 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। ओलावृष्टि की सूचना मिलते ही प्रशासन की टीमें फसलों में हुए नुकसान का सर्वे करने के लिए मौके पर पहुंची। कुछ गांवों में कलेक्टर रुचिका चौहान भी नुकसान को देखने के लिए पहुंची। मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक आगामी 24 घंटों में गरज चमक के साथ वर्षा व ओलावृष्टि की संभावना अभी बनी हुई है। साथ ही कोहरा भी रहेगा। आसमानी बिजली से किसान की मौत शिवपुरी में आसमानी बिजली की चपेट में आने से एक किसान की मौत भी हो गई। कई खेतों में तो नुकसान का आकलन 70 से 90 प्रतिशत तक बताया जा रहा है। ओलावृष्टि की सूचना के बाद कलेक्टर रुचिका चौहान ने बड़की सराय व सिकरौदा गांव में पहुंचकर ओलावृष्टि से प्रभावित क्षेत्र निरीक्षण किया और किसानों से बात की। शिवपुरी में बिजली गिरने से किसान झुलसा शिवपुरी के सिलानगर निवासी वीर सिंह पुत्र रामप्रसाद आदिवासी उम्र 25 साल गांव में बटाई से खेती करता है। रात में खेत पर फसल की रखवाली के लिए रुका था। इसी दौरान तेज आंधी, वर्षा आदि से बचने के लिए वह खेत में बनी झोंपड़ी के अंदर जाकर सो गया। इसी दौरान आसमानी बिजली झोपड़ी गिरी, जिससे झोंपड़ी में आग लग गई। किसान झोपड़ी में लगी आग की चपेट में आ गया, जिससे उसकी जलने के कारण मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने पोस्टमॉर्टम करवाकर मर्ग कायम कर लिया है।   recent visitors 42

एमएसएमई, डिफेंस, फार्मा और टेक सेक्टर में निवेश के लिए खुलेगी राह

लखनऊ  भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में संपन्न हुई आर्थिक साझेदारी और अमेरिकी टैरिफ में की गई कटौती ने उत्तर प्रदेश की औद्योगिक और आर्थिक संभावनाओं को नई दिशा दे दी है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लागू टैरिफ को पहले के लगभग 50 प्रतिशत स्तर से घटाकर औसतन 18 प्रतिशत कर दिया है। यह निर्णय भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे भारत की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णायक और दृढ़ नेतृत्व का परिणाम है, जिसमें भारत ने अपनी नीतियों पर अडिग रहते हुए वैश्विक शक्तियों के साथ समानता के आधार पर संवाद किया। वैश्विक भरोसे की कसौटी पर खरा उतरा भारत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फार्मा कॉन्क्लेव में स्पष्ट शब्दों में कहा कि 2014 से पहले जिस भारत को गंभीरता से नहीं लिया जाता था, आज वही भारत अपनी नीतियों पर दृढ़ रहते हुए वैश्विक शक्तियों को भी संवाद और सहयोग के लिए विवश कर रहा है। भारत अब अपनी शर्तों पर आगे बढ़ रहा है। अमेरिकी टैरिफ में की गई यह कटौती इसी बदले हुए वैश्विक दृष्टिकोण का प्रमाण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब भारतीय निर्यातकों पर लगने वाला अतिरिक्त ‘पेनल्टी टैरिफ’ हट चुका है और केवल रेसिप्रोकल टैक्स स्ट्रक्चर लागू है, जिससे भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में पहले से कहीं अधिक प्रतिस्पर्धी बन गए हैं। एमएसएमई और ओडीओपी सेक्टर को मिलेगा सीधा और दीर्घकालिक लाभ अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए जाने वाले आयात शुल्क में की गई कटौती का व्यापक और प्रत्यक्ष असर उत्तर प्रदेश के एमएसएमई और ओडीओपी सेक्टर पर पड़ने वाला है। भदोही के हस्तनिर्मित कालीन, मुरादाबाद के पीतल व धातु उत्पाद, आगरा का चमड़ा उद्योग, वाराणसी की रेशमी साड़ियां और कन्नौज का पारंपरिक इत्र अब अमेरिकी बाजार में पहले की तुलना में कम लागत और बेहतर लाभांश के साथ पहुंच सकेगा। अब तक ऊंचे टैरिफ के कारण ये उत्पाद कीमत के मामले में चीन, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों से पिछड़ जाते थे, लेकिन शुल्क में कमी के बाद उत्तर प्रदेश के पारंपरिक उद्योग वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती से खड़े हो सकेंगे।  आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल निर्यात ऑर्डर बढ़ेंगे, बल्कि सीधे निर्यात को भी प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे बिचौलियों पर निर्भरता घटेगी और कारीगरों को उनकी मेहनत का सही मूल्य मिलेगा। इसका सकारात्मक असर रोजगार पर भी दिखाई देगा। उत्पादन बढ़ने से बुनकरों, शिल्पकारों, कारीगरों और छोटे उद्योगों में काम करने वाले लाखों लोगों को नियमित रोजगार मिलेगा, वहीं नई यूनिट्स की स्थापना से स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी।  डिफेंस कॉरिडोर में तकनीक का होगा प्रवेश भारत-अमेरिका के बीच टैरिफ में कटौती और व्यापारिक रिश्तों में आई मजबूती का प्रभाव अब रणनीतिक क्षेत्रों तक भी महसूस किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब दो देश व्यापार और निवेश के मोर्चे पर एक-दूसरे के प्रति भरोसा जताते हैं, तो उसका स्वाभाविक विस्तार रक्षा और उन्नत तकनीक जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी होता है। इसी क्रम में भारत-अमेरिका के बीच बढ़ते सहयोग का सकारात्मक असर उत्तर प्रदेश के डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर पर भी दिख सकता है। झांसी, कानपुर, लखनऊ, अलीगढ़ और आगरा जैसे रणनीतिक नोड्स अब केवल असेंबली यूनिट्स तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि यहां टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, संयुक्त उपक्रमों और उच्चस्तरीय अनुसंधान के माध्यम से उन्नत रक्षा उपकरणों के निर्माण की संभावनाएं आकार ले रही हैं।  जानकारों के अनुसार, अमेरिकी रक्षा कंपनियों के साथ संभावित सहयोग से ड्रोन सिस्टम, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, संचार एवं राडार सिस्टम तथा अत्याधुनिक कंपोनेंट्स का निर्माण प्रदेश में ही संभव हो सकता है। टैरिफ में कटौती से बने अनुकूल निवेश माहौल और भारत की नीतिगत स्थिरता ने विदेशी कंपनियों का भरोसा बढ़ाया है, जिसका लाभ रक्षा क्षेत्र को भी मिलने की संभावना जताई जा रही है। इससे न केवल आयात पर निर्भरता घटेगी, बल्कि रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की भूमिका राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सशक्त होगी।  इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ प्रदेश के युवाओं को मिलने वाला है। उन्नत मैन्युफैक्चरिंग और रक्षा तकनीक से जुड़े प्रोजेक्ट्स के कारण इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में उच्च कौशल आधारित रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही एमएसएमई सेक्टर को भी रक्षा आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ने का अवसर मिलेगा, जिससे स्थानीय उद्योगों को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी। आईटी, जीसीसी और डेटा सेंटर सेक्टर को मिलेगी गति भारत-अमेरिका के बीच टैरिफ में कटौती और द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों में आई मजबूती का असर केवल पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका विस्तार उच्च तकनीक और डिजिटल अर्थव्यवस्था तक भी देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब वैश्विक स्तर पर व्यापार बाधाएं कम होती हैं और नीतिगत स्थिरता का संकेत मिलता है, तो अंतरराष्ट्रीय टेक कंपनियों के लिए निवेश निर्णय लेना आसान हो जाता है। इसी पृष्ठभूमि में उत्तर प्रदेश की जीसीसी नीति-2024 को नया बल मिलता नजर आ रहा है। नोएडा और लखनऊ में विकसित हो रहा एआई, आईटी और डेटा सेंटर इकोसिस्टम अब अमेरिकी और अन्य वैश्विक टेक कंपनियों के लिए अधिक आकर्षक बनता जा रहा है। टैरिफ कटौती से आईटी हार्डवेयर, सर्वर, नेटवर्किंग उपकरण और सेमीकंडक्टर से जुड़ी आयात लागत में संभावित कमी आने से डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स की आर्थिक संभाव्यता और बेहतर होगी। इससे बड़े पैमाने पर कैपिटल-इंटेंसिव निवेश को गति मिलने की संभावना जताई जा रही है। जानकारों का मानना है कि अनुकूल व्यापार माहौल और मजबूत भारत-अमेरिका तकनीकी सहयोग के चलते नोएडा, ग्रेटर नोएडा और लखनऊ जैसे शहर ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) के नए हब के रूप में उभर सकते हैं। इन केंद्रों के माध्यम से क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, फिनटेक और एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में उच्चस्तरीय कार्य होंगे, जिससे प्रदेश के युवाओं को वैश्विक स्तर के रोजगार के अवसर मिलेंगे।  राज्य सरकार का फोकस डेटा सेंटर, एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी, जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट और स्थिर बिजली आपूर्ति जैसे बुनियादी ढांचे पर है। इन कारकों और टैरिफ कटौती से बने सकारात्मक वैश्विक माहौल के चलते डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर और आईटी सेवाओं में आने वाले वर्षों में हजारों करोड़ रुपये के निवेश की संभावनाएं बन सकती हैं। … Read more

बाढ़/अतिवृष्टि की पूर्व-तैयारी की मुख्यमंत्री ने की समीक्षा, सभी तटबंधों और ड्रेनों की समयबद्ध मरम्मत सुनिश्चित करने का निर्देश

लखनऊ. प्रदेश में संभावित बाढ़ और अतिवृष्टि की चुनौतियों को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को व्यापक तैयारी और प्रभावी समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जितनी बेहतर तैयारी होगी, उतनी ही तेजी और सफलता से चुनौती का समाधान किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने बाढ़/अतिवृष्टि पूर्व प्रबंधन की विस्तृत समीक्षा करते हुए सभी तटबंधों, ड्रेनों और संवेदनशील स्थानों की समयबद्ध मरम्मत, सुदृढ़ीकरण और निगरानी को अनिवार्य बताया। उन्होंने निर्देश दिया कि सतर्कता, समन्वय और तय समयसीमा में काम पूरा करना ही सुरक्षित बाढ़ प्रबंधन की मूल कुंजी है। बैठक में प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन ने बताया कि उत्तर प्रदेश में गंगा, सरयू (घाघरा) राप्ती, रामगंगा, गंडक, यमुना, गोमती और सोन नदी बेसिन के आस-पास के जनपद बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में आते हैं। नदी-पट्टी और वर्षा पैटर्न का विश्लेषण करते हुए इस वर्ष 12 जनपदों में 18 तटबंधों को संवेदनशील चिह्नित किया गया है, जिनकी कुल लंबाई 241.58 किमी है। 11 जनपद के 19 तटबंधों को अति संवेदनशील चिन्हित किया गया है, जिनकी कुल लंबाई 464.92 किमी है। इन सभी स्थानों पर अग्रिम सुरक्षा कार्य प्राथमिकता पर चल रहे हैं। बैठक में बताया गया कि ग्रामीण इलाकों में जल-निकासी को सुचारु रखने के लिए बड़े पैमाने पर ड्रेनों की सफाई और ड्रेजिंग कराई जा रही है। विभाग के अधीन कुल 10,727 ड्रेन हैं, जिनकी संयुक्त लंबाई 60,047 किमी है। कई महत्त्वपूर्ण रूटों की सफाई पूरी हो चुकी है और शेष कार्य तय समय में पूरे किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने यह भी बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अनुमोदित ड्रेजिंग परियोजनाएं जनपदवार लागू की जा रही हैं, जिससे नदी प्रवाह सुधरेगा और तटीय इलाकों में जलभराव कम होगा। इसके साथ ही वर्ष 2026 की संभावित बाढ़ स्थिति को ध्यान में रखते हुए नई सुरक्षा परियोजनाएं भी प्रस्तावित की गई हैं, जिनके परीक्षण और अनुमोदन की प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी तटबंधों और बैराजों पर रियल-टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। उन्होंने ड्रोन-मैपिंग, वाटर लेवल सेंसर और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय को और मजबूत बनाने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां कहीं नदी के मेन स्ट्रीम में सिल्ट की अधिकता हो, नदी उथली हो, वहां ड्रेजिंग को प्राथमिकता दी जाए और नदी को चैनलाइज किया जाए। यदि ड्रेजिंग से समाधान होना संभव न हो, तब ही तटबंध अथवा कटान निरोधी अन्य उपायों को अपनाया जाये। recent visitors 41

सिल्क एक्सपो-2026 के आयोजन से प्रदेश के रेशम उद्योग को मिल रही है राष्ट्रीय स्तर पर पहचान

लखनऊ उत्तर प्रदेश में सिल्क उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आज लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में सिल्क एक्सपो-2026 का शुभारंभ हुआ। एक्सपो का उद्घाटन प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा रेशम उद्योग मंत्री राकेश सचान ने किया। पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री नरेंद्र कश्यप भी इस अवसर पर मौजूद रहे। इस मौके  पर ‘रेशम मित्र-2025’ पत्रिका के विमोचन के साथ ही उद्योग से जुड़े लोगों को सम्मानित भी किया गया। एक्सपो के आयोजन से सिल्क उत्पादकों व उद्यमियों को प्रोत्साहन मिलने के साथ ही प्रदेश में सिल्क उत्पादन तथा इससे जुड़े उद्योगों व व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। मंत्री राकेश सचान ने इस अवसर पर रेशम उत्पादकों व उद्यमियों को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री रेशम विकास योजना के तहत प्रदेश सरकार का लक्ष्य दस वर्षों में लगभग 13,500 उत्पादकों को लाभ पहुंचाना है। योजना के तहत अब तक 1630 लाभार्थियों को 32.49 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता दी जा चुकी है, जिससे उत्पादन में अच्छी वृद्धि हुई है। इसके साथ ही 9,000 एकड़ में शहतूत पौधरोपण का कार्य जारी है, जिससे 360 मीट्रिक टन अतिरिक्त रेशम उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश में रेशम उद्योग उत्पादकों व बुनकरों को नियमित रोजगार के अवसर दे रहा है। मल्टी रीलिंग इकाइयों की स्थापना से प्रसंस्करण की सुविधाएं मजबूत हुई हैं। रेशम मित्र पोर्टल के जरिए ऑनलाइन आवेदन, निगरानी और पारदर्शी क्रियान्वयन भी सुनिश्चित किया जा रहा है। इस अवसर पर उपस्थित पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री नरेंद्र कश्यप ने कहा कि डबल इंजन सरकार के समर्थन से उत्तर प्रदेश में रेशम उद्योग ने अभूतपूर्व प्रगति की है। प्रदेश में रेशम उत्पादन 27 मीट्रिक टन से बढ़कर अब 450-500 मीट्रिक टन तक पहुंच गया है, जो आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के लक्ष्य को मजबूती दे रहा है। साथ ही प्रदेश गरीब और पिछड़े तबके के लोगों को आय और रोजगार के नये अवसर प्रदान कर रहा है।  इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान (आईजीपी) के मरकरी हॉल में आयोजित सिल्क एक्सपो के उद्घाटन अवसर पर प्रदेश के रेशम उद्योग से जुड़े 16 उत्पादकों, बुनकरों, उद्यमियों और अन्य योगदानकर्ताओं को पं. दीन दयाल उपाध्याय रेशम रत्न सम्मान प्रदान किया गया। साथ ही रेशम निदेशालय की विभागीय उपलब्धियों पर आधारित ‘रेशम मित्र-2025’ पत्रिका का विमोचन भी किया गया। सिल्क एक्सपो, 06 फरवरी 2026 तक चलेगा, जहां देशभर के बुनकर और व्यापारी हाथ से बने रेशमी वस्त्र, साड़ियां, दुपट्टे और अन्य उत्पाद लेकर आए हैं। यह आयोजन प्रदेश के रेशम उद्योग को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देने के साथ यूपी को रेशम उत्पादन व निर्यात का केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है। recent visitors 40

कांवड़ यात्रा ऐप बनाया, जिसे साढ़े तीन लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने उपयोग किया

लखनऊ  कभी साइकिल पर अखबार बेचकर घर का खर्च चलाने वाला लड़का आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उत्तर प्रदेश और भारत का नाम रोशन कर रहा है। यूपी के बागपत जनपद के छोटे से गांव ट्यौढी का रहने वाला अमन कुमार संघर्ष, संकल्प और योगी सरकार के सहयोग से ऐसा उदाहरण बन चुका है, जो लाखों युवाओं को प्रेरणा दे रहा है। बचपन में गरीबी और बाल मजदूरी की पीड़ा झेलने वाले अमन कुमार ने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन उनकी पहचान इंटरनेशनल यूथ आइकॉन के रूप में होगी। अमन कहते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार की युवा केंद्रित नीतियों, डिजिटल पहल और जनभागीदारी आधारित योजनाओं ने उनके जैसे युवाओं को न केवल अवसर दिए, बल्कि आगे बढ़ने का भरोसा भी दिया। 12वीं के बाद बढ़ाई सक्रियता अमन कुमार आज यूपी सरकार के युवा कल्याण विभाग से संबद्ध उड़ान यूथ क्लब के अध्यक्ष हैं। खुद अवसरों के अभाव में पले-बढ़े अमन ने ठान लिया कि अब कोई भी होनहार युवा सिर्फ जानकारी न होने की वजह से पीछे नहीं रहेगा। उन्होंने बताया कि इसी सोच से 12वीं के बाद व्हाट्स-ऐप ग्रुप बनाया और उसे विस्तार देकर वेबसाइट प्रोजेक्ट ‘कॉन्टेस्ट 360’ तैयार किया। एक क्लिक पर शिक्षा, स्कॉलरशिप, करियर और सरकारी अवसरों की जानकारी देने वाली इस वेबसाइट को अब तक 84 लाख से अधिक युवा देख चुके हैं। कांवड़ यात्रा से लेकर चुनाव तक डिजिटल समाधान कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सहूलियत के लिए अमन ने वर्ष 2022 में प्रशासन के साथ मिलकर कांवड़ यात्रा ऐप तैयार किया। यात्रा मार्ग, चिकित्सा सहायता, शिविर, आपात संपर्क और प्रशासनिक सहयोग जैसी सुविधाएं एक मंच पर उपलब्ध कराई गईं, जिसे साढ़े तीन लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने उपयोग किया। इसके बाद उन्होंने लोकसभा निर्वाचन में स्वीप बागपत ऐप बनाकर भारत निर्वाचन आयोग की सेवाएं सवा लाख मतदाताओं तक पहुंचाईं। जिलाधिकारी के मार्गदर्शन में सरकारी योजनाओं को जोड़ने का मॉडल बनाया बागपत की जिलाधिकारी अस्मिता लाल के मार्गदर्शन में अमन प्रशासन के कार्यों में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने सूचना विभाग के सहयोग से सूचना सेतु ऐप तैयार कर एक क्लिक पर अधिकारियों और सरकारी योजनाओं से जोड़ने का मॉडल बनाया। यहीं नहीं, बागपत फॉर एनिमल्स ऐप के जरिए पशु कल्याण और ग्राम पंचायत फैजपुर निनाना की वेबसाइट बनाकर डिजिटल पंचायत की दिशा में भी अहम पहल की। अब वह अगले चरण में वेबसाइट और इनोवेशन के जरिए प्रदेशभर के युवाओं को जोड़ने की तैयारी कर रहे हैं। युवाओं को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका अमन के जुनून और नवाचार को राष्ट्रीय पहचान तब मिली, जब यूपी सरकार ने उन्हें स्वामी विवेकानंद यूथ अवॉर्ड से सम्मानित किया। आज अमन कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से जुड़े हैं। वह यूनेस्को ग्लोबल यूथ कम्युनिटी, यूनेस्को इन्क्लूसिव पॉलिसी लैब नेटवर्क, यूनेस्को मीडिया इन्फॉर्मेशन लिटरेसी एलायंस, यूनिसेफ नेशनल यू एंबेसडर, हंड्रेड फाउंडेशन, नेचर पॉजिटिव यूनिवर्सिटीज, क्लाइमेट कार्डिनल्स, यांगो जैसे संस्थानों से जुड़कर युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वर्ष 2026 में आयोजित विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग में अमन को टीम यूपी का ग्रुप कैप्टन बनाया गया, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष राष्ट्रीय मंच पर युवाओं की अगुवाई की। इसके अलावा, नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी के साथ भी काम किया। सम्मान और पहचान अमन कुमार को वर्ष 2025 में देश के स्वयंसेवा क्षेत्र का प्रतिष्ठित आई वॉलंटियर अवॉर्ड मिला। इसके साथ ही यूनिसेफ इंडिया में इंडियाज मोस्ट वैल्यूएबल यू रिपोर्टर अवॉर्ड, यंग ट्रांसफॉर्मर्स अवॉर्ड, शिक्षा रत्न सम्मान सहित कई राष्ट्रीय उपलब्धियां उनके नाम हैं। भारत सरकार के माई भारत संस्थान ने उन्हें यूपी में यूथ मेंटर बनाया है। recent visitors 42

फार्मा दिग्गज एक सुर में बोले- सीएम योगी के नेतृत्व में बदला उत्तर प्रदेश का परिदृश्य

लखनऊ  ‘उत्तर प्रदेश फार्मा कॉन्क्लेव 1.0’ में देश और दुनिया की दिग्गज फार्मा कंपनियों के चेयरमैन व शीर्ष नेतृत्व ने खुलकर राज्य की बदलती तस्वीर, मजबूत शासन व्यवस्था और निवेश के अनुकूल माहौल की सराहना की। कॉन्क्लेव के दौरान उद्योग जगत के दिग्गजों ने एक स्वर में कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने बुनियादी और संरचनात्मक बदलाव किए हैं, जो न केवल राज्य बल्कि पूरे देश को दिशा देने वाले साबित हो रहे हैं। यूपी के वर्तमान व भविष्य का रोडमैप स्पष्ट: अयोध्या रामी रेड्डी राज्यसभा सदस्य एवं रामकी ग्रुप के चेयरमैन अयोध्या रामी रेड्डी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व को देश और समाज के लिए “उत्कृष्ट कमिटमेंट” करार दिया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में जो बुनियादी परिवर्तन देखने को मिले हैं, वे अभूतपूर्व हैं। उत्तर प्रदेश जो है और जो होने जा रहा है, सबका रोडमैप योगी जी ने स्पष्ट कर दिया है। यह न केवल राज्य, बल्कि देश को भी नई दिशा दिखाएगा। उन्होंने अपने चार दशक के अनुभव साझा करते हुए कहा कि पिछले 40 वर्षों में उन्होंने यूपी में ऐसा सकारात्मक माहौल पहले कभी नहीं देखा। उन्होंने यूपी की कानून-व्यवस्था, अकाउंटेबिलिटी और इंटीग्रिटी को दीर्घकालिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि एक अच्छा नेता किस तरह पूरे सिस्टम को बदल सकता है, उत्तर प्रदेश इसका जीवंत उदाहरण है। निवेशकों के लिए सुरक्षित माहौल व पारदर्शी प्रशासन आज यूपी की पहचान है। रेड टेप नहीं, रेड कार्पेट ट्रीटमेंट: जीनल मेहता टोरेंट ग्रुप के वाइस चेयरमैन जीनल मेहता ने कहा कि पिछले 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। हमने यूपी के 20 जिलों में काम किया है, लेकिन कहीं भी लॉ एंड ऑर्डर की समस्या या रेड टेप का सामना नहीं करना पड़ा। यूपी आज निवेशकों को रेड टेप नहीं, रेड कार्पेट ट्रीटमेंट दे रहा है। यह सब योगी जी के नेतृत्व में संभव हुआ है। कभी छोड़ना पड़ा था प्रदेश, अब लौटने का समय: रमेश जुनेजा मैनकाइंड फार्मा के चेयरमैन रमेश जुनेजा ने यूपी के पुराने दौर की कड़वी यादें साझा कीं। उन्होंने कहा कि 1995 में कंपनी शुरू की थी, तब माहौल ठीक नहीं था। 2001 में मेरे भाई का बेटा किडनैप हो गया, जिसके बाद हमने तय किया कि प्रदेश छोड़कर दिल्ली में रहना चाहिए, लेकिन कहते हैं ना कि हर रात के बाद एक अच्छी सुबह होती है, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आने के बाद यूपी में वह सुबह आई है। आज देर रात भी प्रदेश में लोग खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं, यही वजह है कि निवेशक यहां आ रहे हैं और लगातार निवेश कर रहे हैं। उनकी कंपनी उत्तर प्रदेश में हरसंभव सहयोग के लिए तैयार है। मेरा दिल यूपी के लिए धड़कता है और सरकार के प्रोत्साहन के साथ निश्चित रूप से उत्तर प्रदेश में निवेश करने के लिए प्रतिबद्ध हूं। वैश्विक फार्मा लीडर्स की यूपी में रुचि: सतीश रेड्डी डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज के चेयरमैन सतीश रेड्डी ने कहा कि फार्मा सेक्टर में भारत की भूमिका वैश्विक स्तर पर मजबूत हुई है, जिसका उदाहरण कोविड काल में देखने को मिला। भारत ने कोविड के समय लाखों जिंदगियां बचाईं। उत्तर प्रदेश की नीतियां बेहद प्रभावी हैं और हम यहां काम करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।  इन्फ्रास्ट्रक्चर और मैनपावर यूपी की ताकत: पंकज पटेल जाइडस लाइफ साइंसेज के चेयरमैन पद्मभूषण पंकज रमनभाई पटेल ने कहा कि किसी भी इंडस्ट्री को भूमि, बिजली, पानी और प्रशिक्षित मैनपावर की जरूरत होती है और ये सभी संसाधन उत्तर प्रदेश में भरपूर उपलब्ध हैं। यही वजह है कि फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर के लिए यूपी एक आदर्श राज्य के रूप में उभर रहा है। देश का सबसे सुरक्षित स्थान है यूपी: दिलीप सांघवी पद्मश्री से सम्मानित और सन फार्मास्यूटिकल के चेयरमैन दिलीप सांघवी ने कहा कि आज सन फार्मा देश की सबसे बड़ी और दुनिया की चौथी सबसे बड़ी फार्मा कंपनी है। उत्तर प्रदेश ऐसा प्रदेश है, जहां पर हम अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाना चाहते हैं। कुछ वर्षों में यहां पर लॉ एंड ऑर्डर की जो स्थिति में सुधार हुआ है, वो इसे देश का सबसे सुरक्षित स्थान बनाता है। recent visitors 37

सीएम योगी का चेतावनी भरा अंदाज़—‘कानून हाथ में लिया तो जवाब भी उसी अंदाज़ में मिलेगा’

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर अपनी सरकार की नीति को एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है। अपराधियों के खिलाफ पुलिस की मुठभेड़ की कार्रवाइयों पर उठने वाले सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अपराध और अपराधियों के प्रति हमारी 'जीरो टॉलरेंस' की नीति है और इसमें किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि टिप्पणी की जाती है कि पुलिस ने गोली क्यों मारी? सीएम योगी ने पूछा कि पुलिस गोली न मारे तो क्या गोली खाए? कहा कि जो जिस भाषा में समझेगा उसे उसी भाषा में समझाया ही जाएगा। सीएम योगी मंगलवार को लखनऊ में आयोजित पहले फार्मा कान्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। सीएम योगी का यह बयान ऐसे समय आया है जब पिछले ही हफ्ते इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी में हो रहे हाफ एनकाउंटर (पैर में गोली मारने की घटनाओं) पर सवाल उठाते हुए कहा था कि पुलिस के पास दंड देने का हक नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने तय किया है कि कानून सभी के लिए बराबर है। कोई अपना या पराया नहीं है। यदि कोई अपना व्यक्ति भी गलत करेगा तो उस पर वही कठोर कानून लागू होगा जो किसी माफिया पर लागू होता है। उन्होंने कहा कि हमने हमेशा प्रयास किया कि कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर हो, लेकिन अगर सामने वाला अपराधी कानून से भयभीत नहीं है, तो उसे उसी की भाषा में समझाना तात्कालिक परिस्थिति की मांग हो जाती है। पुलिस को पिस्तौल और प्रशिक्षण दिया जाता है सीएम योगी ने कहा कि बहुत बार लोग सवाल उठाते हैं कि पुलिस ने गोली क्यों मार दी। मैं पूछता हूं कि पुलिस गोली न चलाए तो क्या गोली खाए? यह दोनों काम एक साथ नहीं चल सकता। अगर अपराधी को गोली चलाने की स्वतंत्रता है तो पुलिस के पास भी पिस्तौल इसीलिए है कि वह उसका डटकर मुकाबला करे। उन्होंने आगे कहा कि पुलिस का प्रशिक्षण ही इसीलिए होता है कि कोई अपराधी जिस भाषा को समझता है, उसे उसी भाषा में जवाब दे सके। सीएम योगी ने अपनी सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि जब पुलिस ने अपराधियों को उनकी भाषा में समझाना शुरू किया, तभी प्रदेश में बदलाव आया है। पिछले 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश के बड़े-बड़े त्योहार शांति से संपन्न हुए हैं। कहीं कोई अराजकता नहीं है। आज प्रदेश में कहीं दंगा-फसाद, गुंडा टैक्स या अराजकता की बात नहीं होती है। सुरक्षा के इसी माहौल के कारण आज उत्तर प्रदेश देश और दुनिया के लिए निवेश का बेहतरीन गंतव्य (Investment Destination) बन चुका है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार और अपराध के खिलाफ यह लड़ाई बिना किसी भेदभाव के जारी रहेगी। जीरो टॉलरेंस का मतलब यह है कि अगर शासन-प्रशासन से जुड़ा कोई व्यक्ति भी गलत करेगा, तो उसे भी माफिया की तरह ही कानूनी परिणाम भुगतने होंगे। उनके इस बयान को पुलिस बल का मनोबल बढ़ाने और अपराधियों को आखिरी चेतावनी देने के तौर पर देखा जा रहा है।   recent visitors 38